कविता

अभिमान

ज़िन्दगी का तराना कभी भीअपना स्वरूप बदल देता है,इसलिए हमें किसी तरह काअभिमान शोभा नहीं देता है। जब सफलता बुलंदियों…

1 year ago

सिंह कन्ध जो श्याम सलोने

सिया, राम- लक्ष्मण संग वन मेंचलते थक कर विश्राम कर रहे थे,वटवृक्ष तले शीतल छाया में बैठे,रघुबीर अगले पथ के…

1 year ago

हाथ कंगन को आरसी क्या

हाथ कंगन को आरसी क्या,पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या,सरकार आरक्षण दे या न दे,जातीय वर्गीकरण ख़त्म करे। सत्य साहस यदि…

1 year ago

प्रेम शक्ति व भय शक्ति

शक्ति प्रेम की और भय शक्ति मेंबिलकुल विपरीत स्थिति होतीं हैं,नैतिक बल और अनैतिक बल जैसीदोनो की अनुभूति अलग होती…

1 year ago

महाकुम्भ की भगदड़

भारत भर में प्रयाग महाकुम्भ कासंगम में पवित्र डुबकी लगाने का,त्रिबेणी में पवित्र स्नान करने का,जन सैलाब उमड़ घुमड़ जाने…

1 year ago

सिमटे आँगन रोज

बिखर रहे चूल्हे सभी, सिमटे आँगन रोज।नई सदी ये कर रही, जाने कैसी खोज॥ दादा-दादी सब गए, बिखर गया संसार।चाचा,…

1 year ago

मैंने ऐसा कुछ सीखा

धरा पर नीम के वृक्ष काटे जा रहे हैंदिलों में कड़वाहट बढती जा रही है।जीभ स्वाद कड़वा होता जा रहा…

1 year ago

कर्मफल

यह संसार मनुष्य की कर्मभूमि व भोगभूमि दोनों है,मनुष्य के कर्मफल का भण्डार अक्षय सुख दुःख में है,उसे भोगने के…

1 year ago

लकीर खींची है?

कोई व्यक्ति अपने मस्तिष्क मेंबिल्कुल स्पष्ट विचार रखता है,उसका अचार व्यवहार हमेशा,पूर्ण संतुलित, सकारात्मक होता है। मस्तिष्क का कूड़ेदान सा…

1 year ago

शीलहरण की कहे कथाएँ

महाभारत हो रहा फिर से अविराम।आओ मेरे कृष्णा, आओ मेरे श्याम॥ शकुनि चालें चल रहा है,पाण्डुपुत्रों को छल रहा है।अधर्म…

1 year ago