Wednesday, July 15, 2026
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क्या यही चुनाव आयोग का काम है?

बेशक, यह कहना तो शायद बहुत जल्दबाजी होगी कि बिहार में विशेष सघन पुनरीक्षण या एसआइआर की घोषणा के बाद से विपक्षी पार्टियों ही नहीं, बल्कि सामाजिक व जनतांत्रिक अधिकार संगठनों द्वारा भी ”वोट की चोरी” के जरिए चुनाव में हेरा-फेरी की जो आशंकाएं जतायी जा रही थीं और जनता के बीच जाकर जतायी जा रही थीं, उनका अंतत: निराकरण हो गया है। फिर भी एसआइआर के ही मामले में सुप्रीम कोर्ट के 8 सितंबर के आदेश के बाद, इतना तो निश्चियपूर्वक कहा ही जा सकता है कि इन आशंकाओं के दरवाजे एक हद तक बंद कर दिए गए हैं। यह हुआ है सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के जरिए कि एसआइआर की प्रक्रिया पहचान के लिए प्रमाण के रूप में भारतीय चुनाव आयोग द्वारा जिन 11 दस्तावेजों को अधिसूचित किया गया है, आधार कार्ड / नंबर को उनके समकक्ष, 12वां दस्तावेज माना जाएगा।

सभी जानते हैं कि बिहार में विवादास्पद एसआइआर प्रक्रिया की शुरूआत का एलान करते हुए, चुनाव आयोग ने यह निर्धारित किया था कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के अब तक के सभी उदाहरणों के विपरीत, मताधिकार के सभी दावेदारों को नामांकन फॉर्म भरना होगा और जिनका समुचित नामांकन फार्म निर्धारित तिथि तक अधिकारियों को प्राप्त नहीं होगा, वे खुद-ब-खुद मताधिकार की दावेदारी से बाहर हो जाएंगे। पुन: जिन मतदाताओं का नाम 2003 की मतदाता सूचियों में नहीं था, उन्हें नामांकन फार्म के साथ अपनी पहचान के प्रमाण के रूप में उक्त 11 साक्ष्यों में से कोई एक पेश करना था। इन साक्ष्यों से आधार, स्वयं चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए मतदाता पहचान कार्ड और राशन कार्ड जैसे व्यक्ति की पहचान को प्रमाणित करने वाले ठीक उन्हीं साक्ष्यों को बाहर रखा गया था, जो सबसे ज्यादा लोगों के पास उपलब्ध हैं और सबसे ज्यादा उपयोग में आते हैं।

हैरानी की बात नहीं है कि विशेष सघन पुनरीक्षण के लिए तय की गयी इस प्रक्रिया विशेष और खासतौर पर उसके लिए सभी मतदाताओं से नये सिरे से फार्म भरवाए जाने और 2003 की मतदाता सूचियों में जिन लोगों का नाम नहीं था, उन सबसे उनकी स्थानीयता को दर्शाने वाले साक्ष्य मांगे जाने और सचेत रूप से आधार समेत सबसे आम-फहम दस्तावेजों के साक्ष्यों की इस सूची से बाहर रखे जाने से, व्यापक रूप से इस कसरत के मकसद को लेकर आशंकाएं पैदा हुई थीं। कहीं यह मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के नाम पर, चोर दरवाजे से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर या एनआरसी लाने की यानी मतदाता सूची में स्थान दिए जाने को, नागरिकता की जांच के साथ जोड़ने की कोशिश तो नहीं थी? हमारे संविधान में नागरिकता का विषय, आम तौर पर चुनाव आयोग के विचार क्षेत्र में नहीं आता है। इसलिए, मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया को, नागरिकता जांच के साथ जोड़ना कतई असंवैधानिक है। वास्तव में, बिहार में एसआइआर प्रक्रिया को सर्वोच्च अदालत में दी गयी अनेक चुनौतियों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा, इस प्रक्रिया की संवैधानिकता का है, जिस पर अदालत को अभी विचार करना ही है।
बहरहाल, एसआइआर प्रक्रिया को लेकर विचार की प्रक्रिया में, शुरूआत से ही सर्वोच्च न्यायालय का यह स्पष्ट रुख था कि पहचान के लिए स्वीकार्य दस्तावेजों में चुनाव आयोग को आधार जैसे दस्तावेजों को शामिल करना चाहिए, जिससे इस प्रक्रिया में लोगों को ज्यादा परेशान नहीं होना पड़े। दुर्भाग्य से चुनाव आयोग भी शुरूआत से आधार आदि दस्तावेजों को स्वीकार नहीं करने पर अड़ा हुआ था। इन हालात में, जब अदालत आदेश के बजाए, सुझाव की विनम्र भाषा का प्रयोग करते हुए, चुनाव आयोग से आधार आदि को शामिल करने की सलाह पर रुक गयी, चुनाव आयोग ने इस सलाह को जैसे अनसुना ही कर दिया। दूसरी ओर, चूंकि अदालत इस संबंध में एकदम स्पष्ट थी कि आधार जैसे दस्तावेजों को अस्वीकार करने की चुनाव आयोग की जिद के पीछे कोई वास्तविक तर्क था ही नहीं, उसने इस प्रकरण की अलग-अलग सुनवाइयों में, कम से कम तीन बार, तरह-तरह से अपने इस मंतव्य को दोहराया कि चुनाव आयोग इन दस्तावेजों को स्वीकार करे। यहां तक कि एसआइआर की प्रक्रिया में पूरे 65 लाख लोगों के नाम बिल्कुल अपारदर्शी तरीके से काटे जाने के पहलू पर अपने फैसले में भी अदालत ने, जिन लोगों के नाम इस तरह काटे गए थे, उनकी अर्जियों पर पुनरीक्षण की प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर विचार किये जाने का आदेश देते हुए, दस्तावेज के रूप में आधार के स्वीकार किए जाने के स्पष्ट आदेश भी दिये थे।

