Sunday, July 5, 2026
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कटोरे में बचपन नहीं,अधिकार चाहिए

बचपन बिक रहा है: बच्चों से भीख मंगवाना एक सामाजिक अपराध

“मासूम बच्चों का शोषण सिर्फ गरीबी का परिणाम नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था की बड़ी विफलता है।”

मासूम बच्चों का शोषण समाज की गंभीर समस्या बन चुका है। भीख मंगवाना केवल गरीबी का नतीजा नहीं, बल्कि बच्चों की मासूमियत का फायदा उठाने वाला व्यवस्थित व्यवसाय है। लोग दया के भाव में पैसा देते हैं, जबकि बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित होते हैं। समाज, सरकार और नागरिकों को मिलकर जागरूकता फैलानी चाहिए, चाइल्डलाइन (1098) और एनजीओ के माध्यम से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, और उन्हें शिक्षा व सुरक्षित वातावरण देना प्राथमिकता बनानी चाहिए। बचपन बच्चों का अधिकार है, किसी का व्यवसाय नहीं।
हमारे समाज में बच्चों का बचपन उनकी सबसे बड़ी संपत्ति है। उनका खेलना, पढ़ना, सीखना और सुरक्षित वातावरण में पनपना ही उनका अधिकार है। लेकिन बच्चों का शोषण, भीख मंगवाने के लिए उनका इस्तेमाल और उनकी मासूमियत का लाभ उठाना आज एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुका है।

भीख मंगवाना केवल एक व्यक्तिगत समस्या नहीं है; यह एक व्यवस्थित व्यवसाय बन चुका है। छोटे शहरों और बड़े शहरों में यह आम दृश्य है कि मासूम बच्चे हाथ में थाली, कपड़े या किसी वस्तु के साथ चलते हैं, और लोग उनके मासूम चेहरों पर दया दिखाकर पैसे डाल देते हैं। यह न केवल बच्चों के बचपन को छीनता है, बल्कि उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से भी प्रभावित करता है।

समाज की जागरूकता की कमी, लोगों का दया भाव और कुछ परिवारों की आर्थिक मजबूरी मिलकर इस समस्या को बढ़ावा देते हैं। यह सिर्फ गरीबी का नतीजा नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है।

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बचपन किसी भी मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील हिस्सा होता है। यह वह समय है जब बच्चे सीखते हैं, अनुभव प्राप्त करते हैं और अपनी पहचान बनाते हैं। लेकिन जब बच्चों को भीख मंगवाने या किसी अन्य शोषण के लिए मजबूर किया जाता है, तो उनका विकास बाधित होता है।

भीख मंगवाना कभी-कभी आर्थिक मजबूरी का नतीजा हो सकता है, लेकिन जब यह नियमित रूप से होता है, और बच्चे को मजबूर किया जाता है, तो यह शोषण बन जाता है। मासूमियत का फायदा उठाकर बच्चों से पैसे कमाना एक नैतिक अपराध है।

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समाज की भूमिका यहां महत्वपूर्ण बन जाती है। लोग यह सोचकर पैसा देते हैं कि वे मदद कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में वे बच्चों के शोषण को प्रोत्साहित कर रहे हैं। माता-पिता और परिवार की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने बच्चों को इस तरह की गतिविधियों से बचाएं।

भारत में बाल श्रम और बच्चों से भीख मंगवाने को रोकने के लिए कई कानून हैं। बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम बच्चों को मजदूरी और शोषण से बचाने के लिए बनाया गया है। इसके अलावा, चाइल्डलाइन 1098 जैसी सेवाएँ 24×7 बच्चों की मदद के लिए उपलब्ध हैं।

एनजीओ और सामाजिक संगठन भी सक्रिय रूप से बच्चों को शोषण से बचाने और उन्हें शिक्षा उपलब्ध कराने का काम कर रहे हैं। लेकिन वास्तविक चुनौती यह है कि कई बार बच्चे और उनके माता-पिता कानूनी संरचना से अनजान रहते हैं, और शोषण नेटवर्क इतने संगठित होते हैं कि उन्हें पकड़ना मुश्किल होता है।

सरकार और समाज को मिलकर बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता फैलानी होगी और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन देना होगा।

समाज का दया भाव और सहानुभूति अक्सर बच्चों के शोषण का कारण बन जाती है। अगर लोग बच्चों को भीख देने के बजाय सही तरीके से मदद करें, तो वे शोषण को बढ़ने से रोक सकते हैं।

स्थानीय समुदाय, स्कूल, माता-पिता और पड़ोसी मिलकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। बच्चों को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा और खेलकूद का अवसर देना उनके विकास के लिए जरूरी है।

समाज को यह समझना होगा कि केवल पैसे देना बच्चों की मदद नहीं है। सही कार्रवाई, जैसे कि एनजीओ, चाइल्डलाइन और सामाजिक संस्थाओं को सूचित करना, ही बच्चों को शोषण से बचा सकती है।

भीख मंगवाना कई जगहों पर आर्थिक व्यवसाय बन चुका है। कुछ परिवार और नेटवर्क मासूम बच्चों को इस्तेमाल करके पूरे दिन हजारों रुपये कमाते हैं। यह सिर्फ बच्चों की मासूमियत का फायदा उठाना नहीं है, बल्कि उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित करना भी है।

पैसा देने वाले लोग यह सोचते हैं कि वे दया कर रहे हैं, लेकिन असल में वे इस प्रणाली को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। यह एक चक्र बन जाता है, जिसमें बच्चों का शोषण जारी रहता है। बच्चों के भविष्य और समाज की नैतिक जिम्मेदारी के लिहाज से यह गंभीर समस्या है।

इस समस्या का समाधान समाज, सरकार और नागरिकों के मिलकर काम करने में है। बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के लिए कदम उठाना जरूरी है।

पैसे देने की बजाय मदद करें। बच्चों को भीख देने के बजाय उन्हें शिक्षा, खेल और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करवाएं। बच्चों की सुरक्षा के लिए चाइल्डलाइन (1098) और मान्यता प्राप्त एनजीओ से संपर्क करें। समाज में बच्चों के अधिकारों और शोषण की समस्या के बारे में जागरूकता बढ़ाएं। स्कूल, माता-पिता और पड़ोसी मिलकर बच्चों के सुरक्षित वातावरण को सुनिश्चित करें।

सिर्फ दया भाव या छोटे पैसों से बच्चों की मदद नहीं होगी। सही कार्रवाई, जागरूकता और कानूनी उपाय ही उन्हें बचा सकते हैं।

बचपन बच्चों का अधिकार है, किसी का व्यवसाय नहीं। मासूम बच्चों का शोषण समाज की नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी को चुनौती देता है। हमें यह समझना होगा कि बच्चों को सुरक्षित, शिक्षित और स्वतंत्र वातावरण देना हमारा कर्तव्य है।

समाज, सरकार और नागरिकों के मिलकर सही कदम उठाने से ही इस समस्या का समाधान संभव है। जागरूकता, शिक्षा और सहयोग से ही हम बच्चों को उनका बचपन वापस दिला सकते हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव रख सकते हैं।

डॉ प्रियंका सौरभ

“राष्ट्रपति शिक्षक सम्मान से सम्मानित डॉ. अमित कुमार द्विवेदी का पैतृक गांव में भावपूर्ण स्वागत, समाज में प्रेरणा की मिसाल”

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) ग्राम सभा चकिया दुबौली, रामकोला, जनपद कुशीनगर में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक अवसर देखने को मिला। भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू द्वारा शिक्षक सम्मान से सम्मानित किए जाने वाले डॉ. अमित कुमार द्विवेदी का उनके पैतृक निवास पर भव्य स्वागत और प्रीति भोज का आयोजन किया गया।

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इस खास अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य एसोसिएशन उत्तर प्रदेश, विशेष आमंत्रित सदस्य समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश श्री कमलेश पांडेय भी उपस्थित रहे। उन्होंने डॉ. अमित कुमार द्विवेदी को उनके उत्कृष्ट शिक्षण योगदान और देश में शिक्षा के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य के लिए हृदय से बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की।

डॉ. अमित कुमार द्विवेदी ने शिक्षा के क्षेत्र में जो समर्पण और मेहनत दिखाई है, वह न केवल कुशीनगर बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके योगदान को सम्मानित करने के लिए इस भव्य स्वागत समारोह में स्थानीय समाज के लोग, शिक्षकों और विद्यार्थियों की बड़ी संख्या ने भाग लिया।

कमलेश पाण्डेय ने इस अवसर पर कहा, “डॉ. अमित कुमार द्विवेदी का यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि हमारे समाज और युवाओं के लिए भी प्रेरणा है। हमें ऐसे शिक्षकों की आवश्यकता है, जो ज्ञान के साथ-साथ चरित्र निर्माण में भी मार्गदर्शन करें।”

इस कार्यक्रम में न केवल सम्मान समारोह बल्कि एक प्रीति भोज का आयोजन भी किया गया, जिसमें ग्रामीण और गणमान्य नागरिकों ने भाग लेकर डॉ. अमित कुमार द्विवेदी के उपलब्धियों का जश्न मनाया। यह आयोजन शिक्षा के महत्व और समाज में शिक्षक की भूमिका को रेखांकित करने वाला यादगार अवसर साबित हुआ।

भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुके तेजस्वी यादव पर नित्यानंद राय का वार — कहा, बिहार को वर्षों पीछे धकेलने वाले अब विकास की बात कर रहे हैं

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार की सियासत में चुनावी तापमान तेज़ी से बढ़ता जा रहा है। इसी बीच, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला है। राय ने तेजस्वी यादव को “भ्रष्टाचार का प्रतीक” बताते हुए कहा कि वे अपने परिवार के लिए धन-संपत्ति और साम्राज्य खड़ा करने में लगे रहे, जिसके कारण बिहार वर्षों पीछे चला गया।

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एएनआई से बातचीत में नित्यानंद राय ने कहा कि, “जिस व्यक्ति पर भ्रष्टाचार के आरोप साबित हो चुके हैं और जिसने अकूत संपत्ति अर्जित की है, वह अगर अब विकास की बात करता है तो यह बिहार की जनता के साथ मज़ाक है।” उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव के परिवार की राजनीति केवल ‘अपनों को लाभ पहुंचाने’ तक सीमित रही है, न कि जनता की सेवा तक।

