Wednesday, July 15, 2026
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नेपाल में सियासी संकट गहराया, तेल संकट से जनता बेहाल

काठमांडू/पानीटंकी।(राष्ट्र की परम्परा) नेपाल में पिछले 72 घंटों से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। सड़क पर मचे बवाल ने अब सियासी खींचतान का रूप ले लिया है। जेन-जी समूहों में अंतरिम प्रधानमंत्री को लेकर सहमति टूट गई है। पहले जहां सुप्रीम कोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की के नाम पर हामी बनी थी, अब तीन और दावेदार उभरकर सामने आए हैं—कुलमान घीसिंग, काठमांडू के मेयर बालेन शाह और धरान के मेयर हरका सम्पांग। इसके चलते जेन-जी गुट आपस में भिड़ने लगे हैं। सेना मुख्यालय में भी राजनीतिक भविष्य को लेकर गहन मंथन जारी है।

इधर, नेपाल में तेल संकट ने हालात और बिगाड़ दिए। पेट्रोल-डीजल की भारी कमी से जनजीवन प्रभावित रहा। भारत-नेपाल सीमा 72 घंटे बाद खुली तो पानीटंकी से 19 पेट्रोलियम टैंकर और 36 ट्रक नेपाल पहुंचे। इससे ईंधन और जरूरी रसद की आपूर्ति आंशिक रूप से बहाल हो सकी। चार ट्रक जल्दी खराब होने वाले सामान लेकर शाम तक नेपाल रवाना होंगे। तीन एम्बुलेंस को भी सीमा पार करने की अनुमति दी गई।

सीमा खुलने के बाद नेपाल में फंसे 420 भारतीय स्वदेश लौट सके, वहीं भारत में रुके लगभग 560 नेपाली नागरिक अपने घर जा पाए। हालांकि भारतीय यात्रियों की आवाजाही अब भी सीमित है, क्योंकि नेपाल की ओर से सीमा प्रबंधन कमजोर है। व्यापारिक वाहनों और आवश्यक सामग्री की आवाजाही फिलहाल जारी है।

नेपाल में सवाल बरकरार है—अंतरिम सरकार का नेतृत्व कौन करेगा, संसद भंग होगी या नहीं—इन पर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है।

सिकन्दरपुर क्षेत्र के गांवों में संक्रामक बीमारियों का प्रकोप, विधायक ने स्वास्थ्य विभाग से की त्वरित कार्रवाई की मांग

सिकन्दरपुर /बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। तहसील क्षेत्र के सरयू नदी किनारे बसे कई गांवों में इन दिनों संक्रामक बीमारियों ने दस्तक दे दी है। लगातार बदलते मौसम और स्वच्छता के अभाव में गांवों में बुखार, जुकाम और अन्य मौसमी बीमारियों से बच्चे, बुजुर्ग और जवान बड़ी संख्या में प्रभावित हो रहे हैं। कई परिवारों में एक साथ कई लोग बीमार पड़ने से स्थिति चिंताजनक हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। गांवों में न तो दवा छिड़काव हो रहा है और न ही स्वास्थ्य टीम समय पर पहुंच रही है। लोग प्राथमिक उपचार के लिए निजी चिकित्सकों पर निर्भर होने को मजबूर हैं, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों से तत्काल दवा छिड़काव, जांच शिविर और दवा वितरण की व्यवस्था कराने की मांग की है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिकन्दरपुर के विधायक मोहम्मद जियायुद्दीन रिजवी ने भी स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर तुरंत कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए प्रभावित गांवों में मेडिकल टीम भेजना, साफ-सफाई अभियान चलाना और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि क्षेत्रवासियों की समस्या के समाधान तक वह स्वयं भी स्वास्थ्य विभाग से लगातार संपर्क बनाए रखेंगे।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि समय रहते विभाग प्रभावी कदम उठाएगा, ताकि लोग राहत की सांस ले सकें।

समस्या से निजात न मिलने पर होगा धरना प्रदर्शन – अर्जुन सिंह

बरहज /देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
शुक्रवार को समाजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव ने कार्यकर्ताओ संग मांगो को लेकर उपजिलाधिकारी को पत्रक सौपा।
समाजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव अर्जुन सिंह ने 12 सितम्बर शुक्रवार को सरयू नदी मे आने जाने के लिए नावो की पर्याप्त संचलन सहित अन्य समस्याओं को लेकर कार्यकर्ताओ के साथ उपजिलाधिकारी को पत्रक सौपा।
इस दौरान अर्जुन सिंह ने कहा की अगर प्रशासन जल्द से जल्द सरयू नदी मे अधिक नावो के संचलन की व्यवस्था नहीं करता है तो 15/9/2025 को समाजवादी पार्टी के तत्वाधान मे बरहज तहसील परिसर मे सपा कार्यकर्ताओ द्वारा धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान पूर्व विधायक स्वामिनाथ यादव सहित आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

लम्पी बीमारी से बचाव के लिए किया गया टीकाकरण

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। शुक्रवार को बरहज तहसील क्षेत्र के ग्राम मेहीअवा, कोटवा, नवापार,धौला पंडित, पैना सहित आदि गाँवो मे लम्पी के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए 800, गायों का टीकाकरण किया गया, तथा लोगो को जागरूक किया गया। टीकाकरण टीम मे डॉ के के कमल, डॉ राजेश यादव,डॉ कंचन लता,डॉ ब्रजेश नारायण,पशुधन प्रसार अधिकारी अशोक पाण्डेय आदि शामिल रहे।

लम्पी रोग से पशुपालक घबराए नहीं: लम्पी बीमारी से बचाव के लिए किया गया टीकाकरण, सतर्कता बरतने की सलाह

बघौचघाट/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। विकास खंड पथरदेवा क्षेत्र के ग्रामपंचायत मेंदीपट्टी एवं तिरमासाहुन में शुक्रवार को लम्पी रोग से बचाव के लिए विशेष पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा लगातार गांवों का भ्रमण कर पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है। एवं पशुपालकों को बीमारी से बचाव के लिए जागरूक किया गया। इसी क्रम में पथरदेवा क्षेत्र के ग्रामपंचायत मेंदीपट्टी,बेलवनिया एवं तिरमासाहुन में चिकित्सकों की टीम द्वारा करीब 450 गायों का टीकाकरण किया गया।वही पथरदेवा क्षेत्र में चिकित्सको द्वारा टीकाकरण बड़े जोर शोर में किया जा रहा है। विकास खंड पथरदेवा के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ उदयभान वरुण के नेतृत्व में डॉ अजय कुमार के साथ पशुपालन विभाग की टीम ने लम्पी बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। एवं साफ सफाई पर विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया। पशुधन प्रसार अधिकारी संजय कुमार ने पशुपालकों को जागरूक करते हुए बताया कि पशुपालक बीमारी से घबराए नहीं, नीम का पत्ता उबालकर पशुओं की धुलाई करें। मच्छर मक्खियों से बचाव के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें यदि किसी पशु को बीमारी हो जाती है उस संक्रमित पशु को अन्य पशुओं से अलग रखें।इसमें होम्योपैथिक दवाएं कारगर है जबकि अंग्रेजी दवाई खास कारगर नहीं होती है।यह बीमारी खासकर बिहार से आई हुई है।ये सब गांव बिहार बॉर्डर से नजदीक है। लम्पी बीमारी से बचाव के लिए मच्छर, मक्खी व किलनी आदि से पशुओं को बचाने का समुचित उपाय जरूरी है। पशुबाड़े के खिड़की एवं दरवाजे पर मच्छररोधी जाली का प्रयोग करें एवं आस पास गन्दा पानी व पशु का गोबर पेशाब एकत्र न होने दें। इस दौरान वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी पथरदेवा डॉ उदयभान वरुण,डॉ अजय कुमार, पशुधन प्रसार अधिकारी संजय कुमार एवं पैरावेट सुधीर प्रजापति प्रमोद कुमार सुनील कुमार राजेंद्र यादव गांवों में भ्रमण कर 450 गायों को टीका लगाया।

हिन्दू महासभा – जस्ट डन का स्वरोजगार मिशन,

आर्थिक आजादी की लड़ाई का दूसरा नाम – बी एन तिवारी

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा) अखिल भारत हिन्दू महासभा और जस्ट डन ऑनलाइन पोर्टल का संयुक्त अभियान अखिल भारत स्वरोजगार मिशन देश के नागरिकों के लिए आशा की किरण और अवसर का एक सशक्त प्रकाश स्तंभ बनकर उभर रहा है। स्वरोजगार मिशन मात्र एक रोजगार योजना नहीं है, वरन यह एक जन क्रांति है, जिसका उद्देश्य भारतीय नागरिकों में उद्यमशीलता की भावना को जागृत कर उन्हें नौकरी मांगने वालों से धन सृजक बनाने की दिशा में प्रेरित करना है। यह उद्गार अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र कुमार द्विवेदी ने आज जस्ट डन www.justdun.in के द्वारका स्थित कॉरपोरेट कार्यालय में संपन्न बैठक में अपने विचार प्रकट करते हुए व्यक्त किए।
हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बी एन तिवारी ने जारी बयान में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अपने संबोधन में राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र कुमार द्विवेदी ने कहा कि आज के दौर में आर्थिक आत्मनिर्भरता केवल एक सपना नहीं, वरन राष्ट्रीय आवश्यकता बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल लोकल के नारे को साकार करने के लिए अखिल भारत स्वरोजगार मिशन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रोफेसर यशपाल सिंह ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि स्वरोजगार मिशन का हमारा यह अभियान अपेक्षाओं से कहीं आगे बढ़कर तेजी से अपने मील के पत्थर पार कर रहा है और एक मजबूत व आत्मनिर्भर भारत की राह प्रशस्त कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस मिशन में है जस्ट डन, एक कम्युनिटी ड्रिवन ई कॉमर्स प्लेटफार्म जो ड्रॉपशिपिंग मॉडल पर आधारित है। यह प्लेटफॉर्म हर महत्वकांक्षी व्यक्ति को वर्चुवल स्टोर ओनर ( वी एस ओ ) बनकर 15 लाख से अधिक उत्पादों के साथ अपना ऑनलाइन व्यवसाय शुरू करने का अवसर प्रदान करता है।
प्रोफेसर यशपाल सिंह ने कहा कि स्वरोजगार अभियान भारतीय युवाओं के लिए गेमचेंजर सिद्ध हो रहा है। इस ऑनलाइन व्यवसाय में उत्पाद सीधे विक्रेता से ग्राहक तक पहुंचता है, जो शून्य स्टॉक जोखिम को दर्शाता है। इसका लाभ बड़े, छोटे शहरों, गांवों और कस्बों के उद्यमी और जनता सभी उठा सकते हैं। रेफरल और बिक्री दोनों माध्यमों से स्थाई आय का माध्यम है स्वरोजगार मिशन, जो एक करोड़ नागरिकों को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में तेजी से प्रगति कर रहा है।
अखिल भारत हिन्दू स्वरोजगार सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जस्ट डन के संस्थापक हिमांशु झा ने बैठक में अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि यह मिशन आत्मनिर्भर भारत अभियान के साथ पूरी तरह से तालमेल में है। उन्होंने कहा कि जस्ट डन देश के नागरिकों को आधुनिक ई कॉमर्स से उनके कौशल विकास और प्रतिभा को निखारता है। स्वरोजगार अभियान से जुड़ना वाला प्रत्येक नागरिक राष्ट्र निर्माण में सीधा योगदान तो देता ही है, हर वर्चुवल ओनर भारत की आर्थिक पुनर्जागरण का सहभागी भी बनता है।
राष्ट्रीय प्रवक्ता बी एन तिवारी के अनुसार हिन्दू स्वरोजगार सभा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ओम पाल सिंह ने बैठक में स्वरोजगार मिशन की आगे की राह का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य केवल एक करोड़ स्वरोजगार उपलब्ध करवाने तक ही सीमित नहीं है, वरन यह आत्मनिर्भर भारत की नींव है, जहां देश के नागरिक आय अर्जित करने के साथ नेतृत्व करेंगे, निर्माण करेंगे और दूसरों को प्रेरित करेंगे। उन्होंने कहा कि सपने देखने का समय समाप्त हो चुका है और अब कार्य करने का समय है। उन्होंने देश के नागरिकों से अखिल भारत स्वरोजगार मिशन से जुड़ने और भारत की सबसे बड़ी आर्थिक आजादी व राष्ट्रीय विकास की मुहिम का हिस्सा बनने का आह्वान किया।

राहुल गांधी की अनुपस्थिति पर भाजपा का हमला, कांग्रेस ने किया बचाव

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भारत के 15वें उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अनुपस्थिति को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राधाकृष्णन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उन्होंने संवैधानिक मूल्यों की अवहेलना की है। भंडारी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी भारतीय संविधान और लोकतंत्र से नफरत करते हैं, इसीलिए वे उपराष्ट्रपति के शपथ ग्रहण जैसे ऐतिहासिक और आधिकारिक कार्यक्रम से दूर रहे। उन्होंने यह भी कहा कि गांधी पहले भी लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह से अनुपस्थित रहे थे, जबकि उनके पास विदेश में छुट्टियां बिताने का समय था।

भाजपा प्रवक्ता ने गांधी को “लोकतंत्र के लिए खतरा” करार देते हुए उनकी सार्वजनिक जीवन के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए।

