Category: लेख

राजनीति में संगठन की आत्मा और राष्ट्रनिष्ठा की दृढ़ आवाज़ हैं अमित शाह

विशेष संपादकीयराष्ट्र के प्रहरी : गृह मंत्री अमित शाह के जन्मदिन पर विशेष आज भारत के गृह मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अमित शाह जी का जन्मदिन…

स्वतंत्रता की दौड़ में खो गए संस्कार: जब चार मीठे बोल ने मां-बाप के अरमानों को जला डाला

✍️ राजकुमार मणि त्रिपाठी आज हम उस मोड़ पर आ खड़े हुए हैं, जहां “स्वतंत्रता” का अर्थ आज़ादी नहीं, बल्कि “बेखौफ स्वार्थ” बन गया है। कभी यही स्वतंत्रता हमें उड़ने…

भाई दूज 2025-दीपावली रूपी माला का पांचवा और अंतिम चमकता मोती ,स्नेह ,सौहार्द और प्रीति का अंतिम दीप

भाई दुज़ पर्व बहन को‘सद्भावना की वाहक’और‘आशीर्वाद की प्रदात्री’ के रूप में देखा जाता है,जो अपने भाई के लिए प्रेम का दीप जलाती है-एडवोकेट किशन गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भाई…

दीवाली मुबारक

“प्यार की जोत से घर- घर है चराग़ाँ वर्ना,एक भी शम्अ न रौशन हो हवा के डर से” शाकिब जलाली दरबार ए मुग़लिया की दीवाली दीवाली का जश्न पौराणिक के…

आस्था का उजाला: छठ पूजा 2025 की पवित्र विधि, व्रत और श्रद्धा का अमर उत्सव

सूर्य उपासना और मातृ श्रद्धा का अनुपम पर्व जो जीवन में प्रकाश भरता हैl भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में कुछ पर्व ऐसे हैं जो केवल पूजा-पाठ तक सीमित…

“धरती की ओर नमन: 21 अक्टूबर को गोवर्धन-अन्नकूट का अनुपम संदेश

गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव,भारतीय संस्कृति की कृषि प्रधानता,पशुधन के प्रति संवेदना और सामूहिकता की भावना का प्रतीक है-एडवोकेट किशन सनमुखदास गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत की सांस्कृतिक परंपराएँ केवल…

दीपों की रोशनी में निहित है मानवता, सौहार्द और नई शुरुआत का संदेश

दीपावली 2025-वैश्विक आलोक का पर्व- अंधकार से प्रकाश, दरिद्रता से समृद्धि और मानवता से एकता की ओर भारत से विश्व तक फैला दीपोत्सव का आलोक—संस्कृति का वैश्विक उत्सव-किसन गोंदिया –…

दीपावली 2025: सुबह से शाम तक पूर्ण पूजा पद्धति

दीपावली (या दिवाली) भारतीय संस्कृति का सबसे प्रमुख और शुभ त्योहार है। यह अंधकार पर प्रकाश की विजय, बुराई पर अच्छाई की जीत, धन और समृद्धि की प्राप्ति का प्रतीक…

धनतेरस से भाई दूज तक: पंचदिवसीय महापर्व — समृद्धि, पवित्रता, भक्ति और प्रेम की सांस्कृतिक सरगम

✍️ सोमनाथ मिश्र की प्रस्तुति भारत की संस्कृति में दीपावली केवल एक दिन का नहीं बल्कि पाँच दिनों तक चलने वाला एक महापर्व है — जो धनतेरस से आरंभ होकर…

धनतेरस 18 अक्टुबर समृद्धि, स्वास्थ्य, आस्था और वैश्विक सांस्कृतिक एकता का प्रतीक पर्व

आधुनिक युग में धनतेरस ने अपने धार्मिक स्वरूप से आगे बढ़कर वैश्विक आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयामों को भी अपने साथ जोड़ा है -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया – वैश्विक…

जातिवादी राजनीति अभिशाप — बिहार के विकास की सबसे बड़ी बाधा

बिहार, जो कभी ज्ञान और संस्कृति का केंद्र माना जाता था, आज भी जातिवादी राजनीति के जाल में उलझा हुआ है। यहाँ की राजनीति लंबे समय से जातिगत समीकरणों पर…

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम: एक युगपुरुष, जिसने भारत को स्वाभिमान और विज्ञान की नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया

भारतीय इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जो समय की सीमाओं को पार कर प्रेरणा के प्रतीक बन जाते हैं। डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का नाम उनमें सर्वोच्च…

स्मरणीय 15 अक्टूबर: साहित्य, धर्म और कला के नायकों की कहानी

🕯️ 15 अक्टूबर: उन महान आत्माओं की याद, जिन्होंने दुनिया पर छोड़ी अमिट छाप 15 अक्टूबर इतिहास के पन्नों में उन महान व्यक्तित्वों के निधन की याद दिलाता है, जिन्होंने…

हँसते रिश्ते व आत्म सुख

खुल कर हँसना, आत्म- सुकून दे,मन में मन हँसना दिल को सुकून दे,प्रेम सदा हँसता मुस्कुराता जीवन दे,प्रेम सुखी जीवन की चाभी होती है। सचेतन मन व सतर्क मस्तिष्क में,ध्यान…

साईं बाबा: श्रद्धा से भक्ति, भक्ति से भगवान तक का दिव्य पथ

(गुरु, भक्त और ईश्वर के अद्वैत स्वरूप की अनूठी कथा) एक युगद्रष्टा संत का ईश्वरीय अवतारभारतभूमि संतों और महापुरुषों की भूमि रही है। इसी पावन धरती पर 19वीं शताब्दी में…