Friday, July 3, 2026
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आलेख

आज की महाभारत

दीप्ती डांगे मुंबई

रात के दो बजे थे।
कमरे में बस लैपटॉप की नीली रोशनी थी और गीता के पन्नों की धीमी सरसराहट।
प्रोफेसर आयुष मेहता ने पन्ना पलटा और बुदबुदाए —क्या महाभारत सच में खत्म हुआ था या वह हर युग में नए रूप में लौटता है?
तभी हवा स्थिर हो गई।घड़ी की सुइयाँ थम गईं।और कमरे में एक सुनहरी आभा फैल गई।उसमें उभर आया वक़्त का पहिया,चमकता, घूमता, और बोलता हुआ-आयुष,मैं वक़्त हूँ।तुम जिस युग को आधुनिक कहते हो,
वहाँ भी महाभारत जारी है।बस रणभूमि बदल गई है,अस्त्र अब शब्द हैं, और युद्ध अब मन का है। चलो तुमको उस आधुनिक हस्तिनापुर में लेकर चलता हूँ।

आधुनिक हस्तिनापुर

आयुष ने खुद को एक विशाल सभा में खड़ा पाया, जहाँ एक सभा चल रही थी वह एक स्क्रीन थी और मंच पर खड़ा था दुर्योधन, कुर्ता पजामा पहने पर भीतर वही सत्ता की प्यास से जलता चेहरा।
उसने ऊँची आवाज़ में कहा-मैं ही धर्म, देश का रक्षक हूँ।पांडव अधर्मी है देश के दुश्मन है तुम हमारा साथ दो हम तुमको उनसे बचाएंगे।
बगल में शकुनी था —
अब पासों की जगह उसने कीबोर्ड पकड़ रखा था।
हर क्लिक के साथ स्क्रीन पर झूठ फैला रहा था उसके साथी X पर झूठ फैला रहे थे हर ट्वीट के साथ भीड़ बँटती जा रही थी।
शकुनि और कौरव मुस्करा रहे थे।और सोच कर खुश हो रहे थे कि सत्य की ज़रूरत नहीं,कहानी वही जीतती है जो ज़्यादा शेयर होती है। ज्यादा बार बोली जाती है। उंस सभा मे भीड़ तालियाँ बजा रही थी,पर आँखों में प्रश्न तैरने लगे थे क्या सचमुच धर्म एक व्यक्ति से बँध सकता है?
सभा के कोने में बैठे भीष्म अब भी मौन थे क्योंकि वे पद, प्रतिष्ठा और वफादारी के जाल में फँसे थे।
द्रोणाचार्य सोचते रहे अगर मैं बोलूँ, तो अपनी गद्दी खो दूँगा।
और इस तरह मौन,अधर्म का सबसे मज़बूत साथी बन गया।
कृष्ण भगवान अब किसी मंदिर में नहीं,
हर जागे हुए मन में थे।कभी किसी बच्चे के सवाल में,कभी किसी कवि की कलम में,कभी किसी माँ की नज़र में।
एक बालक ने पूछा -माँ, अगर वो सच कहता है तो हमें डर क्यों लगता है। हमको जाति में क्यों बांटा जाता है।
माँ के भीतर भी यही सवाल था फिर उसने बोला सत्य डर नहीं देता,झूठ ही भय से अपना अस्तित्व बचाता है।
धीरे-धीरे लोग उठने लगे।भीड़ अब बस सुन नहीं रही थी,सोचने लगी थी।
क्या सचमुच देश का असली गद्दार कौन हैं?या हमें किसी ने बाँट दिया है?

दुर्योधन की आवाज़ अब काँपने लगी।
वह चिल्लाया-जो मुझसे सवाल करेगा, जो मेरे ओर मेरी कुर्सी के बीच आएगा वो मेरे खिलाफ है देशद्रोही है।ये कुर्सी मेरे पिता की है।इसको मुझसे कोई नही ले सकता।
पर इस बार भीड़ नहीं झुकी।लोगों ने एक स्वर में कहा-हम धर्म चाहते हैं, पर सत्य के साथ। देश संविधान से चलेगा न कि वंशवाद से

अब दुर्योधन की असलियत उजागर हो गई।
उसके अपने ही अनुयायी कहने लगे-
हम डर और नफ़रत फैलाते थे।हमें शक्ति का लालच दिया गया था।

सभागार में सन्नाटा छा गया।
लोग जो कभी उसकी जयकार करते थे,
अब उसके झूठ से थरथराने लगे।

