मुख्यमंत्री की फटकार के बाद बदले जाएंगे भवन के नक्शे

लखनऊ।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) प्रदेश के पुलिस कमिश्नरेट जिलों में अब कमिश्नर साहबान को भी अपना स्थायी दफ्तर मिलने जा रहा है। लंबे समय से जहां-तहां, कभी पुराने एसएसपी कार्यालय तो कभी किराए के भवनों में व्यवस्था चल रही थी, अब पुलिस कमिश्नरों के लिए अलग से आधुनिक और स्थायी बिल्डिंग बनाए जाने की तैयारी है। लेकिन बिल्डिंग के प्रारंभिक डिजाइन को लेकर सूबे के मुखिया ने कड़ा ऐतराज जताया है।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस आवास निगम को इन भवनों के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नक्शे तैयार कर मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुतिकरण दिया। लेकिन जैसे ही नक्शा सामने आया, मुख्यमंत्री नाराज़ हो गए।

गुंबद और पांचवां तल बना विवाद की जड़
मुख्यमंत्री को खासतौर पर दो बातें खटकीं—पहली, इमारत के ऊपरी हिस्से को गुंबदनुमा स्वरूप दिया गया था, जो उन्हें “राजशाही” जैसा प्रतीत हुआ। दूसरी, कमिश्नर के बैठने के लिए पांचवां तल प्रस्तावित किया गया था। इस पर मुख्यमंत्री ने तल्ख लहजे में सवाल उठाया कि अगर कोई पीड़ित या आम जनता अफसर से मिलने आए तो क्या उसे पांचवीं मंजिल तक चढ़ाया जाएगा?

साफ निर्देश: जनता के लिए नीचे बैठें अफसर
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी वरिष्ठ अफसरों के दफ्तर भूतल या पहले तल पर ही बनाए जाएं ताकि जनता की सीधी पहुंच सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा गुंबद जैसे डिज़ाइन को भी तत्काल बदलने का आदेश दिया गया है।

अब डीजीपी को सौंपी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण के बाद पुलिस विभाग के मुखिया (DGP) को खुद पूरे निर्माण की निगरानी और संशोधित डिजाइन पर अमल सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी दी है। सूत्रों का कहना है कि अब नए सिरे से प्लान तैयार किया जा रहा है, जिसमें कार्यात्मकता, जनता की पहुंच और आधुनिकता का संतुलन होगा।

बदलाव की बयार… जमीन से जुड़े अफसर चाहिए
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री अफसरशाही में जनसंपर्क और जवाबदेही को सबसे ऊपर रखना चाहते हैं। पांचवें तल की “ऊंची चाहत” अब धरातल की जिम्मेदारी में बदली जा रही है।