Monday, July 6, 2026
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IND vs AUS 1st ODI Highlights: भारत को जीत नहीं दिला सकी ‘ROKO’ की वापसी, ऑस्ट्रेलिया ने 7 विकेट से हराया; मिचेल मार्श चमके

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खेल (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला रविवार, 19 अक्टूबर 2025 को पर्थ के ऑप्टस स्टेडियम में खेला गया। बारिश से बाधित इस मैच को 26-26 ओवरों का कर दिया गया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 9 विकेट पर 136 रन बनाए। डीएलएस नियम के तहत ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 131 रनों का लक्ष्य मिला, जिसे कंगारू टीम ने 21.1 ओवर में 7 विकेट शेष रहते हासिल कर लिया।

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इस मुकाबले में शुभमन गिल ने बतौर वनडे कप्तान अपना पहला मैच खेला, जबकि पैट कमिंस की अनुपस्थिति में मिचेल मार्श ने ऑस्ट्रेलिया की कमान संभाली। टीम इंडिया के दिग्गज रोहित शर्मा और विराट कोहली (ROKO) की भी इस मैच के जरिए वापसी हुई, लेकिन दोनों खिलाड़ियों की यह वापसी टीम को जीत नहीं दिला सकी।

ऑस्ट्रेलिया की ओर से कप्तान मिचेल मार्श ने 46 (52 गेंद) रन की नाबाद पारी खेली*, जिसमें 2 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। जोश फिलिप ने 37 रन और मैथ्यू रेनशॉ ने नाबाद 21 रन बनाए। भारत की ओर से अर्शदीप सिंह ने ट्रेविस हेड (8) को आउट कर शुरुआती सफलता दिलाई, लेकिन बाद में गेंदबाज प्रभाव नहीं छोड़ सके।

अब भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दूसरा वनडे मुकाबला 23 अक्टूबर (गुरुवार) को एडिलेड में खेला जाएगा।

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“फूहड़ डांस से डिग्री कॉलेज की गरिमा पर दाग! छात्र-छात्राओं के वायरल वीडियो ने प्रशासन को झकझोरा”

देवरिया के एक प्रतिष्ठित महाविद्यालय के छात्रों ने बिना अनुमति के फ्रेशर पार्टी आयोजित कर सोशल मीडिया पर मचाई सनसनी, कॉलेज प्रशासन ने कहा— “यह अमर्यादित कृत्य संस्थान की छवि को धूमिल करने वाला है।”


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने जिले के एक प्रतिष्ठित डिग्री कॉलेज की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, कॉलेज के कुछ छात्र-छात्राओं ने महाविद्यालय परिसर के बाहर एक मैरेज हॉल में ‘फ्रेशर पार्टी’ के नाम पर भोजपुरिया गीतों पर फूहड़ डांस किया। वीडियो में महाविद्यालय के नाम का बैनर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जबकि कॉलेज प्रशासन ने इस कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी थी।


कॉलेज प्रशासन के अनुसार, 06 अक्टूबर 2025 को ही नोटिस जारी कर छात्रों को चेतावनी दी गई थी कि परिसर के बाहर किसी भी प्रकार के कार्यक्रम में भाग लेने से पूर्व अनुमति आवश्यक है। बावजूद इसके कुछ छात्रों ने नियमों की अनदेखी करते हुए आपत्तिजनक कार्यक्रम आयोजित किया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

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🎓 प्राचार्य ने जताई कड़ी नाराज़गी
कॉलेज प्रशासन ने इस घटना को “अत्यंत शर्मनाक, लज्जाजनक और पीड़ादायक” बताया है। प्राचार्य ने कहा कि यह कदम न केवल महाविद्यालय की छवि को नुकसान पहुँचाने वाला है, बल्कि छात्रों के अनुशासन पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।


प्राचार्य के मुताबिक, वायरल वीडियो में दिख रहे बी.ए. द्वितीय वर्ष के कुछ छात्र पहले भी गैर-अनुशासनात्मक गतिविधियों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने नए छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की।
⚖️ गठित हुई दो जांच समितियाँ
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज स्तर पर दो अलग-अलग जांच समितियाँ गठित की गई हैं।


पहली समिति में डॉ. वाचस्पति द्विवेदी, डॉ. शैलेन्द्र राव, डॉ. अशोक कुमार सिंह और डॉ. अरविन्द कुमार शामिल होंगे।

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दूसरी समिति प्राक्टोरियल बोर्ड की होगी, जो छात्र अनुशासन और परिसर मर्यादा पर रिपोर्ट तैयार करेगी।
प्रशासन ने साफ किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
🚫 धरने और तालाबंदी का भी जिक्र
सूत्रों के अनुसार, कॉलेज में फ्रेशर पार्टी की अनुमति पहले नियमित रूप से देने से इंकार किया गया था, लेकिन छात्रों के आग्रह पर कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दी गई थी। इसके बाद भी छात्रों ने अचानक धरना और तालाबंदी कर दी।
प्राचार्य, एनसीसी अफसर और अन्य कर्मचारी कई घंटों तक कमरे में बंद रहे। ऐसा माना जा रहा है कि यह दूसरा धरना फूहड़ डांस पर कार्रवाई रोकने के दबाव के लिए आयोजित किया गया।
🔍 प्रशासन ने कहा— “जांच के बाद सख्त कार्रवाई तय”
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि किसी भी बाहरी स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में संस्थान का नाम और बैनर इस्तेमाल करना पूर्णतः अनुचित और भ्रामक है।
प्राचार्य ने कहा, “यह कॉलेज की गरिमा के विपरीत कृत्य है। ऐसे किसी भी कार्यक्रम को हमारी स्वीकृति नहीं थी। दोषियों पर कार्रवाई निश्चित है।”

आज का अंक राशिफल 20 अक्टूबर 2025: किस मूलांक पर चमकेगा भाग्य

🪔 20 अक्टूबर 2025, सोमवार का अंक राशिफल (Numerology Horoscope)


अंक 3 का दिन – बृहस्पति का प्रभाव, सफलता और संवाद का समय
आज 20/10/2025 के अंकों का योग (2+0+1+0+2+0+2+5=12→1+2=3) मूलांक 3 बनाता है। इसका स्वामी ग्रह बृहस्पति (Jupiter) है जो ज्ञान, उन्नति और नेतृत्व का प्रतीक है। आज का दिन आत्मविश्वास, योजना और रचनात्मक कार्यों के लिए शुभ रहेगा।
👉 ध्यान रखें: यह अंक राशिफल सामान्य दिशा-निर्देश है। अपनी व्यक्तिगत जन्मकुंडली अवश्य किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से दिखाएँ।

