नई दिल्ली।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ लगाने और चेतावनी देने के बावजूद, भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद नहीं की है। बल्कि अगस्त 2025 में भारत ने जुलाई की तुलना में अधिक मात्रा में रूसी तेल आयात किया। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक रणनीति का स्पष्ट संकेत है, जो अमेरिकी दबाव के बावजूद अपनी नीतियों पर कायम है।
भारत के साथ-साथ चीन भी रूसी तेल का बड़ा खरीदार बना हुआ है। हालाँकि चीन ने जुलाई के मुकाबले अगस्त में कुछ कम तेल खरीदा, लेकिन यह कमी इतनी बड़ी नहीं थी कि रूस को कोई बड़ा झटका लगे।
ड्रोन हमलों से हिला रूस का तेल उद्योग
अगस्त 2025 में यूक्रेन ने रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया, जिसने रूस की तेल रिफाइनिंग क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया। रिपोर्टों के मुताबिक, इन हमलों से रूस की लगभग 20% रिफाइनिंग क्षमता ठप हो गई, यानी करीब 1.1 मिलियन बैरल प्रति दिन (बीपीडी) उत्पादन बाधित हुआ। सिज़रान रिफ़ाइनरी, क्रास्नोडार संयंत्र, द्रुज़्बा पाइपलाइन और उस्त-लुगा टर्मिनल जैसे अहम ढाँचों को नुकसान पहुँचा।
भारत के लिए अवसर
रूसी रिफाइनरियों पर हमलों और मध्य पूर्वी तेल की ऊँची कीमतों के बीच, भारत ने इस स्थिति को अवसर में बदल दिया। रूसी यूराल क्रूड ब्रेंट की तुलना में 5-6 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिल रहा है। यह अंतर भारतीय रिफाइनरियों के लिए लाभप्रद है, क्योंकि मामूली मूल्य अंतर भी मुनाफ़े पर बड़ा असर डालता है।
रूस का जवाब
हमलों से घरेलू ईंधन संकट झेल रहे रूस ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में कच्चे तेल के निर्यात में 2,00,000 बैरल प्रतिदिन की वृद्धि की है। हालांकि इससे रूस ने अल्पकालिक राहत तो पाई, लेकिन घरेलू ईंधन आपूर्ति और ज़्यादा प्रभावित हो गई।
निष्कर्ष
अमेरिका के टैरिफ और यूक्रेन युद्ध की चुनौतियों के बीच, भारत और चीन जैसे देशों की रूसी तेल पर निर्भरता कम नहीं हो रही है। भारत का यह कदम साफ़ करता है कि वह अपनी ऊर्जा ज़रूरतों और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देता रहेगा, चाहे वैश्विक दबाव कितना भी क्यों न हो।
बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। बरहज-सोनूघाट मार्ग निर्माण की माँग को लेकर आज चौथे दिन भी सपा नेता विजय रावत के नेतृत्व में जरार रमन में ग्रामीणों के साथ सांकेतिक प्रदर्शन किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने सरकार विरोधी नारेबाज़ी करते हुए जल्द सड़क निर्माण की माँग उठाई।
सपा नेता विजय रावत ने कहा कि “बरहज-सोनूघाट मार्ग एक्सीडेंट मार्ग बन चुका है। अगर आप सभी सहयोग करें तो छह महीने के अंदर यह सड़क बनकर तैयार हो जाएगी। सड़क बनवाने के लिए जेल भी जाना पड़ा तो पीछे नहीं हटेंगे।”
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में बरहज विधानसभा विकास से पिछड़ गया है। विधानसभा की अधिकांश सड़कें जर्जर हैं, जिससे आमजन परेशान है। उन्होंने कहा कि यह सरकार रोजगार विरोधी ही नहीं बल्कि विकास विरोधी भी है।
विजय रावत और रामनन्द यादव ने ग्रामीणों से अपील की, कि वे इस आंदोलन में सहयोग दें ताकि भ्रष्टाचार और लापरवाही से भरी इस सरकार को जगाया जा सके और सड़क निर्माण जल्द हो।
इस मौके पर मुख्य रूप से रामानंद यादव, दिनेश यादव, रामबदन कुशवाहा, राजू गौड़, इब्राहिम अली, रामसूरत यादव, अमरूद सिंह, पवन सिंह, रूपेश सिंह, अनिल यादव, विकेश यादव, रामनगर यादव, मुकेश सिंह, रामजन्म मदेशिया सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे।
पटना(राष्ट्र की परम्परा) हिंदी दिवस के अवसर पर टीचर्स ऑफ बिहार ने 7 से 14 सितंबर तक ऑनलाइन प्रतियोगिता “अनुगूँज-हिंदी की” का सफल आयोजन किया गया । इस प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच हिंदी भाषा के प्रति गौरवबोध जागृत करना तथा सृजनात्मक अभिव्यक्ति को मंच प्रदान करना था।
