Wednesday, July 15, 2026
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राष्ट्रीय विद्यालय प्रबंधक संघ के तीन ब्लाकों की ब्लॉक इकाई गठित


देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा)।राष्ट्रीय विद्यालय प्रबंधक संघ के पदाधिकारियों की बैठक रविवार प्रदेश संगठन मंत्री विजय पटेल व जिलाध्यक्ष जनार्दन चौहान के नेतृत्व में शहर स्थित जोनिया सेंट्रल पब्लिक स्कूल में हुई। इसमें देवरिया सदर, बैतालपुर व गौरीबाजार ब्लाक इकाई का गठन किया गया।
इस दौरान देवरिया सदर में हेमंत सिंह को अध्यक्ष व महामंत्री हेतु अमित कुमार श्रीवास्तव को सर्वसम्मति से चुना गया। इसी क्रम में एसएनके एकेडमी गौरीबाजार में गौरीबाजार ब्लॉक के पदाधिकारियों को गठन किया गया। जिसमें गौरीबाजार ब्लॉक अध्यक्ष हेतु आदित्य यादव, उपाध्यक्ष हेतु अनिरुद्ध निषाद व पवन यादव को ब्लॉक महामंत्री सर्वसम्मति से चुना गया। बैतालपुर ब्लॉक इकाई का गठन आरबीवाई चिल्ड्रेन एकेडमी बेलावर, दुबावर में हुआ। जिसमें उमेश चंद यादव को अध्यक्ष व सतीश चंद यादव को महामंत्री चुना गया। चुने गए ब्लॉक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व महामंत्री ने समस्त जिला पदाधिकारियों व सदस्यों का आभार प्रकट किया। इस दौरान राष्ट्रीय विद्यालय प्रबंधक संघ के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह, विधिक सलाहकार विश्वविजय मल्ल, जिला महामंत्री सच्चिदानंद मिश्र, जिला संगठन मंत्री श्रीप्रकाश पांडेय, जिला मीडिया प्रभारी विपिन कुमार शर्मा, वरिष्ठ जिला मीडिया प्रभारी सूरज प्रसाद आर्य, जिला संगठन मंत्री हृदय कुमार पाठक, विवेकानंद यादव, आनंद त्रिपाठी, जय प्रकाश गौर, जय सिंह चौहान, अभिनीत कुमार श्रीवास्तव, रामेश्वर पाल, राम अवतार यादव, प्रेम प्रकाश, राधेश्याम मिश्र व कमलेश्वर द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।

निष्पक्षता व निडरता के साथ कलम की ताकत को रखें मजबूत – नागेंद्र नाथ शर्मा

ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन की बैठक पत्रकार भवन में हुआ संपन्न

सलेमपुर,देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। लोकतंत्र के सजग प्रहरी व दबे कुचले व निराश्रित लोगों की सशक्त आवाज होता है पत्रकार उसे निष्पक्षता व निडरता के साथ कलम की ताकत को मजबूत रखना होगा।उक्त बातें ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन सलेमपुर की बैठक जो नगर के हरैया लाला स्थित पत्रकार भवन में आयोजित हुई उसको सम्बोधित करते हुए जिलाध्यक्ष नागेन्द्र नाथ शर्मा ने कहा। उन्होंने कहा कि संगठन को मजबूत बनाने, पत्रकारों की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाने तथा संगठन की आगामी कार्य योजना को पूरे मनोयोग से करने की आवश्यकता है। तहसील अध्यक्ष श्यामनारायन मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता समाज का दर्पण है, इसलिए निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ कलम की ताकत को बुलन्द रखना है।इस महीने के 16 तारीख को संगठन के निर्देश के क्रम में एसोसिएशन जिला अधिकारी को एक 16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपेगा जो पत्रकारों हितों की रक्षा हेतु होगा इस दौरान अधिक से अधिक पत्रकारों की उपस्थिति अनिवार्य है ।जिला उपाध्यक्ष रामनवल सिंह ने कहा कि आगामी जिला सम्मेलन हेतु तैयारियों पर संगठन के साथियों को अभी से मनोयोग से लग जाना है ।बैठक को के पी गुप्ता,प्रमोद कुमार राय,आनन्द उपाध्याय,अवधनारायण मिश्र,डॉ धर्मेन्द्र पांडेय,प्रेमचंद मिश्र, रत्नेश यादव,दिनेश कसेरा,,रामू यादव,योगेश तिवारी, मो० फैज ईनाम,शशांक भूषण मिश्र,अनूप कुमार उपाध्याय,धीरेन्द्र दुबे,विपिन कुमार जायसवाल,राजेंद्र बहादुर सिंह,रामू यादव,संजीव कुमार,ओमप्रकाश मिश्रा,जितेंद्र नाथ पाण्डेय,श्यामू यादव,रामविलास तिवारी, संतोष सिंह आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता श्यामनारायन मिश्र व संचालन डॉ धर्मेन्द्र पांडेय ने किया।

