Wednesday, July 15, 2026
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लखनऊ में बदला मौसम का मिजाज, बारिश से उमस से मिली राहत

प्रतिकात्मक

लखनऊ।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)राजधानी लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सोमवार को मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आया। सुबह से बादल छाए रहे और कुछ स्थानों पर छिटपुट बारिश ने लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दी। मौसम विभाग ने 16 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है। इस बीच पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के मध्य भारत की ओर बढ़ने तथा मानसून द्रोणी के निष्प्रभावी होने से बंगाल की खाड़ी से नमी उत्तर प्रदेश के तराई, पूर्वांचल और मध्यांचल तक पहुंचेगी। इसके चलते इन इलाकों में मेघगर्जन के साथ मध्यम से भारी बारिश की संभावना है।
विशेष रूप से 17 और 18 सितंबर को राजधानी लखनऊ में मध्यम से तेज बारिश की संभावना जताई गई है। आज लखनऊ का अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री रहने का अनुमान है। दिन में एक से दो बार बारिश हो सकती है। वहीं हल्की ठंडी हवाओं के कारण मौसम सुहावना बना रहेगा, हालांकि बीच-बीच में धूप-छांव से उमस का एहसास भी होगा।

सपा ने अपनाया नया फार्मूला, बिना सर्वे के नहीं मिलेगा टिकट

लखनऊ।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी ने भी प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया तेज कर दी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया है कि अब पार्टी में टिकट वितरण पूरी तरह सर्वे के आधार पर होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा की तर्ज पर सपा भी बिना सर्वे कराए किसी को टिकट नहीं देगी।
सपा प्रमुख ने बताया कि पार्टी की पहली प्राथमिकता “जिताऊ उम्मीदवार” होंगे। इसके लिए संगठन स्तर पर व्यापक सर्वे कराया जाएगा और उसी के आधार पर टिकट तय किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि टिकट वितरण में पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) फार्मूला लागू किया जाएगा, ताकि समाज के सभी वर्गों को बराबरी का प्रतिनिधित्व मिल सके।
अखिलेश यादव ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव उनकी प्राथमिकता है और सपा पूरी मजबूती के साथ जनता के बीच जाएगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सर्वे आधारित टिकट वितरण से पार्टी का उम्मीदवार चयन और भी रणनीतिक और सटीक होगा।

नोएडा में बिल्डरों को लाभ पहुँचाने के आरोप में अपर आयुक्त सस्पेंड

लखनऊ।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त शंकर राय को निलंबित कर दिया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने नोएडा स्थित आम्रपाली और हाईटेक सिटी बिल्डर्स को मनमाने तरीके से लाभ पहुंचाया, जिससे राज्य सरकार को राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ा।
इस गंभीर प्रकरण पर प्रमुख सचिव (जीएसटी) एम. देवराज ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शंकर राय के निलंबन के आदेश जारी कर दिए हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, जांच में यह पाया गया कि अपर आयुक्त की भूमिका संदिग्ध रही और उनकी मिलीभगत से बिल्डरों को अनुचित लाभ मिला। मामले की आगे की गहन जांच जारी है।
इस कार्रवाई से विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी अधिकारी जांच के घेरे में आ सकते हैं।

पीडब्ल्यूडी की नई व्यवस्था से इंजीनियरों में नाराज़गी, विकास कार्य प्रभावित

लखनऊ।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में नई व्यवस्था लागू होने के बाद विभागीय इंजीनियरों में भारी नाराज़गी देखी जा रही है। हाल ही में जारी प्रावधान के अनुसार अब 40 लाख रुपये तक के कार्यों की मंजूरी प्रमुख सचिव स्तर से होगी।
पहले 40 लाख तक के कार्यों को प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष द्वारा अनुमोदित किया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था में लालफीताशाही के कारण विकास कार्यों की गति प्रभावित हो रही है।
पीडब्ल्यूडी डिप्लोमा इंजीनियर संघ ने इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर नाराज़गी जताई है। संघ का आरोप है कि नई व्यवस्था को लागू करने से पहले कैबिनेट की मंजूरी नहीं ली गई। इससे विभागीय कार्यप्रणाली में अनावश्यक विलंब और असंतोष बढ़ रहा है।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो विकास परियोजनाएं और अधिक प्रभावित होंगी तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता पर भी असर पड़ेगा।

यूपी रोडवेज बसों में एंटी स्लीपिंग डिवाइस लगाने का काम ठप, छह महीने से अटका दूसरा चरण

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) सड़क हादसों को रोकने और चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश रोडवेज की बसों में एंटी स्लीपिंग डिवाइस लगाने की योजना फिलहाल अधर में लटकी हुई है। छह महीने से इस काम पर पूरी तरह ब्रेक लग गया है।

सूत्रों के अनुसार, रोडवेज प्रबंधन ने पहले चरण में 680 बसों में एंटी स्लीपिंग डिवाइस लगवाई थी। इसके बाद दूसरे चरण में 800 और बसों को इस तकनीक से लैस किया जाना था, लेकिन टेंडर प्रक्रिया आगे न बढ़ पाने के कारण काम रुका हुआ है। अब नए टेंडर का इंतजार किया जा रहा है।

गौरतलब है कि रोडवेज के पूरे बेड़े में एंटी स्लीपिंग डिवाइस लगाने की योजना बनाई गई थी, जिससे लंबी दूरी की यात्रा के दौरान ड्राइवर की नींद या झपकी के चलते होने वाले हादसों को रोका जा सके। लेकिन योजना की धीमी रफ्तार और तकनीकी दिक्कतों के कारण फिलहाल यह पहल अधूरी रह गई है।

यात्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग ने इस डिवाइस को बेहद जरूरी माना है। अब देखना यह होगा कि दूसरे चरण के लिए नया टेंडर कब तक जारी होता है और कितनी जल्दी यह तकनीक पूरे बेड़े में लागू हो पाती है।

जालसाजी कर 20 कार और 20 मुद्रा लोन हासिल किए, करोड़ों की संपत्ति बनाई


एसटीएफ आरोपियों के बैंक खाते और वॉलेट खंगालेगी, कई बैंक मैनेजरों से मिलीभगत का खुलासा

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)राजधानी में फर्जी दस्तावेजों के सहारे लोन लेकर करोड़ों की संपत्ति अर्जित करने वाले जालसाज गैंग का बड़ा खुलासा हुआ है। एसटीएफ ने जांच में पाया कि इस गिरोह ने लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर करीब 20 कार लोन और 20 मुद्रा लोन फर्जी तरीके से हासिल किए।

गिरफ्तार आरोपियों ने ठगी के धंधे से भारी-भरकम संपत्ति खड़ी कर ली थी। एसटीएफ अब आरोपियों के बैंक खाते और ई-वॉलेट की गहन जांच करने जा रही है। साथ ही बरामद कंप्यूटर और मोबाइल को फोरेंसिक लैब भेजा गया है, ताकि डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा सकें।

पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह ने केवल गिरफ्तार बैंक मैनेजर गौरव ही नहीं, बल्कि अन्य कई बैंकों के मैनेजरों से भी मिलीभगत की थी। इससे लोन पास कराने और रकम निकालने में उन्हें आसानी हुई।

मुख्य आरोपी नावेद हसन ने कबूल किया कि उसने वर्ष 2011 में हिंद ट्रांसपोर्ट नाम से एक कंपनी बनाई थी। कंपनी का पंजीकरण भी उसने फर्जी आधार कार्ड के सहारे कराया था।

एसटीएफ अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गई है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस प्रकरण में कई और बैंक अधिकारियों व दलालों पर शिकंजा कस सकता है।

सैन्य मंथन: पीएम मोदी ने किया संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन का शुभारंभ, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पृष्ठभूमि में बनेगी नई रणनीति

कोलकाता (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रविवार शाम कोलकाता पहुंचे, जहां सोमवार से सशस्त्र बलों का तीन दिवसीय संयुक्त कमांडरों का सम्मेलन (CCC) शुरू हुआ। प्रधानमंत्री ने विजय दुर्ग स्थित पूर्वी कमान मुख्यालय (पूर्व में फोर्ट विलियम) में इस सम्मेलन का उद्घाटन किया।

