Friday, May 1, 2026
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तारकेश्वर क्रिकेट एकेडमी ने 2-1से सीरीज पर अपना कब्जा जमाया

बरहज,देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
बाबा राघव दास क्रिकेट टूर्नामेंट 2026, तीन मैचों का सीरीज का फाइनल मुकाबला बाबा राघव दास भगवान दास पीजी कॉलेज के मैदान पर में खेला गया । मुख्यातिथि भाजपा नेता जितेन्द्र भारत ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त करते हुए मैच का उद्घाटन किया।
तारकेश्वर क्रिकेट अकादमी बरहज बनाम सहोदरा देवी क्रिकेट अकादमी, सलेमपुर के बीच फाइनल मैच था। सलेमपुर की टीम को ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी किया और 104 रन का लक्ष्य दिया, इसमें उत्कर्ष ने 38 गेंद पर 31 रन बनाया और नितिन ने 11 रन का योगदान दिया । बरहज टीम की तरफ से गेंदबाजी करने आए लव तथा कौशल ने 2-2 विकेट लिया।
तारकेश्वर क्रिकेट अकादमी की ओर से ओपनिंग बल्लेबाजी करते हुए शिवम ने 52 रन और अभिराज ने 12 रन का योगदान दिया । सलेमपुर की टीम की तरफ से गेंदबाजी करने आए उत्कर्ष ने 3 विकेट लिया। तारकेश्वर क्रिकेट अकादमी, बरहज नी लक्ष्य का पीछा करते हुए105 रन बनाकर 7 विकेट से फाइनल मैच का खिताब जीत लिया । शिवम् प्रसाद ने मैन ऑफ द मैच व 135 रन बनाकर मैन ऑफ द सीरीज अपने नाम किया । तीन मैचों की सीरीज में तारकेश्वर क्रिकेट एकेडमी बरहज ने 2-1 से सीरीज पर अपना कब्ज़ा जमाया।भाजपा नेता जितेन्द्र भारत व डॉ. अरविंद पाण्डेय ने विजेता व उपविजेता टीम को शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर बरहज टीम के कोच तारकेश्वर निषाद, सलेमपुर टीम के कोच शैलेन्द्र सिंह,, बंटी वर्मा, राजकेश्वर साहनी, भास्कर यादव, आराध्या निगम, गौरव विश्वकर्मा आदि मौजूद रहें।

शाहजहांपुर में नेटवर्क ठप: जियो-एयरटेल सेवाएं एक महीने से प्रभावित, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के जैतीपुर क्षेत्र के गढ़िया रंगीन में मोबाइल नेटवर्क की खराब स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। क्षेत्र में जियो और एयरटेल के टावर लगे होने के बावजूद कॉलिंग और इंटरनेट सेवाएं लगभग पूरी तरह ठप हैं।

एक महीने से बनी हुई है समस्या

ग्रामीणों के अनुसार, बीते एक महीने से नेटवर्क की समस्या लगातार बनी हुई है, लेकिन अब तक कंपनियों की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं किया गया है।

महंगे रिचार्ज के बाद भी नहीं मिल रही सुविधा

स्थानीय लोगों का कहना है कि वे महंगे रिचार्ज कराने के बावजूद बुनियादी नेटवर्क सुविधा से वंचित हैं। इससे दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

ऑनलाइन काम और पढ़ाई पर असर

वीर सिंह यादव, नितेश यादव, अनुभव शाक्य, जय सिंह, अखिलेश यादव और विवेक कुमार सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि नेटवर्क न होने से ऑनलाइन कामकाज, बैंकिंग सेवाएं और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। साथ ही आपसी संपर्क में भी दिक्कतें आ रही हैं।

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पुलिस कार्य भी हो रहा प्रभावित

ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि नेटवर्क समस्या का असर स्थानीय थाना स्तर के कार्यों पर भी पड़ रहा है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

शिकायत के बाद भी नहीं हो रही सुनवाई

कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। टावर कर्मचारी समर सिंह के अनुसार, टावर में तकनीकी खराबी नहीं है, बल्कि समस्या उच्च स्तर से जुड़ी हुई है।

आंदोलन की चेतावनी

समस्या के समाधान में हो रही देरी से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नेटवर्क व्यवस्था ठीक नहीं की गई, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

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गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। गोरखपुर जिले के थाना चिलुआताल क्षेत्र में जमीन विवाद को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। इस मामले में वादी पर जानलेवा हमला किए जाने का आरोप है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

पेड़ काटने को लेकर शुरू हुआ विवाद

पुलिस के अनुसार, घटना की जड़ जमीन को लेकर पुराना विवाद और पेड़ काटने का मुद्दा था। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई, जो जल्द ही हिंसक झड़प में बदल गई।

लाठी-डंडे और रॉड से किया हमला

आरोप है कि अभियुक्तों ने एकजुट होकर वादी को घेर लिया और गाली-गलौज करते हुए लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। इस हमले में वादी को गंभीर चोटें आईं, जिससे उसकी जान को खतरा उत्पन्न हो गया।

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पुलिस की त्वरित कार्रवाई

वादी की तहरीर पर थाना चिलुआताल में मुकदमा दर्ज किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस अधीक्षक उत्तरी और क्षेत्राधिकारी कैम्पियरगंज के पर्यवेक्षण में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

इन आरोपियों की हुई गिरफ्तारी

पुलिस ने जाकिर हुसैन, आशिक अली, दानिश खान, अरबाज खान और सलमान खान को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है।

इलाके में पुलिस सतर्क

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और अन्य पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है। इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