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🌞 मूलांक 1 (जन्मतिथि का कुल योग 1, 10, 19, 28)
आज का दिन: नेतृत्व और निर्णय क्षमता से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी पहचान मजबूत होगी।
सावधानी: सहयोगियों की राय जरूर सुनें।
टिप: छोटे प्रोजेक्ट शुरू करें, जल्दबाजी से बचें।
🌙 मूलांक 2 (जन्मतिथि का कुल योग 2, 11, 20, 29)
आज का दिन: संबंधों में मधुरता, सहयोग और समझदारी का समय।
सावधानी: खर्च और भावनात्मक उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण रखें।
टिप: सीमाएँ तय रखकर दूसरों की मदद करें।
🔱 मूलांक 3 (जन्मतिथि का कुल योग 3, 12, 21, 30)
आज का दिन: रचनात्मक कार्य, बातचीत और प्रस्तुति में सफलता मिलेगी।
सावधानी: आत्मविश्वास को अहंकार न बनने दें।
टिप: नया विचार या प्रोजेक्ट आरंभ करें।

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🌾 मूलांक 4 (जन्मतिथि का कुल योग 4, 13, 22, 31)
आज का दिन: कुछ अड़चनें आएंगी, पर आप मजबूत रहेंगे।
सावधानी: जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला न लें।
टिप: योजनाओं को नए सिरे से बनाएं।
🌈 मूलांक 5 (जन्मतिथि का कुल योग 5, 14, 23)
आज का दिन: नए अनुभव और यात्रा का योग है।
सावधानी: ध्यान बंटने से बचें।
टिप: नेटवर्किंग से फायदा मिलेगा।
💖 मूलांक 6 (जन्मतिथि का कुल योग 6, 15, 24)
आज का दिन: प्रेम, परिवार और सामाजिक सहयोग का दिन।
सावधानी: अत्यधिक भावुकता से बचें।
टिप: रचनात्मक कार्यों से लाभ होगा।
🕉️ मूलांक 7 (जन्मतिथि का कुल योग 7, 16, 25)
आज का दिन: आत्मविश्लेषण और मनन का समय।
सावधानी: मानसिक तनाव न बढ़ने दें।
टिप: ब्रेक लेकर खुद को ताजगी दें।
⚖️ मूलांक 8 (जन्मतिथि का कुल योग 8, 17, 26)
आज का दिन: स्थिरता और कर्मशीलता का दिन।
सावधानी: विलंब से निराश न हों।
टिप: धैर्य से कार्य करें, सफलता निश्चित है।
🔥 मूलांक 9 (जन्मतिथि का कुल योग 9, 18, 27)
आज का दिन: नई शुरुआत और सेवा का योग।
सावधानी: खर्च पर नियंत्रण रखें।
टिप: दान-सहायता करें, रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी।
✳️ आज अंक 3 (बृहस्पति) का प्रभाव जीवन में ऊर्जा, सकारात्मकता और प्रगति लाएगा। आत्मविश्वास रखें और योजनाओं पर ईमानदारी से कार्य करें।

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🪔 ज्योतिष संबंधी अस्वीकरण (Disclaimer):
यह अंक राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणना पर आधारित है। “राष्ट्र की परम्परा” इस भविष्यवाणी की पुष्टि नहीं करता। अपनी जन्मकुंडली और व्यक्तिगत सलाह के लिए किसी अनुभवी ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

किसके सितारे मुस्कुराएंगे, किसे करनी होगी सावधानी मेष से मीन तक 20 अक्टूबर का विस्तृत राशिफल —

🌞 20 अक्टूबर 2025, सोमवार का राशिफल — पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय के साथ जानें, कैसा रहेगा आज का दिन?

शुभ योग के संग सोमवार लाएगा नई शुरुआत!
आज हस्त नक्षत्र और शुभ ग्रहों की स्थिति कई राशियों के लिए नई संभावनाएं लेकर आई है।
मेष, तुला, कन्या और वृश्चिक राशि के जातक धन और व्यवसायिक मामलों में सावधानी बरतें।
देखें — करियर, शिक्षा, राजनीति, कला, प्रशासन और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आज कैसा रहेगा आपका दिन।

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♈ मेष राशि (Aries)
आज अटका हुआ धन मिलने से प्रसन्नता होगी, परंतु खर्च बढ़ सकता है।
व्यवसाय: निवेश से बचें, योजनाओं को टालें।
नौकरी/प्रशासन: अधिकारी वर्ग आपके कार्य से संतुष्ट रहेंगे।
शिक्षा: प्रतियोगी छात्र नए अवसर पाएंगे।
राजनीति: विरोधियों से सावधान रहें।
कला/संगीत: प्रेरणा मिलेगी, नए प्रोजेक्ट शुरू हो सकते हैं।
शुभ अंक: 5
शुभ रंग: लाल
पूजन: हनुमान जी को गुड़–चना अर्पित करें।
♉ वृषभ राशि (Taurus)
स्वास्थ्य में सुधार होगा। पारिवारिक माहौल प्रसन्न रहेगा।
व्यवसाय: धन लाभ के योग।
शिक्षा: उच्च शिक्षा में सफलता मिलेगी।
राजनीति: जनसंपर्क बढ़ेगा।
कला/संगीत: नई पहचान मिल सकती है।
शुभ अंक: 8
शुभ रंग: गुलाबी
पूजन: माता लक्ष्मी को कमल पुष्प चढ़ाएं।
♊ मिथुन राशि (Gemini)
विद्यार्थियों और युवाओं के लिए दिन शुभ रहेगा।
व्यवसाय: नए प्रस्ताव मिल सकते हैं।
नौकरी: पदोन्नति की संभावना।
राजनीति: जनता का समर्थन मिलेगा।
कला: रचनात्मकता में वृद्धि होगी।
शुभ अंक: 3
शुभ रंग: हरा
पूजन: गणेश जी को दूर्वा और मोदक अर्पित करें।

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♋ कर्क राशि (Cancer)
मेहनत से सफलता मिलेगी, खर्चों पर नियंत्रण रखें।
व्यवसाय: सोच-समझकर निर्णय लें।
नौकरी: वरिष्ठों से मतभेद न करें।
राजनीति: समय संतुलित रहेगा।
स्वास्थ्य: नींद पूरी करें।
शुभ अंक: 9
शुभ रंग: सफेद
पूजन: चंद्रदेव को दूध मिश्रित जल अर्पित करें।
♌ सिंह राशि (Leo)
आज भाग्य साथ देगा, निवेश से लाभ होगा।
व्यवसाय: साझेदारी से फायदा।
राजनीति: जनसमर्थन बढ़ेगा।
शिक्षा: विद्यार्थियों को पुरस्कार मिल सकता है।
कला: प्रदर्शन में सफलता।
शुभ अंक: 1
शुभ रंग: सुनहरा
पूजन: सूर्य देव को गुड़ मिले जल का अर्घ्य दें।

