संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)l प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एसआईआर को लेकर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव द्वारा दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव परिणाम आने के बाद से अखिलेश यादव पूरी तरह हताश और निराश दिखाई दे रहे हैं, और अब “झूठ बोलने का टीका लगा लिया है”।
मंत्री श्री राजभर ने दावा किया कि एसआईआर के लिए हर गांव में बीएलओ तैनात किए गए हैं और सरकार सभी नागरिकों से समय पर वेरिफिकेशन कराने की अपील कर रही है।
साल 2027 में सपा के पीडीए के सहारे सत्ता में आने के दावे पर तंज करते हुए उन्होंने कहा कि यह पीडीए नहीं, बल्कि ‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’ है।
कांग्रेस और सपा पर निशाना साधते हुए राजभर ने कहा कि विपक्ष के पास 2047 तक सत्ता में आने की कोई संभावना नहीं है, इसलिए नेताओं को धैर्य रखते हुए अपनी विपक्षी भूमिका निभानी चाहिए।
कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर जिले में एक पार्टी कार्यकर्ता के परिवारजन की मृत्यु पर शोक व्यक्त करने पहुंचे थे।
कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर का सपा सुप्रीमो पर कटाक्ष, कहा 2047 तक विपक्ष में ही रहें
नकली नोट कांड: मुख्य सरगना MBBS डॉक्टर गिरफ्तार, जेल में बनी थी गैंग; भोपाल में था छापाखाना
खंडवा पुलिस ने किया बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश
खंडवा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में पकड़े गए नकली नोटों के मामले में पुलिस ने एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश करते हुए मुख्य सरगना डॉ. प्रतीक नवलखे सहित तीन आरोपियों को भोपाल से गिरफ्तार किया है। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि इस गिरोह की नींव खंडवा जिला जेल में पड़ी थी, जहाँ अलग-अलग मामलों में बंद ये आरोपी पहली बार मिले थे और जेल से बाहर आने के बाद संगठित होकर नकली नोट छापने का धंधा शुरू कर दिया।
मुख्य आरोपी MBBS डॉक्टर और करोड़ों का गबन
गिरोह का मुख्य सरगना, डॉ. प्रतीक नवलखे, एक MBBS डिग्रीधारी है और बुरहानपुर जिला अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर/RMO के रूप में पदस्थ रह चुका है। सरकारी पद पर रहते हुए उसने करोड़ों रुपये के गबन में भी कथित तौर पर संलिप्तता दिखाई थी।
जेल से छूटने के बाद, नवलखे ने भोपाल की गोकुलधाम सोसाइटी में एक कमरा किराए पर लिया और वहाँ नकली नोट छापने का काम शुरू किया। यह गिरोह साल 2022 से सक्रिय था और इसने नागपुर, मालेगांव सहित कई शहरों में एजेंट नियुक्त किए थे। पुलिस के अनुसार, नकली नोटों के दम पर इन्होंने कई संपत्तियां भी खरीदी थीं।
₹19.78 लाख के नकली नोटों की बरामदगी
यह मामला तब सामने आया जब 2 नवंबर को खंडवा की जावर थाना पुलिस ने ग्राम पेठिया के एक इमाम मौलाना जुबेर अंसारी के कमरे से 19 लाख 78 हजार रुपये के नकली नोट और उपकरण बरामद किए। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, खंडवा एसपी मनोज कुमार राय ने एएसपी महेंद्र तारनेकर के नेतृत्व में एक एसआईटी (SIT) का गठन किया था।
भोपाल से तीन आरोपी गिरफ्तार
एसआईटी की जांच में पता चला कि जुबेर को नकली नोट डॉ. प्रतीक नवलखे उपलब्ध कराता था। 23 नवंबर को मिली मुखबिर की सूचना पर एसआईटी ने भोपाल के गोकुलधाम सोसाइटी में दबिश दी और डॉ. प्रतीक नवलखे (बुरहानपुर), गोपाल उर्फ राहुल (हरदा), और दिनेश गोरे (अमरावती, महाराष्ट्र) को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों से 36 नकली नोट (₹500 के), 7 मोबाइल, 1 लैपटॉप, 15 चेकबुक, 32 एटीएम/डेबिट कार्ड, एक ड्रायर मशीन, और नोट छापने के अन्य उपकरण बरामद किए गए।
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जेल में बना नेटवर्क और गोल्ड फ्रॉड
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के सदस्यों ने खंडवा जेल में अपना नेटवर्क बनाया था और रिहा होने के बाद नकली नोट छापने की योजना को अंजाम दिया। यह भी पता चला है कि डॉ. प्रतीक नवलखे पहले कोलकाता में एक गोल्ड फ्रॉड का शिकार हुआ था, जहाँ उसे नकली हॉलमार्क वाली ज्वेलरी देकर लगभग 5 लाख रुपये का नुकसान हुआ था।
