गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) वैश्विक शिक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत कर रहा है। विश्वविद्यालय को विश्वभर से छात्रों का आकर्षण मिल रहा है और यह अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है।
इस वर्ष गोरखपुर विश्वविद्यालय को स्टडी इन इंडिया कार्यक्रम के तहत 11 देशों से कुल 120 अंतरराष्ट्रीय आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें बांग्लादेश, नेपाल, नाइजीरिया, दक्षिण सूडान, यमन, स्वाज़ीलैंड, घाना, अफगानिस्तान, लाइबेरिया, ईस्ट तिमोर और जाम्बिया जैसे देश शामिल हैं।
इन छात्रों ने विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों / विषयों में आवेदन किया है। जिनमें इंजीनियरिंग, कृषि, विज्ञान, वाणिज्य, कला और बीसीए जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा पीएच.डी. कार्यक्रमों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। जिसमें 43 अंतरराष्ट्रीय छात्र पीएच.डी. में प्रवेश ले चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रकोष्ठ ने विभिन्न दूतावासों, उच्चायोगों और वाणिज्य दूतावासों के साथ समन्वय किया है और प्रवेश प्रक्रिया को सुगम और प्रभावी बनाया है।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की वैश्विक प्रतिष्ठा केवल छात्रों की रुचि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग और मूल्यांकनों में भी परिलक्षित हो रही है। विश्वविद्यालय ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग, नेक मान्यता, सिमगा संस्थागत रैंकिंग और नेचर इंडेक्स जैसी प्रतिष्ठित रैंकिंग में अपनी जगह बनाई है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन का कहना है कि विश्वविद्यालय एक समावेशी और वैश्विक दृष्टिकोण वाली विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य एक ऐसे शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है जो सीमाओं से परे हो।
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