लेकिन, चुनाव आयोग ने इसके बाद भी अपनी जिद नहीं छोड़ी। उसने तिकड़मबाजी से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को विफल करने की कोशिशें जारी रखीं। अदालत के उक्त निर्णय की पृष्ठभूमि में, जब चुनाव आयोग की मशीनरी में शामिल कुछ अधिकारियों ने आधार को प्रमाण के रूप में स्वीकार करने की कोशिश की, चुनाव आयोग ने न सिर्फ इसे गलत बताया, बल्कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की। और जिन मतदाताओं ने आधार का साक्ष्य के रूप में उपयोग करते हुए, मतदाता सूची में अपना नाम शामिल किए जाने की मांग की, उनके द्वारा पेश किए गए साक्ष्य को नामंजूर ही कर दिया गया। हैरानी की बात नहीं है कि 8 सितंबर की ताजातरीन सुनवाई में अदालत में इन मामलों को उठाया गया और एसआइआर की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली पार्टियों के वकीलों ने इसे सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना बताते हुए, अदालत से बलपूर्वक आग्रह किया कि आधार के संबंध में अपने मंतव्य का पालन सुनिश्चित करे। ठीक इसी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट को इस बार अपना स्वर बदलना पड़ा और आधार के संबंध में अपने मंतव्य के लिए, पहले की तरह सुझाव की भाषा का प्रयोग छोड़कर, आदेश की भाषा का प्रयोग करना पड़ा।
जाहिर है कि इसके बाद चुनाव आयोग के पास आधार को अन्य ग्यारह प्रमाणों की तरह, बारहवां प्रमाण मानने से बचने की कोई गुंजाइश नहीं रह गयी है। यानी बिहार के 90-95 फीसदी मतदाता, आधार के सहारे अपनी पहचान तथा पते को प्रमाणित करने की शर्त काफी आसानी से पूरी कर सकते हैं। यह, एसआइआर प्रक्रिया के माध्यम से, मतदाताओं की एक अच्छी-खासी संख्या को मताधिकार से ही वंचित किए जाने की संभावनाओं के दरवाजे, बहुत हद तक बंद कर देता है। याद रहे कि एसआइआर प्रक्रिया के जरिए, मतदाता सूचियों की सत्तानुकूल छंटाई का यह खतरा बहुत ही वास्तविक है। यह संयोग ही नहीं है कि बिहार में, जहां से इस एसआइआर प्रक्रिया की शुरूआत हुई है, एक ओर अगर समूचा विपक्ष इस प्रक्रिया पर, उसके तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे जाने, इस प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर जल्दबाजी में तैयार की गयी कच्ची या ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में गड़बड़ियों तथा त्रुटियों की भरमार पर लागातार सवाल उठा रहा है और इन सवालों को जनता के बीच भी लेकर जा रहा है, तो दूसरी ओर सत्ताधारी गठजोड़ न सिर्फ इन गड़बड़ियों, त्रुटियों तथा बड़ी संख्या में नाम काटे जाने पर चुप्पी साधे हुए है, बल्कि विशेष रूप से भाजपा तो जोर-शोर से, और आलोचकों पर हमला कर, चुनाव आयोग की तमाम करनियों-अकरनियों का बचाव करने में ही लगी हुई है।

यहां तक कि आरएसएस भी खुलकर विवादास्पद एसआइआर के बचाव में उतर आया है। हाल ही में जोधपुर में संपन्न आरएसएस से संबद्घ संगठनों की तीन दिनी सालाना बैठक के बाद, उसके प्रवक्ता सुनील आंबेकर ने कहा कि, ‘कार्यकुशल चुनावी प्रक्रियाएं जनतंत्र की रीढ़ होती हैं और एसआइआर जैसी पहलें इस आधार को मजबूत करने में मदद करती हैं।’ सचाई यह है कि बढ़ती ”बाहरी” घुसपैठ की जिस तरह की निराधार आशंकाओं तथा डैमोग्राफी में बदलाव की चिंताओं को, मोहन भागवत के पिछले ही दिनों के तीन दिवसीय महत्वाकांक्षी व्याख्यान में स्वर दिया गया था और उससे पहले प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में उछाला गया था, उन्हें ही और पहले से स्वर देते हुए, एसआइआर प्रक्रिया के अंतर्गत बड़़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे जाने को, रोहिंगिया, बंगलादेशी घुसपैठियों आदि की मौजूदगी का संकेतक बताने की कोशिश की जा रही थी। यह सब चुनाव आयोग के नाम पर, कथित सूत्रों के हवाले से किया जा रहा था। यह दूसरी बात है कि सूत्रों और इशारों में धारणाएं बनाने का यह खेल शुरू करने के बाद, नाम काटे जाने के औपचारिक कारण के स्तर पर, चुनाव आयोग ऐसे दावों से पीछे ही हट गया।

