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डीएम ने उर्वरक वितरण में पारदर्शिता और नियंत्रण हेतु दिए निर्देश

देवरिया (राष्ट्र की परंपरा) जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने जनपद में उर्वरकों की बिक्री एवं वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और नियोजित बनाए रखने हेतु कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि कृषकों को उर्वरकों की आपूर्ति उनकी जोत/कृषि भूमि के अनुसार तथा फसल की संस्तुति के अनुरूप ही सुनिश्चित की जाए। यह कार्य शत-प्रतिशत पीओएस मशीन के माध्यम से ही किया जाए।
उन्होंने निर्देश दिए कि यूरिया और फास्फेटिक उर्वरकों के साथ किसी अन्य उत्पाद की अनुचित टैगिंग, ओवर रेटिंग, कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा अनुदानित उर्वरकों का औद्योगिक इकाइयों में उपयोग जैसे कृत्य हरगिज़ स्वीकार्य नहीं होंगे। साथ ही, अन्तर्राज्यीय तस्करी की आशंका वाले क्षेत्रों में सतत निगरानी, स्थलीय निरीक्षण और भौतिक भंडारण का रैंडम सत्यापन किया जाए।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में कृषकों द्वारा खरीफ फसलों की बुवाई एवं रोपाई का कार्य प्रारंभ हो चुका है। ऐसे में जून-जुलाई माह में नत्रजनिक व फास्फेटिक उर्वरकों की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। इस स्थिति में किसानों को उनकी जोत के अनुसार गुणवत्तायुक्त उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यूरिया, डीएपी, एनपीके कॉम्प्लेक्स और एमओपी की बिक्री केवल निर्धारित दरों पर ही की जाए। किसी भी विक्रेता द्वारा अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक पर बिक्री पाए जाने पर उसके विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि उर्वरकों का वितरण आधार कार्ड के माध्यम से, कृषकों की जोत/खेतौनी की पुष्टि के बाद ही किया जाए। जनपद स्तरीय समिति द्वारा उर्वरकों की आपूर्ति, उपलब्धता व वितरण की साप्ताहिक समीक्षा बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए।
थोक विक्रेताओं को निर्देशित किया गया है कि वे फुटकर विक्रेताओं को किसी भी प्रकार के अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग कर न बेचें। साथ ही, उन विनिर्माता संस्थाओं पर भी कड़ी निगरानी रखी जाए जो यूरिया की आपूर्ति के लिए अन्य कम प्रचलित उत्पादों को क्रय करने हेतु बाध्य करते हैं। ऐसी बाध्यता प्रमाणित होने पर संबंधित संस्थाओं के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रत्येक उर्वरक विक्रेता को स्टॉक पंजिका, विक्रय पंजिका और रसीदें अनिवार्य रूप से संधारित करनी होंगी। डिजिटल स्टॉक रजिस्टर भी तिथिवार प्रारूप में रखना आवश्यक होगा, जिससे उपलब्धता और वितरण का स्पष्ट विवरण हो।
उर्वरकों की बिक्री की सतत निगरानी की जाएगी और बिक्री फसल की संस्तुति के आधार पर ही सुनिश्चित की जाए। एमएफएमएस पोर्टल से टॉप-20 या फ्रिक्वेंट बायर्स की सूची प्राप्त कर संदिग्ध मामलों की जांच हेतु टीम गठित की जाएगी तथा रिपोर्ट भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि कोई उर्वरक विक्रेता, एजेंसी या व्यक्ति जमाखोरी, कालाबाजारी, अधिक मूल्य पर बिक्री, अनुचित टैगिंग, तस्करी अथवा अधोमानक उर्वरकों की बिक्री जैसे अवैध कार्यों में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि उपरोक्त आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।

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