Tuesday, July 7, 2026
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अखिलेश-आज़म की मुलाकात से सियासी तापमान बढ़ा, ‘चरित्र’ पर बोले आज़म—बिकाऊ नहीं हैं हम!

रामपुर। (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)लंबे अंतराल के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज़ हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बुधवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान से रामपुर स्थित उनके आवास पर मुलाक़ात करने पहुंचे।
यह मुलाकात 22 सितंबर को सीतापुर जेल से आज़म ख़ान की रिहाई के बाद पहली बार हुई, यानी लगभग तेईस महीने बाद दोनों नेता आमने-सामने आए।

जानकारी के अनुसार, अखिलेश यादव का कार्यक्रम पहले मुरादाबाद एयरपोर्ट से रामपुर जाने का था, लेकिन प्रशासनिक अनुमति न मिलने पर उन्होंने बरेली एयरपोर्ट से सीधे रामपुर पहुंचने का निर्णय लिया।
रामपुर पहुंचते ही आज़म ख़ान ने गले लगाकर अखिलेश यादव का स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेता एक ही वाहन से उनके निवास के लिए रवाना हुए।
मुलाकात को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज़ हैं।

बैठक से पूर्व आज़म ख़ान ने स्पष्ट कहा—

“मैं सिर्फ़ अखिलेश यादव से ही मिलूंगा, किसी और से नहीं।”
जब उनसे बसपा में शामिल होने की अफवाहों पर सवाल किया गया तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया “हमारे पास चरित्र नाम की चीज़ है। पद पर होना या न होना मायने नहीं रखता, बल्कि जनता का प्रेम और सम्मान ही हमारी पहचान है। हम बिकाऊ नहीं हैं, यह हमने साबित कर दिया है।”
हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने क्वालिटी बार ज़मीन प्रकरण में आज़म ख़ान को ज़मानत दी थी।
इसके साथ ही एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने उन्हें 17 साल पुराने सड़क जाम और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान मामले में बरी किया।
इसके अलावा, डूंगरपुर कॉलोनी से बेदखली मामले में भी 10 सितंबर को उन्हें राहत मिली थी।
पिछले कुछ वर्षों में आज़म ख़ान के ख़िलाफ़ कुल 16 आपराधिक मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुलाकात न केवल सपा के अंदरूनी समीकरणों को मज़बूत करेगी, बल्कि आगामी चुनावी रणनीतियों में भी अहम भूमिका निभा सकती है।

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वायु सेना में कैरियर के अवसरों पर विद्यार्थियों को मिला मार्गदर्शन

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बिछुआ/मध्य प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। वीर अमर शहीद स्वर्गीय कबीरदास उइके शासकीय महाविद्यालय, बिछुआ में बुधवार को “वायु सेना में कैरियर के अवसर” विषयक एक दिवसीय वर्कशॉप टेगौर हॉल में प्राचार्य के निर्देशन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ. फरहत मंसूरी ने संचालन किया। मुख्य वक्ता डॉ. पूजा तिवारी ने विद्यार्थियों को भारतीय वायु सेना में कैरियर निर्माण की प्रक्रिया, आवश्यक शैक्षणिक योग्यताएँ, प्रशिक्षण व्यवस्था एवं उपलब्ध अवसरों की विस्तृत जानकारी दी। वहीं विशिष्ट वक्ता डॉ. नसरीन अंजुम खान ने वायु सेना में भर्ती प्रक्रिया, चयन के चरणों तथा तैयारी के प्रभावी उपायों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों ने विषय से संबंधित जिज्ञासाएँ प्रस्तुत कीं और वक्ताओं से संवाद स्थापित किया। अंत में डॉ. मनीता कौर विर्दी ने आभार ज्ञापित किया।
इस वर्कशॉप में शताधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम की सफलता में डॉ. ज्योति राजोरिया, डॉ. मनीषा आमटे, डॉ. कीर्ति डेहरिया, डॉ. माधुरी पुसे, डॉ. मदन ठाकरे, डॉ. विवेक तिवारी, डॉ. साकेत, डॉ. शिवानी सोनी, श्री अजित सिंह गौतम, श्री मनीष पटेल एवं श्री सूर्यकांत शुक्ला का विशेष सहयोग रहा।
यह वर्कशॉप विद्यार्थियों के लिए भारतीय वायु सेना में कैरियर निर्माण की दिशा में प्रेरणादायक एवं उपयोगी पहल सिद्ध हुई।

📰 माता पार्वती ने पहली बार भगवान शिव के लिए किया था करवा चौथ व्रत – आचार्य अजय शुक्ल

10 अक्टूबर को रखा जाएगा करवा चौथ व्रत

सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय संस्कृति और सभ्यता का एक प्रमुख पर्व करवा चौथ व्रत है। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह व्रत 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

उक्त जानकारी देते हुए आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सबसे पहले माता पार्वती जी ने अपने आराध्य भगवान शिव के दीर्घायु होने की कामना से यह व्रत रखा था। इसके बाद माता सीता जी ने भगवान श्रीराम के लिए करवा चौथ व्रत किया। तब से यह व्रत परंपरागत रूप से प्रचलित है।