गिरोह ने भोपाल के होशंगाबाद रोड पर एक फर्जी ट्रैवल एजेंसी का ऑफिस किराए पर ले रखा था, जिसका उपयोग वे अपने नकली नोटों की खपत के नेटवर्क को संचालित करने के लिए करते थे। तीनों आरोपियों को खंडवा कोर्ट में पेश किया गया है, जहाँ आगे की पूछताछ के लिए रिमांड की प्रक्रिया चल रही है।
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इतिहास में दर्ज वे व्यक्तित्व, जिनकी विदाई ने भारत को बदल दिया”
“24 नवंबर का दुखभराः इतिहास में दर्ज वे व्यक्तित्व, जिनकी विदाई ने भारत को बदल दिया”
24 नवंबर इतिहास के उन महान आत्माओं को याद करने का दिन है, जिन्होंने अपने विचारों, संघर्षों और सामाजिक योगदान से राष्ट्र की दिशा तय की। इस दिन हमें विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तित्वों की स्मृति को श्रद्धांजलि देने का अवसर मिलता है।
- गुरु तेग़ बहादुर (निधन: 1675)
गुरु तेग़ बहादुर का जन्म पंजाब के अमृतसर में हुआ। वे सिख धर्म के नौवें गुरु थे। शिक्षा और अध्यात्म के साथ साहस और बलिदान उनकी पहचान रहा। धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उन्होंने अपना जीवन बलिदान कर मानवता की मिसाल पेश की। उनका शहादत दिवस भारतीय इतिहास का स्वर्ण अध्याय है।- कल्बे सादिक़ (निधन: 2020)
उत्तर प्रदेश के लखनऊ में जन्मे डॉ. कल्बे सादिक़ आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने वाले प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु थे। उन्होंने समाज सुधार, शिक्षा विस्तार और धार्मिक सौहार्द के लिए जीवन समर्पित किया। ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ के उपाध्यक्ष के रूप में उन्होंने शांति और मानवता की आवाज उठाई। - ये भी पढ़ें –मूलांक के अनुसार जानें आपका दिन, किसे मिलेगा अचानक लाभ और किसे रहना होगा सतर्क?✨
- कल्बे सादिक़ (निधन: 2020)
- कैलाश चंद्र जोशी (निधन: 2019)
मध्य प्रदेश के देवास जनपद में जन्मे कैलाश चंद्र जोशी भाजपा के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री थे। साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया। प्रदेश के विकास, पारदर्शिता और संगठनात्मक मजबूती में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। - उमा देवी खत्री (निधन: 2003)
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में जन्मीं उमा देवी खत्री, जिन्हें फ़िल्म जगत में ‘टुनटुन’ नाम से पहचाना गया, हिंदी सिनेमा की पहली महिला कॉमेडियन मानी जाती हैं। अद्भुत हास्य अभिनय और अनोखे संवाद अदायगी के कारण वे हर घर की पसंद बनीं। भारतीय फिल्म हास्य जगत में उनका योगदान अतुलनीय है।
मूलांक के अनुसार जानें आपका दिन, किसे मिलेगा अचानक लाभ और किसे रहना होगा सतर्क?✨
✨24 नवंबर अंक राशिफल 2025: मूलांक के अनुसार जानें आपका दिन, किसे मिलेगा अचानक लाभ और किसे रहना होगा सतर्क?✨
Horoscope Numerology 24 November 2025, अंक राशिफल—जैसे जन्म नाम से राशि निर्धारित होती है, उसी तरह जन्म तिथि से मूलांक बनता है और अंक ज्योतिष में उसी के आधार पर दैनिक फलादेश तैयार किया जाता है। 24 नवंबर 2025, सोमवार का दिन ऊर्जा, परिवर्तन और प्रगति का संकेत दे रहा है। खासकर मूलांक 8 वालों के लिए आज का दिन सरप्राइज और अचानक लाभ लेकर आने वाला है।
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⭐ मूलांक 1
आज का दिन खास है। लव लाइफ में नए रिश्ते की शुरुआत हो सकती है। कार्यक्षेत्र में मेहनत बढ़ेगी। ऑनलाइन भुगतान व बड़े निवेश में सावधानी रखें। व्यापार में लाभ सीमित रहेगा। सहकर्मियों से मतभेद संभव हैं, इसलिए व्यवहार संतुलित रखें।
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⭐ मूलांक 2
ऑफिस व बिजनेस में खुद को सिद्ध करने के अवसर मिलेंगे। अधिकारी आपकी सराहना करेंगे। नई योजना शुरू करने के लिए समय अच्छा है। घर में खुशी का माहौल रहेगा। अतिथि आगमन के योग। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा लेकिन मानसिक तनाव से बचें।