राय की यह टिप्पणी उस समय आई है जब तेजस्वी यादव ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि विपक्षी महागठबंधन बिहार की 20 साल पुरानी ‘बेकार डबल इंजन सरकार’ को उखाड़ फेंकेगा, जिसमें “एक इंजन भ्रष्ट और दूसरा आपराधिक” है। तेजस्वी ने यह भी कहा कि वे मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं, बल्कि “बिहार का भविष्य बनाने” की लड़ाई लड़ रहे हैं।

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वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी तेजस्वी यादव की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले में 32.5 साल की सजा हुई है और तेजस्वी पर आईपीसी की धारा 420 के तहत मुकदमे दर्ज हैं, तो जनता को सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए।

भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की डबल इंजन सरकार ने बिहार को विकास के नए पथ पर अग्रसर किया है, जबकि महागठबंधन केवल सत्ता की भूख में जनता को भ्रमित कर रहा है।

“हर घर में नौकरी, हर दीदी को सम्मान — तेजस्वी का वादा, बदलता बिहार!”

बिहार की राजनीति में नया उत्साह तब आया जब राजद नेता तेजस्वी यादव को महागठबंधन ने मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया। अब पूरा गठबंधन 28 अक्टूबर को अपना संयुक्त चुनाव घोषणापत्र जारी करने जा रहा है। यह घोषणापत्र सिर्फ़ चुनावी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि बिहार के रोज़गार, आजीविका और सम्मान की नई दिशा दिखाने वाला विकास संकल्प पत्र बताया जा रहा है।

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी महागठबंधन ने चुनावी मैदान में बड़ा दांव चला है। राजद (राष्ट्रीय जनता दल) के नेतृत्व में बनने जा रहे इस गठबंधन ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा और वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है। इसके साथ ही गठबंधन अब 28 अक्टूबर को अपना संयुक्त घोषणापत्र (Manifesto) जारी करने की तैयारी में है।

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इस घोषणापत्र में तेजस्वी यादव के प्रमुख वादे — हर परिवार को रोजगार, जीविका दीदियों का स्थायीकरण, ब्याजमुक्त ऋण माफी, और 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर — शामिल होंगे। साथ ही कांग्रेस पार्टी के मुफ़्त बिजली, सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर जैसे जनकल्याणकारी वादों को भी इसमें जगह दी जाएगी।

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तेजस्वी यादव ने कहा है कि यह घोषणापत्र “जुमलेबाज़ी नहीं, बल्कि जनता से किया गया वादा” है। पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा, “हमारी सरकार बनने के 20 दिनों के भीतर नया कानून बनेगा और 20 महीनों में बिहार का हर घर रोजगार से जुड़ जाएगा।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जीविका दीदियों के लिए विशेष प्रावधान किए जाएंगे — ब्याज ऋण माफी, प्रति माह ₹2000 का अतिरिक्त भत्ता और 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा। गौरतलब है कि फिलहाल राज्य में 1.45 करोड़ से अधिक जीविका दीदियाँ सक्रिय हैं, जिनकी भूमिका ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अहम है।

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महागठबंधन का यह घोषणापत्र विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर केंद्रित होगा। विपक्ष का दावा है कि यह घोषणापत्र बिहार की जनता को “रोज़गार का अधिकार और जीवन का सम्मान” देगा।

दिवाली का डरावना चेहरा: 14 बच्चों की आंखों की रोशनी गई

🧒 “दिवाली की रोशनी में अंधेरा: ज़हरीली ‘कार्बाइड गन’ से 150 से अधिक बच्चे घायल, कई ने खोई आंखों की रोशनी”

भोपाल/विदिशा (एमपी)। दिवाली की खुशियों के बीच मध्य प्रदेश से आई ये खबर दिल दहला देने वाली है। स्थानीय स्तर पर बनी खतरनाक “कार्बाइड गन” बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। एक चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन दिनों में 150 से ज़्यादा बच्चों को गंभीर नेत्र चोटों के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 14 बच्चों ने हमेशा के लिए अपनी आंखों की रोशनी खो दी है।

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सबसे ज्यादा मामले विदिशा जिले से सामने आए हैं, जहां सरकारी प्रतिबंध के बावजूद ये गन खुलेआम ₹150 से ₹200 में बिक रही हैं। भोपाल और विदिशा के अस्पतालों में 100 से अधिक बच्चों का इलाज चल रहा है। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने बताया, “यह कोई खिलौना नहीं, बल्कि एक विस्फोटक यंत्र है जो रेटिना को जला देता है।”

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गैस लाइटर, प्लास्टिक पाइप और कैल्शियम कार्बाइड से बनी यह देसी गन पानी के संपर्क में आने पर एसिटिलीन गैस उत्पन्न करती है, जो चिंगारी से फट जाती है। विस्फोट के साथ उड़ने वाले प्लास्टिक और धातु के टुकड़े बच्चों की आंखों और चेहरे को गंभीर रूप से घायल कर देते हैं।

मरीजों के परिजनों ने प्रशासन को लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई और मुआवज़े की मांग की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा 18 अक्टूबर को बिक्री पर प्रतिबंध के निर्देशों के बावजूद, ये खतरनाक खिलौने अब भी बाजारों में खुलेआम बिक रहे हैं।

डॉक्टरों ने चेताया है — “कार्बाइड गन खिलौना नहीं, जानलेवा विस्फोटक है। माता-पिता अपने बच्चों को इसके इस्तेमाल से दूर रखें।”

एकतरफा प्यार का खौफनाक अंजाम

चचेरे भाई ने नाबालिग को ठुकराने पर चाकू से किया कत्ल, शरीर पर किए कई वार

उन्नाव (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक सिरफिरे युवक ने एकतरफा प्यार में नाबालिग किशोरी की बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपी युवक किशोरी का चचेरा भाई और ग्राम प्रधान के परिवार से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, युवक कई दिनों से किशोरी से दोस्ती करने का दबाव बना रहा था। किशोरी ने इसका विरोध करते हुए बृहस्पतिवार को अपनी बुआ के साथ पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत से लौटते समय आरोपी राजेश ने रास्ते में उसे रोक लिया और चाकू से गला रेतकर तथा शरीर पर कई वार कर उसकी हत्या कर दी।

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गंभीर रूप से घायल किशोरी को स्थानीय लोग तत्काल बांगरमऊ सीएचसी लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज कर दी है और उसके मोबाइल को सर्विलांस पर लगाया गया है।

कोतवाली प्रभारी चंद्रकांत सिंह ने बताया कि आरोपी किशोरी को ब्लैकमेल कर रहा था और फोटो वायरल करने की धमकी दे रहा था। विरोध करने पर उसने वारदात को अंजाम दिया। फिलहाल आरोपी फरार है, पुलिस उसकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।

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शोपीस बनकर रह गया सिसवां मुंशी चौराहे का हाईमास्ट — अंधेरे में डूबा बाजार, बढ़ी असुरक्षा की आशंका

कई महीनों से खराब लाइट, प्रशासनिक लापरवाही पर क्षेत्रवासियों का फूटा गुस्सा

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। विकास खंड परतावल के सिसवां मुंशी मुख्य चौराहे पर लगा हाईमास्ट लाइट अब सिर्फ शोपीस बनकर रह गया है। महीनों से खराब पड़े इस हाईमास्ट की मरम्मत न होने से पूरा चौराहा रात होते ही अंधेरे में डूब जाता है। इससे न केवल राहगीरों को आने-जाने में कठिनाई होती है बल्कि दुकानदारों के कारोबार पर भी असर पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार प्रशासन और बिजली विभाग से शिकायतें करने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। दुकानदारों का कहना है कि जैसे ही सूरज ढलता है, पूरा बाजार सुनसान हो जाता है और अंधेरे में चोरी या दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।

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स्थानीय निवासी डॉ. गिरजा शंकर सिंह ने बताया कि इस मुद्दे को बार-बार उठाया गया, लेकिन कोई हल नहीं निकला। वहीं परदेशी प्रसाद ने कहा कि रात में फैला अंधेरा लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है। दुकानदार सरफराज, अरसद, कुनाल, मनोज, अजमल, अख्तर खान और प्रमोद गुप्ता ने सामूहिक रूप से प्रशासन से तत्काल हाईमास्ट लाइट की मरम्मत कराने की मांग की है ताकि चौराहा फिर से रोशनी से जगमगा उठे और क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके।

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विशुनपुर खुर्द में नहर पुल की टूटी रेलिंग बनी खतरे की घंटी —हर रोज हादसे का डर, ग्रामीणों ने उठाई मरम्मत की मांग

वर्षों से उपेक्षा का शिकार पुल,अब तक नहीं हुई मरम्मत — प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। परतावल विकासखंड के विशुनपुर खुर्द गांव के पास नारायणी शाखा नहर पर बना पुल अब ग्रामीणों के लिए खतरे का पुल बन चुका है। पुल की रेलिंग लंबे समय से टूटी हुई है, जिसके कारण दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को हर समय हादसे का डर बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस पुल से गुजरते समय थोड़ी सी असावधानी भी जानलेवा साबित हो सकती है। बीते महीनों में कई बार मोटरसाईकिल सवार नहर में गिर चुके हैं, लेकिन आज तक विभाग ने कोई कदम नहीं उठाया।

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यह पुल बेलवा बुजुर्ग, रघुनाथपुर, गोपाला, कम्हरिया और विशुनपुर खुर्द समेत कई गांवों को परतावल ब्लॉक मुख्यालय और जीएम रोड से जोड़ता है। दिनभर दर्जनों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका हर समय बनी रहती है।
ग्रामीण एजाज खां, सलीम, वसीम, विनोद, रमेश, इकबाल, निजामुद्दीन, मोहम्मद अकरम और पन्नेलाल ने कहा कि पुल की रेलिंग काफी समय से टूटी पड़ी है, लेकिन संबंधित विभाग आंखें मूंदे बैठा है।
उन्होंने जिलाधिकारी महराजगंज और सिंचाई विभाग से तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है ताकि भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना न हो।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मरम्मत नहीं कराई गई, तो वे धरना-प्रदर्शन कर आवाज बुलंद करने को बाध्य होंगे।

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पोलियो मुक्त दुनिया की दिशा में एक जागरूकता दिवस

हर वर्ष 24 अक्टूबर को वर्ल्ड पोलियो डे मनाया जाता है। यह दिवस केवल पोलियो बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ही नहीं बल्कि पोलियो वैक्सीन के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले वैज्ञानिक जोनास साल्क को सम्मानित करने के लिए भी मनाया जाता है। पोलियो एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जो मुख्यतः बच्चों को प्रभावित करती है और गंभीर मामलों में स्थायी पक्षाघात या मृत्यु का कारण बन सकती है।

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पोलियो और इसका प्रभाव
पोलियो, जिसे पोलियोमाइलिटिस भी कहा जाता है, वायरल संक्रमण है जो नसों पर हमला करता है। पोलियो से संक्रमित व्यक्ति में बुखार, थकान, सिरदर्द, उल्टी और मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कुछ मामलों में यह बीमारी पक्षाघात का कारण बन सकती है। बीसवीं सदी के मध्य तक पोलियो ने वैश्विक स्तर पर लाखों बच्चों के जीवन को प्रभावित किया।

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जोनास साल्क और पोलियो वैक्सीन
1955 में जोनास साल्क ने पोलियो के खिलाफ पहला सुरक्षित और प्रभावी इनैक्टिव पोलियो वैक्सीन (IPV) विकसित किया। इस खोज ने पोलियो से लड़ाई में क्रांतिकारी बदलाव लाया। साल्क की वैक्सीन ने न केवल बच्चों को पोलियो से बचाया बल्कि दुनिया भर में पोलियो के मामलों में तेज़ी से गिरावट लाई। साल्क ने जीवन भर यह विश्वास रखा कि वैक्सीन को लाभ कमाने के उद्देश्य से नहीं बल्कि मानवता की सेवा में उपयोग किया जाना चाहिए।

वर्ल्ड पोलियो डे का महत्व
वर्ल्ड पोलियो डे का उद्देश्य केवल वैक्सीन की उपलब्धता का जश्न मनाना नहीं है, बल्कि लोगों में जागरूकता फैलाना और यह सुनिश्चित करना भी है कि हर बच्चा पोलियो से सुरक्षित रहे। इस दिन विभिन्न स्वास्थ्य संगठन, सरकारें और एनजीओ मिलकर पोलियो अभियान चलाते हैं। पोलियो मुक्त दुनिया का सपना तभी साकार हो सकता है जब हर बच्चे तक वैक्सीन पहुंचे।

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भारत और पोलियो उन्मूलन
भारत ने पोलियो उन्मूलन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। 1985 से व्यापक पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम चलाए गए, और 2014 में भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित किया गया। यह सफलता केवल सरकारी प्रयासों के कारण नहीं, बल्कि समुदाय के जागरूक योगदान और स्वास्थ्य कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम भी है।

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आगे की राह
हालांकि भारत में पोलियो नियंत्रण में है, लेकिन दुनिया के कुछ हिस्सों में यह अभी भी खतरा बना हुआ है। इसलिए नियमित टीकाकरण और जागरूकता अभियान जारी रखना अनिवार्य है। वर्ल्ड पोलियो डे हमें याद दिलाता है कि स्वास्थ्य सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य भी है।

मानवता—ईश्वर तक पहुँचने का सच्चा मार्ग

“जो इंसान से प्यार न कर सका, उसका ईश्वर से प्रेम अधूरा है”

गणेश दत्त द्विवेदी

🌿 प्रस्तावना : प्रेम का मूल आधार — मानवता
“क्या करेगा वो प्यार वो भगवान से,
क्या करेगा प्यार वो ईमान से,
जन्म लेकर गोद में इंसान की,
कर न पाया वो प्यार इंसान से…”
यह पंक्तियाँ हमारे समाज की सबसे बड़ी विडंबना को उजागर करती हैं। हम मंदिर-मस्जिद में सिर झुकाते हैं, पूजा-पाठ करते हैं, ईश्वर के नाम पर व्रत रखते हैं, परंतु अक्सर उस ईश्वर की सबसे सुंदर रचना—इंसान—से ही प्रेम करना भूल जाते हैं। धर्म, जाति, भाषा और सीमाओं की दीवारों ने मानवता को बाँट दिया है। जबकि सच्चे अर्थों में ईश्वर की आराधना तभी पूर्ण होती है जब इंसान, इंसान से प्रेम करे।

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🌼 इंसानियत ही ईश्वर तक पहुँचने का सेतु
हर धर्म का सार एक ही है — प्रेम और करुणा।
भगवान, अल्लाह, ईसा या वाहेगुरु — सभी ने एक ही संदेश दिया है कि इंसान को इंसान से प्रेम करना चाहिए।
भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं —
“जो सब प्राणियों में समान दृष्टि रखता है, वही मेरा भक्त है।”
कुरआन शरीफ़ कहती है —
“जो किसी निर्दोष की जान बचाता है, वह मानो पूरी मानवता को बचाता है।”
ईसा मसीह ने कहा था —
“अपने पड़ोसी से वैसे ही प्रेम करो जैसे अपने आप से करते हो।”
इन संदेशों से स्पष्ट है कि ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग मानवता से होकर ही गुजरता है। जो व्यक्ति दूसरों के दुख में साथ नहीं देता, जो जरूरतमंदों की मदद नहीं करता, वह कितना भी बड़ा भक्त क्यों न हो, उसकी भक्ति अधूरी ही कहलाएगी।

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🌺 पूजा नहीं, सेवा ही सच्चा धर्म
आज हम देखते हैं कि लोग मंदिरों में लाखों का दान करते हैं, पर एक भूखे को रोटी नहीं खिलाते।
कई लोग रोज़ाना धार्मिक प्रवचन सुनते हैं, किंतु सड़क किनारे पड़े घायल व्यक्ति को देखकर अनदेखा कर देते हैं।
ऐसी भक्ति केवल रूपकात्मक धर्मनिष्ठा है, जिसका समाज पर कोई वास्तविक प्रभाव नहीं पड़ता।
स्वामी विवेकानंद ने कहा था —
“यदि तुम अपने पास बैठे गरीब की सेवा नहीं कर सकते, तो तुम्हारी मंदिर की पूजा व्यर्थ है।”
इसी तरह महात्मा गांधी ने कहा —
“ईश्वर की सेवा करने का सबसे उत्तम तरीका है — उसके बंदों की सेवा।”
सेवा, प्रेम और दया ही धर्म का सार है। अगर हम दूसरों के प्रति करुणा, सहानुभूति और सम्मान नहीं रखते, तो भगवान से की गई प्रार्थनाएँ केवल औपचारिकता बनकर रह जाती हैं।

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🌻 इंसान से दूरी — आस्था की खोखली दीवार
आज का समाज दिखावटी आस्था में उलझा हुआ है। लोग धर्म के नाम पर झगड़ते हैं, लेकिन इंसानियत को भूल चुके हैं।
धर्म का असली उद्देश्य हमें जोड़ना था, परंतु हमने उसे विभाजन का औज़ार बना लिया।
अगर कोई व्यक्ति यह सोचता है कि वह केवल पूजा-पाठ से ईश्वर को पा लेगा, तो यह भ्रम है।
ईश्वर को पाने के लिए पहले इंसान का दिल जीतना पड़ता है।
वो दिल जो करुणा, क्षमा और प्रेम से भरा हो — वही सच्चे अर्थों में ईश्वर का मंदिर है।
🌸 ईश्वर का रास्ता इंसान से होकर जाता है
कवि की पंक्तियाँ हमें झकझोरती हैं कि ईश्वर का प्रेम तभी सार्थक है जब उसमें मानवता की महक हो।
अगर कोई व्यक्ति अपने पड़ोसी, अपने समाज या अपने देशवासियों से ही नफरत करता है, तो वह भगवान से प्रेम करने का दावा कैसे कर सकता है?
सच्चा भक्त वही है जो हर व्यक्ति में ईश्वर का अंश देखता है, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या वर्ग का क्यों न हो।

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इसलिए आइए, इस संदेश को जीवन में उतारें —
👉 पहले इंसान से प्रेम करें,
👉 फिर ईश्वर से संवाद करें।
क्योंकि जब हम एक भूखे को रोटी खिलाते हैं, एक दुखी को सांत्वना देते हैं, एक बच्चे को शिक्षा देते हैं —
तब हम वास्तव में ईश्वर की पूजा कर रहे होते हैं।
🕊️“मंदिर-मस्जिद गिरजे में मत ढूंढो उसे,
वो तो हर इंसान के दिल में बसता है।
जो इंसान से प्यार नहीं कर सका,
वो भगवान से क्या प्रेम करेगा?”

सूचना से समृद्धि की ओर

विश्व विकास सूचना दिवस

हर वर्ष 24 अक्टूबर को मनाया जाता है विश्व विकास सूचना दिवस ताकि विकास-सम्बंधित चुनौतियों और सूचना व अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका पर वैश्विक ध्यान केंद्रित हो सके।
यह दिन संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा 1972 में प्रस्तावित और उसी वर्ष की 19 दिसंबर को पारित प्रस्ताव A/RES/3038 (XXVII) के अंतर्गत स्थापित किया गया। यह दिन इसलिए 24 अक्टूबर को चुना गया क्योंकि वहीं संयुक्त राष्ट्र दिवस आता है (24 अक्टूबर 1945) और 1970 में इसी तारीख को “द्वितीय संयुक्त राष्ट्र विकास दशक” की अंतरराष्ट्रीय विकास रणनीति अपनाई गई थी।

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इतिहास और उद्देश्य
इस दिवस की मुख्य प्रेरणा है सार्वजनिक राय को जगाना, सूचना का प्रसार करना और विशेष रूप से युवाओं को विकास-चुनौतियों एवं सहयोग की आवश्यकता से अवगत कराना। विकास आज सिर्फ आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और समावेशी सामाजिक प्रगति से जुड़ा है। इसलिए, सूचना-प्रौद्योगिकी, मीडिया, इंटरनेट जैसे माध्यम इस विचारधारा में अहम भूमिका निभाते हैं।

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महत्व
यह दिवस यह याद दिलाता है कि विश्व-व्यापी विकास चुनौतियों (गरीबी, अशिक्षा, असमानता) को हल करने के लिए सिर्फ आर्थिक कदम ही पर्याप्त नहीं, बल्कि सूचना का सही प्रवाह, जागरूकता व सहयोग भी ज़रूरी है।
सूचना व संचार प्रौद्योगिकी (ICT) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है — यह विकास के नए समाधान प्रस्तुत कर सकती है।
यह दिन स्थानीय-राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सभी स्तरों पर विकास-सूचना साझा करने, अनुभव-विचारों के आदान-प्रदान तथा मीडिया को सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करता है।

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कैसे मनाया जाता है?
विभिन्न संगठनों, मीडिया एवं शैक्षणिक संस्थानों द्वारा सेमिनार, कार्यशालाएँ, सामाजिक अभियान, डिजिटल-मीडिया अभियानों का आयोजन किया जाता है।
सोशल-मीडिया प्लेटफॉर्म पर हैशटैग (#WorldDevelopmentInformationDay आदि) द्वारा जागरूकता फैलायी जाती है।
विशेष रूप से युवाओं को प्रेरित करने, उन्हें विचार-विमर्श में शामिल करने और उन्हें सामाजिक-विकास की प्रक्रिया में भागीदार बनाने पर जोर दिया जाता है।

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भारत एवं हमारा योगदान
भारत जैसे विकास-उन्मुख देश में यह दिवस विशेष महत्व रखता है क्योंकि सूचना-प्रवर्तन, डिजिटल-साक्षरता और दूरदराज के क्षेत्रों में विकास-क्रियाओं को मीडिया एवं सूचना-शेयरिंग के माध्यम से गति मिल सकती है। आज की सूचना-युग की दुनिया में, सोच-विचार व समाधान-विकास को जोड़ना अनिवार्य है। हम व्यक्तिगत स्तर पर इस दिवस पर क्या कर सकते हैं:

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सोशल-मीडिया पर विकास-विषयक पोस्ट, वीडियो या इन्फोग्राफिक्स द्वारा जागरूकता बढ़ाना।
स्थानीय NGO, विकास-संगठन या सामाजिक पहल के साथ जुड़ना, अपने स्तर पर सहयोग व भागीदारी बढ़ाना।
विश्व विकास सूचना दिवस सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि एक अवसर है — सोचने-समझने, जानकारी बांटने और विकास की दिशा में मिलकर कदम बढ़ाने का। जब हम सभी मिलकर सूचना की शक्ति को विकास के लिए इस्तेमाल करते हैं, तभी वास्तव में “कोई पीछे न रहे” — के लक्ष्य का अर्थ साकार होता है। सूचना साझा करें, सामाजिक चर्चा करें, और विकास-साथी बनें।

संदिग्ध हालात में युवक की मौत, शव पहुंचते ही मचा कोहराम; गुस्साए लोगों ने लगाया जाम

देवरिया/सलेमपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। महाराष्ट्र में मजदूरी करने गए एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद गुरुवार सुबह सलेमपुर में हड़कंप मच गया। जैसे ही मृतक का शव गांव पहुंचा, परिजनों में कोहराम मच गया और स्थानीय लोगों ने हत्या का आरोप लगाते हुए सलेमपुर–मैरवा मार्ग जाम कर दिया। करीब आधे घंटे तक सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

सूचना मिलते ही सलेमपुर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझा-बुझाकर जाम समाप्त कराया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

महाराष्ट्र में हुई संदिग्ध मौत

जानकारी के अनुसार, मझौलीराज नगर वार्ड नंबर 13 निवासी नौशाद (35 वर्ष) पुत्र वकील अहमद करीब एक माह पहले अपने दो साथियों कमलेश और सेठी के साथ महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में एक निजी कंपनी में काम करने गया था।
21 अक्टूबर को उसकी संदिग्ध हालात में मौत हो गई। गुरुवार सुबह जब शव घर पहुंचा तो परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया।

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हत्या का आरोप लगाकर किया सड़क जाम

परिजनों और मोहल्ले के लोगों ने नौशाद की हत्या का आरोप लगाते हुए शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि नौशाद की मौत प्राकृतिक नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या है।

पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन दिया

सूचना पाकर कोतवाल महेंद्र कुमार चतुर्वेदी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को कार्रवाई का भरोसा दिलाया, जिसके बाद जाम हटाया गया।
मृतक की पत्नी मुन्नी खातून ने पुलिस को तहरीर देते हुए बताया कि “एक माह पहले नगर के एक व्यक्ति ने मेरे पति को जबरन मजदूरी के लिए महाराष्ट्र भेजा था। 21 अक्टूबर को फोन आया कि उनकी हालत गंभीर है, और अब उनका शव भेज दिया गया है।”

पुलिस ने मामला दर्ज कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है ताकि मौत के असली कारणों का पता लगाया जा सके।

पीछे रह गए मासूम बच्चे

मृतक नौशाद के परिवार में पत्नी मुन्नी खातून के अलावा एक बेटा शहीद (8 वर्ष) और बेटी अलीशा (5 वर्ष) है। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

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भीषण बस हादसा: आग में झुलसे 20 से अधिक लोगों की मौत की आशंका, मुख्यमंत्री नायडू ने जताया शोक

कुरनूल/आंध्र प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में शुक्रवार तड़के बड़ा सड़क हादसा हो गया। हैदराबाद से बेंगलुरु जा रही कावेरी ट्रैवल्स की यात्री बस में अचानक आग लग गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। यह दर्दनाक हादसा राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर चिन्ना टेकुर गांव के पास हुआ। हादसे में 20 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है, जबकि कई यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

हादसे के वक्त 39 यात्री सवार थे

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसे के समय बस में कुल 39 लोग सवार थे। हादसा तड़के उस वक्त हुआ जब बस कुरनूल के बाहरी इलाके उलिंडाकोंडा के पास पहुंची। इसी दौरान पीछे से आ रही एक बाइक बस से टकरा गई, जिससे बाइक बस के नीचे फंस गई और ईंधन टैंक फटने से आग लग गई। कुछ ही सेकंड में पूरी बस आग की लपटों में घिर गई।

सीएम नायडू और मंत्री नारा लोकेश ने जताया दुख

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने हादसे पर गहरा शोक जताया और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि,

“कुरनूल जिले में हुई बस दुर्घटना के बारे में जानकर गहरा दुख हुआ। मेरी संवेदनाएं उन परिवारों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि सभी घायलों को हरसंभव मदद दी जाए।”

