Saturday, July 18, 2026
Home Blog Page 794

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 81वीं जयंती पर राष्ट्र ने दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 81वीं जयंती के अवसर पर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित अनेक राष्ट्रीय नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने राजधानी दिल्ली स्थित राजीव गांधी के स्मारक ‘वीरभूमि’ पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। प्रियंका गांधी अपने परिवार के साथ स्मारक पर पहुंचीं और पुष्पांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए लिखा,
“आज पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा,
“आज सद्भावना दिवस के मौके पर हम राजीव गांधी को याद कर रहे हैं। वह एक ऐसे उत्कृष्ट नेता थे जिन्होंने करोड़ों लोगों में उम्मीद जगाई और भारत को 21वीं सदी में आगे बढ़ाया। उनकी विरासत में देश को मिली अनगिनत उपलब्धियां बड़े परिवर्तनकारी बदलावों का प्रतीक हैं।”

प्रियंका गांधी वाड्रा ने भावुक पोस्ट में लिखा,
“विरासत में आपसे करुणा, प्रेम और देशभक्ति का धर्म मिला। हम दोनों हमेशा के लिए ये धर्म निभाएंगे। न कोई तोड़ पाएगा, न कोई रोक पाएगा, न कभी हमारे कदम लड़खड़ाएंगे।”

ज्ञात हो कि राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था। उन्हें भारत में सूचना-प्रौद्योगिकी और दूरसंचार क्रांति के जनक के रूप में याद किया जाता है। उनके कार्यकाल में पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त बनाने और युवाओं को राजनीति से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई थी।

जाजपुर जिला अस्पताल में लापरवाही का आरोप — गलत इंजेक्शन से मरीज की मौत, परिजनों का हंगामा

जाजपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)ओडिशा के जाजपुर जिला मुख्यालय अस्पताल में मंगलवार को उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब 32 वर्षीय भरत दास की मौत इंजेक्शन लगाए जाने के कुछ ही मिनटों बाद हो गई। मृतक धर्मशाला ब्लॉक का निवासी था।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की एक स्टाफ नर्स ने भरत को गलत इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद उसकी हालत अचानक बिगड़ गई और उसे दौरे आने लगे। कुछ देर में ही उसकी मौत हो गई।

मौत की खबर फैलते ही परिजन और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में अस्पताल के बाहर जुट गए और जवाबदेही तय करने तथा विस्तृत जांच की मांग करने लगे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को मौके पर बुलाया।

फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। परिजन मेडिकल लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं जबकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मौत के कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।

दिल्ली में फिर बम धमकी का हड़कंप, 50 से अधिक स्कूलों को खाली कराया गया

नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) राजधानी दिल्ली में स्कूलों को बम की धमकी मिलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार सुबह फिर से करीब 50 स्कूलों को ईमेल के जरिए धमकी दी गई, जिसके बाद पुलिस, बम निरोधक दस्ते और अन्य आपातकालीन एजेंसियों ने तत्काल तलाशी अभियान शुरू किया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, धमकी पाने वाले संस्थानों में द्वारका स्थित राहुल मॉडल स्कूल, मैक्सफोर्ट स्कूल, मालवीय नगर का सर्वोदय कन्या विद्यालय (एसकेवी), प्रसाद नगर स्थित आंध्रा स्कूल, डीएवी पब्लिक स्कूल, फेथ अकादमी और दून पब्लिक स्कूल शामिल हैं। धमकी भेजने वाले ने खुद को ‘आतंकवादी 111’ बताते हुए 25,000 अमेरिकी डॉलर की मांग रखी थी।

तलाशी अभियान और सुरक्षा

दिल्ली अग्निशमन सेवा के मुताबिक, सबसे पहले सूचना मालवीय नगर स्थित एसकेवी और प्रसाद नगर स्थित आंध्रा स्कूल से मिली। सूचना के बाद पुलिस, अग्निशमनकर्मी और बम निरोधक दस्ते मौके पर पहुँचे। हौज़ रानी स्थित एसकेवी के बाहर सुरक्षा बल और बम निरोधक टीम की मौजूदगी की तस्वीरें सामने आई हैं।

