भारत भर में प्रयाग महाकुम्भ कासंगम में पवित्र डुबकी लगाने का,त्रिबेणी में पवित्र स्नान करने का,जन सैलाब उमड़ घुमड़ जाने…
बिखर रहे चूल्हे सभी, सिमटे आँगन रोज।नई सदी ये कर रही, जाने कैसी खोज॥ दादा-दादी सब गए, बिखर गया संसार।चाचा,…
धरा पर नीम के वृक्ष काटे जा रहे हैंदिलों में कड़वाहट बढती जा रही है।जीभ स्वाद कड़वा होता जा रहा…
यह संसार मनुष्य की कर्मभूमि व भोगभूमि दोनों है,मनुष्य के कर्मफल का भण्डार अक्षय सुख दुःख में है,उसे भोगने के…
कोई व्यक्ति अपने मस्तिष्क मेंबिल्कुल स्पष्ट विचार रखता है,उसका अचार व्यवहार हमेशा,पूर्ण संतुलित, सकारात्मक होता है। मस्तिष्क का कूड़ेदान सा…
महाभारत हो रहा फिर से अविराम।आओ मेरे कृष्णा, आओ मेरे श्याम॥ शकुनि चालें चल रहा है,पाण्डुपुत्रों को छल रहा है।अधर्म…
हमारे माता-पिता, पति-पत्नी,पुत्र-पुत्री, मित्र, सगे सम्बन्धी,क्या वास्तव में ये जीवनसाथी हैं,नहीं, जीवनसाथी तो शरीर है । शरीर साँसे लेना बंद…
हिसार (राष्ट्र की परम्परा)बस दिल से सच्चा हिंदुस्तानी बन।आये देश के काम वह जवानी बन॥ क्यों जला रहा ख़ुद से…
हीरक जयंती समारोह के अवसर पर अंग्रेजी विभाग में आयोजित हुआ कार्यक्रम गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय…