लखनऊ

फ़िल्मों की संस्कारहीनता

क्या क्या दिखलाया जाता भोलीभाली भारतवर्ष की हमारी जनता को,हिंसा खुलेआम नंगापन, छल कपट,नीचा दिखलाना भाई का भाई को। जो…

2 years ago

दुनिया का दस्तूर

पिता तो साक्षात वट वृक्ष होते हैं,अंदर से नर्म प्रत्यक्ष सख़्त होते हैं,अब जब नहीं हैं वह इस संसार में,बस…

2 years ago

अशोक वाटिका में हनुमान

मेरे राम को भजने वाले,क्यों न सामने आते हो।प्रभू मुद्रिका लाने वाले,तुम छिपके कहाँ बैठे हो।माता मैं बजरंगबली हूँ,प्रभू राम…

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सत्य की राह सुनसान

भाग्य जब चमकता है,तभी तो काम करता है,कर्म पर ही सब निर्भर है,भाग्य भी कर्म पर निर्भर है। वक्त कब…

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पक्ष-विपक्ष दुश्मन बन बैठे

जल में रहकर मगरमच्छ से बैर,उन शैतानों के भी होते हैं दो पैर,बिना किसी प्रतिबंध वे घूम रहे हैं,छोटी बड़ी…

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स्वार्थलिप्त सब

न्यायालय, पुलिस और अस्पताललोकतंत्र में जनता के सेवक होते हैं,यह तथ्य मगर दीगर है कि यही सबधन बल से अधिक…

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अति कोमल रघुबीर सुभाऊ

सत्य, अहिंसा, कोमलता, त्याग,दया इंसान के सद्गुण कहलाते हैं,गीता में वर्णित गुणों में यह सभीमानव के दिव्य गुण माने जाते…

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शांतिप्रियता सुख संतोष देती है

आशा व निराशा दोनों ही की सोचमानव जीवन में कभी न कभी छूटती है,आशा की ज्योति अंधेरी राहों में भीजीवन…

2 years ago

कलियुग में सतयुग लाये कहते हैं

ईश्वर के द्रोही सतयुग से लेकरत्रेता, द्वापर, कलियुग में भी हैं,सत्य-असत्य, अच्छाई-बुराई,पहले भी थीं और आज भी हैं। वाद-विवाद, तर्क-वितर्क…

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अमीरी का दिखावा: ग़रीबी का छलावा

वास्तव में मेहनत करने वाले को,दो जून रोटी मुश्किल से मिलती है,भीख माँगने वालों को तो बेशुमारदौलत बिना मेहनत किए…

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