हालिया घटनाओं से जुड़ा मामला

महज दो दिन पहले, 18 अगस्त को दिल्ली के 32 स्कूलों को इसी तरह की बम धमकियाँ मिली थीं। उस समय भी सभी स्कूलों को खाली कराया गया था और बड़े पैमाने पर सुरक्षा जांच की गई थी, हालांकि बाद में सभी धमकियाँ झूठी निकलीं।

जांच जारी

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किन-किन स्कूलों को ईमेल भेजा गया, लेकिन प्राथमिक जानकारी में मालवीय नगर और नजफगढ़ के स्कूल शामिल हैं। सभी संस्थानों की पूरी तरह से तलाशी ली जा रही है और साइबर सेल धमकी भरे ईमेल की जांच में जुटी है।

पुलिस का कहना है कि बच्चों और स्कूल स्टाफ की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की आशंका को गंभीरता से लिया जा रहा है।

बेलगाम ‘बैलवा’ पर बरसे तेजप्रताप, कहा – “संगठन से बाहर किया, जनता के दिल से नहीं”

पटना/मनेर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने एक बार फिर अपने तेवरों से सियासी पारा चढ़ा दिया है। मनेर में समर्थकों के बीच आयोजित सभा में तेजप्रताप ने पार्टी नेतृत्व और अपने विरोधियों पर जमकर निशाना साधा।

तेज प्रताप यादव ने कहा कि उन्हें संगठन से साज़िशन बाहर किया गया है, लेकिन जनता के दिल से कोई उन्हें नहीं निकाल सकता। उन्होंने अपने भाषण में तीखी टिप्पणी करते हुए कहा –
“बैलवा बेलगाम घूम रहा है। उसको आप लोग नाथने का काम कीजिए। जैसे भगवान कृष्ण ने कालिया नाग को नाथा था, उसी तरह मनेर की महान जनता बैलवा को नाथने का काम करेगी। बैलवा ने हमको संगठन से बाहर करवा दिया, लेकिन हमको संगठन से बाहर कर सकते हो, जनता के दिल से नहीं निकाल सकते।”

भाई बीरेंद्र पर सीधा हमला

तेज प्रताप यादव ने इस मौके पर विधायक भाई बीरेंद्र पर भी तीखा प्रहार किया। हाल ही में बीरेंद्र और एक पंचायत सचिव की बातचीत का कथित ऑडियो सामने आया था, जिसमें बीरेंद्र पर SC-ST समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी और धमकी देने के आरोप लगे।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तेज प्रताप यादव ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर सवाल उठाया था –
“क्या राजद अपने विधायक भाई बीरेंद्र पर भी कार्रवाई करेगी, जिन्होंने बाबा साहेब आंबेडकर के आदर्शों के खिलाफ शर्मनाक टिप्पणी की और धमकी दी? मुझे तो जयचंदों की साज़िश के तहत पार्टी से बाहर कर दिया गया। अब देखना है कि बवाल करनेवालों पर भी पार्टी उतनी ही सख्ती दिखाती है या नहीं? संविधान का सम्मान केवल भाषणों में नहीं, आचरण में दिखना चाहिए।”

कार्यकर्ताओं में चर्चा, दोहरे मापदंड पर सवाल

तेज प्रताप यादव के इस बयान ने पार्टी के भीतर हलचल तेज कर दी है। कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है कि कहीं राजद अनुशासनात्मक कार्रवाई में दोहरे मापदंड तो नहीं अपना रही। एक ओर तेज प्रताप पर कठोर कदम उठाए गए, वहीं दूसरे मामलों में चुप्पी पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