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♍ कन्या राशि (Virgo)
प्रेम प्रस्ताव स्वीकार हो सकता है, दिन रोमांटिक रहेगा।
व्यवसाय: बड़ी डील फाइनल।
नौकरी: पदोन्नति संभव।
राजनीति: प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
कला: मंचीय कार्य में सफलता।
शुभ अंक: 6
शुभ रंग: आसमानी नीला
पूजन: माता दुर्गा को लाल पुष्प व मिठाई अर्पित करें।
♎ तुला राशि (Libra)
आज मन प्रसन्न रहेगा। यात्रा और मनोरंजन के योग।
व्यवसाय: लाभदायक सौदे।
राजनीति: लोगों से जुड़ाव बढ़ेगा।
शिक्षा: अध्ययन में मन लगेगा।
कला: नई सोच का जन्म।
शुभ अंक: 7
शुभ रंग: सफेद
पूजन: मां सरस्वती की पूजा करें, पुस्तक दान करें।
♏ वृश्चिक राशि (Scorpio)
पुराने कार्य पूरे होंगे, पर धन लेन-देन में सावधानी।
व्यवसाय: पार्टनरशिप में विवाद संभव।
नौकरी: नए अवसर मिलेंगे।
राजनीति: संभलकर बोलें।
कला: भावनात्मक उर्जा उच्च रहेगी।
शुभ अंक: 4
शुभ रंग: गहरा लाल
पूजन: भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें।

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♐ धनु राशि (Sagittarius)
आज मित्रों का सहयोग मिलेगा।
व्यवसाय: सफलता के संकेत।
नौकरी: वरिष्ठ प्रसन्न रहेंगे।
राजनीति: प्रभाव बढ़ेगा।
कला: सृजनात्मकता में निखार।
शुभ अंक: 2
शुभ रंग: पीला
पूजन: वृहस्पति देव को केले के पेड़ में जल चढ़ाएं।
♑ मकर राशि (Capricorn)
स्वास्थ्य में सुधार की जरूरत, वाहन सावधानी से चलाएं।
व्यवसाय: सामान्य रहेगा।
नौकरी: कार्यों में सफलता।
राजनीति: विरोधियों से संभलें।
कला: एकाग्रता बढ़ाएं।
शुभ अंक: 10
शुभ रंग: काला
पूजन: शनिदेव को तेल का दीपक जलाएं।
♒ कुंभ राशि (Aquarius)
नए अवसर सामने आएंगे। पारिवारिक सहयोग मिलेगा।
व्यवसाय: विस्तार की योजना।
राजनीति: समर्थन बढ़ेगा।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा में लाभ।
कला: नवाचार की संभावना।
शुभ अंक: 11
शुभ रंग: नीला
पूजन: शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, “ॐ नमः शिवाय” का जप करें।
♓ मीन राशि (Pisces)
घर में शुभ कार्य होंगे, संतान के स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
व्यवसाय: सरकारी लाभ संभव।
नौकरी: साक्षात्कार में सफलता।
राजनीति: उन्नति के संकेत।
कला: प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
शुभ अंक: 12
शुभ रंग: हल्का पीला
पूजन: तुलसी माता की परिक्रमा करें और दीपक जलाएं।
🕉️ विशेष टिप्पणी (Disclaimer)
यह राशिफल पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय द्वारा ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है।
राष्ट्र की परम्परा इस भविष्यवाणी की पुष्टि नहीं करता।अपनी व्यक्तिगत जन्मकुंडली और निर्णय हेतु किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ से अवश्य परामर्श लें।

“20 अक्टूबर 2025 दिवाली पंचांग: कब करें लक्ष्मी पूजन, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल”

🌟 20 अक्टूबर 2025 का दिवाली विशेष पंचांग: अमावस्या तिथि, हस्त नक्षत्र और शुभ मुहूर्त का दिव्य संगम 🌟

सनातन धर्म का सबसे बड़ा पर्वदीपावलीइस वर्ष सोमवार, 2025

अक्टूबर 2025 को अत्यंत शुभ योगों में मनाया जाएगा।
इस दिन अमावस्या तिथि दोपहर 3 बजकर 44 मिनट से प्रारंभ होगी, जो अगली दोपहर तक रहेगी।
हस्त नक्षत्र रात 08:17 बजे तक रहेगा, जिसके पश्चात चित्रा नक्षत्र प्रारंभ हो जाएगा।
अभिजीत मुहूर्त — जो किसी भी कार्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है — सुबह 11:43 से दोपहर 12:28 बजे तक रहेगा।

यह दिवाली का दिन कन्या राशि में चंद्रमा के संचार और तुला राशि में सूर्य के प्रवेश के साथ दिव्य ऊर्जा का संचार करेगा।
आइए जानें 20 अक्टूबर 2025, सोमवार का संपूर्ण हिन्दू पंचांग, शुभ-अशुभ काल और मुहूर्रात

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🪔 पंचांग – 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार)
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
चन्द्र मास: अमांत – आश्विन | पूर्णिमांत – कार्तिक
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: चतुर्दशी तिथि दोपहर 03:45 PM तक, उसके बाद अमावस्या तिथि
वार: सोमवार
नक्षत्र: हस्त नक्षत्र 08:16 PM तक, उसके बाद चित्रा नक्षत्र
योग: वैधृति योग 02:34 AM तक, फिर विष्कुम्भ योग
करण: शकुनि 03:45 PM तक, फिर चतुष्पद और तत्पश्चात नाग करण

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🌅 सूर्य और चंद्र का समय
सूर्योदय: सुबह 6:29 AM
सूर्यास्त: शाम 5:53 PM
चन्द्रोदय: सुबह 5:15 AM
चन्द्रास्त: शाम 5:10 PM
अयन: दक्षिणायन
ऋतु: शरद

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🔯 शुभ काल (Auspicious Timings)
अभिजीत मुहूर्त: 11:48 AM – 12:34 PM
अमृत काल: 01:39 PM – 03:25 PM
ब्रह्म मुहूर्त: 04:53 AM – 05:41 AM
अमृत सिद्धि योग: 19 अक्टूबर 05:49 PM से 20 अक्टूबर 06:29 AM तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: 19 अक्टूबर 05:49 PM से 20 अक्टूबर 06:29 AM तक
⚠️ अशुभ काल (Inauspicious Timings)
राहु काल: 07:55 AM – 09:20 AM
यमगण्ड काल: 10:46 AM – 12:11 PM
कुलिक काल: 01:37 PM – 03:02 PM
दुर्मुहूर्त: 12:34 PM – 01:19 PM एवं 02:51 PM – 03:36 PM
वर्ज्यम्: 05:10 AM – 06:57 AM
🌠 ग्रह स्थिति
सूर्य: तुला राशि
चन्द्रमा: कन्या राशि (पूरे दिन-रात)
योग: वैधृति से विष्कुम्भ में परिवर्तन
आनन्दादि योग: वज्र 08:16 PM तक, फिर मुद्गर
🙏 त्योहार और व्रत
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
दीपोत्सव (महामाया पूजा, लक्ष्मी पूजन, दीपदान)
पितृ तर्पण का समापन
🌕 विशेष जानकारी – दीपावली 2025 का शुभ समय
इस वर्ष दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार) को मनाया जाएगा।
अमावस्या तिथि दोपहर 3:44 बजे से प्रारंभ होगी, और हस्त नक्षत्र रात 08:17 बजे तक रहेगा, उसके पश्चात चित्रा नक्षत्र लग जाएगा।
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 से दोपहर 12:28 बजे तक रहेगा।
यह समय लक्ष्मी पूजन, दीपदान और नवीन कार्यारंभ के लिए अत्यंत शुभ रहेगा। इस गणना या पंचाग को RKPNews पुष्टि नहीं करता सुझाव मात्र दे रहा।

