परंपरायें जो रूढ़ियाँ बन चुकी हैं,
उनमें समुचित सुधार आवश्यक है,
मानव जीवन के स्वर्ग नर्क यहीं हैं,
जो आता है निश्चय ही वह जाता है।
मरने के बाद न मरने वाले को,
और न ही जो जीवित हैं उनको,
मृतक की स्थिति पता होती है,
न ही उसकी क्या गति होती है।
परिवर्तन तो संसार का नियम है,
क्योंकि यहाँ कुछ स्थिर नहीं है,
समय, संबंध, प्रेम, घृणा भी हैं,
संसार में सभी बदलते रहते हैं।
परिवर्तन स्वरूप सुधार हो जाये,
परंपराओं में और निखार आ जाये,
संविधान में क़ानूनी गारंटी हो जाये,
सबका साथ और विकास हो जाये।
सबका विश्वास, सबके प्रयास से
इस दुनिया को यदि मिल भी जायेगा,
आदित्य कोई सुनिश्चित कर सकता,
क्या भारत में राम राज्य आ जायेगा।
कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
“सुरों की रानी चली गईं: आशा भोसले के साथ खत्म हुआ एक स्वर्णिम युग” Rkpnews…
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में फार्मर रजिस्ट्री अभियान…
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जन्म जयंती के उपलक्ष में…
गर्दन को झुकाकर मोबाइल में यदिअजनबी रिश्तों से हम जुड़ सकते हैं,हकीकत के रिश्तों में…
खलीलाबाद में साइकिल यात्रा का भव्य स्वागत संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। ‘जल ही…
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के नगर पंचायत मगहर के शासन द्वारा मनोनीत…