सृजनकर्ता की संवेदना सृजन है

सृजनकर्ता की संवेदना सृजन है,
सृजनात्मक प्रक्रिया में संघर्ष है,
दृश्यात्मकता स्पष्ट नहीं होती है,
पर रचनात्मकता स्पष्ट होती है।

लकड़ी में कील ठोक दी जाती है,
जो आसानी से नहीं निकलती है,
निकलती तो छेद हमेशा के लिये
उसी जगह लकड़ी में कर जाती है।

हमारे रिश्ते भी इसी तरह होते हैं,
थोड़ी सी अनबन से टूटने लगते हैं,
टूटकर ज़रूरतवश जुड़ भी जाते हैं,
पर परस्पर एक दरार डाल जाते हैं।

रिश्तों की स्थिरता आपसी प्रेम
और व्यवहार पर निर्भर होती है,
धैर्य व त्याग से निभायी जाती है,
तब अमीर,ग़रीब में दोस्ती होती है।

सोने की चैन और चैन से सोना,
दोनों बातों में अन्तर कितना है,
एक अमीर के गले में लटकती है,
दूसरी ग़रीब को सुख चैन देती है।

सुख चैन का जीवन एक सृजन है,
सृजनात्मकता परस्पर मित्रता है,
आदित्य सृजन एक ओर संघर्ष है,
दूसरी ओर संघर्ष सृजन सफलता है।

कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ

rkpnews@desk

Recent Posts

मिट्टी लदी ट्रॉली बनी मौत का कारण, सड़क हादसे में विवाहिता की दर्दनाक मौत

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सदर कोतवाली क्षेत्र के सवना गांव में शनिवार दोपहर एक दर्दनाक…

1 hour ago

यूपी में सस्ते टेंडर डालने वालों पर शिकंजा, खराब निर्माण पर 2 साल बैन

यूपी पीडब्ल्यूडी में टेंडर प्रक्रिया में बड़ा बदलाव: 15% से ज्यादा कम बोली लगाने वालों…

11 hours ago

गगहा में सड़क हादसा, एक की मौत

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)गगहा थाना क्षेत्र के बड़गो मोड़ के पास गुरुवार को एक दर्दनाक सड़क…

15 hours ago

पेट्रोल-डीजल की किल्लत से बढ़ी किसानों की चिंता, धान की बुआई और सिंचाई पर संकट

सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। सलेमपुर विकास क्षेत्र में लगातार गहराती पेट्रोल और डीजल की किल्लत…

15 hours ago

कोरोना के बाद अब इबोला का डर, WHO अलर्ट से दुनिया में बढ़ी बेचैनी

इबोला का नया वैश्विक खतरा: कोरोना के बाद फिर दहशत की आहट, WHO अलर्ट के…

23 hours ago