डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय और उसके 355 संबद्ध महाविद्यालयों के सत्र 2025–26 के प्रवेश आँकड़े यह साबित करते हैं कि पूर्वांचल, गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर में उच्च शिक्षा अब सामाजिक परिवर्तन की सबसे सशक्त धुरी बन चुकी है। कुल 1,15,562 प्रवेशों में 74,009 छात्राओं की भागीदारी केवल संख्या नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतिबिंब है जिसमें बेटियों की शिक्षा को भविष्य निर्माण का आधार माना जा रहा है।
गोरखपुर जिले में 23,859 छात्राओं का प्रवेश यह दर्शाता है कि शैक्षणिक और प्रशासनिक केंद्र होने के कारण यह जिला छात्राओं के लिए करियर-उन्मुख शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। विश्वविद्यालय परिसर में 4,493 छात्राओं की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि तकनीकी, शोध और उच्चस्तरीय पाठ्यक्रमों में भी बेटियाँ पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।
देवरिया जिले में 25,609 छात्राओं का प्रवेश ग्रामीण समाज में आई सकारात्मक सोच को उजागर करता है। यहाँ बेटियों की पढ़ाई को अब बाधा नहीं, बल्कि परिवार और समाज की प्रगति से जोड़ा जा रहा है। वहीं कुशीनगर जिले में 20,048 छात्राओं का प्रवेश यह संकेत देता है कि सीमावर्ती और ग्रामीण अंचलों में भी शिक्षा को सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के साधन के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।
तीनों जिलों में फैला 355 संबद्ध महाविद्यालयों का नेटवर्क, गोरखपुर में 158, देवरिया में 121 और कुशीनगर में 76 छात्राओं को घर के पास सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करा रहा है। डिजिटल प्रवेश प्रणाली, समयबद्ध परीक्षा एवं परिणाम, महिला प्रकोष्ठ, अनुशासन और NAAC A++ जैसी गुणवत्ता मान्यता ने इस भरोसे को और मजबूत किया है।
पिछले तीन वर्षों में छात्राओं के प्रवेश में निरंतर वृद्धि 2023–24 में 62,840 से बढ़कर 2025–26 में 74,009 तक पहुँचना, यह स्पष्ट करती है कि यह बदलाव स्थायी है। यह केवल विश्वविद्यालय की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल की सामाजिक चेतना का प्रमाण है।
उच्च शिक्षा में आगे बढ़ती पूर्वांचल की बेटियाँ न केवल अपने परिवारों का, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण कर रही हैं। यह नई इबारत आत्मविश्वास, समान अवसर और सशक्त भारत की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
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