Friday, July 17, 2026
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फैक्ट्री लगाकर पत्थर के पाउडर से बनाई जा रही थी नकली खाद

जिला कृषि अधिकारी और पुलिस टीम ने मारा छापा,भारी मात्रा में नकली खाद बरामद

शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा ) जिले में फैक्ट्री लगाकर दिन के उजाले में धड़ल्ले से नकली खाद बनाई जा रही थी। नकली खाद की इस फैक्ट्री में पत्थर के पाउडर से नकली खाद बनाकर किसानों को बेची जाती थी। जिला कृषि अधिकारी और पुलिस टीम ने छापा मारकर नकली खाद की फैक्ट्री को सील कर दिया है।
शाहजहांपुर के रोजा थाना क्षेत्र में मोहमदी रोड पर अंकुर वेयर हाउस में संचालित हो रही विभा एग्रो इंडिया नामक फर्म, पत्थर के पाउडर से नकली खाद बना रही थी। पुलिस और कृषि विभाग की टीम ने छापा मारकर फैक्ट्री से बड़ी मात्रा में नकली खाद व पैकिंग सामग्री बरामद की है। टीम ने मौके से एक ट्रक (RJ14 GH 5754) भी पकड़ा है, जिसमें 362 बोरी पत्थर का सफेद पाउडर लदा हुआ था। पत्थर के इसी पाउडर से नकली खाद बनाई जाती थी।
जिला कृषि अधिकारी विकास किशोर को सूचना मिली थी कि अंकुर वेयर हाउस, मोहम्मदी रोड पर एक ट्रक से नकली खाद बनाने का सामान उतारा जा रहा है। तत्काल टीम मौके पर पहुंची तो वहां देखा कि विभा एग्रो इंडिया नामक फर्म द्वारा फैक्ट्री के अंदर नकली खाद बनाई जा रही थी।
कृषि विभाग को छापे में मार्बल (पत्थर)का पाउडर, बोरियां सिलने बाली मशीनें, ब्रांडेड कंपनी की मोहर लगाने बाली मशीन, विभिन्न कंपनियों के खाली रेपर सहित भारी मात्रा में कच्चा माल बरामद हुआ। नकली खाद की इस फैक्ट्री को सील कर दिया है। जब्त किए गए उर्वरक और सामान के नमूने जांच हेतु भेजे गए हैं। छापे के दौरान नायब तहसीलदार निशि सिंह, कृषि विभाग की टीम और पुलिस बल मौजूद रहा।

नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव, स्थिति नियंत्रण में

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के ड्रेनेज खण्ड-2 द्वारा रविवार प्रात: काल जारी दैनिक गेज रिपोर्ट के अनुसार जिले मे घाघरा, राप्ती एवं कुआनो नदियों के विभिन्न गेज स्टेशनों पर जलस्तर में स्थिरता के साथ-साथ कहीं-कहीं घटाव एवं बढ़ाव की स्थिति दर्ज की गई है।
घाघरा नदी के एल्टन ब्रिज गेज पर प्रातः 8 बजे तक 106.150 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया, जहाँ 0.4 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई। अयोध्या गेज पर 92.700 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया, जो 3.0 मि.मी. वर्षा के बावजूद स्थिर रहा।
राप्ती नदी के काकरघाटी गेज पर 128.730 मीटर जलस्तर दर्ज हुआ, जो घटाव की स्थिति में रहा। सिरौली तथा थौर गेज स्टेशनों पर क्रमशः 77.750 मीटर एवं 77.050 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया, जहाँ हल्की बढ़त पाई गई।
कुआनो नदी के चन्द्रदीप घाट गेज पर 86.100 मीटर जलस्तर दर्ज हुआ, जो घटाव दर्शाता है, जबकि मुठलिसपुर गेज पर 75.110 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया, जहाँ 8.2 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई।
ड्रेनेज खण्ड-2 के अधिशासी अभियंता ने बताया कि नदियों के जलस्तर पर सतत निगरानी रखी जा रही है तथा फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

जीएसटी में कमी से महंगाई घटने की उम्मीद, स्थानीय बाजारों में रौनक लौटने के आसार

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लिए गए फैसले के तहत 12 और 28 प्रतिशत वाले जीएसटी स्लैब में कटौती किए जाने की घोषणा ने उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों को राहत पहुंचाई है। इस फैसले से न केवल रोजमर्रा की वस्तुएँ सस्ती होंगी बल्कि जिले के थोक व खुदरा बाजारों में भी नई जान आने की उम्मीद जताई जा रही है।व्यापारियों का कहना है कि लंबे समय से महंगाई और टैक्स दरों के कारण बाजार में मंदी का असर दिख रहा था। जीएसटी स्लैब घटने से अब घरेलू सामान, प्लास्टिक उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक आइटम समेत कई वस्तुओं की कीमतों में गिरावट आएगी।
‌स्थानीय कारोबारी राजकुमार मोदनवाल ने कहा कि महंगाई के बोझ से दबे उपभोक्ता अब राहत महसूस करेंगे। जब रोजमर्रा की चीजें सस्ती होंगी तो बाजार में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ेगी और बिक्री में भी इजाफा होगा। वहीं, राकेश कुमार व्यापार मंडल पदाधिकारी का मानना है कि सरकार का यह कदम व्यापारियों और ग्राहकों के बीच सेतु का काम करेगा। उन्होंने कहा कि टैक्स का बोझ कम होने से आम आदमी की जेब सुरक्षित होगी और बाजारों की रौनक लौटेगी।
अंकित त्रिपाठी कर सलाहकार ने बताया कि 28 प्रतिशत टैक्स स्लैब कई उत्पादों पर अत्यधिक था, जिससे उपभोक्ता हिचकते थे। अब स्लैब घटने से बिक्री बढ़ेगी और सरकार को टैक्स संग्रह में भी फायदा होगा।
सन्तोष तिवारी नामक ग्राहक का कहना है कि यदि घरेलू उपकरण, प्लास्टिक व अन्य उपभोग की चीजें सस्ती होती हैं तो सीधा असर उनके मासिक बजट पर पड़ेगा।
महराजगंज, मिठौरा, निचलौल, फरेंदा और सिसवा बाजार के कारोबारी मान रहे हैं कि अब कारोबार में नई जान आएगी। खासकर त्योहारों के मौसम को देखते हुए यह फैसला जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा।

