Sunday, July 5, 2026
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कैंसर से जंग में योग और आयुर्वेद बना सहारा! पतंजलि का दावा — वेलनेस सेंटर से स्वस्थ होकर लौटे कई मरीज

हरिद्वार (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। हरिद्वार स्थित पतंजलि वेलनेस सेंटर (योगग्राम एवं निरामयम) एक बार फिर चर्चा में है। पतंजलि ने दावा किया है कि यहां योग, प्राणायाम और आयुर्वेदिक उपचार के जरिए कई कैंसर मरीजों को राहत मिली है। संस्था का कहना है कि असाध्य बीमारियों में भी प्राकृतिक चिकित्सा और अनुशासित जीवनशैली से उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं।

पतंजलि के अनुसार, हावड़ा की 57 वर्षीय महिला, जिन्हें 2022 में कैंसर डिटेक्ट हुआ था, सात दिन के उपचार और एक साल तक नियमों के पालन के बाद 2023 में ‘कैंसर-फ्री रिपोर्ट’ लेकर लौटीं। वहीं, पुणे के अजय राजेन्द्र बण्डल (28 वर्ष) को सिर में कैंसर था, जो अब पतंजलि की थेरेपी और औषधियों से पहले से काफी बेहतर हैं।

पतंजलि का कहना है —

बेंगलुरु के गौरान सिंह (41), जिन्हें ब्लड कैंसर था, उन्होंने सात दिन के उपचार के बाद दर्द और कमजोरी में राहत पाई।
छपरा (बिहार) के विजय कुमार सिंह (62) ने बताया कि केवल छह दिन में ही TLC, प्लेटलेट्स और हीमोग्लोबिन लेवल में सुधार हुआ।

विभिन्न कैंसर मरीजों के अनुभव

महाराष्ट्र (ओस्मानाबाद): ज्ञानेश्वर विठ्ठलराव पाटिल ने बताया कि लीवर सिरोसिस में योग और आयुर्वेद से उनका वायरल लोड सामान्य स्तर पर आ गया।

राजस्थान (भरतपुर): वेद प्रकाश (74) को किडनी कैंसर था, 80% किडनी खराब होने के बावजूद अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।

दिल्ली: बबीता सचदेवा (52) को थायरॉइड कैंसर था, योगग्राम में प्राणायाम से उन्हें पूर्ण स्वास्थ्य लाभ हुआ।

पश्चिम बंगाल (हावड़ा): अनीता कुमारी (33) को 15 दिन के पतंजलि उपचार के बाद इतना लाभ हुआ कि ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ी।

डिस्क्लेमर:

“राष्ट्र की परम्परा” इस लेख में दिए गए पतंजलि के दावों या किसी प्रकार की चिकित्सा पद्धति का समर्थन या अनुमोदन नहीं करता है। यह जानकारी केवल जनसामान्य की जागरूकता हेतु साझा की गई है। स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

अग्निवीरों के लिए बड़ी खबर: अब 75% को मिलेगी स्थायी नौकरी, जानिए सेना का नया प्रस्ताव

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारतीय सेना में भर्ती होने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए शानदार खबर सामने आई है। अग्निवीर योजना (Agnipath Scheme) में अब बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। पहले जहां केवल 25% अग्निवीरों को ही स्थायी सेवा में शामिल किया जाता था, वहीं अब इस संख्या को बढ़ाकर 75% किए जाने का सुझाव दिया गया है। इसका अर्थ है कि अब हर 100 अग्निवीरों में से 75 को सेना में स्थायी नौकरी का अवसर मिल सकता है।

सेना कमांडर सम्मेलन में चर्चा का मुख्य विषय

यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव जैसलमेर में शुरू हुए सेना कमांडरों के सम्मेलन में रखा गया है। इस बैठक में तीनों सेनाओं — थलसेना, नौसेना और वायुसेना — के बीच बेहतर तालमेल और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा हो रही है। साथ ही ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ की प्रगति की समीक्षा भी एजेंडे का हिस्सा है।

25% से बढ़ाकर 75% करने का प्रस्ताव क्यों?

सूत्रों के मुताबिक, अग्निवीरों का पहला बैच अगले साल चार वर्ष की सेवा पूरी करेगा। ऐसे में यह प्रस्ताव सामने रखा गया है कि अधिक प्रतिशत में अग्निवीरों को स्थायी किया जाए। इससे सेना को अनुभवी कर्मियों का लाभ मिलेगा और युवाओं को दीर्घकालिक करियर स्थायित्व भी मिलेगा।

पूर्व सैनिकों की भूमिका होगी अहम

बैठक में यह भी चर्चा की जा रही है कि पूर्व सैनिकों के अनुभव का कैसे बेहतर उपयोग किया जाए। वर्तमान में वे आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी और ECHS पॉलीक्लिनिक्स जैसी सीमित संस्थाओं में कार्यरत हैं।
नए प्रस्ताव के तहत उन्हें अन्य रक्षा संरचनाओं में भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

तीनों सेनाओं के बीच तालमेल पर भी जोर

सम्मेलन में तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए कई कदमों पर विचार किया जा रहा है। इसमें शामिल हैं:

क्षतिग्रस्त सैन्य उपकरणों की मरम्मत और प्रतिस्थापन

हथियारों के गोला-बारूद का पर्याप्त स्टॉक

आपातकालीन परिस्थितियों में खरीद प्रक्रिया में तेजी

साथ ही, ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत अन्य सरकारी एजेंसियों और हितधारकों के बीच संयुक्त कार्य प्रणाली विकसित करने पर भी चर्चा की जा रही है।

अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो अग्निवीर योजना के तहत स्थायी भर्ती की दर तीन गुना बढ़ जाएगी, जिससे युवाओं को स्थायी करियर का सुनहरा अवसर मिलेगा। सेना के लिए यह कदम अनुभवी और प्रशिक्षित बल को बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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BSF में DIG को मिलती है इतनी सैलरी, 8वें वेतन आयोग के बाद बढ़ जाएगी आय — जानिए पूरी डिटेल

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सीमा सुरक्षा बल (Border Security Force – BSF) देश की सीमाओं की रक्षा करने वाली सबसे अहम एजेंसियों में से एक है। इसमें उप महानिरीक्षक (DIG) का पद बेहद प्रतिष्ठित और जिम्मेदारी भरा माना जाता है। DIG अधिकारी न सिर्फ सीमा की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते हैं बल्कि जवानों के प्रशिक्षण, अनुशासन और ऑपरेशनल योजनाओं की देखरेख भी करते हैं। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि BSF DIG की वर्तमान सैलरी कितनी है और 8वां वेतन आयोग लागू होने के बाद यह कितनी बढ़ सकती है।

BSF DIG का मौजूदा वेतन ढांचा

BSF में DIG अधिकारी का पद पे लेवल 13A में आता है। इस लेवल के अंतर्गत बेसिक सैलरी ₹1,31,100 प्रति माह तय की गई है।
जब इसमें महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और अन्य सरकारी अलाउंस जोड़े जाते हैं, तो कुल मासिक सैलरी लगभग ₹2 लाख से ₹2.25 लाख तक पहुंच जाती है।

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8वें वेतन आयोग के बाद संभावित बढ़ोतरी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ने 2025 की शुरुआत में 8वें वेतन आयोग को मंजूरी दी थी। अगर आयोग का फिटमेंट फैक्टर 2.86 निर्धारित होता है, तो BSF DIG के वेतन में जबरदस्त इजाफा हो सकता है।
आकलन के अनुसार, नया वेतन ₹3,74,000 से अधिक हो सकता है।

DIG की प्रमुख जिम्मेदारियां

सीमा सुरक्षा अभियानों की योजना बनाना और निगरानी करना

जवानों के प्रशिक्षण और अनुशासन की देखरेख

सुरक्षा चुनौतियों के समय रणनीति तैयार करना

विभिन्न ऑपरेशनों का नेतृत्व करना

मिलते हैं कई भत्ते और सुविधाएं

BSF में DIG को कई प्रकार के भत्ते दिए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं:

हाउस रेंट अलाउंस (HRA)

डियरनेस अलाउंस (DA)

ट्रैवल भत्ता

विशेष ड्यूटी भत्ता और यूनिफॉर्म अलाउंस

इन सुविधाओं के कारण BSF DIG का कुल पैकेज बेहद आकर्षक हो जाता है।

BSF में DIG बनना न केवल एक गौरवशाली जिम्मेदारी है बल्कि यह आर्थिक रूप से भी लाभदायक पद है। 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद अधिकारियों की सैलरी में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है, जिससे उनकी मासिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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IB भर्ती 2025: इंटेलिजेंस ब्यूरो में सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, मिलेगी ₹1.42 लाख तक सैलरी!