हिन्दी आस, विश्वास और स्वास की भाषा-प्रो. श्री प्रकाश मणि


देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा)। नागरी प्रचारिणी सभा के तत्वावधान में रविवार को हिन्दी दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया। इस दौरान शिक्षा व अन्य क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले विद्वानों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
इस दौरान अध्यक्ष डॉ. जयनाथ मणि त्रिपाठी, मंत्री डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी, उपाध्यक्ष इन्द्र कुमार दीक्षित व डॉ. दिवाकर प्रसाद तिवारी, संयुक्त मंत्री डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, बृजेश पांडेय, कोषाध्यक्ष सरोज कुमार पाण्डेय, आय व्यय निरीक्षक वृद्धि चन्द्र विश्वकर्मा ने प्रो. आरएस सर्राजू पूर्व सम कुलपति हिन्दी विभाग, हैदराबाद विश्वविद्यालय हैदराबाद को नागरी रत्न, प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी पूर्व कुलपति इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक, मध्यप्रदेश को नागरी भूषण एवं गीतकार भूषण त्यागी को नागरी श्री सम्मान से प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रो. आरएस सर्राजू ने कहा कि आज भूमण्डलीकरण के दौर में प्रायः प्रतिष्ठान, दुकान पर नाम अंग्रेजी में लिखे मिलते हैं। ऐसा होने से हम अपनी संस्कृति और भाषा से दूर होते जा रहे हैं। कम से कम इतना तो होना ही चाहिए कि प्रतिष्ठानों के नाम हिन्दी या अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में लिखे जायें। अपनी बात कहूं तो हिन्दी सीखने के लिए मैंने बनारस, इलाहाबाद, पटना आदि की यात्रा की। मैं हिन्दी और भारतीय भाषाओं को नमन करता हूं। आप लोगों ने मुझे सम्मानित किया इसके लिए बधाई। नागरी भूषण सम्मान से सम्मानित प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने सभा और सभा परिवार को धन्यवाद देते हुए कहा जिस भाषा को राष्ट्र और राष्ट्र नायकों का साथ मिल जाता है वह बहुत उन्नत हो जाती है। हिन्दी हमारे आचार विचार के साथ सत्व और निजत्व की भाषा है। यह हमारी सांस्कृतिक पहचान है। हिन्दी आस, विश्वास और स्वास की भाषा है। यह प्रीति और प्यार की भाषा है। हिन्दी हमारे स्पंदन के अभिव्यक्ति की भाषा है। इसके विकास यात्रा में भारतीय कामगारों की विशेष भूमिका है, जब तक यह जन के साथ रहेगी आगे बढती रहेगी। नागरी श्री सम्मान से सम्मानित कवि भूषण त्यागी ने कहा अपने घर में सम्मानित होना बहुत ही सुखद और आह्लादकारी होता है। अपने घर में यह मेरा दूसरा सम्मान है मैं इस पूरी सभा का बहुत बहुत आभारी हूं। उन्होंने स्वयं से शिकायत यही रात दिन, कुछ लिखा क्यों नहीं आदमी के लिए एवं आलोक नहीं मरने वाला सुनाया। इसके पश्चात 12 सितम्बर को हुए वाद-विवाद प्रतियोगिता में सफल हुए बच्चों को अतिथि गण ने पुस्तक और प्रमाण-पत्र देकर पुरस्कृत किया। इससे पूर्व अतिथियों ने सभा के अध्यक्ष, मंत्री पदाधिकारियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभरम्भ किया। वाणी वन्दना दयाशंकर कुशवाहा एवं स्वागत गीत छेदी प्रसाद गुप्त विवश ने प्रस्तुत किया। इस दौरान आजीवन सदस्यता ग्रहण करने वाले सदस्यों ई. रमेश तिवारी, डॉ. मधुसूदन मिश्र एवं शरदेन्दु मिश्र को शपथ दिलायी गई एवं प्रमाण पत्र दिया गया। इसके पूर्व आयोजित द्वितीय रविवारीय कवि गोष्ठी में पवन प्रज्ञान, उमेश चन्द्र तिवारी, लालता प्रसाद चौधरी, विकास तिवारी विक्की, बृजेन्द्र नाथ त्रिपाठी, नन्दलाल मणि, योगेन्द्र पाण्डेय, नित्यानंद पाण्डेय, रविनंदन सैनी, गोपाल जी त्रिपाठी, सौदागर सिंह, रमेश सिंह दीपक, अवधेश निगम राजू, प्रीति पाण्डेय, संजय कुमार राव, राम मनोहर मिश्र, रत्नेश सिंह रतन आदि कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। इस अवसर पर डॉ. जयनाथ मणि त्रिपाठी की पुस्तक सृजन, समीक्षा और संवाद के बेल पत्र एवं गिरिधर करुण की काव्य पुस्तक कोरे कागज के आखर का लोकार्पण हुआ। कवि गोष्ठी का संचालन प्रार्थना राय एवं सम्मान समारोह का संचालन रविप्रकाश मिश्र ने किया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. सौरभ श्रीवास्तव ने आभार प्रकट किया। सभा के मंत्री डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी ने अतिथियों का परिचय देते हुए शाब्दिक स्वागत किया। इस दौरान जगदीश उपाध्याय, रवीन्द्र नाथ तिवारी, अरुण कुमार राव, कौशल कुमार मिश्र, डॉ अभय कुमार द्विवेदी, शिव प्रकाश मिश्र, डॉ मधुसूदन मणि त्रिपाठी, ऋषिकेश मिश्र, हिमांशु कुमार सिंह, श्वेतांक मणि त्रिपाठी, रमेश चन्द्र त्रिपाठी, दुर्गा पाण्डेय, डॉ शकुन्तला दीक्षित, वीरेंद्र कुमार शुक्ल, बृजेश पाण्डेय प्रबन्धक, आशुतोष त्रिपाठी, वरुण पाण्डेय, गोपाल कृष्ण सिंह रामू, सोमनाथ मिश्र, रजनीश मोहन गोरे, परमेश्वर जोशी आदि गणमान्य उपस्थित रहे।

