शिकायकर्ता दीपक मधुकर हांडे की विरुद्ध तानाशाही सहआयुक्त धनाजी हेर्लेकर ने कुर्ला पोलीस ठाणे मे एफआईआर दर्ज कराया !
अजय उपाध्याय की रिपोर्ट
मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)
मानवीय मूलभूत मौलिक अधिकार के तहत शिकायत व आरटीआई का अधिकार तो मिल गया जहा गलत दिखे वहा शिकायत करना कोई गुनाह तो नही है ना किंतु वास्तविकता यह है कि एल विभाग मे मनपा में अवैध निर्माण की शिकायत या सूचना मांगना गले की फांस बनता जा रहा है. इनके उत्पीड़न का मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
शिकायत व आरटीआई का अधिकार कानून के जरिए लोगों को किसी भी सरकारी विभाग से उससे संबंधित क्रियाकलापों के संबंध में अद्यतन शिकायत व जानकारी मांगने का अधिकार तो मिल गया, किंतु इसके साथ-साथ शिकायत व सूचना मांगने वालों को संबंधित अधिकारियों का कोपभाजन भी बनना पड़ रहा है. ऐसा ही एक मामला सामने आया हैं जिसमें कुर्ला एल विभाग मनपा प्रभाग -158 मे मेट्रो जक्शन के नीचे साकीनाका मे एक गोडाऊन मे कुछ महिने पहले आग लग गयी थी जिसमे दो व्यक्ती की मृत्यू हो गई थी प्राप्त सुत्रो के अनुसार पुनः उक्त गोडाऊन का अवैध नवनिर्माण का कार्य धडल्ले से सुरू था जिसकी शिकायत स्थानिक जनसेवक दीपक मधुकर हांडे एल विभाग मनपा सहआयुक्त धनाजी हेर्लेकर से विभागीय मनपा कार्यालय मे करने पहूचे थे जिसका विडिओ सोशल मीडिया प्लॅटफॉर्म पर वायरल हुई थी शिकायतकर्ता दीपक मधुकर हांडे का कहना था कि उक्त अवैध नवनिर्माण को रुकवाया जाए व उचित कारवाई की जाए अगर कारवाई नही हुई तो मैं मनपा कार्यालय गेट के सामने आत्मदहन कर लुंगा। किंतु जब वह मनपा कार्यालय के गेट पर पहूचे तो उनपर सहआयुक्त धनाजी हेर्लेकर के कथन अनुसार सरकारी काम मे बांधा डालने के अनूसार भा.द. वि संहिता अनुसार आईपीसी सेक्शन ,341,353,506,110,111व 112 के विभिन्न धाराओ मे मुकदमा पंजिकृत कर लिया गया
सुत्रो से प्राप्त जानकारी अनुसार जनसेवक दीपक मधुकर हांडे पर संबंधित सहआयुक्त धनाजी हेर्लेकर के स्टेटमेंट के आधार पर मूकदमा पंजिकृत किया गया। स्थानिक जनसेवक दीपक मधुकर हांडे उक्त अवैध निर्माण का भ्रष्टाचार अनियमितता या लापरवाही जैसी करतूत को उजागर करने गए थे जिसके डर व अवैध निर्माण को बचाने के पर्पस से उनपर सहआयुक्त धनाजी हेर्लेकर ने फर्जी मुकदमा दर्ज कराया ।
राष्ट्रीय हिंदी दैनिक राष्ट्र की परम्परा समाचार पत्र महाराष्ट्र सरकार व मुंबई पोलीस आयुक्त से विनंती करता है की उक्त प्रकरण की निष्पक्ष जांचं करते हुए संबंधित दोषी अधिकारियो पर कडक कारवाई की जाए व दुध का दुध व पानी का पानी (सच्चाई )को उजागर की जाए वरना आगे चलकर कोई भी दक्ष नागरिक समाजसेवक व पत्रकार शिकायत व आरटीआई के माध्यम से कारवाई करवाने से डरेगा क्योकी उक्त भ्रष्ट अधिकारियो द्वारा उनको भी कोपभाजन का शिकार बनाया जाएगा।
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