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह सम्मेलन सशस्त्र बलों का सर्वोच्च विचार-मंथन मंच है, जो देश के शीर्ष नागरिक एवं सैन्य नेतृत्व को रणनीतिक और वैचारिक स्तर पर एक मंच पर लाता है। इस वर्ष सम्मेलन का विषय है – ‘सुधारों का वर्ष: भविष्य के लिए परिवर्तन’। इसमें सुधारों, परिवर्तन, बदलाव और अभियानगत तैयारियों पर विशेष फोकस रहेगा।

एक अधिकारी ने बताया कि हाल ही में नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्तान के भीतर आतंकी ढांचों को ध्वस्त करने वाले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने तीनों सेनाओं की संतुलित और पेशेवर प्रतिक्रिया को दुनिया के सामने रखा है। सम्मेलन का मकसद संस्थागत सुधारों, गहन एकीकरण, तकनीकी आधुनिकीकरण और बहु-क्षेत्रीय अभियानगत तैयारियों को और मजबूत बनाना है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ‘‘तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य सशस्त्र बलों को और अधिक चुस्त और निर्णायक बनाना है, ताकि वे तेजी से जटिल होते भू-रणनीतिक परिदृश्य में मजबूत भूमिका निभा सकें।’’

इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और सेना, नौसेना एवं वायुसेना के शीर्ष कमांडर भी मौजूद रहे। आखिरी संयुक्त कमांडरों का सम्मेलन 2023 में भोपाल में आयोजित हुआ था।

पीएम मोदी सोमवार सुबह लगभग चार घंटे तक सम्मेलन में शामिल होने के बाद बिहार के पूर्णिया के लिए रवाना होंगे।

नक्सलियों पर सुरक्षा बलों का वार: 1 करोड़ का इनामी सहदेव सोरेन सहित तीन शीर्ष नक्सली मारे गए

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प्रतीकात्मक

हजारीबाग (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) झारखंड में नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। हजारीबाग जिले के गोरहर में सोमवार सुबह सीआरपीएफ, कोबरा 209 बटालियन और हजारीबाग पुलिस की संयुक्त टीम ने माओवादियों के खिलाफ जबरदस्त अभियान चलाया। इस दौरान हुई मुठभेड़ में तीन कुख्यात और बड़े इनामी नक्सली ढेर हो गए।

मारे गए नक्सलियों में भाकपा माओवादी सेंट्रल कमेटी का सदस्य और 1 करोड़ का इनामी सहदेव सोरेन उर्फ प्रवेश शामिल है। इसके अलावा सैक सदस्य 25 लाख का इनामी रघुनाथ हेंब्रम उर्फ चंचल और जोनल कमांडर बिरसेन गंझू, जिस पर 10 लाख का इनाम था, भी एनकाउंटर में मारे गए।

इलाके में भारी सुरक्षा तैनात

एनकाउंटर के बाद पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। सुरक्षा बल यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई और नक्सली बचकर भाग न सके। इस मुठभेड़ को झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ की अब तक की बड़ी कामयाबियों में से एक माना जा रहा है।

नक्सलियों को करारा झटका

मारे गए तीनों नक्सली लंबे समय से झारखंड-बिहार सीमा पर सक्रिय थे और कई बड़ी वारदातों में शामिल रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इनकी मौत से नक्सल संगठन को बड़ा झटका लगेगा और उनकी कमर टूटेगी।