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाली इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने युवाओं के लिए शानदार मौका दिया है। एजेंसी ने असिस्टेंट सेंट्रल इंटेलिजेंस ऑफिसर (ACIO) ग्रेड-II/टेक्निकल पदों पर भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है। अगर आप इंजीनियरिंग या टेक्निकल बैकग्राउंड से हैं और देश की सुरक्षा में योगदान देना चाहते हैं, तो यह भर्ती आपके लिए सुनहरा अवसर साबित हो सकती है।

कुल पद और आवेदन तिथि

इस भर्ती के तहत कुल 258 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। आवेदन प्रक्रिया 25 अक्टूबर 2025 से शुरू होगी और उम्मीदवार 16 नवंबर 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इच्छुक उम्मीदवार इंटेलिजेंस ब्यूरो की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

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योग्यता

इन पदों के लिए उम्मीदवारों के पास बीई या बीटेक डिग्री होना आवश्यक है। यह डिग्री इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकम्युनिकेशन या कंप्यूटर इंजीनियरिंग जैसे विषयों में होनी चाहिए। कुछ विशेष पदों के लिए स्नातकोत्तर डिग्री और निर्धारित पात्रताएं भी मांगी गई हैं।

उम्र सीमा

उम्मीदवारों की आयु 18 से 27 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

SC/ST उम्मीदवारों को 5 वर्ष की छूट

OBC उम्मीदवारों को 3 वर्ष की छूट दी जाएगी।

सैलरी स्ट्रक्चर

चयनित उम्मीदवारों को ₹44,900 से ₹1,42,400 प्रति माह तक का वेतन दिया जाएगा। साथ ही, उन्हें DA, HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मेडिकल सुविधाएं जैसी सभी सरकारी लाभ भी मिलेंगे।

चयन प्रक्रिया

भर्ती प्रक्रिया तीन चरणों में होगी:

  1. GATE स्कोर (750 अंक) के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग
  2. स्किल टेस्ट (250 अंक)
  3. साक्षात्कार (175 अंक)

इन सभी चरणों के प्रदर्शन के आधार पर फाइनल मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी।

आवेदन शुल्क

सामान्य/OBC/EWS: ₹200

SC/ST उम्मीदवारों: ₹100
शुल्क का भुगतान केवल ऑनलाइन मोड से किया जाएगा।

IB में नौकरी करने का यह मौका देश सेवा का सपना देखने वाले युवाओं के लिए बेहद खास है। अगर आप पात्रता रखते हैं, तो अंतिम तिथि से पहले आवेदन जरूर करें।

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आज का मौसम: उत्तर भारत में बदलेगा मिज़ाज, कई जगहों पर बारिश के आसार

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मौसम विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटों के लिए देश के कई हिस्सों के लिए अलर्ट जारी किया है। उत्तर भारत के कुछ इलाकों में मौसम का मिज़ाज बदल सकता है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड में बादल छाने के साथ हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं दक्षिण भारत में तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की जा सकती है।

उत्तर भारत में हल्की बारिश की संभावना

मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के असर से पहाड़ी राज्यों — जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड — में बादल घिर सकते हैं और कहीं-कहीं बूंदाबांदी हो सकती है।
मैदानी इलाकों जैसे दिल्ली, हरियाणा, पश्चिमी यूपी और पंजाब में भी सुबह के समय धुंध छाने की संभावना है।

पूर्वी राज्यों में हल्की ठंड की दस्तक

बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में न्यूनतम तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट दर्ज हो सकती है। सुबह और शाम के समय हल्की ठंड महसूस की जा सकती है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अक्टूबर के आख़िरी हफ़्ते से ठंड की शुरुआत हो रही है जो नवंबर की शुरुआत तक तेज़ हो सकती है।

दक्षिण भारत में सामान्य मौसम

तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में आंशिक बादल छाए रहेंगे, लेकिन तेज़ बारिश की संभावना नहीं है। कुछ तटीय इलाकों में हल्की फुहारें पड़ सकती हैं। तापमान सामान्य रहेगा।

मौसम विभाग की सलाह

सुबह और रात में बाहर निकलते समय हल्के गर्म कपड़ों का प्रयोग करें।

बच्चों और बुजुर्गों को ठंडी हवा से बचाएं।

फसलों की कटाई या सिंचाई का काम मौसम को देखते हुए करें।

जब मौन हुए स्वर, पर गूंजती रही उनकी पहचान

24 अक्टूबर : जब विदा हुए युगपुरुष — भारतीय इतिहास के प्रेरणास्रोतों को श्रद्धांजलि


भारत का इतिहास केवल वीरता और उपलब्धियों का ही नहीं, बल्कि उन महान आत्माओं की स्मृतियों का भी है जिन्होंने अपने विचार, कर्म और प्रतिभा से देश की आत्मा को आकार दिया। 24 अक्टूबर का दिन इतिहास में ऐसे कई विभूतियों के निधन का साक्षी है, जिन्होंने राजनीति, साहित्य, संगीत और दर्शन के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। आइए इस विशेष तिथि पर उन महान विभूतियों को नमन करते हुए उनके जीवन, योगदान और प्रेरणाओं को याद करें।