प्रतियोगिता में दो प्रमुख श्रेणियां रखी गई—
साहित्यिक लेखन प्रतियोगिता (स्वरचित कविता लेखन) विषय: हमारी अस्मिता की पहचान (शब्द सीमा: 100–200 शब्द)
पत्र लेखन प्रतियोगिता विषय: हिंदी के महत्व को समझाते हुए माता का पुत्र/पुत्री के नाम पत्र (शब्द सीमा: 12–20 पंक्तियाँ)
यह आयोजन दो वर्गों—कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थी तथा सरकारी विद्यालयों के शिक्षक—के लिए किया गया। सभी प्रविष्टियां टीचर्स ऑफ बिहार के आधिकारिक स्वप्रकाशन मंच (वेबसाइट) के माध्यम से ही आमंत्रित की गईं।
विजेताओं का चयन 15 से 18 सितंबर के बीच जनमत (ऑनलाइन वोटिंग/लाइक) एवं निर्णायक मंडल द्वारा मूल्यांकन, दोनों आधारों पर किया जाएगा।
इस अवसर पर टीचर्स ऑफ बिहार के फाउंडर शिव कुमार ने कहा कि “हिंदी हमारी अस्मिता और संस्कृति की आत्मा है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से नई पीढ़ी में भाषा के प्रति आत्मगौरव और सृजनशीलता की भावना प्रबल होगी।”
टेक्निकल टीम लीडर ई. शिवेंद्र प्रकाश सुमन ने कहा कि “डिजिटल युग में हिंदी का प्रचार-प्रसार तकनीक के माध्यम से और भी सशक्त हो सकता है। टीचर्स ऑफ बिहार मंच का यह उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।”
इवेंट लीडर केशव कुमार एवं अनुपमा प्रियदर्शिनी ने बताया कि “प्रतियोगिता में विद्यार्थियों और शिक्षकों की उत्साहजनक भागीदारी रही, जिसने इसे बेहद सफल बना दिया।”
प्रदेश प्रवक्ता रंजेश कुमार एवं प्रदेश मीडिया संयोजक मृत्युंजय कुमार ने संयुक्त रूप से जानकारी दी कि “प्रतियोगिता के परिणाम शीघ्र ही घोषित किए जाएंगे तथा विजेताओं को विशेष सम्मान प्रदान किया जाएगा।
बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा ) प्राथमिक विद्यालय जयनगर नंबर -2 नगर क्षेत्र बरहज की लाइब्रेरी में दुनिया का सबसे छोटा श्रीमद्भागवत गीता विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष जय नारायण त्रिपाठी प्रिंस द्वारा, लखनऊ से लाया गया। इस भगवत गीता को विद्यालय की लाइब्रेरी में लाना से बच्चों को काफी महत्वपूर्ण ज्ञान मिलेगा और पूरे जिले के लाइब्रेरी से एक अनूठा लाइब्रेरी होगा। इसको बच्चे एवं शिक्षक भी पढ़ सकते हैं और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। त्रिपाठी ने बताया कि इस श्रीमद्भागवत गीता में 18 हजार श्लोक सहित सम्पूर्ण भागवत हैं यह इतना अनूठा हैं कि आप पाकेट में भी रख सकते हैं विद्यालय के लिए अन्य किताब मुन्शी प्रेम चंद्र की कहानियो का संग्रह लाया गया है विद्यालय की लाइब्रेरी में इस समय कुल 259 कहानियों एवं महापुरुषों की किताबे है और अब तो इस लाइब्रेरी में श्रीमद्भागवत गीता के आने से लाइब्रेरी की महत्ता बढ़ जाएगी। इससे भी आ गया है विश्वास है कि इससे बच्चों व शिक्षकों का आध्यात्मिक एवं सामाजिक ज्ञान बढ़ेगा। बताते चलें कि त्रिपाठी अपने विद्यालय में हमेशा कुछ नया करने का प्रयास करते हैं और सफल भी होते हैं क्योंकि इनके द्वारा जो भी कार्य किया जाता है वह पूरे निष्ठा और मनोयोग से किया जाता हैं भव्य लाइब्रेरी का निर्माण भी अपने स्वयं के अर्थ से तथा विद्यालय में बृक्षरोपण कर विद्यालय को हरा भरा रखा गया है,इसका श्रेय प्रधानाध्यापक को जाता।
सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) सोमवार को राष्ट्रीय समानता दल के नेतृत्व में जननायक स्व. हरिकेवल प्रसाद कुशवाहा की पुण्यतिथि के अवसर पर महामहिम राज्यपाल महोदय उत्तर प्रदेश एवं उपजिलाधिकारी सलेमपुर को ज्ञापन दिया गया।