उन्होंने बताया कि स्त्रियों के अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए यह व्रत किया जाता है। इस बार 10 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 12 मिनट पर होगा और चतुर्थी तिथि का समापन रात्रि 12 बजकर 24 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात्रि 7 बजकर 58 मिनट पर होगा।

महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं और व्रत का समापन पति व चंद्रमा के दर्शन छलनी से देखकर करती हैं। मान्यता है कि छलनी में जितने अधिक छिद्र होते हैं, पति की आयु उतनी अधिक बढ़ती है। इस दिन भगवान गणेश जी और कार्तिकेय जी की भी पूजा की जाती है।

आचार्य शुक्ल ने कहा कि पवित्र मन से किया गया यह व्रत न केवल भारत में बल्कि विश्वभर में जहां-जहां सनातन धर्म के अनुयायी हैं, वहां श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।

इसे पढ़ें –सोनहूला रामनगर में भीषण सड़क हादसा: ई-रिक्शा पलटा, 3 घायल, 1 की मौत!

सोनहूला रामनगर में भीषण सड़क हादसा: ई-रिक्शा पलटा, 3 घायल, 1 की मौत!

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सोनहूला रामनगर चौराहे से बड़ा हादसा सामने आया। कसया की ओर से आ रही तेज रफ्तार चार-पहिया वाहन अचानक अनियंत्रित होकर सामने से आ रहे ई-रिक्शा में जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ई-रिक्शा सड़क किनारे पलट गया और इलाके में अफरातफरी मच गई।

हादसे में चौबे टोला, सोनहूला रामनगर के एक ही परिवार से प्रीति देवी (पत्नी राजेश्वर राजभर), शोशिला देवी और ऋद्धि (3) गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत पहुँच कर घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, ऋद्धि की हालत बेहद नाजुक थी, लेकिन उनकी मौत हो गई। प्रीति देवी और शोशिला देवी की हालत स्थिर बताई जा रही है।

सोनहूला पुलिस ने तुरंत घटना स्थल का निरीक्षण किया और वाहन को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टक्कर के बाद हड़कंप मच गया और स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए आगे आए।

यह दर्दनाक हादसा सोनहूला रामनगर में भारी चिंता और सनसनी का कारण बना।

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हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस वाई पूरन कुमार की रहस्यमयी मौत: भ्रष्टाचार के आरोपों ने बढ़ाया तनाव?

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चंडीगढ़ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) वाई पूरन कुमार की आकस्मिक मृत्यु ने सभी को चौंका दिया है। मंगलवार को चंडीगढ़ स्थित अपने घर पर 52 वर्षीय अधिकारी ने कथित रूप से खुद को गोली मार ली, जिससे पुलिस और प्रशासन में हलचल मची हुई है।

पूरी घटना उनके घर के बेसमेंट के एक कमरे में हुई, जहां शव गोली लगने के निशान के साथ मिला। वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप और उनके भ्रष्टाचार विरोधी रुख के लिए जाने जाने वाले पूरन कुमार को हाल ही में रोहतक के सुनारिया पुलिस प्रशिक्षण केंद्र (पीटीसी) में महानिरीक्षक के पद पर स्थानांतरित किया गया था। इससे पहले वह रोहतक रेंज के आईजी के पद पर तैनात थे।

सूत्रों के अनुसार, उनके गनमैन हेड कांस्टेबल सुशील कुमार के खिलाफ हाल ही में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया था। सुशील कुमार ने पुलिस हिरासत में स्वीकार किया कि उसने आईपीएस अधिकारी के कहने पर मासिक रिश्वत मांगी थी। रोहतक के अर्बन एस्टेट थाने में शराब कारोबारी से 2 से 2.5 लाख रुपये मासिक रिश्वत लेने का आरोप लगते ही FIR दर्ज की गई थी।

29 सितंबर को सरकार ने पूरन कुमार को रोहतक रेंज से सुनारिया पीटीसी में स्थानांतरित कर दिया था। पुलिस विभाग में यह स्थानांतरण सज़ा के रूप में देखा गया।

चंडीगढ़ पुलिस के अनुसार, घटनास्थल से कई साक्ष्यों के साथ एक “वसीयत” और नौ पृष्ठों का अंतिम नोट बरामद किया गया। सूत्रों के अनुसार, इस नोट में अधिकारी के निजी विचार और तनाव के संकेत मौजूद हैं, जो उनकी रहस्यमयी मौत की तह में नई पहेली जोड़ते हैं।

इस घटना ने न केवल हरियाणा पुलिस प्रशासन में सवाल खड़े किए हैं, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों के मानसिक स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार से जुड़े दबावों पर भी बहस शुरू कर दी है।

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🇮🇳 भारत में ब्रिटेन की नई चाल: कीर स्टार्मर की ‘मुंबई लैंडिंग’ से शुरू हुआ नया भू-राजनीतिक समीकरण!

मुंबई/नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।
जब भी दुनिया का कोई देश राजनीतिक अस्थिरता या आर्थिक संकट में घिरता है, उसकी नज़र भारत की ओर टिक जाती है। कुछ ऐसा ही इस बार ब्रिटेन के साथ भी देखने को मिल रहा है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर इन दिनों भारत दौरे पर हैं — लेकिन उनका दिल्ली नहीं बल्कि मुंबई उतरना अपने आप में एक बड़ा जियो-पॉलिटिकल संकेत माना जा रहा है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का यह दो दिवसीय (8–9 अक्टूबर) भारत दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं बल्कि अमेरिका-भारत टैरिफ विवाद के बीच उभरते नए आर्थिक समीकरण की बिसात है — जो वाशिंगटन को खटक सकती है।

मुंबई एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने स्टार्मर का भव्य स्वागत किया। राज्यपाल आचार्य देवत्त भी इस मौके पर मौजूद रहे।
🔹 मोदी-स्टार्मर मुलाकात: भारत-ब्रिटेन रिश्तों का नया अध्याय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ब्रिटिश समकक्ष कीर स्टार्मर की मुलाकात गुरुवार सुबह 10 बजे राजभवन, मुंबई में होगी। इस उच्च-स्तरीय वार्ता में व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश और जलवायु नीति जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा होने की संभावना है।
बैठक के बाद दोनों नेता संयुक्त प्रेस वार्ता में अपने विचार साझा करेंगे और भारत-ब्रिटेन साझेदारी के भविष्य की दिशा तय करेंगे। दोपहर 1:40 बजे, ब्रिटिश प्रधानमंत्री जियो वर्ल्ड सेंटर में सीईओ फोरम को संबोधित करेंगे, जहां दोनों देशों के उद्योग जगत के दिग्गज आपसी सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा करेंगे।
🔹 ‘विज़न 2035’ के तहत नए युग की तैयारी
भारत और ब्रिटेन के बीच वृहद रणनीतिक साझेदारी को लेकर यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। दोनों नेता “विज़न 2035” योजना की प्रगति की समीक्षा करेंगे — जो कि जुलाई में हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का विस्तारित रोडमैप है।
इस योजना का लक्ष्य है दोनों देशों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग को गहराई देना।
स्टार्मर इस यात्रा पर 100 से अधिक व्यापारिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों के साथ भारत आए हैं — जो दोनों देशों के बीच संबंधों को नए मुकाम पर ले जाने की दिशा में काम करेंगे।
🔹 अमेरिका पर दबाव, भारत पर भरोसा
विश्लेषकों का मानना है कि ब्रिटेन की यह पहल अमेरिका और भारत के बीच चल रहे टैरिफ तनाव के बीच एक संतुलन साधने की कोशिश है। लंदन अब चाहता है कि भारत के साथ उसके आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते एक स्वतंत्र दिशा में आगे बढ़ें, ताकि वैश्विक दक्षिण (Global South) में ब्रिटेन की भूमिका मज़बूत हो सके।

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“पुरानी साइकिल और नई सड़क”

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लेखिका – सुनीता कुमारी (बिहार )