🌟 दैनिक राशिफल 15 सितम्बर 2025 🌟

आज का दिन कई राशियों के लिए रोमांटिक और शुभ रहने वाला है। वहीं कुछ जातकों को सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल
मेष (Aries)
लव लाइफ: प्रेम संबंध मजबूत होंगे, रोमांटिक पल बिताने का अवसर।
शिक्षा: प्रतियोगी छात्रों के लिए अनुकूल समय।
आर्थिक पक्ष: धन लाभ के योग। निवेश से फायदा।
नौकरी/ट्रांसफर: नई जिम्मेदारियां व ट्रांसफर संभव।
परिवार/बच्चे: बच्चों की प्रगति से खुशी।
खेल: खिलाड़ियों के लिए प्रदर्शन सुधार का समय।
वृषभ (Taurus)
लव लाइफ: रिश्तों में मधुरता व मजबूती।
शिक्षा: स्टूडेंट्स को लाभकारी समय।
आर्थिक पक्ष: अचानक धन लाभ।
नौकरी/ट्रांसफर: कार्यक्षेत्र में नई योजनाएं।
परिवार/बच्चे: परिवार में खुशियां।
खेल: नई उपलब्धियां हासिल करने के योग।
मिथुन (Gemini)
लव लाइफ: पार्टनर संग यात्रा व रोमांटिक समय।
शिक्षा: मेहनत का उचित फल।
आर्थिक पक्ष: आर्थिक लाभ।
नौकरी/ट्रांसफर: प्रमोशन के योग।
परिवार/बच्चे: शांति का वातावरण।
खेल: मानसिक व शारीरिक ऊर्जा से सफलता।
कर्क (Cancer)
लव लाइफ: प्रेम संबंध बेहतर होंगे, वैवाहिक जीवन सुखद।
शिक्षा: उच्च शिक्षा के लिए शुभ समय।
आर्थिक पक्ष: बचत बढ़ेगी।
नौकरी/ट्रांसफर: नौकरी में बदलाव संभव।
परिवार/बच्चे: आनंददायी समय।
खेल: खेलों में रुचि बढ़ेगी।
सिंह (Leo)
लव लाइफ: शानदार रोमांटिक समय।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा में सफलता।
आर्थिक पक्ष: धन व सम्मान की वृद्धि।
नौकरी/ट्रांसफर: अधिकारियों से सहयोग।
परिवार/बच्चे: संतान पक्ष से शुभ समाचार।
खेल: नई उपलब्धियों के योग।

कन्या (Virgo)
लव लाइफ: रिश्तों में मजबूती और विश्वास।
शिक्षा: छात्रों को सकारात्मक परिणाम।
आर्थिक पक्ष: आय में वृद्धि।
नौकरी/ट्रांसफर: करियर में उन्नति।
परिवार/बच्चे: बड़ों का आशीर्वाद।
खेल: मेहनत का फल मिलेगा।
♎ तुला (Libra)

लव लाइफ: पार्टनर से अनबन संभव। धैर्य जरूरी।
शिक्षा: पढ़ाई में बाधा।
आर्थिक पक्ष: खर्चे बढ़ेंगे।
नौकरी/ट्रांसफर: ट्रांसफर से तनाव।
परिवार/बच्चे: विवाद से बचें।
खेल: कठिन परिश्रम से सफलता।
वृश्चिक (Scorpio)
लव लाइफ: प्रेम जीवन में उतार-चढ़ाव।
शिक्षा: छात्रों को ज्यादा मेहनत करनी होगी।
आर्थिक पक्ष: अचानक खर्च बढ़ेंगे।
नौकरी/ट्रांसफर: नए अवसर मिलेंगे।
परिवार/बच्चे: नई जिम्मेदारियों से दबाव।
खेल: फिटनेस पर ध्यान दें।
धनु (Sagittarius)
लव लाइफ: पार्टनर संग घूमने का योग, रोमांस।
शिक्षा: विद्यार्थियों के लिए शुभ समय।
आर्थिक पक्ष: निवेश से लाभ।
नौकरी/ट्रांसफर: कार्य में उन्नति।
परिवार/बच्चे: परिवार में खुशियां।
खेल: ऊर्जा से जीत के योग।
मकर (Capricorn)
लव लाइफ: प्रेम जीवन में खुशियां।
शिक्षा: शिक्षा में सफलता।
आर्थिक पक्ष: धन लाभ व नई योजनाएं।
नौकरी/ट्रांसफर: नौकरी बदलने/प्रमोशन की संभावना।
परिवार/बच्चे: परिवार में सौहार्द।
खेल: उत्कृष्ट प्रदर्शन।
कुंभ (Aquarius)
लव लाइफ: पार्टनर से सामंजस्य।
शिक्षा: छात्रों के लिए अनुकूल समय।
आर्थिक पक्ष: आय में स्थिरता।
नौकरी/ट्रांसफर: नए अवसर।
परिवार/बच्चे: परिवार का सहयोग।
खेल: बेहतर प्रदर्शन।
मीन (Pisces)
लव लाइफ: रिश्तों में मिठास और सुख।
शिक्षा: सफलता के नए अवसर।
आर्थिक पक्ष: धन संबंधी कार्य सफल।
नौकरी/ट्रांसफर: पदोन्नति के योग।
परिवार/बच्चे: शुभ अवसर व उत्सव।
खेल: खेल-कूद में प्रगति।
👉 आज का सारांश (15 सितम्बर 2025):
शुभ राशियां: मेष, सिंह, कन्या, मकर और मीन।
संयम रखने वाली राशियां: तुला और वृश्चिक।