प्रदेश अध्यक्ष संजयदीप कुशवाहा ने कहा कि जननायक स्व. हरिकेवल प्रसाद कुशवाहा के संघर्षों, कार्यों और विचारों को जीवंत और अमरत्व बनाये रखने की आवश्यकता है। वे उत्तर प्रदेश की राजनीति में वंचित और शोषित समाज की बुलंद आवाज थे। उन्होंने 1954 में काशी विश्वनाथ मंदिर में अछूत समाज को प्रवेश दिलाने के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया। पूर्वोत्तर रेलवे कुली मजदूर संघ के पांच वर्षों तक अध्यक्ष रहे और रोडवेज मजदूर सभा से भी जुड़े रहे।
उन्होंने विधानसभा सलेमपुर का दो बार तथा लोकसभा सलेमपुर का चार बार प्रतिनिधित्व किया। सामंती सोच के विरुद्ध उन्होंने “चारपाई आंदोलन” चलाकर वंचित समाज को सामाजिक सम्मान दिलाया। अंग्रेजी हटाओ आंदोलन और आपातकाल में भी उन्होंने जेल यात्रा की। इन्होंने
ज्ञापन में प्रमुख मांगें:, सलेमपुर नगर पंचायत स्थित सीएचसी का नामकरण जननायक हरिकेवल प्रसाद कुशवाहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र किया जाए। नगर पंचायत सलेमपुर में प्रस्तावित रोडवेज बस स्टैण्ड का नामकरण जननायक स्व. हरिकेवल प्रसाद कुशवाहा पर किया जाए।नगर पंचायत सलेमपुर के मझौली मोड़ पर उनकी प्रतिमा स्थापित की जाए। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष संजयदीप कुशवाहा, राष्ट्रीय मुख्य महासचिव अगमस्वरू कुशवाहा, सुरेंद्र बौद्ध (संस्थापक राष्ट्रीय महिला बहुजन संगठन), विजय कुमार (जिलाध्यक्ष), अशोक कुमार शर्मा, शेषमणि कुशवाहा, चंद्रिका पासवान, मानसिंह कुशवाहा, सुदामा कुशवाहा, विमलेश कुमार, रामविश्वास, शत्रुघ्न कुशवाहा, रामप्रताप कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
बिछुआ/मध्य प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। शासकीय महाविद्यालय बिछुआ में स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ एवं इन्नोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेंटर के तत्वावधान में प्राचार्य डॉ. आर.पी. यादव के निर्देशन में दिनांक 25 अगस्त 2025 से कुकिंग एवं बेकिंग प्रशिक्षण चल रहा है। प्रशिक्षण में विद्यार्थियों ने चीज़ केक, पाइनएप्पल केक, व्हाइट सॉस पास्ता, अप्पे, चॉकलेट केक, ज्वार के आटे का केक, विभिन्न प्रकार की चॉकलेट्स, स्वादिष्ट लड्डू, ब्रेड पिज़्ज़ा, वेजिटेबल पिज़्ज़ा और कुल्हड़ पिज़्ज़ा जैसे व्यंजन बनाना सीख रहे है। कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ. फरहत मंसूरी ने बताया कि प्रशिक्षण पलक डिलाइट्स की संचालक कुमारी पलक साहू द्वारा प्रदान किया जा रहा है। समस्त टीम का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा है, जिससे विद्यार्थियों को व्यावसायिक कौशल प्राप्त हो रहा है।
समय और समाज के बदलते माहौल के साथ हर पीढ़ी की सोच, जीवनशैली और चुनौतियाँ बदलती हैं। ग्रेटेस्ट जनरेशन और साइलेंट जनरेशन ने युद्ध और कठिनाई का सामना किया। बेबी बूमर्स ने औद्योगिकीकरण देखा, जेन-एक्स ने तकनीकी शुरुआत अनुभव की, और मिलेनियल्स ने इंटरनेट और वैश्वीकरण के साथ युवा जीवन जिया। जेन-ज़ी डिजिटल नेटिव हैं, आत्मनिर्भर और तेज़ सोच वाले, जबकि जेन अल्फा पूरी तरह डिजिटल माहौल में पले-बढ़ रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक जुड़ाव और रोजगार की अनिश्चितता इनकी प्रमुख चुनौतियाँ हैं। संतुलन, रचनात्मकता और अनुभव-साझा करके भविष्य संवेदनशील और प्रगतिशील बनाया जा सकता है। समाज में समय-समय पर होने वाले परिवर्तन केवल राजनीति या तकनीकी तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इंसान की सोच, जीवनशैली और संस्कृति पर गहरा असर डालते हैं। यही कारण है कि अलग-अलग वर्षों में जन्म लेने वाले लोगों को अलग-अलग “जनरेशन” के रूप में पहचाना जाता है। आजकल स्कूलों, कॉलेजों और यहाँ तक कि कॉरपोरेट दुनिया में भी “जेन-जी” और “जेन अल्फा” जैसे शब्द आम हो गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि ये पीढ़ियाँ हैं क्या, इनकी सोच और चुनौतियाँ किन मायनों में अलग हैं और क्या यह फर्क समाज को मज़बूत बना रहा है या विभाजन पैदा कर रहा है?
