कविता की रचना जब कोई कवि
अपनी कल्पना में जाकर करता है,
यदि पाठक रचना में गलती खोजे,
समालोचना उसका हक़ होता है।
बिना गलती के गलती खोजे यह,
बिगड़ी आदत के कारण होता है,
लेकिन ख़ुद जब वह लिखना चाहे,
एक पंक्ति पूरी नहीं लिख पाता है।
निंदा और समालोचना, सोचने
और समझने के दो पहलू होते हैं,
पहला नकारात्मक पहलू होता है,
दूसरा सकारात्मक पहलू होता है।
नकारात्मकता पाठक को स्वयं
कवि, लेखक नहीं बनाने देती है,
सकारात्मक सोच की समालोचना
पाठक को लिखना सिखला देती है।
पाठक भी ऐसे ही कवि व लेखक
बन कर अपनी रचनायें दे पाते हैं,
आदित्य व्यर्थ ग़लतियाँ जो नहीं
खोजे वह रचनात्मक बन जाते हैं।
डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
बरहज(राष्ट्र की परम्परा)प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने22 मई को देवरिया आगमन के दौरान जनपद…
सीडीओ ,वीसी जीडीए व एडीएम सिटी गजेंद्र कुमार रहे सक्रिय गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)संघ लोक सेवा…
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में डीजल और पेट्रोल की उपलब्धता को लेकर फैल रही अफवाहों…
बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)बरहज निवासी वरिष्ठ पत्रकार सौरभ तिवारी को भारत सरकार के प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो…
नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा)ज्यूडिशियल काउंसिल ने पर्यावरण संरक्षण और बढ़ते प्रदूषण पर गंभीर चिंता व्यक्त…
देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)विश्व हिंदू परिषद की इकाई बजरंग दल गोरक्ष प्रांत का शौर्य प्रशिक्षण वर्ग…