Monday, July 6, 2026
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एक दिन पहले पत्नी ने कि आत्म हत्या तो दुसरे दिन पती ने भी किया आत्महत्या

पुलिस ने पति के शव को भेजा पोस्टमार्टम के लिये जिला अस्पताल

बहराइच( राष्ट्र की परम्परा) । पति-पत्नी के झगड़े में गई दोनों की जान चार मासूमों के सिर से उठा मां बाप का साया पति के आत्म हत्या के एक दिन पहले पत्नी ने फांसी लगाकर आत्म हत्या कर जिवन लीला समाप्त किया तो दूसरे दिन पति ने फांसी लगाकर जान दे दी। थाना क्षेत्र नवाबगंज कस्बे के कानी बगिया मोहल्ला निवासी मुकेश लगभग 32 वर्ष व उसकी पत्नी रेखा लगभग 27 वर्षीय के बीच में किसी बात को लेकर सोमवार को लड़ाई झगड़ा हुआ जिससे क्षुब्ध होकर पत्नी रेखा ने सोमवार को घर के अन्दर झज्जे में लगे छल्ले में फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली जिसकी सूचना पाकर मृतका रेखा के भाई माधव और पिता संतराम निवासी खुटेहना थाना पयागपुर मौके पर पहुंचे मृतका के पिता संतराम व भाई माधव के बीच मृतका के पति मुकेश से जेवरात व जमीन जायदाद को लेकर रात में लड़ाई झगड़ा हुआ परिजनों के अनुसार मुकेश को मारा पीटा और सारे जेवर के साथ जमीन बच्चों के नाम करने पर लड़ाई झगड़ा हुईं जिसपर दुसरे दिन जब मृतका का अन्तिम संस्कार होने जा रहा था उसी वक्त मृतका के पति मुकेश ने घर के छज्जे में लगे छल्ले में भी फांसी का फंदा लगाकर फांसी लगा ली जिससे स्थिति और गंभीर हो गई घर परिवार में कोहराम मच गया मृतका के चार बच्चे सौरभ लगभग 12 वर्षीय विवेक लगभग 10 वर्षीय विजय लगभग 8 वर्षीय ओम डेढ़ वर्षीय का रो रो का बुरा हाल है। वहीं मृतक दंपत्ति के बड़े पुत्र सौरभ ने बताया कि पापा वह मम्मी के बीच अक्सर लड़ाई झगड़ा होती रहती थी इसी कारण मम्मी ने फांसी लगा लिया। जब मामा और नाना घर पर आएं तो उन्होंने पिता जी को मारा पीटा इसी से क्षुब्ध होकर पिताजी ने भी सुबह फांसी लगा लिया वहीं बच्चों का कहना है कि नाना और मामा सारा ज़ेवर अपने पास लेकर जाने का प्रयास कर रहे थे और इसी के कारण विवाद हुआ थाना प्रभारी निरीक्षक रमाशंकर यादव ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है मृतक युवक के भाई अरविन्द की तहरीर पर जांच कर विधिक कार्यवाही की जा रही है।

🌦️“बदलते मौसम का बढ़ता खतरा: डॉ. गृजेश मिश्र से जानिए कैसे रखें खुद को सुरक्षित और स्वस्थ”

जब मौसम का मिज़ाज अचानक बदलता है—कभी तेज़ धूप, कभी झमाझम बारिश और कभी ठंडी हवाएं—तो सबसे पहले असर हमारे शरीर पर पड़ता है। ऐसे में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है और सर्दी-जुकाम, बुखार, एलर्जी, वायरल संक्रमण जैसी बीमारियां तेजी से फैलती हैं। बदलते मौसम में बचाव कैसे करें, इस विषय पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गृजेश मिश्र ने विशेष वार्ता में कुछ उपयोगी सुझाव साझा किए हैं जो हर उम्र के व्यक्ति के लिए बेहद लाभकारी हैं।
🌤️ बदलते मौसम का प्रभाव — क्यों बढ़ जाती हैं बीमारियां?
डॉ. गृजेश मिश्र बताते हैं कि जब मौसम का तापमान अचानक घटता या बढ़ता है, तो शरीर को उसके अनुरूप ढलने के लिए समय चाहिए। इस दौरान इम्यून सिस्टम अस्थिर हो जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
बारिश और उमस के समय में बैक्टीरिया व वायरस तेजी से पनपते हैं। वहीं सर्द हवाएं त्वचा को शुष्क बनाती हैं, जिससे एलर्जी या खांसी-जुकाम के लक्षण उभरने लगते हैं।

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🩺 डॉ. गृजेश मिश्र के अनुसार — “बचाव ही सबसे बड़ा उपचार”
वे कहते हैं, “मौसमी बीमारियों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है अपने शरीर को पहले से तैयार रखना। खानपान, दिनचर्या और साफ-सफाई—तीनों में थोड़े-से बदलाव से बड़ा अंतर आता है।”
आइए जानते हैं, उनके सुझाए मुख्य बिंदु:
🌿 1. मजबूत प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखें
संतुलित आहार: डॉ. मिश्र सलाह देते हैं कि बदलते मौसम में शरीर को विटामिन-C, आयरन और प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा मिले। नींबू, आंवला, संतरा, हरी पत्तेदार सब्जियां, मूंग दाल और अंकुरित अनाज रोजाना भोजन में शामिल करें।
हर्बल पेय का सेवन: अदरक, तुलसी, गिलोय, हल्दी और काली मिर्च का काढ़ा इम्यूनिटी बढ़ाने में कारगर है।
नींद और आराम: पर्याप्त नींद शरीर की पुनर्निर्माण प्रक्रिया को सक्रिय रखती है। नींद की कमी से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
💧 2. हाइड्रेशन रखें बरकरार
मौसम चाहे कोई भी हो, पानी की कमी शरीर में असंतुलन पैदा करती है।

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दिनभर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं।
सादा गुनगुना पानी पिएं—यह गले को संक्रमण से बचाता है।
अत्यधिक ठंडे या बासी पेय पदार्थों से बचें।
🧼 3. स्वच्छता है सबसे अहम सुरक्षा कवच
डॉ. गृजेश मिश्र के अनुसार, “साफ-सफाई को नजरअंदाज करना बीमारी को न्योता देना है।”
बाहर से आने पर हाथ-पैर और चेहरा धोएं।
दिन में दो बार ब्रश करें और गले को गुनगुने पानी से गरारा करें।
अपने घर और आसपास पानी जमा न होने दें—मच्छरजनित रोगों (डेंगू, मलेरिया) का खतरा यहीं से शुरू होता है।
4. बदलते मौसम में खानपान की विशेष सावधानियां
तली-भुनी और अत्यधिक मसालेदार चीज़ों से बचें। मौसम के अनुसार फल चुनें—जैसे गर्मी में तरबूज, सर्दी में संतरा और सेब।
दूध में हल्दी मिलाकर पीना संक्रमण से बचाता है।
अधिक समय तक फ्रिज में रखे भोजन का सेवन न करें।

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👕 5. कपड़ों का सही चयन
मौसम के हिसाब से कपड़े पहनें।सर्दी की शुरुआत में हल्के ऊनी कपड़े अपनाएं ताकि शरीर अचानक ठंड के संपर्क में न आए।
गीले कपड़ों को तुरंत बदलें, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह बेहद ज़रूरी है।
💪 6. सुबह की धूप और हल्का व्यायाम
डॉ. मिश्र कहते हैं, “सूरज की हल्की किरणें न केवल विटामिन D देती हैं, बल्कि मन को भी प्रसन्न रखती हैं।”
सुबह की धूप में 15–20 मिनट बैठें।
हल्का योग, प्राणायाम और टहलना रोज करें।
गहरी सांस लेने के अभ्यास से फेफड़े मजबूत होते हैं और संक्रमण की संभावना घटती है।
🦠 7. संक्रमण से बचाव के आधुनिक उपाय
सार्वजनिक स्थानों पर मास्क का उपयोग अब भी फायदेमंद है।
बीमार व्यक्ति से उचित दूरी बनाए रखें।
मोबाइल, लैपटॉप, दरवाजे के हैंडल जैसी चीज़ों को समय-समय पर सैनिटाइज करें।