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गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। गोरखपुर में पेट्रोल और डीजल खत्म होने की अफवाह फैलते ही शहर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और लोग जल्दबाजी में ईंधन भरवाने के लिए उमड़ पड़े।

शहर और आसपास के इलाकों में यह चर्चा तेजी से फैल गई कि तेल कंपनियों ने सप्लाई रोक दी है, जिससे लोगों में घबराहट बढ़ गई।

डीएम ने किया स्थिति स्पष्ट, कही बड़ी बात

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी दीपक मीणा ने तुरंत हस्तक्षेप किया और वीडियो संदेश जारी कर स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य रूप से जारी है।

प्रशासन की अपील—अफवाहों से रहें दूर

डीएम ने लोगों से अपील की कि वे किसी भी तरह की भ्रामक और अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें और न ही उसे आगे फैलाएं। उन्होंने कहा कि प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

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अफवाहों के कारण बढ़ी भीड़

प्रशासन के अनुसार, अफवाहों के कारण ही पेट्रोल पंपों पर अचानक भीड़ बढ़ गई थी, जबकि वास्तविकता में ईंधन की कोई कमी नहीं है। डीएम के बयान के बाद हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे और लोगों में राहत देखने को मिली।

गोरखपुर में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे जिम्मेदारी दिखाएं और अफवाहों से बचें, ताकि अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके।

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महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में भारत-नेपाल के बीच चल रही महत्वपूर्ण विद्युत परियोजना अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। पावर ग्रिड कारपोरेशन द्वारा बुटवल से गोरखपुर तक 400 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण तेजी से किया जा रहा है, लेकिन इसके चलते किसानों को हुए नुकसान को लेकर असंतोष बढ़ गया है।

फसल नुकसान का मुआवजा नहीं मिलने से नाराजगी

परियोजना के तहत जिन किसानों की जमीन पर बिजली के पोल लगाए जा रहे हैं, उन्हें सर्किल रेट का 85 प्रतिशत मुआवजा देने का प्रावधान है। वहीं, फसल नुकसान की भरपाई क्रॉप कटिंग के आधार पर की जानी है।

इसके बावजूद चौक क्षेत्र के रुदलापुर, करौता और नदुआ गांवों के कई किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है, जिससे नाराजगी बढ़ती जा रही है।

बिना सूचना खेतों में घुसे ठेकेदार, फसल बर्बाद

किसानों का आरोप है कि ठेकेदार बिना पूर्व सूचना के उनके खेतों में घुस गए और खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया। गेहूं समेत कई फसलें बर्बाद हो गईं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

समय पर सर्वे नहीं हुआ तो बढ़ेगी समस्या

रुदलापुर के किसान आद्या प्रसाद का कहना है कि उनकी फसल कटने के लिए तैयार है। अगर समय रहते नुकसान का सर्वे नहीं हुआ, तो बाद में मुआवजा मिलने में दिक्कत आ सकती है।

वहीं, नदुआ के ग्राम प्रधान दिनेश मिश्रा ने भी कटाई से पहले सर्वे कराने की मांग की है, ताकि सही नुकसान का आकलन हो सके।

किसानों ने सौंपा ज्ञापन, दी आंदोलन की चेतावनी

पीड़ित किसानों ने पावर ग्रिड कारपोरेशन के डीजीएम को ज्ञापन देकर जल्द मुआवजा दिलाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करेंगे और जरूरत पड़ने पर उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।

अधिकारियों का क्या कहना है?

पावर ग्रिड कारपोरेशन के अवर अभियंता अभिषेक ने बताया कि किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जा रहा है। फसल नुकसान का आकलन लेखपाल के माध्यम से किया जा रहा है और जिन किसानों की शिकायतें मिली हैं, उनका निस्तारण किया जा रहा है।

भारत-नेपाल विद्युत परियोजना जहां ऊर्जा सहयोग के लिए महत्वपूर्ण है, वहीं किसानों के मुद्दे ने इसे विवादों में ला दिया है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह मामला और गंभीर हो सकता है।

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मनोरंजन (राष्ट्र की परम्परा)। आदित्य धर की एक्शन फिल्म ‘Dhurandhar 2: द रिवेंज’ बॉक्स ऑफिस पर तूफान बनकर छाई हुई है। फिल्म का क्रेज देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में देखने को मिल रहा है। वीकडेज में भी सिनेमाघरों में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

सिर्फ 7 दिनों में ही इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड 1000 करोड़ का आंकड़ा पार कर इतिहास रच दिया है।

Day 7 वर्ल्डवाइड कलेक्शन

ट्रेड रिपोर्ट के मुताबिक, ‘धुरंधर 2’ ने रिलीज के 7वें दिन (बुधवार) को ओवरसीज में करीब 11.92 करोड़ की कमाई की। इसके साथ ही फिल्म की कुल विदेशी कमाई 261.92 करोड़ पहुंच गई है।

वहीं, फिल्म का कुल वर्ल्डवाइड कलेक्शन अब 1,006.50 करोड़ हो चुका है।

सबसे तेज 1000 करोड़ क्लब में शामिल

‘धुरंधर 2’ ने ‘पुष्पा 2: द रूल’ के साथ मिलकर सिर्फ 7 दिन में 1000 करोड़ क्लब में एंट्री करने का रिकॉर्ड बनाया है। यह उपलब्धि हासिल करने वाली यह दूसरी भारतीय फिल्म बन गई है।

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इन बड़ी फिल्मों को छोड़ा पीछे