⭐ मूलांक 3
दिन मिला-जुला प्रभाव देगा। कार्यक्षेत्र में सावधानी से निर्णय लें। प्रेम संबंधों में बहस से दूरी रखें। व्यापार में लाभ कम, नुकसान की संभावना अधिक। परिवार में किसी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। आपकी हेल्थ सामान्य रहेगी।
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⭐ मूलांक 4
आज अच्छी खबर मिलने के योग। संतान पक्ष से लाभ प्राप्त होगा। व्यापार विस्तार की योजना सफल हो सकती है। दफ्तर में सहयोग मिलेगा लेकिन विरोधी सक्रिय हो सकते हैं। विवादों से दूरी रखें। क्रोध और वाणी पर संयम जरूरी।
⭐ मूलांक 5
आज व्यापार औसत रहेगा। प्रतिस्पर्धा से बचें और शांत रहें। विरोधियों से सावधान रहें। परिवार का सहयोग मिलेगा। वाहन चलाते समय सावधानी रखें। पेट संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं, खानपान संयमित रखें।
⭐ मूलांक 6
ऊर्जा और उत्साह से भरा दिन। कार्यक्षेत्र में आपकी जिम्मेदारियाँ बढ़ेंगी और प्रमोशन के योग बनेंगे। व्यापार में लाभ मिलेगा। घर में मंगलकार्य हो सकते हैं। संतान से शुभ समाचार। पेट संबंधी परेशानी संभव।
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⭐ मूलांक 7
ऑफिस और व्यापार का माहौल अनुकूल रहेगा। अधिकारियों की ओर से प्रशंसा प्राप्त होगी। नई योजना पर काम शुरू कर सकते हैं। अचानक लाभ मिलने के योग। दांपत्य जीवन सुखद। मौसम बदलने से सेहत प्रभावित हो सकती है।
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⭐ मूलांक 8
यह दिन सरप्राइज भरा और लाभदायी रहेगा। अचानक धन लाभ हो सकता है। रिसर्च और जानकारी की कमी में कोई बड़ा निर्णय न लें। भविष्य की चिंता से मन विचलित हो सकता है। परिवार में किसी की सेहत बिगड़ सकती है। विवाह संबंधित शुभ सूचना मिल सकती है।
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⭐ मूलांक 9
करियर व निजी जीवन में खुशियाँ आएंगी। रुके हुए कार्य पूरे होंगे। अधिकारी आपके काम की सराहना करेंगे। परिवार का सहयोग मिलेगा। कफ संबंधी समस्या परेशान कर सकती है। वाहन व मशीनरी का प्रयोग सावधानी से करें।
इंटर 2025: कक्षा 12 गणित के संभावित मुख्य प्रश्न जारी, परीक्षा से पहले पढ़ लें ये सवाल
एजुकेशन (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) । इंटरमीडिएट परीक्षा 2025 की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर है। पिछले 5 वर्षों के परीक्षा पैटर्न के आधार पर तैयार किए गए कक्षा 12 गणित के संभावित मुख्य प्रश्न जारी किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सूची से पढ़कर छात्र अपनी तैयारी को मजबूत कर सकते हैं और परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त कर सकते हैं।
गणित एक ऐसा विषय है जिसमें लगातार प्रैक्टिस सफलता की कुंजी है। इसलिए यदि छात्र इन संभावित प्रश्नों पर अच्छी पकड़ बना लें तो पेपर में अच्छे नंबर आने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
✔ सेक्शन-A: लघु उत्तरीय / वस्तुनिष्ठ महत्वपूर्ण प्रश्न
(पिछले 5 साल में सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले छोटे प्रश्न)
- यदि , तो ज्ञात कीजिए।
- सिद्ध कीजिए कि:
- यदि , तो det(A) ज्ञात करें।
- का मान ज्ञात कीजिए।
- सांख्यिकी में Mean और Median में अंतर।
- 2×2 मैट्रिक्स का उपयोग करके समीकरण हल करने से संबंधित प्रश्न।
- यदि , तो ज्ञात करें।
- साधारण डिटरमिनेंट निकालने वाला प्रश्न — हर साल पूछा जाता है।
✔ सेक्शन-B: मध्यम स्तर के महत्वपूर्ण प्रश्न
(इन टॉपिक्स से प्रश्न हर साल दोहराए जाते हैं) - त्रिज्या r वाले वृत्त का क्षेत्रफल Area Under Curve से सिद्ध करें।
- एक AP जिसका प्रथम पद 5 और अंतर 3 है, उसके 20 पदों का योग ज्ञात कीजिए।
- अवकलन से सिद्ध कीजिए कि का ढाल हर बिंदु पर बढ़ता है।
- दो पासे फेंकने पर योग 8 आने की प्रायिकता ज्ञात करें।
- Integration by Parts से हल करें।
- सीमा ज्ञात करें:
✔ सेक्शन-C: दीर्घ उत्तरीय मुख्य प्रश्न