नरेंद्र मोदी के निजाम में वैसे तो तमाम संवैधानिक निकायों, संस्थाओं तथा एजेंसियों को घसीटकर, उनकी मान्य भूमिकाओं से काफी दूर पहुंचा दिया गया है। पर चुनाव आयोग, संविधान में सौंपी गयी अपनी भूमिका से जितनी दूर चला गया है, वह हैरान कर देने वाला है। जो चुनाव आयोग बड़ी संख्या में हाशियावर्ती मतदाताओं की छंटाई के अपने आग्रह को पूरा करने के लिए, आधार को पहचान का साक्ष्य मानने से इंकार करने पर आखिर-आखिर तक बजिद था, उसी चुनाव आयोग के बंगलूरु सेंट्रल के महादेवपुरा विधानसभाई क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा वोटों की हेराफेरी के आरोपों पर मुंह सिलकर बैठ जाने के बाद, अब उसी कर्नाटक में अलंद विधानसभाई क्षेत्र में, 2023 के विधानसभाई चुनाव से पहले लगभग 6 हजार मतदाताओं के नाम फर्जीवाड़े के जरिए कटवाए जाने के दोषियों की सीआइडी जांच, चुनाव आयोग द्वारा पुलिस द्वारा मांगा गया डॉटा न देने के जरिए, दो साल से रोक कर रखे जाने का मामला सामने आया है। क्या यही चुनाव आयोग का काम है?

राजेंद्र शर्मा -रायपुर

मतदाता आपत्तियों का निस्तारण तय समयसीमा में किया जाए- ईआरओ

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा )
सदर तहसील सभागार में इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ) ने 322 नगर विधानसभा सुपरवाइजर और बीएलओ के साथ बैठक कर निर्देश दिए कि,
लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने में बीएलओ की अहम भूमिका होती है। एसडीएम सदर एवं इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ) दीपक कुमार गुप्ता ने मतदाता सूची के पुनरंक्षिण कार्य को केंद्र में रखकर विस्तृत चर्चा किया।ईआरओ ने कहा कि “मतदाता सूची लोकतंत्र की रीढ़ है। इसकी शुद्धता, पारदर्शिता और समयबद्ध अद्यतन अनिवार्य है। यदि मतदाता सूची में त्रुटियां रह जाएंगी तो चुनाव की पूरी प्रक्रिया प्रभावित होगी।” उन्होंने एईआरओ और उपस्थित सुपरवाइजर बीएलओ को स्पष्ट निर्देश दिए कि मतदाता स्तर पर गंभीरता से काम किया जाए।
बैठक में बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) की भूमिका को सबसे अहम बताया ईआरओ ने शिक्षामित्र, पंचायत मित्र और ग्राम सेवक के रूप में कार्यरत बीएलओ को जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए कहा कि उन्हें नाम जोड़ने, हटाने, संशोधन और अन्य प्रविष्टियों की शुद्धता सुनिश्चित करनी होगी। यह कार्य किसी भी स्थिति में लापरवाही से नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने दो टूक कहा कि बीएलओ घर बैठकर मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य नहीं करेंगे।
ईआरओ ने आगे कहा कि “किसी भी आपत्ति को लंबित न रखा जाए। सभी दावे और आपत्तियों का निस्तारण तय समयसीमा में किया जाना चाहिए। यह प्रक्रिया संवेदनशील भी है और लोकतांत्रिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण भी। बैठक में एईआरओ एवं सुपरवाइजर बीएलओ से ईआरओ ने दोहराया कि मतदाता सूची में किसी प्रकार की त्रुटि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आघात पहुंचाती है, इसलिए प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को इसे पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ संपन्न करना होगा। बैठक में एईआरओ डिप्टी कलेक्टर तहसीलदार सदर ज्ञान प्रताप सिंह एईआरओ नायब तहसीलदार देवेंद्र यादव एईआरओ नायब तहसीलदार आकांक्षा पासवान चुनाव का कार्य देख रहे राजू सिंह सहित सुपरवाइजर बीएलओ मौजूद रहे।

17 दिन बाद फिर शुरू होगी वैष्णो देवी यात्रा, 14 सितंबर से भक्तों को दर्शन का अवसर

जम्मू कश्मीर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)नवरात्रि से पहले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। पिछले 17 दिनों से स्थगित श्री माता वैष्णो देवी यात्रा अब दोबारा शुरू होने जा रही है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने घोषणा की है कि यात्रा 14 सितंबर (रविवार) से अनुकूल मौसम की स्थिति के अधीन पुनः शुरू होगी।

बोर्ड ने बताया कि खराब मौसम और ट्रैक पर आवश्यक रखरखाव के चलते यात्रा अस्थायी रूप से रोक दी गई थी। लंबे समय तक यात्रा ठप रहने से श्रद्धालु निराश थे और स्थानीय व्यवसाय भी प्रभावित हुए थे।

गौरतलब है कि 26 अगस्त को अर्धकुंवारी के पास हुए भीषण भूस्खलन के बाद यात्रा रोक दी गई थी। इस हादसे में 34 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे।

घटना के बाद जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने उच्च-स्तरीय जांच समिति का गठन किया था। इस समिति की अध्यक्षता जल शक्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शालीन काबरा कर रहे हैं, जिसमें जम्मू के संभागीय आयुक्त और पुलिस महानिरीक्षक भी शामिल हैं।