वहीं, मंत्री नारा लोकेश ने भी हादसे को हृदयविदारक बताया और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

घायलों को कुरनूल जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। 12 लोगों को घायल अवस्था में कुरनूल जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि कई शव अब तक बरामद किए जा चुके हैं।

बताया जा रहा है कि ज्यादातर यात्री हैदराबाद के रहने वाले थे। हादसे के बाद बस का ड्राइवर मौके से फरार हो गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

वर्ल्ड कप 2025: भारत का धमाका! स्मृति मंधाना और प्रतीका रावल के शतक से न्यूजीलैंड को 53 रनों से हराया, सेमीफाइनल में पहुंची टीम इंडिया

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नवी मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। आईसीसी महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 में भारतीय महिला टीम ने एक बार फिर इतिहास रच दिया! डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेले गए रोमांचक मुकाबले में टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड को 53 रनों से हराकर सेमीफाइनल में धमाकेदार एंट्री कर ली।

पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने 49 ओवरों में 340 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया — जो महिला वर्ल्ड कप इतिहास में भारत का सबसे बड़ा स्कोर बन गया।

स्मृति और प्रतीका का रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन

ओपनर स्मृति मंधाना (109 रन) और प्रतीका रावल (122 रन) ने कीवी गेंदबाजों पर कहर बरपाते हुए रिकॉर्ड साझेदारी की। वहीं मिडिल ऑर्डर में जेमिमा रोड्रिग्स ने सिर्फ 44 गेंदों में नाबाद 76 रन बनाकर पारी को तूफानी अंदाज में फिनिश किया।

बारिश ने डकवर्थ-लुईस नियम लागू करवाया

बारिश के कारण न्यूजीलैंड को 44 ओवरों में 325 रन का संशोधित लक्ष्य मिला, लेकिन भारतीय गेंदबाजों के सामने उनकी एक न चली। रेणुका सिंह, स्नेह राणा और प्रतीका रावल ने शानदार गेंदबाजी करते हुए विपक्षी टीम को 271 रन पर समेट दिया।

एक कदम दूर ट्रॉफी से

इस जीत के साथ भारत ने सेमीफाइनल का टिकट पक्का कर लिया, जबकि श्रीलंका की टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई। अब सभी की निगाहें टीम इंडिया पर टिकी हैं — क्या यह साल भारत को महिला वर्ल्ड कप की पहली ट्रॉफी दिला पाएगा?

कैंसर से जंग में योग और आयुर्वेद बना सहारा! पतंजलि का दावा — वेलनेस सेंटर से स्वस्थ होकर लौटे कई मरीज

हरिद्वार (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। हरिद्वार स्थित पतंजलि वेलनेस सेंटर (योगग्राम एवं निरामयम) एक बार फिर चर्चा में है। पतंजलि ने दावा किया है कि यहां योग, प्राणायाम और आयुर्वेदिक उपचार के जरिए कई कैंसर मरीजों को राहत मिली है। संस्था का कहना है कि असाध्य बीमारियों में भी प्राकृतिक चिकित्सा और अनुशासित जीवनशैली से उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं।

पतंजलि के अनुसार, हावड़ा की 57 वर्षीय महिला, जिन्हें 2022 में कैंसर डिटेक्ट हुआ था, सात दिन के उपचार और एक साल तक नियमों के पालन के बाद 2023 में ‘कैंसर-फ्री रिपोर्ट’ लेकर लौटीं। वहीं, पुणे के अजय राजेन्द्र बण्डल (28 वर्ष) को सिर में कैंसर था, जो अब पतंजलि की थेरेपी और औषधियों से पहले से काफी बेहतर हैं।

पतंजलि का कहना है —

बेंगलुरु के गौरान सिंह (41), जिन्हें ब्लड कैंसर था, उन्होंने सात दिन के उपचार के बाद दर्द और कमजोरी में राहत पाई।
छपरा (बिहार) के विजय कुमार सिंह (62) ने बताया कि केवल छह दिन में ही TLC, प्लेटलेट्स और हीमोग्लोबिन लेवल में सुधार हुआ।

विभिन्न कैंसर मरीजों के अनुभव

महाराष्ट्र (ओस्मानाबाद): ज्ञानेश्वर विठ्ठलराव पाटिल ने बताया कि लीवर सिरोसिस में योग और आयुर्वेद से उनका वायरल लोड सामान्य स्तर पर आ गया।

राजस्थान (भरतपुर): वेद प्रकाश (74) को किडनी कैंसर था, 80% किडनी खराब होने के बावजूद अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।

दिल्ली: बबीता सचदेवा (52) को थायरॉइड कैंसर था, योगग्राम में प्राणायाम से उन्हें पूर्ण स्वास्थ्य लाभ हुआ।

पश्चिम बंगाल (हावड़ा): अनीता कुमारी (33) को 15 दिन के पतंजलि उपचार के बाद इतना लाभ हुआ कि ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ी।

डिस्क्लेमर:

“राष्ट्र की परम्परा” इस लेख में दिए गए पतंजलि के दावों या किसी प्रकार की चिकित्सा पद्धति का समर्थन या अनुमोदन नहीं करता है। यह जानकारी केवल जनसामान्य की जागरूकता हेतु साझा की गई है। स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।