प्लास्टिक – अमर ज़हर

मनुष्य ने जब आग और पहिए की खोज की, वह सभ्यता की शुरुआत थी। जब उसने विज्ञान से दोस्ती की, उसने चमत्कार रचे। लेकिन इस चमत्कारों की अंधी दौड़ में हमने एक ऐसा आविष्कार कर लिया, जिसने अब जीवन के हर क्षेत्र को जकड़ लिया है और वह है प्लास्टिक। जो दिखने में बेगुनाह लगता है, वह अब इस पृथ्वी पर सबसे खतरनाक ज़हर बन चुका है और सबसे डरावनी बात यह है कि यह ज़हर अमर है।
धरती का हर तत्व प्रकृति के चक्र में प्रवेश कर विलीन हो जाता है। लेकिन प्लास्टिक…? प्लास्टिक सदियों तक जीवित रहता है, न सड़ता है, न गलता है, न मिटता है। एक छोटी सी थैली जो केवल 10 मिनट हमारे हाथों में रहती है, वह 500 साल तक मिट्टी में सड़ने के बजाय वहां ज़हर घोलती रहती है।
आज समुद्र में जितनी मछलियाँ नहीं, उससे अधिक प्लास्टिक है। हर साल 1 करोड़ टन से अधिक प्लास्टिक समुद्रों में डाला जाता है। मछलियाँ इसे खाना समझती हैं, पक्षी अपने बच्चों को प्लास्टिक खिला देते हैं, और अंततः यह ज़हर हमारी थालियों में लौट आता है। क्या हमने कभी सोचा है कि हम अपने ही शरीर को धीरे-धीरे प्लास्टिक खिला रहे हैं? आज शिशुओं के दूध में भी माइक्रोप्लास्टिक पाया जा रहा है। हवा में, पानी में, यहां तक कि मानव शरीर के रक्त में भी प्लास्टिक के अंश मिल चुके हैं।
हमें प्लास्टिक से प्रेम नहीं, आलस्य से प्रेम है। हमें कपड़े का थैला उठाने में शर्म आती है, मिट्टी का कुल्हड़ भारी लगता है, केले के पत्ते पर खाना “पुराना ज़माना” लगता है। लेकिन क्या कभी सोचा है सुविधा के नाम पर हम क्या खो रहे हैं? हम वो ज़हर गले लगा बैठे हैं, जो हमारी नसों में घुलता जा रहा है।
भारत में हर दिन लगभग 26,000 टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से आधा रिसाइक्लिंग तक नहीं पहुंचता। यह न केवल प्राकृतिक संसाधनों का हनन है, बल्कि आर्थिक क्षति भी है लाखों रुपये सफाई, रिसाइकलिंग और स्वास्थ्य समस्याओं में झोंके जा रहे हैं।
नीति निर्माण :– सरकार ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर रोक तो लगाई है, पर पालन का अभाव है।
स्थायी विकल्प :– कपड़े के थैले, बांस के ब्रश, स्टील की बोतलें, मिट्टी के बर्तन।
शिक्षा और जागरूकता :– स्कूलों, मीडिया और पंचायतों तक जागरूकता की क्रांति शुरू करनी होगी।
व्यक्तिगत संकल्प :– हर नागरिक को पूछना होगा – “क्या मैं प्लास्टिक मुक्त जीवन जी सकता हूँ?”
यह सिर्फ एक प्रदूषण की लड़ाई नहीं, यह हमारी आत्मा की लड़ाई है। अगर आज हमने अपने स्वार्थ को त्याग कर धरती का साथ नहीं दिया, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें माफ़ नहीं करेंगी। प्लास्टिक अमर है, लेकिन हमारा भविष्य नहीं। अगर हमने अभी नहीं जागरूकता दिखाई, तो वह दिन दूर नहीं जब प्लास्टिक तो बचा रहेगा, लेकिन हम नहीं।
आइए, आज संकल्प लें- “कम से कम एक प्लास्टिक छोड़ें, और एक पेड़ लगाएं।”
“प्रकृति को धन्यवाद देने का सबसे अच्छा तरीका है, उसे नुकसान पहुँचाना बंद करना।

कमलेश डाभी -पाटन गुजरात

न्याय की देरी व्यवस्था पर सवाल

“सीबीआई जांच भी इंसाफ़ की गारंटी नहीं, सालों से पेंडिंग हैं मामले”

