परंपरायें जो रूढ़ियाँ बन चुकी हैं,
उनमें समुचित सुधार आवश्यक है,
मानव जीवन के स्वर्ग नर्क यहीं हैं,
जो आता है निश्चय ही वह जाता है।
मरने के बाद न मरने वाले को,
और न ही जो जीवित हैं उनको,
मृतक की स्थिति पता होती है,
न ही उसकी क्या गति होती है।
परिवर्तन तो संसार का नियम है,
क्योंकि यहाँ कुछ स्थिर नहीं है,
समय, संबंध, प्रेम, घृणा भी हैं,
संसार में सभी बदलते रहते हैं।
परिवर्तन स्वरूप सुधार हो जाये,
परंपराओं में और निखार आ जाये,
संविधान में क़ानूनी गारंटी हो जाये,
सबका साथ और विकास हो जाये।
सबका विश्वास, सबके प्रयास से
इस दुनिया को यदि मिल भी जायेगा,
आदित्य कोई सुनिश्चित कर सकता,
क्या भारत में राम राज्य आ जायेगा।
कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
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