भागलपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) जीवन तलवार की धार पर चलने वाली यात्रा है। इसमें सहजता और सरलता लाना बहुत जरूरी है। जीवन में दिनभर ध्यान करना आवश्यक नहीं। प्रभु नाम का स्मरण करते हुए आने वाली नींद भी साधना है। इंसान द्वारा किए जा रहे कार्य भी साधना है। शांति व्यक्ति के अंदर है, ध्यान के माध्यम से इसे प्राप्त किया जा सकता है।
उक्त बातें भागलपुर के ग्राम बलिया में बुधवार को दिव्य श्रीराम कथा में वृंदावन से आए आचार्य पीयूष मिश्र ने श्रीराम कथा सुनाते हुए कही। उन्होंने कहा कि सरल रहने तक मानव जीवन सम्यक अर्थों में वास्तविक जीवन बना रहता है। यही हमारा जीवन जीना होता है। इससे पृथक होते ही जीवन सिर्फ व्यतीत करने तक सीमित हो जाता है, पद और ज्ञान का दंभ जीवन को जटिलतम बनाता है सहज और सरल जीवन द्वारा प्रयास के बगैर ऊंचाई मिलती है। जीवन की सहजता में जीवन को असाधारणता और अलौकिकता प्राप्त होती है। सरलता ही सत्य है सत्य ही ईश्वर है। सत्य बोलना कठिन नहीं है जो वास्तविकता है, उसे ही कहना है। झूठ जटिलताएं उत्पन्न करता है, जो मानसिक तनाव का कारण बनकर सरलता नष्ट करता है। सरलता के बगैर सत्य की निकटता नहीं मिलती। इस दौरान परमानन्द परमहंस हनुमान कुटी के महंत शत्रुघ्न दास, आचार्य धनंजय तिवारी,सूर्यकांत शुक्ल आदि मौजूद रहे।
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