(Boards में लगभग हर साल पूछे जाते हैं) - अवकलन – 20% वेटेज
- अवकलन के नियमों का उपयोग करके ज्ञात करें।
- समाकलन – सबसे ज्यादा दोहराया गया टॉपिक
- हल कीजिए।
- द्विघात फलन व ग्राफ
- सिद्ध करें कि का ग्राफ परवलय होता है और इसका शिखर ज्ञात करें।
- त्रिकोणमिति – बोर्ड का पसंदीदा प्रश्न
- सिद्ध करें:
\frac{1 – \tan A}{1 + \tan A} = \frac{\cos A – \sin A}{\cos A + \sin A} - प्रायिकता – लगातार 5 वर्षों में पूछा गया
- एक थैले में 6 लाल, 4 नीली और 5 हरी गेंदें हैं। नीली गेंद निकलने की प्रायिकता ज्ञात करें।
✔ इंटर 2025 गणित परीक्षा – महत्वपूर्ण रणनीतियाँ (Exam Tips)
✓ रोजाना कम से कम 2 घंटे गणित की प्रैक्टिस करें।
✓ NCERT के उदाहरण और एक्सरसाइज़ को दोहराएं—70% पेपर यहीं से आता है।
✓ Integration, Differentiation, Determinant और Trigonometry पर विशेष ध्यान दें।
✓ टाइम मैनेजमेंट के लिए 3 प्रैक्टिस पेपर जरूर हल करें।
✓ अंतिम समय में केवल सूत्र और संभावित प्रश्नों को दोहराएं।
वेद से पंचतत्व तक: सनातन धर्म के मूल आधार
✍️ नवनीत मिश्र
भारतीय संस्कृति अपनी प्राचीनता, गहराई और वैज्ञानिक दृष्टि के कारण विश्व की सबसे समृद्ध परंपराओं में मानी जाती है। इसकी मजबूती उन आधार स्तंभों पर टिकी है, जिन्होंने हजारों वर्षों से मानव जीवन, समाज और आध्यात्मिक साधना को दिशा दी है। इनमें वेद, पुराण, शास्त्र, चार धाम, ज्योतिर्लिंग, कुंभ स्थल और पंचतत्व प्रमुख हैं। ये स्तंभ मिलकर सनातन धर्म को स्थिर, जीवंत और कालजयी स्वरूप प्रदान करते हैं।
सबसे पहले आते हैं वेद, जिन्हें मानव ज्ञान का मूल स्रोत माना गया है। ऋग्वेद में प्रकृति और देव शक्तियों का स्वरूप है, यजुर्वेद में यज्ञ और कर्म का विज्ञान, सामवेद में सुरों और संगीत की पवित्रता, जबकि अथर्ववेद में औषधि, विज्ञान और जीवन का व्यावहारिक ज्ञान मिलता है। आज भी वेद भारतीय चिंतन का आधार हैं।
इसके बाद हैं अठारह पुराण, जो कथा और संवाद के माध्यम से जीवन, धर्म, इतिहास और नैतिक मूल्यों को सरलता से समझाते हैं। स्कन्द पुराण, शिव पुराण, विष्णु पुराण से लेकर ब्रह्माण्ड पुराण तक, ये ग्रंथ बताते हैं कि आचरण, भक्ति और कर्तव्य ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाते हैं।
छह प्रमुख शास्त्र: न्याय, सांख्य, वैशेषिक, योग, वेदान्त और मीमांसा। भारतीय दर्शन को तर्क, विज्ञान और विचार की दिशा देते हैं। विशेष रूप से योग शास्त्र आज पूरी दुनिया में स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन का आधार बन चुका है।
चार धाम: द्वारका, जगन्नाथपुरी, बद्रीनाथ और रामेश्वरम। आध्यात्मिक यात्रा के चार पवित्र ध्रुव हैं। इन धामों में दर्शन मात्र से मन की शुद्धि, स्थिरता और आस्था की नवीन ऊर्जा प्राप्त होती है।
इसी प्रकार बारह ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के दिव्य स्वरूप का प्रतीक हैं। सोमनाथ, केदारनाथ, महाकालेश्वर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर आदि ज्योतिर्लिंगों में आस्था की अनंत ज्योति जलती है और साधकों को आत्मज्ञान की ओर प्रेरित करती है।
कुंभ के चार स्थान: हरिद्वार, प्रयागराज, नासिक और उज्जैन। भारतीय संस्कृति के विशालतम आध्यात्मिक, सामाजिक और ज्ञान-समुद्र हैं। कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि संत परंपरा, योगविद्या, शास्त्र चिन्तन और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम है।
अंत में आते हैं पंचतत्व: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश। इन्हीं तत्वों से ब्रह्मांड और मानव शरीर की संरचना होती है। पंचतत्वों का संतुलन ही प्रकृति, स्वास्थ्य और जीवन की स्थिरता का मूल आधार है।
समग्र रूप से देखा जाए तो सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने का विज्ञान, प्रकृति के प्रति सम्मान और आत्मा की उन्नति का मार्ग है। इसके आधार स्तंभ समय के बदलाव से प्रभावित नहीं होते, बल्कि काल के साथ और अधिक प्रासंगिक होते जाते हैं। यही कारण है कि सनातन संस्कृति आज भी विश्व को दिशा देने वाली अद्वितीय परंपरा के रूप में जानी जाती है।