​​गाँव के छोर पर रहने वाले अस्सी वर्षीय बुजुर्ग रामू काका की ज़िंदगी एक पुरानी, नीले रंग की साइकिल के पहियों पर घूमती थी। वह साइकिल दशकों पुरानी थी, जगह-जगह से जंग खा चुकी थी, लेकिन काका के लिए वह सिर्फ एक सवारी नहीं, बल्कि उनके जीवन का सहारा थी। हर सुबह, वह उसी पर सवार होकर गाँव की कच्ची पगडंडी से होते हुए बाज़ार जाते, थोड़ी-सी सब्ज़ी बेचते और लौट आते।
​रामू काका की दुनिया बहुत सरल थी— उनकी पुरानी झोंपड़ी, उनकी साइकिल और गाँव के कुछ गिने-चुने लोग। उन्हें अपनी धीमी, शांतिपूर्ण ज़िंदगी बहुत पसंद थी।
​एक दिन, गाँव में बड़ी हलचल हुई। सरकार ने गाँव तक एक चौड़ी, चमचमाती डामर की सड़क बनाने की घोषणा की। गाँव वाले बहुत खुश हुए। अब उनका शहरों से सीधा संपर्क हो जाएगा, व्यापार बढ़ेगा, और एम्बुलेंस भी आसानी से आ पाएगी।गाँव का तेजी से विकास होगा।
​सड़क बनने का काम ज़ोरों पर शुरू हुआ।देखते देखते सड़क बनकर तैयार हो गई। गाँव वाले बहुत खुश थे वही रामू काका उदास थे। उनकी पुरानी, घुमावदार पगडंडी अब सीधी, सपाट नई सड़क में बदल गई थी।
​सड़क बन गई। सब कुछ बदल गया। अब बाज़ार में महंगी मोटर साइकिलों और कारों की तेज़ आवाज़ गूँजती थी। गाँव में कई नए लोग आ गए। उनके कपड़े, उनकी बातें, सब अलग थीं।
​नई सड़क पर रामू काका को अपनी पुरानी साइकिल चलाने में डर लगने लगा। तेज़ रफ़्तार गाड़ियों के आगे उनकी धीमी चाल और जंग लगी साइकिल बेमेल लगती थी। एक दिन, एक तेज़ कार ने उन्हें लगभग टक्कर मार ही दी। वह गिरते-गिरते बचे, लेकिन उनका दिल काँप गया।
​रामू काका ने उदास होकर अपनी साइकिल को झोंपड़ी के कोने में खड़ा कर दिया और घर से निकलना बंद कर दिया।
​गाँव के युवा मुखिया, अंकित ने देखा कि रामू काका कई दिनों से बाज़ार नहीं आए। वह उन्हें देखने उनकी झोंपड़ी तक गया।
​अंकित ने पूछा, “काका, क्या हुआ? आप बाज़ार क्यों नहीं आ रहे?”
​रामू काका ने आह भरते हुए कहा, “अंकित, बेटा! ये सड़क तो सबके लिए अच्छी है, पर मेरे लिए नहीं। ये नई रफ़्तार मेरी पुरानी साइकिल के लिए नहीं बनी है। मुझे डर लगता है।”
​अंकित कुछ देर चुप रहा। फिर उसने मुस्कुराते हुए कहा, “काका, सड़क भले ही नई हो गई हो, लेकिन रिश्ते पुराने ही हैं। ये सड़क गाँव के लिए बनी है, और गाँव के लोग आप जैसे बुजुर्गों के बिना अधूरे हैं।”
​अगले दिन, अंकित कुछ लोगों के साथ आया और उसने नई सड़क के किनारे, काका की झोंपड़ी से बाज़ार तक, केवल साइकिलों और पैदल चलने वालों के लिए एक छोटी सी, सुंदर पक्की लेन बनवा दी। उस लेन को ‘रामू काका लेन’ नाम दिया गया।
​अब रामू काका रोज़ अपनी पुरानी नीली साइकिल पर, अपनी नई, छोटी सी लेन पर खुशी-खुशी बाज़ार जाते। वह समझ गए कि विकास का मतलब यह नहीं है कि, हमें अपनी पुरानी पहचान छोड़ देनी चाहिए, बल्कि यह है कि नई प्रगति में पुराने रिश्तों और ज़रूरतों के लिए भी जगह बनाई जाए।
​यह कहानी इस विचार को दर्शाती है कि आधुनिकीकरण और विकास के साथ-साथ हमें अपने बुजुर्गों और पुरानी जीवनशैली की ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।भारतीय वायुसेना दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को देश के वीर वायु योद्धाओं, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। दोनों ही नेताओं ने भारतीय वायुसेना की बहादुरी, तत्परता और राष्ट्र सेवा की भावना की सराहना करते हुए कहा कि इस बल ने हर संकट की घड़ी में देश का सिर गर्व से ऊँचा किया है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर संदेश साझा करते हुए लिखा,

“वायुसेना दिवस पर सभी वायु योद्धाओं, भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को हार्दिक बधाई। भारतीय वायुसेना ने हमेशा साहस, प्रतिबद्धता और उत्कृष्टता का परिचय दिया है। हमारे वायु योद्धा हमारे आसमान की रक्षा करते हैं और आपदाओं व मानवीय मिशनों में निःस्वार्थ भाव से देश की सेवा करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय वायुसेना ने हर चुनौती का सामना करने की अपनी शक्ति, सजगता और राष्ट्रप्रेम से देश को गौरवान्वित किया है। राष्ट्रपति ने वायुसेना के भविष्य के सभी अभियानों की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी वायुसेना दिवस के अवसर पर सभी जवानों को नमन करते हुए कहा,
“भारतीय वायुसेना बहादुरी, अनुशासन और सटीकता की मिसाल है। उन्होंने कठिनतम परिस्थितियों में भी हमारे हवाई क्षेत्र की सुरक्षा में निर्णायक भूमिका निभाई है। आपदाओं के दौरान उनकी भूमिका सदैव सराहनीय रही है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि वायुसेना के कर्मठ योद्धाओं की प्रतिबद्धता, पेशेवर निष्ठा और अटूट साहस हर भारतीय को गर्व से भर देता है।
हर वर्ष 8 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना दिवस देशभर में मनाया जाता है। यह दिन न केवल भारत के आकाश रक्षकों की अदम्य वीरता को नमन करने का अवसर है, बल्कि उन शहीदों की याद में भी समर्पित है जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया।

🏔️ एवरेस्ट की बर्फ़ीली जंग: चीन की ओर से फंसे 900 पर्वतारोही सकुशल बचाए गए, तिब्बत में चला अब तक का सबसे बड़ा रेस्क्यू मिशन

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ल्हासा (एजेंसी/राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।
माउंट एवरेस्ट के चीन वाले हिस्से में सप्ताहांत के दौरान आए भीषण बर्फ़ीले तूफ़ान के बाद फंसे करीब 900 पर्वतारोही, गाइड और स्थानीय सहयोगियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। सरकारी मीडिया के अनुसार, यह अभियान तिब्बत क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े खोज एवं बचाव अभियानों में से एक माना जा रहा है।