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🧘‍♀️ 8. मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें
डॉ. गृजेश मिश्र बताते हैं कि बदलते मौसम का असर सिर्फ शरीर पर नहीं, मन पर भी पड़ता है।
तनाव और चिंता से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है।
ध्यान (Meditation) और सकारात्मक सोच से मानसिक संतुलन बनाए रखें।
परिवार के साथ समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करता है।
🏥 9. बच्चों और बुजुर्गों के लिए अतिरिक्त सावधानियां
छोटे बच्चों और बुजुर्गों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, इसलिए उन्हें ठंडी या बहुत गर्म चीजों से दूर रखें।
स्कूल जाने वाले बच्चों को साफ रुमाल, पानी की बोतल और ताज़ा टिफिन देना न भूलें।
बुजुर्गों को नियमित जांच और हल्के गर्म पानी से स्नान की सलाह दी जाती है।

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🔔 10. समय पर डॉक्टर से संपर्क करें
कई बार लोग हल्के बुखार या खांसी को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर रूप ले सकता है।
डॉ. मिश्र सलाह देते हैं:
“अगर तीन दिन से अधिक खांसी, बुखार, सांस लेने में परेशानी या थकावट महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। स्वयं दवा लेना खतरनाक हो सकता है।”
🌈 बदलते मौसम में सबसे बड़ा हथियार है सजगता और अनुशासन। जैसा कि डॉ. गृजेश मिश्र कहते हैं,
“मौसम को हम बदल नहीं सकते, लेकिन अपने व्यवहार से खुद को हर मौसम के अनुरूप बना सकते हैं।”
थोड़ी-सी सावधानी, संतुलित आहार, साफ-सफाई और सकारात्मक जीवनशैली अपनाकर हम न केवल मौसमी बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज के स्वास्थ्य में भी योगदान दे सकते हैं।

भाई दूज 2025-दीपावली रूपी माला का पांचवा और अंतिम चमकता मोती ,स्नेह ,सौहार्द और प्रीति का अंतिम दीप

भाई दुज़ पर्व बहन को‘सद्भावना की वाहक’और‘आशीर्वाद की प्रदात्री’ के रूप में देखा जाता है,जो अपने भाई के लिए प्रेम का दीप जलाती है-एडवोकेट किशन

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भाई दूज,यह पर्व न केवल दीपावली के पांच दिवसीय महोत्सव का समापन करता है,बल्कि पारिवारिक संबंधों में निहित स्नेह, प्रेम और सुरक्षा की भावना का दिव्य उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। जहां धनतेरस से दीपावली की शुरुआत होती है,वहीं भाई दूज उस श्रृंखला का भावनात्मक चरम है, जब बहन अपने भाई की दीर्घायु और समृद्धि की मंगल कामना करती है। 21अक्टूबर 2025, मंगलवार को मनाया जाने वाला यह पर्व केवल भारतीय समाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आज यह विश्वभर में प्रवासी भारतीयों के बीच पारिवारिक एकता, आत्मीयता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन चुका है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं, कि भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के संबंध को सबसे पवित्र और आत्मीय रिश्ता माना गया है। रक्षाबंधन और भाई दूज,दोनों पर्व इस रिश्ते की गरिमा को दर्शाते हैं, किंतु दोनों में एक सूक्ष्म अंतर है।रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई को रक्षा सूत्र बांधकर उसकी रक्षा की कामना करती है और भाई वचन देता है कि वह अपनी बहन की हर परिस्थिति में रक्षा करेगा। इस दिन भाई अपनी बहन को अपने घर बुलाता है।वहीं भाई दूज पर परंपरा उलट जाती है,बहन अपने भाई को अपने घर आमंत्रित करती है, उसका स्वागत करती है, तिलक लगाती है,भोजन कराती है और उसकी लंबी उम्र व समृद्धि की मंगलकामना करती है। यह भूमिका का परिवर्तन इस बात का प्रतीक है कि रिश्तों की गरिमा एकतरफा नहीं, बल्कि परस्पर है। जैसे भाई बहन की रक्षा करता है, वैसे ही बहन भी अपने स्नेह और शुभकामनाओं से भाई के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन भरती है।भारत के विविध प्रांतों में तथा वैश्विक स्तरपर भाई दूज को अलग-अलग नामों और रीति- रिवाजों से मनाया जाता है।उत्तर भारत में इसे “भाई दूज” कहा जाता है, जहां बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर भोजन कराती हैं। महाराष्ट्र और गोवा में इसे “भाऊबीज” कहा जाता है,जहां बहनें आरती कर भाई को पान, सुपारी और मिठाई देती हैं।बंगाल में इसे “भाई फोटा” कहा जाता है,और यहां बहनें अपने भाइयों को चंदन का तिलक लगाती हैं तथा विशेष मंत्र का उच्चारण करती हैं।नेपाल में इसे “भाई टीका” कहा जाता है, जो वहां का राष्ट्रीय त्योहार है और पाँच दिन तक चलने वाले तिहार उत्सव का हिस्सा है।21वीं सदी में जब दुनियाँ तकनीकी रूप से जुड़ रही है लेकिन भावनात्मक रूप से दूर हो रही है,तब भाई दूज जैसे पर्व वैश्विक समाज को यह सिखाते हैं कि मानवता की सबसे बड़ी शक्ति रिश्ते हैं अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और खाड़ी देशों में बसे प्रवासी भारतीय आज इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं। वहां की भूमि पर यह केवल भारतीयता का प्रतीक नहीं बल्कि संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय संवाद का माध्यम बन चुका है।भाई दूज आज विश्व समुदाय को यह संदेश देता है कि सच्चे संबंध स्वार्थ से नहीं, बल्कि आत्मीयता से बनते हैं। यह पर्व वैश्वीकरण की दौड़ में पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण का जीवंत उदाहरण है।सभी परंपराओं में भाव एक ही है,भाई की सुरक्षा और बहन के स्नेह का सम्मान। यही विविधता भारतीय संस्कृति की एकता में अनेकता का सबसे चूँकि भाई दूज 2025-दीपावली रूपी माला का पांचवा और अंतिम चमकता मोती,स्नेह, सौहार्द और प्रीति का अंतिम दीप हैँ,इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से व इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगेभाई दूज 2025-भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के प्रेम और कर्तव्य का वैश्विक प्रतीक हैँ।

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साथियों बात अगर हम, भाई दूज क़े सामाजिक और पारिवारिक आयाम को समझने की करें तो,आधुनिक समाज में जहां परिवार छोटे होते जा रहे हैं और रिश्तों में दूरी बढ़ रही है, वहां भाई दूज जैसे पर्व सामाजिक एकता और पारिवारिक पुनर्सयोजन का अवसर प्रदान करते हैं। इस दिन बहनें अपने मायके जाती हैं, पुराने संबंधों को फिर से जीवित करती हैं और भावनात्मक संवाद का सेतु बनाती हैं।भाई दूज का पर्व हमें यह सिखाता है कि परिवार केवल रक्त संबंध नहीं, बल्कि भावनाओं की बुनावट है। जिस घर में यह पर्व मनाया जाता है, वहां स्नेह, आस्था और संवाद का वातावरण स्वतः निर्मित हो जाता है।यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के सम्मान और उनकी भूमिका की पहचान का भी अवसर है। बहन को ‘सद्भावना की वाहक’ और ‘आशीर्वाद की प्रदात्री’ के रूप में देखा जाता है, जो अपने भाई के लिए प्रेम का दीप जलाती है।

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साथियों बात अगर हम भाई दूज 2025 आध्यात्मिकता, परंपरा और आधुनिकता का संगम को समझने की करें तो, भाई दूज 2025 के आगमन के साथ दीपावली की श्रृंखला पूर्ण होती है, लेकिन उसके साथ ही यह पर्व एक नवीन आरंभ का प्रतीक भी है। यह दिन केवल भाई और बहन के मिलन का नहीं, बल्कि परिवार, समाज और संस्कृति के पुनर्संयोजन का भी अवसर है।आधुनिक समाज में जहां रिश्ते डिजिटल माध्यमों तक सीमित हो रहे हैं,वहां भाई दूज हमें सिखाता है कि स्पर्श, स्नेह और साथ का कोई विकल्प नहीं।जब बहन तिलक लगाती है, तब वह केवल प्रतीकात्मक क्रिया नहीं कर रही होती, बल्कि वह भाई के जीवन में संरक्षण, आशीर्वाद और शुभता का संचार कर रही होती है। यही उस प्रेम की शक्ति है जो न समय, न दूरी और न मृत्यु से बंधी होती है।

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साथियों बात अगर हम,भाई दूज का वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक पहलू को समझने की करें तो, भारतीय त्यौहार केवल धार्मिक न होकर वैज्ञानिक और मनो वैज्ञानिक दृष्टि से भी गहरे अर्थ रखते हैं। भाई दूज का पर्व दीपावली के बाद आता है,जब वातावरण में ठंड का आगमन होता है, खेतों में नई फसलें आने लगती हैं और परिवार एक साथ समय बिताते हैं। यह मौसम सामाजिक एकत्रीकरण और मानसिक नवजीवन के लिए उपयुक्त होता है।भाई दूज पर तिलक लगाने की परंपरा का भी वैज्ञानिक आधार है। चंदन, कुमकुम और अक्षत का प्रयोग मस्तक के उस भाग (अज्ञा चक्र) पर किया जाता है जो मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र है। इस तिलक से शरीरमें ऊर्जा संतुलित होती है और भावनात्मक जुड़ाव का अनुभव गहरा होता है।इसके अतिरिक्त, भाई- बहन का मिलन और आत्मीय संवाद सामाजिक मानसिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है। यह पर्व परिवार में संवाद, संवेदना और समर्थन की भावना को प्रबल तथा सटीक बनाता है।
साथियों बात अगर हम भाई दूज का पौराणिक आध्यात्मिक आधार व नारी सशक्तिकरण क़े संदेश को समझने की करें तो भाई दूज का मूल आधार यमराज और उनकी भगिनी यमुना की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि यमराज, जो मृत्यु के देवता हैं, एक बार लंबे समय बाद अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे। यमुना ने अपने भाई का आदरपूर्वक स्वागत किया, तिलक लगाया,आरती उतारी और उन्हें स्वादिष्ट भोजनकराया। यमराज बहन की इस आत्मीयता से अत्यंत प्रसन्न हुएऔर वरदान दिया कि जो भी इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक ग्रहण करेगा और स्नेहपूर्वक भोजन करेगा, उसे यमलोक का भय नहीं रहेगा।इस कथा में न केवल धार्मिक भावार्थ निहित है, बल्कि यह मानवीय संबंधों की अमरता, आत्मीयता और परस्पर श्रद्धा की झलक भी देता है। यमराज जो मृत्यु के प्रतीक माने जाते हैं, उनके द्वारा बहन के स्नेह से जीवन और दीर्घायु का वरदान मिलना यह सिखाता है कि प्रेम ही वह शक्ति है जो मृत्यु और भय पर भी विजय पा सकती है।भाई दूज केवल भाइयों का नहीं, बल्कि बहनों की गरिमा और शक्ति का भी उत्सव है। यह पर्व इस बात का प्रतीक है कि नारी केवल रक्षा की पात्र नहीं, बल्कि रक्षा की प्रदात्री भी है।यमराज की बहन यमुना ने अपने स्नेह से मृत्यु के देवता को भी जीवन का वरदान देने को प्रेरित किया। यह कथा इस विचार को पुष्ट करती है कि स्त्री का प्रेम और आशीर्वाद अमृत समान है, जो जीवन में ऊर्जा, उत्साह और उद्देश्य भर देता है।आधुनिक युग में जब नारी समाज में आत्मनिर्भरता और नेतृत्व की दिशा में अग्रसर है, तब भाई दूज उस सांस्कृतिक विरासत का स्मरण कराता है जो बहन को परिवार के केंद्र में रखती है,एक ऐसी शक्ति के रूप में जो सृजन,संतुलन और प्रेम का स्रोत है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि भाई दूज का वैश्विक संदेशयह हैँ कि,भाई दूज केवल भारतीय पर्व नहीं, बल्कि मानवता का उत्सव है। यह हमें याद दिलाता है कि इस संसार में सबसे अमूल्य धरोहर हमारे रिश्ते हैं,जो न किसी धर्म, जाति या भौगोलिक सीमा में बंधे हैं।भाई दूज का संदेश है,“जहां स्नेह है, वहां जीवन है; जहां संबंध हैं, वहां स्थायित्व है।”दीपावली रूपी माला का यह अंतिम दीप न केवल घरों में उजाला करता है, बल्कि मनुष्य के हृदय में प्रेम, कृतज्ञता और बंधुत्व का आलोक फैलाता है।2025 का भाई दूज इस युग की उस पुकार का उत्तर है, जो रिश्तों के पुनर्जागरण की ओर अग्रसर है, एक ऐसा समाज जहां प्रेम, संवाद, सहयोग और संवेदना सबसे बड़ा धर्म हो।

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतर्राष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि सीए(एटीसी) संगीत माध्यमा एडवोकेट किशन सनमुखदास भावानानी गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

जापान में इतिहास रचा: साने ताकाइची बनीं पहली महिला प्रधानमंत्री

दक्षिणपंथी गठबंधन के साथ नई राजनीतिक दिशा की शुरुआत

टोक्यो (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जापान ने मंगलवार को अपने राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखा जब संसद ने साने ताकाइची को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में चुना। 64 वर्षीय ताकाइची ने शिगेरु इशिबा की जगह ली है, जिन्होंने लगातार दो चुनावी पराजयों के बाद इस्तीफा दे दिया था।
यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब जापान की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) ने दक्षिणपंथी विचारधारा वाली जापान इनोवेशन पार्टी (JIP) के साथ एक अप्रत्याशित गठबंधन कर राजनीतिक स्थिरता की नई उम्मीद जगाई है।

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एलडीपी और JIP के बीच हुए इस समझौते के तुरंत बाद ताकाइची को प्रधानमंत्री चुना गया। यह गठबंधन न केवल जापान की सत्ता के समीकरण बदलने वाला साबित हुआ है, बल्कि इससे सरकार के और अधिक राष्ट्रवादी और सुरक्षा-केंद्रित होने के संकेत भी मिले हैं।
शिगेरु इशिबा के इस्तीफे के साथ पिछले तीन महीनों से जारी राजनीतिक गतिरोध समाप्त हो गया है, जिससे ताकाइची के लिए सत्ता का रास्ता खुल गया।
गठबंधन पर हस्ताक्षर करते हुए ताकाइची ने कहा “राजनीतिक स्थिरता इस समय जापान की सबसे बड़ी आवश्यकता है। बिना स्थिरता के न तो अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है और न ही हमारी कूटनीति।”
एलडीपी और JIP का यह गठबंधन जापान की दशकों पुरानी राजनीतिक परंपराओं से अलग दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। इस समझौते ने एलडीपी और उसके लंबे समय के सहयोगी कोमेइतो पार्टी के बीच चली आ रही साझेदारी को भी समाप्त कर दिया। कोमेइतो का झुकाव अपेक्षाकृत शांतिवादी और मध्यमार्गी नीतियों की ओर था, लेकिन ताकाइची की पार्टी अब एक अधिक राष्ट्रवादी नीति को प्राथमिकता देती दिख रही है।

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एलडीपी के भीतर ताकाइची को पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की करीबी सहयोगी माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वह आबे की नीतियों को आगे बढ़ाते हुए जापान की रक्षा क्षमता को सशक्त करेंगी, अर्थव्यवस्था को गति देने और संविधान में सेना की भूमिका को विस्तार देने की दिशा में काम करेंगी। हालांकि, संसद में सीमित बहुमत और घटते जन समर्थन के कारण उनकी राह आसान नहीं होगी।
अपनी विचारधारा के कारण ताकाइची लंबे समय से विवादों में रही हैं। उन्होंने समलैंगिक विवाह, महिला उत्तराधिकार, और अलग उपनामों के प्रयोग जैसे सामाजिक सुधारों का विरोध किया है। उनकी यह रूढ़िवादी सोच उन्हें जापान के पारंपरिक मतदाताओं के बीच लोकप्रिय बनाती है, लेकिन उदारवादी वर्ग में आलोचना का कारण भी।
एलडीपी और कोमेइतो के अलगाव की एक वजह पार्टी में फैले काले धन के घोटाले और उससे उपजे असंतोष को भी माना जा रहा है। इस असंतोष के कारण ही ताकाइची को नए गठबंधन के सहारे सत्ता बचाने की जरूरत पड़ी।

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उनकी यासुकुनी तीर्थस्थल यात्राओं ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा किया था। चीन और दक्षिण कोरिया जैसे पड़ोसी देशों ने इसे जापान के युद्धकालीन रवैये का प्रतीक बताया है। हालांकि हाल ही में ताकाइची ने व्यक्तिगत रूप से तीर्थस्थल जाने के बजाय वहां प्रतीकात्मक धार्मिक वस्तु भेजकर अपने रुख को कुछ नरम दिखाने की कोशिश की है।
राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि ताकाइची का प्रधानमंत्री बनना न केवल जापानी राजनीति की दिशा तय करेगा बल्कि यह एशियाई भू-राजनीति पर भी असर डाल सकता है। महिला नेतृत्व के इस ऐतिहासिक क्षण के बावजूद, उनके सामने चुनौती यह होगी कि वे रूढ़िवादी नीतियों को लागू करते हुए देश की स्थिरता और वैश्विक छवि दोनों को संतुलित रख सकें।

“सत्ता से सलाखों तक: निकोलस सारकोजी का पतन या न्याय की जीत?”

🇫🇷 फ्रांस की सियासत में भूचाल: पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सारकोजी बने देश के पहले नेता जो जेल में काटेंगे सजा, कहा— “मैं अंत तक लड़ूंगा”

पेरिस (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)फ्रांस की राजनीति में एक ऐतिहासिक और झकझोर देने वाला पल आया है। देश के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सारकोजी अब फ्रांस के पहले ऐसे राष्ट्रपति बन गए हैं, जिन्हें जेल की सजा काटनी पड़ेगी।
मंगलवार से वे पेरिस की प्रसिद्ध ‘ला सैंटे’ जेल में अपनी सजा शुरू करने वाले हैं। अदालत ने उन्हें पांच साल की सजा सुनाई है, जिसमें से दो साल सशर्त हैं। आरोप है कि वर्ष 2007 में हुए उनके राष्ट्रपति चुनाव अभियान को लीबिया से अवैध धन के जरिए वित्तपोषित किया गया था।

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हालांकि सारकोजी ने इन सभी आरोपों को नकारते हुए खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया है। उन्होंने कहा है कि यह फैसला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है और वे अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगे।

🏛️ ला सैंटे जेल: इतिहास में दर्ज नामों में जुड़ा एक नया अध्याय
‘ला सैंटे’ जेल कोई आम कारागार नहीं है — यह वही जेल है जहां 19वीं सदी से लेकर अब तक कई हाई-प्रोफाइल अपराधी और राजनेता कैद रहे हैं। सुरक्षा कारणों से सारकोजी को एकांत कारावास (solitary confinement) में रखा जाएगा ताकि वे अन्य कैदियों के संपर्क में न आएं।

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जेल प्रशासन के अनुसार, उन्हें या तो पूरी तरह अलग रखा जाएगा या फिर जेल के “संवेदनशील कैदियों वाले सेक्शन” में भेजा जाएगा, जिसे आम भाषा में ‘वीआईपी सेक्शन’ कहा जाता है।
🗣️ सारकोजी का साहसिक बयान: “मुझे जेल से डर नहीं”
‘ले फिगारो’ अखबार से बातचीत में सारकोजी ने कहा—
“मुझे जेल जाने से डर नहीं लगता। मैं अपना सिर ऊंचा रखूंगा, चाहे ला सैंटे के दरवाजे के सामने ही क्यों न खड़ा रहूं। मैं अंत तक लड़ूंगा।”
उन्होंने बताया कि वे अपने साथ कुछ कपड़े और परिवार की 10 तस्वीरें ले जा रहे हैं, जिनकी अनुमति उन्हें जेल प्रशासन ने दी है।
इन तस्वीरों के जरिए वे अपने परिवार की यादों को साथ लेकर इस कठिन समय का सामना करेंगे।

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⚖️ अदालत का अभूतपूर्व निर्णय
पेरिस की अदालत ने कहा था कि सारकोजी को अपनी अपील की सुनवाई का इंतजार किए बिना जेल की सजा शुरू करनी होगी।
यह फैसला फ्रांस के न्यायिक इतिहास में एक “अभूतपूर्व मिसाल” माना जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इससे यह संदेश गया है कि फ्रांस में कानून सबके लिए समान है— चाहे वह देश का आम नागरिक हो या पूर्व राष्ट्रपति।

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💬 जनता और राजनीति में प्रतिक्रियाएं
फ्रांस की जनता और राजनीतिक वर्ग में इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
कुछ लोग इसे “कानून की जीत” बता रहे हैं, वहीं सारकोजी समर्थक इसे “न्यायिक अन्याय” कह रहे हैं।
सोशल मीडिया पर हैशटैग #SarkozyVerdict और #JusticeInFrance ट्रेंड कर रहे हैं।

📜 निकोलस सारकोजी का यह अध्याय फ्रांस के इतिहास में कानूनी पारदर्शिता और राजनीतिक जवाबदेही का प्रतीक बन गया है।
उन्होंने भले ही कहा है कि उन्हें जेल से डर नहीं लगता, लेकिन यह घटना आने वाले समय में फ्रांसीसी राजनीति के लिए एक नए दौर की शुरुआत साबित हो सकती है।

लालगंज और कुटुंबा सीटों पर सुलझा महागठबंधन का विवाद

🗳️ लालगंज में गठबंधन धर्म की मिसाल बनीं शिवानी शुक्ला, पिता मुन्ना शुक्ला की विरासत को आगे बढ़ाने उतरीं चुनावी मैदान में

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच महागठबंधन के दो घटक दलों—राजद और कांग्रेस—के बीच लालगंज (वैशाली) और कुटुंबा (औरंगाबाद) सीटों को लेकर उठी उलझन अब पूरी तरह खत्म हो गई है। लंबे मंथन और आपसी बातचीत के बाद दोनों दलों ने तालमेल की नई मिसाल पेश की है। लालगंज सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार आदित्य कुमार राजा और कुटुंबा से आरजेडी के संभावित उम्मीदवारों ने आखिरकार नामांकन वापस लेकर गठबंधन धर्म निभाने का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

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लालगंज से अब आरजेडी प्रत्याशी शिवानी शुक्ला, जो पूर्व विधायक और बिहार की राजनीति में चर्चित नाम मुन्ना शुक्ला की बेटी हैं, मैदान में उतर चुकी हैं। कांग्रेस की ओर से इस सीट पर पहले आदित्य कुमार राजा को टिकट मिला था, लेकिन उन्होंने स्वेच्छा से चुनावी दौड़ से पीछे हटते हुए कहा कि उनका यह निर्णय किसी दबाव या व्यक्तिगत कारण से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक आदर्शों और गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने के लिए लिया गया है।

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जिला निर्वाचन पदाधिकारी वर्षा सिंह ने भी आदित्य राजा के नामांकन वापसी की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि महुआ विधानसभा क्षेत्र से भी दो प्रत्याशियों ने अपने नाम वापस लिए हैं, जिससे स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि महागठबंधन अब बिखराव से बचते हुए संगठित रूप में चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है।

अब पूरा ध्यान लालगंज सीट पर टिक गया है, जहां महागठबंधन की ओर से शिवानी शुक्ला बनाम बीजेपी के संजय सिंह के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा।

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शिवानी शुक्ला हाल के दिनों में क्षेत्र में लगातार सक्रिय रही हैं — जनसंपर्क अभियान चलाते हुए, महिला मतदाताओं और युवा वर्ग के बीच संवाद स्थापित कर रही हैं। उनकी उम्मीदवारी को न सिर्फ राजनीतिक तौर पर, बल्कि गठबंधन की एकजुटता का प्रतीक माना जा रहा है।

गौरतलब है कि शिवानी शुक्ला का राजनीतिक सफर किसी सामान्य पृष्ठभूमि से नहीं आता। उनके पिता मुन्ना शुक्ला ने वर्ष 2000 में हाजीपुर जेल से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर इतिहास रचा था। इसके बाद उन्होंने जेडीयू के टिकट पर भी जीत हासिल की थी। वहीं, शिवानी की मां भी लालगंज सीट से विधायक रह चुकी हैं। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि शिवानी अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को नए सिरे से परिभाषित करने के मिशन पर हैं।

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दूसरी ओर, कुटुंबा विधानसभा सीट पर भी अब स्थिति स्पष्ट हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने यहां से नामांकन दाखिल किया था, जबकि आरजेडी ने अपनी सूची में इस सीट को छोड़ते हुए संकेत दे दिया है कि यहां कांग्रेस ही महागठबंधन की प्रमुख दावेदार होगी। इससे कांग्रेस खेमे में राहत की भावना है और दोनों दल अब मिलकर एनडीए उम्मीदवारों के खिलाफ रणनीति तय कर रहे हैं।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवानी शुक्ला का मैदान में उतरना न केवल आरजेडी के लिए नई ऊर्जा का संचार करेगा, बल्कि महिला नेतृत्व की उपस्थिति से गठबंधन को संतुलित छवि भी मिलेगी।

बिहार की धरती पर परिवारवाद के तमाम आरोपों के बीच, शिवानी शुक्ला ने अपनी राजनीतिक सक्रियता और जनता से जुड़ाव के माध्यम से युवा और महिला सशक्तिकरण की नई राह खोली है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या वह अपने पिता की तरह लालगंज में एक नया इतिहास रच पाती हैं या नहीं।

“त्योहार की रात उजड़ा एक परिवार: आरा में शॉर्ट सर्किट या सिलेंडर ब्लास्ट से सर्विस सेंटर राख”

आरा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार के आरा जिले से दीपावली की रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। खुशियों के पर्व पर जहां पूरा शहर रोशनी में नहाया हुआ था, वहीं महादेवा रोड स्थित एक एसी–फ्रिज सर्विस सेंटर में अचानक आग लगने से अफरातफरी मच गई। कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया और लपटें चार मंजिल तक पहुंच गईं। रात के सन्नाटे को आग की चटकती आवाज़ों और सिलेंडर ब्लास्ट की धमाकों ने तोड़ दिया, जिससे आसपास के इलाके में दहशत फैल गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के कुछ ही देर बाद सर्विस सेंटर में रखे गैस सिलेंडरों में विस्फोट होने लगे। एक के बाद एक धमाकों से पूरा इलाका थर्रा उठा। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की छह गाड़ियाँ मौके पर पहुंचीं और करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। स्थानीय लोगों ने भी आग बुझाने में प्रशासन की मदद की।

इस हादसे में एसी, फ्रिज, वायरिंग, कंप्रेसर और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह जलकर राख हो गए। प्राथमिक अनुमान के अनुसार 50 से 60 लाख रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई है। फायर ब्रिगेड अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट या गैस सिलेंडर ब्लास्ट को आग की वजह माना जा रहा है, हालांकि सटीक कारण की जांच अभी जारी है।

घटना के बाद महादेवा रोड पर देर रात तक जाम की स्थिति बनी रही। पुलिस टीम ने घटनास्थल को घेरकर हालात पर नियंत्रण पाया।

पीड़ित की व्यथा:


सर्विस सेंटर के मालिक अभय केशरी, जो भोजपुर जिले के सिकरहट्टा गांव के निवासी हैं, ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से इस सर्विस सेंटर का संचालन कर रहे हैं। दीपावली के अवसर पर उन्होंने दुकान में विधि-विधान से पूजा की थी और उसके बाद सभी लाइटें बंद कर घर लौट गए थे। लेकिन कुछ ही घंटों बाद यह हादसा हो गया। अभय केशरी का कहना है कि वे इस नुकसान से टूट गए हैं, क्योंकि दुकान ही उनका मुख्य रोज़गार का साधन था।


फायर ब्रिगेड और पुलिस की तत्परता:


टाउन थानाध्यक्ष देवराज राय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। नगर फायर ब्रिगेड की टीम ने बताया कि आग पर काबू पाना मुश्किल था क्योंकि वहां कई गैस सिलेंडर और ज्वलनशील सामग्री मौजूद थी। बावजूद इसके टीम ने साहसिक प्रयास करते हुए आग को फैलने से रोक लिया, जिससे आसपास की इमारतें सुरक्षित रहीं।

संभावित कारण और चेतावनी:


फायर अधिकारियों का कहना है कि दीपावली के समय अधिकतर दुकानों और घरों में ओवरलोडिंग और शॉर्ट सर्किट की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में एसी, रेफ्रिजरेटर, गैस सिलेंडर जैसी वस्तुएं ज्यादा खतरा पैदा करती हैं। विशेषज्ञों ने अपील की है कि लोग त्योहारों के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करें, ताकि इस तरह की दुर्घटनाओं से बचा जा सके।


स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया:


स्थानीय निवासियों का कहना है कि आग लगने की शुरुआत में उन्होंने तेज धमाके की आवाज सुनी और बाहर निकलते ही देखा कि दुकान से लपटें उठ रही थीं। उन्होंने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी। एक निवासी ने बताया, “सिर्फ कुछ मिनटों में आग इतनी फैल गई कि आसमान तक धुआं छा गया। अगर दमकल की गाड़ियां देर से आतीं तो नुकसान और ज्यादा होता।”
दीपों की रोशनी में डूबी रात, इस सर्विस सेंटर के लिए एक काला अध्याय बन गई। जहां हर घर में खुशी की लौ जल रही थी, वहीं महादेवा रोड पर आग की लपटों ने एक परिवार की उम्मीदों को राख में बदल दिया। अब प्रशासन इस घटना की विस्तृत जांच में जुटा है ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।

पंजाब में बड़ा आतंकी हमला टला: अमृतसर में दो आतंकी गिरफ्तार, आरपीजी बरामद; दिवाली पर धमाका करने की थी साजिश

अमृतसर/पंजाब (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। अमृतसर देहात पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया है। पुलिस ने दो आतंकियों — महकदीप सिंह उर्फ महक और आदित्य उर्फ आधी — को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी अमृतसर के रहने वाले हैं। उनके पास से रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG) बरामद किया गया है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के संपर्क में थे। हथियार भी उसी नेटवर्क के जरिए भारत भेजा गया था। इसके अलावा, आरोपी फिरोजपुर जेल में बंद हरप्रीत सिंह उर्फ विक्की से भी संपर्क में थे। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि बरामद आरपीजी का इस्तेमाल दिवाली पर किसी बड़े आतंकी हमले के लिए किया जाना था।

अमृतसर के थाना घरिंडा में इस मामले की एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और विदेशी संपर्कों की तलाश में जुटी है।

एसएसपी मनिंदर सिंह ने बताया कि ISI लगातार पंजाब में आतंकी घटनाओं की साजिश रच रही है, लेकिन पुलिस और खुफिया एजेंसियां हर बार उनकी योजना को नाकाम कर रही हैं। इस बार भी समय रहते कार्रवाई कर पंजाब को दहलाने की साजिश विफल कर दी गई।

चिराग बोले जो गठबंधन नहीं संभाल सका, बिहार क्या संभालेगा!

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे करीब आ रहा है, राजनीतिक दलों में बयानबाजी का दौर तेज होता जा रहा है। इसी बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सुप्रीमो और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने डिप्टी सीएम पद को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या चुनाव के बाद उनकी पार्टी उपमुख्यमंत्री पद की दावेदारी करेगी, तो उन्होंने साफ कहा—“अभी तो सरकार बनने दीजिए, पद की चर्चा वक्त से पहले करना बेमानी है।”

चिराग पासवान ने कहा कि महागठबंधन की वर्तमान स्थिति इसी वजह से खराब हुई है, क्योंकि वहां नेताओं की महत्वाकांक्षाएँ ही उनके लिए विनाश का कारण बन गईं। उन्होंने वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी का उदाहरण देते हुए कहा—“अगर सहनी जी पहले डिप्टी सीएम बनने की ज़िद न करते, तो शायद उनकी राजनीतिक स्थिति आज अलग होती। पहले जीत तो हासिल करिए, फिर पद का सवाल उठाइए।”

लोजपा (रामविलास) प्रमुख ने कहा कि पार्टी का फोकस फिलहाल बड़ी जीत पर है। उन्होंने आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि “पिछले चुनावों में हमारी मेहनत का असर जनता ने महसूस किया था, और इस बार भी एकजुट होकर वही असर निर्णायक साबित होगा।”

इसी बातचीत के दौरान चिराग पासवान ने तेजस्वी यादव और महागठबंधन पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “जो नेता अपने गठबंधन को एकजुट नहीं रख सका, वह बिहार को कैसे एकजुट रखेगा?” चिराग का कहना था कि महागठबंधन की टूट और अंदरूनी कलह का सीधा फायदा एनडीए को मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि जनता अब विकास, नेतृत्व और स्थिरता चाहती है—जिसकी दिशा में एनडीए मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

चिराग के इस बयान ने बिहार की सियासत में नई हलचल मचा दी है, क्योंकि उन्होंने न सिर्फ भविष्य की रणनीति का संकेत दिया बल्कि विपक्ष को कमजोर नेतृत्व का प्रतीक भी बता दिया।

सुबह-सवेरे देवरिया में पुलिस का बड़ा अभियान: क्या हुआ 511 लोगों और 309 वाहनों के साथ?

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। देवरिया पुलिस ने मंगलवार को मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान चलाकर जनपद में सुरक्षा और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही आमजन में विश्वास और सुरक्षा की भावना बढ़ाई। यह अभियान पुलिस अधीक्षक देवरिया श्री संजीव सुमन के निर्देशन में सुबह 5 बजे से 8 बजे तक आयोजित किया गया।

अभियान का उद्देश्य

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक policing के तहत आमजन से संवाद स्थापित करना, छोटे-मोटे विवादों को स्थानीय स्तर पर सुलझाना और मित्र पुलिसिंग की भावना को बढ़ावा देना था। इसके अलावा, अभियान के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की तलाशी एवं पूछताछ की गई।

अभियान के दौरान की गई कार्रवाई

  1. चोरी की गाड़ियाँ पकड़ना
  2. तीन सवारी और मोडिफाइड साइलेंसर वाले दोपहिया वाहनों पर कार्रवाई
  3. नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के खिलाफ कार्यवाही
  4. अवैध असलहा और मादक पदार्थों की जाँच
  5. पुलिस ने जनसामान्य को अभियान के उद्देश्यों से अवगत कराया और आमजन ने इस पहल की सराहना की।

अभियान की सांख्यिकी

अभियान के दौरान जनपद के 26 स्थानों पर चेकिंग की गई। कुल 511 व्यक्तियों और 309 वाहनों की जांच की गई, जिससे कानून व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया।

पुलिस ने कहा कि ऐसे अभियान नियमित रूप से जारी रहेंगे ताकि आमजन की सुरक्षा, शांति और विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सके।

देवरिया पुलिस लाइन में पुलिस स्मृति दिवस पर शहीद जवानों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। पुलिस स्मृति दिवस (Police Commemoration Day) के अवसर पर मंगलवार को पुलिस लाइन स्थित शहीद स्मारक पर पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने कर्तव्य की बलिवेदी पर प्राण न्योछावर करने वाले शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान वातावरण “इतनी सी बात हवाओं को बताए रखना…” जैसे भावपूर्ण संदेशों से गूंज उठा।

कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक देवरिया श्री संजीव सुमन, अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी श्री आनंद कुमार पांडेय, क्षेत्राधिकारी नगर श्री संजय कुमार रेड्डी, क्षेत्राधिकारी सलेमपुर श्री मनोज कुमार, क्षेत्राधिकारी भाटपाररानी श्री अंशुमान श्रीवास्तव, क्षेत्राधिकारी बरहज श्री राजेश चतुर्वेदी, क्षेत्राधिकारी श्रीमती विनी सिंह, प्रतिसार निरीक्षक श्री विजय राज सिंह समेत कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

वीरता और बलिदान का प्रतीक दिवस

पुलिस स्मृति दिवस हर वर्ष 21 अक्टूबर को उन पुलिस जवानों की याद में मनाया जाता है जिन्होंने कर्तव्य पथ पर अपने प्राणों की आहुति दी। यह परंपरा वर्ष 1959 से चली आ रही है, जब लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में गश्त कर रही सीआरपीएफ (CRPF) की टीम पर चीनी सैनिकों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में 10 जवान शहीद हुए और सात घायल हुए थे। तब से यह दिन देशभर में पुलिस बल के बलिदान और सेवा की भावना के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

शहीदों के प्रति कृतज्ञता का भाव

इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री संजीव सुमन ने उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक, लखनऊ के संदेश को पढ़कर सुनाया और बीते एक वर्ष में कर्तव्य पालन के दौरान शहीद हुए पुलिस कर्मियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों का त्याग, साहस और सेवा भावना समाज के लिए प्रेरणा स्रोत है और उनका बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा।

“नामांकन के बाद महागठबंधन में फूट गहराई, कई सीटों पर साथी दल आमने-सामने”

“बिहार चुनाव 2025: सीटों की जंग में महागठबंधन की दरारें गहरी, राजद-कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान तेज़”

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण के नामांकन की प्रक्रिया पूरी होते ही महागठबंधन की आंतरिक स्थिति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। सीटों के बंटवारे को लेकर लंबे समय से चल रही खींचतान और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के गठबंधन से बाहर होने के बाद अब राजद और कांग्रेस के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। कई सीटों पर दोनों दलों के उम्मीदवार एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोंक रहे हैं, जिससे महागठबंधन की एकता पर सवाल उठने लगे हैं।

243 सदस्यीय बिहार विधानसभा की 121 सीटों पर अब कुल 1,314 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिन पर 6 नवंबर को मतदान होगा। चुनाव आयोग ने अब तक 61 नामांकन वापस लिए हैं और 300 से अधिक नामांकन खारिज कर दिए गए हैं।

राजद, जो महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है, ने इस बार 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। हालांकि, पार्टी ने बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार राम के खिलाफ कुटुम्बा विधानसभा क्षेत्र में उम्मीदवार न उतारकर सीधा टकराव टाल दिया है। फिर भी, लालगंज, वैशाली और कहलगांव जैसे इलाकों में राजद और कांग्रेस के बीच मुकाबला तय माना जा रहा है।

विकासशील इंसान पार्टी (VIP) को लेकर भी हालात असमंजस भरे रहे। तारापुर में जहां भाजपा ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मैदान में उतारा है, वहीं राजद का सामना वीआईपी से होना था। लेकिन वीआईपी उम्मीदवार सकलदेव बिंद ने नामांकन वापस लेकर भाजपा में शामिल होकर समीकरण बदल दिए। वहीं, गौरा बोराम सीट पर राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने अपने उम्मीदवार का समर्थन वापस लेकर वीआईपी नेता संतोष सहनी के समर्थन की घोषणा की, लेकिन इसका असर सीमित ही रहा।

दरभंगा की गौरा बोराम सीट पर राजद के चुनाव चिह्न पर नामांकन करने वाले अफ़ज़ल अली ने पद न छोड़ने का फैसला लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में असमंजस पैदा कर दिया।

परिहार सीट पर राजद को सबसे बड़ी बगावत का सामना करना पड़ रहा है, जहाँ पार्टी की महिला शाखा प्रमुख रितु जायसवाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी ताल ठोक दी है। वे पार्टी टिकट से वंचित होने और पारिवारिक राजनीति को बढ़ावा देने पर नाराज़ बताई जा रही हैं।

दूसरी ओर, कांग्रेस भी अपनी साख बचाने की जद्दोजहद में है। वह इस बार 61 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जो 2020 की तुलना में पाँच कम हैं। पिछले चुनाव में पार्टी सिर्फ 19 सीटें जीत सकी थी, जिसे महागठबंधन की हार का एक बड़ा कारण माना गया था।

महागठबंधन के भीतर “पप्पू यादव फैक्टर” भी उभरकर सामने आया है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के समर्थकों को टिकट दिए जाने या बेहतर सीटों से वंचित किए जाने को लेकर कांग्रेस के भीतर असंतोष की लहर है।
इस बीच, छोटे सहयोगी दलों ने अपनी हिस्सेदारी तय कर ली है।
विकासशील इंसान पार्टी (VIP) ने 16 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
भाकपा (माले) इस बार 20 सीटों पर मैदान में है।
भाकपा ने 9 और माकपा ने 4 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
महागठबंधन की यह आंतरिक खींचतान और टिकट वितरण को लेकर असंतोष चुनावी समीकरणों को नया मोड़ दे सकता है। जहां राजद और कांग्रेस एकजुटता का दावा कर रहे हैं, वहीं ज़मीनी स्तर पर उम्मीदवारों के बीच संघर्ष गठबंधन की एकता को कमजोर करता दिख रहा है।

दीवाली मुबारक

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“प्यार की जोत से घर- घर है चराग़ाँ वर्ना,
एक भी शम्अ न रौशन हो हवा के डर से”

शाकिब जलाली दरबार ए मुग़लिया की दीवाली दीवाली का जश्न पौराणिक के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की विरासत का भी प्रतीक है. शास्त्रों में भी इसे मान्यता भी प्राप्त है और इस त्योहार का मूल तत्व बुराई पर अच्छाई की विजय है. दीवाली प्रेम,भाई-चारा और उल्लास का संदेश पूरी दुनियां को दे रही है और एक ऐसे समाज की कल्पना को साकार करने का प्रयास कर रही है जहां मनुष्य से मनुष्य के बीच नफरत नहीं बल्कि मोहब्बत हो.पर इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि दीवाली को भव्यता और आधुनिक स्वरूप प्रदान करने में मुग़लों का योगदान उल्लेखनीय रहा है.मुग़ल दरबार में जिस साझी विरासत का जन्म हुआ दीवाली ने उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
वैसे तो सभी भारतीय त्योहारों ने हिंदुस्तान में प्रवेश के समय से ही तुर्कों में गहरी दिलचस्पी पैदा किया परन्तु कृष्ण जन्माष्टमी,दशहरा,बसंत पंचमी, होली और दीवाली ने उन्हें खासकर आकर्षित किया. ये पर्व तत्कालीन दरबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए. इसे ही अमीर खुसरो ने हिंदुस्तानी तहज़ीब कहा जो हिंदुस्तान को सारी दुनियां से श्रेष्ठ बनाता है.तुर्क और मुग़ल इस तहज़ीब में ऐसे रंगे की उनकी अलग पहचान कर पाना मुश्किल हो गया.इसी मेल-जोल की परम्परा ने हमें पूरी दुनियां पर मकबूलियत प्रदान की. भारत में तुर्क सुल्तानों के भारतीय त्योहार मनाने के दृष्टांत प्रारम्भ से ही मिलते हैं.14वीं शताब्दी में मुहम्मद बिन तुग़लक़ दीवाली का त्योहार अपने महल में मनाता था.उसदिन महल को खूबसूरती से सजाया जाता और सुल्तान अपने दरबारियों को नए-नए वस्त्र प्रदान करता था तथा एक शानदार दावत का भी आयोजन किया जाता था. मुग़ल बादशाह बाबर के समय पूरे महल को दुलहिन की तरह सजा कर पंक्तियों में लाखों दीये जलाए जाते थे और इस अवसर पर शहंशाह गरीबों को नए कपड़े और मिठाइयां बाँटता .सम्राट हुमांयू ने अपने पिता की विरासत को न केवल बरकरार रखा बल्कि साथ-साथ महल में लक्ष्मी पूजा की भी शुरूआत किया.पूजा के दौरान एक विशाल मैदान में आतिशबाजी का आयोजन किया जाता था. गरीबों को सोने के सिक्के बांटे जाते और तदुपरांत 101 तोपों की सलामी दी जाती थी.
मुगल शहंशाह अकबर के समय में ‘जश्न-ए-चिरागा’ होता था। इतिहास में अकबर और जहांगीर के समय ‘जश्न-ए-चिरागा’ मनाए जाने का उल्लेख ऐतिहासिक ग्रंथो में बहुतायत से मिलता है। आगरा किला दीयों की रोशनी में दमक उठता था।

अकबर के दरबारी अबुल फजल ने ‘आइन-ए-अकबरी’ में लिखा है कि अकबर दीवाली पर अपने राज्य में मुंडेर पर दीपक जलवाता था. महल में पूजा दरबार का आयोजन होता था। ब्राह्मण दो गायों को सजाकर शाही दरबार में आते और शहंशाह को आशीर्वाद देते.सम्राट उन्हें मूल्यवान उपहार प्रदान करता था.दीवाली के लिए महलों की सफाई और रंग रोगन महीनों पहले से शुरू हो जाता था.अपने कश्मीर प्रवास के दौरान अकबर ने वहां नौकाओं, घरों,झीलों और नदी तट पर दीये जलाने का फरमान जारी किया.अपने शहजादों और शहजादियों को जुए खेलने की भी इजाजत प्रदान की.अकबर ने गोवर्धन पूजा तथा बड़ी दीवाली के साथ छोटी दीवाली मनाने की भी शुरुआत की.
अकबर ने ही आकाश दीये की भी परम्परा शुरु की जो दीवाली की पूरी रात जलता था.इसमें 100 किलो से ज्यादा रुई और सरसों का तेल लगता था.दीये में रुई की बत्ती और तेल डालने के लिए सीढ़ी का इस्तेमाल किया जाता था. दरबार में फ़ारसी में अनुदित रामायण का पाठ भी होता था.पाठ के उपरांत दरबार में राम के अयोध्या वापसी का नाट्य मंचन होता फिर आतिशबाजी का दौर शुरू होता था.इस अवसर पर गरीबों को कपड़े,धन और मिठाइयां वितरित की जाती थी.अकबर ने राम सिया की को प्रदर्शित करता हुआ सिक्का भी जारी किया.
मुगल शहंशाह जहांगीर ने अपनी आत्मकथा ‘तुजुक-ए-जहांगीरी’ में वर्ष 1613 से 1626 तक अजमेर में दीपावली मनाए जाने का जिक्र किया है. जहांगीर दीपक के साथ-साथ मशाल भी जलवाता था और अपने सरदारों को नज़राना देता था.आसमान में 71 तोपें दागी जाती थीं तथा बारूद के पटाखे छोड़े जाते थे.फकीरों को नए कपड़े व मिठाइयां बांटी जातीं. तोप दागने के बाद आतिशबाजी होती थी. मुगलकालीन पेंटिंग्स में भी दीवाली का जश्न बहुतायत से मिलता है.
शाहजहाँ के समय भी यह त्योहार परंपरागत तरीके से मनाया जाता रहा.दीवाली के दिन शहंशाह को सोने-चांदी से तौला जाता और इसे गरीब जनता में बांट दिया जाता था.मुग़ल बेगमें और शहजादियाँ आतिशबाजी देखने के लिए कुतुबमीनार जाती थीं. शाहजहाँ राज्य के 56 जगहों से अलग-अलग तरह के पकवान मंगा कर 56 तरह का थाल सजवाता था.40 फिट ऊंची भव्य आतिशबाजी का मनोहारी दृश्य देखने के लिए दूरस्थ इलाकों से लोग आते थे.
औरंगजेब के समय दीवाली ही नहीं बल्कि मुस्लिम त्योहारों में भी कुछ फीकापन आ गया.
मुहम्मद शाह दीवाली के मौके पर अपनी तस्वीर बनवाता था. उसने अकबर तथा शाहजहाँ से भी अधिक भव्यता इस त्योहार को प्रदान की.सजावट और आतिशबाजी के अलावा शाही रसोई में नाना प्रकार के पकवान बनाये जाते थे जिसे जन-साधारण में बांटा जाता था.
बहादुर शाह जफर भी दीवाली के दिन लक्ष्मी पूजा के बाद दरबार में आतिशबाजी और मुशायरा का आयोजन करता था।गले मिलने की परंपरा सम्भवतः मुहम्मद शाह के दौर में शुरू हुई जो इस त्योहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गयी.
आज इस विरासत पर कुछ लोग सवाल उठाते हैं.ये कौन है जो इन मूल्यों को नकार रहे है.हमें इनसे सावधान रहने की जरूरत है.यही मूल्य हमें दुनिया में अलग पहचान देते है और इन्ही पर विश्वास करके हमनें मिल-जुल कर आजादी की लड़ाई लड़ी.इन्हें ही संविधान में जगह दी गई और उसकी प्रस्तावना में यही मूल्य स्वतंत्रता, समता,बंधुता और न्याय बनकर उभरे.आज हमें इनकी हिफाजत करने और इनके पक्ष में खड़ा होने के लिए तैयार रहना होगा अन्यथा इतिहास हमें माफ नहीं करेगा.