दुर्योधन चिल्लाया-यह सब षड्यंत्र है। मैं ही सत्य हूँ। मैं ही देश का रक्षक हूँ।
पर इस बार उसकी आवाज़ लौट आई-
खोखली, थकी, पराजित।
दूसरी तरफ
अर्जुन भीड़ के बीच खड़ा हुआ। वही भ्रम में क्या युद्ध अब धनुष से नहीं नही लड़ जाएगा। हर व्यक्ति सच को कैसे समझेगा जानेगा की धर्म किस तरफ ओर अधर्म किस तरफ। व्यक्ति वो डर के साथ है, या सत्य के साथ।
वक़्त का पहिया मुस्कराया-और आकाश में गूँजा कृष्ण का स्वर-जब लोग स्वयं सोचना शुरू कर देते हैं,
तब अधर्म का साम्राज्य स्वयं ढह जाता है।और वो धर्म की तरफ आ जाएगा। पार्थ ये युद्ध तुम्हारा अकेले का नही हर व्यक्ति का है। आज कोई भी इस युद्ध से खुद को अलग नही कर सकता। तुमको तो बस उनको राह दिखानी है। उनके विवेक को जगाना है। तुम्हारा हथियार गांडीव नही तुम्हारे शब्द और सोच होगी स्थल सोशल मीडिया, सभाएं और सम्मेलन होंगे। जहां तुमको लोगो को सच से अवगत कराना है।

धीरे-धीरे सब शांत हुआ।नीले आकाश में नई किरणें उभरीं।वक़्त का पहिया बोला-हर युग में दुर्योधन जन्म लेता है,हर युग में शकुनी जाल बुनता है,
पर हर बार-कृष्ण भी लौटते हैं,
मनुष्य के विवेक के रूप में।
आयुष ने गहरी साँस ली।
गीता का पन्ना बंद करते हुए बोले-
महाभारत कभी खत्म नहीं होती,बस समय और मंच बदल जाता है,
किरदार वही रहते हैं।

मूक-बधिर बच्चों के लिए वरदान, मऊ में निःशुल्क स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन

9 बच्चों को मिला कॉक्लियर इंप्लांट का सुनहरा अवसर

मऊ ( राष्ट्र की परम्परा ) जन्मजात मूक-बधिरता (गूंगे बहरेपन) से पीड़ित बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के तहत निःशुल्क स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन किया गया।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संजय गुप्ता ने जानकारी दी कि यह शिविर 10 नवम्बर 2025 (सोमवार) को जिला चिकित्सालय सभागार, में आयोजित किया गया।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं एडिप योजना के अंतर्गत शिविर
नोडल अधिकारी डॉ. बी. के. यादव ने बताया कि यह शिविर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) और एडिप योजना के अंतर्गत सतकृति के सहयोग से संपन्न हुआ। इस दौरान कुल 23 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें से 9 बच्चों को कॉक्लियर इंप्लांट के लिए चिन्हित कर संदर्भित किया गया।

सरकार वहन करेगी 10 लाख तक का खर्च

डी.ई.आई.सी मैनेजर अरविंद वर्मा ने बताया कि कॉक्लियर इंप्लांट वाराणसी में किया जाएगा, और इसके बाद बच्चों की स्पीच थेरेपी मऊ में होगी। इस उपचार पर 8 से 10 लाख रुपये तक का खर्च आएगा, जिसे सरकार पूरी तरह से वहन करेगी।

कैसे पाएं इस योजना का लाभ?

अधिक जानकारी और इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए अपने गांव की आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर RBSK टीम, ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक या जिला चिकित्सालय स्थित मूक-बधिरता क्लीनिक एवं NHM कार्यालय में RBSK मैनेजर से संपर्क किया जा सकता है।

इस निःशुल्क शिविर ने मूक-बधिर बच्चों के भविष्य को सुनहरी राह दी है। सरकार की यह पहल उन परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है, जो महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते।

मतदेय स्थलों की आलेख्य सूची प्रकाशित, डीएम ने राजनीतिक दलों संग की महत्वपूर्ण बैठक

सुझाव–आपत्तियां निर्धारित अवधि में देने की अपील

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी संतोष कुमार शर्मा की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी निर्वाचन को देखते हुए मतदेय स्थलों की आलेख्य सूची के प्रकाशन पर चर्चा करना था।
जिलाधिकारी ने बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार आज पूरे जनपद में मतदेय स्थलों की आलेख्य सूची प्रकाशित कर दी गई है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे सूची का गहन अध्ययन कर अपने सुझाव एवं आपत्तियां निर्धारित समयावधि में उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और सुव्यवस्थित बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। राजनीतिक दलों द्वारा प्राप्त सुझावों का परीक्षण कर आवश्यक संशोधन किए जाएंगे, जिससे हर मतदाता को सहज, सुरक्षित और सुविधाजनक मतदान वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि यदि कोई मतदेय स्थल जर्जर भवन में स्थित हो, या आबादी से अत्यधिक दूरी पर हो, तो उसकी जानकारी प्रशासन को तुरंत उपलब्ध कराई जाए, ताकि उसके स्थान पर उपयुक्त भवन चिन्हित किया जा सके।साथ ही जिलाधिकारी ने सभी दलों से अपने बीएलए (कक्ष निरीक्षक) की सूची जिला निर्वाचन कार्यालय में उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, जिससे निर्वाचन से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित रूप से संचालित किया जा सके।
इस दौरान बैठक में उपजिलाधिकारी गण, जिला सूचना अधिकारी तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहें।