भिवानी की शिक्षिका मनीषा हत्याकांड को सीबीआई जांच के लिए भेजा गया है। लेकिन प्रदेश में पहले से लंबित कई केस यह सवाल खड़े करते हैं कि क्या सीबीआई जांच से न्याय मिलेगा? 1995 की छात्रा हत्या का आरोपी 30 साल से फरार है, 2013 का पूर्व जज द्वारा पत्नी हत्या केस 12 साल से कोर्ट में लंबित है, 2017 का छात्र हत्या और 2022 का सोनाली केस भी अब तक अधर में हैं। न्याय में ऐसी देरी पीड़ित परिवार को तोड़ देती है और समाज के भरोसे को कमजोर करती है। अब ज़रूरत है फास्ट ट्रैक कोर्ट, समयसीमा तय जांच और पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया की।
हरियाणा के भिवानी की शिक्षिका मनीषा की हत्या ने न केवल एक परिवार को तोड़ दिया है, बल्कि समाज को भी झकझोर कर रख दिया है। यह घटना फिर से उस गहरे सवाल को सामने लाती है जो वर्षों से हमारे न्याय तंत्र पर मंडराता आ रहा है—क्या हमारे देश में समय पर न्याय मिल पाना संभव है?
मनीषा का मामला अब सीबीआई के पास भेजने की प्रक्रिया में है। पुलिस ने मुख्यालय को पत्र लिख दिया है और उम्मीद जगाई जा रही है कि सीबीआई जांच से सच्चाई सामने आएगी। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा होगा? क्या यह मान लेना चाहिए कि सीबीआई जांच ही न्याय की गारंटी है? अतीत के कई मामलों को देखें तो जवाब निराशाजनक मिलता है। हरियाणा और आसपास के जिलों के कई ऐसे बड़े केस हैं जिन्हें सालों पहले सीबीआई को सौंपा गया, लेकिन आज भी वे न्याय की मंज़िल तक नहीं पहुंचे। 1995 में 11वीं कक्षा की छात्रा की हत्या हुई थी, आरोपी 30 साल से फरार है। यह केवल पीड़िता के परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरी न्यायिक व्यवस्था पर सवाल है। 2013 में पूर्व जज द्वारा पत्नी की हत्या का मामला पिछले 12 साल से कोर्ट में लंबित है। आरोपी को 2016 में गिरफ्तार किया गया, लेकिन ट्रायल आज भी अधूरा है। 2017 में छात्र की हत्या के मामले में सीबीआई ने स्कूल के ही छात्र को आरोपी बनाया था। आठ साल हो चुके हैं, पर केस का कोई अंतिम नतीजा सामने नहीं आया। 2022 का सोनाली हत्या कांड भी तीन साल बाद अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया कि हत्या क्यों हुई। इसी तरह प्रेम विवाह पर युवक की हत्या का केस 2015 से कोर्ट में चल रहा है और आठ साल बाद भी फैसला नहीं आया।
इन उदाहरणों से साफ है कि सीबीआई को केस सौंप देना न्याय का पर्याय नहीं है। कई बार तो यह केसों को और ज्यादा लंबा कर देता है। न्याय में देरी केवल कानूनी औपचारिकता नहीं है, यह सीधे-सीधे पीड़ित परिवार पर मानसिक, सामाजिक और आर्थिक बोझ डालती है। हर सुनवाई पर परिवार के सदस्य उम्मीद लेकर कोर्ट जाते हैं। उन्हें लगता है कि आज कोई ठोस कदम उठेगा। लेकिन बार-बार अगली तारीख़ मिलती है। यह सिलसिला महीनों नहीं, बल्कि वर्षों तक चलता रहता है। ऐसे में पीड़ित परिवार की हिम्मत टूट जाती है। कई बार गवाह समय के साथ कमजोर हो जाते हैं या डर के कारण पलट जाते हैं। सबूत समय बीतने के साथ कमजोर पड़ जाते हैं। आरोपी खुलेआम समाज में घूमते रहते हैं और पीड़ित परिवार यह सोचता रह जाता है कि कानून आखिर किसके लिए बना है।
देरी की जिम्मेदारी किसकी है? पुलिस की जिम्मेदारी है कि फरार आरोपियों को पकड़कर कोर्ट के सामने पेश करे। लेकिन कई मामलों में आरोपी वर्षों तक फरार रहते हैं और पुलिस केवल बयान देती रह जाती है। सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियां अक्सर केस की जांच लंबी खींच देती हैं। रिपोर्ट्स तैयार करने में वर्षों लग जाते हैं और कभी-कभी राजनीतिक दबाव भी जांच की दिशा बदल देता है। न्यायपालिका में केसों की संख्या इतनी अधिक है कि हर सुनवाई महीनों बाद मिलती है। ट्रायल की प्रक्रिया धीमी है, और फैसला आने में दशकों लग जाते हैं। सरकार की भी जिम्मेदारी है। क्योंकि अगर न्यायिक ढांचे को पर्याप्त संसाधन और आधुनिक तकनीक नहीं दी जाएगी तो देरी होना तय है।
जब अपराधी खुले घूमते हैं और पीड़ित परिवार अदालतों के चक्कर लगाता रहता है, तो समाज का भरोसा कानून से उठने लगता है। लोग धीरे-धीरे यह सोचने लगते हैं कि न्याय मिल ही नहीं सकता। कुछ मामलों में परिवार या समाज खुद बदला लेने की कोशिश करता है। यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है, क्योंकि न्याय व्यवस्था पर से विश्वास उठना, अराजकता की शुरुआत है।
अगर हम वास्तव में यह चाहते हैं कि मनीषा और उसके जैसी बेटियों को न्याय मिले, तो इसके लिए ठोस कदम उठाने होंगे। जघन्य अपराधों के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएं ताकि सुनवाई समयबद्ध हो। सीबीआई जांच के लिए समयसीमा तय की जाए। केस सौंपते समय यह सुनिश्चित हो कि छह महीने या एक साल में रिपोर्ट आनी ही चाहिए। फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए विशेष टास्क फोर्स बनाई जाए। हर छह महीने में पीड़ित परिवार को केस की स्थिति बताई जाए। अदालतों और जांच एजेंसियों में डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम हो ताकि देरी का कारण साफ़ दिखाई दे। गवाह संरक्षण योजना को सख्ती से लागू किया जाए ताकि गवाह डर के कारण पलट न सकें।
मनीषा की हत्या कोई साधारण अपराध नहीं है। यह हमारे समाज की उस विफलता की कहानी है जहां बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं और अगर उनके साथ कुछ हो भी जाए तो न्याय पाने में वर्षों लग जाते हैं। मनीषा का परिवार आज भी उम्मीद लगाए बैठा है। लेकिन उनकी उम्मीद तभी साकार होगी जब यह केस समय पर निपटे। अगर यह भी अन्य मामलों की तरह वर्षों तक खिंच गया, तो समाज का भरोसा और कमजोर होगा।
न्याय में देरी का मतलब है न्याय से इनकार। जब आरोपी सालों तक सज़ा से बच जाते हैं, तो यह संदेश जाता है कि कानून शक्तिशाली के लिए ढीला और कमजोर के लिए सख्त है। मनीषा और उससे पहले की कई बेटियाँ आज भी इंसाफ़ की आस लगाए बैठी हैं। उनकी आंखों से टपकता दर्द हम सबकी सामूहिक नाकामी है। अब समय आ गया है कि सरकार, न्यायपालिका और जांच एजेंसियां मिलकर यह सुनिश्चित करें कि न्याय केवल मिलेगा ही नहीं, बल्कि समय पर मिलेगा।