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  1. सीताराम केसरी (1919–2000): भारतीय राजनीति के संयमित सेनापति
    सीताराम केसरी का जन्म 15 नवंबर 1919 को बिहार राज्य के पटना जिले में हुआ था। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने समाजसेवा के क्षेत्र में कदम रखा और महात्मा गांधी के आदर्शों से प्रभावित होकर कांग्रेस से जुड़ गए।
    राजनीतिक जीवन में वे कई बार सांसद रहे और कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद तक पहुंचे। 1996 से 1998 तक उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उनकी राजनीतिक शैली सौम्यता, संतुलन और संगठनात्मक क्षमता के लिए जानी जाती थी। गरीबों, किसानों और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए वे हमेशा समर्पित रहे। 24 अक्टूबर 2000 को उनका निधन हुआ। उनकी सादगी और संगठन के प्रति निष्ठा भारतीय राजनीति के इतिहास में मिसाल है।
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  3. ग्लेडविन जेब (1900–1996): संयुक्त राष्ट्र के प्रथम कार्यवाहक महासचिव
    ग्लेडविन जेब, जिन्हें सर ग्लेडविन जेब के नाम से जाना जाता है, का जन्म 25 अप्रैल 1900 को इंग्लैंड के यॉर्कशायर में हुआ था। वे एक प्रसिद्ध ब्रिटिश राजनयिक और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के कुशल विशेषज्ञ थे। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षित जेब ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वैश्विक शांति की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    वे 1945 में संयुक्त राष्ट्र के गठन के समय कार्यवाहक महासचिव नियुक्त किए गए थे और 1946 तक इस पद पर रहे, जब तक ट्राईग्वे ली को स्थायी महासचिव नहीं बनाया गया। उनकी नीतियों ने संयुक्त राष्ट्र की प्रारंभिक संरचना और कार्यप्रणाली को दिशा दी। 24 अक्टूबर 1996 को उनके निधन के साथ विश्व कूटनीति ने एक महान मार्गदर्शक खो दिया।
  4. इस्मत चुग़ताई (1915–1991): नारी चेतना की अग्रदूत लेखिका
    इस्मत चुग़ताई का जन्म 21 अगस्त 1915 को बदायूं, उत्तर प्रदेश में हुआ था। वे उर्दू साहित्य की सबसे बेबाक और क्रांतिकारी महिला लेखिकाओं में गिनी जाती हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने महिलाओं के अधिकार, लैंगिक समानता और समाज की कुरीतियों पर अपनी कलम से तीखे प्रहार किए।
    उनकी प्रसिद्ध कहानियों — लिहाफ, टेढ़ी लकीर, और घरवाली — ने न केवल उर्दू साहित्य में नई दिशा दी बल्कि स्त्री विमर्श की शुरुआत की। इस्मत की लेखनी समाज के दोहरे मानदंडों पर करारा प्रहार थी। 24 अक्टूबर 1991 को मुंबई में उनका निधन हुआ। वे आज भी हर उस महिला की आवाज हैं जो अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है।
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  6. रफ़ी अहमद क़िदवई (1894–1954): किसानों और मज़दूरों के सच्चे हमदर्द
    रफ़ी अहमद क़िदवई का जन्म 18 फरवरी 1894 को बाराबंकी, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई।
    कांग्रेस के अग्रणी नेता और स्वतंत्र भारत के पहले संचार मंत्री के रूप में उन्होंने देश में डाक सेवाओं और संचार व्यवस्था को मजबूत किया। वे एक सच्चे समाजसेवी और जननेता थे जिन्होंने ग्रामीण विकास, खाद्य वितरण और सामाजिक समानता के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया। 24 अक्टूबर 1954 को उनकी मृत्यु हुई। आज भी “क़िदवई हॉल” और “रफ़ी क़िदवई पुरस्कार” उनके कार्यों की स्मृति को जीवंत रखते हैं।
  7. धरमपाल (1922–2006): गांधीवादी विचारों के मर्मज्ञ इतिहासकार धरमपाल का जन्म 19 फरवरी 1922 को काशीपुर, उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) में हुआ था। वे एक प्रख्यात विचारक, इतिहासकार और गांधीवादी थे जिन्होंने भारतीय सभ्यता की गौरवशाली परंपरा को पुनः प्रतिष्ठित किया।
    उनका शोधकार्य — The Beautiful Tree, Indian Science and Technology in the Eighteenth Century — भारतीय शिक्षा व्यवस्था और तकनीकी ज्ञान के स्वदेशी स्वरूप पर प्रकाश डालता है। उन्होंने दिखाया कि भारत उपनिवेश काल से पहले ज्ञान, विज्ञान और नैतिकता का केंद्र था। 24 अक्टूबर 2006 को उनके निधन के साथ भारत ने एक ऐसे चिंतक को खो दिया जिसने आत्मगौरव की भावना जगाई।
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  9. मन्ना डे (1919–2013): सुरों के अमर साधक
    मन्ना डे का जन्म 1 मई 1919 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ था। वे भारतीय संगीत के स्वर्ण युग के महान पार्श्वगायक रहे। मैट्रिक के बाद उन्होंने स्कॉटिश चर्च कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की और संगीत की शिक्षा अपने चाचा कृष्णचंद्र डे से ली।
    उनकी आवाज़ में शास्त्रीयता और मधुरता का अद्भुत संगम था। “आये मेरी ज़मीं”, “ये रात भीगी भीगी”, “लागा चुनरी में दाग” जैसे गीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में गूंजते हैं। भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण (2005) और पद्म विभूषण (2007) से सम्मानित किया। 24 अक्टूबर 2013 को बेंगलुरु में उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी आवाज़ सदा अमर रहेगी।
  10. गिरिजा देवी (1929–2017): ठुमरी की रानी
    गिरिजा देवी का जन्म 8 मई 1929 को वाराणसी, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्हें “ठुमरी की रानी” कहा जाता था। उन्होंने संगीत की शिक्षा पंडित सरजू प्रसाद मिश्रा से प्राप्त की और बनारस घराने की इस शैली को नई ऊंचाई दी।
    उनकी गायकी में शास्त्रीयता, लोकधुन और भावनाओं का अनोखा संगम था। ठुमरी, चैती, कजरी और दादरा में उनकी पकड़ अद्भुत थी। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और आईटीसी संगीत रिसर्च अकादमी में अध्यापन कर संगीत की परंपरा को जीवंत रखा। पद्म विभूषण (2016) से सम्मानित गिरिजा देवी का निधन 24 अक्टूबर 2017 को हुआ। वे भारतीय संगीत के आकाश की अमर स्वर साधिका हैं।
  11. टी. एस. मिश्रा (1914–2005): प्रशासनिक कुशलता के प्रतीक
    टी. एस. मिश्रा का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुआ था। वे एक उत्कृष्ट प्रशासक और कुशल राजनेता रहे। भारतीय प्रशासनिक सेवा में उत्कृष्ट कार्य करने के बाद उन्हें असम राज्य का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
    उनका कार्यकाल सदैव ईमानदारी, अनुशासन और विकासोन्मुख दृष्टिकोण के लिए जाना गया। शिक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उन्होंने कई पहल कीं। 24 अक्टूबर 2005 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनके कार्य आज भी प्रेरणा देते हैं कि प्रशासन केवल शासन नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है।
    24 अक्टूबर केवल एक तिथि नहीं, बल्कि स्मृति और प्रेरणा का दिवस है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जिन विभूतियों ने इस दिन विदा ली, उन्होंने अपने कर्मों से राष्ट्र के निर्माण में अमिट योगदान दिया। राजनीति से लेकर संगीत तक, इतिहास से लेकर समाज तक — उन्होंने भारत की आत्मा को समृद्ध किया।

विज्ञान से कला तक – 24 अक्टूबर को जन्मे भारत के उज्ज्वल नक्षत्र

24 अक्टूबर को जन्मे महान व्यक्तित्व – जिन्होंने अपने कर्म और योगदान से भारत के इतिहास को दिशा दी


भारत का इतिहास केवल तिथियों और घटनाओं से नहीं बना, बल्कि उन असाधारण व्यक्तित्वों से निर्मित हुआ जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में अमिट छाप छोड़ी। 24 अक्टूबर का दिन अनेक ऐसे महान लोगों का जन्मदिवस है जिन्होंने राजनीति, विज्ञान, सिनेमा, साहित्य, समाजसेवा और कला के क्षेत्र में भारत का नाम विश्व पटल पर उज्ज्वल किया। आइए, जानें उन प्रेरणास्रोत व्यक्तित्वों के जीवन, संघर्ष, शिक्षा और योगदान की विस्तृत झलक—

