Category: लेख

आलेख

आज की महाभारत दीप्ती डांगे मुंबई रात के दो बजे थे।कमरे में बस लैपटॉप की नीली रोशनी थी और गीता के पन्नों की धीमी सरसराहट।प्रोफेसर आयुष मेहता ने पन्ना पलटा…

चन्द्रशेखर : पैदल यात्रा से प्रधानमंत्री तक का सफर

10 नवम्बर 1990 : जब चन्द्रशेखर बने भारत के प्रधानमंत्री — संघर्ष, समर्पण और राजनीतिक परिवर्तन का प्रतीक दिन 10 नवम्बर 1990 भारतीय राजनीति के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन…

अटल की आवाज़ जिसने दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट किया

🌍 इतिहास के पन्नों में 10 नवंबर : जब अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की आवाज़ को बुलंद किया भारत के इतिहास में 10 नवंबर का…

🚆🚗✈️ “रफ्तार से विकास की ओर – परिवहन दिवस पर याद करें सफर को संवारने वाले कदम”

हर साल परिवहन दिवस (National Transport Day) मनाया जाता है ताकि समाज को यह एहसास दिलाया जा सके कि देश की प्रगति की रफ्तार, सड़कों पर दौड़ते वाहनों, आसमान में…

विज्ञान, संघर्ष और बदलावों का साक्षी दिन”

10 नवंबर का इतिहास भारत और विश्व के इतिहास में 10 नवंबर का दिन कई दृष्टियों से विशेष रहा है। यह वह तारीख है जब विज्ञान ने नई दिशा पाई,…

सरकारी बैंकों की भूमिका और जनता का भरोसा — क्या खतरे में है?

क्या वास्तव में बैंक निजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है?-वित्त मंत्री के बयानों से उत्पन्न हलचल, संकेत और सच्चाई- बैंक राष्ट्रीयकरण से निजीकरण की बहस तक का सटीक विश्लेषण…

वंदे मातरम्: राष्ट्रहित की आध्यात्मिक प्रेरणा

डॉ सत्यवान सौरभ “वंदे मातरम्” भारत के स्वतंत्रता संग्राम का आध्यात्मिक आधार था। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत मातृभूमि को देवी के रूप में पूजने की भावना से ओतप्रोत…

“ईमानदारी की चीख में डूबा भारत: जब रिश्वत व्यवस्था की पहचान बन गई”

भ्रष्टाचार अब अपराध नहीं, एक “रूटीन” बन गया है — जहाँ मेहनत नहीं, जुगाड़ चलता है; और ईमानदारी को बेवकूफी कहा जाने लगा है। देश आज उस मोड़ पर खड़ा…

जब सत्ता के हाथ में हो सारा पावर, तो निष्पक्ष चुनाव कैसे संभव? — बिहार चुनाव इसका उदाहरण

✍️ चंद्रकांत सी. पूजारी, गुजरात बिहार में चल रहे विधानसभा चुनाव इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि जब कोई दल सत्ता में होता है, तो उसके पास संसाधनों और…

पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय: दो भाषाओं के सेतु–शिल्पी, जन–मन के सहज कवि

भारतीय साहित्य के व्यापक विस्तार में पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय का नाम उन रचनाकारों में लिया जाता है, जिन्होंने अपनी काव्य–प्रतिभा को किसी एक भाषा तक सीमित नहीं रहने दिया।…

शिक्षा का नया सवेरा: इक कलम, एक कदम और काँपता हुआ भविष्य

जब पाठ्यपुस्तक सिर्फ ज्ञान नहीं, बल्कि उम्मीद भी दे — स्कूलों, अध्यापकों और समाज के साझा ज़िम्मेदारी का सशक्त पाठ। आज की शिक्षा सिर्फ किताबी तथ्यों का संग्रह नहीं रह…

पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी : राष्ट्रवादी राजनीति के पुरोधा और भारतीय जनचेतना के प्रेरक शिल्पी

जन्मदिन पर विशेष: नवनीत मिश्र भारतीय राजनीति में जब भी वैचारिक दृढ़ता, संगठनात्मक कौशल और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले नेतृत्व की चर्चा होती है, तो लाल कृष्ण आडवाणी का…

इतिहास के आईने में 7 नवंबर – बदलाव, बलिदान और बौद्धिकता का प्रतीक दिवस

महत्वपूर्ण कार्य,जन्म से निधन तक 7 नवंबर का दिन मानव सभ्यता के इतिहास में अनेक ऐतिहासिक घटनाओं, महान व्यक्तित्वों के जन्म तथा प्रेरक जीवन यात्राओं से भरा हुआ है। यह…

क्या “रेवड़ी संस्कृति” अब अमेरिकी लोकतंत्र में भी असर दिखा रही है?

न्यूयॉर्क के मेयर भारतीय मूल के ट्रंप विरोधी ममदानी चुने गए-यह भारत के लिए गर्व है या चुनौती ?या फिर भारतीय राजनीतिक फंडा ‘रेवड़ियां बांटो और राज करो’ का अमेरिकी…

“आख़िरी स्टेशन” – गाँव लौटे रघुवीर की जीवन यात्रा ने बदल दी माधवपुर की तस्वीर

माधवपुर/बिहार (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। यह कहानी है रघुवीर नाम के एक मजदूर की, जो ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव झेलकर अपने गाँव लौट आया। कभी दिल्ली की इमारतों में पसीना बहाने…