मधुसूदन बने बीएसएस परशुराम सेना के जिला सचिव जबकि अमित कुमार जिला उपाध्यक्ष

मऊ(राष्ट्र की परम्परा)l बीएसएस परशुराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. श्रीनाथ पाण्डेय एवं प्रदेश अध्यक्ष पं. अजीत कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में, संगठन विस्तार के क्रम में मऊ जनपद से मधुसूदन तिवारी पुत्र स्व. कमलेश तिवारी, ग्राम लाडनपुर, कोपागंज को जिला सचिव पद पर नियुक्त किया गया।
जबकि अमित कुमार पाण्डेय, पुत्र अजय कुमार पाण्डेय, ग्राम डुमरांव, तहसील सदर को जिला उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रदेश अध्यक्ष पं. अजीत कुमार पाण्डेय ने नियुक्ति पत्र जारी करते हुए कहा कि दोनों पदाधिकारियों से अपेक्षा है कि वे ब्राह्मण समाज की एकजुटता एवं संगठन की मजबूती के लिए पूर्ण समर्पण भाव से कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि बी.एस.एस. परशुराम सेना का उद्देश्य एक चरित्रवान, संस्कारित एवं संघीय विचारधारा से प्रेरित समाज का निर्माण करना है।
नियुक्ति के बाद दोनों पदाधिकारियों ने संगठन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे ब्राह्मण समाज के उत्थान, बहन-बेटियों के सम्मान और समाज की एकता के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।

परम्परागत कुश्ती दंगल में दिखा पहलवानों का दमखम

बघौचघाट, देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l पथरदेवा विकासखंड के हनुमान चौतरा मठिया गांव में रविवार को परम्परागत रूप से आयोजित एकदिवसीय विशाल कुश्ती दंगल में क्षेत्र के नामी और उभरते पहलवानों ने अपनी ताकत और तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया। अखाड़े में पहलवानों के दांव-पेंच पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पथरदेवा नगर पंचायत अध्यक्ष कमलेश उर्फ क्रांति सिंह रहे। उन्होंने शुभारंभ के अवसर पर पहलवानों की एक जोड़ी का हाथ मिलवाकर दंगल की शुरुआत की। अपने संबोधन में अध्यक्ष क्रांति सिंह ने कहा कि कुश्ती भारत की माटी और संस्कृति से जुड़ा परम्परागत खेल है, जो शरीर और मन दोनों को सशक्त बनाता है। उन्होंने आयोजन समिति के सभी सदस्यों को धन्यवाद देते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से ग्रामीण खेलों को बढ़ावा मिलता है और नई पीढ़ी में खेल के प्रति रुचि पैदा होती है। साथ ही उन्होंने उपस्थित जनसमूह को दीपावली की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।

दंगल के निर्णायक की भूमिका कैलाश पहलवान और केदार पहलवान ने निभाई। आयोजन में मुख्य रूप से भाजपा मंडल अध्यक्ष हरीश शाही उर्फ जीपु शाही, जुगुल किशोर तिवारी, कुवर राय, व्यास ठाकुर, पूर्व प्रधान रामनारायण कुशवाहा, राजिंदर यादव, सभासद संजीव सिंह और रोहित सिंह सहित क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित रहेl

“कुश्ती की अखाड़े से राज्यपाल भवन तक: 20 अक्टूबर के दिन यूँ हुआ था भारत-सेवा का सफर”

भावनाओं की लकीरों में बँधा एक दिन – 20 अक्टूबर


वह तारीख जब हर साल हमें तीन ऐसे व्यक्तियों की याद आती है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में देश की सेवा की, समाज को प्रेरित किया और सिकुड़ती हुई सीमाओं को लांघते हुए अपने हाथों में नेतृत्व की मशाल थाम ली —
दादू चौगुले दत्तात्रेय (पहलवान) 20 अक्टूबर 2019 को चले गए, निरंजन नाथ वांचू (वरिष्ठ प्रशासक व राज्यपाल) 20 अक्टूबर 1982 को अवसान हुआ और एच. सी. दासप्पा (क्रांतिकारी-नेता) 20 अक्टूबर- के दिन नहीं, लेकिन 29 अक्टूबर 1964 को नश्वर हुए; फिर भी 20 अक्टूबर को मृत्यु-दिन के रूप में प्रायः स्मरण किया जाता है।
आइए, इस लेख में इस दिन से जुड़े इन तीन गौरवपूर्ण व्यक्तियों पर नजर डालते हैं — उनकी पृष्ठभूमि, शिक्षा-जीवन, योगदान और जीवन-खण्ड — ताकि हम उन्हें न केवल एक तारीख पर याद करें, बल्कि उनके प्रेरक चरित्र को भी आत्मसात कर सकें।