  1. अनुराग ठाकुर (जन्म: 24 अक्टूबर 1974, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश)
    भारतीय राजनीति के युवा और ऊर्जावान चेहरों में से एक, अनुराग ठाकुर का जन्म हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में हुआ। वे पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के पुत्र हैं। दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से स्नातक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा।
    भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक अनुराग ठाकुर ने युवाओं को राजनीति में जोड़ने का अभियान चलाया। सांसद के रूप में उन्होंने विकास कार्यों में विशेष रुचि दिखाई। खेल जगत से गहरा नाता रखते हुए उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष के रूप में कई सुधारात्मक कदम उठाए। सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में उन्होंने “आत्मनिर्भर भारत” की भावना को जनसंचार के माध्यम से सशक्त किया। अनुराग ठाकुर आज आधुनिक भारत के एक ऊर्जावान, प्रगतिशील और दूरदर्शी नेता के रूप में पहचाने जाते हैं।
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  3. मल्लिका शेरावत (जन्म: 24 अक्टूबर 1972, हिसार, हरियाणा)
    मल्लिका शेरावत का जन्म हरियाणा के हिसार जिले में हुआ। असली नाम रीमा लांबा था, बाद में उन्होंने फिल्म जगत में आने के बाद मल्लिका शेरावत नाम अपनाया। दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज से दर्शनशास्त्र में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।
    2003 में फिल्म ख्वाहिश और मर्डर से मल्लिका ने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलने का साहस दिखाया और महिलाओं की स्वतंत्रता की मुखर आवाज बनीं। हॉलीवुड फिल्मों में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। मल्लिका ने अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और निडरता से यह साबित किया कि एक महिला किसी भी क्षेत्र में अपनी पहचान स्वयं गढ़ सकती है।
  4. कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन (जन्म: 24 अक्टूबर 1940, एर्नाकुलम, केरल)
    भारत के प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक और इसरो (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन का जन्म केरल के एर्नाकुलम में हुआ। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक और बैंगलोर विश्वविद्यालय से खगोल विज्ञान में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
    उनके नेतृत्व में भारत के कई महत्वाकांक्षी उपग्रह परियोजनाएं सफल रहीं। चंद्रयान मिशन की नींव रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। भारतीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के प्रमुख वास्तुकार के रूप में उन्होंने देश की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा दी। उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया। कस्तूरीरंगन भारत के वैज्ञानिक गौरव का प्रतीक हैं।
  5. संजीव चट्टोपाध्याय (जन्म: 24 अक्टूबर 1936, कोलकाता, पश्चिम बंगाल)
    बांग्ला साहित्य के प्रसिद्ध उपन्यासकार और लघुकथाकार संजीव चट्टोपाध्याय का जन्म कोलकाता में हुआ। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की।
    उनकी रचनाएँ समाज के यथार्थ को हास्य और व्यंग्य के माध्यम से उजागर करती हैं। श्रीकांत एर डायरी और गृह युद्ध जैसी रचनाएँ उनके सामाजिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करती हैं। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और बंकिमचंद्र पुरस्कार जैसे सम्मान प्राप्त हुए। संजीव चट्टोपाध्याय की लेखनी आज भी मानवीय संवेदना की गहराइयों को छूती है।
  6. आर. के. लक्ष्मण (जन्म: 24 अक्टूबर 1921, मैसूर, कर्नाटक)
    भारत के सुप्रसिद्ध कार्टूनिस्ट और व्यंग्यकार आर. के. लक्ष्मण का जन्म मैसूर में हुआ। वे प्रसिद्ध उपन्यासकार आर. के. नारायण के छोटे भाई थे। मैसूर विश्वविद्यालय से स्नातक शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने द टाइम्स ऑफ इंडिया में कार्टूनिस्ट के रूप में कार्य प्रारंभ किया।
    उनके “कॉमन मैन” (The Common Man) नामक पात्र ने भारतीय समाज के आम आदमी की भावनाओं, संघर्षों और व्यंग्य को दशकों तक जीवंत रखा। उनकी रेखाओं में हास्य था, पर उनमें एक गहरी सामाजिक चेतना भी झलकती थी। उन्हें पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया। आर. के. लक्ष्मण ने अपने चित्रों से भारत के जनमानस को स्वर दिया।
  7. जीवन (जन्म: 24 अक्टूबर 1915, श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर)
    हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता जीवन का जन्म श्रीनगर में हुआ। असली नाम ओमकरण नाथ धर था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1935 में की और लगभग छह दशकों तक हिंदी सिनेमा में सक्रिय रहे।
    वे खलनायक की भूमिका में उतने ही लोकप्रिय रहे जितने हास्य भूमिकाओं में। नया दौर, अमर अकबर एंथनी, और धर्मात्मा जैसी फिल्मों में उनकी यादगार भूमिकाएँ आज भी दर्शकों के मन में बसी हैं। जीवन ने अपनी अनोखी शैली से सिनेमा में विलेन के किरदार को नया आयाम दिया।
  8. लक्ष्मी सहगल (जन्म: 24 अक्टूबर 1914, मद्रास – अब चेन्नई, तमिलनाडु)
    स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेविका लक्ष्मी सहगल का जन्म मद्रास में हुआ। वे पेशे से डॉक्टर थीं और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आज़ाद हिंद फौज में “झाँसी की रानी रेजिमेंट” की कमांडर बनीं।
    उनकी शिक्षा मद्रास मेडिकल कॉलेज से हुई थी। देश की स्वतंत्रता के बाद उन्होंने कानपुर में गरीबों के लिए चिकित्सा सेवा समर्पित कर दी। लक्ष्मी सहगल सच्चे अर्थों में देशभक्ति, समर्पण और नारी शक्ति की प्रतीक थीं। 2002 में वे भारत की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार भी रहीं।
  9. अशोक मेहता (जन्म: 24 अक्टूबर 1911, गुजरात)
    भारत के समाजवादी विचारक और राजनीतिज्ञ अशोक मेहता का जन्म गुजरात में हुआ। उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की।
    स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने जेल यातनाएँ सही और स्वतंत्रता के बाद समाजवादी आंदोलन को नई दिशा दी। योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में उन्होंने ग्रामीण विकास और सामाजिक न्याय की नीतियाँ तैयार कीं।
    उनका योगदान भारत के लोकतंत्र को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने में अतुलनीय रहा। अशोक मेहता का नाम भारत के राजनीतिक चिंतन में सदैव सम्मानपूर्वक लिया जाएगा।
  10. प्रेमनाथ डोगरा (जन्म: 24 अक्टूबर 1884, जम्मू, जम्मू-कश्मीर)
    प्रेमनाथ डोगरा का जन्म जम्मू में हुआ। वे जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध नेता और जनसंघ के संस्थापकों में से एक थे। उन्होंने ‘एक देश, एक विधान, एक निशान’ के नारे को जनमानस तक पहुँचाया।
    डोगरा ने राज्य के एकीकरण और राष्ट्रवाद की भावना को प्रबल किया। उन्हें “शेर-ए-दुग्गर” के नाम से जाना जाता है। उनका जीवन भारतीय एकता और अखंडता के लिए समर्पित था।
  11. बहादुर शाह ज़फ़र (जन्म: 24 अक्टूबर 1775, दिल्ली)
    बहादुर शाह ज़फ़र, मुग़ल साम्राज्य के अंतिम बादशाह, का जन्म दिल्ली में हुआ। वे केवल शासक ही नहीं, एक उत्कृष्ट कवि भी थे। 1857 की क्रांति के समय उन्होंने विद्रोहियों का नैतिक नेतृत्व किया।
    हालाँकि ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें म्यानमार (रंगून) निर्वासित कर दिया, पर उनकी कविताएँ आज भी स्वतंत्रता की भावना जगाती हैं —
    “लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े दयार में…”
    बहादुर शाह ज़फ़र भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहले प्रतीक बन गए।
    समापन विचार:
    24 अक्टूबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास के विविध क्षेत्रों में प्रकाश फैलाने वाले सितारों का समूह है। इन महान आत्माओं ने अपने कर्म, विचार, और योगदान से भारत को गौरवान्वित किया। राजनीति, कला, विज्ञान, साहित्य, समाजसेवा — हर क्षेत्र में उन्होंने आदर्श स्थापित किए।

घटिया सड़क निर्माण पर भड़के लोग: “सरकारी धन की हो रही बर्बादी, जांच हो निष्पक्ष”

नेहरू नगर, चकिया मोहल्ले में सीसी रोड निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल — वार्डवासियों ने नगर पालिका को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।नगर क्षेत्र के नेहरू नगर, चकिया मोहल्ले में चल रहे सीसी सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय निवासियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है और मानक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जिससे सड़क टिकाऊ नहीं रह पाएगी।

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वार्डवासियों ने इस संदर्भ में नगर पालिका अध्यक्ष और कार्यपालक अधिकारी (EO) को पत्र भेजकर निर्माण कार्य की तत्काल जांच और ठेकेदार व जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
निवासियों की शिकायत: “घटिया सामग्री से बन रही सड़क”
शिकायतकर्ताओं ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि शांति तिवारी के मकान से पारस यादव के मकान तक बनाई जा रही सीसी सड़क में मानक से कम गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क में रेत, सीमेंट और कंक्रीट का अनुपात संतुलित नहीं है, जिससे उसकी मजबूती पर प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।
वार्डवासियों ने बताया कि उन्होंने इस बाबत सभासद को जानकारी दी, जिसके बाद सभासद ने अवर अभियंता के साथ स्थल निरीक्षण किया। बावजूद इसके, ठेकेदार ने कार्य में सुधार नहीं किया और निर्माण मानक के विपरीत जारी रखा।

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जनता में आक्रोश: “भ्रष्टाचार में लिप्त है तंत्र”स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका के कई निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। एक निवासी ने कहा —
“अगर जांच निष्पक्ष तरीके से हो जाए तो आधे से ज्यादा निर्माण कार्य फेल साबित होंगे। ठेकेदार 60 प्रतिशत लागत में 100 प्रतिशत काम दिखा रहा है, जबकि जांच अधिकारी भी कमीशनखोरी में शामिल हैं।”
लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकारी धन की बर्बादी न हो और सड़कें टिकाऊ व सुरक्षित बनें।
नेहरू नगर के इस प्रकरण ने नगर पालिका के निर्माण कार्यों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है, ताकि जनता का भरोसा बना रहे और भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके।

बरियारपुर में दिनदहाड़े चोरी, चोरों ने पुलिस को दी चुनौती

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। देवरिया जनपद के बरियारपुर थाना क्षेत्र के बगहा मठिया गांव में दिनदहाड़े चोरी की घटना सामने आई। गुरुवार दोपहर लगभग तीन बजे, अज्ञात चोरों ने घर में घुसकर अलमारी और बक्शा तोड़ गहने और नकदी चुरा लिए।

घटना हसरूदिन अंसारी उर्फ बिल्लर अंसारी के घर में हुई, जब परिवार के लोग मूंगफली के खेत में गए थे।

घटना का खुलासा

शाम को घर लौटने पर परिवार ने दरवाजा खुला और सामान बिखरा हुआ पाया। तुरंत बरियारपुर पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है, लेकिन चोरों ने पुलिस के लिए चुनौती पेश कर दी है।

अब देखने वाली बात यह है कि क्या पुलिस इस चोरी का खुलासा कर पाएगी या यह मामला लंबे समय तक अनसुलझा रह जाएगा।

🌏“24 अक्टूबर का इतिहास: जब दुनिया ने रचा नए युगों का सूत्रपात”

इतिहास का हर दिन कुछ न कुछ ऐसा संजोए होता है जो मानव सभ्यता को दिशा देता है। 24 अक्टूबर का दिन भी विश्व इतिहास में कई अहम पड़ावों का साक्षी रहा है—चाहे वह आध्यात्मिक नगरी अमृतसर की स्थापना हो या संयुक्त राष्ट्र संगठन (UN) का जन्म, जिसने शांति और सहयोग की नई परिभाषा दी। आइए जानें, 24 अक्टूबर के उन ऐतिहासिक क्षणों को जिन्होंने भारत और विश्व दोनों के भविष्य को आकार दिया।
🕉️ 1577 – गुरु रामदास जी ने बसाया पवित्र अमृतसर
24 अक्टूबर 1577 को चौथे सिख गुरु गुरु रामदास जी ने पवित्र नगरी अमृतसर की स्थापना की। उन्होंने यहाँ “अमृत सरोवर” नामक एक पवित्र सरोवर का निर्माण करवाया, जिसके नाम पर शहर का नाम पड़ा। यह नगर आगे चलकर स्वर्ण मंदिर का घर बना और सिख धर्म का आध्यात्मिक केंद्र बना। अमृतसर आज न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का भी प्रतीक है।
1579 – भारत पहुँचे पहले अंग्रेज पादरी
इसी दिन वर्ष 1579 में जेसुइट पादरी एस. जे. थामस पुर्तगाली जहाज से गोवा पहुँचे। वे भारत आने वाले पहले अंग्रेज पादरी थे। उनके आगमन ने भारत और पश्चिम के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक संपर्कों का नया अध्याय खोला। थामस के कार्यों ने ईसाई मिशनरी शिक्षा और संवाद की नींव रखी, जो आगे चलकर आधुनिक भारत के शिक्षा तंत्र में अहम भूमिका निभाई।
👑 1605 – जहाँगीर का ताजपोशी दिवस
1605 का यह दिन मुग़ल इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। उसी दिन सम्राट जहाँगीर ने आगरा में अपने पिता अकबर महान की मृत्यु के बाद गद्दी संभाली। जहाँगीर के शासनकाल में कला, चित्रकला और स्थापत्य को नई ऊँचाइयाँ मिलीं। उन्होंने “जहाँगीरनामा” जैसे ऐतिहासिक ग्रंथ की रचना करवाई, जो आज भी भारतीय इतिहास का अमूल्य दस्तावेज़ है।
⚔️ 1657 – कल्याण और भिवंडी पर हुआ अधिकार
24 अक्टूबर 1657 को मराठा सेनाओं ने कल्याण और भिवंडी को अपने अधीन किया। यह घटना छत्रपति शिवाजी महाराज के बढ़ते प्रभाव और स्वराज्य की स्थापना के संघर्ष में मील का पत्थर साबित हुई। यह विजय मराठा शक्ति के उभार की वह चिंगारी बनी जिसने आगे चलकर मुग़लों के विरुद्ध स्वतंत्रता की मशाल जलाई।
🌐 1945 – संयुक्त राष्ट्र संगठन (UNO) की स्थापना
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व शांति की आवश्यकता ने 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र संगठन (United Nations Organization) को जन्म दिया। इसका उद्देश्य युद्धों को रोकना, मानवाधिकारों की रक्षा करना और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना था। भारत इसके संस्थापक सदस्य देशों में से एक है। आज हर साल 24 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो शांति और एकता के मूल्यों की याद दिलाता है।
🚀 1946 – पहली बार अंतरिक्ष से पृथ्वी की तस्वीर
24 अक्टूबर 1946 को विज्ञान के इतिहास में एक बड़ा कदम रखा गया जब रॉकेट द्वारा पहली बार धरती की अंतरिक्ष से तस्वीर ली गई। यह प्रयोग अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा किया गया था। इस तस्वीर ने मानवता को पहली बार अपने ग्रह को बाहरी दृष्टि से देखने का अवसर दिया और आगे चलकर अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा बदल दी।
🏔️ 1947 – कश्मीर पर कबाइलियों का हमला
भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद, 24 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तानी कबाइलियों ने हमला किया। यह संघर्ष भारत-पाक युद्ध में बदल गया और इसी पृष्ठभूमि में महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय का निर्णय लिया। इस घटना ने भारतीय उपमहाद्वीप की राजनीति, सीमाओं और कूटनीति को गहराई से प्रभावित किया।

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❄️ 1948 – “शीत युद्ध” शब्द का पहला प्रयोग
24 अक्टूबर 1948 को अमेरिकी राजनयिक बर्नार्ड बारूक ने “शीत युद्ध” (Cold War) शब्द का पहली बार इस्तेमाल किया। उन्होंने यह शब्द अमेरिका और सोवियत संघ के बीच बढ़ते तनाव को व्यक्त करने के लिए कहा था। यह काल 20वीं सदी के वैश्विक राजनीति का निर्णायक युग बना, जिसने विज्ञान, तकनीक, सैन्य शक्ति और अंतरिक्ष दौड़ को नई दिशा दी।
👷‍♂️ 1975 – बंधुआ मजदूरी का अंत
भारत में सामाजिक न्याय के इतिहास में 24 अक्टूबर 1975 का दिन विशेष है। इस दिन सरकार ने बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अध्यादेश लागू किया। इस कानून ने मजदूरों को बंधनमुक्त किया और उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार दिया। यह कदम स्वतंत्र भारत के सामाजिक सुधारों की दिशा में ऐतिहासिक माना जाता है।
👟 1982 – पहली महिला मैराथन धावक
1982 में 24 अक्टूबर को सुधा माधवन भारत की पहली महिला बनीं जिन्होंने मैराथन दौड़ में हिस्सा लिया। उस दौर में महिलाओं का खेलों में भाग लेना भी चुनौतीपूर्ण था। सुधा की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी, जिसने भारतीय महिलाओं को खेल जगत में नई पहचान दिलाई।

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🚇 1984 – कोलकाता मेट्रो का शुभारंभ
24 अक्टूबर 1984 को भारत की पहली भूमिगत मेट्रो रेल सेवा कोलकाता मेट्रो की शुरुआत हुई। यह एस्प्लेनेड से भवानीपुर के बीच शुरू की गई थी। इस परियोजना ने भारत में आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम रखा। आज यह देश के कई महानगरों की जीवनरेखा बन चुकी है।
🕊️ 2000 – दक्षिण कोरिया का मिसाइल परीक्षण न करने का निर्णय
24 अक्टूबर 2000 को दक्षिण कोरिया ने लंबी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण न करने की घोषणा की। यह फैसला एशिया में शांति और स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया। इस निर्णय ने परमाणु अप्रसार और हथियार नियंत्रण की वैश्विक भावना को बल दिया।
🔭 2001 – नासा का मार्स ओडिसी मिशन
इस दिन नासा के 2001 मार्स ओडिसी अंतरिक्ष यान ने सफलतापूर्वक मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश किया। इस मिशन ने लाल ग्रह की सतह, तापमान और रासायनिक संरचना की अहम जानकारी दी। यह अंतरिक्ष विज्ञान में मानवता के नए अध्याय की शुरुआत थी, जिसने मंगल पर जीवन की संभावना की खोज को गति दी।

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🚀 2004 – ब्राजील का पहला रॉकेट परीक्षण
24 अक्टूबर 2004 को ब्राजील ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाई जब उसने अपना पहला सफल रॉकेट परीक्षण किया। इस उपलब्धि ने ब्राजील को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया जिनके पास स्वतंत्र अंतरिक्ष तकनीक थी। यह लातिन अमेरिकी देशों के लिए गर्व का क्षण बना।
✈️ 2005 – भारत-न्यूजीलैंड के बीच नई हवाई सेवा
24 अक्टूबर 2005 को भारत और न्यूजीलैंड के बीच नया हवाई सेवा समझौता हुआ। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक संबंधों को नया आयाम मिला। इस समझौते ने भारतीय यात्रियों के लिए ओशियानिया के द्वार खोले और वैश्विक जुड़ाव को और मजबूत किया।
24 अक्टूबर इतिहास का वह दिन है जिसने धर्म, विज्ञान, समाज और राजनीति सभी क्षेत्रों में परिवर्तन की लहरें उठाईं। गुरु रामदास जी की आध्यात्मिक दृष्टि से लेकर संयुक्त राष्ट्र की शांति की भावना तक, यह दिन मानव सभ्यता की प्रगति और सहयोग की मिसाल है। यह हमें याद दिलाता है कि हर युग में कुछ लोग और घटनाएँ इतिहास की दिशा मोड़ने की ताकत रखती हैं।

“अति स्वतंत्रता या संस्कारों की हार? सोशल मीडिया की चकाचौंध में खोती जा रही मानवता”

आज के डिजिटल युग में जब सोशल मीडिया, इंस्टाग्राम रील्स और वेब सीरीज़ नई पीढ़ी के आदर्श बन चुके हैं, तब सवाल उठना स्वाभाविक है — क्या हम आधुनिकता के नाम पर अपनी संस्कृति, मर्यादा और नैतिकता को खो रहे हैं? अश्लीलता, फूहड़पन और “कथित आज़ादी” के नाम पर फैलती मानसिक विषाक्तता अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के चरित्र पर चोट बन चुकी है। मीडिया में बलात्कार जैसी संवेदनशील घटनाओं को “न्यूज़ सेंसेशन” बना देना, फिल्मों में नग्नता को “कला की अभिव्यक्ति” कहना — यह सब कहीं न कहीं इंसानियत की जड़ों को कमजोर कर रहा है।

लेखक — राजकुमार मणि त्रिपाठी

  1. सोशल मीडिया: मनोरंजन या मानसिक प्रदूषण का अड्डा?
    इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफ़ॉर्म्स आज “स्वतंत्र अभिव्यक्ति” के नाम पर वह सब दिखा रहे हैं, जो समाज में कभी चर्चा योग्य भी नहीं माना जाता था। कुछ सेकेंड की रील्स में शरीर प्रदर्शन, गाली-गलौज और फूहड़ हरकतें “ट्रेंड” बन चुकी हैं।
    नवयुवक और किशोर इन दृश्यों से प्रभावित होकर “कूल” और “बोल्ड” बनने की कोशिश में अपने मूल संस्कारों से दूर जा रहे हैं। कई मामलों में यह “ट्रेंड” अपराध की दिशा में पहला कदम बन रहा है। जब सोशल मीडिया पर अश्लीलता को “स्वतंत्रता” का नाम दिया जाता है, तो सीमाओं की परिभाषा मिट जाती है।
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  3. फिल्मों और वेब सीरीज़ में बिक रही “संवेदना”
    आज फिल्में और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स समाज के आईने की जगह “बाजार” बन गए हैं।
    फिल्मकार यह भूल चुके हैं कि जो वे पर्दे पर दिखा रहे हैं, वही समाज में आदर्श बन रहा है।
    महिला किरदारों को “वस्तु” की तरह दिखाना, अपराध को “साहस” के रूप में पेश करना — यह सब मानसिक संतुलन को तोड़ रहा है।
    उदाहरण के तौर पर, हाल की कई चर्चित वेब सीरीज़ ने यौन अपराधों, हिंसा और अपराधी मानसिकता को “रोमांच” के रूप में दिखाया। परिणाम — युवाओं में अपराध और हिंसा के प्रति संवेदनशीलता खत्म हो रही है।
    वो सोचते हैं, “सब चलता है”, जबकि वास्तविकता में ये विचार ही समाज में बलात्कार, छेड़खानी और शोषण जैसी घटनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं।
  4. मीडिया की भूमिका: सूचना या सनसनी?
    समाचार माध्यमों की जिम्मेदारी है कि वे समाज में चेतना और जागरूकता फैलाएं।
    लेकिन दुर्भाग्य से, आज का मीडिया “रेप”, “मर्डर”, “स्कैंडल” जैसी खबरों को टीआरपी की दौड़ में मसालेदार बनाकर परोस रहा है।
    सुर्खियाँ इस तरह बनाई जाती हैं कि दर्द से ज्यादा उत्तेजना पैदा हो।
    बलात्कार पीड़िताओं की निजी जानकारी, चेहरे या पारिवारिक पृष्ठभूमि को बार-बार दिखाना क्या मानवता है?
    क्या यह “न्याय” की दिशा में कदम है या “क्लिकबेट” का खेल?
    इस तरह की रिपोर्टिंग समाज में भय और असंवेदनशीलता दोनों को बढ़ाती है।
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  6. एक वर्ग इसे केवल “खबर” समझता है, जबकि दूसरा उसी खबर को मनोरंजन की तरह देखता है।यह विडंबना नहीं तो और क्या है?
  7. परिवार में घटती संवाद की संस्कृति
    कभी घरों में बड़ों की नसीहतें, संस्कार और अनुशासन बच्चों के व्यक्तित्व का हिस्सा होते थे।
    अब मोबाइल स्क्रीन ने वह संवाद खत्म कर दिया है।
    “प्राइवेसी” और “पर्सनल स्पेस” के नाम पर बच्चे परिवार से अलग-थलग होते जा रहे हैं।
    जब रोक-टोक होती है, तो वही बच्चे “स्वतंत्रता पर हमला” मानकर विरोध दर्ज करते हैं — कई बार झूठे मुकदमे तक दर्ज करवा देते हैं।
    यह स्थिति केवल परिवार को नहीं, पूरे समाज को कमजोर बना रही है।
    क्योंकि जो पीढ़ी अपने माता-पिता पर भरोसा नहीं रखती, वह समाज के नियमों का सम्मान कैसे करेगी?
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  9. संस्कृति बनाम अति-स्वतंत्रता: संतुलन की जरूरत
    “स्वतंत्र विचारधारा” तब तक सुंदर है, जब तक वह मर्यादा और जिम्मेदारी के साथ जुड़ी हो।
    लेकिन जब स्वतंत्रता “अति” में बदल जाती है, तो वही पतन का कारण बनती है।
    संस्कृति हमें संयम सिखाती है, पर सोशल मीडिया हमें भड़काता है — “जो मन में आए करो”।
    नतीजा, आत्मसंयम खत्म और स्वार्थ की भावना हावी।
    यह याद रखना होगा कि “अभिव्यक्ति की आज़ादी” और “अश्लीलता” में बारीक लेकिन जरूरी फर्क है।
    अगर इस फर्क को मिटा दिया गया, तो समाज केवल आधुनिक नहीं, “निर्लज्ज” भी कहलाएगा।
  10. निंदक नियरे रखिए: पर आलोचना की संस्कृति कहाँ गई?
    कबीर दास ने कहा था — “निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय।”
    अर्थात जो आपकी आलोचना करता है, वह आपको सुधारता है।
    लेकिन आज की दुनिया में “आलोचना” को “हेट” मान लिया गया है।
    जो भी गलत दिखाए, उसे ट्रोल कर दिया जाता है।
    पर यह भूल जाते हैं कि बिना आलोचना के सुधार संभव नहीं।
    जब समाज आलोचना से डरने लगे, तो गलतियाँ आदर्श बन जाती हैं।
  11. जिम्मेदारी किसकी है?
    अब प्रश्न यह उठता है — आखिर इन हालातों के लिए कौन जिम्मेदार है?
    सरकार, मीडिया, सोशल प्लेटफॉर्म्स या आम जनता?
    उत्तर सरल है — सबकी साझा जिम्मेदारी है।
    सरकार को चाहिए कि सोशल मीडिया पर अश्लील और भ्रामक कंटेंट के खिलाफ सख्त नियम लागू करे।
    मीडिया संस्थानों को अपनी खबरों में “संवेदना” को प्राथमिकता देनी चाहिए।
    और समाज को — खुद से शुरुआत करनी चाहिए।
    घर-परिवार में संवाद बढ़े, बच्चों को स्क्रीन नहीं संस्कार दिए जाएँ,
    “लाइक” और “फॉलो” के बजाय “मूल्य” और “मर्यादा” सिखाई जाए — यही समाधान है।
  12. मानवता को बचाने की दिशा में कदम
  13. डिजिटल साक्षरता और नैतिक शिक्षा:
    स्कूलों में केवल तकनीक नहीं, डिजिटल नैतिकता भी सिखाई जानी चाहिए।
    बच्चों को यह समझाया जाए कि हर ऑनलाइन कंटेंट वास्तविक जीवन में असर डालता है।
  14. मीडिया में जिम्मेदारी:
    समाचार संस्थानों को बलात्कार जैसी घटनाओं की रिपोर्टिंग में संवेदनशीलता बरतनी चाहिए।
    अपराध को रोमांच नहीं, सामाजिक चेतावनी के रूप में प्रस्तुत करें।
  15. परिवार में संवाद:
    माता-पिता बच्चों से दोस्ताना व्यवहार करें, ताकि वे अपनी उलझनों को साझा कर सकें।
    घरों में चर्चा का माहौल बनना चाहिए, न कि चुप्पी का।
  16. सोशल मीडिया नियंत्रण:
    सरकार को ऐसे एल्गोरिद्म और फ़िल्टर लागू करने चाहिए, जो अश्लील या हिंसक कंटेंट को स्वतः रोक सकें।
    प्लेटफॉर्म्स पर आयु-सीमा और रिपोर्टिंग व्यवस्था को और सख्त बनाया जाए।
  17. संस्कारों की पुनर्स्थापना:
    मंदिर, गुरुकुल, और सामाजिक संगठनों के माध्यम से “संस्कार सप्ताह” या “परिवार संवाद दिवस” जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ।
    इससे समाज में “मानवता” के बीज पुनः बोए जा सकते हैं।
  18. निष्कर्ष: आधुनिकता जरूरी, पर मर्यादा सर्वोपरि
    हम आधुनिक हों, यह समय की माँग है,
    लेकिन अगर आधुनिकता के नाम पर हम अपनी संस्कृति, नैतिकता और मानवता खो दें,
    तो वह प्रगति नहीं, पतन है।
    आज जरूरत है एक “संतुलित स्वतंत्रता” की —
    जहाँ विचारों की आज़ादी भी हो, पर मर्यादा की सीमा भी बनी रहे।
    जहाँ अभिव्यक्ति का हक हो, पर दूसरों की गरिमा का सम्मान भी हो।
    और जहाँ परिवार, समाज और संस्कृति मिलकर नई पीढ़ी को “स्मार्ट” नहीं, “संवेदनशील” बनाएं।
    राजकुमार मणि त्रिपाठी
    (लेखक, सामाजिक चिंतक)