भविष्य की सियासत का संकेत

तेज प्रताप ने अपने संबोधन में साफ कर दिया कि चाहे उन्हें संगठन से बाहर किया गया हो, लेकिन जनता से उनका जुड़ाव और संघर्ष जारी रहेगा। मनेर की जनता के साथ सीधा जुड़ाव दिखाकर उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में वे अपनी राजनीतिक राह अलग भी तय कर सकते हैं।

बैंगलोर सिटी यूनिवर्सिटी का नाम बदलेगा, मनमोहन सिंह के नाम पर रखे जाने संबंधी विधेयक पारित

बेंगलुरु(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) कर्नाटक विधानसभा ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए बैंगलोर सिटी यूनिवर्सिटी का नाम पूर्व प्रधानमंत्री और दिवंगत वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. मनमोहन सिंह के नाम पर रखने संबंधी विधेयक पारित कर दिया। सत्ता पक्ष ने इस निर्णय को देश के पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि बताते हुए स्वागत किया, वहीं विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस पर ऐतराज जताया।

विपक्ष के सुझाव विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि किसी मौजूदा विश्वविद्यालय का नाम बदलना सही परंपरा नहीं है। उन्होंने कहा, “यदि वास्तव में डॉ. मनमोहन सिंह को सम्मान देना है तो उनके नाम पर एक नया विश्वविद्यालय स्थापित किया जाना चाहिए, ताकि यह एक स्थायी स्मारक बन सके।”

भाजपा विधायक सुरेश गौड़ा ने इस बहस में भाग लेते हुए कहा कि प्रदेश के अन्य महान व्यक्तित्वों को भी समान महत्व मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की कि तुमकुर विश्वविद्यालय का नाम प्रख्यात संत शिवकुमार स्वामीजी के नाम पर रखा जाए, जिन्हें उनके अनुयायी “नादेदादुवा देवरु” (चलता-फिरता भगवान) के रूप में पूजते थे।

सरकार का रुख सत्ता पक्ष ने कहा कि यह कदम डॉ. मनमोहन सिंह के देश और समाज के प्रति योगदान को मान्यता देने के लिए उठाया गया है। सरकार का तर्क है कि बैंगलोर सिटी यूनिवर्सिटी का नामकरण छात्रों को प्रेरित करेगा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को उजागर करेगा।

विधानसभा में बहस के बाद विधेयक पारित कर दिया गया। अब यह विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद आधिकारिक रूप से बैंगलोर सिटी यूनिवर्सिटी का नया नाम “डॉ. मनमोहन सिंह यूनिवर्सिटी” होगा।

30 दिन तक हिरासत में रहने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व मंत्री पद से हटेंगे

संसद में ऐतिहासिक विधेयक पेश होने जा रहे

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक नैतिकता और सुशासन के मूल्यों को मज़बूती देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को संसद में ऐसे तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनमें प्रावधान है कि यदि कोई प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, किसी राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश का मुख्यमंत्री या मंत्री गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार या हिरासत में रहता है, तो वह 31वें दिन स्वतः पद से हटा दिया जाएगा।

विधेयक के मुख्य बिंदु जिन अपराधों में कम से कम पाँच वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, उनमें आरोपित और लगातार 30 दिन तक जेल में रहने वाले मंत्री को पद छोड़ना होगा।राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर केंद्रीय मंत्रियों को पद से हटाएँगे।राज्यों में मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल मंत्रियों को हटाएँगे।यदि मुख्यमंत्री ऐसा न करें तो संबंधित मंत्री 31वें दिन से स्वतः पदच्युत माने जाएंगे।

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 54 में भी नया खंड (4A) जोड़ा जाएगा, जिसके तहत उपराज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर इसी प्रावधान को लागू करेंगे।

संवैधानिक संशोधन का दायरा संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन का प्रस्ताव।केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों के लिए एक जैसी व्यवस्था लागू होगी।जम्मू-कश्मीर सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रावधान समान रूप से लागू होगा।

