बहराइच (राष्ट्र की परम्परा) । शेर ए अवध चहलारी नरेश महाराजा बलभद्र के 184वें जयंती पर सेनानी उत्तराधिकारी तेज बहादुर सिंह उर्फ माशा बाबू निवास पर आओ बलिदानियों से सीखें पर आधारित विचार गोष्ठी कांग्रेस नेता विनय सिंह की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। जिसमें उपस्थित सभी लोगों ने चहलारी नरेश के व्यक्तित्व एवं वीरगाथा पर चर्चा करते हुए उन्हें भावपूर्ण नमन किया। इस अवसर पर सेनानी उत्तराधिकारी माशा बाबू ने कहा कि बलभद्र सिंह का जन्म 10 जून 1840 ई0को चहलारी रियासत में मुरौव्वा कोट में हुआ था। उनके पिता का नाम पाल सिंह तथा छोटे भाई का नाम छत्रपाल सिंह था। सत्रह वर्ष में उनका विवाह हो गया था कांग्रेस नेता विनय सिंह ने कहा कि जब अवध मुक्ति सेना का गठन हुआ था तब चहलारी नरेश को किशोरावस्था में ही बेगम हज़रत महल ने विरजीस कदर से टीका लगवाकर राजतिलक कराया था। मात्र 18 वर्ष 3 दिन की आयु में ही इतना बड़ा सम्मान अवध क्षेत्र के लिये विश्व चर्चा का विषय बना दिया गया था,उन्होंने टिकोरा मोड़ पर चहलारी नरेश की प्रतिमा लगाकर उसे चहलारी नरेश चौराहा के रूप में स्थापित करने की पुरज़ोर मांग की तथा चहलारी रेलवे बनाकर चहलारी नरेश के नाम से रेलवे स्टेशन स्थापित करने की भी मांग दोहराई। संचालक मूलचन्द पासवान ने कहा कि चहलारी नरेश अवध के सूर्य थे जिनके तेजपुंज से न सिर्फ अवध ही बल्कि सम्पूर्ण भारत को चमकता देखा गया। विचार गोष्ठी में इन्द्र कुमार यादव,ध्रुव राज सिंह,रमेश चन्द्र मिश्र,मोलहू राम बौद्ध,नसीम,इदरीसी अमर सिंह वर्मा सहित कई लोगों ने सम्बोधित किया।
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