शनिवार रात आए असामान्य रूप से शक्तिशाली बर्फ़ीले तूफ़ान ने कर्मा घाटी और आसपास के ऊँचे इलाकों को पूरी तरह ढक दिया था। उस वक्त 4,900 मीटर से अधिक ऊंचाई पर सैकड़ों ट्रेकर्स तंबुओं में फंसे हुए थे।
स्थानीय प्रशासन और बचावकर्मियों ने अथक प्रयासों के बाद सोमवार दोपहर तक करीब 350 पर्वतारोही को नीचे उतार लिया, जबकि बाकी मंगलवार तक सुरक्षित बेस कैम्प तक पहुँच गए।

सरकारी एजेंसी ‘शिन्हुआ’ की रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ पर्वतारोही हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान खतरनाक रूप से गिर जाना) से पीड़ित पाए गए, जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से माउंट एवरेस्ट दर्शनीय क्षेत्र, जिसमें कर्मा और रोंगशर घाटियाँ तथा चो ओयू पर्वत शामिल हैं, को अस्थायी रूप से आम जनता के लिए बंद कर दिया है।

इस अप्रत्याशित बर्फ़बारी ने न केवल एवरेस्ट क्षेत्र बल्कि पश्चिमी चीन के अन्य प्रांतों — झिंजियांग, किंगहाई और गांसु — को भी प्रभावित किया।
रिपोर्टों के मुताबिक, हाइपोथर्मिया और तीव्र पर्वतीय बीमारी (Acute Mountain Sickness) के कारण कम से कम एक व्यक्ति की मृत्यु की पुष्टि हुई है।

ट्रेकिंग समूह के सदस्य चेन गेशुआंग ने बताया कि “अक्टूबर आमतौर पर इस इलाके में साफ और सुहावना मौसम लाता है, लेकिन इस बार का मौसम एकदम ‘असामान्य’ और खतरनाक था।”

इसे पढ़ें –किसान, संस्कृति और संघर्ष: प्रेमचंद की रचनाओं में ग्रामीण भारत

किसान, संस्कृति और संघर्ष: प्रेमचंद की रचनाओं में ग्रामीण भारत

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हिन्दी साहित्य के यथार्थवादी युग की पहचान बने मुंशी प्रेमचंद ने भारतीय ग्राम्य जीवन को जिस गहराई और संवेदनशीलता से अभिव्यक्त किया, वह उन्हें भारतीय साहित्य का “लोक-लेखक” बनाता है। उनकी कलम से उपजा गाँव सिर्फ कथा का परिवेश नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का जीवंत चित्र है।
प्रेमचंद की रचनाओं में गाँव का जीवन अपनी सम्पूर्ण सादगी, संघर्ष और आत्मसम्मान के साथ उपस्थित है। “गोदान” के होरी में किसान की पीड़ा, ईमानदारी और जीवटता दिखती है। गरीबी, शोषण और विषमताओं से जूझता किसान उनके साहित्य का केन्द्र बन गया। उन्होंने दिखाया कि भारतीय किसान केवल दुख का पात्र नहीं, बल्कि अदम्य श्रम और नैतिक बल का प्रतीक है।
प्रेमचंद ने ग्राम्य जीवन की पृष्ठभूमि में सामाजिक विषमताओं और आर्थिक अन्याय का गहरा चित्र खींचा। “रंगभूमि” और “निर्मला” जैसी रचनाएँ वर्गीय असमानता, ज़मींदारी शोषण और सामाजिक कुरीतियों पर करारा प्रहार करती हैं। उन्होंने साहित्य को समाज सुधार का माध्यम बनाया और व्यवस्था के प्रति जागरूक दृष्टि दी।
प्रेमचंद की ग्रामीण स्त्रियाँ, धनिया, झुनिया, सोना और निर्मला, त्याग, संघर्ष और आत्मसम्मान की प्रतीक हैं। उन्होंने स्त्री को केवल करुणा का विषय नहीं, बल्कि चेतना और शक्ति का स्रोत दिखाया। धनिया जैसी स्त्री उनके साहित्य में भारतीय नारी की रीढ़ बनकर उभरती है।
प्रेमचंद ने गाँव की बोली, मुहावरों और जीवन-संस्कारों को सहज रूप में प्रस्तुत किया। उनके संवादों में अवधी और भोजपुरी की मिठास है। यही भाषा उनकी कहानियों को आम जन तक पहुँचाती है और पाठक को अपनेपन का अनुभव कराती है।
उनके पात्र संघर्ष में टूटते नहीं, बल्कि नैतिकता का सहारा लेकर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने यथार्थ के बीच भी आदर्श को जिया और दिखाया कि जीवन की सच्ची शक्ति ईमानदारी, परिश्रम और आत्मबल में निहित है।
उनके उपन्यास “गोदान”, “प्रेमाश्रम”, “कर्मभूमि” और “रंगभूमि” ग्रामीण जीवन की सच्ची झांकी प्रस्तुत करते हैं। वहीं “पूस की रात”, “कफन”, “ईदगाह” और “पंच परमेश्वर” जैसी कहानियाँ गाँव की संवेदना, करुणा और लोक चेतना की प्रतिनिधि हैं।
प्रेमचंद ने अपने साहित्य के माध्यम से भारतीय गाँव को आवाज़ दी। उनके शब्दों में किसान का दर्द, स्त्री की अस्मिता और समाज की जमीनी सच्चाइयाँ बोलती हैं। आज भी जब हम ग्रामीण भारत को समझना चाहते हैं, तो प्रेमचंद की रचनाएँ सबसे सशक्त दस्तावेज़ के रूप में हमारे सामने आती हैं।