वहीं, कांग्रेस ने राहुल गांधी की अनुपस्थिति का बचाव किया। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस कार्यक्रम में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया। कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि विपक्षी नेता के लिए हर संवैधानिक समारोह में उपस्थित होना कोई अनिवार्यता नहीं है। उन्होंने भाजपा पर संविधान को कमजोर करने का आरोप लगाया और कहा कि गांधी हमेशा संविधान की रक्षा के लिए संघर्षरत रहते हैं।

गौरतलब है कि अधिकांश विपक्षी नेता 2022 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल नहीं हुए थे। धनखड़, जिन्होंने हाल ही में स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया था, आज के कार्यक्रम में मौजूद रहे।

इस मुद्दे पर भाजपा सहयोगी शिवसेना ने भी विपक्षी नेताओं की आलोचना की। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि विपक्ष को संवैधानिक अवसरों का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए।

धर्मांतरण रोकथाम विधेयक पारित होने पर विश्व सनातन संघ ने सरकार का आभार व्यक्त किया

जयपुर(राष्ट्र की परम्परा) विश्व सनातन संघ राष्ट्रीय कोर कमेटी की बैठक में धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा पारित किए गए विधेयक का विश्व सनातन संघ ने स्वागत किया है और इसके लिए सरकार का हृदय से आभार व्यक्त किया है।
विश्व सनातन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रभान शर्मा ने कहा कि यह विधेयक राष्ट्र और समाज के लिए ऐतिहासिक एवं दूरगामी परिणाम लाने वाला साबित होगा। लंबे समय से छल-कपट और प्रलोभन के माध्यम से किए जा रहे धर्मांतरण से समाज की एकता और संस्कृति पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था अतः सरकार द्वारा लाया गया यह कानून सनातन संस्कृति एवं परंपराओं की रक्षा के साथ-साथ सामाजिक समरसता को सशक्त करेगा। संघ के संरक्षक विष्णुदास नागा ने इसे एक साहसिक और सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि धर्मांतरण केवल व्यक्तिगत आस्था का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए चुनौती बन चुका था। यह विधेयक आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में मार्गदर्शक सिद्ध होगा।
संघ के महासचिव डॉ राकेश वशिष्ठ ने कहा कि इस कानून के क्रियान्वयन से उन असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगेगा जो आर्थिक या अन्य प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन करवाते हैं। उन्होंने कहा कि यह निर्णय राष्ट्रहित में मील का पत्थर साबित होगा।
संघ के महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष संगीता शर्मा ने कहा कि धर्मांतरण का सबसे अधिक असर महिलाओं और गरीब परिवारों पर पड़ता है। यह कानून उन्हें सुरक्षा और संरक्षण देगा।
संघ के राष्ट्रीय सलाहकार जेपी शर्मा ने कहा कि यह कानून सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए आवश्यक था और इसे जनता का व्यापक समर्थन मिलेगा।
विश्व सनातन संघ ने एक स्वर में आम नागरिकों से अपील की कि वे जागरूक रहकर समाज में हो रहे किसी भी प्रकार के छलपूर्वक धर्मांतरण का विरोध करें और सरकार के प्रयासों में सहभागी बनें।

युवा वाहिनी फाउंडेशन का “कावड़ पदयात्रा का सम्मान समारोह “

14 सितंबर को भजन संध्या प्रसादी का आयोजन नीरजा मिश्रा और बिताँसा तिवारी देंगी प्रस्तुति

बदलापुर /महाराष्ट्र (राष्ट्र की परम्परा) बदलापुर( पूर्व )युवा वाहिनी फाउंडेशन द्वारा भव्य कावड़ पदयात्रा 2025 सम्मान समारोह का आयोजन 14 सितंबर 2025 रविवार को 5:30 बजे से 9:30 बजे तक शुभ वाटिका बैंक्विट हॉल गोविंद निवास सोसायटी सारस्वत बैंक के पीछे जूना डीपी रोड कात्रप में किया जा रहा है।
इस अवसर में भक्ति रस मे सराबोर करने वाली भजन संध्या राधिका सुर संगम का आयोजन होगा, इसमें सुप्रसिद्ध भजन गायिका नीरजा मिश्रा और वीतांसा तिवारी अपनी मधुर वाणी से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध करेगी।
कार्यक्रम के पश्चात सभी श्रद्धालुओं के लिए भोजन महाप्रसादी की भी व्यापक व्यवस्था रखी गई है. संस्था के अध्यक्ष अभिषेक राव ने जानकारी दी है कि युवा वाहिनी फाउंडेशन विगत कई वर्षों से कावड़ पदयात्रा का आयोजन करती आ रही है। जिसमें बदलापुर कुंडेश्वर महादेव मंदिर से अम्बरनाथ प्राचीन शिव मंदिर तक कांवड़ पद यात्रा निकाली जाती है जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। राव ने आगे बताया कि इसी उपलक्ष्य में सम्मान समारोह का आयोजन किया जाता है जिसमें समाज के प्रतिष्ठित लोग और सम्मानित लोग का सम्मान किया जाता है।
कार्यक्रम की समस्त व्यवस्था संस्था के सचिव अक्षय कुमार कुशवाहा और कोषाध्यक्ष रामानंद चौरसिया के मार्गदर्शन में पूरी तत्परता से किया जाता रहा है।

मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने अयोध्या में रामलला के किए दर्शन, सीएम योगी रहे साथ

अयोध्या (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) भारत की राजकीय यात्रा पर आए मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम शुक्रवार को अयोध्या पहुँचे। यहाँ उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भगवान रामलला के दर्शन-पूजन किए। इस दौरान उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।

अयोध्या आगमन पर प्रधानमंत्री रामगुलाम का पारंपरिक और गर्मजोशी से स्वागत किया गया। पूरा शहर पोस्टरों और बैनरों से सजाया गया था। इससे पहले वे वाराणसी पहुंचे थे, जहाँ उन्होंने ऐतिहासिक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन किए।

सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियाँ

मॉरीशस पीएम की इस हाई-प्रोफाइल यात्रा को लेकर प्रशासन ने चाक-चौबंद इंतजाम किए। अयोध्या के एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बताया कि सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियाँ की गईं। जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने स्थलों का गहन निरीक्षण किया और मिनट-दर-मिनट कार्यक्रम की योजना तैयार की गई। वीआईपी के आगमन से लेकर प्रस्थान तक विशेष प्रबंध किए गए हैं।

द्विपक्षीय सहयोग पर हुई अहम बैठक

गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री रामगुलाम के साथ वाराणसी में मुलाकात की। बैठक में दोनों नेताओं ने बुनियादी ढाँचा, स्वास्थ्य, डिजिटल प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने पर सहमति जताई। साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

यह बैठक भारत और मॉरीशस के बीच सभ्यतागत जुड़ाव और आध्यात्मिक बंधनों की मजबूती को रेखांकित करती है, जिसने दोनों देशों के विशेष संबंधों को और प्रगाढ़ किया है।

राजकीय यात्रा का महत्व

यह यात्रा मार्च 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की मॉरीशस यात्रा से उत्पन्न सकारात्मक गति को आगे बढ़ा रही है। उसी यात्रा में दोनों देशों के संबंधों को ‘उन्नत रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया गया था।

प्रधानमंत्री रामगुलाम अपने वर्तमान कार्यकाल में 9 से 16 सितंबर तक भारत की पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा पर हैं। यह यात्रा प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर हो रही है।

ई-स्मार्ट मामले पर भड़के पार्षद नगर आयुक्त कार्यालय में धरना

नगर निगम कार्यालय में धरने पर बैठ गए पार्षद

शाहजहाँपुर(राष्ट्र की परम्परा )
नगर निगम की खस्ताहाल व्यवस्था और ई-स्मार्ट कंपनी की मनमानी को लेकर शुक्रवार को पार्षदों का गुस्सा फूट पड़ा। नगर आयुक्त डॉ. विपिन कुमार मिश्रा के कार्यालय में पार्षदों ने घेराव कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। पार्षदों का आरोप है कि स्ट्रीट लाइटों के रख-रखाव का ठेका निजी कंपनी को देने के बाद से महानगर घुप्प अंधेरे में डूबा हुआ है। हर माह नगर निगम से 38 लाख रुपये वसूलने वाली कंपनी न तो लाइटें दुरुस्त करती है और न ही शिकायतों पर ध्यान देती है।पार्षदों ने कहा कि जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है, जबकि सड़कों पर अंधेरा पसरा रहता है। नगर निगम पर खाओ कमाओ नीति अपनाने के आरोप लगाते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक समस्या का समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। धरना स्थल पर भाजपा, निर्दलीय समेत तमाम पार्षद मौजूद रहे। प्रदर्शन के चलते नगर निगम कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