श्राइन बोर्ड ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा शुरू होने तक धैर्य बनाए रखें और अनावश्यक रूप से कटरा की ओर न जाएं।

सपा प्रतिनिधि मंडल ने पीड़ित परिवार से की मुलाकात, गिरफ्तारी न होने पर आंदोलन की चेतावनी

सलेमपुर के टीचर कॉलोनी में विगत दिनों फोटो वायरल होने से आहट युवती ने की थी आत्म हत्या

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)।
सलेमपुर नगर की टीचर कॉलोनी में एक युवती ने अपने फोटो-वीडियो वायरल होने से आहत होकर आत्महत्या कर ली थी। घटना को लगभग दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी आरोपी युवक की गिरफ्तारी न होने से क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है। इसी क्रम में शुक्रवार को समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधि मंडल पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा और परिजनों को सांत्वना दी।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने प्रतिनिधि मंडल का गठन किया। सलेमपुर पहुंचकर प्रतिनिधि मंडल ने पीड़ित परिवार से संवेदना प्रकट की और कहा कि न्याय दिलाने के लिए पार्टी हर स्तर पर संघर्ष करेगी। मौके पर सैकड़ों सपा कार्यकर्ता व पदाधिकारी मौजूद रहे।

प्रतिनिधि मंडल ने प्रशासन को मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी नहीं हुई तो समाजवादी पार्टी आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।

प्रतिनिधि मंडल में मौजूद प्रमुख नेता व्यास यादव, जिलाध्यक्ष,रमाशंकर राजभर, सांसद सलेमपुर,रामभुअल निषाद, सांसद,व्यास जी गौड़, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ,रवि गौड़ बड़कुइया, प्रदेश अध्यक्ष, समाजवादी अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ, उ.प्र.,धर्मेन्द्र सोलंकी, प्रदेश अध्यक्ष, समाजवादी सांस्कृतिक प्रकोष्ठ, उ.प्र., ओ पी यादव, राष्ट्रीय सदस्य,महेन्द्र पाल पिपलैण्ड, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, समाजवादी पार्टी, उ.प्र.,मनीष सिंह, मीडिया पैनलिस्ट,आशुतोष उपाध्याय, गजाला लारी, स्वामीनाथ यादव, मनबोध प्रसाद (पूर्व विधायक),सुनील यादव, विधानसभा अध्यक्ष, सलेमपुर, आलोक प्रताप यादव, युवा नेता, समाजवादी पार्टी,

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए समाज में आक्रोश और राजनीतिक सक्रियता बढ़ रही है। पुलिस पर कार्रवाई का दबाव है और यदि जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई तो आने वाले दिनों में बड़ा जन आंदोलन देखने को मिल सकता है।

पीएम मोदी के जन्मदिन पर भाजपा का ‘सेवा पखवाड़ा’, सुनील बंसल बने संयोजक

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन (17 सितंबर) के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) देशभर में 15 दिवसीय ‘सेवा पखवाड़ा’ का आयोजन करने जा रही है। इसके लिए पार्टी ने अपने राष्ट्रीय महासचिव और संगठन रणनीतिकार सुनील बंसल को अभियान का संयोजक नियुक्त किया है।

भाजपा ने घोषणा की है कि यह अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलेगा। 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती भी होती है।

अभियान की मुख्य गतिविधियाँ,रक्तदान और स्वास्थ्य शिविर,स्वच्छता अभियान,“माँ के नाम पर एक पेड़” पहल,प्रदर्शनियां और संवाद कार्यक्रम,दिव्यांग नागरिकों के साथ विशेष संवाद और सहायक उपकरण वितरण,“मोदी विकास मैराथन” : 21 सितंबर को भाजपा युवा मोर्चा द्वारा 75 से अधिक शहरों में,खेल महोत्सव : सभी सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में खेल प्रतियोगिताएं कराएंगे,सांस्कृतिक आयोजन : चित्रकला प्रतियोगिता और अन्य कार्यक्रम दिसंबर-जनवरी तक जारी,सुनील बंसल ने बताया कि राज्यों में 771 संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, खेल महोत्सव के लिए पंजीकरण 29 अगस्त से शुरू हो चुके हैं और औपचारिक कार्यक्रम 21 सितंबर से आरंभ होंगे।‘आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत’ अभियान भी होगा लॉन्चकेंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव और भाजपा महासचिव सुनील बंसल ने संवाददाता सम्मेलन में जानकारी दी कि भाजपा 25 सितंबर (दीनदयाल उपाध्याय जयंती) से 25 दिसंबर तक ‘आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत’ अभियान भी चलाएगी।

सुनील बंसल की भूमिका

सुनील बंसल 2014 से भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।वे ओडिशा, बंगाल और तेलंगाना में संगठन की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक सचिव रहते हुए भाजपा की सत्ता में वापसी में उनका बड़ा योगदान रहा।आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक और एबीवीपी के राष्ट्रीय संयुक्त संगठन सचिव भी रह चुके हैं।वर्तमान में वे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में कार्यरत हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अमित शाह के करीबी माने जाते हैं।