डॉ सत्यवान सौरभ

कॉमेडी अभिनेता डेविड केचम का 97 वर्ष की आयु में निधन

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) क्लासिक कॉमेडी की दुनिया से जुड़ी एक दुखद खबर सामने आई है। मशहूर अमेरिकी अभिनेता, लेखक और कॉमेडियन डेविड केचम का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। परिवार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उन्होंने 10 अगस्त 2025 को अंतिम सांस ली।

डेविड केचम 1960 के दशक में अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और अनोखी अदायगी के लिए पहचाने गए। मशहूर टीवी शो ‘गेट स्मार्ट’ में एजेंट 13 का उनका किरदार घर-घर लोकप्रिय हुआ। शो में उनका मेलबॉक्स, कूड़ेदान या वॉशिंग मशीन जैसी अजीब जगहों में छुपकर अचानक बाहर निकलने का अंदाज़ दर्शकों के बीच लंबे समय तक चर्चा में रहा।
प्रारंभिक जीवन और टीवी करियर
डेविड केचम का जन्म 4 फरवरी 1928 को अमेरिका के क्विंसी शहर में हुआ था। शुरुआती दिनों में वे एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनना चाहते थे, लेकिन पढ़ाई के दौरान अभिनय की ओर आकर्षित हुए और मनोरंजन जगत का हिस्सा बन गए।
उनका टीवी करियर ‘आई एम डिकेंस, हीज़ फ़ेंस्टर’ जैसे शो से शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने ‘द सिक्स मिलियन डॉलर मैन’, ‘मैश’, ‘पेटिकोट जंक्शन’ और ‘द एंडी ग्रिफ़िथ शो’ जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों के लिए बतौर लेखक भी काम किया।
फ़िल्मी करियर
साल 1979 के बाद केचम ने फिल्मों की ओर रुख किया। उन्होंने ‘लव एट फ़र्स्ट बाइट’, बारबरा स्ट्रीसैंड की कॉमेडी ‘द मेन इवेंट’ और ‘द नॉर्थ एवेन्यू इरेगुलर्स’ जैसी फिल्मों से दर्शकों का दिल जीता। इसके बाद वे ‘यंग डॉक्टर्स इन लव’ और ‘द अदर सिस्टर’ में भी नज़र आए।
कॉमेडी के अलावा उन्होंने ‘लॉन्ग-प्लेइंग टंग ऑफ़ डेव केचम’ नाम से एक एल्बम भी जारी किया, जिसे कॉमेडी प्रेमियों ने खूब सराहा।
परिवार
डेविड केचम के परिवार में उनकी लगभग 70 वर्षों से जीवनसंगिनी, दो बेटियां, तीन पोते-पोतियां और एक परपोता है।

यादें और विरासत
डेविड केचम ने अपने अभिनय और लेखन के जरिए कॉमेडी की दुनिया में एक खास छाप छोड़ी। उनके अनोखे अंदाज़, सहज अभिनय और हास्यपूर्ण लेखन ने उन्हें दर्शकों के दिलों में अमर बना दिया।
आज भी उनकी प्रस्तुतियां कॉमेडी जगत के लिए प्रेरणा हैं और दर्शक उन्हें हमेशा याद करेंगे।

टीवी अभिनेता अर्जुन बिजलानी बिग बॉस 19 में नहीं, नए शो ‘राइज़ एंड फ़ॉल’ में दिखेंगे

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) टीवी जगत के लोकप्रिय अभिनेता अर्जुन बिजलानी इन दिनों सुर्खियों में हैं। हाल ही में उनके एक इंस्टाग्राम पोस्ट ने प्रशंसकों की उत्सुकता बढ़ा दी थी, जिसमें उन्होंने लिखा था कि वे अपने परिवार से दूरी बनाकर एक नया परिवार चुनने जा रहे हैं। इस रहस्यमयी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर अटकलें लगने लगीं कि वे विवादित रियलिटी शो बिग बॉस 19 का हिस्सा बनने जा रहे हैं।

लेकिन ताज़ा रिपोर्ट्स ने इन कयासों पर विराम लगा दिया है। अब साफ हो गया है कि अर्जुन बिजलानी बिग बॉस 19 में नहीं बल्कि एक नए और दिलचस्प रियलिटी शो ‘राइज़ एंड फ़ॉल’ में नज़र आएंगे।

अशनीर ग्रोवर होंगे शो के होस्ट

इस शो की सबसे बड़ी खासियत है कि इसे मशहूर उद्यमी और रियलिटी स्टार अशनीर ग्रोवर होस्ट करेंगे। अशनीर, जो शार्क टैंक इंडिया के जरिए पहले ही दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो चुके हैं, अब इस शो में सिर्फ होस्ट ही नहीं बल्कि प्रतिभागियों के चयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, अशनीर ग्रोवर ने उन प्रतिभागियों को प्राथमिकता दी है जिनका व्यक्तित्व दमदार हो और जिनमें मजबूत रणनीतिक सोच हो। बताया जा रहा है कि उन्होंने कुछ प्रतियोगियों को “उबाऊ” मानते हुए रिजेक्ट भी कर दिया है।

