‘अरावली देश की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला’, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दी सफाई, जानिए कोर्ट के फैसले पर क्या बोले

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। अरावली पर्वत श्रृंखला को लेकर देशभर में चल रही चर्चाओं और विवादों के बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह की कोई छूट नहीं दी जा रही है और न ही भविष्य में दी जाएगी। मंत्री ने इसे लेकर फैलाए जा रहे भ्रम और गलत जानकारियों को पूरी तरह खारिज किया।

अरावली देश की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला

भूपेंद्र यादव ने कहा कि अरावली देश की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला है और इसका संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैला रहे हैं। मंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं फैसले का गंभीरता से अध्ययन किया है और यह स्पष्ट है कि अरावली के संरक्षण को और मजबूत किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ग्रीन अरावली परियोजना को विस्तार मिला, वहीं उदयपुर को एक्रेडिट सिटी का दर्जा भी इसी सरकार में मिला।

एनसीआर में माइनिंग पर सख्त रुख

पर्यावरण मंत्री ने बताया कि कोर्ट के फैसले में अरावली के वैज्ञानिक आकलन पर जोर दिया गया है। इसमें एनसीआर क्षेत्र के तहत दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और झज्जर शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनसीआर में माइनिंग को शामिल नहीं किया गया है और वहां खनन की कोई अनुमति नहीं है।

कोर्ट ने बनाई तकनीकी कमेटी

भूपेंद्र यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अरावली हिल्स को लेकर एक तकनीकी कमेटी का गठन किया है। फैसले में 100 मीटर का दायरा पर्वत की चोटी से जमीन के भीतर तक माना गया है, जबकि पूरी अरावली रेंज के लिए 500 मीटर का दायरा तय किया गया है।

उन्होंने बताया कि:
• दिल्ली-एनसीआर में नई माइनिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी
• अरावली को कोर एरिया माना गया है
• यहां 20 वाइल्डलाइफ सेंचुरी, 4 टाइगर रिजर्व और करीब 20% फॉरेस्ट एरिया मौजूद है
• कोर्ट ने अरावली में चल रहे ग्रीन प्रोजेक्ट्स की सराहना भी की है।

पर्यावरण और विकास में संतुलन का दावा

कोर्ट के फैसले पर सरकार का समर्थन जताते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास को रोकना नहीं, बल्कि प्राकृतिक विरासत, पर्यावरण संतुलन और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और वैज्ञानिक मानकों पर आधारित यह परिभाषा अब सभी तरह के भ्रम को खत्म करती है और अवैध खनन व पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर सख्त रोक लगाएगी।

Karan Pandey

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