डॉ मोहम्मद आरिफ़

(बनारस)

दीपावली की रात में लगी 18 जगह आग, सांवेर रोड की गत्ता फैक्ट्री और विदुर नगर की तेल फैक्ट्री जलकर खाक

इंदौर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दीपावली की रात जश्न के बीच आगजनी की घटनाओं ने शहर को दहला दिया। फायर ब्रिगेड को सोमवार रात से लेकर मंगलवार सुबह तक 18 अलग-अलग स्थानों से आग लगने की सूचना मिली। इनमें सबसे भीषण आग सांवेर रोड की गत्ता फैक्ट्री और विदुर नगर की तेल फैक्ट्री में लगी, जहां लाखों रुपये का नुकसान हुआ। दमकल कर्मियों ने लगातार मशक्कत कर समय रहते आग पर काबू पाया।

फैक्ट्रियों में भीषण आग

पहली बड़ी घटना सोमवार रात करीब 8:45 बजे सांवेर रोड ए-सेक्टर स्थित गत्ता फैक्ट्री में हुई, जहां आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उसे बुझाने के लिए 105 टैंकर पानी का उपयोग करना पड़ा।
दूसरी बड़ी घटना रात 1 बजे विदुर नगर की तेल फैक्ट्री में हुई। सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और लगभग 1 लाख लीटर पानी से आग पर काबू पाया गया।

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देर रात तक दमकल विभाग की मुस्तैदी

फायर ब्रिगेड का अमला पूरी रात अलर्ट मोड पर रहा। लकड़ी मंडी, रूकमणि कॉलोनी और एयरपोर्ट क्षेत्र से भी आग लगने की खबरें आईं। अधिकारियों का कहना है कि दीपावली पर पटाखों की चिंगारी और लोगों की लापरवाही आग की बड़ी वजह बनती है। फिलहाल नुकसान का आकलन और आग के कारणों की जांच जारी है।

इन इलाकों में भी लगी आग

नंदलालपुरा सब्जी मंडी: पटाखे की चिंगारी से गुमटी में आग।

उद्योग नगर: पेट्रोल पंप के पीछे कचरे में आग।

चितावद रोड: पेड़ में आग, दमकल ने बुझाई।

रूकमणि नगर, बागड़दा रोड: सुबह आग की सूचना, दमकल मौके पर।

नवलखा, एबी रोड: स्काई बिल्डिंग के पास पेड़ और एक मकान में आग।

कुशवाह नगर, बाणगंगा: मकान में आग से गृहस्थी का सामान जला।

सुभाष नगर, परदेशीपुरा: सरकारी स्कूल में रखे सामान में आग।

संयोगितागंज: दुकान में आगजनी।

कुम्हार खाड़ी: दो दोपहिया वाहन जले।

माणिक बाग: पार्किंग में आग, एक कार जलकर खाक।

लकड़ी मंडी: देर रात आग, दमकल ने पाया काबू।

फायर ब्रिगेड के अनुसार, दीपावली के दौरान इंदौर में आगजनी की घटनाओं में हर साल इजाफा देखा जाता है। विभाग ने नागरिकों से सावधानी बरतने और पटाखों का उपयोग जिम्मेदारी से करने की अपील की है।

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Navodaya Vidyalaya Class 9 Admission 2026: आज है आवेदन की अंतिम तिथि, ऐसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन

एजुकेशन (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जवाहर नवोदय विद्यालय समिति (NVS) द्वारा आयोजित जेएनवीएसटी 2026 परीक्षा के तहत कक्षा 9वीं में लेटरल एंट्री (Lateral Entry) के लिए आवेदन करने की आज अंतिम तिथि है। जो छात्र अब तक आवेदन नहीं कर पाए हैं, वे तुरंत आधिकारिक वेबसाइट navodaya.gov.in या cbseitms.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन प्रक्रिया के दौरान छात्रों को पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर आवश्यक विवरण भरने होंगे। साथ ही, जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और शैक्षणिक प्रमाण पत्र अपलोड करना अनिवार्य है। आवेदन की अंतिम तिथि के दो दिन बाद तक फॉर्म में सुधार की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

कक्षा 9 में प्रवेश के लिए योग्यता

छात्र का जन्म 1 मई 2011 से 31 जुलाई 2013 के बीच होना चाहिए।

उम्मीदवार को उसी जिले का निवासी होना चाहिए, जहाँ संबंधित जवाहर नवोदय विद्यालय स्थित है।

छात्र को वर्तमान सत्र में किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय से कक्षा 8 में अध्ययनरत होना जरूरी है।

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कक्षा 11 प्रवेश के लिए योग्यता

जन्म तिथि 1 जून 2009 से 31 जुलाई 2011 के बीच होनी चाहिए।

उम्मीदवार को वर्तमान सत्र में कक्षा 10 में अध्ययनरत होना चाहिए।

जो छात्र पहले ही कक्षा 8 या 10 पास कर चुके हैं, वे आवेदन नहीं कर सकते।

परीक्षा पैटर्न (JNVST 2026 Class 9)

परीक्षा में कुल 100 प्रश्न होंगे, प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का होगा।

अंग्रेज़ी – 15 प्रश्न (15 अंक), हिंदी – 15 प्रश्न (15 अंक), गणित – 35 प्रश्न (35 अंक), सामान्य विज्ञान – 35 प्रश्न (35 अंक)
कुल अंक: 100

आवेदन प्रक्रिया

  1. आधिकारिक वेबसाइट navodaya.gov.in पर जाएं।
  2. होम पेज पर कक्षा 9वीं के लिए आवेदन लिंक पर क्लिक करें।
  3. “Registration” विकल्प चुनें और आवश्यक विवरण भरें।
  4. फोटो और हस्ताक्षर अपलोड करें।
  5. सभी जानकारी जांचकर फॉर्म सबमिट करें।

जो उम्मीदवार अभी तक आवेदन नहीं कर पाए हैं, वे आज ही रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर लें ताकि मौका न चूकें।

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