🌙 24 अक्टूबर 2025 राशिफल: आज किस राशि की चमकेगी किस्मत, कौन रहेगा सतर्क?

🌞 आज का राशिफल 24 अक्टूबर 2025, शुक्रवार

“चंद्र गोचर से जानें – कौन सी राशि चमकाएगी किस्मत की दिशा”

24 अक्टूबर 2025, शुक्रवार का दिन ऊर्जा, अवसर और निर्णय का संकेत दे रहा है। चंद्रमा का गोचर आपके व्यवहार और कर्म पर विशेष प्रभाव डालेगा। कुछ राशियाँ बड़ी सफलता प्राप्त करेंगी तो कुछ को धैर्य से काम लेना होगा। आइए जानें, पं. सत्य प्रकाश पाण्डेय के अनुसार — मेष से मीन तक सभी राशियों का आज का भविष्यफल।

मेष राशि (Aries) — (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
कार्य/व्यवसाय: नए प्रोजेक्ट और नेतृत्व की जिम्मेदारी मिलेगी। वरिष्ठों की प्रशंसा प्राप्त होगी।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में मन लगेगा।
कला/संगीत: नए अवसर मिलेंगे, प्रस्तुति सराही जाएगी।
राजनीति/प्रशासन: प्रभाव बढ़ेगा, योजनाओं को सफलता मिलेगी।
आर्थिक स्थिति: स्थिर, अनावश्यक खर्चों से बचें।
स्वास्थ्य: थकान महसूस होगी, विश्राम लें।
शुभ रंग: लाल शुभ अंक: 9 पूजा: हनुमान जी की आराधना लाभदायक।
वृषभ राशि (Taurus) — (ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
कार्य/व्यवसाय: निवेश या धन लेनदेन में सावधानी रखें।
शिक्षा: अध्ययन में मन कम लग सकता है, एकाग्रता जरूरी।
कला/संगीत: प्रेरणा मिलेगी, कार्य में नई दिशा बनेगी।
राजनीति/प्रशासन: विरोधी सक्रिय, संयम रखें।
आर्थिक स्थिति: सामान्य, खर्च बढ़ सकते हैं।
स्वास्थ्य: भोजन पर नियंत्रण रखें।
शुभ रंग: सफेद शुभ अंक: 6 पूजा: मां लक्ष्मी की आराधना शुभफलदायी।

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मिथुन राशि (Gemini) — (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
कार्य/व्यवसाय: नए संपर्क बनेंगे, प्रोजेक्ट शुरू हो सकता है।
शिक्षा: सफलता के योग, एकाग्रता बढ़ेगी।
कला/संगीत: आपकी कला से लोग प्रभावित होंगे।
राजनीति/प्रशासन: पहचान और सम्मान बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: लाभ के संकेत।
स्वास्थ्य: मानसिक तनाव से बचें।
शुभ रंग: हरा शुभ अंक: 5 पूजा: श्री गणेश की आराधना करें।
कर्क राशि (Cancer) — (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
कार्य/व्यवसाय: मतभेदों से बचें, कार्य पर ध्यान दें।
शिक्षा: भ्रम की स्थिति से दूर रहें।
कला/संगीत: रचनात्मक कार्य में सफलता।
राजनीति/प्रशासन: संयम से निर्णय लें।
आर्थिक स्थिति: स्थिर, निवेश सोचकर करें।
स्वास्थ्य: पाचन संबंधी समस्या।
शुभ रंग: क्रीम शुभ अंक: 2 पूजा: मां पार्वती की उपासना करें।
सिंह राशि (Leo) — (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
कार्य/व्यवसाय: मेहनत का फल, प्रतिष्ठा में वृद्धि।
शिक्षा: सफलता के संकेत।
कला/संगीत: प्रसिद्धि में वृद्धि।
राजनीति/प्रशासन: निर्णय क्षमता बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: लाभ के अवसर।
स्वास्थ्य: ऊर्जा से भरपूर।
शुभ रंग: सुनहरा शुभ अंक: 1 पूजा: सूर्य देव की आराधना लाभकारी।

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कन्या राशि (Virgo) — (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
कार्य/व्यवसाय: अनुशासन से सफलता।
शिक्षा: ध्यान केंद्रित रहेगा।
कला/संगीत: सृजनात्मकता में सुधार।
राजनीति/प्रशासन: जिम्मेदारी बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: स्थिर, खर्च नियंत्रित रखें।
स्वास्थ्य: सुधार के योग।
शुभ रंग: नीला शुभ अंक: 7 पूजा: विष्णु जी की आराधना।
तुला राशि (Libra) — (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
कार्य/व्यवसाय: उन्नति का मार्ग खुलेगा, नया अवसर।
शिक्षा: करियर दिशा तय करने का उत्तम समय।
कला/संगीत: प्रसिद्धि मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: सफलता और सम्मान।
आर्थिक स्थिति: स्थिरता व लाभ।
स्वास्थ्य: योग व ध्यान लाभदायक।
शुभ रंग: गुलाबी शुभ अंक: 3 पूजा: मां सरस्वती की आराधना करें।
वृश्चिक राशि (Scorpio) — (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
कार्य/व्यवसाय: नई चुनौतियाँ आएंगी, पर सफलता सुनिश्चित।
शिक्षा: मेहनत रंग लाएगी।
कला/संगीत: आत्मविश्वास बढ़ेगा।
राजनीति/प्रशासन: विवादों से बचें।
आर्थिक स्थिति: लाभ संभव।
स्वास्थ्य: थकान से बचें।
शुभ रंग: लाल शुभ अंक: 8 पूजा: शिव जी का रुद्राभिषेक करें।

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धनु राशि (Sagittarius) — (ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)
कार्य/व्यवसाय: पदोन्नति या यात्रा के योग।
शिक्षा: उच्च शिक्षा में सफलता।
कला/संगीत: सम्मान व पहचान।
राजनीति/प्रशासन: नए अवसर।
आर्थिक स्थिति: लाभ व निवेश योग्य समय।
स्वास्थ्य: सक्रियता व उत्साह।
शुभ रंग: पीला शुभ अंक: 4 पूजा: बृहस्पति देव की आराधना।
मकर राशि (Capricorn) — (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
कार्य/व्यवसाय: जिम्मेदारी बढ़ेगी, सफलता भी मिलेगी।
शिक्षा: एकाग्रता आवश्यक।
कला/संगीत: प्रयास से उपलब्धि।
राजनीति/प्रशासन: वरिष्ठों का सहयोग।
आर्थिक स्थिति: संतुलन रखें।
स्वास्थ्य: मानसिक तनाव घटाएं।
शुभ रंग: धूसर शुभ अंक: 5 पूजा: शनिदेव की आराधना करें।

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कुंभ राशि (Aquarius) — (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
कार्य/व्यवसाय: नई योजनाओं में सफलता।
शिक्षा: नवाचार से प्रगति।
कला/संगीत: रचनात्मकता बढ़ेगी।
राजनीति/प्रशासन: जनता से जुड़ाव बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: सुधार के योग।
स्वास्थ्य: सामान्य।
शुभ रंग: बैंगनी शुभ अंक: 6 पूजा: श्री कृष्ण की आराधना शुभफलदायी।
मीन राशि (Pisces) — (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
कार्य/व्यवसाय: जल्दबाजी में निर्णय न लें।
शिक्षा: मनन-चिंतन का दिन।
कला/संगीत: सृजनात्मक विचार प्रबल।
राजनीति/प्रशासन: संयम से कार्य करें।
आर्थिक स्थिति: सामान्य।
स्वास्थ्य: मानसिक तनाव से बचें।
शुभ रंग: आसमानी शुभ अंक: 2 पूजा: विष्णु जी की आराधना करें।
📿 आज का विशेष संकेत:
“जिसे कर्म का बल साथ है, उसी पर ग्रह भी कृपा करते हैं।”
पं. सत्य प्रकाश पाण्डेय

✨सौभाग्य का सवेरा: 24 अक्टूबर 2025 का दिव्य पंचांग — जब अनुराधा नक्षत्र में झरे शुभ ऊर्जा के पुष्प ✨

🕉️ आज का पंचांग — 24 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार)


तिथि: कार्तिक शुक्ल पक्ष तृतीया
संवत्सर: विक्रम संवत 2082 (कालयुक्त) | शक संवत 1947 (विश्वावसु)
माह: कार्तिक
पक्ष: शुक्ल पक्ष
वार: शुक्रवार
🌞 सूर्य और चंद्र संबंधी विवरण
सूर्योदय: 6:31 AM
सूर्यास्त: 5:50 PM
चन्द्रोदय: 8:46 AM
चन्द्रास्त: 7:32 PM
सूर्य राशि: तुला
चंद्र राशि: वृश्चिक (पूरा दिन और रात्रि)
अयन: दक्षिणायन
द्रिक ऋतु: हेमंत
वैदिक ऋतु: शरद

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🌼 तिथि और नक्षत्र
तृतीया तिथि: 23 अक्टूबर रात्रि 10:47 PM से 25 अक्टूबर 01:19 AM तक
चतुर्थी तिथि: 25 अक्टूबर 01:19 AM से 26 अक्टूबर 03:48 AM तक
नक्षत्र: अनुराधा — 24 अक्टूबर 04:51 AM से 25 अक्टूबर 07:51 AM तक
🔯 योग और करण
योग:सौभाग्य योग — 24 अक्टूबर 04:59 AM से 25 अक्टूबर 05:54 AM तक
शोभन योग — 25 अक्टूबर 05:54 AM से 26 अक्टूबर 06:45 AM तक
करण:तैतिल — 23 अक्टूबर 10:47 PM से 24 अक्टूबर 12:03 PM तक
गर — 24 अक्टूबर 12:03 PM से 25 अक्टूबर 01:20 AM तक
वणिज — 25 अक्टूबर 01:20 AM से 25 अक्टूबर 02:35 PM तक

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🌙 शुभ और अशुभ मुहूर्त
🕰️ शुभ काल
अभिजीत मुहूर्त: 11:48 AM – 12:33 PM
अमृत काल: 07:53 PM – 09:41 PM
ब्रह्म मुहूर्त: 04:56 AM – 05:44 AM
⚠️ अशुभ काल
राहु काल: 10:46 AM – 12:11 PM
यम गण्ड: 3:00 PM – 4:25 PM
कुलिक: 7:56 AM – 9:21 AM
दुर्मुहूर्त: 08:47 AM – 09:32 AM, 12:33 PM – 01:18 PM
वर्ज्यम्: 09:21 AM – 11:09 AM
🪔 सर्वार्थसिद्धि योग
24 अक्टूबर 04:51 AM से 25 अक्टूबर 06:32 AM तक
(जब अनुराधा नक्षत्र और गुरुवार का संगम होता है, तब यह योग अत्यंत शुभ और मनोवांछित फल देने वाला माना गया है।)
🌤️ दिन की चौघड़िया (Day Choghadiya)
कालखंड समय फल

चर 06:31 AM – 07:56 AM यात्रा एवं प्रारंभ हेतु शुभ
लाभ 07:56 AM – 09:21 AM आर्थिक लाभ
अमृत (वार वेला) 09:21 AM – 10:46 AM सर्वश्रेष्ठ समय
काल (काल वेला) 10:46 AM – 12:11 PM अशुभ
शुभ 12:11 PM – 01:35 PM कार्य सिद्धि
रोग 01:35 PM – 03:00 PM स्वास्थ्य में सावधानी
उद्बेग 03:00 PM – 04:25 PM तनावकारी समय
चर 04:25 PM – 05:50 PM यात्रा हेतु शुभ

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🌙 रात्रि की चौघड़िया (Night Choghadiya)
कालखंड समय फल

रोग 05:50 PM – 07:25 PM स्वास्थ्य में ध्यान दें
काल 07:25 PM – 09:00 PM अशुभ
लाभ 09:00 PM – 10:36 PM धन लाभ
उद्बेग 10:36 PM – 12:11 AM अनिश्चित काल
शुभ 12:11 AM – 01:46 AM शुभ कार्यों हेतु श्रेष्ठ
अमृत 01:46 AM – 03:21 AM अत्यंत मंगलकारी
चर 03:21 AM – 04:57 AM यात्रा आरंभ हेतु उपयुक्त
रोग 04:57 AM – 06:32 AM ध्यान व संयम रखें
🌸 विशेष संकेत
आज का दिन शुक्रवार और सौभाग्य योग से युक्त है — यह समय मांगलिक कार्यों, सौंदर्य, सौहार्द और समृद्धि के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है।
अनुराधा नक्षत्र मित्रता, संतुलन और स्थिरता का प्रतीक है। इस नक्षत्र में किए गए संकल्प दीर्घकालीन सफलता प्रदान करते हैं।
चंद्रमा वृश्चिक राशि में होने के कारण आज भावनात्मक गहराई और निर्णय में दृढ़ता का योग रहेगा।🔮 “24 अक्टूबर का यह शुक्रवार आपकी इच्छाओं की पूर्ति, शांति और सौभाग्य लेकर आए — बस राहुकाल में कोई नया कार्य प्रारंभ न करें।”

ज्वेलरी दुकान में हड़कंप: दुकानदार ने ग्राहकों पर फेंका एसिड, छह लोग झुलसे, गिरफ्तार

भागलपुर / देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। मईल थाना क्षेत्र के मईल चौराहे पर स्थित श्वेता ज्वेलर्स में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया जब दुकान मालिक ने ग्राहकों पर एसिड फेंक दिया। घटना सुबह लगभग 11:30 बजे की बताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, चंदन राजभर अपनी बहन के साथ दुकान पर अपने बंधक रखे आभूषण छुड़ाने के लिए पहुंचे थे। बताया गया कि रुपये देने के बावजूद दुकानदार आभूषण लौटाने से इंकार कर रहा था। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने पर श्वेता ज्वेलर्स के मालिक अरविंद वर्मा ने आभूषण साफ करने में इस्तेमाल होने वाला एसिड ग्राहकों पर फेंक दिया।

इस घटना में चंदन राजभर और उनकी बहन गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि चार अन्य लोग भी एसिड की चपेट में आ गए। सभी घायलों को तत्काल महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।

सूचना मिलते ही मईल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। आरोपी ज्वेलर अरविंद वर्मा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दुकान को सील कर दिया है और दुकानदार के खिलाफ विधिक कार्रवाई जारी है।

गौशाला का भूमि पूजन संपन्न

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)l जैतीपुर गुरुवार को क्षेत्र के गांव बैसरा में गौशाला के निर्माण के लिए उदासीन अखाड़ा के महंत विष्णु दास द्वारा दान दी गई जमीन पर गौशाला निर्माण के लिए समाज सेवी हरिओम शर्मा नें विधिवत तरीके से हवन पूजन कर संकल्प लिया।कहा गाय का सनातन धर्म में अपना अलग ही महत्व है।गाय में सभी देवी देवताओं का वास है यह संकल्प समर्पण और आस्था का प्रतीक है जो गायों को बीमारी, भुखमरी से बचाने में मदद करेगा।उन्होंने कहा शीघ्र ही गौशाला का निर्माण कराया जाएगा।भूमि पूजन कार्यक्रम में अयोध्या,हरिद्वार सहित क्षेत्र संत महात्मा एवं गणमान्य लोग शामिल हुए। उमेश मिश्रा अनंगपाल सिंह,नरवीर सिंह,सुधीर शर्मा आदि ने हवन में आहुति देकर कार्यक्रम को सम्पन्न कराया।