डीएम आफिस में शुरू हुआ मुलाकाती पर्ची का सिस्टम

आसान होगा समास्याओं का समाधान, तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
डीएम ऑफिस में फरियादियों से मिलने का नया सिस्टम लागू किया गया है। अब हर व्यक्ति को डीएम से मिलने से पहले मुलाकाती पर्ची बनवानी होगी। यह पर्ची सिर्फ एंट्री पास नहीं होगी बल्कि इसके जरिए यह भी दर्ज होगा कि कोई फरियादी कब से अपनी पर्ची से पता चलेगा कि कोई व्यक्ति अपनी समस्या लेकर कब से दौड़ रहा है। इस पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी। जितनी बार शिकायत लेकर कोई आएगा, उसे उतनी बार पर्ची लेनी होगी। पुरानी पर्चियां भी साथ लानी होगी, जिससे यह पता चल सकेगा कि वह समस्या के निपटारा के लिए कब से प्रयास कर रहा है। फिर यह पता लगाया जाएगा कि समस्या का समाधान होने लायक है या नहीं। यदि होने लायक है तो संबधित अधिकारी से जवाब-तलब किया जाएगा।
रेलवे बस स्टेशन के पास पर्यटन विभाग के भवन परिसर में डीएम ऑफिस स्थित है। मुख्य द्वार से प्रवेश करने के बाद बाईं ओर डीएम का कक्ष है और दाहिनी ओर वह कमरा है जहां मुलाकाती पर्ची बनती है। हर पर्ची पर एक यूनिक नंबर होगा और उस पर फरियादी का नाम-पता दर्ज किया जाएगा। रजिस्टर में पूरी जानकारी लिखकर पर्ची दी जाएगी और उसके बाद ही फरियादी डीएम से मिल सकेगा।
सरकारी योजनाओं का प्रचार भी होगा पर्ची के एक हिस्से पर फरियादी की जानकारी होगी, जबकि दूसरी ओर सरकारी योजनाओं और नए अभियानों का विवरण दर्ज होगा। यानी पर्ची फरियादी के लिए समस्या निस्तारण का साधन होने के साथ-साथ योजनाओं की जानकारी देने का माध्यम भी बनेगी।
मुलाकाती पर्ची लेकर ही डी एम के पास जाना होगा। अगर कोई फरियादी वहां यह कहता है कि लंबे समय से दौड़ रहा है तो उससे पुरानी पर्चियां दिखाने को कहा जाएगा। उस पर्ची के नंबर के सहारे उसकी शिकायत के निपटारा की स्थिति जांची जाएगी।
हर दिन आने वाले आवेदनों को आईजीआरएस पर ऑनलाइन कर दिया जाता है। उसी के सहारे निगरानी होती है। पर्ची के नंबर से उस शिकायत को ऑनलाइन ढूंढ लिया जाएगा। उसके बाद यदि वह समस्या हल होने लायक होगी और लंबे समय तक हल नहीं हुई होगी तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। फरियादी की समस्या का समाधान कराया जाएगा। यदि समस्या उस स्तर से निस्तारित होने लायक नहीं होगी तो आगे का रास्ता बताया जाएगा।
डीएम दीपक मीणा ने बताया-आईजीआरएस पर हर दिन आने वाले आवेदनों को ऑनलाइन दर्ज किया जाता है। अब पर्ची का नंबर डालकर संबंधित शिकायत की स्थिति आसानी से जांची जा सकेगी। जिन लोगों के पास मोबाइल पर मैसेज देखने की सुविधा नहीं है, उनके लिए यह हार्ड कॉपी काम करेगी।
उन्होंने कहा-यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि पता चल सके कि कोई मामला समाधान योग्य है या नहीं। अगर समाधान योग्य है और फिर भी नहीं हुआ है, तो इसे गंभीर माना जाएगा और जिम्मेदारी तय होगी। वहीं अगर समस्या उस स्तर पर निस्तारित होने योग्य नहीं है तो फरियादी को आगे का रास्ता बताया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी का पूर्वोत्तर में असम,मणिपुर और बिहार दौरा

3 दिनों में 70,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 15 सितंबर तक पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के पाँच राज्यों — मिज़ोरम, मणिपुर, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार — का दौरा करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री लगभग 70,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे।

13 सितंबर : मिज़ोरम और मणिपुर सुबह 10 बजे, आइज़ोल (मिज़ोरम) : प्रधानमंत्री 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे तथा एक जनसभा को संबोधित करेंगे।

दोपहर 12:30 बजे, चुराचांदपुर (मणिपुर) : प्रधानमंत्री 7,300 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे।

मुख्य परियोजनाएँ :

3,600 करोड़ रुपये से अधिक की मणिपुर शहरी सड़कें, जल निकासी एवं परिसंपत्ति प्रबंधन सुधार परियोजना।2,500 करोड़ रुपये से अधिक की 5 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएँ।मणिपुर इन्फोटेक डेवलपमेंट (MIND) परियोजना। 9 स्थानों पर कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास। दोपहर 2:30 बजे, इम्फाल : प्रधानमंत्री 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे।

14 सितंबर : असम सुबह 11 बजे, दरांग : प्रधानमंत्री 18,530 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली बुनियादी ढाँचा और औद्योगिक विकास परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे।

दोपहर 1:45 बजे, गोलाघाट :

असम बायो-एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड, नुमालीगढ़ रिफाइनरी प्लांट का उद्घाटन। पॉलीप्रोपाइलीन प्लांट की आधारशिला। 15 सितंबर : पश्चिम बंगाल और बिहार सुबह 9:30 बजे, कोलकाता (पश्चिम बंगाल) : प्रधानमंत्री 16वें संयुक्त कमांडर्स सम्मेलन-2025 का उद्घाटन करेंगे।दोपहर 2:45 बजे, पूर्णिया (बिहार) : पूर्णिया हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन। लगभग 36,000 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन।राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का शुभारंभ।

प्रधानमंत्री का यह दौरा न केवल पूर्वोत्तर राज्यों के लिए समावेशी और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि बिहार और पश्चिम बंगाल के लिए भी बड़े औद्योगिक एवं आधारभूत ढाँचे के विकास की नई संभावनाएँ लेकर आएगा।

नेपाल में सियासी संकट गहराया, सुशीला कार्की बन सकती हैं पहली महिला प्रधानमंत्री

सेना मुख्यालय में आज अहम बैठक, राष्ट्रपति और सेना प्रमुख करेंगे फैसला

काठमांडू (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) नेपाल की सियासत एक बड़े मोड़ पर पहुँच गई है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद पैदा हुई राजनीतिक अस्थिरता के बीच राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल शुक्रवार को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की की नियुक्ति कर सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक गुरुवार देर रात राष्ट्रपति, सेना प्रमुख और जेन-जेड समूह के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सकी। हालांकि, सरकार विरोधी प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे युवाओं ने अंतरिम प्रधानमंत्री पद के लिए कार्की का नाम आगे बढ़ाया है।

सेना मुख्यालय में अहम बैठक

शुक्रवार दोपहर 2 बजे काठमांडू स्थित सेना मुख्यालय में एक निर्णायक बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, सेना प्रमुख और देश के शीर्ष कानूनी विशेषज्ञ शामिल होंगे। खास बात यह है कि सुशीला कार्की स्वयं भी इस बैठक का हिस्सा होंगी। संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप अंतरिम प्रधानमंत्री का नाम तय होने पर माना जा रहा है कि राष्ट्रपति और सेना प्रमुख की पहली पसंद कार्की ही होंगी।

हालात तनावपूर्ण, कर्फ्यू में ढील

नेपाल में हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। सुबह 7 बजे से 11 बजे तक लोगों को सामान्य दिनचर्या के लिए चार घंटे की छूट दी गई। इसके बाद सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक प्रतिबंधात्मक आदेश लागू रहेंगे। शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक फिर से कर्फ्यू जारी रहेगा।

विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि

सोमवार को भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन हुए थे। पुलिस कार्रवाई में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे की मांग करते हुए उनके कार्यालय का घेराव कर दिया। बढ़ते दबाव के बीच ओली ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। सोमवार रात सरकार ने सोशल मीडिया पर लगाया प्रतिबंध भी हटा लिया।

अगर आज की बैठक में सहमति बनती है, तो नेपाल के इतिहास में पहली बार किसी महिला को प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, और वह भी देश के सबसे कठिन दौर में।

पंचायत निधि पर डाका लक्ष्मीपुर ब्लाक में सागर ट्रेडर्स के बिलों से उठे सवाल

ग्राम पंचायत निधि में फर्जी बिलों का खेल- ग्रामीण बोले, रोकिए लूट

लक्ष्मीपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत रजापुर और मठिया इन्दु का मामला

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)।विकासखंड लक्ष्मीपुर की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की आड़ में फर्जी बिलिंग और संदिग्ध आपूर्ति का मामला तूल पकड़ चुका है। गैर जनपद सिद्धार्थनगर की फर्म सागर ट्रेडर्स के नाम पर पंचायतों को पेट्रोल-डीजल और कृषि दवाओं की आपूर्ति दिखाए जाने से गंभीर अनियमितता उजागर हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायतों में फर्जी बिलिंग का खेल जारी है, जिसमें प्राप्त दस्तावेज बताते हैं कि ग्राम पंचायत रजापुर और मठिया इन्दु में अलग-अलग रसीदों के जरिए हजारों रुपये के भुगतान की तैयारी की गई है। रसीद संख्या 85, 18 जुलाई 2025 ग्राम पंचायत रजापुर के नाम, ₹49,640 का सामान पेट्रोल, डीजल, बीज, कीटनाशक दवा, रसीद संख्या 59, 13 अगस्त 2025 ग्राम पंचायत मठिया इन्दु के नाम ₹41,300 का सामान पेट्रोल, डीजल, कीटनाशक, मच्छर नाशी दवा दोनों रसीदों पर पंचायत की मोहर लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि पेट्रोल- डीजल की सीधी आपूर्ति पंचायत को दिखाना पूरी तरह से नियमविरुद्ध है। सिद्धार्थनगर जनपद के लोटन बाजार स्थित सागर ट्रेडर्स का जीएसटी पंजीकरण 2019 से सक्रिय है। फर्म प्रोप्राइटर सुनिल के नाम पर संचालित है और सीमेंट, लोहे-स्टील, तांबे की केबल, प्लास्टिक और खनिज पदार्थ के व्यापार में पंजीकृत है। इसके बावजूद पंचायतों को बीज, कीटनाशक और डीजल सप्लाई दिखाना नियमों की सीधी अनदेखी है। ग्रामवासियों में मोहन, विनय, आनंद, राजेश, कमला देवी, मन्जू सोनी, उर्मिला देवी, संगिनी, संगीता और गोरख ने जिलाधिकारी से मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि मनमाने दामों पर फर्जी बिल तैयार कर पंचायत निधि की लूट की जा रही है।
एडीएओ महराजगंज सुमित निषाद ने कहा कि बीज व कीटनाशक की बिक्री हेतु कृषि विभाग का लाइसेंस जरूरी है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि अनियमितता कहां हुई।
इस संबंध में बीडीओ लक्ष्मीपुर मृत्युंजय यादव ने कहा कि यह मामला जीएसटी और बिलिंग से जुड़ा है। यदि फर्जी बिलिंग पाई गई तो कड़ी कार्रवाई होगी।