अर्जुन बिजलानी के फैन्स के लिए सरप्राइज

अर्जुन बिजलानी के फैन्स के लिए यह खबर किसी बड़े सरप्राइज से कम नहीं है। जहां वे अब तक बिग बॉस में उनकी एंट्री का इंतजार कर रहे थे, वहीं अब उन्हें एक बिल्कुल नए रियलिटी शो में अपने पसंदीदा स्टार को देखने का मौका मिलेगा।

नया कॉन्सेप्ट, नया अनुभव

‘राइज़ एंड फ़ॉल’ को एक अनोखे और रणनीतिक कॉन्सेप्ट के साथ पेश किया जा रहा है। टीवी जगत और रियलिटी शो की दुनिया में यह शो एक अलग मुकाम हासिल कर सकता है। दर्शकों को अब इंतजार है कि अर्जुन बिजलानी इस शो में किस अंदाज में नज़र आते हैं और उनकी नई जर्नी किस तरह से शुरू होती है।

रिश्तों में लापरवाही महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ सकती है भारी

नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) क्या आपके रिश्ते में प्यार, अपनापन और सपोर्ट की कमी है? क्या आपका पार्टनर आपकी छोटी-छोटी जरूरतों को नजरअंदाज करता है? अक्सर यह बातें मामूली लगती हैं, लेकिन असल में यह महिलाओं के स्वास्थ्य पर साइलेंट अटैक की तरह असर डालती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक रिश्तों में भावनात्मक उपेक्षा और तनाव महिलाओं को कई गंभीर बीमारियों की ओर धकेल सकता है।थायराइड डिसफंक्शन जब पुरुष पार्टनर के साथ पर्याप्त समय नहीं बिताते, भावनात्मक सपोर्ट नहीं देते और घरेलू जिम्मेदारियों में हाथ नहीं बंटाते, तो महिलाओं पर काम और तनाव का बोझ बढ़ जाता है। यह तनाव सीधे तौर पर थायराइड ग्लैंड को प्रभावित करता है। इसके लक्षणों में थकान, बाल झड़ना, मूड स्विंग्स और वजन का असामान्य घटना-बढ़ना शामिल है।पीसीओएस और अनियमित पीरियड्स तनाव और खराब लाइफस्टाइल हार्मोनल असंतुलन की बड़ी वजह है। पुरुषों की अनदेखी के कारण महिलाओं को आराम और सहयोग नहीं मिलता, जिससे तनाव बढ़कर इंसुलिन रेजिस्टेंस और एण्ड्रोजन लेवल बढ़ाता है। परिणामस्वरूप पीसीओएस और अनियमित पीरियड्स की समस्या उत्पन्न होती है।क्रॉनिक फटीग और फाइब्रोमायल्जि घर-परिवार और काम का बोझ अकेले उठाने वाली महिलाओं में लगातार थकान और शरीर दर्द की शिकायत आम हो जाती है। तनाव नींद की कमी और मांसपेशियों में दर्द की वजह बनता है, जिससे क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम और फाइब्रोमायल्जिया जैसी बीमारियां जन्म लेती हैं। बिंज ईटिंग और पेट संबंधी समस्याएं अकेलापन और भावनात्मक उपेक्षा से महिलाएं बिंज ईटिंग का शिकार हो जाती हैं। यह मोटापा, एसिडिटी, कब्ज और आईबीएस (Irritable Bowel Syndrome) जैसी पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बनता है। एंग्जायटी, पैनिक अटैक और हार्मोनल असंतुलन भावनात्मक सहयोग न मिलने से महिलाएं लंबे समय तक तनाव में रहती हैं। इससे कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) का स्तर बढ़ता है, जो मासिक धर्म चक्र को प्रभावित करता है और मूड स्विंग्स का कारण बनता है। कई बार यह स्थिति पैनिक अटैक और डिप्रेशन तक ले जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रिश्तों में आपसी समझ, प्यार और सहयोग बना रहे, तो न केवल रिश्ते मजबूत होते हैं बल्कि महिलाओं का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहता है।

चंदेरी : किलों, मंदिरों और साड़ियों की धरती

भोपाल (राष्ट्र की परम्परा की प्रस्तुति )मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में स्थित ऐतिहासिक नगर चंदेरी मालवा और बुंदेलखंड की सीमाओं पर बसा हुआ है। यह नगर अपने भव्य किलों, प्राचीन मंदिरों, जैन तीर्थस्थलों और विश्वप्रसिद्ध चंदेरी साड़ियों के लिए न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी खास पहचान रखता है। यहां इतिहास, संस्कृति और कला का ऐसा संगम दिखाई देता है, जो पर्यटकों को सदियों पुरानी विरासत का अनुभव कराता है।

इतिहास की धरोहर चंदेरी का इतिहास लगभग 11वीं शताब्दी से जुड़ा है। यह नगर प्रतिहार, गुर्जर, दिल्ली सुल्तान, मुग़ल, बुंदेला और मराठा शासकों के अधीन रहा है। स्थापत्य कला में हिंदू, इस्लामी और जैन प्रभावों का अनूठा मिश्रण यहां देखने को मिलता है। प्राचीन समय से यह नगर व्यापारिक मार्ग पर स्थित होने के कारण वस्त्र उद्योग और किलों-इमारतों की समृद्ध परंपरा का केंद्र रहा है।

दर्शनीय स्थल चंदेरी किला : बंदरगढ़ पहाड़ी पर स्थित यह किला 13वीं शताब्दी में बना था। यहां से पूरे नगर का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। किले के भीतर स्थित कौशक महल मुगलकालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।