जनरेशन दरअसल वह समूह है जो लगभग समान समयावधि में जन्म लेता है और अपने बचपन व युवावस्था में समान सामाजिक व सांस्कृतिक परिस्थितियों का अनुभव करता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौर में जन्मे बच्चे और आज के डिजिटल युग में जन्मे बच्चों की सोच और जीवनशैली में ज़मीन-आसमान का फर्क है। यही फर्क हर पीढ़ी की पहचान बन जाता है। अमेरिका और यूरोप में बीसवीं सदी की शुरुआत में पीढ़ियों को वर्गीकृत करने का चलन शुरू हुआ और अब भारत सहित पूरी दुनिया में इसे अपनाया जा रहा है।
बीसवीं सदी की शुरुआत से लेकर अब तक कई पीढ़ियाँ सामने आई हैं। 1901 से 1927 के बीच जन्म लेने वाली “ग्रेटेस्ट जनरेशन” ने प्रथम विश्व युद्ध और महामंदी की कठिन परिस्थितियों का सामना किया। इनकी ज़िंदगी अनुशासन और त्याग से भरी रही। इसके बाद 1928 से 1945 तक जन्मे लोग “साइलेंट जनरेशन” कहलाए। यह वह पीढ़ी थी जिसने द्वितीय विश्व युद्ध, गरीबी और विस्थापन के बीच अपना बचपन गुज़ारा। भारत में यही पीढ़ी स्वतंत्रता और विभाजन दोनों की गवाह बनी। 1946 से 1964 के बीच जन्म लेने वाली पीढ़ी “बेबी बूमर्स” के नाम से जानी गई। युद्ध के बाद जन्म दर में तेज़ी से वृद्धि हुई और दुनिया पुनर्निर्माण की ओर बढ़ी। भारत में यह वही लोग थे जिन्होंने पहली बार स्वतंत्र नागरिक का दर्जा पाया और औद्योगिकीकरण तथा हरित क्रांति के दौर को देखा।
1965 से 1980 के बीच जन्म लेने वाली “जेनरेशन एक्स” तकनीकी क्रांति की आहट के साथ बड़ी हुई। टीवी और रेडियो इनके जीवन का हिस्सा बने। भारत में इस पीढ़ी ने आपातकाल और आर्थिक संकट का समय देखा, इसलिए यह व्यावहारिक और आत्मनिर्भर मानी जाती है। इसके बाद 1981 से 1996 तक जन्म लेने वाली पीढ़ी “मिलेनियल्स” या “जेन-वाई” कहलायी। इसने इंटरनेट और वैश्वीकरण का दौर देखा। नई महत्वाकांक्षाओं और सपनों से भरे इन युवाओं ने आईटी क्रांति और मोबाइल तकनीक का लाभ उठाया।
1997 से 2012 तक जन्म लेने वाली “जेनरेशन-ज़ी” डिजिटल नेटिव कहलाती है। इन बच्चों ने बचपन से ही इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया। इनकी पहचान आत्मविश्वास, रचनात्मकता और तेज़ सोच है, लेकिन अधीरता और प्रतिस्पर्धा भी इनमें साफ़ दिखाई देती है। इसके बाद 2013 से 2025 के बीच जन्म लेने वाले बच्चे “जेनरेशन अल्फा” के नाम से पहचाने जाते हैं। ये बच्चे ऐसे माहौल में पले-बढ़ रहे हैं जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वर्चुअल रियलिटी और रोबोटिक्स रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। इनके खिलौने भी स्मार्ट डिवाइस हैं और शिक्षा पूरी तरह ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर आधारित होती जा रही है।
जेनरेशन-ज़ी की कुछ खास विशेषताएँ इन्हें औरों से अलग करती हैं। यह पहली पीढ़ी है जिसने बचपन से ही डिजिटल आईडी बनाई। किताबों और अख़बारों की जगह यूट्यूब, इंस्टाग्राम और नेटफ्लिक्स इनकी पसंद बन गए। ये मल्टीटास्किंग में माहिर हैं, आत्मनिर्भर और स्वतंत्र सोच रखते हैं, लेकिन इनकी सबसे बड़ी चुनौती ध्यान केंद्रित करने की क्षमता का कम होना है। सोशल मीडिया से होने वाली तुलना इनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है और कई बार चिंता व अवसाद जैसी समस्याएँ भी पैदा करती है।
जेनरेशन अल्फा का भविष्य और भी अनोखा होगा। यह मानव इतिहास की पहली पूरी तरह डिजिटल नेटिव पीढ़ी है। इनके खिलौने रोबोट हैं, शिक्षा वर्चुअल क्लासरूम में हो रही है और इनके खेल का मैदान मेटावर्स तथा ऑगमेंटेड रियलिटी है। ये वैश्विक स्तर पर सोचेंगे क्योंकि इन्हें बचपन से ही दुनिया से जुड़े प्लेटफ़ॉर्म मिल रहे हैं, लेकिन साथ ही यह खतरा भी रहेगा कि इनका वास्तविक दुनिया से जुड़ाव कमजोर हो जाए।
हर पीढ़ी पिछली से अलग रही है। बेबी बूमर्स नौकरी और स्थिरता को महत्व देते थे, जेन-एक्स ने संतुलन साधा, मिलेनियल्स ने उद्यमिता और सपनों पर ध्यान दिया, जबकि जेन-जी और अल्फा तेज़ी, सुविधा और त्वरित संतुष्टि को महत्व देते हैं। यही अंतर कभी-कभी संवाद की खाई भी पैदा कर देता है।
