Saturday, May 2, 2026
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पुलिस भर्ती परीक्षा को लेकर डीएम-एसपी ने किया परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण

निष्पक्ष व शांतिपूर्ण परीक्षा के लिए अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश, 12 केंद्रों पर दो पालियों में हुई परीक्षा

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में आयोजित पुलिस भर्ती परीक्षा–2026 को सकुशल, निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा एवं पुलिस अधीक्षक सोमेन्द्र मीणा ने रविवार को विभिन्न परीक्षा केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान दोनों अधिकारियों ने प्रथम एवं द्वितीय पाली में कई केंद्रों पर पहुंच कर परीक्षा व्यवस्था की निगरानी की और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने राजकीय कन्या इंटर कॉलेज महराजगंज, डॉ. बी.आर. अंबेडकर राजकीय महाविद्यालय, शिवजपत सिंह इंटरमीडिएट कॉलेज भिटौली तथा डीएवी नारंग इंटर कॉलेज घुघुली सहित अन्य परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने परीक्षा कक्षों का अवलोकन करते हुए सेक्टर मजिस्ट्रेट, स्टेटिक मजिस्ट्रेट, कक्ष निरीक्षकों और ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
जिलाधिकारी ने परीक्षा केंद्रों पर तैनात अधिकारियों को निर्देशित किया कि परीक्षा को पूरी तरह शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और सुचितापूर्ण ढंग से संपन्न कराया जाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना सभी अधिकारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने परीक्षा केंद्रों पर स्थापित सीसीटीवी कंट्रोल रूम का भी निरीक्षण किया। उन्होंने निगरानी व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय रखने और प्रत्येक गतिविधि पर सतर्क दृष्टि बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही परीक्षार्थियों के लिए बनाए गए बैठने, सुरक्षा तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली और जरूरत पड़ने पर सुधार के निर्देश दिए।
दोनों अधिकारियों ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि परीक्षा अवधि के दौरान सभी केंद्रों पर विशेष सतर्कता बरती जाए और शासन तथा आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि परीक्षा पूरी तरह सकुशल और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सके।
उपस्थिति के आंकड़ों के अनुसार राजकीय कन्या इंटर कॉलेज महराजगंज में प्रथम पाली में 323 परीक्षार्थी उपस्थित रहे जबकि 157 अनुपस्थित रहे। वहीं डॉ. बी.आर. अंबेडकर राजकीय महाविद्यालय में 334 परीक्षार्थी उपस्थित तथा 146 परीक्षार्थी अनुपस्थित पाए गए।
इसी प्रकार द्वितीय पाली में शिवजपत सिंह जनता इंटरमीडिएट कॉलेज भिटौली में 349 परीक्षार्थी उपस्थित रहे, जबकि 131 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। डीएवी नारंग इंटर कॉलेज घुघुली में कुल 240 पंजीकृत परीक्षार्थियों में से 178 उपस्थित रहे और 62 परीक्षार्थी अनुपस्थित पाए गये।
जनपद के कुल 12 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा में प्रथम पाली में 4560 पंजीकृत परीक्षार्थियों में से 3189 परीक्षार्थी उपस्थित हुए, जबकि 1371 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। वहीं दूसरी पाली में 3174 परीक्षार्थी उपस्थित और 1386 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे।
प्रशासन की कड़ी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के बीच जनपद में पुलिस भर्ती परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होती नजर आई। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि सभी केंद्रों पर परीक्षा इसी प्रकार पारदर्शिता और अनुशासन के साथ पूरी होगी।

नौतनवां में श्री सतगुरु देव महाराज के मूर्ति स्थापना दिवस पर निकली भव्य शोभायात्रा

