चेन्नई/नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)
अभिनेता एवं राज्यसभा सदस्य कमल हासन ने रविवार को कहा कि “शिक्षा ही एकमात्र हथियार है, जो तानाशाही और सनातन धर्म की जंजीरों को तोड़ सकती है।” वह चेन्नई में अगरम फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
मक्कल निधि मय्यम (एमएनएम) प्रमुख हासन ने शिक्षा को सामाजिक बदलाव का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा, “जब लोग शिक्षित होंगे तो वे अपने अधिकारों, समानता और स्वतंत्रता के महत्व को समझेंगे और किसी भी प्रकार की दमनकारी व्यवस्था का विरोध करेंगे।”
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब महाराष्ट्र के एक पूर्व मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता जितेंद्र आव्हाड ने हाल ही में जातिगत अत्याचारों के लिए सनातन धर्म को जिम्मेदार ठहराया था। आव्हाड ने कहा था, “सनातन धर्म नाम का कोई धर्म कभी था ही नहीं, हम हिंदू धर्म के अनुयायी हैं।” उन्होंने जातिवाद के खिलाफ आवाज उठाते हुए सनातन धर्म और हिंदू धर्म के बीच अंतर स्पष्ट करने की कोशिश की थी।
कमल हासन के बयान को राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। समर्थकों का मानना है कि यह शिक्षा के महत्व पर जोर देने वाला वक्तव्य है, जबकि विरोधियों का कहना है कि ऐसे बयान धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में कमल हासन ने युवाओं से शिक्षा और जागरूकता को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाने की अपील की, ताकि वे समानता-आधारित समाज के निर्माण में योगदान दे सकें।
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