शहीदों के सरताज गुरु तेग बहादुर: धर्म, मानवता और अदम्य साहस के प्रतीक मौलिक एवं प्रवाहपूर्ण आलेख
✍️ पुनीत मिश्र
भारत के इतिहास में साहस, सहिष्णुता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले नामों में गुरु तेग बहादुर का स्थान अनन्य है। वे केवल सिख परंपरा के नौवें गुरु ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के संरक्षक, सत्य के प्रहरी और अत्याचार के अप्रतिम प्रतिरोध का प्रतीक थे। उनके जीवन की प्रत्येक घटना हमें यह बताती है कि धर्म का अर्थ संकुचित पहचान नहीं, बल्कि हर पीड़ित के अधिकार की रक्षा हैl चाहे वह किसी भी संप्रदाय, जाति या वर्ग से हो।
1621 में अमृतसर में जन्मे तेग बहादुर ने बचपन से ही वीरता और आध्यात्मिक शुचिता दोनों को आत्मसात किया। पिता गुरु हरगोबिंद की सैन्य परंपरा और आध्यात्मिक अनुशासन इन दोनों ने मिलकर उनके व्यक्तित्व को आकार दिया। युवावस्था में वे युद्ध कौशल में सिद्धहस्त थे, परंतु बाद में उनका मन तप, ध्यान और आत्मविचार की ओर अधिक आकर्षित हुआ। इसी गंभीरता और शांत तेजस्विता के कारण वे ‘तेग बहादुर’ कहलाएl वह वीर जिसने तलवार को संयम का प्रतीक बनाया, आक्रमण का नहीं।
गुरु पद ग्रहण करने के बाद उनका उद्देश्य केवल आध्यात्मिक उपदेश देना नहीं था; उन्होंने समाज में न्याय, समानता और धर्मस्वातंत्र्य की अनिवार्यता को स्थापित किया। वे मानते थे कि सच्ची भक्ति तब ही सार्थक है जब व्यक्ति निर्बल की रक्षा के लिए प्रतिरोध का साहस रखता हो। गुरु तेग बहादुर के प्रवचनों में यह भावना बार-बार प्रकट होती है कि मनुष्य को अपने भीतर के भय को जीतकर सत्य के लिए खड़ा होना चाहिएl चाहे उसके लिए प्राण ही क्यों न देने पड़ें।
जब कश्मीरी पंडितों पर जबरन धर्मांतरण का संकट आया, तब उन्होंने किसी राजा या हथियारबंद सेना के पास न जाकर गुरु तेग बहादुर से मदद मांगी। यह एक असाधारण विश्वास थाl क्योंकि वे सिख नहीं थे, फिर भी उन्हें लगा कि उनके अधिकारों के रक्षक गुरु तेग बहादुर ही हैं। गुरुजी ने बिना किसी संकोच के कहा “जो तुम्हारी रक्षा कर सकता है, वह दिल्ली की गद्दी तक जाकर करेगा।” यह कथन केवल एक आश्वासन नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक सत्य का प्रारंभ था जिसमें एक गुरु ने किसी अन्य धर्म के लोगों की आस्था बचाने के लिए स्वयं का बलिदान चुन लिया।
औरंगज़ेब के दरबार में उनसे केवल इतना कहा गया कि धर्म छोड़ दो, प्राण बच जाएंगे। पर गुरु तेग बहादुर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सत्य और धर्म यदि सौदे में लगाए जाएँ तो गुरुता का कोई अर्थ नहीं। उनके तीन शिष्यों की भयावह यातनाओं के बाद भी उनका धैर्य नहीं टूटा। अंततः 1675 में कुठाराघात से उनका बलिदान हुआ। इस बलिदान को इतिहास में हिन्द की चादर का नाम इसलिए मिला क्योंकि उन्होंने धर्म की स्वतंत्रता पर छाए भय के अंधकार को अपने आत्म-समर्पण से ढक लिया। यह विश्व इतिहास का वह दुर्लभ क्षण है जब किसी गुरु ने अपने अनुयायियों के लिए नहीं, बल्कि किसी और समुदाय की रक्षा हेतु मृत्यु को चुना।
गुरु तेग बहादुर की वाणी, जो गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज है, आज भी मन को मुक्त करने वाली है। उनका उपदेश है कि मनुष्य का सच्चा बल बाहरी शक्ति में नहीं, बल्कि दृढ़ और शांत अंत:करण में होता है। उनका दर्शन किसी संप्रदाय की सीमा में नहीं बंधा, बल्कि सर्वजन हिताय की नींव पर आधारित है। वे हमें सिखाते हैं कि भय से ऊपर उठकर सत्य का पालन ही वास्तविक आध्यात्मिकता है।
आज जब विश्व धार्मिक असहिष्णुता और पहचान की राजनीति से जूझ रहा है, गुरु तेग बहादुर का संदेश और भी प्रासंगिक हो उठा है। उनकी जीवनगाथा हमें बताती है कि धर्म का सार किसी एक विचारधारा का प्रभुत्व नहीं, बल्कि दूसरे के अधिकार की रक्षा है। शांति कोई कमजोरी नहींl बल्कि वह शक्ति है जो अत्याचार की नींव हिला सकती है। न्याय, करुणा और अधिकारों की रक्षा के लिए गुरुजी का साहस आज भी हर पीढ़ी को प्रेरित करता है।