इस फिल्म ने कमाई के मामले में ‘कंतारा चैप्टर 1’, ‘एनिमल’ और ‘बजरंगी भाईजान’ जैसी बड़ी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। अब यह भारत की टॉप 10 सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो चुकी है।

इंडिया बॉक्स ऑफिस कलेक्शन

भारत में भी फिल्म का जलवा बरकरार है। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, ‘धुरंधर 2’ ने 7वें दिन करीब 47.70 करोड़ का नेट कलेक्शन किया।

इसके साथ ही फिल्म का कुल भारत नेट कलेक्शन 623.42 करोड़ तक पहुंच गया है, जो एक हफ्ते में किसी भी बॉलीवुड फिल्म के लिए बेहद बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है।

अगला टारगेट ‘कल्कि 2898 AD’

अब फिल्म की नजर ‘कल्कि 2898 AD’ के लाइफटाइम कलेक्शन (₹1,042.25 करोड़) को पार करने पर है। जिस रफ्तार से फिल्म कमाई कर रही है, उसे देखते हुए यह आंकड़ा जल्द पार हो सकता है।

‘धुरंधर 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर नया इतिहास रचते हुए यह साबित कर दिया है कि मजबूत कंटेंट और स्टार पावर के दम पर फिल्में रिकॉर्ड तोड़ सकती हैं। आने वाले दिनों में इसके और बड़े आंकड़े छूने की पूरी उम्मीद है।

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तेहरान ने ठुकराया प्रस्ताव तो भड़के ट्रंप: बोले- ‘डर के कारण डील नहीं कर रहा ईरान’, दी बड़ी चेतावनी

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। ईरान द्वारा प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद ट्रंप ने कहा कि अमेरिका एक और युद्ध जीतने की ओर बढ़ रहा है।

वॉशिंगटन में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका अब तक 8 युद्ध सुलझा चुका है और अब ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष में भी जीत हासिल करेगा।

‘डर की वजह से खुलकर बात नहीं कर रहा ईरान’

ट्रंप ने कहा कि ईरान बातचीत करना चाहता है, लेकिन अपने ही लोगों और अमेरिका से डर के कारण खुलकर सामने नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान के नेता डील करने के इच्छुक हैं, लेकिन उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है।

ईरान ने बातचीत से किया इनकार

ट्रंप के बयान से पहले ही ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता को खारिज कर दिया था। तेहरान ने साफ कहा कि कोई बातचीत नहीं चल रही है और वे अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं।

ईरान की प्रमुख मांगों में अमेरिका के गल्फ बेस बंद करना, युद्ध का मुआवजा और हॉर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण शामिल है।

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जंग जारी, हमले तेज

मिडिल ईस्ट में संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। हिजबुल्लाह ने इजरायल के हाइफा-नाहारिया क्षेत्र पर कई रॉकेट दागे, जबकि ईरान ने ड्रोन से हमले किए। जवाब में इजरायल ने भी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है।

भारत पर असर और कूटनीतिक कोशिशें

भारत इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप से बातचीत कर हॉर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रखने और शांति स्थापित करने की अपील की है।

भारत की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए यह मुद्दा बेहद अहम है। तेल की कीमतों पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।

शांति प्रस्ताव पर भी गतिरोध

अमेरिका की ओर से 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भी भेजा गया था, जिसमें सीजफायर और परमाणु कार्यक्रम पर रोक की बात शामिल थी। हालांकि, ईरान ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया।

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अभी चरम पर है। दोनों देशों के सख्त रुख के चलते स्थिति और गंभीर होती जा रही है, जिसका असर वैश्विक स्तर पर देखने को मिल रहा है।

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बिहार(राष्ट्र की परम्परा)। बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी चर्चाओं के बीच मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह के बयान ने नई हलचल पैदा कर दी है। नवादा से पटना लौटते समय बिहार शरीफ में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कई अहम बातें कहीं।

नीतीश कुमार की जमकर तारीफ

अनंत सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने पूरे बिहार में विकास कार्यों को गति दी है और राज्य को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने CM पद को लेकर चल रही अटकलों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया।

निशांत कुमार को बताया CM के लिए योग्य

इस दौरान अनंत सिंह ने नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में नीतीश कुमार सक्रिय राजनीति से पीछे हटते हैं, तो निशांत कुमार मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार हो सकते हैं।
उन्होंने निशांत को पढ़ा-लिखा, ईमानदार और अच्छे व्यक्तित्व वाला बताया, जिससे यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

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चुनाव लड़ने को लेकर भी दिया संकेत

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अनंत सिंह ने कहा कि अगर नीतीश कुमार चुनाव नहीं लड़ते हैं, तो वे खुद भी चुनाव मैदान में नहीं उतरेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनकी जगह उनका बेटा चुनाव लड़ सकता है।

दिल्ली जाने पर भी दिया जवाब

जब उनसे नीतीश कुमार के दिल्ली दौरे को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि दिल्ली कोई विदेश नहीं है, वहां आना-जाना सामान्य बात है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की राजनीति में असली ताकत आज भी नीतीश कुमार के पास ही है।

शोक संतप्त परिवार से की मुलाकात

इस दौरान अनंत सिंह नवादा में विधायक विभा देवी के पुत्र स्वर्गीय अखिलेश यादव के निधन पर उनके आवास पहुंचे और शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की।

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने भारत के लिए राहत भरी खबर दी है। ईरान ने घोषणा की है कि भारत समेत अपने मित्र देशों के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी जाएगी। यह फैसला वैश्विक तेल संकट के बीच बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिया जाएगा। मुंबई स्थित ईरानी महावाणिज्य दूतावास ने भी इस जानकारी की पुष्टि की है।

UN की अपील के बाद लिया गया फैसला

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की अपील के बाद ईरान ने यह कदम उठाया। गुटेरेस ने चेतावनी दी थी कि होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहने से तेल, गैस और उर्वरकों की सप्लाई पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और खेती प्रभावित होगी।

किन देशों पर अभी भी रोक?

ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका, इजरायल और इस संघर्ष में शामिल सहयोगी देशों के जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ईरान ने इस क्षेत्र को युद्ध क्षेत्र बताते हुए सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।

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भारत के लिए क्यों है बड़ी राहत?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट का खुलना भारत के लिए बेहद अहम है। इससे कच्चे तेल, गैस और उर्वरकों की सप्लाई सुचारु रहने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव कम हो सकता है और आम लोगों को राहत मिलेगी।

होर्मुज स्ट्रेट का महत्व

दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग 20% हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग का आंशिक रूप से भी खुलना वैश्विक बाजार के लिए राहत की खबर है।

हालांकि क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है, लेकिन ईरान का यह फैसला वैश्विक सप्लाई चेन को स्थिर रखने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में स्थिति पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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तेल से पानी तक जंग का विस्तार: ईरान-इज़रायल संघर्ष ने बदली युद्ध की परिभाषा

वैश्विक ऊर्जा इमरजेंसी-तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत में ही दुनियाँ पर पड़ा असर-जंग का बदलता चेहरा-नेताओं के दावों से जनता की पीड़ा तक

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष,विशेषकर ईरान,इज़रायल और अमेरिका के बीच युद्ध जैसे हालात ने विश्व व्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया है। इस संघर्ष का सबसे बड़ा और तत्काल प्रभाव ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ा है।अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों के अनुसार, यह संकट 1970 के दशक के तेल संकट के बाद सबसे गंभीर हो सकता है। कई देशों ने बिजली और ईंधन की खपत कोनियंत्रित करने के लिए ऊर्जा इमरजेंसी जैसे कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।पाकिस्तान,बांग्लादेश, श्रीलंका फिलीस्तीन जैसे देशों में बिजली कटौती,पेट्रोल-डीजल की सीमित आपूर्ति और स्कूल बंद करने जैसे निर्णय लिए जा रहे हैं।आश्चर्यजनक रूप से, यह संकट केवल विकासशील देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यूरोप और न्यूजीलैंड जैसे विकसित क्षेत्रों में भी ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र बताना चाहता हूं कि हर युद्ध की शुरुआत में इसे इंसानियत की रक्षा और शांति की स्थापना के नाम पर प्रस्तुत किया जाता है।जब ऊर्जा से आगे बढ़कर पानी बना युद्ध का नया हथियार तो यह इस युद्ध का सबसे खतरनाक पहलू है।अब यह केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पानी जैसे जीवनदायी संसाधन तक पहुंच गया है।खाड़ी देशों में प्राकृतिक मीठे पानी की भारी कमी है और वे समुद्री पानी को शुद्ध करने के लिए डिसैलिनेशन प्लांट्स पर निर्भर हैं।यदि इन संयंत्रों पर हमले होते हैं, तो स्थिति भयावह हो सकती है। उदाहरण के लिए, सऊदी अरब अपनी लगभग 70 प्रतिशत पेयजल आवश्यकता इन प्लांट्स से पूरी करता है, जबकि कुवैत लगभग 90 प्रतिशत और ओमान 86 प्रतिशत तक निर्भर है। इसका अर्थ है कि ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने या संयंत्रों के नष्ट होने पर इन देशों में पानी का संकट तुरंत उत्पन्न हो सकता है।ट्रंप ने भी दावा किया कि यह अभियान ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने और वहां के लोगों को तानाशाही शासन से मुक्ति दिलाने के लिए है।दूसरी ओर, ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इज़रायल और पूरे मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी।लेकिन 26 दिनों के भीतर ही इस युद्ध का स्वरूप बदल गया है।अब सैन्य ठिकानों की बजाय आम नागरिकों के जीवन से जुड़े बुनियादी ढांचे बिजली,पानी और ऊर्जा पर हमले की धमकियां दी जा रही हैं। ट्रंप द्वारा 48 घंटे का अल्टीमेटम देकर ईरान के पावर प्लांट्स को निशाना बनाने की चेतावनीदी थीं और उसके जवाब में ईरान द्वारा पूरे खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा एवं जल ढांचे को नष्ट करने की धमकी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब युद्ध का केंद्र जनता बन चुकी है। 

साथियों बात अगर हम डिसैलिनेशन प्लांट्स पर खतरा: जीवनरेखा पर सीधा हमला इसको समझने की करें तो ईरान द्वारा खाड़ी देशों के प्रमुख जल और ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाने की धमकी ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है। बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन जैसे देशों के प्रमुख प्लांट्स खतरे में हैंयदि ये संयंत्र नष्ट होते हैं, तो न केवल पीने के पानी की आपूर्ति ठप हो जाएगी, बल्कि बिजली उत्पादन भी प्रभावित होगा, क्योंकि ये दोनों प्रणालियां आपस में जुड़ी हुई हैं। इस स्थिति में पूरा खाड़ी क्षेत्र प्यास और अंधेरेके संकट में फंस सकता है। 