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  1. दादू चौगुले दत्तात्रेय
    दादू चौगुले दत्तात्रेय महाराष्ट्र के कोल्हापूर जिले के कुशल पहलवान थे, जिनका नाम भारतीय कुश्ती के सुनहरे पन्नों में शुमार है। इनके जन्म-साल को सटीक रूप से ज्ञात नहीं है (लगभग 1946), परंतु उन्होंने 20 अक्टूबर 2019 को अपनी अंतिम सांस ली।
    जन्म-स्थान एवं पृष्ठभूमि: दादू का जन्म महाराष्ट्र के कोल्हापूर जिले में हुआ था, एक किसान-परिवार में। कोल्हापूर की मिट्टी किंवदंतियों को जन्म देती रही है, और इस माहौल ने उन्हें पारंपरिक कुश्ती (मट-कुश्ती) की ओर प्रेरित किया।
    शिक्षा एवं प्रशिक्षण: उन्होंने विशुद्ध शैक्षणिक शिक्षा का विवरण कम ही दिया है, लेकिन पहलवान के रूप में उनकी प्रशिक्षण कहानी प्रेरणादायक है। उन्होंने कोल्हापूर के प्रसिद्ध मोतीबाग तलीम (अखाड़ा) में प्रशिक्षण लिया।
    प्रमुख उपलब्धियाँ:
  • 1970 और 1971 में “महाराष्ट्र केसरी” का खिताब जीता।
  • 1973 में “रुस्तम-ए-हिंद” और “महान भारत केसरी” जैसे दिग्गज शीर्षक प्राप्त किए।
  • 1974 के ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स (न्यूज़ीलैण्ड) में हैवीवेट श्रेणी में रजत पदक जीता।
  • 2018 में भारत सरकार द्वारा “ध्यानचंद पुरस्कार” से सम्मानित।
    योगदान एवं विरासत: दादू ने न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल की, बल्कि उन्होंने महाराष्ट्र की पारंपरिक कुश्ती-संस्कृति को नई ऊर्जा दी। कोल्हापूर के अखाड़ों में युवाओं को प्रेरित करना, ग्रामीण हिस्सों से प्रतिभाओं को लाना — ये उनकी नींव-गत क्रियाएँ थीं। उनका निधन कोल्हापूर में हुआ, जब वे अस्पताल में अस्थमा की शिकायत के बाद हार्ट अटैक से ग्रस्त हुए।
    उनकी कहानी हमें याद दिलाती है कि कैसे एक किसान-परिवार का बेटा, सख्ती और समर्पण से राष्ट्रीय मंच पर उभरा — और कैसे पहलवानों का जीवन केवल कुश्ती नहीं, बल्कि अनुशासन, देश-प्रेम और सामाजिक प्रेरणा का स्रोत हो सकता है।
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  1. निरंजन नाथ वांचू
    निरंजन नाथ वांचू (आमतौर पर “वंचू/वांचू” लिखा गया) भारतीय प्रशासनिक सेवा (आई.सी.एस) के वरिष्ठ अधिकारी और बाद में राज्यपाल रहे। इनका जन्म 1 मई 1910 को सतना (मध्य प्रदेश) में हुआ था।
    जन्म-स्थान एवं पृष्ठभूमि: सतना, मध्य प्रदेश (तत्कालीन ब्रिटिश भारत) उनका मूल है। वहाँ से प्रारंभ हुआ उनका सफर, बाद में उन्हें भारत के बड़ेल भूमिकाओं तक ले गया।
    शिक्षा एवं उछाल: वांचू ने सबसे पहले नाउगाँव (मध्य प्रदेश) में प्राथमिक शिक्षा ली (1916–1920) और बाद में कैल्कुलेटेड ट्रैक पर गए: गवर्नमेंट कॉलेज, लाहौर; फिर किंग्स कॉलेज, कैम्ब्रिज (यू.के) और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज, यू.के.
    कार्यकाल एवं नेतृत्व:
  • 1934 में आई.सी.एस. में चयनित होकर बिहार में सब-कलेक्टर के रूप में सेवा शुरू की।
  • 1948–57 में रक्षा उत्पादन में चीफ कंट्रोलर, 1960–61 में वित्त मंत्रालय में सचिव, 1965-70 में बोकारो स्टील संयंत्र अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
  • 1 अप्रैल 1973 से 10 अक्टूबर 1977 तक केरल के राज्यपाल रहे।
  • 14 अक्टूबर 1977 से 16 अगस्त 1978 तक मध्य प्रदेश के राज्यपाल रहे।
    योगदान एवं प्रभाव: वांचू का प्रशासनिक करियर विविध और गहरा था: उन्होंने रक्षा-उद्योग, बजट-वित्त, राज्य-खनन तथा उद्योग विकास जैसे क्षेत्रों में योगदान दिया। राज्यपाल के रूप में उन्होंने केरल और मध्य प्रदेश में संवैधानिक नेतृत्व के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और प्रशासनिक अनुभव ने उन्हें आधुनिक भारत के बुनियादी ढाँचे तथा राज्य-प्रशासन की चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाया।
    उनका 20 अक्टूबर 1982 को निधन हुआ।
    उनकी कहानी यह सिखाती है कि किस तरह शिक्षा, समर्पण और प्रशासनिक कुशलता से व्यक्ति राष्ट्र-सेवा के उच्च पायदान तक पहुँच सकता है — गाँव से विश्व-कॉलेज और राज्य-मुख्यपदों तक का सफर।
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  1. एच. सी. दासप्पा
    एच. सी. दासप्पा (Hirallli Chenniah Dasappa) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक सक्रिय योद्धा एवं बाद में राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिज्ञ थे। इनका जन्म 5 दिसंबर 1894 (कुछ स्रोतों में 5 दिस॰) को कूर्ग (अब कर्नाटक) के मर्केरा में हुआ था।
    जन्म-स्थान एवं पृष्ठभूमि: मर्केरा, कूर्ग (तत्कालीन ब्रिटिश भारत) आज के कर्नाटक राज्य का हिस्सा। इन्हें अपने समय में न्याय, सामाजिक बदलाव और राजनीतिक चेतना के क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जाता था।
    शिक्षा एवं प्रारंभिक जीवन: उन्होंने कॉलेज शिक्षा ली (विविध स्रोतों में तर्क हैं) और वकालत की पृष्ठभूमि भी रही।
    स्वतंत्रता संग्राम एवं सार्वजनिक सेवा: दासप्पा ने कांग्रेस-संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई। आज़ादी के बाद उन्होंने संसद में लोकसभा सदस्य के रूप में (1957 और 1962 में चुनाव) कार्य किया।
    21 सितंबर 1963 से 8 जून 1964 तक वे रेल मंत्री रहे।
    योगदान एवं सामाजिक पहल: दासप्पा ने समाज में न्याय, शिक्षा और विकास के लिए काम किया। उन्होंने राजनीतिक जीवन के साथ-साथ सामाजिक सुधारों का रास्ता चुना — और नए भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका अदा की। उनका निधन 29 अक्टूबर 1964 को हुआ था।
    उनका जीवन यह प्रमाणित करता है कि स्वतंत्रता-उपरांत भारत के निर्माण में सिर्फ राजनैतिक भूमिका नहीं, बल्कि स्व-शिक्षा, सामाजिक चेतना और लोक-सेवा का समन्वय आवश्यक था।
    समापन विचार
    20 अक्टूबर की तारीख हमें याद दिलाती है कि देश की विविध-भूमियों से आने वाले लोग — कुश्ती के अखाड़े से, प्रशासनिक चक्रवात से, या स्वतंत्रता-संग्राम के रणभूमि से — कैसे अपनी विशिष्ट पहचान बना सकते हैं। दादू चौगुले ने देश को गौरव दिलाया, निरंजन नाथ वांचू ने संविधान-सेवा में योगदान दिया, और एच. सी. दासप्पा ने सामाजिक-राजनीतिक उत्साह का प्रतीक बने।
    इनकी-इनकी कहानियाँ हमें प्रेरित करती हैं कि जब लक्ष्य, समर्पण और देश-भक्ति साथ हों, तो सीमाएँ धुंधली पड़ जाती हैं। आइए हम इन तीनों की स्मृति में यह प्रण लें — अपने-अपने क्षेत्र में कुछ अच्छा करें, समाज-के लिए कुछ दें, और आने-वाले पीढ़ियों के लिए रास्ता आसान बनाएं।