स्वस्थ नारी ,सशक्त परिवार अभियान के संदर्भ में डीएम की समीक्षा बैठक

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा द्वारा कैंप कार्यालय में स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान के संदर्भ में संबंधित विभागों के साथ समीक्षा बैठक की गई।
बैठक में जिलाधिकारी ने 17 सितंबर से 02 अक्टूबर तक स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान को व्यापक और प्रभावी ढंग से चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने समस्त सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य शिविर का उद्घाटन जनप्रतिनिधियों द्वारा करवाने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी सहयोगी विभागों को सोमवार 12:00 बजे तक अभियान के संदर्भ में अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। सभी विभागों को अपनी तैयारी को समय से पूर्ण करने और अभियान को वृहद स्तर पर आयोजित करने का निर्देश दिया।
इससे पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ श्रीकांत शुक्ला ने स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान की रूपरेखा से जिलाधिकारी को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि 17 सितंबर से 02 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले सेवा पर्व के अंतर्गत स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान का संचालन किया जाएगा। अभियान का केंद्रीय तत्व महिला स्वास्थ्य है। इस अभियान में ओपीडी पंजीकरण भारत सरकार द्वारा निर्मित विशेष ऐप एसएन एसपीए पर किया जाएगा।
इस दौरान बैठक में सीएमओ डॉ श्रीकांत शुक्ला, जिला विकास अधिकारी बी.एन. कन्नौजिया, जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेश कुमार, सीएमएस डॉ. ए.के. द्विवेदी, डीपीआरओ श्रेया मिश्रा सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहें।

365 दिन अपने बलबूते खड़ी रहती है हिंदी

हिंदी पखवाड़ा पर केंद्रित

हिंदी की खोज-खबर लेने का विशेष दिन है हिंदी दिवस. इस अवसर पर कुछ औपचारिक कार्यक्रम होते हैं. हिंदी की दशा और दिशा पर सुख-दुख व्यक्त किया जाता है. कोई डराता है तो कोई उत्साह प्रकट करता है. तरह-तरह की संभावनाएं रेखांकित की जाती हैं. इसी तरह की रस्म अदायगी के साथ एक पखवाड़ा पूरा कर लिया जाता है.

हिंदी की ऐतिहासिक और क्रांतिकारी भूमिका के कारण उसका उत्सव मनाया जाना वाजिब है. राजभाषा हिंदी और उसका समृद्ध साहित्य
निश्चय ही गौरवान्वित करने वाला है. किंतु इससे यह समझ विकसित करना कि हिंदी दिवस या पखवाड़ा मनाने से हिंदी ताकत अर्जित करती है, संदेहास्पद है. हिंदी के उन्नयन एवं विकास की चिंता से अभिसिंचित हिंदी दिवस से हिंदी का कोई विशेष हित नहीं सधता है. हिंदी वर्षभर अपने बलबूते खड़ी रहने वाली भाषा है.

हिंदी की शक्ति को समझने के लिए उसकी मौसेरी बहन उर्दू को गौर करने की जरूरत है. उर्दू एक बेहद खूबसूरत भाषा है. नजाकत और नफासत से भरी उर्दू की खुशबू से कौन नहीं वाकिफ होगा! अदब की भाषा उर्दू का कोई शानी हो, मुश्किल है. इन सब के बावजूद उर्दू की स्थिति नाजुक है. उर्दू की स्वीकार्यता होने के बावजूद वह कमजोर स्थिति में नजर आती है.
इसका सबसे बड़ा कारण है उर्दू का ज्ञान की भाषा में तब्दील न हो पाना. और यही हिंदी की शक्ति का मूल है. मौजूदा समय में हिंदी ज्ञान की भाषा के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है. इसमें अनुवाद की बड़ी भूमिका है. हिंदी ने देश दुनिया के बेहतरीन ज्ञान विज्ञान को अपनी भाषा में अनुवाद के माध्यम से शामिल कर स्वयं को समृद्ध किया है. वह इस प्रक्रिया में निरंतर विकासमान है. कहना न होगा कि वही भाषा बची रहेगी, जो ‘ज्ञान की भाषा’ होगी. संस्कृत को बोलने वाले मुश्किल से मिलेंगे. लेकिन संस्कृत आज भी सुरक्षित है और आगे भी रहेगी. इसका कारण एक है संस्कृत ज्ञान की भाषा है. ज्ञान की प्रासंगिकता जब तक रहेगी संस्कृत बनी रहेगी. इसमें हिंदी की भूमिका विशिष्ट है. वह राजभाषा है, बाजार की भाषा है, ज्ञान की भाषा है, सिनेमा की भाषा है, संवेदना और शिल्प की भाषा है. आम जुबान की भाषा है. और दुनिया को इस भाषा की जरूरत है.

एक भाषा के तौर पर हिंदी भारत का प्रतिरूप है. जिसमें उदारता, समावेशिका, स्वीकार्यता, समन्वय और विविधता को देखा जा सकता है. हिंदी का स्वरूप समय की मांग के अनुसार बनता व ढलता रहा है. जड़ता के खिलाफ है हिंदी. इसका लचीलापन विविधताओं का स्वागत करता रहा है. ‘आनो भद्रा क्र्तवो यन्तु विश्वतः’ का सुंदर उदाहरण है हिंदी. हिंदी की कमियां गिनाने वाले उसे बोलियों का समूह कहकर उलाहना देते हैं. जब किया उसकी उदारता और समावेशिका का परिचायक है. एक और जरूरी बात यह है कि यदि तमिलनाडु का व्यक्ति लड़खड़ाती हुई जुबान में हिंदी बोलता है तो यह हिंदी का प्रसार व स्वीकार्यता का द्योतक है. इसमें हिंदी के भ्रष्ट होने की संभावना नहीं खोजी जानी चाहिए. व्याकरण और शुद्धता का अत्यधिक आग्रह भारत जैसे बहुरंगी देश में उचित नहीं है. तमिलनाडु या केरल की लड़खड़ाती जुबान में भी हिंदी भारत को एकता के सूत्र में पिरोती है. हिंदी ने तमिलनाडु से तकनीकी तक प्रत्येक जगह अपनी सार्थक उपस्थिति दर्ज कराई है.

तेजी से बदल रही दुनिया के पीछे सबसे बड़ी भूमिका टेक्नोलॉजी की ही है. जिस विचार या टेक्नोलॉजी का समय आ गया हो, उसे रोका नहीं जा सकता. हाँ, सामंजस्य के बिंदु तलाशे जा सकते हैं. खारिज करने के बजाय संग्रह और त्याग की सीमा चिन्हित की जा सकती है. विविध संदर्भ में उसके प्रभाव पर विचार किया जा सकता है. समय के साथ प्रभाव की लकीरें अधिक स्पष्ट होती जाती हैं.

एआई और हिंदी के बीच बेहतर तालमेल दिख रहा है. हालांकि हिंदी का अपना दो संदर्भ है : भाषा और साहित्य. एआई अर्थात कृत्रिम बुद्धिमत्ता मूलतः और अंततः कृत्रिम ही है. इसका उत्पादन चाहे जितना सुंदर हो, किंतु होगा कृत्रिम ही. मसलन एआई से कविता गढ़ी जा सकती है. किंतु रचनात्मकता में फर्क की बारीक लकीरें होंगी ही. एआई के बावजूद नैसर्गिकता का सौंदर्य बचा रहेगा. साहित्य अमूमन अनदेखे, अनचीन्हे या धुंधले पड़ गए को उजागर करता है. जबकि एआई बखूबी देखे-पहचाने से ही शक्ति अर्जित करता है.

एआई बेहतरीन और बहुरंगी मजमून प्रस्तुत कर सकता है. कालिदास या शेक्सपीयर का विकल्प नहीं. मानव मन स्वयं में इतनी जटिलता समेटे हुए है कि उसे पूरी तरह डिकोड कर पाना लगभग असंभव है. इसी मन की अभिव्यक्ति के क्रम में श्रेष्ठतम रचे जाने के बावजूद अपरमपार संभावनाएं शेष हैं. संवेदनशीलता इसी अशेष को असीम सृजनात्मकता प्रदान करती है. एआई चाहे जितनी सुंदर तस्वीरें खींचे, कलाकार की कुंची लिओनार्दो द विंची रचती रहेगी.

हिंदी भाषा की दृष्टि से एआई की भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण प्रतीत हो रही है. हिंदी की समावेशी प्रवृत्ति में न केवल भिन्न भाषाओं के शब्द और ज्ञान को स्वीकार किया, बल्कि टेक्नोलॉजी के साथ भी बेहतर कदमताल की कोशिश करती रही है. एआई से हिंदी भाषा को मजबूती मिलेगी. हिंदी की पैठ लोगों के बीच बढ़ेगी. प्रथमया तो व्याकरण, शब्दकोश आदि की दृष्टि से लोगों की लेखनी दुरुस्त होगी. यह अपने आप में एक तरह का हिंदी को सीखने व बरतने का भी प्लेटफार्म हो सकता है.

एआई कार्यालय में प्रयुक्त होने वाली हिंदी की राह को आमजन के लिए भी सुबोध बना सकती है. कचहरी की भाषा अपनी दुरुहता और पुरानेपन के कारण बोधगम्यता की दृष्टि से कमजोर दिखती है. एआई इस दिशा में भी सहायक हो सकता है.

दुनिया के पटल पर हिंदी का बाजार अपने आकार के कारण मायने रखता है. एआई इसमें अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. भाषा और ज्ञान के स्तर पर दुनिया के साथ लेनदेन की प्रक्रिया में भी एआई की भूमिका निर्णायक हो सकती है. फिलहाल हम अभी एआई के पहले चरण में हैं. सावधानियां और फायदे दोनों ही मौजूद हैं. आने वाला समय बताएगा कि एआई की भूमिका कितनी परिवर्तनकारी होगी! हिंदी पखवाड़ा की हार्दिक शुभकामनाएं!

  • डॉ.अभिषेक शुक्ल,
    सहायक प्रोफेसर,
    दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय,
    गोरखपुर

व्रत पालन नही करने के कारण सियारिन को हुआ पश्चताप तब हुई संतान – आचार्य अजय शुक्ल

जीवित्पुत्रिका व्रत पर जयराम धाम मंगराइच में हुआ कथा का आयोजन

सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। भारत देश संस्कृति ,सभ्यता ,व्रत ,त्योहार व परंपरा का देश है। यहां कठिन व्रत से लेकर सामान्य रूप में मनाया जाने वाले कई व्रत हैं। जीवित्पुत्रिका व्रत भी उन्हीं कठोर तप का व्रत है जिसे महिलाएं अपने पुत्र के दीर्घायु व स्वस्थ रहने की कामना के साथ करती हैं।उक्त बातें क्षेत्र के मंगराइच में जयराम ब्रम्ह स्थान पर इस अवसर पर आयोजित कथा को श्रद्धालुओं को सुनाते हुए आचार्य अजय शुक्ल ने कहा कि वैसे तो इस व्रत को मनाने के लिए कई पौराणिक कथाओं से लेकर तमाम कथा प्रचलित है लेकिन पूर्वांचल में यह कथा सबसे ज्यादा प्रचलित है एक जंगल में सेमल के वृक्ष पर एक चील रहती थी वहीं झाड़ियों में एक सियारीन रहती थी।दोनों में अच्छी मित्रता थी।एक दिन कुछ महिलाएं आपस मे जितिया व्रत की बात कर रही थीं कि यह व्रत संतान के लंबी उम्र व स्वस्थ रहने के लिए किया जाता है।चील और सियारीन ने भी व्रत किया।चील ने निष्ठा के साथ व्रत किया लेकिन सियारीन ने नही किया।अगले जन्म में चील और सियारीन ने सगी बहन के रूप में जन्म लिया।सियारीन बड़ी बहन बनी उसकी शादी एक राजकुमार से हुआ। चील छोटी बहन बनी उसकी शादी एक मंत्री के बेटे से हुई।शादी के बाद सियारीन कई पुत्र हुए लेकिन सभी जन्म के साथ ही मर जाते थे। चील के बच्चे सुंदर व स्वस्थ होते थे।यह देखकर सियारीन अपनी बहन से जलने लगी। उसने कई बार अपनी बहन के बच्चों को मारने की कोशिश किया, लेकिन हर बार असफल रही। एक दिन सियारीन को अपनी पिछली जिंदगी में जितिया व्रत तोड़ने के गलती का एहसास हुआ।और इसे समझ आया तो व्रत रही।इसके बाद जो पुत्र हुए वह स्वस्थ और दीर्घायु होने लगे। इस कथा के श्रवण करने से बहुत ही उत्तम फल प्राप्त होता है। कथा के दौरान प्रभावती देवी,किरण देवी,रितु तिवारी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रही।

अब खत्म हुआ इंतजार, अब शुरू होगी हवाई सेवा

पूर्णिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)इंतजार की घड़ी अब समाप्त हो गई है। सीमांचलवासियों का वर्षों पुराना सपना अब साकार होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को पूर्णिया एयरपोर्ट के नये टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही पूर्णिया औपचारिक रूप से देश के हवाई मानचित्र से जुड़ जाएगा।

बिहार में पटना, गया और दरभंगा के बाद पूर्णिया राज्य का चौथा एयरपोर्ट होगा। उद्घाटन के साथ ही यहां से अहमदाबाद और कोलकाता के लिए सीधी उड़ानें शुरू हो जाएंगी।

पूर्णिया एयरपोर्ट शुरू होने से न सिर्फ पूर्णिया, कोसी और भागलपुर प्रमंडल बल्कि पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों के करीब 2 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और कृषि के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे।

स्थानीय लोगों के अनुसार एयरपोर्ट शुरू होने से सीमांचल क्षेत्र का विकास तेजी से होगा। युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ेंगे, वहीं व्यापारियों और किसानों को अपने उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर बाजार तक पहुंचाने में सुविधा होगी।

खास महत्व का एयरपोर्ट

पूर्णिया एयरपोर्ट कई मायनों में बिहार के लिए खास होगा। यहां से उड़ानें शुरू होने पर सीमांचलवासियों को पटना या कोलकाता जाकर फ्लाइट पकड़ने की मजबूरी से छुटकारा मिलेगा।

सहभोज के जरिए हिंदुओं की एकता के पक्षधर रहे महंत अवैद्यनाथ—- भिखारी

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जोगिया मठ पर 11वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि एवं सहभोज कार्यक्रम आयोजित

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। गोरखनाथ मंदिर के पूर्व ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ की 11वीं पुण्यतिथि पर जोगिया मठ में श्रद्धांजलि समारोह एवं सहभोज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्व हिंदू महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष भिखारी प्रजापति रहें।
बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि महंत अवैद्यनाथ ऐसे महान हिन्दू नेता थे, जिन्होंने राममंदिर आंदोलन को खड़ा करने में ऐतिहासिक योगदान दिया। वे जीवन भर हिन्दू समाज की एकजुटता और सामाजिक समरसता के लिए सहभोज जैसे आयोजनों को बढ़ावा देते रहे। उन्होंने यह भी कहा कि महंत अवैद्यनाथ ने जात-पात, छुआछूत का खुलकर विरोध किया और कहा कि जातिगत सेनाएं देश की सबसे बड़ी दुश्मन हैं। जिस दिन महापुरुषों को जातियों में बांटना बंद कर देंगे, हिन्दू समाज फिर से एकजुट हो जाएगा।
कार्यक्रम के आयोजक व प्रदेश मंत्री महंत बालक दास ने कहा कि महंत अवैद्यनाथ का हिन्दू समाज को जोड़ने में योगदान भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने राममंदिर आंदोलन को मजबूत नींव दी। प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बिरेंद्र सिंह ने कहा कि महंत अवैद्यनाथ छुआछूत और जात-पात के प्रबल विरोधी थे। वहीं रामायणी रामनयन दास ने कहा कि अवैद्यनाथ जी ने हिन्दू समाज की एकता और देश की अखंडता के लिए पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष दिग्विजय किशोर शाही, सनातन रक्षा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष हरिनारायण महराज, विश्व हिंदू महासंघ के प्रदेश मंत्री राजन जायसवाल, मंडल प्रभारी बृजेश तिवारी, जिलाध्यक्ष अभिषेक सिंह, जिला मंत्री अभय प्रताप सिंह, कुशीनगर जिलाध्यक्ष संतोष जायसवाल, बीरेंद्र गुप्ता, क्षेत्रीय मंत्री श्याम बाबू शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित किया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता अनुज कुमार तिवारी, पत्रकार जितेंद्र सिंह, बृजेंद्र कुमार पांडेय पिंटू को माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।

जीवितिया स्नान में दर्दनाक हादसा: तालाब में डूबीं चार बच्चियां, एक की मौत, एक ICU में भर्ती