दिल्ली में बीयर पीने की उम्र घटाने पर विचार

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)दिल्ली सरकार अपनी नई आबकारी नीति के तहत बीयर पीने की कानूनी उम्र 25 से घटाकर 21 साल करने पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश वर्मा की अध्यक्षता वाली हाई लेवल कमेटी इस प्रस्ताव पर विभिन्न हितधारकों से चर्चा कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि यह कदम दिल्ली को गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे पड़ोसी एनसीआर शहरों के अनुरूप लाने के लिए है, जहां पहले से ही उम्र सीमा 21 साल है। मौजूदा असमानता के कारण युवा उपभोक्ता अक्सर दिल्ली से बाहर शराब खरीदते हैं, जिससे सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व नुकसान उठाना पड़ता है।

अनुमान है कि दिल्ली को आबकारी शुल्क से सालाना करीब 8,000 करोड़ रुपये की आय होती है, लेकिन लीकेज के कारण 4,000-5,000 करोड़ रुपये का घाटा होता है। सरकार का मानना है कि नई नीति लागू होने से यह नुकसान कम होगा और राजस्व 12,000 करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है।

देवरिया में रोजगार मेले में 175 अभ्यर्थियों का चयन

देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा)
राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड व जिला सेवायोजन कार्यालय, देवरिया के संयुक्त तत्वावधान में सी.सी. रोड स्थित कौशल चन्द्र टॉवर में आयोजित निःशुल्क रोजगार मेले में 311 अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग किया। इनमें से 07 कंपनियों ने 175 अभ्यर्थियों का प्रारंभिक चयन किया।
कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी प्रत्यूष पाण्डेय, आई.आई.ए. के राष्ट्रीय सचिव ज्योति प्रकाश जायसवाल व अन्य अतिथि उपस्थित रहे। मेले का सफल संयोजन एन.एस.आई.सी. प्रबंधक रोहित सिंह और जिला सेवायोजन अधिकारी रोहन अपूर्व सिन्हा ने किया।

परिवर्तनकारी शिक्षक महासंघ ने प्राचार्य आफताब आलम को शिक्षा भूषण सम्मान से किया सम्मानित

अररिया/बिहार (राष्ट्र की परम्परा )
परिवर्तनकारी शिक्षक महासंघ, बिहार की ओर से डायट फारबिसगंज के प्राचार्य आफताब आलम को शिक्षा भूषण सम्मान 2025 से सम्मानित किया गया।

यह सम्मान समारोह पर्यटन मंत्री, बिहार सरकार श्री राजू कुमार सिंह एवं महासंघ के प्रदेश संयोजक प्रणय कुमार के निर्देशानुसार आयोजित किया गया। महासंघ के प्रदेश कोषाध्यक्ष सह प्रधान शिक्षक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार ने मोमेंटो एवं अंगवस्त्र प्रदान कर प्राचार्य आलम का सम्मान किया।

इस अवसर पर श्री अशोक कुमार ने कहा कि डायट फारबिसगंज के प्राचार्य ने संस्था की बेहतरीन व्यवस्था, कुशल प्रबंधन एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इन्हीं कारणों से उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया है।

सम्मान समारोह में मुख्य रूप से गोपाल जी, रवि कुमार, जितेंद्र कुमार, मोहम्मद अफजल, मोहम्मद अजहर, ऋषिकांत निगम, विनोद कुमार, रंजन कुमार, रंजेश कुमार सहित सैकड़ों प्रशिक्षु प्रधान शिक्षक उपस्थित रहे।

परंपराओं से कटाव और समाज का विघटन

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वामपंथी सोच और भारतीय संस्कृति: समृद्धि या विकृति?

भारत, एक ऐसा देश जहां संस्कृति, धर्म, कला, और साहित्य की जड़ें सदियों से फैली हुई हैं, आज एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। यह देश विविधताओं में एकता का प्रतीक है, और इसकी सांस्कृतिक धरोहर विश्वभर में प्रशंसा पाती है। लेकिन पिछले कुछ दशकों में, वामपंथी विचारधारा ने भारतीय समाज के कई पहलुओं पर अपनी गहरी छाप छोड़ी है। इस विचारधारा ने साहित्य, कला, शैक्षिक संस्थानों, और इतिहास के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति को चुनौती दी है। वामपंथी विचारधारा का भारतीय समाज पर क्या प्रभाव पड़ा है, इसे समझने के लिए हमें इसके विभिन्न पहलुओं का गहराई से विश्लेषण करना होगा।