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प्रधानमंत्री मोदी आज खोलेंगे नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का द्वार,

‘मुंबई वन’ ऐप से जुड़ेगा पूरा शहर परिवहन के नए युग की शुरुआत: मोदी आज देंगे मुंबई को तीन बड़ी सौगातें

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से शुरू हो रहे अपने दो दिवसीय महाराष्ट्र दौरे के तहत नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (एनएमआईए) के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। यह भारत का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट है, जो 19,650 करोड़ रुपये की लागत से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर विकसित किया गया है।इस हवाई अड्डे के शुरू होने से मुंबई महानगर क्षेत्र को दूसरी अंतरराष्ट्रीय उड़ान सुविधा मिलेगी। यह छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (CSMIA) के साथ मिलकर काम करेगा, जिससे हवाई यातायात का दबाव कम होगा और मुंबई को वैश्विक मल्टी-एयरपोर्ट सिटी के रूप में नई पहचान मिलेगी।प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के दौरान मुंबई मेट्रो लाइन-3 (एक्वा लाइन) के अंतिम चरण का भी उद्घाटन करेंगे। आचार्य अत्रे चौक से कफ परेड तक फैली यह मेट्रो लाइन लगभग 12,200 करोड़ रुपये की लागत से बनी है। इसके साथ ही वह 37,270 करोड़ रुपये से अधिक की कुल लागत वाली पूरी मुंबई मेट्रो लाइन-3 राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह परियोजना शहर के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में ऐतिहासिक परिवर्तन का प्रतीक होगी।इस अवसर पर प्रधानमंत्री देश का पहला एकीकृत कॉमन मोबिलिटी ऐप — ‘मुंबई वन’ (Mumbai One) भी लॉन्च करेंगे। यह ऐप 11 सार्वजनिक परिवहन ऑपरेटरों को एक प्लेटफॉर्म पर लाएगा और यात्रियों को एकीकृत टिकटिंग, यात्रा योजना, व रियल टाइम अपडेट जैसी सुविधाएँ प्रदान करेगा।प्रधानमंत्री के आगमन से पहले नवी मुंबई और मुंबई में सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता कर दिया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्थानीय पुलिस के अलावा, एसपीजी, विशेष सुरक्षा इकाई (SPU), बम निरोधक दस्ते (BDS) और ट्रैफिक पुलिस की अतिरिक्त टीमें सुरक्षा मोर्चे पर तैनात की गई हैं।मोदी हवाई अड्डे और मेट्रो उद्घाटन कार्यक्रमों के बाद एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे, जिसमें वे मुंबई के विकास से जुड़े अगले चरण की रूपरेखा रखेंगे।

अमेरिकी सीनेट ने भारत में अमेरिका के अगले राजदूत के रूप में सर्जियो गोर को नामित किया

वाशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)अमेरिकी सीनेट ने मंगलवार को सर्जियो गोर (उम्र 38 वर्ष) के नाम को भारत में अमेरिका के अगले राजदूत और दक्षिण-मध्य एशियाई मामलों के विशेष दूत के रूप में 51:47 के मत से पुष्टि कर दी। इस दौरान, अमेरिका सरकार पर जारी ‘शटडाउन’ के बीच 107 अन्य नामों की भी पुष्टि हुई।

उनमें शामिल हैं — कैलिफोर्निया के पॉल कपूर को दक्षिण एशियाई मामलों के लिए सहायक विदेश मंत्री और फ्लोरिडा की अंजनि सिन्हा को सिंगापुर में राजदूत के रूप में नामित किया गया।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने अगस्त में गोर को यह दायित्व सौंपा था और उन्हें “एक महान मित्र” करार दिया था। ट्रम्प ने कहा था कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्र के लिए, उन्हें एक भरोसेमंद और प्रेरक व्यक्ति की आवश्यकता है। गोर को लंबे समय से ट्रम्प का सहयोगी माना जाता है।

विदेश संबंध समिति की सुनवाई में गोर ने भारत को “रणनीतिक साझेदार” बताया और कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार सुधरेगा, जिससे न केवल अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी बल्कि चीन के आर्थिक प्रभाव को कुछ हद तक सीमित किया जा सकेगा। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा और सहयोग पर भी जोर दिया।

भारत में वर्तमान अमेरिकी राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने गोर की पुष्टि का स्वागत किया और इसे भारत–अमेरिका संबंधों में उच्च प्राथमिकता का संकेत बताया।

इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका भारत को अपनी विदेश नीति में महत्वपूर्ण स्थान देता है, विशेष रूप से आज के बदलते वैश्विक परिदृश्य में।

ट्रक-टैंकर की टक्कर से उठीं आग की लपटें, धमाकों से दहला इलाका

🚨 भीषण हादसा: जयपुर-अजमेर हाइवे पर रातभर गूंजते रहे धमाके

जयपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मंगलवार देर रात जयपुर-अजमेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर दूदू के समीप एक भयावह हादसे ने रात की निस्तब्धता को चीखों और धमाकों में बदल दिया। एलपीजी सिलेंडरों से लदे एक ट्रक को पीछे से आ रहे टैंकर ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कुछ ही पलों में ट्रक में आग लग गई और सिलेंडर एक के बाद एक फटने लगे। देखते ही देखते पूरा इलाका आग के गोलों से घिर गया।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सिलेंडर धमाकों की आवाज़ और शॉकवेव कई किलोमीटर दूर तक महसूस की गई। कई फटे सिलेंडर हवा में उछलकर सड़क से दूर जाकर गिरे। राजमार्ग पर लपटें इतनी ऊंची उठीं कि रात का आसमान लाल हो गया।
🚒 दमकलकर्मियों ने मारी बाज़ी, उपमुख्यमंत्री ने संभाली कमान
जानकारी मिलते ही पुलिस व दमकल की कई गाड़ियाँ मौके पर पहुँचीं। शुरुआती दौर में आग की तीव्रता के कारण ट्रक तक पहुँचना मुश्किल था, पर अथक प्रयासों से आखिरकार लपटों पर काबू पा लिया गया।
राज्य के उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा और विधायक कैलाश वर्मा तुरंत घटनास्थल पहुँचे। उन्होंने बताया कि सौभाग्य से कोई जनहानि नहीं हुई, जबकि टैंकर चालक सहित दो से तीन लोग घायल हुए हैं।

जयपुर के पुलिस महानिरीक्षक राहुल प्रकाश ने बताया कि एहतियातन एसएमएस अस्पताल को हाई अलर्ट पर रखा गया है। मौके पर प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी देर रात तक स्थिति पर नज़र बनाए रहे।
🧾 हादसे का क्रम
हादसा हुआ मोजमाबाद थाना क्षेत्र, जयपुर ग्रामीण में
एलपीजी सिलेंडर ट्रक सड़क किनारे ढाबे के बाहर खड़ा था
टैंकर ने पीछे से टक्कर मारी, तुरंत लगी आग
सिलेंडर विस्फोट से फैली अफरा-तफरी दमकल ने कई घंटों बाद आग पर पाया काबू
👁️ प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी
ढाबा संचालक विनोद ने बताया, “ट्रक का चालक खाना खाने के लिए रुका था तभी पीछे से टैंकर ने जोरदार टक्कर मारी। टक्कर के बाद धमाकों से पूरा ढाबा और राजमार्ग थर्रा गया।”
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रवि शेखावत ने कहा कि फिलहाल किसी गंभीर घायल को एसएमएस अस्पताल नहीं लाया गया, लेकिन सभी इंतज़ाम तैयार हैं।
⚠️ याद दिला गया पिछला हादसा
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष दिसंबर में भांकरोटा के पास भी इसी हाइवे पर रसोई गैस टैंकर और ट्रक की टक्कर में 19 लोगों की जान चली गई थी।

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“लापरवाही की जंजीरों में जकड़ा बागापार अस्पताल

डॉक्टर, एंबुलेंस, सुरक्षा विहीन जर्जर इमारत में डर के साए में सेवा देतीं महिला कर्मी”

महराजगंज से डॉ. सतीश पांडेय व नीरज की रिपोर्ट

महराजगंज (राष्ट्र की परम्पर) सदर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम सभा बागापार के टोला बरईठवां स्थित नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) इन दिनों अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। कभी सैकड़ों ग्रामीणों की जीवनरेखा रहा यह अस्पताल अब खंडहर में बदल चुका है।
न बाउंड्री वॉल है, न स्ट्रीट लाइट, न सुरक्षा कर्मी।सबसे बड़ी चिंता — यहां कार्यरत महिला स्वास्थ्यकर्मी हर रात भय के साए में ड्यूटी करने को मजबूर हैं।

