चंदेरी : किलों, मंदिरों और साड़ियों की धरती

भोपाल (राष्ट्र की परम्परा की प्रस्तुति )मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में स्थित ऐतिहासिक नगर चंदेरी मालवा और बुंदेलखंड की सीमाओं पर बसा हुआ है। यह नगर अपने भव्य किलों, प्राचीन मंदिरों, जैन तीर्थस्थलों और विश्वप्रसिद्ध चंदेरी साड़ियों के लिए न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी खास पहचान रखता है। यहां इतिहास, संस्कृति और कला का ऐसा संगम दिखाई देता है, जो पर्यटकों को सदियों पुरानी विरासत का अनुभव कराता है।

इतिहास की धरोहर चंदेरी का इतिहास लगभग 11वीं शताब्दी से जुड़ा है। यह नगर प्रतिहार, गुर्जर, दिल्ली सुल्तान, मुग़ल, बुंदेला और मराठा शासकों के अधीन रहा है। स्थापत्य कला में हिंदू, इस्लामी और जैन प्रभावों का अनूठा मिश्रण यहां देखने को मिलता है। प्राचीन समय से यह नगर व्यापारिक मार्ग पर स्थित होने के कारण वस्त्र उद्योग और किलों-इमारतों की समृद्ध परंपरा का केंद्र रहा है।

दर्शनीय स्थल चंदेरी किला : बंदरगढ़ पहाड़ी पर स्थित यह किला 13वीं शताब्दी में बना था। यहां से पूरे नगर का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। किले के भीतर स्थित कौशक महल मुगलकालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।

जौरी की मस्जिद और बड़ी मस्जिद : 15वीं शताब्दी की ये भव्य मस्जिदें आज भी अपने स्थापत्य सौंदर्य से आगंतुकों को आकर्षित करती हैं।

कटी घोड़ी : दो स्तंभों पर खड़ी यह अनोखी संरचना चंदेरी की विशेष पहचान है। इसका आकार घोड़े के कटे हुए हिस्से जैसा प्रतीत होता है।जैन मंदिर और नालगिरी पर्वत : चंदेरी और उसके आसपास कई प्राचीन जैन मंदिर हैं। नालगिरी पर्वत पर भगवान आदिनाथ की विशाल प्रतिमा जैन श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

चंदेरी की साड़ियाँ चंदेरी की सबसे बड़ी पहचान उसकी हथकरघा से बनी पारंपरिक साड़ियाँ हैं। रेशम और सूती धागों से बनी हल्की, चमकदार और नाजुक डिज़ाइन वाली ये साड़ियाँ भारत के साथ-साथ विदेशों में भी लोकप्रिय हैं। आज भी चंदेरी के बुनकर मोहल्लों में पारंपरिक तकनीक से साड़ियों का निर्माण किया जाता है।

कैसे पहुँचे रेल मार्ग : निकटतम रेलवे स्टेशन ललितपुर (36 किमी) और अशोकनगर (38 किमी) है।

हवाई मार्ग : निकटतम हवाई अड्डे ग्वालियर (200 किमी) और भोपाल (215 किमी) हैं।

सड़क मार्ग : चंदेरी झांसी, ललितपुर, शिवपुरी और सागर जैसे प्रमुख नगरों से सड़क द्वारा जुड़ा हुआ है।

ठहरने की व्यवस्था पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने होटल और गेस्ट हाउस की व्यवस्था की है। इसके अलावा निजी होटल और होमस्टे भी यात्रियों के लिए आरामदायक ठहराव का विकल्प प्रदान करते हैं।

यात्रा का सर्वोत्तम समय चंदेरी घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान सर्द मौसम पर्यटकों को विरासत स्थलों और मंदिरों की यात्रा का आनंद और भी बढ़ा देता है।चंदेरी एक ऐसा नगर है, जहां किले, मस्जिदें, मंदिर और साड़ियों का संसार इतिहास और संस्कृति की अनमोल धरोहर को जीवंत करता है। यह स्थान केवल पर्यटन ही नहीं बल्कि भारतीय कला और शिल्पकला का भी प्रतीक है। यदि आप भारत की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक शिल्पकला का अनुभव करना चाहते हैं, तो चंदेरी की यात्रा आपके लिए अविस्मरणीय साबित होगी।

Editor CP pandey

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