विधेयक का उद्देश्य और कारण केंद्र सरकार ने विधेयक के उद्देश्यों में स्पष्ट कहा है कि वर्तमान में संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार किसी मंत्री या प्रधानमंत्री को हटाया जा सके।बयान में कहा गया, “यह अपेक्षित है कि पद पर आसीन मंत्रियों का चरित्र और आचरण किसी भी संदेह की किरण से परे हो।”लगातार हिरासत में रहने वाले मंत्री द्वारा संवैधानिक नैतिकता और सुशासन बाधित हो सकता है।

ऐसे हालात में जनता का अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों पर विश्वास कम होता है।

ऐतिहासिक पहल यह विधेयक जनता के विश्वास की रक्षा और राजनीतिक पदों की गरिमा बनाए रखने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो भारतीय लोकतंत्र में यह एक बड़ी व्यवस्था होगी कि गंभीर आपराधिक आरोपों से घिरे और हिरासत में रहने वाले कोई भी निर्वाचित शासनाध्यक्ष या मंत्री स्वतः ही पद से बाहर हो जाएंगे।

महिला की हत्या व लूट का आरोपी मुठभेड़ में गिरफ्तार

गौतमबुद्ध नगर(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जिले की पुलिस ने बुजुर्ग महिला की हत्या और लूट की वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी को मंगलवार रात मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के पास से लूटा गया मोबाइल फोन, आभूषण और अन्य सामान बरामद किया गया है।

पुलिस उपायुक्त (जोन द्वितीय) शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि घटना तीन अगस्त की है। छपरौला गांव स्थित विद्या वर्ल्ड स्कूल के पास रहने वाली एक बुजुर्ग महिला की गला दबाकर हत्या कर दी गई थी और उसके कुंडल, लौंग व मोबाइल फोन लूट लिए गए थे। मामले की जांच में अलीगढ़ निवासी पप्पू उर्फ पप्पू मिस्त्री (27) का नाम सामने आया।

उन्होंने बताया कि मंगलवार रात बादलपुर थाना क्षेत्र में रेलवे फाटक के पास पुलिस चेकिंग कर रही थी। तभी एक संदिग्ध युवक पैदल आता दिखाई दिया। पुलिस ने रुकने का इशारा किया तो वह भागने लगा। पुलिस टीम ने पीछा कर घेराबंदी की, जिस पर आरोपी ने गोली चला दी।

जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली आरोपी के पैर में लगी और वह घायल हो गया। उसे गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने वारदात की बात स्वीकार कर ली है।

अवस्थी ने कहा कि आरोपी के कब्जे से महिला के गहने और मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। उसके खिलाफ हत्या, लूट और आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है।

ब्लॉक अधिकारियों की लापरवाही से जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र से वंचित ग्रामीण

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के नाथनगर ब्लॉक के ग्राम पंचायत कलान के ग्रामीण लंबे समय से जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। ग्राम पंचायत अधिकारी का पोर्टल आईडी-पासवर्ड सक्रिय न होने के कारण यह समस्या वर्षों से बनी हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रमाणपत्र न बनने की वजह से उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं, पेंशन, बीमा और जमीन-जायदाद से जुड़े कार्यों में बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई लोगों को आवश्यक दस्तावेज़ के लिए अन्य पंचायतों या जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

कलान निवासी एक ग्रामीण ने बताया, “मां के निधन के बाद मृत्यु प्रमाणपत्र न मिलने से लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं मिला।” वहीं, एक महिला ने शिकायत की कि “बेटी का जन्म प्रमाणपत्र अब तक जारी नहीं हुआ, जिससे स्कूल में नामांकन जैसी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।”

ग्राम पंचायत अधिकारी मेघनाथ चौधरी ने स्वीकार किया कि “पोर्टल पर आईडी-पासवर्ड न मिलने के कारण प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया बाधित है।”