भारतीय संदर्भ में पीढ़ियों का असर और भी विविध है। गाँव और शहर में अनुभव अलग हैं। गाँव के बच्चे आज भी पारंपरिक खेलों और सामाजिक आयोजनों से जुड़े रहते हैं, जबकि शहरों के बच्चे मोबाइल और लैपटॉप की दुनिया में खोए रहते हैं। जेन अल्फा में यह अंतर और भी गहरा होगा। आर्थिक असमानता और शिक्षा का स्तर भी इस खाई को बढ़ाता है।
जेन-जी और अल्फा बच्चों के सामने कई चुनौतियाँ खड़ी होंगी। सबसे पहली चुनौती मानसिक स्वास्थ्य है। लगातार स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया के दबाव ने चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को जन्म दिया है। दूसरी चुनौती सामाजिक जुड़ाव की है। वर्चुअल दुनिया में रिश्ते तो बनते हैं, लेकिन असली संबंध कमजोर पड़ जाते हैं। तीसरी चुनौती रोज़गार की अनिश्चितता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन पारंपरिक नौकरियों को खत्म कर रहे हैं। ऐसे में नई स्किल्स सीखना बच्चों के लिए अनिवार्य होगा।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए समाधान भी संभव हैं। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को डिजिटल और वास्तविक जीवन का संतुलन सिखाएँ। शिक्षा प्रणाली को केवल अंकों तक सीमित न रखकर रचनात्मकता, सहयोग और भावनात्मक बुद्धिमत्ता पर जोर देना होगा। सबसे ज़रूरी यह है कि बच्चों को प्रकृति और समाज से जोड़ा जाए। अगर पुरानी पीढ़ियों का अनुभव और नई पीढ़ियों की ऊर्जा आपस में मिल जाए, तो यह पीढ़ियाँ न केवल तकनीकी रूप से सक्षम होंगी बल्कि मानवीय दृष्टि से भी संवेदनशील बनेंगी।
डॉ प्रियंका सौरभ
अंत में कहा जा सकता है कि जेनरेशन-जी और अल्फा केवल नाम नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र का भविष्य हैं। पीढ़ियाँ बदलना स्वाभाविक है, लेकिन हर पीढ़ी की ताक़त और सीख को समझना ज़रूरी है। अगर हम अनुभव और ऊर्जा का मेल कर पाए, तो समाज संतुलित और प्रगतिशील बनेगा। यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम आने वाली पीढ़ियों को तकनीकी रूप से दक्ष और मानवीय दृष्टि से संवेदनशील बनाकर सही दिशा दें।
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को राजधानी लखनऊ में ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश भर से आए फरियादियों से मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में 50 से अधिक लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। इनमें रायबरेली जिले के थाना खीरो के ग्राम बरवलिया निवासी एक युवक ने भी मुख्यमंत्री से गुहार लगाई। युवक ने बताया कि उसके पिता किडनी, हृदय और यूरिन संबंधी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराना अब संभव नहीं हो पा रहा है।
मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि मरीज को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया जाए। साथ ही, इलाज की अनुमानित लागत का एस्टीमेट तैयार कराकर शासन को भेजने को कहा, ताकि सरकारी स्तर पर सहयोग उपलब्ध कराया जा सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरोसा दिलाया कि किसी भी मरीज को इलाज के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। सरकार हर जरूरतमंद को मदद उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) द्वारका जिला पुलिस ने साल के सबसे बड़े गिरोह-विरोधी अभियान को अंजाम देते हुए दिल्ली और हरियाणा में कुल 25 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस अभियान में 25 पुलिस टीमों और 380 से अधिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्रवाई द्वारका डीसीपी की सीधी निगरानी में हुई।
कहाँ-कहाँ हुई छापेमारी
पुलिस ने जानकारी दी कि 25 छापेमारी स्थलों में से 19 दिल्ली और 6 हरियाणा-एनसीआर में थे। इस कार्रवाई का मुख्य फोकस कुख्यात बदमाश कपिल सांगवान उर्फ नंदू और विक्की टक्कर के आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त करना था। दोनों पर जबरन वसूली, हत्या और हथियारों की तस्करी जैसे कई गंभीर अपराधों के आरोप हैं।
बरामदगी छापेमारी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में नकदी और लग्ज़री सामान मिले। इनमें शामिल हैं: ₹35 लाख नकद लगभग ₹50 लाख मूल्य के सोने के आभूषण 8 पिस्तौल, 29 ज़िंदा कारतूस और 3 मैगज़ीन एक बुलेटप्रूफ टोयोटा फॉर्च्यूनर और एक ऑडी (PB 13 BN 0004) 14 महंगी लग्ज़री घड़ियाँ लैपटॉप, आईपैड, कैश गिनने की मशीन और वॉकी-टॉकी सेट गिरफ्तारियांपुलिस ने छापेमारी के दौरान 26 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें से 6 को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों ने पुष्टि की कि गिरफ्तार सभी आरोपी नंदू या विक्की टक्कर गिरोह से सीधे तौर पर जुड़े हैं।
गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी पवन उर्फ प्रिंस (18): नंदू गिरोह का शूटर, राजमंदिर स्टोर और छावला फायरिंग मामलों में शामिल।हिमांशु उर्फ मच्छी (24): विक्की टक्कर गिरोह का सदस्य, 7 आपराधिक मामलों में नामजद।प्रशांत: नंदू गिरोह का शूटर, जिसके खिलाफ 11 मामले दर्ज।राहुल दिवाकर उर्फ मनप्रीत (25): विक्की टक्कर गिरोह से जुड़ा, 20 एफआईआर में नामजद। अंकित ढींगरा उर्फ नोनी (34): नंदू गिरोह से जुड़े 10 मामलों में शामिल।प्रवीण उर्फ डॉक्टर: सबसे कुख्यात आरोपी, जिसके नाम 25 से ज़्यादा आपराधिक मामले दर्ज।
पुलिस का बयान अधिकारियों ने बताया कि यह छापेमारी न केवल दोनों गैंगों की आर्थिक रीढ़ तोड़ने के लिए थी बल्कि उनके बढ़ते आपराधिक प्रभाव को भी रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और गिरोह की शेष कड़ियों की तलाश जारी है।
मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) महाराष्ट्र को नया राज्यपाल मिल गया है। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सोमवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल पद की शपथ ली। राजभवन में आयोजित शपथग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकांत शिंदे सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
आचार्य देवव्रत ने सी.पी. राधाकृष्णन का स्थान लिया है। राधाकृष्णन ने हाल ही में भारत के उपराष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के लिए राज्यपाल पद से इस्तीफा दिया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनके त्यागपत्र स्वीकार करते हुए आचार्य देवव्रत को अतिरिक्त प्रभार सौंपने का आदेश जारी किया। राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे।
गौरतलब है कि एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन को 9 सितंबर को भारत का 15वां उपराष्ट्रपति चुना गया। चुनाव में उन्हें 452 मत मिले, जबकि विपक्ष के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 मत प्राप्त हुए।
डिजिटल कनेक्टिविटी को भी मिली मंजूरी इसी बीच संचार मंत्रालय ने बीएसएनएल की ओर से प्रस्तुत संशोधित सूची को हरी झंडी दे दी है। अप्रैल 2023 में स्वीकृत 2,751 गांवों में से कई स्थानों पर तकनीकी कारणों से मोबाइल टावर स्थापित नहीं हो पाए थे। इसके चलते बीएसएनएल ने 930 गांवों की नई सूची प्रस्तुत की, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।
निर्णय के अनुसार, प्रत्येक टावर स्थल के लिए 200 वर्ग मीटर भूमि निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। यह व्यवस्था 29 नवंबर 2022 के पूर्व मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुरूप होगी। सरकार का दावा है कि इस कदम से ग्रामीण इलाकों में डिजिटल कनेक्टिविटी और नेटवर्क सुविधा को नई गति मिलेगी।
👉 महाराष्ट्र में नया नेतृत्व और गांवों तक नेटवर्क पहुंचाने की यह दोहरी पहल राज्य की राजनीति और विकास यात्रा दोनों के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
पटना(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट के मंत्री जीवेश मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी तत्काल बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग की है।
तेजस्वी यादव ने रविवार को एक वीडियो जारी कर दावा किया कि दरभंगा जिले के जाले विधानसभा क्षेत्र में सड़क की स्थिति को लेकर सवाल पूछने वाले पत्रकार धीरज पर न केवल मंत्री मिश्रा के लोगों ने हमला किया, बल्कि मंत्री स्वयं भी मारपीट में शामिल रहे। उन्होंने कहा कि वे दरभंगा जाकर पीड़ित पत्रकार को अपने साथ थाने ले जाएंगे और मंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएंगे।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि मंत्री मिश्रा पर पहले से ही नकली दवा बेचने के मामले में एफआईआर दर्ज है, इसके बावजूद मुख्यमंत्री ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया।
तेजस्वी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा,
“जब मुख्यमंत्री जाले विधानसभा क्षेत्र का दौरा कर रहे थे, उसी दौरान मंत्री मिश्रा ने पत्रकार धीरज पर जानलेवा हमला करवाया। यह साबित करता है कि बिहार में पूरी तरह से अराजकता है। 2005 से पहले जो माहौल था, वही जंगलराज अब फिर लौट आया है।”
तेजस्वी यादव की इस बयानबाजी से बिहार की राजनीति में सियासी तापमान और बढ़ गया है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जेडीयू इस पूरे प्रकरण पर क्या रुख अपनाते हैं।
लंदन(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दुनिया के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। नेपाल और अमेरिका के बाद अब ब्रिटेन में भी बड़े स्तर पर आंदोलन खड़ा हो गया है। राजधानी लंदन में शनिवार को अवैध प्रवासियों के खिलाफ करीब एक लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतर आए। इस प्रदर्शन को “यूनाइटेड द किंगडम” नाम दिया गया और इसे दक्षिणपंथी नेता टॉमी रॉबिन्सन ने आयोजित किया।
प्रदर्शन के दौरान जबरदस्त नारेबाजी हुई और अवैध प्रवासियों को देश से बाहर करने की मांग तेज़ हो गई। यह अब तक का ब्रिटेन का सबसे बड़ा दक्षिणपंथी विरोध मार्च माना जा रहा है।
एलन मस्क का भी बयान
इस प्रदर्शन को अमेरिकी अरबपति और टेस्ला मालिक एलन मस्क ने भी वीडियो संदेश के ज़रिए संबोधित किया। मस्क ने कहा – “हिंसा तुम्हारे पास आ रही है। या तो लड़ो या मरो। सरकार बदलनी होगी और संसद भंग करनी होगी।”
प्रदर्शन के दौरान हिंसा, 26 पुलिसकर्मी घायल
सेंट्रल लंदन में प्रदर्शन हिंसक हो गया। झड़पों में 26 पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमें से चार की हालत गंभीर बताई गई है। पुलिस ने हालात काबू करने के लिए बल प्रयोग किया और अब तक 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पीएम स्टार्मर की प्रतिक्रिया
वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर प्रदर्शन के वक्त अपने बेटे के साथ लंदन के एमिरेट्स स्टेडियम में फुटबॉल मैच देख रहे थे। हिंसा की घटनाओं के बाद उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी। स्टार्मर ने कहा – “लोगों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार है, यह हमारे देश के मूल्यों के केंद्र में है। लेकिन हिंसा, नस्लवाद और पुलिसकर्मियों पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।”
यूरोप में बढ़ रहा विरोध
विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप में अवैध प्रवासियों का मुद्दा अब पहले से कहीं ज्यादा जोर पकड़ रहा है। शुरुआती दौर में मानवाधिकार और उदारवादी नीतियों के चलते जिन देशों ने प्रवासियों को जगह दी थी, अब वहीं लोग सड़कों पर उतरकर उन्हें बाहर निकालने की मांग कर रहे हैं। ब्रिटेन में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर आप्रवासी विरोधी रैली हुई है, जिसने पूरे यूरोप का ध्यान खींच लिया है।
नई दिल्ली/मास्को (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नई दिल्ली पर रूसी तेल आयात को लेकर भारी टैरिफ लगाने के बीच रूस ने भारत के साथ अपने दीर्घकालिक संबंधों की सराहना की है। साथ ही चेतावनी दी है कि इन रिश्तों को कमजोर करने की कोई भी कोशिश नाकाम साबित होगी।
रूसी विदेश मंत्रालय ने सरकारी मीडिया आउटलेट आरटी से बातचीत में कहा कि “मॉस्को और दिल्ली के बीच संबंध लगातार और आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहे हैं। इस प्रक्रिया में बाधा डालने का कोई भी प्रयास विफल होगा।”
भारत के रुख की सराहना
मंत्रालय ने अमेरिका और नाटो देशों द्वारा दबाव डालने के बावजूद भारत द्वारा रूस से तेल और रक्षा उपकरण खरीद जारी रखने के फैसले की प्रशंसा की। बयान में कहा गया कि भारत का दृष्टिकोण “लंबे समय से चली आ रही रूस-भारत मित्रता और परंपराओं” पर आधारित है और यह “अंतर्राष्ट्रीय मामलों में रणनीतिक स्वायत्तता” को दर्शाता है।
नई भुगतान प्रणाली और सहयोग पर ज़ोर
रूस ने भारत के साथ मिलकर नई भुगतान प्रणालियों के विकास, राष्ट्रीय मुद्राओं में लेनदेन और वैकल्पिक परिवहन एवं लॉजिस्टिक मार्गों को मजबूत करने पर बल दिया।
ट्रंप प्रशासन का कड़ा रुख
गौरतलब है कि पिछले महीने अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 25% आधार शुल्क और रूस से आयात पर 25% अतिरिक्त ‘जुर्माना’ लगाया। वाशिंगटन का आरोप है कि भारत की खरीदारी से यूक्रेन संघर्ष को अप्रत्यक्ष बढ़ावा मिल रहा है। हालांकि, भारत ने इस आरोप को बार-बार “अनुचित और निराधार” बताते हुए खारिज किया है।
व्यापार समझौते पर गतिरोध
अमेरिका और भारत के बीच नया व्यापार समझौता लंबे समय से अटका हुआ है। ट्रंप प्रशासन ने बातचीत फिर से शुरू करने के संकेत दिए हैं, लेकिन भारत ने कृषि और डेयरी उत्पादों पर रियायतें देने से साफ इंकार कर दिया है। भारत का कहना है कि यह उसके लिए “बहुत बड़ी लाल रेखाएँ” हैं।
हिंद महासागर में भारत की समुद्री उपस्थिति होगी और मजबूत
सौजन्य से ANI
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क )भारतीय नौसेना के बेड़े में स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘आन्द्रोत’ को शामिल कर लिया गया है। यह कदम न केवल हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री शक्ति को और सुदृढ़ करेगा, बल्कि चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच तटीय निगरानी और पनडुब्बी रोधी क्षमताओं को भी नया आयाम देगा।
‘आन्द्रोत’ उथले जल में संचालित आठ पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों (ASW-SWC) में से दूसरा है, जिसका निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा किया गया है। शनिवार को इसे औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना को सौंपा गया। यह आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
रणनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व
इस जहाज का नाम लक्षद्वीप द्वीपसमूह के आन्द्रोत द्वीप से लिया गया है। यह भारत की अपने विस्तृत समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के संकल्प को दर्शाता है।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस
करीब 77 मीटर लंबे इस युद्धपोत को डीजल इंजन-वॉटरजेट के संयोजन से संचालित किया जाता है। यह भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा ऐसा जहाज है जो इस प्रणाली से चलता है।इसमें आधुनिक हल्के टॉरपीडो लगे हैं।
साथ ही, यह स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्ध रॉकेटों से भी सुसज्जित है।आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
नौसेना ने अपने वक्तव्य में कहा कि ‘आन्द्रोत’ की सुपुर्दगी स्वदेशी युद्धपोत निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह जहाज 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित है, जो घरेलू तकनीकी क्षमता और संसाधनों में बढ़ती मजबूती का प्रतीक है। साथ ही, यह रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता घटाने का भी संकेत देता है।
काठमांडू।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) नेपाल की नई प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने रविवार को पदभार ग्रहण करते ही बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि “जेन-जी” प्रदर्शन के दौरान मारे गए लोगों को ‘बलिदानी’ घोषित किया जाएगा और उनके परिजनों को 10-10 लाख नेपाली रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। 73 वर्षीय कार्की ने पूर्वाह्न करीब 11 बजे सिंहदरबार सचिवालय स्थित नवनिर्मित गृह मंत्रालय भवन में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और आगजनी सुनियोजित थी। यह एक आपराधिक कृत्य है और असली दोषियों को न्याय के कठघरे में लाया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि जेन-जी समूह के प्रदर्शनकारी हिंसा में शामिल नहीं थे। हिंसा और सार्वजनिक व निजी संपत्ति की तोड़फोड़ करने वालों की पहचान कर उन्हें कड़ी सजा दी जाएगी। गौरतलब है कि पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने जेन-जी समूह की सिफारिश पर कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। इसी समूह ने बीते मंगलवार को जोरदार आंदोलन के जरिए केपी शर्मा ओली सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था।