जौरी की मस्जिद और बड़ी मस्जिद : 15वीं शताब्दी की ये भव्य मस्जिदें आज भी अपने स्थापत्य सौंदर्य से आगंतुकों को आकर्षित करती हैं।

कटी घोड़ी : दो स्तंभों पर खड़ी यह अनोखी संरचना चंदेरी की विशेष पहचान है। इसका आकार घोड़े के कटे हुए हिस्से जैसा प्रतीत होता है।जैन मंदिर और नालगिरी पर्वत : चंदेरी और उसके आसपास कई प्राचीन जैन मंदिर हैं। नालगिरी पर्वत पर भगवान आदिनाथ की विशाल प्रतिमा जैन श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

चंदेरी की साड़ियाँ चंदेरी की सबसे बड़ी पहचान उसकी हथकरघा से बनी पारंपरिक साड़ियाँ हैं। रेशम और सूती धागों से बनी हल्की, चमकदार और नाजुक डिज़ाइन वाली ये साड़ियाँ भारत के साथ-साथ विदेशों में भी लोकप्रिय हैं। आज भी चंदेरी के बुनकर मोहल्लों में पारंपरिक तकनीक से साड़ियों का निर्माण किया जाता है।

कैसे पहुँचे रेल मार्ग : निकटतम रेलवे स्टेशन ललितपुर (36 किमी) और अशोकनगर (38 किमी) है।

हवाई मार्ग : निकटतम हवाई अड्डे ग्वालियर (200 किमी) और भोपाल (215 किमी) हैं।

सड़क मार्ग : चंदेरी झांसी, ललितपुर, शिवपुरी और सागर जैसे प्रमुख नगरों से सड़क द्वारा जुड़ा हुआ है।

ठहरने की व्यवस्था पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने होटल और गेस्ट हाउस की व्यवस्था की है। इसके अलावा निजी होटल और होमस्टे भी यात्रियों के लिए आरामदायक ठहराव का विकल्प प्रदान करते हैं।

यात्रा का सर्वोत्तम समय चंदेरी घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान सर्द मौसम पर्यटकों को विरासत स्थलों और मंदिरों की यात्रा का आनंद और भी बढ़ा देता है।चंदेरी एक ऐसा नगर है, जहां किले, मस्जिदें, मंदिर और साड़ियों का संसार इतिहास और संस्कृति की अनमोल धरोहर को जीवंत करता है। यह स्थान केवल पर्यटन ही नहीं बल्कि भारतीय कला और शिल्पकला का भी प्रतीक है। यदि आप भारत की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक शिल्पकला का अनुभव करना चाहते हैं, तो चंदेरी की यात्रा आपके लिए अविस्मरणीय साबित होगी।

चाय के साथ बढ़ाइए मज़ा, घर पर बनाइए कुरकुरी मूंगफली मसाला

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।शाम की चाय का स्वाद अगर कुछ चटपटा और कुरकुरा साथ मिल जाए तो उसका मज़ा और भी बढ़ जाता है। ऐसे में मसाला मूंगफली एक बेहतरीन स्नैक साबित हो सकता है। इसे बनाना आसान है, इसमें ज्यादा समय भी नहीं लगता और बच्चे-बड़े सभी को इसका स्वाद लाजवाब लगता है। यही कारण है कि इसे पार्टी, त्योहार या अचानक आए मेहमानों के लिए झटपट तैयार किया जा सकता है।

मसाला मूंगफली बनाने की विधि सबसे पहले कच्ची मूंगफली को धोएं नहीं, बल्कि थोड़ी देर धूप में रख दें।अब इन्हें एक बड़े बाउल में डालकर बेसन, चावल का आटा, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला, चाट मसाला और नमक अच्छी तरह मिला लें। चाहें तो इसमें हरी मिर्च, अदरक और हरा धनिया भी स्वाद के लिए डाल सकते हैं। थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर मसाले को मूंगफली पर अच्छे से कोट करें और मिश्रण को गाढ़ा रखें। कड़ाही में तेल गर्म करें और मूंगफलियों को मध्यम आंच पर कुरकुरा होने तक तल लें।जब ये हल्की गोल्डन ब्राउन हो जाएं, तो इन्हें निकालकर ऊपर से थोड़ा चाट मसाला और नींबू का रस छिड़क दें।

सर्विंग टिप गरमा-गरम मसाला मूंगफली को चाय के साथ परोसें और हर शाम की चाय का मज़ा दोगुना कर लें।

आबकारी विभाग को नहीं मिले 100 बकायेदार, पाँच करोड़ से अधिक की रिकवरी अधर में

लखनऊ(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) शहर में आबकारी विभाग को उस समय बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा जब मादक पदार्थों का कारोबार कर चुके करीब 100 बकायेदार शहर से लापता मिले। विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, इन बकायेदारों पर पाँच करोड़ रुपये से अधिक की राशि बकाया है।

जानकारी के मुताबिक, संबंधित बकायेदारों की वसूली के लिए विभाग द्वारा रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) जारी कर जिम्मेदारी आबकारी विभाग को सौंपी गई थी। इसके बाद अधिकारियों ने शहर के विभिन्न इलाकों में छानबीन की, लेकिन बकायेदारों का कोई पता नहीं चला।

आबकारी विभाग ने पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ज़िला अधिकारी (डीएम) को सौंप दी है। अब डीएम के निर्देश पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई शुरू की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि ये सभी बकायेदार पहले अवैध रूप से मादक पदार्थों का कारोबार कर चुके हैं और अब उन पर भारी भरकम जुर्माना और बकाया राशि वसूली जानी है। लेकिन उनके फरार होने से विभाग की रिकवरी प्रक्रिया अटक गई है।