प्रदेश के विद्यालयों में ‘वंदे मातरम्’ गायन अनिवार्य होगा: योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी विद्यालयों में ‘वंदे मातरम्’ के अनिवार्य गायन की घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम राज्य में राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक गौरव को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की धड़कन रहा है। इसे गाकर पीढ़ियों ने राष्ट्र के प्रति समर्पण, साहस और एकता का संदेश प्रसारित किया है।
गोरखपुर में एकता यात्रा का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज की युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और स्वतंत्रता संघर्ष के मूल्यों से जोड़ना आवश्यक है। उनके अनुसार, विद्यालयों में ‘वंदे मातरम्’ के नियमित गायन से बच्चों के मन में देशभक्ति की भावना और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और अधिक सुदृढ़ होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत का स्वर केवल प्रार्थना सभा तक सीमित न रहकर, बाल मन में एक सकारात्मक ऊर्जा और राष्ट्रीय गौरव का भाव संचारित करेगा।
उन्होंने ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ ने लोगों में असाधारण ऊर्जा और जोश भरा था। 1896 से लेकर 1920 के दशक तक यह कांग्रेस अधिवेशनों में नियमित रूप से गाया जाता रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि समय के साथ इस गीत को लेकर कई विचार उभरते रहे, लेकिन इसकी राष्ट्रीय महत्ता और प्रेरक शक्ति कभी क्षीण नहीं हुई।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि प्रदेश के हर सरकारी और निजी विद्यालय में प्रतिदिन प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन अनिवार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों में मातृभूमि के प्रति निष्ठा और सम्मान की भावना विकसित होगी और नई पीढ़ी राष्ट्र के मूल्यों को समझ सकेगी।
उन्होंने कहा कि भारत की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक विविधता को सम्मानित करने के लिए ऐसे गीतों का सामूहिक गायन अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार, जब बच्चे एक स्वर में राष्ट्रगीत गाते हैं, तो उनमें सामाजिक समरसता, जिम्मेदारी और साझा विरासत के प्रति विश्वास मजबूत होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान राष्ट्र की प्रगति का आधार है। उन्होंने अपील की कि विद्यालय, शिक्षक और अभिभावक इस पहल का समर्थन करें ताकि बच्चे केवल पुस्तक से नहीं बल्कि संस्कृति और परंपरा से भी सीखते हुए आगे बढ़ें।

सलेमपुर में नाबालिग बालिका लापता, पिता ने जताई अपहरण की आशंका, मुकदमा दर्ज

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।
सलेमपुर कोतवाली क्षेत्र के नगर के एक वार्ड से नाबालिग बालिका के लापता होने का मामला सामने आया है। बालिका के पिता ने कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर बेटी के अपहरण की आशंका जताई है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बालिका के पिता ने बताया कि उनकी 14 वर्षीय पुत्री रोजाना की तरह शुक्रवार की शाम मोहल्ले के ही एक घर से भोजन का अवशेष पशुओं को खिलाने के लिए लाई थी। पहली बार अवशेष लेकर लौटी और पशुओं को खिलाया, लेकिन जब वह दोबारा अवशेष लेने गई तो वह वापस नहीं लौटी।

काफी देर होने पर परिजनों ने आसपास के क्षेत्रों में खोजबीन शुरू की। तलाश के दौरान एक स्थान पर बालिका की बाल्टी मिली, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। परिजन चिंतित होकर कोतवाली सलेमपुर पहुंचे और पुलिस से कार्रवाई की मांग की।

कोतवाली प्रभारी निरीक्षक महेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि, “मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पुलिस टीम बालिका की तलाश में लगातार जुटी हुई है।”

पोषण भी – पढ़ाई भी ” खेल , शिक्षा और कुपोषण को दूर करने के लिए आंगनवाडी कार्यकत्रियों को किया गया प्रशिक्षित

  • मऊ ( राष्ट्र की परम्परा ) जनपद के रतनपुरा विकास खण्ड सभागार में पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं के साथ-साथ शालापूर्व शिक्षा को भी आंगनवाडी केंद्रों के माध्यम से सुदृढ़ किए जाने के उद्देश्य से ” पोषण भी – पढ़ाई भी ” कार्यक्रम के अंतर्गत विकास खण्ड के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली समस्त सेवाओं के संबंध में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष रामाश्रय मौर्य ने कहा कि इस कार्यक्रम का लक्ष्य बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना और देश को कुपोषण मुक्त बना कर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उनकी प्रारंभिक शिक्षा और पोषण दोनों की आवश्यकताओं को पूरा करना है।
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  • उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की सराहना करते हुए कहा कि देश को कुपोषण मुक्त बनाने में इनका महत्वपूर्ण योगदान है । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि कृष्णा राजभर ने कहा कि पोषण भी पढ़ाई भी’ एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों को बच्चों के लिए बेहतर देखभाल और शिक्षा केंद्र बनाना है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राकेश सिंह ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को उनकी जिम्मेदारियां का एहसास कराते हुए इस कार्य में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने का आह्वान किया ।
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  • कार्यक्रम में बोलते हुए बाल विकास परियोजना अधिकारी बेबी परवीन ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 0 से 6 वर्ष के बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के समन्वय के लिए प्रशिक्षित किया जाना है जिसमें खेल-आधारित शिक्षा और कुपोषण प्रबंधन पर जोर दिया जाता है। कार्यक्रम में बी एम सी गज़ाला कमर , मुख्य सेविका नीलिमा , चांदमती , लालमुनी , आशा सिंह , विजय लक्ष्मी , लिपिक पृथ्वीराज चौहान , वी सी कमलेश सहित विकासखंड की आंगनबाड़ी कार्यकत्रिया मौजूद रही