लखीमपुर खीरी में किशोर का शव मिलने से तनाव, गाँव में भारी पुलिस बल तैनात

लखीमपुर खीरी।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भीरा क्षेत्र के लालजी पुरवा से लापता किशोर का शव मिलने के बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण हालात बन गए हैं। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब शव गाँव पहुँचने की संभावना है। ग्रामीण बड़ी संख्या में शव के गाँव पहुँचने का इंतज़ार कर रहे हैं, जिसके चलते माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया है।

स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए हैं। गाँव और आसपास के इलाकों में पीएसी की एक प्लाटून के साथ ही कई थानों की पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है। सीओ गोला स्वयं मौके पर मौजूद हैं और स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं।

मामला दो समुदायों के बीच का होने के कारण प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है। वहीं, घटना की गंभीरता को देखते हुए बीजेपी के जिला मंत्री समेत कई स्थानीय भाजपा नेता भी गाँव पहुँच चुके हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल माहौल तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताया जा रहा है।

प्रदेश में लम्पी रोग पर सख़्ती, कृषि मंत्री ने की उच्चस्तरीय समीक्षा

लखनऊ।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने रविवार को पशुओं में फैल रहे लम्पी रोग की रोकथाम और उपचार की स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। लखनऊ में आयोजित बैठक में उन्होंने प्रमुख सचिव, पशुधन एवं दुग्ध विकास अमित कुमार घोष समेत विभागीय अधिकारियों के साथ प्रभावित जनपदों में की जा रही त्वरित कार्यवाही की जानकारी ली।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश के चंदौली, गाजीपुर, बलिया, देवरिया, कुशीनगर, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, मऊ, संतकबीरनगर और महराजगंज जनपदों में गोवंशीय पशु लम्पी रोग से प्रभावित पाए गए हैं। इन जनपदों में कुल 14 लाख 54 हजार 88 गोवंश दर्ज हैं, जिनमें से अब तक 5091 पशु संक्रमित पाए गए हैं। राहत की बात यह रही कि उपचार के बाद 4325 गोवंश पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 1006 गोवंश का इलाज फिलहाल जारी है।

अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में पशुचिकित्सकों की विशेष टीमें तैनात की गई हैं। दवाओं और वैक्सीन की आपूर्ति नियमित रूप से की जा रही है। गांव-गांव तक पशुपालकों को बीमारी के लक्षण और बचाव के तरीकों की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित जनपदों में विशेष सतर्कता बरती जाए। बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने और उनके नियमित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता और त्वरित उपचार में किसी प्रकार की ढिलाई न बरतने की सख्त चेतावनी भी दी।

मंत्री ने कहा कि लम्पी रोग से निपटने के लिए सरकार हर स्तर पर तत्पर है और पशुपालकों को घबराने की जरूरत नहीं है। समय पर इलाज से पशु पूरी तरह स्वस्थ हो रहे हैं।

