मईल/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) कंबाइन मशीन द्वारा काटे गए गेहूं की फसल को किसान बंधु ना जलावे यह मानव जीवन के लिए हानिकारक है। और गर्मी में खेत की जुताई करके पानी चला दे तथा आधा केजी प्रति कठ्ठा के हिसाब से यूरिया डाल दें,ताकि गेहूं का अवशेष फसल सड़ कर खाद बन जाएगी या यदि कंपोजर का एक पैकेट 200 लीटर पानी में घोलकर गेहूं के अवशेष डंठल पर स्प्रे कर दें तो अवशेष मिट्टी में मिल जाएगा,जो खेत की उर्वरा शक्ति को बरकरार रखेगा। फसल अवशेष को मैनेज करने के लिए कृषि विभाग से बहुत से उपकरण आते हैं जो प्रबंधन के कार्य आते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गेहूं के अवशेष फसल को जलाए जाने परअर्थ दंड के साथ-साथ मुकदमा किया जा सकता है,अतः कृषक बंधु ऐसा ना करें और न करने दे। प्रदेश सरकार द्वारा ड्रोन के माध्यम से अवशिष्ट जलने वालों की फोटो लिए जा रहे हैं बिना बताए आपके खिलाफ संबंधित थाने में एफ आई आर दर्ज हो जाएगी और आप अर्थ दंड के भागी होंगे।उक्त आशय की जानकारी कृषि विभाग के किसान सहायक सुभाष प्रसाद विश्वकर्मा ने दी।उन्होंने बताया कि पर्यावरण में अवशेष जलाना जीवन के लिए घातक है इससे मानव जीवन ही नहीं वन्य जीवों के साथ-साथ सभी के जीवन के लिए प्राण घातक है।
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