फरीदाबाद से विस्फोटक बरामदगी पर बोले गिरिराज सिंह — “हमेशा एक ही समुदाय क्यों?” बयान से मचा सियासी तूफान

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा हरियाणा के फरीदाबाद से भारी मात्रा में विस्फोटक और आईईडी बनाने की सामग्री बरामद करने के बाद, राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस मामले में एक डॉक्टर की गिरफ्तारी ने सनसनी फैला दी है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस घटना पर विवादित टिप्पणी कर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।

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बातचीत में गिरिराज सिंह ने कहा कि “यह घटना 1993 के मुंबई बम धमाकों से भी ज्यादा खतरनाक हो सकती थी। बाबा बागेश्वर की यात्रा के दौरान हजारों लोग मौजूद थे, यदि उन पर हमला होता तो भयानक स्थिति बन सकती थी।” उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की सतर्कता की सराहना करते हुए कहा कि “मोदी सरकार ने साजिश को समय रहते विफल कर दिया।”

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हालांकि, गिरिराज सिंह का अगला बयान विवाद का कारण बन गया। उन्होंने कहा, “जब भी आतंकवादी पकड़े जाते हैं, वे हमेशा एक ही समुदाय से क्यों होते हैं? जो लोग कहते हैं कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, उनसे पूछना चाहिए कि आखिर ऐसा क्यों है?”

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उन्होंने विपक्षी नेताओं — राहुल गांधी, लालू प्रसाद यादव, अखिलेश यादव और असदुद्दीन ओवैसी — पर भी हमला बोला, यह कहते हुए कि “ऐसे गंभीर मामलों पर उनकी चुप्पी निंदनीय है।”

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बता दें कि जम्मू-कश्मीर पुलिस की टीम ने जांच के दौरान भारी मात्रा में आईईडी बनाने की सामग्री, गोला-बारूद और संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियाँ भी इसमें शामिल हैं।

गिरिराज सिंह इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं। बिहार चुनाव प्रचार के दौरान “नमक हराम” बयान पर उन्हें कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी थी।

सड़क दुर्घटना में वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव का निधन, पत्रकार जगत में शोक की लहर

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के प्रख्यात वरिष्ठ पत्रकार और घुघली चीनी मिल के पूर्व सुरक्षा अधिकारी सुरेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव का रविवार देर रात सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। उनके असामयिक निधन से पत्रकारिता जगत ही नहीं, पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई है।
जानकारी के अनुसार, रविवार शाम सुरेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव बाइक से घर से निकले थे। जोगिया गांव के पास एक दूसरी बाइक से जोरदार भिड़ंत में उन्हें गंभीर चोटें आईं। हादसे में उनका कूल्हा टूट गया तथा उन्हें अंदरुनी चोटें भी लगीं। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। लेकिन डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद बीती रात उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पत्रकार जगत में शोक की लहर फैल गई।
राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत, गोरखपुर मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनुज कुमार तिवारी, शत्रुंजय सिंह, आशीष शुक्ल, डॉ. के. एस. मिश्र, जितेंद्र सिंह, डॉ. मृगेश बहादुर सिंह, राकेश जायसवाल, बृजेंद्र पांडेय, डॉ. सतीश पाण्डेय, दिनेश तिवारी, पशुपति नाथ पांडेय, आशीष कुमार गौतम, बंधु मद्धेशिया, रंजीत कुमार, अर्जुन पटेल, संदीप गौड़, अनिल यादव, विजय गुप्ता, महेश विश्वकर्मा, अमृत जायसवाल, संदीप पांडेय, डॉ. दिनेश चंद्र, विवेक जायसवाल, मदन मुरारी चौबे एवं कैलाश सिंह ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि सुरेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव सरल स्वभाव, निष्पक्ष लेखनी और दृढ़ कार्यशैली के धनी थे। उनका जाना पत्रकारिता जगत के लिए अपूर्णनीय क्षति है।

गैंग बनाकर लूट करने वाले दो शातिर अपराधियों पर गैंगेस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई

लगातार वारदातों से फैला रहे थे दहशत, अब कानून के शिकंजे में आए गिरोह के सदस्य

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
संगठित अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत गोरखपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। थाना एम्स पुलिस ने लूटपाट की घटनाओं में सक्रिय दो शातिर अपराधियों के विरुद्ध गैंगेस्टर एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई की है।
थाना एम्स पुलिस ने बताया कि गैंग लीडर अनिल चौहान पुत्र कोईल चौहान निवासी बड़ी रेवतिहिया थाना पिपराइच और उसके साथी उग्रसेन चौहान उर्फ लाला पुत्र स्व. राम सिंह चौहान निवासी खुटहवा तुर्रा नाला थाना पिपराइच मिलकर एक संगठित गिरोह बनाकर लूट, मारपीट, गाली-गलौज, अवैध शस्त्र रखने और आमजनमानस में भय व आतंक फैलाने जैसी आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त थे।
पुलिस जांच में यह पाया गया कि यह गिरोह भौतिक व आर्थिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से लगातार आपराधिक घटनाओं को अंजाम देता रहा है। इनके खिलाफ विभिन्न थानों में लूट, चोरी, शस्त्र अधिनियम, मारपीट, धमकी और धोखाधड़ी जैसे संगीन अपराधों के एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।

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इनकी बढ़ती आपराधिक गतिविधियों और समाज में व्याप्त भय के मद्देनज़र पुलिस द्वारा विस्तृत गैंग चार्ट तैयार कर जिला मजिस्ट्रेट गोरखपुर की अनुमति के पश्चात दोनों अपराधियों पर गैंगेस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई है। इसके तहत थाना एम्स पर मु0अ0सं0 453/25 धारा 2(ख) (i), (iv), (xi)/3(1) गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1986 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दोनों अपराधी गोरखपुर शहर और आसपास के इलाकों में लंबे समय से सक्रिय थे। इनके विरुद्ध थाना एम्स, थाना पिपराइच और थाना शाहपुर में कई आपराधिक प्रकरण पहले से दर्ज हैं।
गोरखपुर पुलिस का कहना है कि इन अपराधियों की वजह से क्षेत्र में भय का माहौल था। अब इन पर गैंगेस्टर एक्ट की कार्रवाई कर उनकी संपत्तियों की भी जांच की जा रही है।
थाना एम्स पुलिस ने बताया कि इस कार्रवाई का उद्देश्य अपराधियों के मनोबल को तोड़ना और समाज में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है।

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गोरखपुर पुलिस प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे संगठित अपराधियों के खिलाफ आगे भी इसी प्रकार की कठोर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया पदयात्रा का नेतृत्व

सरदार पटेल की 150वीं जयंती और ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर गोरखपुर में गूंजा राष्ट्रभक्ति का स्वर

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती और ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सोमवार को गोरखपुर में राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत भव्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नगर निगम के लक्ष्मी पार्क में पहुंचकर रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और वीरांगना को श्रद्धांजलि दी। पूरा परिसर ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों से गूंज उठा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई और सरदार पटेल दोनों ही भारत के साहस, एकता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति और संगठन कौशल से देश को एक सूत्र में बांधा। आज का भारत इन्हीं महापुरुषों के आदर्शों से प्रेरित होकर आगे बढ़ रहा है।”
कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह ने सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गीत केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि हमारी आत्मा का स्वर है, जिसने आज़ादी के आंदोलन में करोड़ों भारतीयों को एकता के सूत्र में बांधा।

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ऐतिहासिक पदयात्रा का शुभारंभ

सभा के बाद मुख्यमंत्री ने पदयात्रा का नेतृत्व किया। यात्रा की शुरुआत टाउनहॉल स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा से हुई, जहाँ मुख्यमंत्री ने बापू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इसके बाद पदयात्रा गोलघर, कचहरी चौराहा, गणेश चौराहा, काली मंदिर होते हुए पटेल चौराहा पहुँची, जहाँ उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
पदयात्रा में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, भाजपा कार्यकर्ता, विद्यार्थी, समाजसेवी संगठन और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। सड़कों के दोनों ओर खड़े नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। चारों ओर “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “सरदार पटेल अमर रहें” की गूंज से शहर का वातावरण राष्ट्रप्रेम के रंग में रंग गया।
यात्रा धर्मशाला पुल, असुरन चौक से गीता वाटिका तक निकली। मार्ग में जगह-जगह स्वागत मंच बनाए गए थे, जहाँ स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। हर वर्ग और हर आयु वर्ग के लोगों में इस आयोजन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

सुरक्षा व्यवस्था रही अभेद्य

पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। एडीजी जोन मुथा अशोक जैन, डीआईजी रेंज एस. चनप्पा, मंडलायुक्त अनिल ढींगरा, जिलाधिकारी दीपक मीणा, एसएसपी राजकरन नय्यर, नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल, जीडीए उपाध्यक्ष आनंद वर्धन, एडीएम सिटी अंजनी कुमार सिंह, एडीएम वित्त विनीत कुमार सिंह, एसपी सिटी अभिनव त्यागी, एसपी साउथ जितेंद्र कुमार, एसपी नार्थ जितेंद्र श्रीवास्तव, एसडीएम सदर दीपक गुप्ता, तहसीलदार ज्ञान प्रताप सिंह, एसीएम राजू कुमार, सीआरओ हिमांशु वर्मा, एडीएम प्रशासन सहदेव मिश्र, अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा और अतुल कुमार समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी पैदल चलकर व्यवस्था की निगरानी करते रहे। प्रमुख चौराहों पर पुलिस बल, पीएसी और ट्रैफिक पुलिस की तैनाती रही। ड्रोन कैमरे और सीसीटीवी से सुरक्षा चाक-चौबंद रखी गई।

रन फॉर यूनिटी : एकता और स्वाभिमान का प्रतीक

देशभर में इसी अवसर पर “रन फॉर यूनिटी” का आयोजन हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ यह अभियान आज भारतीय जनता पार्टी द्वारा 75 जनपदों और 403 विधानसभा क्षेत्रों में भव्य रूप से मनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह आयोजन एकता, अखंडता और स्वदेशी भावना का जीवंत उदाहरण है।

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उन्होंने कहा कि गुजरात के नर्मदा जिले के केवड़िया सरोवर में स्थित सरदार पटेल की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी न केवल भारत की, बल्कि दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति (182 मीटर) है। यह भारत की एकता, समरसता और स्वाभिमान का प्रतीक है। सरदार पटेल ने आज़ादी के बाद 562 रियासतों का एकीकरण कर भारत की अखंडता को साकार किया। इसलिए उन्हें “भारत की एकता का शिल्पी” कहा जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वदेशी और आत्मनिर्भरता सरदार पटेल के विचारों के केंद्र में थे। आज भारत उन्हीं सिद्धांतों पर चलते हुए “आत्मनिर्भर भारत” के निर्माण की दिशा में अग्रसर है।

वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष : राष्ट्र की आत्मा का स्वर

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर इसे राष्ट्र की आत्मा का स्वर बताया। 1876 में पहली बार यह गीत गूंजा था, जिसने देशभक्ति और एकता की भावना को जनमानस में स्थापित किया। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इस गीत को स्वरबद्ध किया था, जो भारत की संस्कृति और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
वक्ताओं ने कहा कि 1937 में कांग्रेस की एक रिपोर्ट में “वंदे मातरम्” गीत में संशोधन की बात कही गई थी, जबकि यह गीत भारतीय राष्ट्रीयता का सबसे बड़ा प्रतीक रहा है। कांग्रेस ने कई बार भारत की एकता के प्रश्न पर समझौता किया, जिसके परिणामस्वरूप 1947 में देश का विभाजन हुआ।

एक भारत, श्रेष्ठ भारत” का संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि सरदार पटेल की 150वीं जयंती और ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष हमें यह स्मरण कराते हैं कि राष्ट्र सर्वोपरि है। उन्होंने कहा — “सरदार पटेल ने जिस भारत को एकता के सूत्र में बांधा, वही आज आत्मनिर्भर और सशक्त भारत का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। हमें मिलकर उनके ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को साकार करना है।”
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।राष्ट्रभक्ति केवल भावना नहीं, बल्कि एक संकल्प है — समाज और देश के उत्थान के लिए कुछ कर गुजरने का।”

देशभक्ति से सराबोर रहा शहर

इस अवसर पर पूरे शहर का माहौल देशभक्ति और गर्व से सराबोर रहा। नगर निगम और विभिन्न संस्थाओं ने तिरंगे झंडों, पुष्प सज्जा और रोशनी से मार्गों को सजाया। सड़कों पर ढोल-नगाड़ों की गूंज और “वंदे मातरम्” के स्वर वातावरण में देशप्रेम का संचार कर रहे थे।
गोरखपुर में निकली यह ऐतिहासिक पदयात्रा न केवल सरदार पटेल को श्रद्धांजलि थी, बल्कि यह राष्ट्र की एकता, अखंडता और अमर गीत “वंदे मातरम्” की विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त प्रतीक बन गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में निकली यह यात्रा शहर के इतिहास में एकता और राष्ट्रप्रेम की मिसाल के रूप में दर्ज हो गई।

राज्य के हर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में अब गूंजेगा ‘वंदे मातरम

योगी सरकार का बड़ा फैसला: अब उत्तर प्रदेश के सभी स्कूलों में अनिवार्य होगा ‘वंदे मातरम’, बोले CM – भारत माता के सम्मान से बढ़कर कुछ नहीं”

📍 लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों में ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम भारत माता के प्रति श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रीय गौरव की भावना को जागृत करेगा। योगी ने यह ऐलान गोरखपुर में आयोजित ‘एकता यात्रा’ कार्यक्रम के दौरान किया।

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उन्होंने कहा कि कुछ लोग आज भी भारत की एकता और अखंडता से ऊपर अपने मत और मजहब को रखते हैं, जबकि ‘वंदे मातरम’ का विरोध किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा, “वंदे मातरम हमारे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है, इसके गायन से हर नागरिक में देशभक्ति की भावना प्रबल होगी।”

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योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी का नाम लिए कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 1896 से 1922 तक कांग्रेस के हर अधिवेशन में वंदे मातरम गाया जाता था, लेकिन 1923 में जब मोहम्मद अली जौहर अध्यक्ष बने, तो उन्होंने इसका विरोध किया और मंच छोड़ दिया।
उन्होंने दावा किया कि यदि उस समय कांग्रेस ने राष्ट्रीय गीत का सम्मान करते हुए कठोर रुख अपनाया होता, तो शायद भारत का विभाजन टल सकता था।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि 1937 में कांग्रेस ने एक समिति बनाकर वंदे मातरम में संशोधन किया, क्योंकि कुछ छंदों में भारत माता को दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में प्रस्तुत किया गया था।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम का विरोध भारत की आत्मा पर प्रहार है, और यूपी सरकार इसे लेकर राज्य के हर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में गायन अनिवार्य करेगी।

इसी बीच, कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि 1937 में वंदे मातरम के महत्वपूर्ण छंदों को हटा देने से “विभाजन की मानसिकता” को बल मिला।
कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने पलटवार करते हुए कहा कि 1937 की कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में महात्मा गांधी, नेहरू, पटेल, सुभाष चंद्र बोस जैसे नेता शामिल थे, और उस निर्णय को रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह से लिया गया था।

वर्तमान विवाद के बीच यूपी सरकार का यह निर्णय न केवल राजनीतिक सरगर्मी बढ़ाने वाला है बल्कि देश में राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर एक नई बहस भी छेड़ रहा है।

विद्युत विभाग के लापरवाही से हो सकता है बड़ा हादसा

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
नगर के पटेल नगर में आधा दर्जन से अधिक पोल टूट कर लटक रहे है। जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगो की माने तो यहां पर विधुत पोल कई दिन पूर्व से टूट कर लटक रहे है लेकिन इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है।बिजली विभाग भी मौन दिख रहा है।लोगो का कहना है कि यदि पोलों को नहीं बदला गया तो कभी भी इससे भारी दुर्घटना हो सकती है।

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वही बरहज तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम खुदिया मिश्र मे बरहज, देवरिया मुख्य मार्ग से लेकर ट्युवेल तक लगभग आधा किलोमीटर तक बॉस के सहारे कटे फ़टे विधुत तार गाँव की सड़क से होते हुए जा रहे है। स्थानीय लोगो का कहना है कि कई बार पोल गाड़ने को लेकर शिकायत किया जा चूका है किन्तु बिजली विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किगयी अबतक, इस लटकते तार से कभी भी जान माल का खतरा हो सकता है। इस संबंध में विधुत विभाग के अधिशासी अभियंता से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

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योगी सरकार के गड्ढा मुक्त आदेश को ठेंगा दिखा रहे विभागीय अधिकारी

खोरिया–रतनपुर मार्ग पर गड्ढों का साम्राज्य, ग्रामीण परेशान

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश की सभी सड़कों को 10 अक्टूबर 2025 तक गड्ढा मुक्त करने का निर्देश दिए जाने के बावजूद जनपद महराजगंज के खोरिया–रतनपुर मार्ग की स्थिति जस की तस बनी हुई है। यह सड़क आज भी जगह-जगह गड्ढों से पट चुकी है। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी के चलते स्थानीय लोगों का आना-जाना दूभर हो गया है।
करीब एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस मार्ग पर किसी प्रकार की मरम्मत कार्य नहीं शुरू हुआ। बरसात बीत चुकी है, फिर भी सड़क की हालत सुधरने के बजाय और अधिक खराब होती जा रही है। खोरिया, रतनपुर, गुलहरिया जंगल, अजगरहा, तुलसीपुर सिंहपुर, लक्ष्मीपुर, सहित आस-पास के दर्जनों गांवों के लोग इस मार्ग से प्रतिदिन गुजरते हैं। यह सड़क राहगीरों के लिए यह जानलेवा साबित हो रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि आए दिन छोटे-बड़े वाहन गड्ढों में फंसकर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। मोटरसाईकिल सवार गिरकर चोटिल हो रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी मौके पर आना तो दूर, शिकायत सुनने तक की जहमत नहीं उठा रहे। ग्रामीणों ने बताया कि यह मार्ग कई वर्षों से बदहाल है। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद उम्मीद जगी थी कि शायद अब सड़क दुरुस्त हो जाएगी, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता ने उस उम्मीद पर पानी फेर दिया। सरकारी स्तर पर गड्ढा मुक्त सड़क अभियान की घोषणा तो हर वर्ष होती है, लेकिन इस मार्ग की हालत यह बताने के लिए काफी है कि धरातल पर सरकारी दावे कितने खोखले हैं। जब तक अधिकारी अपने दायित्व को गंभीरता से नहीं निभाएंगे, तब तक मुख्यमंत्री के आदेश केवल फाइलों में ही सीमित रह जाएंगे। इस पर क्षेत्र के राजेश, पिन्टू, रिंकू,अजय, विशाल, राहुल, मंजेश,देवी शरण, उपेन्द्र,सोनू, विपिन आदि लोगों ने जिला प्रशासन से गढ्ढों को मुक्त कराने की मांग किया है।

चन्द्रशेखर : पैदल यात्रा से प्रधानमंत्री तक का सफर

10 नवम्बर 1990 : जब चन्द्रशेखर बने भारत के प्रधानमंत्री — संघर्ष, समर्पण और राजनीतिक परिवर्तन का प्रतीक दिन

