दूषित पेयजल बना मौत का कारण, इंदौर में मचा हड़कंप

इंदौर में दूषित पानी से मौत का कहर: 13 की जान गई, सीएम मोहन यादव के आदेश पर नगर निगम के 3 अधिकारी सस्पेंड-बर्खास्त

इंदौर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप ने भयावह रूप ले लिया है। इंदौर दूषित पानी से मौत के इस मामले में अब तक 13 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें एक छह माह का मासूम बच्चा और छह महिलाएं शामिल हैं। घटना के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए कड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर नगर निगम के दो अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जबकि एक प्रभारी सब इंजीनियर को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को “आपात स्थिति जैसी” बताते हुए स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने बुधवार को इंदौर के विभिन्न अस्पतालों का दौरा कर मरीजों से मुलाकात की और उपचार व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसके बाद उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए।

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स्थानीय लोगों का आरोप है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में लंबे समय से दूषित पानी की आपूर्ति हो रही थी, लेकिन शिकायतों के बावजूद समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जलापूर्ति की मुख्य पाइपलाइन में उस स्थान पर लीकेज था, जिसके ऊपर शौचालय बना हुआ था। इसी कारण सीवर का गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया और यह जानलेवा स्थिति पैदा हुई।

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भागीरथपुरा इलाके में लगभग 40 हजार लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें 2,456 लोग उल्टी-दस्त के संदिग्ध मरीज पाए गए। इनमें से 212 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जबकि 50 मरीजों को स्वस्थ होने के बाद छुट्टी दी जा चुकी है। फिलहाल 162 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं और लगभग सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि शुरुआती जांच के आधार पर नगर निगम के एक जोनल अधिकारी और एक सहायक यंत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। वहीं, प्रभारी सब इंजीनियर की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि विस्तृत जांच के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जो पूरे मामले की गहन जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी।

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सीएम मोहन यादव ने यह भी घोषणा की कि नगर निगम में स्टाफ की कमी को जल्द दूर किया जाएगा और पेयजल व सीवर लाइनों की नियमित जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा, ताकि भविष्य में इंदौर दूषित पानी से मौत जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
यह घटना न केवल इंदौर बल्कि पूरे प्रदेश के शहरी प्रशासन के लिए चेतावनी है कि बुनियादी सुविधाओं में लापरवाही सीधे आमजन की जान पर भारी पड़ सकती है। सरकार की सख्त कार्रवाई से उम्मीद की जा रही है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय होगी और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलेगा।

Editor CP pandey

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