दीपावली पर्व को लेकर डीएम ने किया पटाखा बाजार का निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिए कड़े निर्देश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। दीपावली पर्व के अवसर पर सुरक्षा और शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने रविवार को मण्डी समिति, फरेन्दा में संचालित पटाखा बाजार का स्थलीय निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पटाखा बाजार में अग्निशमन प्रणाली, साफ-सफाई, दुकानों की व्यवस्था एवं सुरक्षा प्रबंधों का गहन अवलोकन किया। उन्होंने मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाजार परिसर में अग्निशमन यंत्र, बालू, पानी की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही नगर पंचायत की पानी टंकी और स्प्रे टैंकर को भी मौके पर उपलब्ध रखने का आदेश दिया ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल नियंत्रण पाया जा सके।
उन्होंने अधिशासी अधिकारी नगर पालिका को परिसर की नियमित साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए तथा मुख्य अग्निशमन अधिकारी को एक फायर टेंडर मौके पर तैनात करने का आदेश दिया। उन्होंने पटाखा व्यापारियों से फायर एक्सटिंग्यूशर चलवाकर देखा और दुकानों के आस-पास ज्वलनशील पदार्थ जैसे सिगरेट, माचिस आदि दूर रखने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी दुकानदार केवल अधिकृत कंपनियों के पटाखे ही बेचें, अवैध या अत्यधिक विस्फोटक पटाखों की बिक्री बिल्कुल न की जाए।उन्होंने यह भी कहा कि दुकानें केवल निर्धारित स्थानों पर और निर्धारित मानकों के अनुसार ही लगाई जाएं तथा विद्युत संयोजन पूरी तरह सुरक्षित होना चाहिए।
पुलिस एवं अग्निशमन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे बाजार की सुरक्षा व्यवस्था पर नियमित निगरानी रखें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
अंत में उन्होंने जनता से अपील की कि दीपावली का त्योहार सुरक्षित और संयमित ढंग से मनाएं, पटाखों के प्रयोग में सावधानी बरतें और स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।

संत पचौरी जी महाराज ने श्रीकृष्ण लीला के दिव्य प्रसंगों से अष्टम दिवस को किया अविस्मरणीय

सुदामा चरित्र, नव योगेश्वर उपाख्यान और परीक्षित मोक्ष का भावपूर्ण वर्णन

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला मुख्यालय के औद्योगिक अस्थान में चल रहे नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का अष्टम दिवस श्रद्धा और भक्ति के उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कथा का आयोजन भारत-तिब्बत समन्वय संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं हीरालाल रामनिवास इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य रामकुमार सिंह के सौजन्य से किया गया है।
वृंदावन धाम से पधारे सुप्रसिद्ध कथा वाचक राष्ट्रीय संत पचौरी जी महाराज ने अष्टम दिवस की कथा में भगवान श्रीकृष्ण के 16 हजार 108 विवाह, सुदामा चरित्र, नव योगेश्वर उपाख्यान, चौबीस गुरुओं के उपदेश और राजा परीक्षित मोह की कथा का विस्तार से वर्णन किया।
महाराज ने कहा कि जब नरकासुर का वध हुआ, तब भगवान श्रीकृष्ण ने बंदीगृह में कैद 16 हजार 108 राजकुमारियों का उद्धार किया और उनके सम्मान की रक्षा के लिए उनसे विवाह किया। यह प्रसंग दर्शाता है कि भगवान सदैव अपने भक्तों और अबलाओं के मान-सम्मान की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं।
सुदामा चरित्र का उल्लेख करते हुए महाराज ने कहा कि सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता सच्चे प्रेम और निःस्वार्थ भक्ति का प्रतीक है। निर्धन सुदामा की भेंट को भगवान ने भाव से स्वीकार किया, जो यह दर्शाता है कि भगवान भाव में बसते हैं, भेंट में नहीं।
नव योगेश्वर उपाख्यान के माध्यम से महाराज ने बताया कि भगवान दत्तात्रेय के नौ योगेश्वर स्वरूपों ने राजर्षि निमि को आत्मा, परमात्मा और भक्ति का ज्ञान दिया। उन्होंने कहा कि मोक्ष केवल ज्ञान और भक्ति के समन्वय से संभव है।
चौबीस गुरुओं के प्रसंग में संत पचौरी जी महाराज ने कहा कि भगवान दत्तात्रेय ने सृष्टि के हर तत्व से कुछ न कुछ सीखकर उसे अपना गुरु माना। इससे यह शिक्षा मिलती है कि संसार का हर दृश्य और हर जीव किसी न किसी रूप में हमारा शिक्षक है।
कथा के अंतिम भाग में राजा परीक्षित मोह प्रसंग का उल्लेख करते हुए महाराज ने कहा कि मृत्यु के सातवें दिन परीक्षित ने श्रीशुकदेव जी से श्रीमद्भागवत कथा सुनकर मोह और माया से विमुक्त होकर परम मुक्ति प्राप्त की। श्रद्धालु कथा में तल्लीन होकर भक्ति रस में सराबोर हो गए।
कथा को विश्राम देते हुए संत पचौरी जी महाराज ने कहा कि

“श्रीमद्भागवत कथा केवल श्रवण का विषय नहीं, बल्कि आत्मज्ञान और जीवन उत्थान की कुंजी है।”


इस अवसर पर कथा परीक्षित उर्मिला सिंह, रामकुमार सिंह, डॉ. के.के. सिंह, रमाशंकर सिंह, डॉ. श्याम कुमार सिंह, डॉ. पवन कुमार सिंह, एमएलसी प्रतिनिधि इंजीनियर सुधांशु सिंह, शंभू त्रिपाठी, प्रदीप सिंह सिसोदिया, मुन्नी देवी, अयांश, रेयांश, भाजपा नेता गौरव निषाद सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

“विविधता में एकता: 20 अक्टूबर को जन्में आठ प्रेरक व्यक्तित्व”

20 अक्टूबर के हीरो: एक भावनात्मक यात्रा उन महान आत्माओं से जो जन्में इस दिन


2000 से भी ऊपर वर्षों के इतिहास में, 20 अक्टूबर का दिन चुनिंदा प्रकार से यादगार रहा है —एक ओर वहाँ क्रिकेट के मैदान में छक्कों की गूंज रही है, तो दूसरी ओर न्याय के मंदिर में देवी-पुरुष समानता की प्रतिमाएँ गढ़ी गईं। आइए आज हम इस दिन जन्मे आठ महान व्यक्तित्वों-–उनके जन्म-स्थान, शिक्षा, योगदान तथा प्रेरक जीवन-कहानी के माध्यम से–एक प्रभावित करने वाला लेख प्रस्तुत करें।

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1.Krishnappa Gowtham (20 अक्टूबर 1988)

1988 में कर्नाटक के बैंगलोर में जन्मे Krishnappa Gowtham ने क्रिकेट के रंग-मंच पर अपने जुझारूपन और धैर्य से नाम कमाया।