गुरु तेग बहादुर का बलिदान केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं; वह भारतीय सभ्यता की आत्मा में अंकित शाश्वत प्रेरणा है। वे हमें यह राह दिखाते हैं कि सत्य, न्याय और स्वतंत्रता के लिए खड़ा होना ही मनुष्य होने का वास्तविक अर्थ है। उनकी विरासत हमें याद दिलाती है कि पहचानें अलग हो सकती हैं, पर मानवता एक ही हैl और उसी मानवता की रक्षा के लिए हिन्द की चादर ने हंसते-हंसते अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
धीरे चलिए, वरना जीवन की रफ्तार बन जाएगी काल—पुरानी सूक्तियों को न मानने की लापरवाही ले रही जानें
✍️ कैलाश सिंह
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)।आधुनिक समय की तेज रफ्तार संस्कृति लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। सड़क सुरक्षा से जुड़ी पुरानी सूक्तियां—धीरे चले, सुरक्षित रहें —आज सिर्फ पोस्टरों और दीवारों पर चिपकी हुई एक औपचारिक लाइन बनकर रह गई हैं। हकीकत यह है कि इन्हें न मान पाने की लापरवाही अब मौत का कारण बन रही है। जिले में बीते महीनों में बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं इस सच्चाई को और भी भयावह रूप में सामने ला रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क पर तीव्र गति और लापरवाही से वाहन चलाने का चलन खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। ग्रामीण इलाकों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग तक, जहां थोड़ा साफ रास्ता मिलता है, लोग एक्सीलेटर को पैरों तले कुचल देते हैं। परिणाम—दुर्घटनाएं ही नहीं, पूरे परिवार तबाह।पिछले कुछ हफ्तों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ है कि अधिकांश हादसों की जड़ गति है। तेज रफ्तार में नियंत्रण खोना, ओवरटेकिंग में जल्दबाजी, मोबाइल पर बात करना और हेलमेट/सीटबेल्ट न लगाना जैसे कारण रोजाना जिंदगी लील रहे हैं। पुलिस और प्रशासन की चेतावनियां भी अब लोगों की दिनचर्या में शामिल लापरवाह आदतों के सामने बेअसर होती दिख रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क सुरक्षा के नियम केवल कागजों और घोषणाओं में हैं। न तो जागरूकता अभियान नियमित रूप से हो रहे हैं और न ही सड़कों पर सख्त निगरानी परिणामस्वरूप, हादसे बढ़ रहे हैं और परिवारों में मातम। विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यदि अब भी लोग अपने व्यवहार में बदलाव नहीं लाते, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। उनकी साफ चेतावनी है—रफ्तार रोमांच हो सकती है, लेकिन जिंदगी उससे कहीं ज्यादा कीमती है।लोगों की बेपरवाही, प्रशासन की लचर व्यवस्था और नियमों की अनदेखी मिलकर एक ऐसी त्रासदी का रूप ले चुकी है जो हर घर को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है। क्या हम जीवन की असली कीमत भूल बैठे हैं?
विकास के दावों में दबी जनता की सच्चाई — जमीनी हालात ने खोली जिम्मेदारों की पोल
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। प्रदेश सरकार और विभागों के दावों में विकास के चमकदार चित्र भले ही रंगे जा रहे हों, लेकिन हकीकत का कैनवास आज भी धूसर ही दिखाई दे रहा है। शहरों से लेकर गांवों तक बुनियादी सुविधाओं की जमीनी तस्वीर जनता की पीड़ा को खुलकर बयान कर रही है। हालात यह हैं कि विकास के नाम पर योजनाएं तो कागजों में पूरी दिखती हैं, लेकिन जनता आज भी उन्हीं पुरानी मुश्किलों से जूझ रही है जिनका समाधान वर्षों से सिर्फ फाइलों में ढूंढा जा रहा है।
ग्राम पंचायतों में टूटी सड़कों, जल निकासी की समस्या, गंदगी और अंधेरी गलियों से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे मूलभूत मुद्दों पर जनता की आवाज़ लगातार उठती रही है,लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी ने लोगों की आशाओं को क्षीण कर दिया है। कई मोहल्लों में नालियां महीनों से जाम पड़ी हैं।