वामपंथी विचारधारा ने भारतीय साहित्य और कला में आधुनिकता के नाम पर ऐसे बदलाव लाने की कोशिश की है, जो भारतीय समाज के पारंपरिक और सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ हैं। साहित्य और कला समाज की संवेदनाओं और मानसिकताओं को प्रकट करने का माध्यम होते हैं। साहित्यकारों और कलाकारों की जिम्मेदारी होती है कि वे समाज को सही दिशा में मार्गदर्शन करें, न कि उसे भ्रमित करें। वामपंथी विचारकों ने साहित्य में अश्लीलता, विकृत मानसिकताओं और व्यक्तिगत संबंधों की विकृति को ‘आधुनिकता’ के नाम पर प्रस्तुत किया है। यह केवल समाज में नैतिकता की गिरावट का कारण नहीं बनता, बल्कि यह समाज में असंतुलन और असहमति की स्थिति भी उत्पन्न करता है।

वामपंथी लेखकों ने भारतीय धर्म, संस्कृति और परंपराओं को नकारात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया। उन्होंने देवी-देवताओं, धार्मिक परंपराओं और संस्कारों का मजाक उड़ाया, और इसे साहित्य में “आधुनिकता” के रूप में प्रस्तुत किया। जब साहित्यकार समाज की जड़ों से कटकर केवल पश्चिमी विचारधारा को अपनाते हैं, तो वे समाज के पारंपरिक मूल्यों और नैतिकताओं से दूर हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप, भारतीय साहित्य और कला में एक खोखली और विकृतता फैलने लगती है।

वामपंथी विचारधारा ने कला के माध्यम से भी भारतीय समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को चुनौती दी है। कलाकारों ने परंपरागत रूपों को छोड़कर आधुनिक कला को अपनाया, जो भारतीय संस्कृति और उसकी गहरी जड़ों से कटकर बाहरी प्रभावों को स्वीकार करता है। यही कारण है कि भारतीय कला में पारंपरिक रूपों की जगह पश्चिमी और वैश्विक विचारधारा का दबदबा बढ़ा है, जो भारतीय समाज के साथ न सुसंगत हैं।

भारतीय शैक्षिक संस्थान, जहां युवा पीढ़ी अपनी शिक्षा प्राप्त करती है, वहां वामपंथी विचारधारा का गहरा प्रभाव है। कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में वामपंथी विचारकों ने अपनी विचारधारा को छात्रों पर थोपने का प्रयास किया है। यह विचारधारा भारतीय समाज की वास्तविकता और संस्कृति से दूर होती है और कभी-कभी इसे विकृत रूप में प्रस्तुत करती है। छात्रों को यह सिखाने के बजाय कि भारतीय संस्कृति, धर्म, और परंपराओं की अपनी गहरी अहमियत है, इन संस्थानों में अक्सर उन्हें आलोचनात्मक दृष्टिकोण से पेश किया जाता है। वामपंथी विचारधारा का यह प्रयास छात्रों में भ्रम और असंतुलन उत्पन्न करता है।

वामपंथी विचारक भारतीय इतिहास को भी एक निश्चित दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं, जिसमें केवल नकारात्मक पक्षों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। जातिवाद, असमानताएँ, और सामंती व्यवस्था जैसी समस्याओं को तो बड़े पर्दे पर लाया जाता है, लेकिन भारतीय समाज में सहिष्णुता, प्रेम, और विविधता के पक्षों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। जब विद्यार्थियों को एकतरफा दृष्टिकोण से शिक्षा दी जाती है, तो वे भारतीय समाज की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक धरोहर को सही तरीके से नहीं समझ पाते। इसके परिणामस्वरूप, एक नई पीढ़ी को ऐसी शिक्षा मिलती है, जो समाज के बारे में एक पक्षीय और विकृत दृष्टिकोण अपनाती है।

वामपंथी विचारधारा के प्रभाव में, छात्र संगठनों ने भी भारतीय समाज और संस्कृति की आलोचना करना शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालयों में आयोजित बहसों और विचार-विमर्शों में अक्सर यह देखा जाता है कि वामपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए किसी भी कीमत पर भारतीय परंपराओं और धर्मों का मजाक उड़ाया जाता है। यह भारतीय समाज के लिए हानिकारक हो सकता है क्योंकि यह भारतीय संस्कृति की नींव को कमजोर करता है और समाज के भीतर असहमति उत्पन्न करता है।

भारतीय इतिहास में वामपंथी विचारधारा का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। वामपंथी इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास के अंधेरे पहलुओं को उजागर किया है, जैसे जातिवाद, सामंती व्यवस्था, और ब्रिटिश शासन की आलोचना। हालांकि, इन पहलुओं को नकारना नहीं चाहिए, लेकिन वामपंथी दृष्टिकोण भारतीय इतिहास को एकतरफा और विकृत रूप में प्रस्तुत करता है।