भक्तों ने पूरे नगर में किया भ्रमण, सत्संग व प्रवचन से श्रद्धालुओं को मिला आध्यात्मिक संदेश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के नौतनवां नगर स्थित मुंडी डिंहवां में रविवार को सतगुरु देव महाराज के परम पिता परमेश्वर हरि प्रभु सदानंद भगवान की मूर्ति स्थापना दिवस के अवसर पर भव्य शोभायात्रा बड़े धूम-धाम और श्रद्धा के साथ निकाली गई। इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और पूरे नगर में भक्ति एवं आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा।
कार्यक्रम के दौरान अवतार भगवान श्री विष्णु ,भगवान श्री राम , भगवान श्री कृष्ण तथा वर्तमान काल के अवतार भगवान सदानंद के मूर्ति स्थापना दिवस को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन और जयघोष के साथ भगवान की आराधना की और शोभायात्रा में बढ़-चढ़ कर भाग लिया।
शोभायात्रा मुंडी डिहवा मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। यात्रा रेलवे स्टेशन चौराहा, घंटाघर चौक, अस्पताल चौराहा, गांधी कनुआ चौराहा और मां बनैलिंया मंदिर सहित विभिन्न स्थानों से होते हुए पूरे नगर का भ्रमण करती हुई पुनः मुंडी डिंहवां मंदिर परिसर पहुंची। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों और जयकारों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान महात्मा रामजीत वर्मा द्वारा सत्संग एवं प्रवचन का आयोजन किया गया। उन्होंने अपने प्रवचन में भक्तों को धर्म, अध्यात्म और मानव जीवन के उद्देश्य के बारे में विस्तार से बताया तथा ईश्वर भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उनके प्रवचन को सुनकर श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक ज्ञान अर्जित किया।
आयोजकों ने जानकारी देते हुए बताया कि आगामी दिनों में नेपाल के मजगावां क्षेत्र में पांच दिवसीय सत्संग कार्यक्रम एवं आत्मा, ईश्वर और ब्रह्मा दर्शन से संबंधित विशेष धार्मिक आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
इस अवसर पर कृष्ण प्रसाद, हरी पांडेय, राम प्रसाद लोध, रामकला साहनी, चंद्र भूषण यादव, मीरा पांडेय, रामजीत सहित बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे उपस्थित रहे और पूरे श्रद्धा भाव के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने भगवान से सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का ऐलान, 4 मई को आएंगे नतीजे

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। चुनाव आयोग ने देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा कर दी है। घोषणा के साथ ही संबंधित राज्यों में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है।
आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे। यहां 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।
असम, केरल और पुडुचेरी में एक ही चरण में मतदान कराया जाएगा। इन तीनों राज्यों में 19 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे और परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
वहीं तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।

गरीबी से जूझते परिवार में बेटी की शादी बनी चिंता, समाजसेवियों ने बढ़ाया मदद का हाथ

नौतनवां क्षेत्र के धोतिंयहवां गांव का मामला, ईद के बाद 26 मार्च को है शादी — प्रशासनिक मदद की भी उठी मांग

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के नौतनवां तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा धोतिंयहवां से एक बेहद मार्मिक और झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां मरहूम यूसुफ अली का परिवार आर्थिक तंगी और बदहाली के बीच जीवन यापन करने को मजबूर है। परिवार की हालत इतनी खराब है कि कई बार दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो जाता है। घर में न पिता का साया है और न ही कोई कमाने वाला सदस्य, जिसके कारण पूरा परिवार कठिन परिस्थितियों में दिन गुजार रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार मरहूम यूसुफ अली के निधन के बाद से ही परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। घर की जिम्मेदारियां महिलाओं और बच्चों के कंधों पर आ गईं, लेकिन आय का कोई स्थायी साधन न होने के कारण परिवार की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। आज हालात यह हैं कि परिवार को अपने दैनिक खर्चों और जरूरी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
इसी बीच परिवार में एक बेटी की शादी भी तय हो गई है, जो ईद के बाद आगामी 26 मार्च को होनी है। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण शादी की तैयारियां करना परिवार के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। शादी जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी परिवार के सामने संसाधनों की भारी कमी बनी हुई है। ऐसे में बेटी के हाथ पीले करने की जिम्मेदारी अब समाज के सहयोग और संवेदनशील लोगों की मदद पर टिकी हुई है।
जब इस गरीब परिवार की स्थिति की जानकारी क्षेत्र के समाजसेवी युनुस खान को हुई, तो उन्होंने मानवता का परिचय देते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से मदद की अपील की। उनकी इस पहल का सकारात्मक असर भी देखने को मिला। समाजसेवी अरसद और अभिषेक सहित कई लोगों के सहयोग से कुल 16,020 रुपये की सहायता राशि एकत्रित की गई, जिसे पीड़ित परिवार को सौंप दिया गया। इस सहायता से परिवार को शादी की प्रारंभिक तैयारियों में कुछ राहत जरूर मिली है।
हालांकि यह सहायता परिवार की जरूरतों के सामने बेहद सीमित है।
ग्रामीणों का कहना है कि शादी में अब बहुत कम समय बचा है और परिवार को अभी भी काफी आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। यदि समाज और प्रशासन का सहयोग मिल जाए, तो इस गरीब परिवार की बेटी की शादी सम्मान जनक तरीके से संपन्न हो सकती है।
इस घटना ने सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार जहां गरीबों को आवास और अन्य सुविधाएं देने के लिए कई योजनाएं चला रही है, वहीं इस पात्र और जरूरतमंद परिवार को अब तक किसी भी आवास योजना या पर्याप्त सरकारी सहायता का लाभ नहीं मिल पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन की नजर इस परिवार पर पड़ जाती, तो शायद आज इन्हें इतनी कठिन परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।
गांव के लोगों और समाजसेवियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता, आवास योजना तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए, ताकि इस बेटी की शादी सम्मान और गरिमा के साथ संपन्न हो सके।
यह घटना समाज के सामने एक महत्वपूर्ण संदेश भी छोड़ती है कि जब कोई परिवार विपत्ति में होता है तो समाज का सहयोग ही उसके लिए सबसे बड़ी ताकत बन जाता है। जरूरत इस बात की है कि समाज के साथ-साथ प्रशासन भी आगे आए और ऐसे जरूरतमंद परिवारों की समय रहते मदद सुनिश्चित करे।