ग्रामीणों ने ब्लॉक अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्षों से समस्या बनी है, लेकिन इसे हल कराने की दिशा में न तो गंभीर प्रयास हुए और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई जवाबदेही निभाई।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द तकनीकी खामियों को दूर किया जाए और ब्लॉक स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली की जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए।

शिक्षा व्यवस्था चरमराई, स्थानीय प्रशासन पर उठे सवाल

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिले की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों में न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही मिड-डे मील योजना सही तरीके से संचालित हो रही है। परिणामस्वरूप बच्चों की पढ़ाई और पोषण, दोनों गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, बलिया के कई विद्यालयों में एक ही शिक्षक पूरी जिम्मेदारी संभाल रहा है। पढ़ाई की जगह शिक्षक को अधिकांश समय विभागीय सर्वे, रिकॉर्ड संधारण और मिड-डे मील वितरण जैसे कामों में उलझना पड़ता है। इस वजह से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही।

इधर, मिड-डे मील योजना की स्थिति भी बेहद खराब है। कई विद्यालयों में बच्चों को मानक के विपरीत भोजन दिया जा रहा है। अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि अक्सर भोजन देर से और बेहद घटिया गुणवत्ता का परोसा जाता है। कुछ जगह तो बच्चों को मिड-डे मील के नाम पर सिर्फ नमक-रोटी परोसने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

शिक्षा प्रेमियों का कहना है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी बैठकों और रिपोर्टों में योजनाओं को सफल बताते हैं, जबकि हकीकत इसके ठीक उलट है। शिक्षक की कमी, भ्रष्टाचार और लापरवाही ने शिक्षा व्यवस्था को खोखला कर दिया है।

अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि जिले में तत्काल पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती की जाए और मिड-डे मील योजना की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

डीडीयू में बेहतर प्लेसमेंट के लिए प्रत्येक विभाग में होंगे गाइडेंस और ट्रेनिंग सत्र

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और रोजगारोन्मुखी शिक्षा की दिशा में नई पहल की है। अब विश्वविद्यालय के प्रत्येक विभाग में नियमित रूप से गाइडेंस एवं ट्रेनिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे।
इन सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगार से जुड़ी नवीनतम जानकारियां, साक्षात्कार की तैयारी, बायोडाटा निर्माण, संचार कौशल, समूह चर्चा, समय प्रबंधन और उद्योग जगत की बदलती आवश्यकताओं से अवगत कराया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों एवं संस्थानों की भर्ती प्रक्रिया की जानकारी भी दी जाएगी, ताकि वे प्रतिस्पर्धात्मक माहौल में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन और करियर में सफलता के लिए आवश्यक कौशलों से सशक्त करना है। उनके अनुसार, गाइडेंस एवं ट्रेनिंग सत्र छात्रों के आत्मविश्वास, पेशेवर दक्षता और व्यक्तित्व विकास में अहम भूमिका निभाएंगे। विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ व्यावहारिक एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
गाइडेंस एंड प्लेसमेंट सेल के निदेशक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने बताया कि हाल ही में हुए सफल प्लेसमेंट से विश्वविद्यालय का उत्साह और बढ़ा है। अब इस ऊर्जा को आगे बढ़ाते हुए प्रत्येक विभाग में गाइडेंस और ट्रेनिंग सत्रों के जरिए छात्रों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

“राजनीतिक हिंसा की बढ़ती आहट — दस वर्षों में नेताओं पर बढ़ते हमलों की चिंता”

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर जनसुनवाई में हमला

दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर बुधवार (२० अगस्त २०२५) राष्ट्रीय राजधानी सिविल लाइंस स्थित उनके सरकारी आवास में आयोजित साप्ताहिक ‘जन सुनवाई’ के दौरान हमला हुआ। एक 35 वर्षीय व्यक्ति ने उनके पास आकर काग़ज़ दिखाए और अचानक उनके बाल खींचे और थप्पड़ मारे। हालांकि मुख्यमंत्री को कोई शारीरिक चोट नहीं आई, पर घटना से वे मानसिक रूप से झटके में हैं। आरोपी को पुलिस ने तुरंत गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जांच जारी है। दिल्ली भाजपा नेता वीरेंद्र सचदेवा एवं कांग्रेस नेता देवेंद्र यादव ने दोनों ने इस कृत्य की निंदा की और इसमें महिला सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए गए हैं।