  1. जन्म-स्थान। बैंगलोर, कर्नाटक।
  2. शिक्षा-प्रारंभ। स्कूली-स्तर पर क्रिकेट में सक्रिय, जूनियर स्तर पर चयन हुआ और 2012 में प्रथम श्रेणी (रंजन ट्रॉफी) में पदार्पण किया।
  3. प्रमुख योगदान।
  4. 2016-17 रंजन ट्रॉफी में लगातार दो पाँच विकेट-हॉल हासिल किए, जिससे कर्नाटक को जीत दिलाई।
  5. आईपीएल में रिकॉर्ड रकम (₹ 9.25 करोड़) में बिना अंतरराष्ट्रीय अनुभव के खरीदे गए।
  6. जीवन-दृष्टि। छोटे-से- मैदान से निकल कर बड़े-दर्शकों के लिए प्रदर्शन-वाले रंग में धुलने तक की यात्रा, यह हमें बताती है कि धैर्य, लगन और अवसर की प्रतीक्षा कैसे सफलता की ओर ले जाती है।
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  8. 2.Leila Seth (20 अक्टूबर 1930)
    1930 में उत्तर-प्रदेश के लखनऊ में जन्मी Leila Seth ने भारत के न्यायिक इतिहास में अपनी छाप छोड़ी। जन्म-स्थान। लखनऊ, उत्तर-प्रदेश।
    शिक्षा-प्रारंभ। लवरेतो कॉन्वेंट, दार्जिलिंग में शिक्षा ली, बाद में लंदन में बार परीक्षा पास की और भारत में न्यायाधीश बनीं।
    प्रमुख योगदान।
    1978 में दिल्ली हाई कोर्ट की प्रथम महिला न्यायाधीश बनीं।
    1991 में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट की प्रथम महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं।
    15वीं कानून-आयोग की सदस्य- रही और हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) में बेटियों को समान हक़ दिलाने में भूमिका निभाई।
    जीवन-दृष्टि। जहाँ सामाजिक सीमाएँ थीं, वहाँ उन्होंने न्याय की ढाल थामी। उनका जीवन यह संदेश देता है—यदि अधिकार और अभ्यास दृढ़ हों तो सामाजिक-प्रेरणा बदल सकती है।
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  10. 3.Virender Sehwag (20 अक्टूबर 1978)
    1978 में दिल्ली में जन्मे Virender Sehwag भारतीय क्रिकेट के इतिहास में ‘हल्लामचाँल’ के रूप में याद किए जाते हैं।
    जन्म-स्थान। दिल्ली।
    शिक्षा-प्रारंभ। दिल्ली के विद्यालयों में पढ़े-लिखे; क्रिकेट-की दुनिया में आगमन किया और घरेलू क्रिकेट से शुरुआत की।
    प्रमुख योगदान।
    टेस्ट में 319 रन की भारतीय सर्वोच्च पारी और तेज़ ट्रिपल सेंचुरी। 2007 में T20 वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा।
    शिक्षा-क्षेत्र में भी सक्रिय—उनका अपना विद्यालय “Sehwag International School” झज्जर में स्थापित।
    जीवन-दृष्टि। जब बल्लेबाज़ी में निरंतर रणनीति खेलने वालों की होती थी, उन्होंने अटैक का विकल्प चुना और साबित किया कि जीवन में ‘व्यक्तित्व’ को स्वीकारना भी जीत का हिस्सा हो सकता है।
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  12. 4.Kumar Sanu (20 अक्टूबर 1957)
    1957 में कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में जन्मे कुमार सानु हिन्दी-सिनेमा के उस युग के पार्श्वगायक हैं जिन्होंने गीतों की दुनिया में धूम मचाई। जन्म-स्थान। कोलकाता, पश्चिम बंगाल।
    शिक्षा-प्रारंभ। संगीत-परिवार में जन्मे—संघर्ष के बाद उन्होंने 1990 के दशक में लगातार पाँच वर्षों तक फिल्मफेयर पुरस्कार जीते।
    प्रमुख योगदान।
    1990-95 के बीच पाँच साल लगातार फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक पुरस्कार।
    2009 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित। जीवन-दृष्टि। संगीत में महारथ हासिल करना कोई आसान बात नहीं—लेकिन उनकी कहानी यह बताती है कि निरंतरता, आत्म-विश्वास और समय की समझ से नया मुकाम पाया जा सकता है।
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  14. 5.Siddhartha Shankar Ray (20 अक्टूबर 1920)
    1920 में कोलकाता (तत्कालीन वेस्ट बंगाल) में जन्मे श्री Ray ने कानून और राजनीति के क्षेत्र में गहरी छाप छोड़ी।
    जन्म-स्थान। कोलकाता, बंगाल प्रेसिडेंसी, ब्रिटिश भारत।
    शिक्षा-प्रारंभ। प्रेसिडेंसी कॉलेज, कोलकाता तथा लॉ कॉलेज से शिक्षा-प्राप्त, बाद में बिडेन चंद्र राय शासन में विभिन्न पदों पर कार्य किया।
    प्रमुख योगदान।
    1972-77 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे।
    1992-96 तक भारत के अमेरिका-राजदूत।
    जीवन-दृष्टि। राजनीति-कानून-कूटनीति का संयोजन उनके जीवन-पथ में देखने-लायक है—यह दर्शाता है कि व्यक्तित्व-विविधता से सेवाभाव को अधिक सार्थक बनाया जा सकता है।
  15. 6.V. S. Achuthanandan (20 अक्टूबर 1923)
    1923 में केरल के पन्नप्रा (अलप्पुझा जिला) में जन्मे वी. एस. अच्युतानंदन ने जन-आंदोलन, मजदूर-संघ और राजनीति के माध्यम से कल्याण-राज की परिकल्पना को जीवंत किया।
    जन्म-स्थान। पन्नप्रा (अलप्पुझा), त्रावणकोर (अब केरल)।
    शिक्षा-प्रारंभ। 7वीं कक्षा तक शिक्षा-ली, बाद में मजदूर संगठन-कार्य से जुड़े और कम्युनिस्ट आंदोलन में सक्रिय हुए।
    प्रमुख योगदान।
    2006-11 तक केरल के मुख्यमंत्री।
    पन्नप्रा-वायलर विद्रोह में सक्रिय भागीदारी।
    जीवन-दृष्टि। सीमित संसाधनों से निकलकर बड़ी-से-बड़ी जिम्मेदारियों को अपनाना, यह उनकी यात्रा-कहानी हमें याद दिलाती है कि संघर्ष से ही महानता का आरम्भ होता है।
    7.Govardhanram Madhavram Trivedi आधुनिक गुजराती साहित्य के स्तंभ रहे।
    जन्म-स्थान। (विशिष्ट स्थल विकल्प उपलब्ध नहीं)
    शिक्षा-प्रारंभ। साहित्य-चिन्तन में रूचि-विकास और साहित्य-लेखन में उन्होंने सक्रीय योगदान दिया।
    प्रमुख योगदान।
    गुजराती कथा-साहित्य, आलोचना-लेखन, चरित्र-लेखन में अग्रणी।
    आधुनिक गुजराती चिंतक-साहित्यकार के रूप में सम्मानित।
    जीवन-दृष्टि। भाषा-साहित्य के प्रति समर्पण यह दर्शाता है कि सांस्कृतिक आधारों को मान्यता देने से सम्पूर्ण समाज-चेतना का विकास हो सकता है।
  16. 8.Viscount Palmerston (Henry John Temple) (20 अक्टूबर 1784)
    1784 में ब्रिटेन में जन्मे हेनरी जॉन टेम्पल, तीसरे हॉलैंड डच के वायसरायों की पीढ़ी से थे, जिन्होंने 19वीं सदी के मध्य में दो-बार यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री रहे।
    जन्म-स्थान। इंग्लैंड।
    शिक्षा-प्रारंभ। एक ब्रिटिश राजनेता के रूप में उन्होंने विदेश-नीति एवं आंतरिक शासन के क्षेत्रों में विशिष्ट भूमिका निभाई।
    प्रमुख योगदान।
    ब्रिटेन की विदेश-नीति को सक्रिय और प्रभाव-शाली बनाया।
    19वीं शताब्दी में यूरोपीय राजनीति-परिवर्तन में उनकी भागीदारी उल्लेखनीय।
    जीवन-दृष्टि। देश-पराय दृष्टियों से कार्य-क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को स्वीकार करना, यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि एक-व्यक्ति-की पहल कैसे वैश्विक असर पैदा कर सकती है।
    🌟 20 अक्टूबर को जन्मे ये व्यक्तित्व — खेल, न्याय, संगीत, साहित्य, राजनीति एवं सामाजिक आंदोलन— विविध-क्षेत्र में प्रेरणा के दायरे फैलाते हैं। इनमें से कुछ ने सीमित संसाधनों से शुरुआत की, कुछ ने प्रथम स्थान पर पहुँचकर नई राह बनाई, और कुछ ने नियम-बाधाओं को तोड़कर बदलाव के वाहक बने। हमें ये याद रखना चाहिए कि जन्म-दिन सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि उस तिथि को जन्म लेने वाली संभावना-यात्रा का प्रतीक है।
    यदि हम इनसे सीखें—लगन, धैर्य, सेवा-भाव और निडरता—तो हमारा हर दिन किसी नोबल-उपलब्धि की ओर ले जा सकता है।