10 नवम्बर 1990 भारतीय राजनीति के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन देश ने एक ऐसे नेता को प्रधानमंत्री के रूप में देखा, जिसने सत्ता से अधिक सिद्धांतों को महत्व दिया। चन्द्रशेखर का प्रधानमंत्री पद तक पहुंचना केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि लोकतंत्र के संघर्षशील स्वरूप और जनसेवा के प्रति समर्पण की मिसाल था।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और घटनाक्रम
1989 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की पराजय के बाद वी.पी. सिंह के नेतृत्व में जनता दल की सरकार बनी थी, जिसे भाजपा और वाम दलों का समर्थन प्राप्त था। लेकिन मंडल आयोग की सिफारिशों के लागू होने और अयोध्या आंदोलन की तेज़ी के चलते राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी। भाजपा ने समर्थन वापस ले लिया, और वी.पी. सिंह की सरकार गिर गई।

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इसी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच 10 नवम्बर 1990 को चन्द्रशेखर ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उन्होंने कांग्रेस के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई और देश का नेतृत्व संभाला।
चन्द्रशेखर : सिद्धांतों के नेता
चन्द्रशेखर को भारतीय राजनीति में “युवातुर्क” के नाम से जाना जाता था। वे इंदिरा गांधी के दौर में कांग्रेस के भीतर एक विचारधारा-आधारित राजनीति के समर्थक थे। उनका राजनीतिक जीवन आदर्शवाद, संघर्ष और जनता से गहरे जुड़ाव का प्रतीक था।
प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने “भारत यात्रा” (1983) की थी, जिसमें उन्होंने पैदल चलकर देश के गांव-गांव की समस्याओं को समझने का प्रयास किया था। यह यात्रा उनके जमीनी नेतृत्व की पहचान बनी।

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संक्षिप्त कार्यकाल, लेकिन ऐतिहासिक निर्णय
चन्द्रशेखर का प्रधानमंत्री कार्यकाल लगभग आठ महीने (नवम्बर 1990 से जून 1991) तक चला। इस अवधि में उन्होंने आर्थिक संकट से जूझ रहे देश को स्थिर रखने की कोशिश की।
उनके नेतृत्व में भारत ने पहली बार गोल्ड रिजर्व (सोना) गिरवी रखकर विदेशी मुद्रा संकट से राहत पाने का कदम उठाया — जो बाद में आर्थिक सुधारों की दिशा में पहला बड़ा कदम माना गया।
वे प्रशासनिक सादगी और पारदर्शिता के समर्थक थे। प्रधानमंत्री निवास में सादे जीवन और सच्चाई के लिए वे हमेशा चर्चित रहे।
राजनीतिक विरासत और योगदान
चन्द्रशेखर का जीवन इस बात का प्रमाण है कि राजनीति में विचार और ईमानदारी का स्थान सबसे ऊपर होता है। उन्होंने सत्ता के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए राजनीति की। उनका प्रधानमंत्री कार्यकाल भले ही छोटा रहा, परंतु उन्होंने भारतीय लोकतंत्र में नैतिकता की मिसाल कायम की।

खेलो इंडिया अस्मिता लीग: देवरिया की धरा पर निखरेगा नारी शक्ति का जोश

🏅 देवरिया में गूंजेगी बालिकाओं की कदमताल — खेलो इंडिया अस्मिता लीग एथलेटिक्स प्रतियोगिता 28 नवंबर से

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)जनपद एक बार फिर खेल प्रतिभाओं का संगम बनने जा रहा है। भारत सरकार द्वारा प्रायोजित खेलो इंडिया अस्मिता लीग एथलेटिक्स (ऑल इंडिया) बालिका प्रतियोगिता का आयोजन आगामी 28 नवंबर 2025 को जिला क्रीड़ांगन, देवरिया में भव्य रूप से किया जाएगा। यह आयोजन बालिकाओं के खेल कौशल को राष्ट्रीय स्तर पर मंच प्रदान करने का एक सशक्त प्रयास है।

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यह प्रतियोगिता एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में आयोजित की जा रही है, जिसमें देशभर से 14 वर्ष एवं 16 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाएं भाग लेंगी। विजेताओं को फेडरेशन द्वारा मेडल एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।

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प्रतियोगिता का शुभारंभ प्रातः 8:30 बजे होगा। आयोजन की जिम्मेदारी जिला एथलेटिक्स, स्पोर्ट्स एंड गेम्स एसोसिएशन, देवरिया को दी गई है। इस अवसर पर जनपद के विभिन्न विद्यालयों — शासकीय, वित्तपोषित, CBSE, ICSE एवं बेसिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध — की प्रधानाचार्याओं एवं प्रधानाचार्यों से आह्वान किया गया है कि वे अपनी छात्राओं को खेल प्रभारियों सहित इस ऐतिहासिक आयोजन में सम्मिलित कराएं।

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इस कार्यक्रम के बारे में शिवानन्द नायक, पूर्व प्रधानाचार्य एवं अवैतनिक सचिव, प्रदेश उपाध्यक्ष (देवरिया) ने बताया कि यह प्रतियोगिता बालिकाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन और प्रतिस्पर्धात्मक भावना को सशक्त करेगी।