वेबोमेट्रिक्स रैंकिंग में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रदेश के टॉप 5 में शामिल

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित वेबोमेट्रिक्स रैंकिंग ऑफ वर्ल्ड यूनिवर्सिटीज में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए उत्तर प्रदेश के शीर्ष पांच राज्य विश्वविद्यालयों में स्थान बनाया है। नवीनतम संस्करण में विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर 4031वां, भारत में 240वां तथा एशिया में 1487वां स्थान प्राप्त हुआ है।
प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की बढ़ती शोध क्षमता, अकादमिक गुणवत्ता तथा डिजिटल उपस्थिति को दर्शाती है।
पिछले कुछ संस्करणों में विश्वविद्यालय की रैंकिंग में लगातार सुधार दर्ज किया गया है। जनवरी 2025 के संस्करण में विश्वविद्यालय का वैश्विक स्थान 5339 था, जो जुलाई 2025 में सुधरकर 4637 हो गया और जनवरी 2026 के संस्करण में बढ़कर 4031 हो गया। इस प्रकार एक वर्ष के भीतर विश्वविद्यालय ने वैश्विक स्तर पर लगभग 1500 स्थानों का उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है।
एशिया रैंकिंग में भी विश्वविद्यालय की स्थिति लगातार बेहतर हुई है। जनवरी 2025 में 1888, जुलाई 2025 में 1680 और जनवरी 2026 में 1487 स्थान प्राप्त हुआ। इसी प्रकार भारत में विश्वविद्यालय की रैंकिंग भी सुधरी है। जनवरी 2025 में 368, जुलाई 2025 में 292 और जनवरी 2026 में 240 स्थान रहा।
वेबोमेट्रिक्स रैंकिंग का प्रकाशन स्पेन की साइबरमेट्रिक्स लैब (स्पेनिश नेशनल रिसर्च काउंसिल, CSIC) द्वारा किया जाता है। यह रैंकिंग वर्ष में दो बार जारी होती है और विश्वभर के विश्वविद्यालयों की वेब उपस्थिति, शोध प्रभाव तथा डिजिटल अकादमिक गतिविधियों का मूल्यांकन करती है।
इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि वेबोमेट्रिक्स रैंकिंग में मिली यह सफलता विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अकादमिक सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय शोध, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत बनाएगा।

गुरू आज्ञा ईश वरदान

माँ की गोद, पिता की छत्रछाया में,
जग के सारे तीरथ धाम बसते हैं,
माता-पिता की निशिदिन सेवा से,
तीनों लोकों के सारे पुण्य मिलते हैं।

गुरू आज्ञा ईश वरदान होती है,
सेवा बड़ों की भविष्य सँवारती है,
परहित – संकल्प संतुष्टि देता है,
प्रेम मार्ग ईश्वरीय अनुभूति देता है।

महँगी घड़ी पहन करके देख ली,
वक़्त तो मेरे हिसाब से नही चला,
हम दिल दिमाग़ साफ़ रखते आये,
क़ीमत मुखौटों की है, पता चला।

ईश्वर नहीं है तो ज़िक्र क्यों करते,
ईश्वर है तो फिर फ़िक्र क्यों करते,
ये बात हमें अपनों से दूर करती है,
एक तो अहम् और दूसरा वहम् है।

धन से सुख ख़रीदा नहीं जा सकता,
दुख का कोई ख़रीददार नहीं होता,
आदित्य सुख-दुःख तो एहसास हैं,
अधिक चाहत की ये वजह होते हैं।

  • डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

एनएसएस शिविर के माध्यम से विद्यार्थियों में सेवा और नेतृत्व भावना विकसित करने का आह्वान

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दिग्विजय नाथ पी.जी. कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की चारों इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सप्तदिवसीय विशेष शिविर का शुभारंभ 15 मार्च को उत्साह और अनुशासन के साथ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महाविद्यालय, सहजनवा के प्राचार्य प्रो. विनोद कुमार पाल उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती, महाराणा प्रताप, महंत दिग्विजय नाथ जी महाराज तथा महंत अवैद्यनाथ जी महाराज के चित्रों पर माल्यार्पण और पुष्पार्चन के साथ हुई। इसके बाद छात्राओं अंकिता तिवारी, कनकलता शर्मा और रविता ने सरस्वती वंदना व स्वागत गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को प्रेरणादायक वातावरण प्रदान किया।
मुख्य अतिथि प्रो. विनोद कुमार पाल ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं में सेवा, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे शिविर को केवल औपचारिक कार्यक्रम न मानकर समाज के लिए सकारात्मक कार्य करने का अवसर समझें। उन्होंने कहा कि स्वच्छता, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता जैसे क्षेत्रों में एनएसएस की भूमिका महत्वपूर्ण है।
अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है। सेवा कार्यों के माध्यम से विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। उन्होंने स्वयंसेवकों से समाज के कमजोर वर्गों की सहायता, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता जैसे कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
कार्यक्रम का संयोजन और संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. जितेन्द्र कुमार पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम की प्रस्तावना डॉ. निधि राय ने प्रस्तुत की तथा शिविर की गतिविधियों की जानकारी दी। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पीयूष सिंह ने किया।
इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्रदीप यादव सहित स्वयंसेवक अनुराग मिश्रा, विवेक, क्षमा पाण्डेय, चांदनी मिश्रा, निशा चौहान, प्रिय पासवान और अर्पिता गुप्ता सहित अनेक छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

दरोगा भर्ती परीक्षा के सवाल पर महराजगंज में ब्राह्मण समाज ने जताई आपत्ति

प्रश्नपत्र में ‘पंडित’ शब्द को विकल्प बनाए जाने पर नाराजगी, जांच कर कार्रवाई की मांग

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश पुलिस की दरोगा भर्ती परीक्षा में पूछे गए एक सवाल को लेकर प्रदेश के साथ-साथ जनपद महराजगंज में भी चर्चा का विषय बन गया है।सामान्य हिंदी के प्रश्नपत्र में शामिल एक प्रश्न में ‘अवसर के अनुसार बदलने वाला’ वाक्यांश के लिए एक शब्द चुनने को कहा गया था, जिसमें ‘पंडित’ शब्द को विकल्प के रूप में शामिल किए जाने पर ब्राह्मण समाज के लोग मर्माहत है।
जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र की तस्वीर वायरल होने के बाद इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रश्नपत्र में यह सवाल क्रम संख्या 31 पर बताया जा रहा है, जिसमें चार विकल्प—सदाचारी, पंडित, अवसरवादी और निष्कपट दिए गए थे। लोगों का कहना है कि इस तरह के प्रश्न में ‘पंडित’ शब्द को शामिल करना ब्राह्मण समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।
जनपद महराजगंज में भी इसको लेकर ब्राह्मण समाज के लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने नाराजगी व्यक्त की है। समाज के लोगों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न बनाते समय शब्दों के चयन में विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए, ताकि किसी भी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस न पहुंचे।
लोगों ने शासन-प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर प्रश्न तैयार करने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस व्यवस्था किए जाने की भी मांग की गई है।
उधर, इस मामले में प्रदेश स्तर पर भी राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है। भाजपा प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्र ने मुख्यमंत्री से शिकायत करते हुए जांच की मांग की है। वहीं प्रदेश के डिप्टी सीएम ने कहा है कि किसी भी समाज या वर्ग का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और मामले की गंभीरता से जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर कैसे वायरल हुआ।फिलहाल इस मुद्दे को लेकर प्रदेश के साथ-साथ जनपद में भी चर्चा तेज है और लोग मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

सिसवा मुंशी चौराहे पर दिनदहाड़े युवक पर लाठी-डंडों से हमला

दो बाइकों से आए 4–5 नकाबपोश युवकों ने घेरकर की बेरहमी से पिटाई, गंभीर रूप से घायल युवक अस्पताल में भर्ती

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भिटौली थाना क्षेत्र के सिसवा मुंशी चौराहे पर रविवार को दिनदहाड़े एक युवक पर लाठी-डंडों से हमला कर दिए जाने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। दो बाइकों से आए चार-पांच युवकों ने युवक को घेरकर उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। हमले में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। दिन-दहाड़े हुई इस वारदात से इलाके में दहशत का माहौल बन गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार लक्ष्मीपुर खास निवासी अंजार 25 वर्ष किसी निजी कार्य से सिसवा मुंशी चौराहे पर आए हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह चौराहे पर खड़े होकर किसी से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान दो बाइकों पर सवार होकर चार-पांच युवक वहां पहुंचे और अचानक अंजार को घेर लिया। इससे पहले कि आस-पास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, हमलावरों ने लाठी-डंडों से हमला बोल दिया।
बताया जा रहा है कि सभी हमलावरों ने अपने चेहरे पर कपड़ा या पट्टी बांध रखी थी, जिससे उनकी पहचान नहीं हो सकी। हमलावरों ने अंजार पर लगातार कई वार किए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर लहूलुहान हालत में सड़क पर गिर पड़े। अचानक हुए इस हमले से चौराहे पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और लोग इधर-उधर भागने लगे।
स्थानीय लोगों के अनुसार हमलावरों ने कुछ ही मिनटों में युवक को बुरी तरह पीटकर घायल कर दिया और फिर दोनों बाइकों पर सवार होकर तेजी से मौके से फरार हो गए। घटना के बाद चौराहे पर लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलते ही आस-पास के लोग मौके पर पहुंचे और घायल अंजार को तत्काल उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल भिजवाया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
दिन-दहाड़े चौराहे पर हुई इस घटना से क्षेत्र के लोगों में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि सरेआम इस तरह की वारदात से इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इस संबंध में चौकी प्रभारी सिसवा मुंशी छोटेलाल ने बताया कि घटना की सूचना प्राप्त हुई है। पीड़ित पक्ष से तहरीर मिलने के बाद मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस हमलावरों की पहचान करने के लिए आस-पास के लोगों से पूछ-ताछ कर रही है और घटना की जांच में जुट गई है। जल्द ही आरोपियों को चिन्हित कर कार्रवाई की जायेगी।

दुष्टों के संहार के साथ प्रभु श्रीराम ने किया था मर्यादा स्थापित

अजयपुरा में श्रीरुद्र शतचंडी महायज्ञ

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
क्षेत्र के अजयपुरा गांव में श्रीरुद्र शतचंडी महायज्ञ का आयोजन किया गया है। इसमें कथावाचक अंगद दास ने भक्तों को प्रभु श्रीराम कथा का रसपान कराया।
अजयपुरा ​स्थित मंदिर परिसर में श्री रुद्र शतचंडी महायज्ञ का आयोजन किया गया है। इसमें अयोध्या से पधारे कथावाचक अंगद दास ने भक्तों को कथा का रसपान कराते हुए कहा​ कि प्रभु श्रीराम ने पृथ्वी दुष्टों का संहार करते हुए मर्यादा स्थापित किया था। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम द्वारा किए गए कार्यों का अनुसरण, जबकि श्रीकृष्ण के उपदेश को अपनाने मात्र से मनुष्य मोक्ष को प्राप्त कर लेता है। प्रभु श्रीराम ने समाज में कोल-भील को गले लगाते हुए ऊंच-नीच की खाई पाटने का कार्य किया था। इससे पूर्व यज्ञाचार्य उपेन्द्र नाथ ने गजानंद जायसवाल और उनकी पत्नी के साथ व्यास गद्दी का पूजन -अर्चन कराया । मौके पर भानुप्रताप चौरसिया, गजानंद जायसवाल, अखिलेश चौरसिया, विनोद कुमार चौरसिया, मिथिलेश चौरसिया, दुर्गेश, रामइकबाल, संतोष, रामभरोसा राजभर, सूर्यप्रकाश चोबे, अंशू, सोनू, रवींद्र नाथ आदि उपस्थित रहे।

कांशीराम की जयंती पर उनके विचारों को किया गया याद, सामाजिक न्याय के संघर्ष को बताया प्रेरणा

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)।
बरठा चौराहे स्थित राष्ट्रीय समानता दल के कैंप कार्यालय पर रविवार को सामाजिक परिवर्तन के महानायक मान्यवर कांशीराम साहब की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर वक्ताओं ने उनके विचारों और सामाजिक न्याय के लिए किए गए संघर्ष को याद किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय समानता दल के प्रदेश अध्यक्ष संजयदीप कुशवाहा ने कहा कि मान्यवर कांशीराम सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के महानायक थे। उन्होंने सामाजिक असमानता के खिलाफ संघर्ष करते हुए सरकारी नौकरी तक त्याग दी और “पे बैक टू सोसाइटी” का नारा देकर बहुजन समाज को जागृत करने का ऐतिहासिक कार्य किया। उन्होंने कहा कि कांशीराम साहब सच्चे अर्थों में समाज को जोड़ने वाले नेता थे और उनका “जाति जोड़ो अभियान” आज भी प्रासंगिक है।
सपा अनुसूचित प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष हरेराम आर्य ने कहा कि संघर्ष के दौर में कांशीराम साहब का यह विचार कि “हमें चमचे नहीं, मिशनरी चाहिए” आज भी सामाजिक आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं को प्रेरित करता है।
इस अवसर पर वक्ता अनिल शर्मा ने कहा कि कांशीराम साहब का मानना था कि “सत्ता ही वह मास्टर चाबी है, जो सभी ताले खोल सकती है।” वहीं विमलेश कुमार ने कहा कि उन्होंने समाज को “वोट हमारा, राज तुम्हारा नहीं चलेगा” का संदेश देकर बहुजन समाज को राजनीतिक रूप से जागरूक किया।
कार्यक्रम में अभय कुमार ने कहा कि “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” का सिद्धांत आज भी सामाजिक न्याय की राजनीति में प्रासंगिक बना हुआ है।
कार्यक्रम का संचालन राजाराम कुशवाहा ने किया। इस अवसर पर चन्द्रिका पासवान, लालजी प्रसाद, मुस्तफा, अल्लाउद्दीन, शेषमणि, मोहन कुशवाहा, टीटू कुमार, धनंजय कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

आठ माह से मानदेय न मिलने पर ग्राम रोजगार सेवकों का फूटा आक्रोश

उ.प्र. ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष ब्रह्मानंद के नेतृत्व में मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन, बकाया भुगतान व 35 हजार मासिक मानदेय की मांग

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के ग्राम रोजगार सेवकों ने लंबे समय से मानदेय न मिलने को लेकर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भेजकर समस्या के समाधान की मांग की है। उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष ब्रह्मानंद के नेतृत्व में यह ज्ञापन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा सदर विधायक जयमंगल कन्नौजिया को भेजा गया है।
ज्ञापन में बताया गया है कि अगस्त 2025 से अब तक करीब आठ माह का मानदेय जनपद महराजगंज के ग्राम रोजगार सेवकों को नहीं मिला है। जबकि ग्राम रोजगार सेवक मनरेगा सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लगातार अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर मजदूरों का पंजीकरण, कार्यों का संचालन, मस्टर रोल का रख-रखाव तथा अन्य विकास कार्यों की निगरानी का दायित्व उन्हीं पर होता है।
रोजगार सेवकों का कहना है कि इतने लंबे समय से मानदेय न मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है। परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है और कई रोजगार सेवक कर्ज लेकर अपने परिवार की जरूरतें पूरी करने को मजबूर हैं। बढ़ती महंगाई के दौर में बिना मानदेय के कार्य करना उनके लिए गंभीर समस्या बन चुका है।
ज्ञापन में सरकार से मांग की गई है कि ग्राम रोजगार सेवकों का अब तक का लगभग आठ माह का बकाया मानदेय तत्काल जारी किया जाए। साथ ही वर्तमान परिस्थितियों और महंगाई को देखते हुए ग्राम रोजगार सेवकों का मानदेय बढ़ाकर कम से कम 35 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए तथा भुगतान समय से सुनिश्चित करने के लिए अलग से वित्तीय बजट की व्यवस्था की जाए।
इसके अलावा ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि 4 अक्टूबर 2021 को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा ग्राम रोजगार सेवकों के हित में नई योजना लागू करने की घोषणा की गई थी, जिसे अब तक लागू नहीं किया गया है। ग्राम रोजगार सेवकों ने सरकार से उस घोषणा को लागू करने की भी मांग की है।
साथ ही मांग की गई है कि ग्राम रोजगार सेवकों को सेवा सुरक्षा प्रदान करते हुए वरिष्ठता के आधार पर राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए, जिससे उनके भविष्य को सुरक्षित बनाया जा सके।
इस दौरान ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष ब्रह्मानंद, जिला महासचिव इंद्रमणि विश्वकर्मा, बंधु मद्धेशिया, राहुल गुप्ता, संगीता पांडेय, सीमा पांडेय, दयानंद पटेल, जितेंद्र प्रसाद, मनोज,प्रेमलाल, दीनानाथ प्रसाद, रामकिशोर रैना, ओम प्रकाश सिंह, राजेश वर्मा, सर्वेश मद्धेशिया, बाबूराम, उमेश कुमार, संतोष प्रसाद, अंबिका, राजेश, जोगेंद्र साहनी, प्रमोद राय, सुरेश, धर्मेंद्र, मनोज कुमार, अनीता गुप्ता, दिनेश, अनिरुद्ध, धर्मेंद्र, राजेश, रमेश कुमार, अयोध्या वर्मा, रवि प्रताप सिंह श्रवण कुमारसंगठन के कई पदाधिकारी व सदस्य भी मौजूद रहे तथा ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर अपनी सहमति जताई। रोजगार सेवकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे।

पुराने नाले को तोड़कर बन रहा नाले मे सरकारी धन का हो रहा दुरुपयोग – सुधाकर गुप्त

मजबूत नाले को तोड़कर नाला बनाने के विरोध में व्यापारियों ने किया प्रदर्शन

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
नगर पंचायत के मुख्य मार्ग पर बापू इंटर कॉलेज के मैदान के सामने हाल ही बने मजबूत नाले को तोड़कर नया नाला बनाने के विरोध में नगर के व्यापारी उद्योग व्यापार मंडल के तहसील अध्यक्ष ,पूर्व चेयरमैन सुधाकर गुप्त के नेतृत्व में व्यापारियों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान सुधाकर गुप्त ने कहा कि अभी कुछ समय पहले बने मुख्य नाले को जो पूरी तरह मजबूत स्थिति में है उसे नगर पंचायत द्वारा पुनः तोड़कर बनाया जा रहा है जो पूरी तरह से आमजन के पैसों का दुरुपयोग हो रहा है। वहीं बिना लोक निर्माण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए ही यह निर्माण कराया जा रहा है। जबकि नगर में कई जगह पर नाले के निर्माण की आवश्यकता है उसे नही बनाया जा रहा है। अगर नाले का निर्माण कार्य नही रुका तो उपजिलाधिकारी से मिलकर इससे अवगत कराया जायेगा तथा सरकारी धन का दुरुपयोग नही करने दिया जायेगा। दुकानदारों का कहना है कि जबरिया नाली उनके दुकान के और नजदीक बनाया जा रहा है जबकि पहले वाली नाली मुख्य मार्ग से करीब सत्तर फुट पहले बना है। नाला दुकान से नजदीक बनने से उनकी रोजी रोटी प्रभावित होगी। प्रदर्शन करने वाले दुकानदारों में विनोद मिश्र, श्यामबदन शर्मा, मंटू यादव, कमरुद्दीन मिस्त्री, रामेश्वर, योगेंद्र कुमार, जितेन्द्र यादव, जयराम शाह,राजू तिवारी, रामप्रवेश शर्मा, विजय आदि प्रमुख रूप से शामिल हुए।

सनातन और स्त्री के शाश्वत संबंधों पर मंथन, राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “सनातन एवं स्त्री : शाश्वत सिद्धांत और स्त्री शक्ति के अंतर संबंधों का अन्वेषण” के समापन सत्र में वक्ताओं ने सनातन संस्कृति और स्त्री शक्ति के पारस्परिक संबंधों पर व्यापक चर्चा की।
जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीत गुप्ता ने कहा कि सनातन और स्त्री पर विचार करते समय मध्यकालीन परिस्थितियों का विश्लेषण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्राचीन व्यवस्था ही सनातन नहीं है, बल्कि सनातन वह है जो निरंतर प्रवाहमान और जीवंत रहता है। यूरोप को विकास का मॉडल मानने से सनातन मूल्यों की समझ कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय धार्मिक मान्यताओं में स्त्री को कई बार वस्तु के रूप में चित्रित किया गया, जबकि भारतीय परंपरा में स्त्री सृजनशीलता और विकास का स्रोत है। स्त्री समाज और परिवार की धुरी है। यदि परिवार उजड़ेगा तो समाज भी बिखर जाएगा। सनातन संस्कृति में स्त्री केवल पूजनीय नहीं बल्कि सहगामिनी भी है।
दिग्विजय नाथ पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि महाभारत की द्रौपदी का प्रश्न आज भी प्रासंगिक है कि स्त्री व्यक्ति है या वस्तु। यदि वह व्यक्ति है तो उसे दांव पर क्यों लगाया गया और यदि वस्तु है तो एक बार हार जाने के बाद पुनः उस पर अधिकार कैसे स्थापित किया गया। उन्होंने कहा कि समाज का प्रत्येक दौर आत्मावलोकन की मांग करता है और “प्रधान-पति” जैसा संबोधन वर्तमान समय में स्त्री की स्थिति का सूचक है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अभिनव मिश्रा ने कहा कि स्त्री सशक्तिकरण की चर्चा को ग्राम चौपाल तक ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने ऋग्वेद का उल्लेख करते हुए कहा कि अस्तित्व ही सृष्टि का मूल है और सनातन संस्कृति के स्त्री मूल्यों को पुनः रेखांकित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पत्नी वह पवित्र भूमि है जिससे पति का जन्म होता है।
विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी जय मंगल राव ने कहा कि सनातन और स्त्री का संबंध अविछिन्न है और सनातन की प्राण शक्ति ही मातृशक्ति है। अपाला, घोषा, गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषियों के उदाहरण स्त्री शक्ति की परंपरा को दर्शाते हैं।
समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कला संकाय की अधिष्ठाता एवं दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय ने कहा कि सनातन में स्त्री के प्राचीन संदर्भ अत्यंत गौरवपूर्ण रहे हैं, हालांकि मध्यकालीन परिस्थितियां निराशाजनक रहीं। वर्तमान समय सशक्त स्त्री को पुनःसृजित करने का कालखंड है।
संगोष्ठी के पूर्व सत्रों को प्रो. द्वारकानाथ, इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डॉ. शिखा श्रीवास्तव, दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. अभिषेक कुमार, प्रो. प्रज्ञा चतुर्वेदी, प्रो. संतोष प्रकाश गुप्ता और डॉ. आमोद राय ने संबोधित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में संगोष्ठी के संयोजक डॉ. दीपक कुमार गुप्ता ने स्वागत उद्बोधन दिया, जबकि दर्शनशास्त्र विभाग के समन्वयक डॉ. संजय राम ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रमेश चंद और डॉ. संजय तिवारी के साथ स्नातक के विद्यार्थियों ने किया।
संगोष्ठी में प्रो. गौर हरी बेहरा, प्रो. सुनीता मुर्मू, डॉ. देवेंद्र पाल, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, डॉ. रंजन लता सहित अनेक आचार्य, पत्रकार, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

विशाल भारत का भूगोल: दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के तत्वावधान में “भारतीय ज्ञान परंपरा के दृष्टिकोण से विशाल भारत का भूगोल: एक स्थानिक-कालिक परिप्रेक्ष्य” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ। यह शैक्षणिक आयोजन भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), शिक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह विश्वविद्यालय परिसर स्थित महायोगी गुरु श्री गोरक्षनाथ शोध पीठ में आयोजित किया गया।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में प्रो. जगदीश सिंह (पूर्व विभागाध्यक्ष, भूगोल विभाग), प्रो. संजीत कुमार गुप्ता (कुलपति, जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया) तथा प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह (निदेशक, जी.बी. पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान) उपस्थित रहे। संगोष्ठी के निदेशक प्रो. एस.के. सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि संयोजक डॉ. अंकित सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. एस.के. सिंह ने स्वागत संबोधन में कहा कि यह संगोष्ठी केवल अकादमिक विमर्श नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा के उस वैभव को पुनर्स्थापित करने का प्रयास है जिसने भूगोल को स्थानिक और कालिक दोनों दृष्टियों से समझने का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि ‘विशाल भारत’ की अवधारणा केवल मानचित्र की सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि यह सांस्कृतिक चेतना और भौगोलिक एकात्मता का प्रतीक है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय शोधार्थियों और शिक्षकों को शोध के लिए लगातार मंच उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों के दौर में भूगोल के अध्ययन की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय से ही भूगोल की व्यापक समझ विकसित की जा सकती है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. जगदीश सिंह ने ‘विशाल भारत’ की अवधारणा पर विचार रखते हुए कहा कि राष्ट्र की पहचान केवल भौगोलिक सीमा से नहीं, बल्कि संस्कृति, इतिहास और संप्रभुता से होती है। उन्होंने शोधार्थियों को प्रेरित किया कि वे इस विमर्श के माध्यम से ‘विकसित भारत’ और राष्ट्र की अवधारणा पर गंभीर अध्ययन करें।
प्रो. संजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि विशाल भारत को केवल भू-भाग के रूप में नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आधार पर समझना चाहिए। उन्होंने ब्रह्मांडीय भूगोल और संसाधनों के वैश्वीकरण को इस अवधारणा से जोड़ा और कहा कि भारतीय दृष्टि में भूगोल का संबंध संस्कृति और जीवन मूल्यों से भी है।
प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि केवल शहरीकरण पर ध्यान केंद्रित करना और ग्रामीण विकास की उपेक्षा करना संतुलित विकास के लिए घातक है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया तथा कहा कि व्यापक दृष्टि के बिना ‘विशाल भारत’ की कल्पना संभव नहीं है।
मुख्य अतिथि डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि ‘विशाल भारत’ का अर्थ केवल भौगोलिक विस्तार नहीं, बल्कि नैतिक और प्राकृतिक दृष्टि से भी उसकी विशालता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य प्रकृति के संसाधनों का अत्यधिक दोहन कर रहा है। जीवन के लिए मिट्टी, जल और वायु की रक्षा अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि प्रकृति को बचाने की नहीं, बल्कि स्वयं को बचाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. श्रीप्रकाश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभी अतिथियों, विद्वानों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
संगोष्ठी के द्वितीय सत्र (प्लेनरी सेशन) में भारतीय ज्ञान परंपरा और भारत की वैश्विक भूमिका पर विचार-विमर्श हुआ। सत्र का संचालन डॉ. दीपेंद्र मोहन सिंह ने किया। सह-अध्यक्ष डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि भूगोल केवल स्थान का अध्ययन नहीं, बल्कि संस्कृति, सभ्यता और ज्ञान परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
मुख्य वक्ता पद्म श्री डॉ. रामचेत चौधरी ने “बास्केट केस इंडिया से दुनिया के लिए फूड बास्केट” विषय पर कहा कि मानव और पौधों के बीच खाद्य संबंध हजारों वर्षों पुराने हैं और आज भारत वैश्विक खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
प्रो. जे.एन. सिन्हा ने प्राचीन काल में मध्य गंगा बेसिन की भौगोलिक परिस्थितियों और उसके ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. रुचिका सिंह ने भारतीय ज्ञान परंपरा के तीन प्रमुख स्तंभ— व्यवस्थित ज्ञान, मौखिक परंपरा और कौशल आधारित परंपरा की व्याख्या करते हुए कहा कि जीवंत परंपराएं ही वास्तविक ज्ञान का आधार हैं।
सत्र की अध्यक्षता डॉ. बी.एन. सिंह ने की तथा सह-अध्यक्ष प्रो. सी.पी. सिंह ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।