भीषण सड़क हादसे मे दो की मौत एक घायल लोगों में मचा हड़कंप

शाहजहांपुर(राष्ट्र को परम्परा)
खुटार थाना क्षेत्र के गांव लौंहगापुर जंगल में रविवार की सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार कार अज्ञात वाहन से टकरा गई, टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। हादसे में कार सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही खुटार पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से घायल को तत्काल अस्पताल भिजवाया, जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मृतक पूरनपुर क्षेत्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस ने अज्ञात वाहन की तलाश शुरू कर दी है। हादसे की खबर मिलते ही मृतकों के परिजनों में कोहराम मच गया।

रेल में वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली सुविधा को लागू करे सरकार


देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा)। रविवार को भीखमपुर रोड स्थित सुहेलदेव सम्मान स्वाभिमान पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभय नंदन बरनवाल के कैम्प कार्यालय पर वरिष्ठ नागरिकों की एक बैठक हुई। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और उन्हें सम्मान की आवश्यकता होती हैं। भारतीय रेल में वरिष्ठ नागरिकों को यात्रा के दौरान रियायत की सुविधा थी जो कोविड-19 महामारी के दौरान अस्थाई रूप से बंद कर दिया गया हैं।
बैठक में भारत सरकार से वरिष्ठ नागरिकों को यात्रा के समय मिलने वाली रियायत की सुविधा को बहाल करने की मांग की गई।
बैठक के पश्चात सुहेलदेव सम्मान स्वाभिमान पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभय नंदन बरनवाल के नेतृत्व में वरिष्ठ नागरिकों ने सलेमपुर के सांसद रमाशंकर विद्यार्थी से मिलकर उन्हें ज्ञापन देकर अनुरोध किया गया कि वरिष्ठ नागरिकों को रेल यात्रा में मिलने वाले रियायत को फिर से बहाल कराने हेतु संसद में प्रस्ताव लाकर देश के समस्त वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान दिलाने का कष्ट करें। प्रतिनिधि मंडल में राजीव श्रीवास्तव, सुभाष राय, जवाहर लाल बरनवाल, श्रीकांत मणि, नंदकिशोर मिश्रा, अशोक मिश्रा, कृष्ण मनोहर वर्मा आदि शामिल रहे।

“पानी से नहीं, नीतियों से हारी ज़िंदगी”

बार-बार दोहराई गई त्रासदी, बाढ़ प्रबंधन क्यों है अधूरा सपना?

हरियाणा और उत्तर भारत के कई राज्य बार-बार बाढ़ की विभीषिका झेलते हैं, लेकिन हर बार नुकसान झेलने के बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल नज़र नहीं आती। 2023 की बाढ़ के बाद भी करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नदियों की सफाई, नालों की निकासी और जल प्रबंधन की योजनाएं अधूरी पड़ी रहीं। नतीजा यह कि 2025 में एक बार फिर लाखों किसान अपनी मेहनत की फसल डूबते देख मजबूर हुए। सवाल यह है कि जब बाढ़ का खतरा बार-बार दस्तक देता है तो हमारी नीतियां क्यों स्थायी हल नहीं तलाश पातीं?
हरियाणा में 2025 की बाढ़ कोई अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदा नहीं थी। यह वही त्रासदी है, जिसकी पुनरावृत्ति राज्य 1978, 1988, 1995, 2010 और हाल ही में 2023 में झेल चुका है। आंकड़े चौंकाने वाले हैं। केवल पिछले दो वर्षों में 657 करोड़ रुपये बाढ़ प्रबंधन पर खर्च किए गए, फिर भी इक्कीस जिलों के सैकड़ों गांव पानी में डूबे रहे, साढ़े चार लाख से अधिक किसानों की छब्बीस लाख एकड़ से ज्यादा फसल बर्बाद हो गई, हजारों परिवार बेघर हो गए और तेरह लोगों की जान चली गई। हर बार यह सवाल उठता है कि आखिर सरकारें और तंत्र क्यों एक ही गलती बार-बार दोहराते हैं और पिछले अनुभवों से सबक क्यों नहीं लेते।