नेपाल में उग्र प्रदर्शन एव ततखा पलट के वजह से नेपाल भारत बार्डर पर मंडराने लगे संकट के बादल

बलरामपुर,(राष्ट्र की परम्परा)
नेपाल में पिछले कुछ दिनों से हो रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने पूरे दक्षिण एशिया को चिंतित कर दिया है। राजधानी काठमांडू सहित कई प्रांतों में उग्र भीड़ ने सरकारी भवनों, सुप्रीम कोर्ट परिसर, संसद भवन, दुकानों, मॉल और निजी संस्थानों पर हमला किया। कई जगहों पर आगजनी, लूटपाट और हत्या की घटनाएँ दर्ज की गईं।
सबसे गंभीर घटना तब हुई जब प्रदर्शनकारियों ने नेपाल की कई जेलों पर धावा बोल दिया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हजारों कैदी जिसमें हत्या, लूट और अन्य संगीन अपराधों में दोषी भागने में सफल रहे। नेपाल सरकार ने आपात सुरक्षा बलों को तैनात कर हालात काबू में करने की कोशिश की, लेकिन कई फरार अपराधियों के देशभर में फैलने की आशंका बनी हुई है।
भारत-नेपाल खुली सीमा के कारण इन अपराधियों के भारत में घुसपैठ की संभावना को देखते हुए भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट हो गई हैं। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने बलरामपुर सहित उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी है। कई संदिग्ध व्यक्तियों को सीमा पार करने के प्रयास में हिरासत में लिया गया है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा पर अतिरिक्त बल तैनात करने और अस्थायी रूप से आवागमन सीमित करने के निर्देश दिए हैं। बलरामपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर और बहराइच जिलों में एसएसबी और पुलिस बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
भारत और नेपाल के ऐतिहासिक “रोटी-बेटी” संबंधों को देखते हुए यह कदम कठिन लेकिन ज़रूरी माना जा रहा है। सीमा पार कई परिवारों के वैवाहिक रिश्ते हैं, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है। स्थानीय प्रशासन ने सीमा पार रहने वाले परिजनों से संयम बरतने और आधिकारिक घोषणाओं पर भरोसा करने की अपील की है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फरार अपराधियों को जल्द काबू में नहीं किया गया तो नेपाल और सीमावर्ती भारतीय जिलों में अपराध दर बढ़ने का खतरा है।

दिल्ली हाई कोर्ट को मिली इस बम धमकी ने पूरे न्यायालय परिसर में हड़कंप मचा दिया

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)धमकी ई-मेल: रजिस्ट्रार जनरल को सुबह 8:39 बजे धमकी भरा ई-मेल प्राप्त हुआ।न्यायाधीशों की सुरक्षा: जानकारी मिलने के बाद कुछ जज 11:35 बजे बाहर निकल गए, जबकि अन्य जज दोपहर 12 बजे तक अपनी अदालतों में काम करते रहे।

कोर्ट खाली कराया गया: सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कोर्ट परिसर खाली कराया।

वीडियो फुटेज: पीटीआई द्वारा शेयर किए गए वीडियो में वकील गेट की ओर भागते हुए और पुलिस गाड़ियाँ परिसर में खड़ी दिखाई दे रही हैं।

सुरक्षा इंतज़ाम: बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad)स्पेशल सेल,दिल्ली पुलिस की टीमें,पूरे परिसर और आसपास के इलाकों की गहन तलाशी,इलाके को सील कर सुरक्षा बढ़ाई गई

👉 राहत की बात यह है कि अभी तक किसी विस्फोटक सामग्री के मिलने की सूचना नहीं है, लेकिन पुलिस इसे गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की जांच कर रही है।

बिहार में बम ब्लास्ट की धमकी, पाकिस्तान से आया मैसेज: पुलिस अलर्ट पर

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर (फाइल फोटो)

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार पुलिस को गुरुवार की दोपहर एक पाकिस्तानी एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल से शाम 4 बजे राज्य के सार्वजनिक स्थानों पर बम ब्लास्ट करने की धमकी मिली है। इस धमकी के बाद पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को अलर्ट जारी किया है।

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर पंकज दराद ने पत्र जारी कर सार्वजनिक स्थलों, भीड़-भाड़ वाले इलाकों और धार्मिक स्थलों पर विशेष चौकसी बरतने का निर्देश दिया है। साथ ही बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वायड से सघन जांच अभियान चलाने को भी कहा गया है।

मिली जानकारी के अनुसार यह धमकी चौधरी अशद नामक एक्स हैंडल से दी गई है, जो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से सक्रिय है और तहरीके लब्बैक संगठन से जुड़ा बताया जा रहा है। धमकी में साफ लिखा गया है – “12 सितंबर को शाम 4 बजे बिहार में ब्लास्ट होगा, रोक सको तो रोक लो।”

बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक होने की वजह से सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही हाई अलर्ट पर हैं। इससे पहले भी हाल के दिनों में कई धमकी भरे मैसेज आ चुके हैं –9 सितंबर को पटना साहिब स्थित तख्त श्री हरमंदिर साहिब को उड़ाने की धमकी मिली थी।29 अगस्त को पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब किसी भी खतरे को लेकर अतिरिक्त चौकसी बरत रही हैं।

आईसीयू में भर्ती स्पेनिश महिला के साथ डॉक्टर द्वारा अनुचित व्यवहार, गिरफ्तार

सांकेतिक फोटो

गोवा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) एक चिंताजनक मामला सामने आया है जिसने चिकित्सा जगत की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ओल्ड गोवा स्थित एक निजी अस्पताल के गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती एक स्पेनिश महिला मरीज के साथ अनुचित व्यवहार करने के आरोप में अस्पताल से जुड़े एक डॉक्टर को पुलिस ने हिरासत में लिया है।

अधिकारियों ने शुक्रवार को इस घटना की पुष्टि की। पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, मरीज की बहन ने डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

मामला कैसे हुआ?

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह घटना 31 अगस्त को हुई, जब स्पेनिश नागरिक को गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती कराया गया था। उसी दौरान ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने मरीज को कई जगहों पर अनुचित तरीके से छुआ।

पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की उन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है जो महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने से संबंधित हैं। मामले की जांच फिलहाल जारी है और पुलिस अस्पताल प्रबंधन से भी पूछताछ कर रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि पर असर

इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर सनसनी फैलाई है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि पर भी नकारात्मक असर डालने की आशंका जताई जा रही है। विदेश से इलाज के लिए आने वाले मरीजों की सुरक्षा और गरिमा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्कूल बस की टक्कर से स्कूटी सवार युवती की मौत, भाई घायल

सांकेतिक फ़ोटो

रांची (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) राजधानी रांची के खेलगांव चौक में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। स्कूटी सवार एक युवती की स्कूल बस की चपेट में आने से मौत हो गई, जबकि उसके साथ स्कूटी पर बैठे छोटे भाई को हल्की चोटें आई हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना सुबह लगभग 7 बजे की है। तेज रफ्तार से आ रही स्कूल बस ने स्कूटी को जोरदार टक्कर मारी, जिससे युवती सड़क पर गिर पड़ी। इसके बाद बस युवती को कुचलते हुए मौके से फरार हो गई।

हादसे की खबर मिलते ही युवती के परिजन घटनास्थल पर पहुंचे। बेटी का शव सड़क पर देखकर घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों के आंसू और चीख-पुकार सुनकर माहौल गमगीन हो गया।

युवती के छोटे भाई ने बताया कि किस तरह तेज रफ्तार बस ने उनकी स्कूटी को टक्कर मारी और फिर बहन को बेरहमी से कुचलते हुए भाग निकली। भाई ने हादसे के क्षणों को याद करते हुए कहा कि पूरी घटना उसकी आंखों के सामने हुई, जिसे वह कभी भूल नहीं पाएगा।

लोगों में आक्रोश

हादसे के बाद मौके पर ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जुट गई। लोगों ने बस चालक की लापरवाही और प्रशासन की उदासीनता पर नाराजगी जताई। भीड़ ने चालक की जल्द गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को मुआवजे की मांग की।

फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और स्कूल बस व उसके चालक की तलाश शुरू कर दी है।

टेक्सास में वॉशिंग मशीन विवाद के बाद भारतीय मूल के होटल मैनेजर की सिर कलम कर हत्या

डलास (अमेरिका) RKPNEWS अमेरिका के टेक्सास राज्य में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। डलास स्थित डाउनटाउन सुइट्स होटल में 50 वर्षीय भारतीय मूल के होटल प्रबंधक चंद्र मौली ‘बॉब’ नागमल्लैया की उनके सहकर्मी ने बेरहमी से हत्या कर दी। घटना बुधवार सुबह उस समय हुई, जब होटल के स्टाफ के बीच वॉशिंग मशीन को लेकर विवाद हो गया।

डलास पुलिस विभाग के अनुसार, नागमल्लैया मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले थे और लंबे समय से होटल मैनेजर के तौर पर कार्यरत थे। होटल के कर्मचारी योर्डानिस कोबोस-मार्टिनेज (37) ने कथित रूप से उनका सिर कलम कर दिया। चश्मदीदों के अनुसार, यह खौफनाक वारदात नागमल्लैया की पत्नी और बेटे के सामने घटी, जिससे पूरा परिवार सदमे में है।

विवाद की वजह पुलिस ने बताया कि होटल की वॉशिंग मशीन खराब हो गई थी, जिसको लेकर नागमल्लैया और कोबोस-मार्टिनेज के बीच कहासुनी हो गई। विवाद तब बढ़ गया, जब नागमल्लैया ने सीधे संवाद करने के बजाय किसी अन्य व्यक्ति से कोबोस-मार्टिनेज को संदेश का अनुवाद कर समझाने को कहा। इसी बात से आरोपी आगबबूला हो गया और उसने जानलेवा हमला कर दिया।

आरोपी गिरफ्तार पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी योर्डानिस कोबोस-मार्टिनेज को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है और पूछताछ जारी है।

भारतीय समुदाय में आक्रोश डलास और टेक्सास में रह रहे भारतीय मूल के लोग इस घटना से आक्रोशित और स्तब्ध हैं। समुदाय के कई संगठनों ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना जताई है और भारतीय दूतावास से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।