सड़कों पर गड्ढों का राज कायम है और पीने के पानी की समस्या ने आमजन को बेहाल कर दिया है। विभागीय अधिकारी अपने दौरे और बैठकों में बेहतर इंतजामों के दावे जरूर करते हैं, लेकिन हकीकत में उन दावों की जमीनी हकीकत जनता की परेशानी बनकर सामने आती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे वर्षों से सुधार की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।सवाल यह है कि आखिर विकास का वह चेहरा कहां है जिसे लेकर बड़े-बड़े मंचों से वादे किए जाते हैं? जनता यह जानने को मजबूर है कि योजनाओं का लाभ आखिर पहुंच किसे रहा है—क्योंकि जमीनी सच्चाई तो यह बताती है कि हालात अभी भी सुधरने का इंतजार कर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि यदि जिम्मेदार समय रहते सक्रिय न हुए तो समस्याएं और भयावह रूप ले सकती हैं। जनता के मुद्दों को केवल कागज पर नहीं, जमीन पर उतारने की जरूरत है, तभी विकास का असली अर्थ पूरा हो पाएगा।
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रफ्तार में ज़रा-सी गलती… और जिंदगी खत्म! सड़कें बनीं मौत का जाल, लोग फिर भी नहीं संभले
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद की सड़कों पर रफ्तार का खेल जानलेवा बनता जा रहा है। किसी भी प्रकार की गति में जरा-सा भी भटकाव, एक सेकेंड की लापरवाही… और पूरा परिवार उजड़ जाता है। हालिया हादसों ने साबित कर दिया है कि सड़कें अब सिर्फ रास्ते नहीं रहीं, मौत का जाल बन चुकी हैं। हर रोज किसी न किसी को
तेज गति,बिना नियंत्रण वाहन,गलत ओवरटेक,मोबाइल पर बात,या ध्यान भटकने का खामियाजा अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
चेतावनी पट्टिकाएं लगी हैं—पर लोग पढ़ते नहीं। नियम बने हैं—पर मानते नहीं। नतीजा: अस्पताल भरे पड़े हैं, परिवार रो रहे हैं, और सड़कें खून से लाल हो रही हैं।पिछले कुछ दिनों में ही कई दर्दनाक हादसों ने जनपद को झकझोर दिया—पर रफ्तार के दीवानों पर कोई असर नहीं। सड़क सुरक्षा नियम उनके लिए मजाक बनकर रह गए हैं। हेलमेट न पहनना, सीटबेल्ट न लगाना, रात में हाई बीम का गलत इस्तेमाल—यह सब मिलकर हादसों को और भी भयावह बना रहे हैं। यातायात विभाग मान चुका है कि सड़क पर होने वाली ज्यादातर मौतें टाली जा सकने वाली मौतें हैं। अगर वाहन चालक,गति सीमित रखें,मोबाइल से दूरी बनाएं,और सड़क अनुशासन का पालन करें,तो आधे से ज्यादा हादसे कभी न हों।
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लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल उल्टा है।लोग गाड़ी नहीं चलाते—गोलियों की तरह सड़क पर दौड़ते हैं।और जब हादसा होता है, तो पीछे छूट जाते हैं सिर्फ चीखें, पछतावा और बिखरी हुई ज़िंदगियां। विशेषज्ञों की चेतावनी है—रफ्तार मज़ा नहीं देती, मौत देती है। संभल जाएं, वरना एक सेकेंड की गलती पूरी ज़िंदगी ले सकती है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन सड़कों पर चल रहे इस मौत के खेल को रोकने के लिए कड़े कदम उठाएगा?और सबसे बड़ा सवाल—क्या लोग अपनी जान की कीमत समझेंगे?
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बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड यूएसए द्वारा लेखिका एवं कवियत्री सुशी सक्सेना सम्मानित
मध्यप्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। इंदौर मध्यप्रदेश भारत की सुप्रसिद्ध लेखिका एवं कवियत्री सुशी सक्सेना को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों और रचनात्मक योगदान के लिए बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, यूएसए (United States of America) द्वारा विशेष सम्मान से नवाज़ा गया। यह सम्मान उन्हें प्रेरणात्मक लेखन के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रदान किया गया। इंदौर मध्यप्रदेश भारत की लेखिका सुशी सक्सेना ने साहित्य के क्षेत्र में तो महारत हासिल किए हैं साथ ही इन्होंने राजनीतिक और वैज्ञानिक विषयों पर भी पुस्तकें लिखी हैं।
“अनेक प्रकाशित कृतियों और साहित्यिक सम्मान के साथ सबसे सृजनशील एवं प्रख्यात लेखिका एवं कवयित्री सुशी सक्सेना को बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड यूएसए के इंटरनेशनल चेयरमैन्स आलोक कुमार एस और डाॅ अविनाश डी सकुंडे पुने भारत व नेहा कुमारी जी, नई दिल्ली भारत ने प्रमाण-पत्र व विश्व-रिकॉर्ड से सम्मानित करते हुए गर्व महसूस किया और कहा….