प्रतीकात्मक

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क )जनपद के गौरी बाजार थाना क्षेत्र के देवगांव में रविवार शाम जीवितिया व्रत धारी को शाम को स्नान करने की प्रथा का पालन करने के दौरान बड़ा हादसा हो गया। गांव की चार बच्चियां तालाब में डूब गईं। ग्रामीणों की मदद से सभी को बाहर निकाला गया, लेकिन हादसे में एक मासूम की मौत हो गई, जबकि एक बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई है।

जानकारी के मुताबिक, देवगांव गांव की चंदा देवी जीवित्पुत्रिका व्रत रखी थी प्रथा के अनुसार अपनी बेटियों के साथ स्नान करने गांव के तालाब पर गई थीं। इसी दौरान उनके साथ आई अंशिका गुप्ता (11 वर्ष), स्वीटी गुप्ता (10 वर्ष), अमृता गुप्ता (12 वर्ष) और राधा गुप्ता (12 वर्ष) गहरे पानी में चली गईं और डूबने लगीं। चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण दौड़े और चारों को बाहर निकाला।

सभी को आनन-फानन में महर्षि देवराहा बाबा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने राधा को मृत घोषित कर दिया। वहीं, अमृता की हालत नाजुक होने पर उसे ICU में भर्ती किया गया है। अंशिका और स्वीटी को प्राथमिक उपचार के बाद खतरे से बाहर बताया जा रहा है।

हादसे की खबर सुनकर गांव में मातम का माहौल है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी जुटाई और परिवार को सांत्वना दी।

नकाबपोश बदमाशों ने घर में घुसकर छात्रा को बनाया बंधक, 30 हजार रुपए के साथ गहने लूटे

प्रतीकात्मक

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) शाहपुर थाना क्षेत्र के नरगदा गांव में रविवार को दो नकाबपोश बदमाशों ने दिनदहाड़े घर में घुसकर सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया। बदमाशों ने कक्षा 8 की छात्रा को बंधक बनाया और अलमारी से 30 हजार रुपये नकद व चांदी के जेवर लेकर फरार हो गए।

जानकारी के अनुसार, पीड़िता के पिता राजीव कुमार मूल रूप से हीराचक, नौबतपुर में पत्नी के साथ रहते हैं, जबकि उनके तीन बच्चे नरगदा में रहकर पढ़ाई करते हैं। घटना के समय बड़े बच्चे स्कूल जा चुके थे और छोटी बेटी घर से निकलने ही वाली थी कि तभी गमछा से चेहरा ढंके दो बदमाश अचानक घर में घुस आए।
बदमाशों ने छात्रा को पकड़कर कमरे में खटिया से बांध दिया और उसका मुंह दबा दिया। इसके बाद वे अलमारी से नकदी और जेवर निकाल ले गए। जाते-जाते अपराधियों ने छात्रा को जान से मारने की धमकी भी दी।

घटना से बच्ची बुरी तरह सहम गई है। परिवार का कहना है कि उसने स्कूल की परीक्षा में जाना भी बंद कर दिया है और अकेले कमरे में जाने से डर रही है। वारदात के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है।

पुलिस पर लापरवाही का आरोप

परिजनों का आरोप है कि शाहपुर पुलिस ने शुरुआती शिकायत पर रिसीविंग देने से इंकार कर दिया। हालांकि बाद में केस दर्ज कर छानबीन शुरू की गई और रिसीविंग भी दे दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुलिस पहले से सक्रिय रहती तो बदमाशों को पकड़ना आसान होता।

पुलिस की कार्रवाई

थानाध्यक्ष मनीष कुमार आनंद ने बताया कि मामला बेहद गंभीर है। आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि बदमाशों की पहचान की जा सके। पुलिस ने दावा किया है कि जल्द ही अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

“जितिया पर मां की दुआ भी न रोक सकी मौत – सड़क हादसे ने ली दो बेटों की जिंदगी”

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जिले के गौरीचक थाना क्षेत्र के बंडोह मोड़ के पास रविवार दोपहर बाद हुए भीषण सड़क हादसे ने दो परिवारों की खुशियां पलभर में छीन लीं। स्कूटी पर सवार दो किशोरों की मौत इतनी दर्दनाक थी कि देखने वालों की रूह कांप गई। हादसा इतना भयावह था कि दोनों के शव टैंकर के पहियों तले बुरी तरह कुचल गए और उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया।

मृतकों की पहचान पटना ट्रैफिक थाना में तैनात बाली गांव निवासी सिपाही सतीश कुमार के 17 वर्षीय पुत्र वैभव राज और जहानाबाद निवासी 18 वर्षीय सूरज कुमार (पिता – धनंजय शर्मा) के रूप में हुई। सूरज अपने मौसा रामप्रवेश सिंह के घर पटना में रहकर पढ़ाई करता था। दोनों किशोर आपस में घनिष्ठ मित्र थे और साथ में ही पढ़ने-लिखने जाते थे।

हादसे का मंजर

स्थानीय लोगों ने बताया कि बारिश के मौसम में मसौढ़ी की ओर से पटना आ रहा तेज रफ्तार टैंकर अचानक अनियंत्रित होकर विपरीत दिशा से आ रही स्कूटी में जोरदार टक्कर मार बैठा। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कूटी के परखच्चे उड़ गए और दोनों किशोर सीधे टैंकर के नीचे जा गिरे। चालक टक्कर मारने के बाद मौके से फरार हो गया।

घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने वायरलेस संदेश के जरिए पूरे इलाके में नाकाबंदी की और आखिरकार गोपालपुर थाना पुलिस ने संपतचक क्षेत्र में टैंकर को पकड़ लिया। चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है।

मातम में बदली खुशियां

सबसे हृदयविदारक दृश्य तब सामने आया जब यह खबर वैभव के घर पहुंची। उसकी मां ने रविवार को बेटे की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए जितिया व्रत रखा था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था—जिस बेटे के लिए मां ने उपवास रखा था, उसी दिन वह हमेशा के लिए दुनिया छोड़ गया। हादसे की खबर मिलते ही मां बेहोश हो गईं।

पिता सतीश कुमार, जो पटना में ट्रैफिक पुलिस में तैनात हैं, रोते-बिलखते यही कहते रहे—
“वैभव अपने दोस्त सूरज के साथ कपड़ा खरीदने गया था। मुझे क्या पता था कि यह उसका आखिरी सफर होगा।”

वैभव अपने दो भाइयों में बड़ा था। घर का सहारा और उम्मीद था। इधर, सूरज के मौसा रामप्रवेश सिंह का दर्द भी किसी से छिपा नहीं रहा। वे बार-बार फूट-फूटकर यही सवाल पूछते रहे—
“हमारी गलती क्या थी कि भगवान ने दोनों को एक साथ छीन लिया?”

पूरे गांव में पसरा मातम

दोनों किशोरों की मौत की खबर जैसे ही उनके गांवों तक पहुंची, मातम छा गया। हर आंख नम हो गई, हर घर से सिसकियां उठने लगीं। लोगों ने कहा कि यह दुर्घटना न सिर्फ दो परिवारों को बल्कि पूरे गांव को उजाड़ गई।

रविवार की दोपहर जिसने दो घरों से हंसी-खुशी छीन ली, वह इस सवाल को छोड़ गई कि आखिर भगवान ने उस मां की क्यों नहीं सुनी, जिसने जितिया रखकर बेटे की लंबी उम्र की दुआ मांगी थी।

भारत-पाक मैच पर तेजस्वी यादव का मोदी सरकार पर तीखा हमला

सिंदूर जिनकी रगो में दौड़ रहा वो ही लोग मैच करा रहे -तेजस्वी

सौजन्य से ANI

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)एशिया कप 2025 में होने वाले भारत और पाकिस्तान के बीच बहुप्रतीक्षित मुकाबले ने राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इस मैच के आयोजन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है।

तेजस्वी यादव ने कहा, “वो लोग जिनकी रगों में सिंदूर दौड़ रहा था, वही इस मैच को आयोजित करा रहे हैं।” उनका तात्पर्य यह था कि जिन लोगों ने अतीत में राजनीतिक और सामाजिक तौर पर पाकिस्तान विरोधी रुख अपनाया था, वही आज क्रिकेट के नाम पर ऐसे आयोजन करवा रहे हैं।

आरजेडी नेता ने आरोप लगाया कि यह फैसला केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक मकसद और जनता की भावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि सरकार खेल को राजनीतिक छवि बनाने और राज्य-प्रायोजित आयोजनों के जरिये लाभ उठाने का माध्यम बना रही है।

तेजस्वी यादव ने सरकार से आग्रह किया कि इस तरह के आयोजनों से पहले देश की राष्ट्रीय भावना, आतंकी हमलों के पीड़ितों की संवेदनशीलता और सामाजिक न्याय की परिस्थितियों का ध्यान रखा जाना चाहिए।

भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मुकाबला हमेशा से ही दोनों देशों में रोमांच और संवेदनशीलता का विषय रहा है। लेकिन इस बार मैच से पहले ही विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बयानबाजी ने इसे और भी विवादास्पद बना दिया है।

मंडल महिला कल्याण संगठन द्वारा वाराणसी मे निबंध प्रतियोगिता का आयोजन

वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा) विगत वर्षों की भाँति केंद्रीय रेलवे महिला कल्याण संगठन, नई दिल्ली के तत्वावधान में मंडल महिला कल्याण संगठन,वाराणसी द्वारा वाराणसी मंडल के क्षेत्राधिकार में पड़ने वाले वाराणसी, छपरा, गोरखपुर, मऊ, बलिया, प्रयागराज रामबाग एवं सीवान जं० स्टेशनों पर 6 वर्ष से 15 वर्ष के रेल कर्मचारियों के बच्चों के लिए दिनांक-14.09.2025 रविवार को निबंध प्रतियोगिता का आयोजन पूर्वाह्न 10.30 बजे से 12.30 बजे तक किया गया। पूर्वोत्तर रेलवे मंडल महिला कल्याण संगठन वाराणसी द्वारा ऑन स्पॉट निबंध प्रतियोगिता का आयोजन वाराणसी मंडल के कुल 07 स्टेशनों ( वाराणसी, प्रयागराज रामबाग, बलिया, मऊ, सिवान गोरखपुर और छपरा स्टेशनों) पर किया गया जिसमें लगभग 250 से अधिक बच्चों ने भाग लिया।
पूर्वोत्तर रेलवे मंडल महिला कल्याण संगठन वाराणसी की अध्यक्षा वाणी जैन ने अधिकारी क्लब,लहरतारा में प्रतियोगिता का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर मंडल महिला कल्याण संगठन की सचिव शालिनी पाण्डेय, सदस्याएं जागृति सिंह, नम्रता सिंह, सरिता केसरवानी और प्रियंका पाण्डेय उपस्थित थीं। कार्यक्रम का संचालन मुख्य हित निरीक्षक जितेंद्र श्रीवास्तव ने किया।
प्रत्येक ग्रुप मे प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय तथा दो सांत्वना पुरस्कार दिये जाएंगे, जिनका वितरण नई दिल्ली मे महिला दिवस समारोह में किया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रत्येक ग्रुप को मण्डल स्तर पर भी मंडल महिला कल्याण संगठन वाराणसी द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा। इस प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु कोई प्रवेश शुल्क नही था।
ऑन स्पॉट निबंध प्रतियोगिता का संचालन मुख्य हित निरीक्षक जितेन्द्र श्रीवास्तव ने तथा धन्यवाद ज्ञापन मंडल महिला कल्याण संगठन की अध्यक्ष वाणी जैन द्वारा किया गया।

क्या विकास का रास्ता बेईमानी से होकर जाएगा?

भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। गांव में पेयजल कि आज का समस्याएं बढ़ती जा रही है हर कोई सक्षम नहीं जो अपने यहां नल की व्यवस्था कर सके।*गाँव के लोकतांत्रिक अनुभव में यह विडंबना स्पष्ट दिखाई देती है कि संघर्षशील, ईमानदार और करमत युवा प्रत्याशियों को चुनने के बाद भी अपेक्षित विकास नहीं हो पाया। लोगों ने सुयोग्य चेहरों पर भरोसा किया, उनसे उम्मीद की कि वे गाँव की तस्वीर बदलेंगे, चौमुखी विकास का सपना साकार करेंगे। लेकिन वर्षों के इंतजार और अधूरे वादों ने जनता के मन में निराशा भर दी है।आज हालात इतने बदल गए हैं कि ग्रामीण समाज यह सोचने लगा है—“शायद अब किसी बेईमान प्रत्याशी को ही आज़मा लिया जाए।” यह सोच लोकतांत्रिक चेतना के लिए चिंताजनक है, परंतु यह जनता के टूटे हुए विश्वास का सजीव प्रमाण भी है। ईमानदार नेताओं की छवि साफ हो सकती है, लेकिन जब वह केवल भाषण और नैतिकता तक सीमित रह जाए, तब जनता को परिणामहीन आदर्शवाद से मोहभंग होना स्वाभाविक है।
बेईमान प्रत्याशी अक्सर अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए ही सही, विकास कार्यों को गति देते हैं। सड़क, पुल, नाली या अन्य योजनाएँ भले ही आधी-अधूरी हों, लेकिन जनता को कुछ न कुछ लाभ अवश्य मिलता है। यही कारण है कि आम लोग यह मानने लगे हैं कि यदि बेईमानी से भी विकास संभव है तो क्यों न उसे ही चुना जाए।
यह मानसिकता लोकतंत्र की असफलता का संकेत है। क्योंकि वास्तविक उद्देश्य केवल चुनाव जीतना या तात्कालिक लाभ नहीं, बल्कि पारदर्शी और टिकाऊ विकास होना चाहिए। आवश्यकता इस बात की है कि ईमानदार नेतृत्व केवल नैतिकता का नहीं, बल्कि परिणाम का भी परिचय दे। जनता को यह भरोसा दिलाना होगा कि ईमानदारी और विकास साथ-साथ चल सकते हैं।अन्यथा, यदि विश्वास पूरी तरह से टूटा, तो गाँव का लोकतंत्र आदर्शवाद से भटककर समझौते और बेईमानी की राह पर चला जाएगा—और यह केवल गाँव ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य के लिए भी गहरी चिंता का विषय होगा।

• प्रदीप कुमार मौर्य

भारत की आस्था प्रत्यक्ष अनुभूति पर आधारित: मोहन भागवत

इंदौर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को इंदौर के ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक समारोह में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल की पुस्तक ‘परिक्रमा कृपासार’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत की आस्था, परंपरा और समाज में एकता के महत्व पर अपने विचार रखे।

भागवत ने कहा कि भारत की आस्था किसी कल्पना पर आधारित नहीं है, बल्कि यह प्रत्यक्ष अनुभूति पर टिकी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे विज्ञान प्रत्यक्ष प्रमाण की मांग करता है, वैसे ही भारतीय आस्था के लिए भी प्रत्यक्ष प्रमाण मौजूद हैं, जिन्हें प्रयास और प्रयोगों के जरिए अनुभव किया जा सकता है।

उन्होंने भारत के गौरवशाली अतीत का उल्लेख करते हुए कहा, “हमारे पूर्वजों की पवित्रता की चेतना और भावना के कारण भारत 3000 वर्षों तक दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश रहा। उस समय तकनीकी प्रगति उच्च स्तर पर थी, लेकिन पर्यावरण का कोई क्षरण नहीं हुआ। मानव जीवन सुखी और सुसंस्कृत था।”

आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि भारत ने हमेशा दुनिया को सभ्यता, ज्ञान और शास्त्रों की शिक्षा दी, लेकिन कभी किसी देश पर विजय प्राप्त करने, व्यापार को दबाने या धर्मांतरण करने का प्रयास नहीं किया।

विश्व में हो रहे संघर्षों पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि लोग अक्सर इस बात पर टकराते हैं कि भगवान एक हैं या अनेक, लेकिन हमारे दार्शनिकों ने यह स्पष्ट किया है कि “सिर्फ भगवान हैं, और कोई नहीं।”

उन्होंने समाज में समानता और सद्भाव की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि दुनिया में टकराव तब होता है जब एक व्यक्ति खुद को दूसरे से श्रेष्ठ समझता है। “हम मानते हैं कि हम सब एक हैं, लेकिन क्या हम सबके साथ एकता का व्यवहार करते हैं? नहीं। इसलिए समाज में वास्तविक एकता स्थापित करनी होगी,” उन्होंने कहा।

👉 यह कार्यक्रम बड़ी संख्या में विद्वानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आरएसएस स्वयंसेवकों की मौजूदगी में संपन्न हुआ।