पिछले दस वर्षों (2015–2025) में प्रमुख हमलों का सारांश 2022 अरविंद केजरीवाल के आवास पर हमला दिल्ली CM के घर के गेट पर BJP युवाओं ने तोड़फोड़ की, लाल रंग फेंका; CCTV कैमरा बर्बाद। आठ अभियुक्त गिरफ्तार। मामला अभी न्यायालय में है।
2023 संसद भवन में धुआँ बम विस्फोट लोकसभा सदन में दो घुसपैठियों ने स्मोक कैनिस्टर फेंका—सरकार और सांसदों में हड़कंप। घुसपैठिए पकड़े गए।
2025 (30 जून) असम CM हमलावरता का आरोप असम के CM हिमंता बिस्वा सरकार पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा सार्वजनिक कार्यक्रम में हमला करने का आरोप। विवरण सीमित, जांच जारी।
अन्य घटनाएँ राजनीतिक हिंसा वेस्ट बंगाल के BJP नेता अर्जुन सिंह के घर पर बम फेंके गए, कार को गोलियाँ मारी गईं; साल 2019 तक कई बार उन पर हमला हुआ।
2013 पूर्व नरमाजी नक्सली हमला हालांकि यह घटना दस साल से पूर्व हुई, लेकिन उल्लेखनीय है—2013 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं की गाड़ी पर नक्सलियों ने हमला किया, जिसमें कई नेता मारे गए।

इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि न केवल सीएम या सांसद बल्कि अन्य राजनीतिक हस्तियों तक पर लगातार हमले किए गए—राजनीतिक हिंसा की प्रवृत्ति चिंतनीय रूप से बढ़ी है।

कुछ विवरण उतर प्रदेश से भी है जो राजनीतिक व्यक्तियों के साथ पत्रकार भी शामिल है।

2015 पत्रकार जगेंद्र सिंह की हत्या (फीसिपी वायवी गो)
2015 दादरी lynching (मोहम्मद अखलाक की हत्या)
2018 कासगंज हिंसा (घोषणादायक झड़प, १ हत्या, थाने की भावनाएं)
2021 मेरठ में BDC प्रत्याशी पर हमला
2021 लखीमपुर खीरी हिंसा (किसानों व राजनीतिक चरित्रों की हत्या)
2025 मई पोस्ट-पोल हिंसा: कार्यकर्ताओं की हत्या और हमले
2025 अप्रैल यूपी सीएम को बम धमकी खत
2025 अगस्त स्वामी प्रसाद मौर्य पर हमला

इस पर हम सभी को विचार करना होगा तभी हम आधुनिक भारत की नींव मजबूत कर पाएंगे सुरक्षा व्यवस्था और संवैधानिक ढांचे को मज़बूत करना — राजनीतिक व्यक्तियों और आमजन को सुरक्षित माहौल प्रदान करना। नागरिक जागरूकता और सतर्कता — सभी को मिलकर रुझानों को समझना और लोकतांत्रिक संस्थानों की रक्षा करना चाहिए।राजनीय सौहार्द और संवाद — कट्टरवाद की जगह संवाद, सहिष्णुता और संवेदनशीलता अपनाई जाए।

कानूनी कार्रवाई में पारदर्शिता — आरोपितों को कानून के दायरे में लाना और त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करना जरूरी है।राजनीतिक हिंसा में वृद्धि हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए घातक संकेत है। इन घटनाओं से महिला सुरक्षा, विधायिका एवं कार्यपालिका की सुरक्षा, और आम जन की सुरक्षा पर भी सवाल उठते हैं। यह समय है जब राजनीतिक वर्ग और व्यवस्था को मिलकर ऐसे वातावरण को रोकने और संवैधानिक सौहार्द बनाए रखने का संकल्प लेना चाहिए।