साथियों बात अगर हम  आम नागरिकों पर असर:मानवीय जीवन से जुड़े बुनियादी ढांचे बिजली,पानी ऊर्जा और आम नागरिकों पर मंडराता वैश्विक संकट जीवनशैली में भारी बदलाव इसको समझने की करें तो इस युद्ध का सबसे बड़ा खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। कई देशों में ईंधन की कमी के कारण स्कूल बंद किए जा रहे हैं, कंपनियां वर्क फ्रॉम होम लागू कर रही हैं, और पेट्रोल-डीजल की खरीद पर सीमाएं तय की जा रही हैं। बिजली कटौती आम हो गई है, जिससे उद्योग, स्वास्थ्य सेवाएं और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहे हैं।ऊर्जा संकट ने जीवन की बुनियादी जरूरतों रसोई गैस, परिवहन, बिजली और पानी को सीधे प्रभावित किया है। इससे सामाजिक असंतोष और आर्थिक अस्थिरता बढ़ने का खतरा भी पैदा हो गया है ठीक वैसे ही,वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा: मंदी की आशंका ऊर्जा संकट का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि से उत्पादन लागत बढ़ती है,जिससे महंगाई बढ़ती है और उपभोक्ता खर्च घटता है।विशेष रूप से भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, जहां बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं। इस युद्ध के कारण लाखों भारतीयों के रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है, और हजारों लोग वापस लौट चुके हैं। 

साथियों बात कर हम  पानी की जंग:भविष्य का सबसे बड़ा खतरा इसको समझने की करें तोविश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष भविष्य में “पानी की जंग” का संकेत हो सकता है। जिस तरह तेल ने 20वीं सदी में भू-राजनीति को प्रभावित किया, उसी तरह पानी 21वीं सदी का सबसे बड़ा संसाधन बन सकता है।यदि जल स्रोतों और जल आपूर्ति प्रणालियों पर हमले बढ़ते हैं, तो यह मानव अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन जाएगा। पानी की कमी न केवल स्वास्थ्य संकट पैदा करेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर पलायन, सामाजिक अशांति और राजनीतिक अस्थिरता को भी जन्म दे सकती है। 

साथियों बात अगर हम ऊर्जा संकट का वैश्विक विस्तार: 1973 जैसा खतरा इसको समझने की करें तो,मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है। मध्य पूर्व विश्व के तेल और गैस उत्पादन का केंद्र है, जहां से बड़ी मात्रा में ऊर्जा संसाधन पूरी दुनिया में निर्यात होते हैं। कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के उत्पादन केंद्रों पर खतरे के कारण तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल आया है।यह स्थिति 1973 के तेल संकट की याद दिलाती है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगा था। आज भी वही खतरा मंडरा रहा है,ऊर्जा की कमी,महंगाई में वृद्धि,और वैश्विक मंदी का जोखिम मंडरा रहा है।

साथियों बात अगर हम होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक आपूर्ति की जीवनरेखा पर संकट,होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है,जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव और हमलों के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे आपूर्ति बाधित हो रही है।भारत सहित एशिया की कई अर्थव्यवस्थाएं, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं, इस संकट से सीधे प्रभावित हो रही हैं। भारत में ईंधन की कीमतों में वृद्धि, महंगाई और आर्थिक दबाव के रूप में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। 

साथियों बाद अगर हम युद्ध के बयानों पर नजर डालें तोहर जंग की शुरुआत में एक घोषणा की जाती है- यह जंग इंसानियत को बचाने की जंग है, लाखों जान बचाने के लिए न टाली जा सकने वाली जंग है. ईरान के खिलाफ 26 दिन पहले अमेरिका और इजरायल की तरफ से जब जंग शुरू की गई थी तब भी कुछ ऐसे ही दावे किए गए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह रहे थे कि वो ईरान के लोगों को एक तानाशाही शासन से आजादी दिलाने निकले हैं, इस्लामिक शासन को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए निकले हैं. ईरान ने भी जवाबी हमला करते हुए कहा कि वह इजरालय और मीडिल ईस्ट में अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा,हालांकि अब कहानी का प्लॉट ही बदल चुका है।अब नेता नहीं जनता निशाने पर है. ट्रंप ने 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि उनकी सेना पूरे ईरान के बिजली संयंत्र को निशाने बनाने वाली है, तो वहीं ईरान ने कहा कि कोई भी हमला हुआ तो वह पूरे खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा और जल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा.ईरान के पावर प्लांट तबाह कर देंगे।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि युद्ध का असली चेहरा और मानवता के लिए चेतावनी,ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच बढ़ता संघर्ष अब केवल सैन्य टकराव नहीं रह गया है, बल्कि यह ऊर्जा, पानी और मानव अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।इस युद्ध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युद्धों में सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिकों को होता है। बिजली, पानी और भोजन जैसी बुनियादी जरूरतें जब युद्ध का हथियार बन जाती हैं, तो यह मानवता के लिए सबसे बड़ा संकट बन जाता है।दुनिया आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां अगर समय रहते कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया, तो यह संकट वैश्विक आपदा का रूप ले सकता है। यह केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि पूरी मानव सभ्यता के लिए एक चेतावनी है कि संसाधनों की लड़ाई भविष्य में कितनी भयावह हो सकती है।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

गोरखपुर में फॉरेंसिक रिसर्च सेंटर का भूमि पूजन

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सीएम योगी की चुटकी से गरमाई सियासत महिला प्रत्याशी को लेकर चर्चा तेज

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT) में प्रस्तावित फॉरेंसिक रिसर्च सेंटर के भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक हल्की-फुल्की टिप्पणी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के सांसद रवि किशन को लेकर चुटकी लेते हुए इशारों में कहा कि भविष्य में इस सीट पर महिला प्रत्याशी भी दावेदारी कर सकती है।
मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि मंच से कही गई यह बात हास्य के रूप में थी, लेकिन इसे आगामी लोकसभा चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। खासकर तब, जब देश में नारी वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण) को लेकर चर्चा लगातार जारी है।
इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि इस व्यवस्था से उनके ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि महिलाओं के लिए एक अतिरिक्त सीट बढ़ सकती है। उनके इस बयान को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसके अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं।
गौरतलब है कि संसद द्वारा पारित नारी वंदन अधिनियम के तहत भविष्य में लोकसभा और विधानसभा सीटों पर महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किए जाने का प्रावधान है। माना जा रहा है कि यह व्यवस्था आगामी चुनावों में लागू हो सकती है, जिससे कई सीटों के समीकरण बदल सकते हैं। ऐसे में गोरखपुर जैसी महत्वपूर्ण सीट पर भी नए चेहरे सामने आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
स्थानीय स्तर पर भी इस बयान को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। कुछ लोग इसे महज मंचीय हास्य मान रहे हैं, तो कुछ इसे संभावित राजनीतिक संकेत के रूप में देख रहे हैं। वहीं आम जनता के बीच भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं—कहीं बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है, तो कहीं वर्तमान सांसद के कार्यकाल पर चर्चा हो रही है।
हालांकि अभी तक पार्टी या किसी आधिकारिक स्तर पर इस तरह के किसी बदलाव के संकेत नहीं दिए गए हैं। लेकिन मुख्यमंत्री की इस चुटकी और बयान ने यह जरूर स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी लोकसभा चुनाव में गोरखपुर सीट पर क्या तस्वीर उभरती है—क्या रवि किशन को एक बार फिर मौका मिलेगा या पार्टी किसी नए, संभवतः महिला चेहरे पर भरोसा जताएगी। समय के साथ ही इन सभी सवालों के जवाब सामने आएंगे।

स्ट्रीट लाइट खरीद में घोटाला, ग्रामीणों ने उठाई जांच की मांग

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के मिठौरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पिपरा सोंनाड़ी में विकास कार्यों के नाम पर कथित भ्रष्टाचार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। विद्युत पोलों पर लगाए गए स्ट्रीट लाइट कार्य में अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद गांव में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर फर्जी बिलों के जरिए सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
बताया जा रहा है कि जिन दुकानों पर सामान्यतः गिट्टी, बालू और मौरंग जैसी निर्माण सामग्री की बिक्री होती है, उन्हीं फर्मों से इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीद दर्शाते हुए बिल तैयार किए गए। आरोप है कि इन बिलों में वास्तविक कीमत से कहीं अधिक दर दिखाकर भुगतान निकाला गया।
ग्रामीणों के मुताबिक ग्राम पंचायत में कुल 10 स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। स्थानीय बाजार में ब्रांडेड स्ट्रीट लाइट मजदूरी सहित करीब 2000 से 2200 रुपये में लग जाती है, जबकि ग्राम पंचायत में प्रति लाइट 3650 रुपये की दर से भुगतान दर्शाया गया है। इस प्रकार कुल 36,500 रुपये राज्य वित्त निधि से खर्च दिखाया गया, जिसे ग्रामीण संदिग्ध बता रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल एक कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसी फर्म के माध्यम से अन्य कई फर्जी बिल लगाकर बड़ी रकम के गबन की आशंका है। आरोपों के केंद्र में ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की कथित मिलीभगत भी बताई जा रही है।
गांव में बढ़ते असंतोष के बीच पवन कुमार, सुशील, छेदी, कमलावती, संगीता, सविता और मंजू देवी समेत अनेक ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे इस मामले की शिकायत लोकायुक्त लखनऊ और जिलाधिकारी महराजगंज से करेंगे। उनका कहना है कि सरकारी धन के दुरुपयोग को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में 200 मरीजों का हुआ उपचार

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l स्थानीय तहसील क्षेत्र के ग्राम मिर्जापुर के पंचायत भवन में बुधवार को तहसील रोड स्थित काशीनाथ हॉस्पिटल के तत्वाधान में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना और जरूरतमंदों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना रहा।

शिविर में काशीनाथ हॉस्पिटल के प्रबंधक अरविन्द कुशवाहा, डॉ. डी.के. मौर्य, एएनएम प्रमिला यादव और फार्मासिस्ट शिवानी कुशवाहा की टीम ने लगभग 200 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा उन्हें आवश्यक दवाएं वितरित कीं। शिविर के आयोजन से गरीब मरीजों में आशा की किरण जागी और उन्हें घर के पास ही इलाज की सुविधा मिली।

ग्राम प्रधान रिंटू देवी ने कहा कि इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविर गांव के गरीब मरीजों के लिए बेहद लाभकारी हैं। उन्होंने बताया कि मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पंचायत भवन में शिविर आयोजित किया गया।

डॉ. डी.के. मौर्य ने बताया कि शिविर में आए मरीजों की सामान्य जांच कर उन्हें उचित परामर्श और दवाएं दी गईं। इस दौरान आजाद अंसारी, बलवंत कुशवाहा, ह्रदयनारायण कुशवाहा, रामपुकार शर्मा सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने शिविर का लाभ उठाया।

प्रबंधक अरविन्द कुशवाहा ने कहा कि काशीनाथ हॉस्पिटल द्वारा आगे भी बरहज क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य जागरूकता और गरीब मरीजों के उपचार के लिए ऐसे शिविरों का आयोजन जारी रहेगा।

राम नवमी अवकाश में बदलाव: 26 मार्च को खुलेंगे न्यायालय, 27 मार्च को रहेगा अवकाश

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जिला न्यायालय महराजगंज में राम नवमी के अवकाश को लेकर प्रशासन ने महत्वपूर्ण संशोधन किया है। जिला न्यायाधीश, महराजगंज द्वारा जारी प्रशासनिक आदेश संख्या- 85/2026 के तहत अब 26 मार्च 2026 गुरुवार को न्यायालयों में नियमित कार्य होगा, जबकि 27 मार्च 2026 शुक्रवार को राम नवमी के अवसर पर अवकाश घोषित किया गया है।
यह बदलाव उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के निर्देशों के अनुपालन में किया गया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 26 मार्च को अवकाश प्रस्तावित था, जिसे संशोधित करते हुए अब 27 मार्च को अवकाश निर्धारित किया गया है।
जारी आदेश के अनुसार, 26 मार्च को जिला न्यायालय के अंतर्गत सभी न्यायालय सामान्य रूप से संचालित होंगे और पूर्व निर्धारित वादों की सुनवाई की जाएगी। वहीं, 27 मार्च को अवकाश के कारण उस दिन सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई अगले कार्य दिवस पर की जाएगी।
हालांकि, अवकाश के दिन भी आवश्यक न्यायिक कार्य प्रभावित नहीं होंगे। रिमांड कार्य, गिरफ्तार अभियुक्तों की पेशी तथा जमानत प्रार्थना पत्रों की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, महराजगंज द्वारा अधिकृत रिमांड मजिस्ट्रेट के माध्यम से नियमानुसार संपन्न की जाएगी।
जिला न्यायालय प्रशासन ने निर्देश दिया है कि इस आदेश को आमजन की जानकारी के लिए न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट एवं सूचना पट्ट पर प्रदर्शित किया जाए।

निजी स्कूलों की महंगी फीस, बड़े दावे और हकीकत

चमकदार विज्ञापन बनाम वास्तविक परिणाम: निजी स्कूलों की पड़ताल

(विज्ञापनों में सफलता की गारंटी, लेकिन परिणामों में सच्चाई—क्या अभिभावकों को मिल रहा है उनके पैसे का सही मूल्य?)

– डॉ. सत्यवान सौरभ

आज के दौर में शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का साधन नहीं रह गई है, बल्कि यह एक तेजी से बढ़ता हुआ व्यवसाय भी बन चुकी है। शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, निजी स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और उनके साथ-साथ बढ़ रही है उनके प्रचार-प्रसार की रणनीतियाँ। अखबारों, होर्डिंग्स, सोशल मीडिया और यहां तक कि स्थानीय कार्यक्रमों में भी स्कूलों के आकर्षक विज्ञापन देखने को मिलते हैं। हर स्कूल अपने आप को “सर्वश्रेष्ठ”, “भविष्य निर्माता” और “सफलता की गारंटी” देने वाला संस्थान बताता है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये दावे वास्तविकता से मेल खाते हैं, या फिर यह केवल अभिभावकों की उम्मीदों और भावनाओं का लाभ उठाने का एक तरीका है?

आज का अभिभावक पहले से कहीं अधिक जागरूक है, लेकिन साथ ही वह अपने बच्चों के भविष्य को लेकर उतना ही चिंतित भी है। वह चाहता है कि उसका बच्चा एक अच्छे स्कूल में पढ़े, बेहतर सुविधाएं प्राप्त करे और जीवन में आगे बढ़े। इसी सोच के चलते वह अक्सर अपनी आय से अधिक खर्च करने के लिए भी तैयार हो जाता है। कई परिवार ऐसे हैं जो अपनी जरूरतों में कटौती करके, कर्ज लेकर या अतिरिक्त काम करके बच्चों की फीस भरते हैं। उनके मन में यह विश्वास होता है कि महंगे स्कूल में पढ़ाई का मतलब है बेहतर शिक्षा और निश्चित सफलता।

निजी स्कूल इसी मनोविज्ञान को समझते हैं और अपने प्रचार में इसका भरपूर उपयोग करते हैं। वे अपने कैंपस, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट क्लासरूम, एयर-कंडीशंड सुविधाओं, खेल गतिविधियों और अन्य आधुनिक संसाधनों को प्रमुखता से दिखाते हैं। इसके साथ ही, वे प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे मेडिकल, इंजीनियरिंग, कानून और रक्षा सेवाओं में सफलता के बड़े-बड़े दावे भी करते हैं। कई बार विज्ञापनों में कुछ चुनिंदा छात्रों की उपलब्धियों को इस तरह प्रस्तुत किया जाता है, जैसे वह पूरे स्कूल के स्तर को दर्शाती हों।

लेकिन जब हम इन दावों को गहराई से परखते हैं, तो एक अलग ही तस्वीर सामने आती है। वास्तविकता यह है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का प्रतिशत बहुत कम होता है। चाहे वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा हो, इंजीनियरिंग की प्रतिष्ठित परीक्षाएं हों, या फिर कानून और रक्षा सेवाओं से जुड़ी परीक्षाएं—इनमें सफल होने वाले छात्रों की संख्या अक्सर सीमित होती है। कई बार तो पूरे साल में गिने-चुने छात्र ही इन परीक्षाओं को पास कर पाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या स्कूल द्वारा किए गए दावे वास्तविकता के अनुरूप हैं?

यह भी एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि इन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी केवल स्कूल की पढ़ाई के आधार पर संभव नहीं होती। अधिकतर छात्र अलग से कोचिंग संस्थानों का सहारा लेते हैं, जहां उन्हें विशेष रूप से इन परीक्षाओं के लिए तैयार किया जाता है। वे अतिरिक्त समय, मेहनत और संसाधन लगाते हैं। ऐसे में यदि कोई स्कूल इन छात्रों की सफलता का पूरा श्रेय अपने ऊपर लेता है, तो यह अभिभावकों को गुमराह करने जैसा हो सकता है।

बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम भी किसी स्कूल की गुणवत्ता को मापने का एक प्रमुख आधार होते हैं। लेकिन यहां भी अक्सर देखा जाता है कि बहुत कम छात्र ही 90 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त कर पाते हैं। 95 प्रतिशत से ऊपर अंक लाने वाले छात्रों की संख्या तो और भी कम होती है। यदि कोई स्कूल खुद को क्षेत्र का अग्रणी संस्थान बताता है, तो उससे यह अपेक्षा की जाती है कि उसके परिणाम भी उसी स्तर के हों। लेकिन कई बार यह अपेक्षा पूरी नहीं हो पाती।

फीस का मुद्दा इस पूरे विषय का सबसे संवेदनशील पहलू है। निजी स्कूलों की फीस लगातार बढ़ती जा रही है, और कई मामलों में यह मध्यम वर्गीय परिवारों की आर्थिक क्षमता से बाहर हो जाती है। फीस के अलावा भी कई तरह के अतिरिक्त खर्च होते हैं—जैसे परिवहन शुल्क, यूनिफॉर्म, किताबें, वार्षिक शुल्क, गतिविधि शुल्क आदि। कुल मिलाकर, एक बच्चे की शिक्षा पर होने वाला खर्च काफी अधिक हो जाता है।

यहां यह समझना जरूरी है कि स्कूलों को अपने संचालन के लिए धन की आवश्यकता होती है। अच्छे शिक्षक, आधुनिक सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था, और सह-पाठयक्रम गतिविधियां—इन सभी का एक खर्च होता है। लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है जब फीस और शिक्षा की गुणवत्ता के बीच संतुलन नहीं होता। यदि स्कूल अत्यधिक फीस ले रहा है, तो उससे यह अपेक्षा करना गलत नहीं है कि वह उसी स्तर की गुणवत्ता भी प्रदान करे।

सरकार ने इस समस्या को देखते हुए कई राज्यों में फीस नियंत्रण के लिए नियम और कानून बनाए हैं। फीस रेगुलेशन कमेटियां गठित की गई हैं, जिनका उद्देश्य स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वृद्धि को रोकना है। लेकिन व्यवहार में इन नियमों का प्रभाव सीमित दिखाई देता है। कई बार अभिभावकों को अपने अधिकारों की जानकारी नहीं होती, और वे अकेले आवाज उठाने से हिचकिचाते हैं।

इस स्थिति में अभिभावकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्हें केवल विज्ञापनों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय स्कूल के वास्तविक प्रदर्शन, शिक्षकों की गुणवत्ता, और पिछले परिणामों का गंभीरता से विश्लेषण करना चाहिए। यदि संभव हो, तो अन्य अभिभावकों से बातचीत करनी चाहिए और उनके अनुभव जानने चाहिए। स्कूल के दावों और वास्तविकता के बीच अंतर को समझना आवश्यक है।

इसके अलावा, यदि अभिभावकों को लगता है कि स्कूल पारदर्शिता नहीं बरत रहा है या गलत दावे कर रहा है, तो उन्हें सामूहिक रूप से आवाज उठानी चाहिए। एकजुट होकर स्कूल प्रबंधन से जवाब मांगना, और आवश्यक होने पर संबंधित शिक्षा अधिकारियों या बोर्ड के पास शिकायत दर्ज कराना, एक प्रभावी कदम हो सकता है। इससे न केवल समस्या का समाधान हो सकता है, बल्कि भविष्य में ऐसी स्थितियों को रोका भी जा सकता है।

यह भी जरूरी है कि हम सफलता की परिभाषा को केवल अंकों और प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित न रखें। हर बच्चा अलग होता है, उसकी रुचियां और क्षमताएं भी अलग होती हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल एक परीक्षा में सफलता दिलाना नहीं, बल्कि बच्चे के समग्र विकास को सुनिश्चित करना होना चाहिए। एक अच्छा स्कूल वही है जो बच्चे को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद करे।

आज के समय में यह समझना बेहद जरूरी है कि कोई भी स्कूल सफलता की गारंटी नहीं दे सकता। स्कूल केवल एक मंच प्रदान करता है, जहां से बच्चा अपनी यात्रा शुरू करता है। उसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह कितना मेहनत करता है, उसे कैसा मार्गदर्शन मिलता है, और उसका वातावरण कैसा है।

अंततः, शिक्षा को एक सेवा के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि केवल एक व्यापार के रूप में। स्कूलों की जिम्मेदारी है कि वे पारदर्शिता बनाए रखें, अपने दावों के प्रति जवाबदेह रहें, और अभिभावकों के विश्वास को बनाए रखें। वहीं, अभिभावकों की भी यह जिम्मेदारी है कि वे जागरूक रहें, सही जानकारी के आधार पर निर्णय लें, और आवश्यकता पड़ने पर अपनी आवाज उठाएं।

यदि इन दोनों पक्षों के बीच संतुलन और विश्वास बना रहता है, तभी हम एक ऐसी शिक्षा प्रणाली का निर्माण कर सकते हैं जो वास्तव में बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बना सके, न कि केवल एक महंगा सौदा बनकर रह जाए।

(डॉ. सत्यवान सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), एक कवि और सामाजिक विचारक है।)