बाढ़ कोई अचानक आई विपत्ति नहीं है, बल्कि एक अनुमानित और बार-बार आने वाला खतरा है। नदियों का उफान, बरसाती नालों का रुख बदलना और निकासी व्यवस्था का ध्वस्त होना ऐसी समस्याएं हैं, जो पहले से ज्ञात हैं और जिनका समाधान वर्षों से टलता आ रहा है। 2023 की बाढ़ के बाद सरकार ने बड़े दावे किए थे कि स्थायी समाधान के लिए ड्रेनेज सुधार, तटबंध मजबूत करने और नालों की गहराई बढ़ाने का काम प्राथमिकता पर होगा। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि अधिकांश योजनाएं अधूरी रहीं और जो शुरू हुईं वे भ्रष्टाचार या लापरवाही की भेंट चढ़ गईं।

इस अव्यवस्था का सबसे गहरा असर किसानों पर पड़ा है। खरीफ सीजन की धान, बाजरा और गन्ने जैसी फसलें पूरी तरह चौपट हो गईं। औसतन एक किसान को प्रति एकड़ पंद्रह से बीस हजार रुपये का नुकसान हुआ। इसके साथ ही पशुधन की मौतें, घरों के ढहने और बुनियादी ढांचे के टूटने से हालात और बिगड़ गए। उद्योग जगत भी इससे अछूता नहीं रहा। अंबाला और यमुनानगर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में कारखानों और गोदामों में पानी भर गया, जिससे करोड़ों का नुकसान हुआ और हजारों मजदूर रोजगार से वंचित हो गए।

इस स्थिति के पीछे प्रशासनिक लापरवाही सबसे बड़ा कारण है। हरियाणा सरकार के पास न तो गांव-स्तरीय निकासी योजना है और न ही कोई स्थायी रणनीति। मानसून से पहले नालों की सफाई करने की बजाय दिखावटी काम किए जाते हैं। कई जगह ड्रेनेज सिस्टम सालों से जाम पड़े हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नदियों और नालों का प्रवाह जस का तस है। इसके अलावा सिंचाई विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय निकायों के बीच तालमेल का अभाव स्थिति को और गंभीर बना देता है। हर विभाग अपने-अपने दायरे में काम करता है, लेकिन समन्वय के अभाव में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आता।

जल प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ पर काबू पाने के लिए व्यापक और दीर्घकालिक रणनीति बनाना अनिवार्य है। डॉ. शिव सिंह राठ जैसे विशेषज्ञ स्पष्ट कहते हैं कि नदियों की नियमित ड्रेजिंग, बरसाती नालों का वैज्ञानिक पुनर्निर्माण और गांव स्तर तक जल निकासी प्रणाली का निर्माण ही स्थायी समाधान दे सकता है। पर्यावरणविदों का भी यही तर्क है कि नदियों के तटों पर अनियंत्रित अतिक्रमण और अवैध निर्माण बाढ़ की विभीषिका को और बढ़ा देते हैं। जब तक नदियों को उनका प्राकृतिक बहाव नहीं लौटाया जाएगा, तब तक यह त्रासदी बार-बार लौटकर आती रहेगी।

किसानों और आम लोगों की पीड़ा आंकड़ों से कहीं ज्यादा गहरी है। हजारों परिवार महीनों तक राहत शिविरों में रहने को मजबूर हो जाते हैं। बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है, महिलाओं और बुजुर्गों की सेहत बिगड़ती है और मजदूर वर्ग बेरोज़गारी का शिकार हो जाता है। इस बार भी छह हजार से ज्यादा गांव पानी में डूबे और करीब अट्ठाईस सौ लोग विस्थापित हुए। कल्पना कीजिए, जब इतनी बड़ी संख्या में लोग अपने घर-बार से उजड़ते हैं, तो उनकी मानसिक और सामाजिक स्थिति किस हद तक डगमगा जाती होगी।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब 2010 और 2023 जैसी बड़ी बाढ़ें आ चुकी थीं, तो 2025 में वही गलती दोहराने का औचित्य क्या था। असल कारण साफ हैं। राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी ने इस मुद्दे को कभी चुनावी एजेंडा नहीं बनने दिया। सरकारों का दृष्टिकोण हमेशा अल्पकालिक रहा। हर साल राहत और पुनर्वास पर खर्च होता रहा, लेकिन स्थायी संरचनाओं पर निवेश नहीं हुआ। इसके साथ ही भ्रष्टाचार और संसाधनों की बर्बादी ने हालात और बदतर कर दिए।