देवरिया बस अड्डे पर महिला के पर्स से लाखों के गहने गायब, चोरों ने भीड़ का उठाया फायदा, परिवार ने लगाई कार्रवाई की गुहार

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। रविवार की दोपहर देवरिया शहर के व्यस्त बस अड्डे पर उस समय हड़कंप मच गया जब एक महिला के पर्स से अज्ञात चोर लाखों रुपये के कीमती गहने लेकर फरार हो गए। घटना के बाद परिजनों ने तत्काल देवरिया कोतवाली पहुंचकर शिकायत दर्ज कराते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पूर्व चेयरमैन वीरेंद्र गुप्ता ने बताया कि पीड़िता किसी निजी कार्य से बस अड्डे के पास पहुंची थी। तभी पहले से घात लगाए चोरों ने भीड़भाड़ का फायदा उठाते हुए पर्स से गहने गायब कर दिए। उन्होंने पुलिस प्रशासन से इस घटना का जल्द पर्दाफाश कर आरोपितों को गिरफ्त में लेने की मांग की।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बस अड्डे और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपितों की पहचान की जा सके। घटना के बाद यात्रियों में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

मानव संपदा पोर्टल पर लंबित अवकाश निस्तारण में लापरवाही पर प्रधानाध्यापकों को नोटिस

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l विकासखंड देवरिया सदर के खंड शिक्षा अधिकारी देव मुनि वर्मा ने मानव संपदा पोर्टल पर शिक्षकों के अवकाश निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले प्रधानाध्यापकों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस पोर्टल पर ही अपलोड किया गया है, जिसका जवाब तीन कार्य दिवस के भीतर उसी माध्यम से देना अनिवार्य किया गया है।

कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, पूर्व में कई बार पत्र भेजे जाने और मासिक समीक्षा बैठकों में निर्देश दिए जाने के बावजूद अनेक विद्यालयों में शिक्षकों के अवकाश लंबे समय से लंबित हैं। साथ ही, छात्रों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में भी लापरवाही बरती जा रही है।

खंड शिक्षा अधिकारी ने इसे विभागीय आदेशों का गंभीर उल्लंघन बताया है और सभी प्रधानाध्यापकों को चेतावनी दी है कि वे तत्काल लंबित अवकाशों का निस्तारण करें एवं छात्रों की उपस्थिति नियमित रूप से दर्ज करें।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयावधि में ऑनलाइन स्पष्टीकरण प्रस्तुत न करने पर संबंधित प्रधानाध्यापकों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही हेतु प्रकरण उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा। इस स्थिति में समस्त जिम्मेदारी संबंधित प्रधानाध्यापक की होगी।

जिलाध्यक्ष नीतू सिंह ने भाजपा कार्यालय पर कार्यकर्ताओं संग मनाई दीपावली

प्रकाश पर्व एकता और सद्भाव का प्रतीक: नीतू सिंह

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। दीपावली की पूर्व संध्या पर भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय में उमंग और उत्साह का माहौल देखने को मिला, जब जिलाध्यक्ष नीतू सिंह ने स्वयं दीप जलाकर कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों के साथ दीपोत्सव मनाया। इस अवसर पर उन्होंने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दीपावली न केवल घरों को, बल्कि दिलों को भी रोशन करती है।
जिलाध्यक्ष श्रीमती सिंह ने कहा कि यह पर्व समाज और संगठन के बीच एकता, प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे इसी एकजुटता और समर्पण की भावना के साथ जनता की सेवा में निरंतर लगे रहें।
कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं को मिठाई खिलाई, उपहार भेंट किए और उनके परिवारों की खुशहाली व उन्नति की कामना की। उन्होंने कहा कि दीपावली रिश्तों में नयापन लाती है और यह समय है पुरानी शिकायतों को भूलकर नई ऊर्जा के साथ समाज हित में कार्य करने का।
भाजपा कार्यालय दीपों की रोशनी और देशभक्ति गीतों से गूंज उठा। कार्यकर्ताओं ने ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों के साथ दीपावली उत्सव का समापन किया।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपाध्यक्ष ज्ञानेंद्र मिश्रा, गणेश पाण्डेय, डॉ. सत्यपाल पाल, गौरव निषाद, अत्रेश श्रीवास्तव, ब्रह्मानंद पाण्डेय, सतविंदर पाल सिंह जज्जी, किरण प्रजापति, दुर्गा पांडेय, सूरज सिंह, इतेंद्र सिंह, मनोज सिंह सहितसभी मंडल अध्यक्ष, मंडल समिति सदस्य, शक्ति केंद्र संयोजक और बूथ अध्यक्ष सहित अन्य भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

देवरिया बस अड्डे पर महिला के पर्स से लाखों के गहने गायब, चोरों ने भीड़ का उठाया फायदा — परिवार ने लगाई कार्रवाई की गुहार

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।
रविवार की दोपहर देवरिया शहर के व्यस्त बस अड्डे पर उस समय हड़कंप मच गया जब एक महिला के पर्स से अज्ञात चोर लाखों रुपये के कीमती गहने लेकर फरार हो गए। घटना के बाद परिजनों ने तत्काल देवरिया कोतवाली पहुंचकर शिकायत दर्ज कराते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पूर्व चेयरमैन वीरेंद्र गुप्ता ने बताया कि पीड़िता किसी निजी कार्य से बस अड्डे के पास पहुंची थी। तभी पहले से घात लगाए चोरों ने भीड़भाड़ का फायदा उठाते हुए पर्स से गहने गायब कर दिए। उन्होंने पुलिस प्रशासन से इस घटना का जल्द पर्दाफाश कर आरोपितों को गिरफ्त में लेने की मांग की।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बस अड्डे और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपितों की पहचान की जा सके। घटना के बाद यात्रियों में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।