शिक्षक आत्महत्या: भुगतान विवाद से उठा प्रशासनिक पारदर्शिता का सवाल

देवरिया में शिक्षक की आत्महत्या: BSA ऑफिस में घूसखोरी का आरोप, सुसाइड नोट में संजीव सिंह का नाम


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)जनपद में एक शिक्षक की आत्महत्या ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देवरिया शिक्षक आत्महत्या, BSA देवरिया घूसखोरी, और सुसाइड नोट आरोप जैसे मुद्दे अब प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन चुके हैं। मृतक शिक्षक कृष्णमोहन सिंह ने अपने सुसाइड नोट में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय के बाबू संजीव सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
इस पूरे मामले में BSA देवरिया घूसखोरी और देवरिया शिक्षक आत्महत्या की गूंज अब लखनऊ तक पहुंच गई है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, देवरिया के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार में वर्ष 2016 में नियुक्त शिक्षक कृष्णमोहन सिंह, अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह वर्ष 2021 में एसटीएफ जांच के बाद बर्खास्त कर दिए गए थे। इसके बाद तीनों शिक्षकों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
बताया जाता है कि हाईकोर्ट से बर्खास्तगी निरस्त होने और भुगतान आदेश के बावजूद विभागीय स्तर पर भुगतान रोक दिया गया। आरोप है कि भुगतान कराने के नाम पर प्रति शिक्षक 15 से 16 लाख रुपये की मांग की गई।
यहां से BSA देवरिया घूसखोरी का आरोप सामने आता है।

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सुसाइड नोट में क्या लिखा?
कृष्णमोहन सिंह ने आत्महत्या से पहले लिखे सुसाइड नोट में आरोप लगाया कि BSA कार्यालय के बाबू संजीव सिंह ने भुगतान जारी कराने के लिए बड़ी रकम की मांग की। उन्होंने लिखा कि वे कर्ज में डूब गए थे और मानसिक तनाव में थे।
सुसाइड नोट में स्पष्ट तौर पर कहा गया कि उनकी मौत के लिए BSA कार्यालय के बाबू संजीव सिंह और संबंधित अधिकारी जिम्मेदार हैं। यह मामला अब सुसाइड नोट आरोप के तहत गंभीर जांच का विषय बन गया है।
परिवार पर आर्थिक संकट
बताया गया कि मृतक शिक्षक ने गहने गिरवी रखे, जमीन रेहन रखी और बैंक से लोन लेकर रकम जुटाई। बावजूद इसके कथित भुगतान प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। लगातार दबाव और अपमान की स्थिति में उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया।
यह देवरिया शिक्षक आत्महत्या का मामला अब पूरे प्रदेश में शिक्षा विभाग की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है।
जांच की मांग तेज
मृतक शिक्षक के परिजनों और स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। आरोप है कि BSA कार्यालय में मिलीभगत से वसूली का नेटवर्क चल रहा था।
प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की जा रही है कि:
पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो।
सुसाइड नोट की फॉरेंसिक जांच हो।
संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर पूछताछ की जाए।
पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और न्याय मिले।
शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल
यह पहला मामला नहीं है जब शिक्षा विभाग में भुगतान और नियुक्ति को लेकर विवाद सामने आया हो। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि BSA देवरिया घूसखोरी जैसे आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इससे विभाग की साख पर स्थायी असर पड़ेगा।
देवरिया शिक्षक आत्महत्या और सुसाइड नोट आरोप अब प्रदेश में प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा बन गए हैं।
आगे क्या?
मामला संवेदनशील है और कानूनी प्रक्रिया जारी है। पुलिस और प्रशासनिक जांच के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट होगी। फिलहाल प्रदेश में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर व्यापक बहस छिड़ गई है। सूत्रों की माने तो यह मामला आत्महत्या होने के कारण प्रदेश स्तरीय हो गया है पर ऐसे सैकड़ों मामलों का राज संजीव सिंह व अन्य चर्चित बाबुओं के पास है जैसे दर्जनो विद्यालय के प्रबन्धकीय स्पष्टता न होने पर बड़ी रकम का भुगतान, अपने सगे संबंधियों की नियुक्ति , स्वय की नियुक्ति में पूरी तरह का फर्जी फ़िक्शन फर्जी तथ्य छुपा कर कराना भी बताया जा रहा है यही नहीं महाजन जूनियर हाई स्कूल में संजीव सिंह की पत्नी अमृता सिंह का भी वेतन बाधित है जिसको शिक्षा निदेशक बेसिक उत्तर प्रदेश लखनऊ ने नियुक्तियों को रद्द कर दिया था अगस्त 2021 में आदि दर्जनों प्रकरण है।

Editor CP pandey

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