वामपंथी इतिहासकार भारतीय धर्म, संस्कृति, और परंपराओं को आलोचना करते हैं और उन्हें तुच्छ रूप में प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने भारतीय समाज के असमानताओं और संघर्षों को ही प्रमुख रूप से प्रस्तुत किया है और कभी भी भारतीय सभ्यता के सकारात्मक पहलुओं को महत्व नहीं दिया। भारतीय समाज में जिस प्रकार का सामूहिक प्रेम, सहिष्णुता, और अहिंसा का संदेश है, उसे वामपंथी इतिहासकारों ने नज़रअंदाज़ कर दिया है। इस दृष्टिकोण से भारतीय इतिहास को एकतरफा रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जो भारतीय संस्कृति और समाज के वास्तविक स्वरूप से बहुत दूर है।

यह विडंबना है कि कुछ राष्ट्रवादी विचारक और नेता, जो पहले वामपंथी विचारधारा के आलोचक थे, अब उन्हें मंचों पर बुलाते हैं और उनके विचारों को अपनाने की कोशिश करते हैं। यह स्थिति भारतीय राजनीति के लिए खतरनाक हो सकती है, क्योंकि इससे राष्ट्रवाद की असली भावना कमजोर हो जाती है। राष्ट्रवाद का उद्देश्य केवल भारतीय संस्कृति और परंपराओं की रक्षा करना होना चाहिए, लेकिन जब ऐसे विचारक, जो पहले भारतीय धर्म और संस्कृति का मजाक उड़ाते थे, अब राष्ट्रवाद का चेहरा बनने की कोशिश करते हैं, तो यह स्थिति समाज में भ्रम उत्पन्न करती है।

राष्ट्रवाद का वास्तविक उद्देश्य भारतीय समाज के सामूहिक हितों की रक्षा करना है, और इसके लिए हमें अपनी संस्कृति, धर्म, और परंपराओं की रक्षा करनी होगी। वामपंथी विचारक अब राष्ट्रवाद का हिस्सा बनकर अपने पुराने विचारों से पलायन कर रहे हैं, जिससे भारतीय समाज में एक नया भ्रम पैदा हो रहा है। जब राष्ट्रवादी विचारक वामपंथी विचारधारा को स्वीकारने की कोशिश करते हैं, तो यह राष्ट्रवाद की सच्चाई को कमजोर करता है।

वामपंथी विचारधारा ने भारतीय समाज के पारंपरिक मूल्यों को कमजोर किया है। भारतीय समाज में परिवार और रिश्ते केवल सामाजिक संस्थाएँ नहीं होते, बल्कि यह धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होते हैं। लेकिन वामपंथी विचारधारा ने इसे केवल एक सामाजिक संस्था के रूप में प्रस्तुत किया है, जो व्यक्तिगत स्वार्थ और अधिकारों पर आधारित है। यह दृष्टिकोण समाज में असंतुलन पैदा करता है और पारंपरिक परिवार व्यवस्था को कमजोर करता है।

वामपंथी विचारधारा ने भारतीय समाज में उन मूल्यों को भी नष्ट करने का प्रयास किया है, जो समाज के सामूहिक हितों को प्राथमिकता देते हैं। जैसे कि भारतीय समाज में गुरू-शिष्य परंपरा, परिवार के प्रति समर्पण, और समाज के प्रति दायित्व की भावना अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। लेकिन वामपंथी विचारधारा ने इसे केवल एक “पारंपरिक” और “अहंकारी” दृष्टिकोण के रूप में पेश किया है, जिससे समाज में असंतुलन और असहमति की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

वामपंथी विचारधारा ने भारतीय समाज में सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से कई विकृतियाँ फैलाई हैं। इस विचारधारा ने साहित्य, कला, शिक्षा और इतिहास के माध्यम से भारतीय संस्कृति और समाज के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण विकसित किया है। हमें यह समझने की आवश्यकता है कि भारतीय समाज की शक्ति और एकता केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक विश्वासों में ही निहित है। वामपंथी विचारधारा का विरोध करना हमारा कर्तव्य है, ताकि हम अपनी सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा कर सकें।

अब समय आ गया है कि हम वामपंथी विचारों को पहचानें और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए सक्रिय कदम उठाएँ। यही हमारी जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपनी सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक विश्वासों से जुड़ी रहें और हमारे समाज की एकता और शक्ति बनी रहे।

डॉo सत्यवान सौरभ,
कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार