Tuesday, July 7, 2026
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अमेरिकी सीनेट ने भारत में अमेरिका के अगले राजदूत के रूप में सर्जियो गोर को नामित किया

वाशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)अमेरिकी सीनेट ने मंगलवार को सर्जियो गोर (उम्र 38 वर्ष) के नाम को भारत में अमेरिका के अगले राजदूत और दक्षिण-मध्य एशियाई मामलों के विशेष दूत के रूप में 51:47 के मत से पुष्टि कर दी। इस दौरान, अमेरिका सरकार पर जारी ‘शटडाउन’ के बीच 107 अन्य नामों की भी पुष्टि हुई।

उनमें शामिल हैं — कैलिफोर्निया के पॉल कपूर को दक्षिण एशियाई मामलों के लिए सहायक विदेश मंत्री और फ्लोरिडा की अंजनि सिन्हा को सिंगापुर में राजदूत के रूप में नामित किया गया।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने अगस्त में गोर को यह दायित्व सौंपा था और उन्हें “एक महान मित्र” करार दिया था। ट्रम्प ने कहा था कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्र के लिए, उन्हें एक भरोसेमंद और प्रेरक व्यक्ति की आवश्यकता है। गोर को लंबे समय से ट्रम्प का सहयोगी माना जाता है।

विदेश संबंध समिति की सुनवाई में गोर ने भारत को “रणनीतिक साझेदार” बताया और कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार सुधरेगा, जिससे न केवल अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी बल्कि चीन के आर्थिक प्रभाव को कुछ हद तक सीमित किया जा सकेगा। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा और सहयोग पर भी जोर दिया।

भारत में वर्तमान अमेरिकी राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने गोर की पुष्टि का स्वागत किया और इसे भारत–अमेरिका संबंधों में उच्च प्राथमिकता का संकेत बताया।

इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका भारत को अपनी विदेश नीति में महत्वपूर्ण स्थान देता है, विशेष रूप से आज के बदलते वैश्विक परिदृश्य में।

ट्रक-टैंकर की टक्कर से उठीं आग की लपटें, धमाकों से दहला इलाका

🚨 भीषण हादसा: जयपुर-अजमेर हाइवे पर रातभर गूंजते रहे धमाके

जयपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मंगलवार देर रात जयपुर-अजमेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर दूदू के समीप एक भयावह हादसे ने रात की निस्तब्धता को चीखों और धमाकों में बदल दिया। एलपीजी सिलेंडरों से लदे एक ट्रक को पीछे से आ रहे टैंकर ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कुछ ही पलों में ट्रक में आग लग गई और सिलेंडर एक के बाद एक फटने लगे। देखते ही देखते पूरा इलाका आग के गोलों से घिर गया।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सिलेंडर धमाकों की आवाज़ और शॉकवेव कई किलोमीटर दूर तक महसूस की गई। कई फटे सिलेंडर हवा में उछलकर सड़क से दूर जाकर गिरे। राजमार्ग पर लपटें इतनी ऊंची उठीं कि रात का आसमान लाल हो गया।
🚒 दमकलकर्मियों ने मारी बाज़ी, उपमुख्यमंत्री ने संभाली कमान
जानकारी मिलते ही पुलिस व दमकल की कई गाड़ियाँ मौके पर पहुँचीं। शुरुआती दौर में आग की तीव्रता के कारण ट्रक तक पहुँचना मुश्किल था, पर अथक प्रयासों से आखिरकार लपटों पर काबू पा लिया गया।
राज्य के उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा और विधायक कैलाश वर्मा तुरंत घटनास्थल पहुँचे। उन्होंने बताया कि सौभाग्य से कोई जनहानि नहीं हुई, जबकि टैंकर चालक सहित दो से तीन लोग घायल हुए हैं।

जयपुर के पुलिस महानिरीक्षक राहुल प्रकाश ने बताया कि एहतियातन एसएमएस अस्पताल को हाई अलर्ट पर रखा गया है। मौके पर प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी देर रात तक स्थिति पर नज़र बनाए रहे।
🧾 हादसे का क्रम
हादसा हुआ मोजमाबाद थाना क्षेत्र, जयपुर ग्रामीण में
एलपीजी सिलेंडर ट्रक सड़क किनारे ढाबे के बाहर खड़ा था
टैंकर ने पीछे से टक्कर मारी, तुरंत लगी आग
सिलेंडर विस्फोट से फैली अफरा-तफरी दमकल ने कई घंटों बाद आग पर पाया काबू
👁️ प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी
ढाबा संचालक विनोद ने बताया, “ट्रक का चालक खाना खाने के लिए रुका था तभी पीछे से टैंकर ने जोरदार टक्कर मारी। टक्कर के बाद धमाकों से पूरा ढाबा और राजमार्ग थर्रा गया।”
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रवि शेखावत ने कहा कि फिलहाल किसी गंभीर घायल को एसएमएस अस्पताल नहीं लाया गया, लेकिन सभी इंतज़ाम तैयार हैं।
⚠️ याद दिला गया पिछला हादसा
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष दिसंबर में भांकरोटा के पास भी इसी हाइवे पर रसोई गैस टैंकर और ट्रक की टक्कर में 19 लोगों की जान चली गई थी।

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“लापरवाही की जंजीरों में जकड़ा बागापार अस्पताल

डॉक्टर, एंबुलेंस, सुरक्षा विहीन जर्जर इमारत में डर के साए में सेवा देतीं महिला कर्मी”

महराजगंज से डॉ. सतीश पांडेय व नीरज की रिपोर्ट

महराजगंज (राष्ट्र की परम्पर) सदर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम सभा बागापार के टोला बरईठवां स्थित नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) इन दिनों अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। कभी सैकड़ों ग्रामीणों की जीवनरेखा रहा यह अस्पताल अब खंडहर में बदल चुका है।
न बाउंड्री वॉल है, न स्ट्रीट लाइट, न सुरक्षा कर्मी।सबसे बड़ी चिंता — यहां कार्यरत महिला स्वास्थ्यकर्मी हर रात भय के साए में ड्यूटी करने को मजबूर हैं।

विवेक प्रताप सिंह , उमेश चन्द्र मिश्र, राजकुमार, सोहन

🏚️ जर्जर भवन और डर की ड्यूटी
अस्पताल का भवन इतना जर्जर हो चुका है कि दीवारें दरक रही हैं।
रात्रि ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स नीलम चौहान, शीला पाल, ज्योति चौरसिया व एनएम रीना भारती भय के माहौल में अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
बाउंड्री वॉल न होने के कारण रात में उपद्रवियों का आना-जाना आम बात हो गई है।
अंधेरे में स्टाफ को अस्पताल तक पहुंचना तक मुश्किल होता है।
🚑 एंबुलेंस ठप, डॉक्टर गायब – इमरजेंसी सेवाएं ठप
अस्पताल में एंबुलेंस सुविधा महीनों से बंद पड़ी है।
रात्रि के समय कोई भी डॉक्टर अस्पताल में विश्राम नहीं करते, जिससे आपात स्थिति में मरीजों को 12 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय महराजगंज जाना पड़ता है।
कई बार रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देते हैं।
💧 दूषित पानी और खुली शौचालय टंकी बढ़ा रही बीमारी का खतरा
अस्पताल परिसर में लगा इंडिया मार्का हैंडपंप पीला और खारा पानी उगल रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, इससे पेट संबंधी बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है।वहीं, शौचालय की टंकी का ढक्कन एक वर्ष से खुला पड़ा है, जो मच्छरों और संक्रमण को न्योता दे रहा है।
👩‍⚕️ महिला कर्मियों की सुरक्षा पर सवाल
रात्रि ड्यूटी के दौरान न कोई चौकीदार तैनात है और न ही सुरक्षा गार्ड।
सरकार जहां “नारी शक्ति अभियान” के तहत महिलाओं की सुरक्षा पर जोर दे रही है, वहीं यहां की महिला स्वास्थ्यकर्मी असुरक्षित माहौल में काम करने को मजबूर हैं।
🗣️ स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाजसेवी बोले — “अब जागे प्रशासन” ग्राम प्रधान विवेक प्रताप सिंह ‘निक्कू सिंह’ का कहना है कि –“अस्पताल की व्यवस्था सुधारने के लिए विभागीय बजट की तत्काल आवश्यकता है।”
समाजसेवी उमेश चन्द्र मिश्र ने कहा –“जिला प्रशासन को लिखित शिकायत दी जाएगी। बाउंड्री वॉल, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा व्यवस्था महिलाओं की सुरक्षा के लिए जरूरी है।”
स्थानीय व्यापारी राजकुमार मोदनवाल ने कहा –“अस्पताल की इमारत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। इसका कायाकल्प किया जाना अत्यंत आवश्यक है।”
🩺 अस्पताल प्रभारी की सफाई डॉ. रामआश्रय सिंह, प्रभारी, नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बागापार ने कहा –“स्थिति से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। निर्देशानुसार कार्यवाही की जाएगी।”

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“ऐ साहिब! दिल की गहराइयों से” पुस्तक प्रकाशित -सुशी सक्सेना

भावनाओं का एक संग्रह

ग्वालियर/मध्यप्रदेश राष्ट्र की परम्परा)
सुप्रसिद्ध कवियत्री सुशी सक्सेना इंदौर मध्यप्रदेश द्वारा लिखित एक नई पुस्तक “ऐ साहिब! दिल की गहराइयों से” प्रकाशित हुई है, जिसमें शायरी, प्यार, जिंदगी और प्रेरणा से भरी कविताएं शामिल हैं। यह पुस्तक कवियत्री के दिल की गहराइयों से निकली भावनाओं का एक संग्रह है, जो पाठकों को प्रेरित और प्रभावित करने की क्षमता रखती है। इस पुस्तक में शामिल कविताएं दिल को छू लेने वाली और भावपूर्ण हैं। कवियत्री ने अपने अनुभवों और भावनाओं को शब्दों में पिरोया है, जो पाठकों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करते हैं।
सुशी सक्सेना साहित्य की हर विधा में उतनी ही सहजता से लिखती हैं कि, आप बस उनके शब्दों के पीछे भावनाओं का जो प्रवाह है उसमें बहते चले जाते हैं। यही शक्ति है एक उच्चस्तरीय बहुमुखी व्यक्तित्व की कि अपनी रचनाओं के माध्यम से आपको अपने प्रश्नों के उत्तर भी मिल जाते हैं और कभी एक नया दृष्टिकोण भी मिल जाता है।

सुशी सक्सेना जी की यह रचनाएं आपको उम्मीदों का दमन थामना सिखाती हैं। तो कभी हौसलों की उड़ान पर ले जाती है कि, अपनी समस्याओं से बाहर निकलो तो सारा आसमान तुम्हारा ही है। जीवन में आनेवाली परिस्थितियां हर किसी को विचलित करती हैं पर फीनिक्स की तरह उनसे ऊपर उठकर स्वयं को एक नया रूप, एक नया रंग देना, यह हमें खुद ही करना होता है, यह सुंदर संदेश देती हैं सुशी सक्सेना जी की रचनाएं।

सुशी सक्सेना एक प्रतिभाशाली कवियत्री हैं, जिन्होंने अपनी कविताओं से पाठकों के दिलों में जगह बनाई है। उनकी कविताएं भावपूर्ण और प्रेरणादायक हैं। “ऐ साहिब! दिल की गहराइयों से” पुस्तक का प्रकाशन एक महत्वपूर्ण घटना है, जो कविता प्रेमियों और प्रेरणा की तलाश करने वालों के लिए एक उपहार है। कविताएं सरल और समझने योग्य भाषा में लिखी गई हैं। सुशी सक्सेना की यह पुस्तक निश्चित रूप से पाठकों के दिलों को छू जाएगी और उन्हें प्रेरित करेगी।

📰 नाबालिग छात्रा लापता, परिजनों ने पुलिस से लगाई गुहार

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। थाना क्षेत्र के नयानगर गांव में उस समय हड़कंप मच गया जब गांव की एक नाबालिग छात्रा सोमवार को स्कूल के लिए निकली लेकिन देर शाम तक घर नहीं लौटी। परिवार ने पहले आसपास और रिश्तेदारों के यहां काफी खोजबीन की, लेकिन छात्रा का कोई सुराग नहीं मिला।

परिजनों के अनुसार, रोज की तरह लड़की सुबह घर से पढ़ने के लिए निकली थी। जब वह समय पर वापस नहीं आई तो घरवालों को चिंता हुई। देर रात तक तलाश के बाद भी जब कोई जानकारी नहीं मिली तो परिजन थक-हार कर बरहज थाने पहुंचे और पुलिस को लिखित तहरीर देकर छात्रा की खोज में मदद की गुहार लगाई।

थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस टीम छात्रा की तलाश में संभावित स्थानों पर छानबीन कर रही है और मोबाइल लोकेशन सहित अन्य तकनीकी साधनों की मदद ली जा रही है।

परिवार ने आम जनता से भी अपील की है कि अगर किसी को छात्रा के बारे में कोई जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस या परिवार को सूचित करें।

मंत्री नन्दी ने यूपीसीडा के प्रबंधक को किया बर्खास्त

मनमानी और कदाचार के आरोपों में गिरे गाज, लोक सेवा आयोग से मिली सहमति

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।
उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) में तैनात प्रबंधक (विद्युत यांत्रिक) हेमेंद्र प्रताप सिंह को गंभीर कदाचार और मनमानी के आरोपों में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता “नन्दी” ने मंगलवार को इस संबंध में प्रस्ताव को अनुमोदन प्रदान किया।

प्रबंधक हेमेंद्र प्रताप सिंह पर अनधिकृत अनुपस्थिति, चिकित्सा अवकाश हेतु निर्धारित प्रक्रिया का पालन न करने, तथा उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना के गंभीर आरोप लगे थे।27 नवम्बर 2020 को शासन द्वारा उन्हें ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण से यूपीसीडा में स्थानांतरित किया गया था। 1 दिसम्बर 2020 को उन्हें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से कार्यमुक्त भी कर दिया गया, किंतु उन्होंने नए कार्यस्थल पर 18 अप्रैल 2022 तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया।
🔹 जांच में आरोप सिद्ध:
यूपीसीडा के एसीईओ (ACEओ) द्वारा की गई जांच में यह स्पष्ट हुआ कि हेमेंद्र प्रताप सिंह ने बिना स्वीकृत अवकाश के लंबे समय तक सेवा से विराम लिया और आवश्यक दस्तावेज या स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया।

जांच रिपोर्ट में उन्हें “गंभीर अनुशासनहीनता एवं कदाचार” का दोषी पाया गया। इसके आधार पर शासन ने उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियम 1999 के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए सेवा समाप्ति का निर्णय लिया।
🔹 लोक सेवा आयोग की सहमति के बाद बर्खास्तगी:
राज्य सरकार ने इस कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) से आवश्यक सहमति प्राप्त की, जिसके बाद मंत्री नन्दी ने बर्खास्तगी आदेश पर अंतिम अनुमोदन प्रदान किया।

🔹 मंत्री नन्दी का सख्त संदेश:
औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता “नन्दी” ने कहा कि “यूपीसीडा या किसी भी औद्योगिक प्राधिकरण में अनुशासनहीनता, लापरवाही और मनमानी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो अधिकारी नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

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पुण्य भारी पड़ रहा है

पुण्य भारी पड़ रहा है कहा किसी ने,
यह प्रतिक्रिया मुझे दी एक मित्र ने,
स्वास्थ्य तो शरीर का देखा जाता है,
मन:स्थिति का पता कौन ले पाता है।

कोई कार्य निष्काम होकर करते हैं,
तो कर्म करने में आनंद मिलता है,
मन शुद्ध होकर शांति वास होता है,
शांति से ही हमेशा सुख मिलता है।

इस मन:स्थिति में टिक सकें तो
मोक्ष पाने की राह मिल जाती है,
और साधक की राह कभी इस
सन्मार्ग से विरत नहीं हो पाती है।

ईश्वर उसका आधार बन जाते हैं,
ईश्वर में अखंड सात्विक आनंद है,
इसको गीता में कर्मयोग कहा गया है,
इसी कृपा से निष्काम भाव आता है।

फल की इच्छा से ईश्वर की ओर
ध्यान निकट जा ही नहीं पाता है,
कर्म करो, फल की इच्छा न करो,
फल समय पर प्राप्त हो जाता है।

प्रकृति के मायाजाल अर्थात दुःख से
बचना है तो उनकी शरण जाना होगा,
आदित्य समभाव रखकर स्थिर होकर
स्वीकार भाव से जीना सीखना होगा।

डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’

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डायबिटीज़ में करवा चौथ व्रत: सेहत और श्रद्धा का संतुलन जरूरी

                करवा चौथ का व्रत भारतीय संस्कृति की उन परंपराओं में से एक है, जो पति की लंबी उम्र और दांपत्य सुख की कामना से जुड़ा हुआ है। लेकिन डायबिटीज़ जैसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही महिलाओं के लिए यह व्रत सावधानी के साथ निभाना ज़रूरी है। लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव आ सकता है, जो गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है।

इसलिए यदि किसी महिला को डायबिटीज़ है और वह करवा चौथ का व्रत रखना चाहती है, तो पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। थोड़ी योजना और संतुलन के साथ परंपरा को निभाया जा सकता है।

व्रत से पहले की तैयारी

  1. डॉक्टर से सलाह लें
    व्रत से कुछ दिन पहले चिकित्सक से मिलें और अपनी दवाओं या इंसुलिन की मात्रा पर चर्चा करें। डॉक्टर आपकी शुगर की स्थिति के अनुसार दवा और डोज़ एडजस्ट कर सकते हैं।
  2. पौष्टिक सर्गी लें
    सर्गी में फाइबरयुक्त, कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले और ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थ शामिल करें। जैसे— ओट्स, मूंग दाल चीला, दूध, दही, साबुत अनाज, बिना शक्कर के मेवे, सेब या नाशपाती।
    साथ ही, पर्याप्त मात्रा में पानी या नारियल पानी पीएं ताकि शरीर हाइड्रेट रहे।
  3. मिठाइयों से परहेज़ करें
    पारंपरिक सर्गी में मिठाई शामिल होती है, लेकिन डायबिटिक महिलाएं शुगर-फ्री विकल्प अपनाएं। ज़रूरत होने पर डॉक्टर से परामर्श लें।

व्रत के दौरान दिनभर की सावधानियां

  • अत्यधिक मेहनत या तनाव से बचें।.
  • यदि संभव हो तो बीच-बीच में ब्लड शुगर की जांच करती रहें।
    कमजोरी, चक्कर, पसीना या घबराहट महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और व्रत तोड़ने से हिचकें नहीं— सेहत सबसे पहले है।
  • परिवार को पहले से बता दें कि आप डायबिटिक हैं ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके।

व्रत खोलते समय ध्यान रखें

  1. धीरे-धीरे भोजन करें
    चंद्र दर्शन के बाद पहले एक गिलास पानी या नारियल पानी लें, फिर हल्का और सुपाच्य खाना खाएं।
  2. संतुलित आहार लें
    खिचड़ी, दलिया, दाल, सब्ज़ी और सलाद जैसे भोजन को प्राथमिकता दें। शक्कर या तले-भुने खाद्य पदार्थों से परहेज़ करें।
  3. ब्लड शुगर जांचें
    भोजन के बाद ब्लड शुगर लेवल अवश्य जांचें और ज़रूरत के अनुसार दवा लें।

महत्वपूर्ण बातें याद रखें

  1. करवा चौथ व्रत का मूल भाव श्रद्धा और प्रेम है, न कि अपने शरीर को कष्ट देना।
  2. यदि डॉक्टर मना करें या तबीयत ठीक न हो, तो “फलाहार” या “सात्विक आहार व्रत” रखकर भी पूजा और प्रार्थना का पुण्य प्राप्त किया जा सकता है।
  3. निर्जला व्रत की बजाय फल, दही या नारियल पानी जैसे हल्के विकल्प अपनाना बेहतर है।

निष्कर्ष:
डायबिटीज़ से पीड़ित महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखते समय अपने स्वास्थ्य और आस्था — दोनों के बीच संतुलन बनाए रखें। समझदारी, सावधानी और समय पर चिकित्सा सलाह ही सुरक्षित व्रत की कुंजी है।

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🌟 8 अक्टूबर 2025 का अंक राशिफल: जानें आज कौन चमकाएगा अपनी किस्मत!

(पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत दैनिक अंक ज्योतिष राशिफल)


आज 8 अक्टूबर 2025, बुधवार का दिन है।
यदि हम तारीख के अंकों को जोड़ें — (0+8+1+0+2+0+2+5 = 18 → 1+8 = 9), तो आज का अंक 9 बनता है, जिसका स्वामी मंगल ग्रह है।
मंगल शक्ति, साहस, ऊर्जा और पराक्रम का प्रतीक है।
इसी आधार पर तैयार है आज का मूलांक आधारित भाग्यफल।
आप अपना मूलांक (1 से 9) अपने जन्मदिन के अंकों को जोड़कर जान सकते हैं।
🔹 मूलांक 1 (MULANK 1)
नई शुरुआतों का शुभ समय है। कार्यक्षेत्र में आपकी राय को महत्व मिलेगा। नेतृत्व की क्षमता का सही उपयोग करें। व्यापार में नई योजनाएं आरंभ हो सकती हैं। पारिवारिक मामलों में भी सम्मान मिलेगा।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 3
उपाय: पिता या किसी वरिष्ठ का आशीर्वाद लें।
🔹 मूलांक 2 (MULANK 2)
भावनात्मक दिन रहेगा। किसी करीबी की बात मन को छू सकती है। प्रतिक्रिया देने से पहले सोचें। रचनात्मक कार्यों में प्रेरणा मिलेगी। दांपत्य जीवन में सामंजस्य रहेगा।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 6
उपाय: जल तत्व से जुड़ा कोई कार्य करें।
🔹 मूलांक 3 (MULANK 3)
आत्मविश्वास आपका सबसे बड़ा हथियार रहेगा। नौकरी या शिक्षा में उन्नति संभव है। सामाजिक सम्मान बढ़ेगा। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 9
उपाय: गुरुजनों का सम्मान करें।
🔹 मूलांक 4 (MULANK 4)
थोड़ा संघर्ष का दिन हो सकता है। योजनाओं में देरी से बचें। आर्थिक मामलों में सावधानी रखें। अनावश्यक यात्रा टालें।
शुभ रंग: ग्रे
शुभ अंक: 1
उपाय: इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से सावधान रहें।
🔹 मूलांक 5 (MULANK 5)
आपके शब्दों में आज जादू रहेगा। व्यापार में नई डील फाइनल हो सकती है। विदेश या दूर स्थान से शुभ समाचार मिलेगा। खानपान संयमित रखें।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
उपाय: नए संपर्कों से लाभ होगा।
🔹 मूलांक 6 (MULANK 6)
प्रेम, कला और सौंदर्य का दिन है। रिश्तों में मिठास बनी रहेगी। मीडिया, डिजाइनिंग या फैशन से जुड़े लोगों को सफलता मिलेगी।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 2
उपाय: घर और खुद को सजाएं-संवारें।
🔹 मूलांक 7 (MULANK 7)
आज आत्मचिंतन और मन की शांति का दिन है। ध्यान-योग लाभकारी रहेगा। पुराने मित्र से सहायता मिल सकती है।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 7
उपाय: अकेले समय बिताकर मन को स्पष्ट करें।
🔹 मूलांक 8 (MULANK 8)
नई जिम्मेदारियां बढ़ेंगी। मेहनत की परीक्षा होगी, लेकिन सफलता निश्चित है। वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा। सरकारी कार्यों में प्रगति के संकेत हैं।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 4
उपाय: अनुभवी व्यक्ति की सलाह लें।
🔹 मूलांक 9 (MULANK 9)
आज ऊर्जा और साहस से भरपूर रहेंगे। चुनौती स्वीकार करने से लाभ होगा। पुरानी परेशानियां दूर होंगी। सेना, खेल या प्रशासन से जुड़े लोगों के लिए दिन विशेष है।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 8
उपाय: किसी जरूरतमंद की मदद करें, मन शांत रहेगा।
🕉️ विशेष ज्योतिषीय संकेत:
मंगल ग्रह के प्रभाव से आज साहस और आत्मविश्वास दोनों उच्च रहेंगे।
किसी नए कार्य की शुरुआत या निर्णय के लिए यह दिन शुभ है।
🧿 आज का संदेश:
“संघर्ष में जो मुस्कुरा दे, वही विजेता कहलाता है।”

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✨ आज का इतिहास : 8 अक्टूबर (Today in History – 8 October)

✈️ 8 अक्टूबर: जब आकाश में फहराया भारत का परचम, तो 1963: भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की हुई शुरुआत और जुड़ा कंचनजंगा पर भारतीय सेना की विजयगाथा समेत और भी कुछ………

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।8 अक्टूबर भारतीय इतिहास में गौरव, साहस और उपलब्धियों का प्रतीक दिन है। आज ही के दिन, 1932 में भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) की स्थापना हुई थी। इसीलिए हर वर्ष 8 अक्टूबर को वायुसेना दिवस (Air Force Day) बड़े उत्साह और गर्व के साथ मनाया जाता है।

इस दिन भारत के इतिहास में और भी कई घटनाएँ दर्ज हैं जिन्होंने देश की दिशा और सोच को नई ऊँचाइयाँ दीं।
🔹 1932: भारतीय वायुसेना का गठन
ब्रिटिश शासन के दौरान “रॉयल इंडियन एयर फोर्स” के नाम से भारत की वायुसेना की स्थापना की गई। बाद में 1950 में इसका नाम बदलकर “भारतीय वायुसेना (IAF)” रखा गया। आज यह विश्व की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना है।
🔹 1928: भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का बलिदान
इस दिन भारतमाता के सपूतों ने देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। इन तीनों वीरों का नाम हमेशा स्वतंत्रता की गाथा में अमर रहेगा।
🔹 1959: दलाई लामा को भारत में शरण
तिब्बत से निर्वासन के बाद बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा को भारत में शरण मिली। यह भारत की करुणा और मानवीयता का प्रतीक क्षण था।
🔹 1963: भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत
केरल के थुंबा प्रक्षेपण केंद्र से पहला रॉकेट छोड़ा गया — यही भारत के अंतरिक्ष युग की शुरुआत थी, जिसने आगे चलकर ISRO को विश्व में प्रतिष्ठा दिलाई।
🔹 1977: कंचनजंगा पर भारतीय सेना की विजयगाथा
भारतीय सेना के पर्वतारोहियों ने विश्व की तीसरी सबसे ऊँची चोटी, कंचनजंगा पर तिरंगा फहराया। यह भारत की जज़्बे और जूनून की ऐतिहासिक उपलब्धि थी
🔹 2023: भारत बना पहला देश जिसने OTT प्लेटफार्मों पर तंबाकू चेतावनी अनिवार्य की यह निर्णय भारत को स्वास्थ्य जागरूकता में अग्रणी बनाता है।

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जब आकाश में फहराया भारत का परचम

भारतीय वायुसेना दिवस- गर्व, शौर्य और समर्पण का प्रतीक दिन

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)
भारतीय इतिहास के गौरवशाली पन्नों में 8 अक्टूबर एक ऐसा दिन है, जब देश के आकाश में साहस, अनुशासन और समर्पण की मिसाल लिखी गई। आज ही के दिन, वर्ष 1932 में भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) की नींव रखी गई थी। तभी से यह दिन भारतीय रक्षा इतिहास का अमिट अध्याय बन चुका है। हर साल 8 अक्टूबर को देशभर में वायुसेना दिवस (Air Force Day) पूरे सम्मान, जोश और देशभक्ति के साथ मनाया जाता है।
“आकाश के प्रहरी- धरती के गर्व”
भारतीय वायुसेना केवल सीमाओं की रक्षा का प्रतीक नहीं, बल्कि यह राष्ट्र की शक्ति, अनुशासन और आत्मनिर्भरता की उड़ान का प्रतीक बन चुकी है।
🛫 भारतीय वायुसेना की स्थापना: गर्व की उड़ान की शुरुआत
8 अक्टूबर 1932 को ब्रिटिश शासनकाल में भारत की वायुसेना का गठन “रॉयल इंडियन एयर फोर्स (RIAF)” नाम से किया गया था। प्रारंभिक दौर में इसमें केवल छह अधिकारी और 19 वायुसैनिक थे। इसके पहले कमांडिंग ऑफिसर सर टॉम वॉकर एलम यंग थे। 1947 में आज़ादी के बाद और 1950 में भारत के गणराज्य बनने के पश्चात इसका नाम बदलकर “भारतीय वायुसेना (Indian Air Force – IAF)” कर दिया गया।
आज यह वायुसेना न केवल एशिया की प्रमुख सैन्य शक्ति है, बल्कि विश्व की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना के रूप में जानी जाती है। इसकी ताकत में शामिल हैं अत्याधुनिक लड़ाकू विमान जैसे रफाल, सुखोई-30MKI, मिराज-2000, तेजस और जगुआर।
🇮🇳 राष्ट्र की सुरक्षा का सशक्त प्रहरी
भारतीय वायुसेना का ध्येय वाक्य है — “नभः स्पृशं दीप्तम्”, जिसका अर्थ है “आकाश को छूते हुए तेजस्वी रहो।”
यह श्लोक भगवद्गीता से लिया गया है, जो वायुसेना के साहस, शौर्य और गौरव का प्रतीक है।
साल दर साल भारतीय वायुसेना ने न केवल युद्धों में अपनी क्षमता साबित की, बल्कि राहत और बचाव अभियानों में भी मानवता की मिसाल पेश की।
1947-48: कश्मीर युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाई।
1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों में वायुसेना की विजयगाथा अमर है।
कारगिल युद्ध (1999) में “ऑपरेशन सफेद सागर” के तहत वायुसेना ने दुर्गम चोटियों पर बैठे दुश्मनों को खदेड़ दिया।
🔹 क्रॉसर 2: “नभ में निडर, संकट में सहायक”
वायुसेना ने हमेशा युद्ध के साथ-साथ शांति के समय में भी देशवासियों की रक्षा की — चाहे वह आपदा राहत हो या अंतरराष्ट्रीय मानवीय मिशन।
🌪️ जब वायुसेना बनी मानवता की आशा
भारतीय वायुसेना का इतिहास केवल युद्धक विजय तक सीमित नहीं है।
यह हर बार तब भी आगे आई है जब देश पर कोई प्राकृतिक आपदा आई —
उत्तराखंड त्रासदी (2013) में हजारों लोगों की जान बचाई।
जम्मू-कश्मीर में बाढ़ (2014) और
नेपाल भूकंप (2015) में राहत सामग्री और लोगों को सुरक्षित निकालने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इन अभियानों ने यह सिद्ध किया कि वायुसेना केवल एक रक्षा बल नहीं, बल्कि मानवता का प्रहरी भी है।
🌏 आत्मनिर्भर भारत की दिशा में नई उड़ान
आज भारतीय वायुसेना “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” के सपनों को साकार कर रही है।
देशी तकनीक से विकसित हल्के लड़ाकू विमान (LCA) तेजस,
C-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, और
रडार, मिसाइल सिस्टम जैसी परियोजनाएँ न केवल वायुसेना की ताकत बढ़ा रही हैं, बल्कि भारत की स्वदेशी रक्षा उद्योग को भी मजबूती दे रही हैं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत पूरी तरह स्वदेशी फाइटर जेट, ड्रोन और हवाई रक्षा तंत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
🎖️ गौरवशाली पल और नायकों की कहानियाँ
वायुसेना के इतिहास में ऐसे अनेक योद्धाओं ने जन्म लिया जिन्होंने अपने पराक्रम से देश का मस्तक ऊँचा किया।
मिग-21 के पायलट अभिनंदन वर्धमान, जिन्होंने 2019 में पाकिस्तानी F-16 को मार गिराया।
फ्लाइट लेफ्टिनेंट हर्षा सिंह, स्क्वाड्रन लीडर मोहना सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट भावना कंठ और अवनी चतुर्वेदी — ये नाम भारत में महिलाओं की नई उड़ान के प्रतीक बन चुके हैं।
“वीरों के आकाश में लहराता तिरंगा”
हर मिशन, हर युद्ध और हर राहत कार्य में भारतीय वायुसेना ने यह दिखाया है कि उसके पंख केवल लोहे के नहीं, बल्कि साहस और देशप्रेम से बने हैं।
💬 देशभर में मनाया जाता है वायुसेना दिवस
हर वर्ष 8 अक्टूबर को वायुसेना मुख्यालय, नई दिल्ली के साथ-साथ
गाज़ियाबाद के हिंडन एयर बेस पर भव्य परेड, एयर शो और सम्मान समारोह आयोजित किए जाते हैं।
इस अवसर पर देशभर में लाखों नागरिक, छात्र और युवा
भारत के वीर पायलटों को सलाम करते हैं।
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और तीनों सेनाओं के प्रमुख
इस दिन वायुसेना के जवानों को बधाई देते हैं और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं
भारतीय वायुसेना केवल एक सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा का वह हिस्सा है
जो हर पल देश के लिए समर्पित रहती है।
8 अक्टूबर का दिन हमें यह याद दिलाता है कि
“हमारे आकाश में हर उड़ान केवल विमान की नहीं, बल्कि भारत के गर्व की है।”

1928: जब भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने देश के लिए दिया सर्वोच्च बलिदान

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(लेख – राष्ट्र की परम्परा डेस्क)

क्रांति की ज्वाला जिसने इतिहास बदल दिया
भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास बलिदानों की अमर गाथाओं से भरा हुआ है। परंतु कुछ बलिदान ऐसे हैं जिन्होंने पूरे देश की आत्मा को झकझोर दिया, जिसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने का हौसला दिया। वर्ष 1928 का समय भी ऐसा ही था—जब देश के तीन अमर सपूतों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने अपने प्राणों की आहुति देकर आज़ादी की ज्वाला को और प्रज्वलित किया। इन तीनों वीरों ने न केवल ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिलाई, बल्कि करोड़ों भारतीयों के हृदय में स्वतंत्रता का अग्निदीप जलाया।
लाला लाजपत राय की शहादत और प्रतिशोध की चिंगारी
30 अक्टूबर 1928 को जब लाहौर में साइमन कमीशन के विरोध में विशाल प्रदर्शन निकाला गया, तो अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय उस विरोध के नेतृत्व में थे। अंग्रेजों की पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया। लाठीचार्ज के दौरान सुपरिंटेंडेंट जेम्स ए. स्कॉट ने स्वयं लाला लाजपत राय पर प्रहार किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए और 17 नवम्बर 1928 को उनका निधन हो गया।
इस घटना ने नौजवान क्रांतिकारियों के भीतर अग्नि भर दी। भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद और उनके साथियों ने निर्णय लिया कि इस अत्याचार का प्रतिशोध लिया जाएगा। यह प्रतिशोध सिर्फ़ एक अधिकारी के विरुद्ध नहीं, बल्कि पूरे ब्रिटिश शासन के अहंकार के विरुद्ध था।

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गलत पहचान में हुआ लाहौर का ऐतिहासिक घटना
17 दिसंबर 1928 को योजना के अनुसार जेम्स ए. स्कॉट को मारने के लिए भगत सिंह और राजगुरु लाहौर पहुँचे। परंतु पहचान में चूक हो गई और उन्होंने असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट जॉन सॉन्डर्स को गोली मार दी। इस घटना से ब्रिटिश शासन हिल गया। सॉन्डर्स की हत्या के बाद भगत सिंह और राजगुरु फरार हो गए। इस पूरी योजना में सुखदेव की भूमिका रणनीतिक और निर्णायक थी — उन्होंने भगत सिंह और राजगुरु को मार्गदर्शन दिया और गुप्त संगठन हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) की कार्ययोजना तय की।
भगत सिंह: विचारों से बना अमर क्रांतिकारी
भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को लायलपुर (अब पाकिस्तान में) के बंगा गाँव में हुआ था। बचपन से ही उनके मन में देशभक्ति की भावना प्रबल थी। 1919 के जालियांवाला बाग हत्याकांड ने उनके मन को झकझोर दिया। किशोर अवस्था में ही उन्होंने ‘क्रांति’ को अपनी साधना बना लिया। वे मानते थे कि स्वतंत्रता केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और मानसिक मुक्ति का भी प्रतीक है।
उनकी वैचारिक गहराई इतनी थी कि जेल में रहते हुए भी उन्होंने किताबें पढ़ीं, लेख लिखे और युवाओं को जगाने का कार्य किया। भगत सिंह का कहना था –
“क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है।”
सुखदेव: संगठन के मस्तिष्क, विचार के योद्धा
सुखदेव थापर का जन्म 15 मई 1907 को लाहौर में हुआ था। वे भगत सिंह के सहपाठी और गहरे मित्र थे। लाहौर नेशनल कॉलेज, जिसे लाला लाजपत राय ने स्थापित किया था, में पढ़ते समय ही उन्होंने क्रांतिकारी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई। वे नौजवान भारत सभा के प्रमुख आयोजकों में से थे।
सुखदेव ने युवाओं को संगठित कर उन्हें स्वदेश प्रेम और त्याग की भावना से भरने का बीड़ा उठाया। उनके अंदर एक योजनाकार, एक विचारक और एक अनुशासित सेनानी था। उन्होंने ही भगत सिंह को ‘सामूहिक आंदोलन’ के महत्व का बोध कराया।
राजगुरु: निर्भीक योद्धा और साहस की प्रतिमूर्ति
राजगुरु का पूरा नाम शिवराम हरि राजगुरु था। उनका जन्म 24 अगस्त 1908 को महाराष्ट्र के पुणे जिले के खेड़ में हुआ। वे जन्मजात साहसी और तेजस्वी थे। उनकी निशानेबाजी इतनी सटीक थी कि साथी उन्हें “शार्प शूटर” कहते थे।

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राजगुरु ने कम उम्र में ही हथियार चलाने की कला में निपुणता प्राप्त कर ली थी। जब भी किसी जोखिम भरे अभियान की बात होती, वे सबसे पहले आगे बढ़ते। भगत सिंह और सुखदेव के साथ उनकी त्रयी आज भी भारत के क्रांतिकारी इतिहास की सबसे प्रेरक संगति मानी जाती है।
लाहौर षड्यंत्र मामला और न्याय का नाटक
सॉन्डर्स हत्याकांड के बाद ब्रिटिश पुलिस ने चारों ओर तलाशी अभियान शुरू किया। क्रांतिकारी गुप्त रूप से भूमिगत हो गए। लेकिन 1929 में सेंट्रल असेम्बली बम कांड के बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त पकड़े गए। उनके मुकदमे के दौरान भगत सिंह ने अदालत को अपने विचारों के मंच के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने ब्रिटिश न्याय-व्यवस्था की पोल खोली और कहा कि यह मुकदमा न्याय नहीं, बल्कि औपनिवेशिक प्रतिशोध है।
1929 में शुरू हुआ लाहौर षड्यंत्र केस अंततः भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के लिए मृत्युदंड के निर्णय पर समाप्त हुआ। न्याय के नाम पर औपनिवेशिक अत्याचार हुआ। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपीलों और विरोधों के बावजूद 23 मार्च 1931 को तीनों को फाँसी दे दी गई।
23 मार्च 1931: जब धरती रो पड़ी
लाहौर सेंट्रल जेल के भीतर जब 23 मार्च 1931 की रात को तीनों वीर फाँसी पर चढ़े, तब देश के कोने-कोने में मातम छा गया। जेल की दीवारों के भीतर से उठती हुई वह गूँज “इंकलाब ज़िंदाबाद” आज भी देशभक्तों के हृदय में गूँजती है।
ब्रिटिश हुकूमत को डर था कि उनके शवों के अंतिम दर्शन से जनक्रांति भड़क जाएगी, इसलिए उन्हें रातोंरात फिरोज़पुर के पास सतलुज नदी के किनारे गुप्त रूप से जला दिया गया। परंतु उनके विचारों की ज्वाला बुझी नहीं — वह आज भी हर पीढ़ी को जगाती है।
इन तीनों का बलिदान क्यों अमर है
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का बलिदान केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिशोध नहीं था, बल्कि यह एक विचार क्रांति थी। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता को केवल राजनैतिक दृष्टि से नहीं, बल्कि जनचेतना के रूप में देखा।
उन्होंने सिखाया कि स्वतंत्रता का अर्थ है —
“विचारों की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की भावना।”
आज भी जब देश स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस मनाता है, तो इन तीनों अमर शहीदों के नाम लिए बिना उत्सव अधूरा लगता है। उनके नाम से देश का हर नौजवान साहस, आदर्श और त्याग का अर्थ सीखता है।
विचारों की मशाल आज भी जलती है
समय भले ही बदल गया हो, पर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने जो सपना देखा था — एक न्यायपूर्ण, समानता आधारित और आत्मनिर्भर भारत का — वह आज भी हमारे लिए प्रेरणा है।
उनका बलिदान केवल इतिहास का अध्याय नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का वह अनश्वर गीत है, जो हर पीढ़ी को यह याद दिलाता है —
“क्रांतिकारी मरते नहीं, वे युगों तक विचारों में जीवित रहते हैं।”

HPU Recruitment 2025: 285 असिस्टेंट इंजीनियर पदों पर सीधी भर्ती, बिना परीक्षा चयन, सैलरी ₹1,67,800 तक

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नौकरी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। हरियाणा पावर यूटिलिटीज (HPU) ने असिस्टेंट इंजीनियर (AE) के 285 पदों पर भर्ती का बड़ा अवसर जारी किया है। इस भर्ती प्रक्रिया में कोई लिखित परीक्षा नहीं होगी और चयन केवल GATE स्कोर के आधार पर होगा। आवेदन प्रक्रिया चालू है और अंतिम तिथि 29 अक्टूबर 2025 है।

HPU Recruitment 2025 – मुख्य विवरण

कुल पद: 285

पद का नाम: असिस्टेंट इंजीनियर (AE)

आवेदन अंतिम तिथि: 29 अक्टूबर 2025

चयन प्रक्रिया: केवल GATE स्कोर के आधार पर

सैलरी: ₹53,100 – ₹1,67,800 प्रति माह (लेवल-09 पे स्केल)

पात्रता मानदंड

किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स/मैकेनिकल/सिविल इंजीनियरिंग में फुल-टाइम BE/B.Tech डिग्री (कम से कम 60% अंक)

फुल-टाइम ME/M.Tech डिग्री धारक भी आवेदन कर सकते हैं

वैध GATE 2022, 2023, 2024 या 2025 स्कोर होना अनिवार्य

आयु सीमा

20 से 42 वर्ष (29 अक्टूबर 2025 को लागू)

आरक्षित वर्गों को नियमानुसार आयु में छूट

आवेदन शुल्क

सामान्य वर्ग: ₹590

महिला, SC, BC-A/BC-B, ESM, EWS: ₹148

आवेदन प्रक्रिया

  1. आधिकारिक वेबसाइट http://hVPNL.org.in पर जाएं
  2. Recruitment सेक्शन में जाकर आवेदन लिंक पर क्लिक करें
  3. व्यक्तिगत, शैक्षणिक और GATE स्कोर विवरण भरें
  4. पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर अपलोड करें
  5. श्रेणी अनुसार आवेदन शुल्क जमा करें
  6. आवेदन फॉर्म सबमिट करें और उसका प्रिंटआउट भविष्य के लिए सुरक्षित रखें

UPI अपडेट: अब आधार से जुड़े बायोमेट्रिक से सेट या रीसेट होगा यूपीआई पिन, एनपीसीआई ने लॉन्च किए कई नए फीचर

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। डिजिटल भुगतान प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने मंगलवार को अपने प्रमुख प्लेटफॉर्म यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) में कई नए फीचर लॉन्च किए हैं।
अब ग्राहक आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (Aadhaar Biometric Authentication) के जरिए UPI पिन सेट या रीसेट कर सकेंगे। इस सुविधा से यूपीआई उपयोगकर्ता बिना मैन्युअल पिन दर्ज किए फिंगरप्रिंट या फेस अनलॉक से अपने लेनदेन को अधिक सुरक्षित बना सकेंगे।

ऑन-डिवाइस बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन की सुविधा

एनपीसीआई के अनुसार, नया फीचर ग्राहकों को अपने स्मार्टफोन के बिल्ट-इन सिक्योरिटी सिस्टम (Fingerprint/Face Unlock) का उपयोग करके यूपीआई ट्रांजेक्शन ऑथेंटिकेट करने की अनुमति देता है।
यह सुविधा उन ग्राहकों के लिए वैकल्पिक होगी जो UPI पिन दर्ज करने के बजाय बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन का विकल्प चुनना चाहते हैं। इससे उपयोगकर्ताओं को अपने लेनदेन के तरीके पर अधिक नियंत्रण और सुरक्षा मिलेगी।

UPI Cash Points और माइक्रो एटीएम की सुविधा

एनपीसीआई ने UPI Cash Points के जरिए माइक्रो एटीएम से नकद निकासी की नई सुविधा भी शुरू की है।
यह सेवा बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स (BCs) के माध्यम से उपलब्ध होगी। इस पहल का उद्घाटन वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम नागराजू ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 में किया।

PayPal और NPCI International की साझेदारी

वैश्विक भुगतान कंपनी PayPal ने एनपीसीआई की अंतरराष्ट्रीय शाखा NPCI International Payments (NIPL) के साथ साझेदारी की है।
इस सहयोग के तहत PayPal World पर जल्द ही UPI भुगतान का विकल्प जोड़ा जाएगा।
इससे भारतीय उपयोगकर्ता विदेशी व्यापारियों को रुपये में भुगतान कर सकेंगे। यह सेवा 2025 में लॉन्च होने की संभावना है।

एनपीसीआई की यह साझेदारी भारत को सीमा-पार डिजिटल भुगतान (Cross-Border Payments) में अग्रणी बनाएगी। PayPal Cloud इस सेवा के तहत कम विलंबता और बड़े पैमाने पर भुगतान प्रोसेसिंग सुनिश्चित करेगा।

संयुक्त खाते और मल्टी-सिग्नेचर अकाउंट्स के लिए भी UPI सुविधा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर ने कार्यक्रम में घोषणा की कि अब संयुक्त खाते (Joint Accounts) और बहु-हस्ताक्षरकर्ता खाते (Multi-Signatory Accounts) के लिए भी यूपीआई का उपयोग किया जा सकेगा।
इसके अलावा, उन्होंने UPI Lite के जरिए वियरेबल डिवाइसेस (Wearable Glasses) से छोटे लेनदेन और Bharat Connect प्लेटफॉर्म पर फॉरेक्स (Foreign Exchange) सेवाओं की भी शुरुआत की।

Income Tax Department सख्त: फर्जी पैन और बेनामी सौदों पर अब लगेगी लगाम, रजिस्ट्री रिकॉर्ड की होगी जांच

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बेनामी संपत्तियों और फर्जी लेनदेन पर लगाम कसने के लिए आयकर विभाग (Income Tax Department) ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। विभाग अब देशभर के संपत्ति रजिस्ट्रार (Property Registrar) के रिकॉर्ड की विस्तृत जांच करने जा रहा है ताकि ऐसे लेनदेन पकड़े जा सकें जो अब तक नजरों से बचते रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, हजारों संपत्ति सौदों में फर्जी पैन कार्ड (Fake PAN) और भ्रामक विवरण का इस्तेमाल किया गया है। कई मामलों में खरीदार और विक्रेता ने जानबूझकर गलत पैन या नाम दर्ज कराए, ताकि कर विभाग तक लेनदेन की जानकारी न पहुंचे।

30 लाख से अधिक की संपत्तियों पर विभाग की पैनी नजर

नियमों के तहत रजिस्ट्रार कार्यालय को 30 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की संपत्तियों के सौदों की रिपोर्ट आयकर विभाग को भेजनी होती है। लेकिन जांच में सामने आया है कि कई अधिकारी मिलीभगत से इन सौदों की रिपोर्ट ही नहीं भेजते या गलत विवरण दर्ज कर देते हैं।

इससे विभाग को कई उच्च-मूल्य वाले संपत्ति सौदों (High-Value Real Estate Deals) का पता नहीं चल पाता। इन लेनदेन का उपयोग लंबे समय से काले धन (Black Money) को छिपाने और बेनामी संपत्तियां (Benami Properties) बनाने के लिए किया जा रहा है।

अब अनिवार्य होगा पैन और आधार का ई-सत्यापन

आयकर विभाग इस व्यवस्था को और मजबूत करने जा रहा है। इसके तहत संपत्ति रजिस्ट्रेशन से पहले पैन (PAN) और आधार (Aadhaar) का ई-सत्यापन (e-verification) अनिवार्य किया जाएगा।
इससे फर्जी दस्तावेजों का उपयोग बंद होगा और संपत्ति के वास्तविक स्वामियों (Real Owners) की पहचान सुनिश्चित की जा सकेगी।

बड़ी संपत्तियों और संदिग्ध आय पर विशेष नजर

इस साल की शुरुआत में भी आयकर विभाग ने 50 लाख रुपये या उससे अधिक की कृषि आय (Agricultural Income) दिखाने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं पर देशव्यापी जांच अभियान चलाया था।
विभाग का मानना है कि कई लोग इस माध्यम से बेनामी आय को वैध दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

कर चोरी और रियल एस्टेट में पारदर्शिता पर फोकस

सरकार का मकसद अब यह सुनिश्चित करना है कि हर संपत्ति सौदे में पारदर्शिता (Transparency in Real Estate) बनी रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम फर्जी पैन, बेनामी लेनदेन और कर चोरी (Tax Evasion) पर कड़ा प्रहार साबित होगा।