अगर सचमुच स्थायी समाधान चाहिए तो राज्य को ठोस कदम उठाने होंगे। एक स्वतंत्र नदी प्रबंधन आयोग का गठन करना होगा, जो नदियों और नालों की सफाई, तटबंध निर्माण और निगरानी जैसे काम नियमित रूप से करे। हर पंचायत स्तर पर ड्रेनेज योजना तैयार की जानी चाहिए और उसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित होना चाहिए। तकनीक का इस्तेमाल करते हुए सैटेलाइट मैपिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित पूर्वानुमान और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करना होगा। स्थानीय लोगों की भागीदारी से नालों की सफाई और तटबंधों की देखरेख सुनिश्चित करनी होगी। और सबसे महत्वपूर्ण यह कि राहत पैकेज पर अरबों रुपये खर्च करने के बजाय स्थायी ढांचे और संरचनाओं पर निवेश किया जाना चाहिए।

दरअसल बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा नहीं है, यह मानवीय लापरवाही और नीतिगत असफलता का परिणाम भी है। हरियाणा ने नौ बार बाढ़ झेली, लेकिन हर बार केवल आंकड़े गिनने और वादे करने तक ही बात सीमित रही। किसानों की पीड़ा, उद्योगों का नुकसान और विस्थापित परिवारों की त्रासदी हमें यह बताती है कि अब आधे-अधूरे उपायों से काम नहीं चलेगा। सरकार और समाज को मिलकर व्यापक, वैज्ञानिक और दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन नीति अपनानी ही होगी, वरना 2027 या 2030 में फिर यही खबर पढ़नी पड़ेगी—“एक और बाढ़, एक और नुकसान और एक और अधूरा वादा।”

डॉ सत्यवान सौरभ

महिलाओं ने जीवित्पुत्रिका व्रत रख मांगी संतान की दीर्घायु की कामना

बघौचघाट,देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) देवरिया के पथरदेवा एवं बघौचघाट क्षेत्र में जितिया पर्व पर महिलाओं ने संतान की मंगल कामना एवं दीर्घायु होने के लिए रविवार को जीवित्पुत्रिका व्रत रखा। महिलाओं ने व्रत की शुरुआत रविवार की भोर में कुल की परंपरा के अनुसार अपने पितरों को नैवेध अर्पित करने के उपरांत सरगही के रूप में दही,चीउरा आदि ग्रहण कर किया। जो 24 घंटे का निर्जला उपवास के बाद सोमवार को पारन करेंगी।शाम को व्रती महिलाएं नदीघाट,पोखरे एवम घर पर स्नान किया।इस दौरान व्रती महिलाएं खनुआ नदी बघौचघाट,पचरुखिया घाट,पकहा घाट,कोइरी पट्टी घाट,कोईलसवा घाट,अहिरौली घाट पर पहुंच कर एवम घर स्नान किया।उसके बाद अपने अपने पितरों को परंपरा के अनुसार विधि विधान से पूजन अर्चन एवं बरियार के पेड़ को गले लगाया।उसके बाद मंदिर में पहुंचकर पंडितो एवं आचार्य द्वारा जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनी।और गले में धागे की माला धारण किया। इसके साथ ही संतान की दीर्घायु की मंगल कामना का आशीर्वाद मांगी।वही प्रति महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगाकर सुहाग की सलामती की कामना की। मेंदीपट्टी स्थित श्री ठाकुर जी मंदिर के पुजारी पंडित बृजेश पांडेय ने बताया कि संतान के लिए जीवित्पुत्रिका व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है।इस व्रत को रखने से संतान पर आने वाले विपत्ति दूर होती है।