सूत्रों की मानें तो प्रशासन अब ऐसे बकायेदारों की चल-अचल संपत्ति की कुर्की, गिरफ्तारी वारंट और राजस्व विभाग के जरिए वसूली की प्रक्रिया तेज कर सकता है।

ललितपुर में 1600 करोड़ की चिटफंड ठगी का बड़ा खुलासा, विधायक ने CBI जांच की उठाई मांग

ललितपुर(राष्ट्र की परम्परा) ललितपुर जनपद में चिटफंड कंपनी एलयूसीसी (LUCC) द्वारा की गई करीब 1600 करोड़ रुपये की ठगी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। निवेशकों के खून-पसीने की कमाई हड़पने वाले इस घोटाले पर अब राजनीतिक स्तर पर भी दबाव बढ़ गया है।

स्थानीय विधायक राम रतन कुशवाहा ने इस पूरे मामले की CBI जांच की मांग उठाई है। उन्होंने बताया कि हजारों निवेशकों को कंपनी ने पैसा दोगुना करने का झांसा देकर करोड़ों रुपये जमा करा लिए, लेकिन समय आने पर उन्हें रकम लौटाने के बजाय प्रबंधन फरार हो गया।

विधायक कुशवाहा ने इस प्रकरण को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और लिखित शिकायत सौंपी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ ललितपुर ही नहीं बल्कि प्रदेश और अन्य राज्यों तक फैला वृहद वित्तीय घोटाला है, जिसकी निष्पक्ष जांच केवल केंद्रीय एजेंसी ही कर सकती है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, ललितपुर में इस ठगी से जुड़ी दो दर्जन से अधिक एफआईआर दर्ज की गई हैं। जांच के दौरान अब तक तीन दर्जन से अधिक आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है, जबकि कई मुख्य आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि LUCC कंपनी ने गांव-गांव एजेंटों के जरिए योजनाएं चलाईं और गरीब, मध्यमवर्गीय परिवारों से भारी-भरकम रकम वसूली। ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया था कि उनका पैसा दोगुना होकर निर्धारित समय पर लौटेगा, लेकिन अंत में कंपनी ने लाखों लोगों को धोखा दिया।

विधायक कुशवाहा ने सरकार से ठगी का शिकार हुए निवेशकों को न्याय दिलाने और उनकी मेहनत की कमाई वापस कराने के लिए कठोर कार्रवाई की मांग की है।

मणिपुर में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई, चार उग्रवादी गिरफ्तार

इंफाल (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) मणिपुर में सुरक्षा बलों ने लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान विभिन्न प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से जुड़े चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने रविवार को इसकी पुष्टि की।

पुलिस के अनुसार, शनिवार को इंफाल पूर्व और बिष्णुपुर जिलों में की गई इन कार्रवाइयों में प्रतिबंधित संगठनों कांगलीपाक कम्युनिस्ट पार्टी (एमएफएल), पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए), केसीपी (नोंगड्रेनखोम्बा) और पीआरईपीएके (पीआरओ) से जुड़े उग्रवादी पकड़े गए।

पुलिस ने बताया कि इंफाल पूर्व के खुरई थांगजाम लेइकाई क्षेत्र से कांगलीपाक कम्युनिस्ट पार्टी (एमएफएल) का एक सक्रिय सदस्य गिरफ्तार किया गया। इसी तरह चिंगरेल तेजपुर इलाके से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का एक उग्रवादी पकड़ा गया।

इसके अलावा, बिष्णुपुर जिले के निंगथौखोंग क्षेत्र में छापेमारी कर सुरक्षा बलों ने केसीपी (नोंगड्रेनखोम्बा) से जुड़े एक सदस्य को हिरासत में लिया। वहीं, इंफाल पूर्व के अंगथा गांव से पीआरईपीएके (पीआरओ) का एक सक्रिय सदस्य भी गिरफ्तार किया गया।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार उग्रवादियों से पूछताछ की जा रही है और उनके नेटवर्क व अन्य गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारी ने कहा कि जांच जारी है और आगे भी ऐसी कार्रवाइयाँ जारी रहेंगी।

हरतालिका तीज : अखंड सौभाग्य और मनचाहे वर की प्राप्ति का व्रत

(राष्ट्र की परम्परा के लिए सुधीर तिवारी उर्फ अंतिम बाबा की रिपोर्ट)

हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों की अपनी विशिष्ट महिमा है। इन्हीं में से एक है हरतालिका तीज, जिसे सुहागिन महिलाओं और कुमारी कन्याओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना गया है। इस वर्ष हरतालिका तीज का पर्व 26 अगस्त को मनाया जाएगा। पंडित सुधीर तिवारी उर्फ अंतिम बाबा के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का व्रत किया जाता है।

व्रत की उत्पत्ति और मान्यता मान्यता है कि इस व्रत की शुरुआत स्वयं माता पार्वती ने की थी। भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन कठोर तपस्या और निर्जला व्रत किया था। उनकी इस साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। तभी से यह परंपरा चल पड़ी और इसे अखंड सौभाग्य प्राप्ति का पर्व माना गया।

व्रत की विशेषता हरतालिका तीज का व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है। महिलाएं इस दिन निर्जला और निराहार रहकर 24 घंटे से अधिक समय तक उपवास करती हैं। रातभर जागरण कर भक्ति-गीत गाए जाते हैं और अगले दिन प्रातःकाल स्नान कर विधिपूर्वक गौरी-शंकर की पूजा-अर्चना करने के बाद ही व्रत का समापन होता है।
इस व्रत को सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं, वहीं कुमारी कन्याएं मनचाहा वर पाने की कामना से उपवास रखती हैं।

धार्मिक महत्व भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र का विशेष योग होने से इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का फल अनेक गुना बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत-पूजन करने वाली महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस व्रत को “सौभाग्य का महापर्व” कहा जाता है।