विवेक प्रताप सिंह , उमेश चन्द्र मिश्र, राजकुमार, सोहन

🏚️ जर्जर भवन और डर की ड्यूटी
अस्पताल का भवन इतना जर्जर हो चुका है कि दीवारें दरक रही हैं।
रात्रि ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स नीलम चौहान, शीला पाल, ज्योति चौरसिया व एनएम रीना भारती भय के माहौल में अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
बाउंड्री वॉल न होने के कारण रात में उपद्रवियों का आना-जाना आम बात हो गई है।
अंधेरे में स्टाफ को अस्पताल तक पहुंचना तक मुश्किल होता है।
🚑 एंबुलेंस ठप, डॉक्टर गायब – इमरजेंसी सेवाएं ठप
अस्पताल में एंबुलेंस सुविधा महीनों से बंद पड़ी है।
रात्रि के समय कोई भी डॉक्टर अस्पताल में विश्राम नहीं करते, जिससे आपात स्थिति में मरीजों को 12 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय महराजगंज जाना पड़ता है।
कई बार रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देते हैं।
💧 दूषित पानी और खुली शौचालय टंकी बढ़ा रही बीमारी का खतरा
अस्पताल परिसर में लगा इंडिया मार्का हैंडपंप पीला और खारा पानी उगल रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, इससे पेट संबंधी बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है।वहीं, शौचालय की टंकी का ढक्कन एक वर्ष से खुला पड़ा है, जो मच्छरों और संक्रमण को न्योता दे रहा है।
👩‍⚕️ महिला कर्मियों की सुरक्षा पर सवाल
रात्रि ड्यूटी के दौरान न कोई चौकीदार तैनात है और न ही सुरक्षा गार्ड।
सरकार जहां “नारी शक्ति अभियान” के तहत महिलाओं की सुरक्षा पर जोर दे रही है, वहीं यहां की महिला स्वास्थ्यकर्मी असुरक्षित माहौल में काम करने को मजबूर हैं।
🗣️ स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाजसेवी बोले — “अब जागे प्रशासन” ग्राम प्रधान विवेक प्रताप सिंह ‘निक्कू सिंह’ का कहना है कि –“अस्पताल की व्यवस्था सुधारने के लिए विभागीय बजट की तत्काल आवश्यकता है।”
समाजसेवी उमेश चन्द्र मिश्र ने कहा –“जिला प्रशासन को लिखित शिकायत दी जाएगी। बाउंड्री वॉल, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा व्यवस्था महिलाओं की सुरक्षा के लिए जरूरी है।”
स्थानीय व्यापारी राजकुमार मोदनवाल ने कहा –“अस्पताल की इमारत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। इसका कायाकल्प किया जाना अत्यंत आवश्यक है।”
🩺 अस्पताल प्रभारी की सफाई डॉ. रामआश्रय सिंह, प्रभारी, नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बागापार ने कहा –“स्थिति से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। निर्देशानुसार कार्यवाही की जाएगी।”

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“ऐ साहिब! दिल की गहराइयों से” पुस्तक प्रकाशित -सुशी सक्सेना

भावनाओं का एक संग्रह

ग्वालियर/मध्यप्रदेश राष्ट्र की परम्परा)
सुप्रसिद्ध कवियत्री सुशी सक्सेना इंदौर मध्यप्रदेश द्वारा लिखित एक नई पुस्तक “ऐ साहिब! दिल की गहराइयों से” प्रकाशित हुई है, जिसमें शायरी, प्यार, जिंदगी और प्रेरणा से भरी कविताएं शामिल हैं। यह पुस्तक कवियत्री के दिल की गहराइयों से निकली भावनाओं का एक संग्रह है, जो पाठकों को प्रेरित और प्रभावित करने की क्षमता रखती है। इस पुस्तक में शामिल कविताएं दिल को छू लेने वाली और भावपूर्ण हैं। कवियत्री ने अपने अनुभवों और भावनाओं को शब्दों में पिरोया है, जो पाठकों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करते हैं।
सुशी सक्सेना साहित्य की हर विधा में उतनी ही सहजता से लिखती हैं कि, आप बस उनके शब्दों के पीछे भावनाओं का जो प्रवाह है उसमें बहते चले जाते हैं। यही शक्ति है एक उच्चस्तरीय बहुमुखी व्यक्तित्व की कि अपनी रचनाओं के माध्यम से आपको अपने प्रश्नों के उत्तर भी मिल जाते हैं और कभी एक नया दृष्टिकोण भी मिल जाता है।

सुशी सक्सेना जी की यह रचनाएं आपको उम्मीदों का दमन थामना सिखाती हैं। तो कभी हौसलों की उड़ान पर ले जाती है कि, अपनी समस्याओं से बाहर निकलो तो सारा आसमान तुम्हारा ही है। जीवन में आनेवाली परिस्थितियां हर किसी को विचलित करती हैं पर फीनिक्स की तरह उनसे ऊपर उठकर स्वयं को एक नया रूप, एक नया रंग देना, यह हमें खुद ही करना होता है, यह सुंदर संदेश देती हैं सुशी सक्सेना जी की रचनाएं।

सुशी सक्सेना एक प्रतिभाशाली कवियत्री हैं, जिन्होंने अपनी कविताओं से पाठकों के दिलों में जगह बनाई है। उनकी कविताएं भावपूर्ण और प्रेरणादायक हैं। “ऐ साहिब! दिल की गहराइयों से” पुस्तक का प्रकाशन एक महत्वपूर्ण घटना है, जो कविता प्रेमियों और प्रेरणा की तलाश करने वालों के लिए एक उपहार है। कविताएं सरल और समझने योग्य भाषा में लिखी गई हैं। सुशी सक्सेना की यह पुस्तक निश्चित रूप से पाठकों के दिलों को छू जाएगी और उन्हें प्रेरित करेगी।