“भिवानी की बेटी मनीषा को मिलेगा न्याय” – सीबीआई को सौंपा जाएगा मामला, जनाक्रोश के आगे झुकी सरकार

भिवानी।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) हरियाणा की 19 वर्षीय शिक्षिका मनीषा की संदिग्ध मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। जनाक्रोश, आंसुओं और इंसाफ की मांगों के बीच अब राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को घोषणा की कि इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाएगी, ताकि हर पहलू की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच हो सके।

मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा –👉 “भिवानी की हमारी बेटी मनीषा और उसके परिवार को न्याय दिलाने के लिए सरकार और पुलिस प्रशासन पूरी गंभीरता और पारदर्शिता से काम कर रहे हैं। परिवार की मांग पर इस मामले को सीबीआई को सौंपा जा रहा है। न्याय अवश्य होगा।”

🌸 कैसे लापता हुई थी मनीषा? 11 अगस्त को मनीषा स्कूल से छुट्टी के बाद एक नर्सिंग कॉलेज में दाखिले के बारे में जानकारी लेने गई थी। लेकिन इसके बाद वह घर नहीं लौटी। परिजनों ने हर जगह तलाश की, पर बेटी का कोई सुराग नहीं मिला। दो दिन बाद, 13 अगस्त को उसका शव भिवानी के एक खेत से बरामद हुआ। मासूम उम्र की इस शिक्षिका की मौत की खबर से न केवल परिवार बल्कि पूरे इलाके में मातम छा गया।

📱 जनाक्रोश और प्रशासन की सख्ती मामले ने तेजी से तूल पकड़ा और भिवानी समेत चरखी दादरी जिले में गुस्सा उबाल मारने लगा। हजारों लोग सड़क पर उतर आए और न्याय की मांग की। हालात बिगड़ते देख सरकार को मंगलवार को 48 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट, बल्क एसएमएस और डोंगल सेवाएं निलंबित करनी पड़ीं। यह आदेश मंगलवार सुबह 11 बजे से लागू हुआ।

💔 ‘हमारी बेटी, हमारा दर्द’ मनीषा की मौत ने हरियाणा में बेटियों की सुरक्षा पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव की गलियों से लेकर सोशल मीडिया तक, हर जगह सिर्फ एक ही मांग गूंज रही है – “मनीषा को इंसाफ दो।”

परिजन लगातार इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे। उनका कहना है कि पुलिस की जांच पर उन्हें भरोसा नहीं है, और असली दोषियों को तभी सजा मिलेगी जब देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी इस मामले की पड़ताल करेगी।

🕯️ न्याय की राह पर एक कदम आगे जनता के आक्रोश और परिवार की पीड़ा के आगे आखिरकार सरकार झुकी। मुख्यमंत्री सैनी ने साफ किया कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। यह घोषणा मनीषा के परिवार और उन सभी लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जिन्होंने इंसाफ की लड़ाई को अपना आंदोलन बना लिया है।


👉 यह कहानी सिर्फ एक बेटी की नहीं है, बल्कि हर उस मां-बाप के दर्द की है जिनकी बेटियां शिक्षा और सपनों की राह पर निकलती हैं। सवाल साफ है – क्या अब बेटियां सुरक्षित लौटेंगी?

बादल फटने से तबाही : मृतकों की संख्या 65 पहुंची, 167 लोग सुरक्षित निकाले गए

सांकेतिक फोटो

जम्मू-कश्मीर (राष्ट्र की परम्परा) किश्तवाड़ जिले के चिशोती गांव में 14 अगस्त को बादल फटने से आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। इस भीषण प्राकृतिक आपदा के छठे दिन मंगलवार को बचावकर्मियों ने दो और शव बरामद किए, जिसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 65 हो गई है। अधिकारियों ने बताया कि इनमें केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के तीन जवान और जम्मू-कश्मीर पुलिस का एक विशेष पुलिस अधिकारी (SPO) भी शामिल हैं।

लगातार जारी है राहत एवं बचाव अभियान

मौसम में सुधार होने के बाद मंगलवार सुबह बचाव दल ने एक क्षतविक्षत शव बरामद किया, जबकि दिन में एक अलग स्थान से एक और शव तथा शरीर के दो अंग मिले।
राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) के पुलिस उपाधीक्षक मसूफ अहमद मिर्जा ने बताया कि बचाव व राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी है। इलाके की गहन जांच के लिए एक विशेष टीम निचले हिस्से की ओर भेजी गई है।

अब तक का आंकड़ा मृतक संख्या : 65 लापता लोग : 39 (संशोधित सूची अनुसार) बचाए गए लोग : 167

मचैल माता मार्ग पर सबसे ज्यादा तबाही किश्तवाड़ का चिशोती गांव, मचैल माता मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर वाहन से पहुंचने योग्य अंतिम गांव है। यहां बादल फटने से अचानक आए सैलाब ने घरों, खेतों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया।

प्रशासन ने कहा है कि राहत व बचाव अभियान में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा रही है और लापता लोगों को खोजने के लिए SDRF, पुलिस व अन्य एजेंसियां पूरी ताकत के साथ जुटी हुई हैं।

सीएम आवास के बाहर युवक ने किया आत्महत्या का प्रयास, पुलिस ने बचाई जान

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मंगलवार को राजधानी लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया।

जानकारी के अनुसार, युवक की पहचान 32 वर्षीय शैलेंद्र यादव के रूप में हुई है, जो मूल रूप से औरैया जिले के निवासी हैं और फिलहाल नोएडा में रहते हैं।

सूत्रों के मुताबिक, शैलेंद्र यादव लंबे समय से प्रॉपर्टी विवाद से जूझ रहे थे। इसी तनाव के चलते वे लखनऊ आए और मुख्यमंत्री आवास के सामने गले में फंदा डालकर पेड़ से लटकने की कोशिश की।

मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने सतर्कता दिखाते हुए शैलेंद्र को तुरंत पकड़ लिया और बड़ी अनहोनी को टाल दिया। इसके बाद उन्हें सुरक्षित हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया।

प्रारंभिक पूछताछ में शैलेंद्र ने स्वीकार किया कि वे संपत्ति विवाद से परेशान होकर यह कदम उठाने को मजबूर हुए। फिलहाल पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।

मुख्य सचिव शशिप्रकाश गोयल स्वास्थ्य कारणों से छुट्टी पर, एपीसी दीपक कुमार को मिला अतिरिक्त प्रभार

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश शासन में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। प्रदेश के मुख्य सचिव शशिप्रकाश गोयल स्वास्थ्य कारणों से छुट्टी पर चले गए हैं। सूत्रों के अनुसार, वे स्वास्थ्यगत समस्याओं के चलते अवकाश पर गए हैं।

सरकार ने उनके छुट्टी पर जाने के दौरान अग्रिम आदेशों तक मुख्य सचिव समेत उनके अधीनस्थ समस्त विभागों का कार्यभार कृषि उत्पादन आयुक्त (APC) दीपक कुमार को सौंप दिया है। अब श्री दीपक कुमार मुख्य सचिव की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी वर्तमान जिम्मेदारी भी निभाएंगे।

प्रशासनिक हलकों में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि मुख्य सचिव राज्य शासन के सबसे बड़े नौकरशाह होते हैं और मुख्यमंत्री के साथ नीति-निर्धारण व फैसलों में सीधा योगदान देते हैं। अब अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे एपीसी दीपक कुमार से शासन-प्रशासन की निरंतरता बनाए रखने की उम्मीद जताई जा रही है।