देशभर में उत्सव हरतालिका तीज मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में धूमधाम से मनाई जाती है। दक्षिण भारत के राज्यों—कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में इसे “गौरी हब्बा” के नाम से जाना जाता है। हरियाली तीज और कजरी तीज के बाद यह तीसरा बड़ा तीज पर्व है, जिसकी अपनी विशेष धार्मिक महत्ता है।

पूजन विधि इस दिन महिलाएं सुबह स्नान कर नए वस्त्र धारण करती हैं और श्रृंगार कर देवी पार्वती का स्मरण करती हैं। व्रत के दौरान महिलाएं मिट्टी या बालू से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्तियां बनाकर पूजन करती हैं। पूजा के समय सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व होता है। महिलाएं मंगल गीत गाती हैं और सामूहिक रूप से व्रत कथा का श्रवण करती हैं।
हरतालिका तीज केवल एक व्रत ही नहीं बल्कि आस्था, विश्वास और प्रेम का प्रतीक है। यह पर्व स्त्री की तपस्या, त्याग और समर्पण की परंपरा को दर्शाता है। माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से दांपत्य जीवन में सौहार्द, सुख और समृद्धि बनी रहती है। सुहागिन महिलाओं को जहां अपने पति की लंबी आयु का वरदान मिलता है, वहीं कुमारी कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है। इसीलिए हरतालिका तीज को हिंदू धर्म में अखंड सौभाग्य का व्रत कहा गया है।


नाग देवता और शिव मंदिरों की महिमा : दर्शन से दूर होते हैं दुख और दोष

(राष्ट्र की परम्परा के लिए पंडित जय प्रकाश पाण्डेय की रिपोर्ट)

भारतीय संस्कृति में भगवान शिव और नाग देवता का अटूट संबंध माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के गले में विराजमान नाग वासुकी केवल आभूषण नहीं बल्कि शक्ति, संरक्षण और कल्याण के प्रतीक हैं। यही कारण है कि सावन के पवित्र महीने में भक्त न केवल शिवालयों में पूजा-अर्चना करते हैं बल्कि नाग देवता को दूध चढ़ाकर विशेष अनुष्ठान भी करते हैं।
माना जाता है कि जो भी भक्त भगवान शिव के साथ नाग देवता की आराधना करता है, उसके जीवन के दुख-दर्द दूर होते हैं और कालसर्प सहित अन्य दोषों से मुक्ति मिलती है। भारत में ऐसे कई प्राचीन और शक्तिशाली मंदिर हैं जो नाग देवता को समर्पित हैं और जिनके दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आइए जानते हैं इन प्रमुख मंदिरों के बारे में—
मन्नारसाला श्री नागराजा मंदिर, केरल
केरल के हरिपाड में स्थित यह मंदिर सांपों के राजा को समर्पित है। घने जंगलों के बीच बसा यह मंदिर अपनी अनोखी परंपरा और आस्था के लिए प्रसिद्ध है। यहां 30 हजार से अधिक नाग मूर्तियां स्थापित हैं। विशेष बात यह है कि इस मंदिर की पूजा-अर्चना महिला पुजारी द्वारा की जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि यहां नाग देवता की आराधना करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और परिवार की पीढ़ियां सुरक्षित रहती हैं। सावन के महीने में मंदिर का वातावरण हरियाली और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो जाता है।
कुक्के सुब्रमण्य मंदिर, कर्नाटक
दक्षिण कन्नड़ जिले के वेस्टर्न घाट की पहाड़ियों पर स्थित यह मंदिर भगवान सुब्रमण्य को समर्पित है, जिन्हें नागों का स्वामी कहा जाता है। यहां विशेष रूप से सर्प संस्कार और अश्लेषा बली जैसे अनुष्ठान होते हैं, जिनसे पूर्वजों के श्राप और दोषों से मुक्ति मिलती है।
कुमारधारा नदी और घने जंगलों से घिरा यह स्थल भक्तों को न केवल आध्यात्मिक अनुभव देता है, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा नजारा भी प्रस्तुत करता है।
नागचंद्रेश्वर मंदिर, उज्जैन (मध्यप्रदेश)
महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर पूरे साल बंद रहता है और केवल नाग पंचमी के दिन ही खुलता है।
यहां भगवान शिव, मां पार्वती और उन पर फन फैलाकर बैठे नाग देवता की मूर्ति विराजमान है। सावन में इस मंदिर के दर्शन करना भक्तों के लिए अद्वितीय सौभाग्य माना जाता है।
नाग वासुकी मंदिर, प्रयागराज (उत्तरप्रदेश)
गंगा के तट पर दारागंज क्षेत्र में स्थित नाग वासुकी मंदिर नागों के राजा वासुकी को समर्पित है। कालसर्प दोष से पीड़ित लोग विशेष रूप से यहां आकर पूजा करते हैं।
मंदिर का मुख त्रिवेणी संगम की ओर है, जो इसकी महत्ता को और भी पवित्र बना देता है। सावन और नाग पंचमी पर यहां भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन हेतु पहुंचते हैं।
नाग मंदिर, पटनीटॉप (जम्मू-कश्मीर)
हरी-भरी पहाड़ियों और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित यह नाग मंदिर लगभग 600 साल पुराना है। यह मंदिर अपनी शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है।
सावन और नाग पंचमी के अवसर पर यहां विशेष पूजा और मंत्रोच्चार होते हैं, जिनसे वातावरण अत्यंत पावन और दिव्य हो जाता है।

नाग देवता की पूजा भगवान शिव की आराधना का अभिन्न हिस्सा है। भारत के ये प्राचीन मंदिर केवल आस्था के प्रतीक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक धरोहर भी हैं। यहां दर्शन करने से न केवल जीवन के कष्ट और दोष दूर होते हैं बल्कि श्रद्धालुओं को अद्भुत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा भी प्राप्त होती है।