यह प्रमाण-पत्र गर्वपूर्वक सुशी सक्सेना जी को उनके असाधारण रचनात्मक कौशल, समर्पण और साहित्य, विज्ञान एवं राजनीति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के सम्मान में प्रदान किया जाता है। एक लेखिका और कवयित्री के रूप में उनकी अद्भुत यात्रा ने देशभर में अनगिनत लोगों के हृदयों और विचारों को स्पर्श किया है। गहन भावनाओं, प्रभावशाली अभिव्यक्तियों और चिंतनशील लेखन के माध्यम से वे आधुनिक भारत की सबसे सृजनशील और प्रभावशाली महिला साहित्यिक आवाज़ों में से एक बनी हैं।
अपनी लेखनी के माध्यम से सुशी सक्सेना ने मानवीय अनुभवों के सार को अत्यंत सुंदरता से व्यक्त किया है। कविता, गद्य और प्रेरणादायक साहित्य, विज्ञान और राजनीति के क्षेत्र में उनकी रचनाएँ उनकी उस विलक्षण क्षमता को दर्शाती हैं, जिसमें वे कल्पना को सत्य से, भावनाओं को बुद्धि से, और सरलता को गहराई से जोड़ देती हैं। उन्होंने अब तक बारह पुस्तकें लिखी और प्रकाशित की हैं। उनकी रचनाएँ विभिन्न पत्रिकाओं, समाचार पत्रों और संकलनों में प्रकाशित होती रही हैं, जिनके लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहना और स्वर्ण पदक तथा “वंदे मातरम् पुरस्कार” जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है। यह विश्व-रिकॉर्ड उनके जुनून, रचनात्मक प्रतिभा और लेखन कला के प्रति आजीवन समर्पण का प्रमाण है — जो आने वाली पीढ़ियों को शब्दों की शक्ति और सौंदर्य को सहेजने और समझने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
सम्मान प्राप्त करने पर सुशी सक्सेना ने कहा कि, यह उपलब्धि उनके लिए अत्यंत गौरव का विषय है और यह उन्हें भविष्य में और अधिक सार्थक एवं प्रेरणादायक साहित्य, विज्ञान और राजनीतिक क्षेत्र में काम करने के लिए प्रेरित करती है। बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड यूएसए द्वारा दिया गया यह सम्मान सुशी सक्सेना की साहित्यिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है और साहित्य जगत में उनकी सशक्त पहचान को और अधिक सुदृढ़ करता है।
जन्मदिवस विशेष: 24 नवंबर को जन्मी प्रेरक विभूतियाँ
🔶 24 नवंबर को जन्मे महान व्यक्तित्व — संक्षिप्त जीवन परिचय
अंचिता शेउली (जन्म 2001)
पश्चिम बंगाल के देवनपुर गाँव में जन्मे भारतीय भारोत्तोलक अंचिता शेउली 73 किलोग्राम वर्ग में देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। छोटी उम्र से प्रशिक्षित, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया। सरल पृष्ठभूमि से उभरकर मेहनत और अनुशासन का उदाहरण बने।
मारोतराव कन्नमवार (जन्म 1963)
महाराष्ट्र के नागपुर जनपद में जन्मे कन्नमवार राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री बने। समाज-सुधार, ग्रामीण विकास, और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देने में उनकी विशेष भूमिका रही। शिक्षा साधारण लेकिन दृष्टि व्यापक थी, जिसने उन्हें जन नेता के रूप में स्थापित किया।
अरुंधति रॉय (जन्म 1961)
शिलांग, मेघालय में जन्मी अरुंधति रॉय अंग्रेज़ी साहित्य की प्रतिष्ठित लेखिका हैं। दिल्ली में वास्तुकला की शिक्षा प्राप्त की। उनका उपन्यास द गॉड ऑफ़ स्मॉल थिंग्स विश्व स्तर पर सम्मानित हुआ। सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण पर उनके विचार अत्यंत प्रभावशाली हैं।
इयान बॉथम (जन्म 1955)
इंग्लैंड के चेशायर में जन्मे इयान बॉथम विश्व क्रिकेट के महान ऑलराउंडर्स में गिने जाते हैं। टेस्ट मैचों में असाधारण प्रदर्शन के बाद टीम की कप्तानी की। सेवानिवृत्ति के बाद कमेंटेटर व समाजसेवी के रूप में भी सक्रिय।
अमोल पालेकर (जन्म 1944)
महाराष्ट्र के मुंबई में जन्मे अमोल पालेकर भारतीय सिनेमा के संवेदनशील अभिनेता और निर्देशक हैं। सर जे.जे. स्कूल ऑफ़ आर्ट से शिक्षा प्राप्त की। सरल और वास्तविक अभिनय शैली के लिए जाने जाते हैं। मराठी और हिंदी फिल्मों में नए आयाम जोड़े।
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सैयदा अनवरा तैमूर (जन्म 1936)
असम के कैसरनगर में जन्मी सैयदा तैमूर राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री और देश की पहली मुस्लिम महिला सीएम थीं। उच्च शिक्षा गुवाहाटी से प्राप्त की। शिक्षा, विकास और महिलाओं के अधिकारों के लिए उनका योगदान अविस्मरणीय है।
मोहम्मद शफ़ी क़ुरैशी (जन्म 1929)
कश्मीर के अनंतनाग में जन्मे क़ुरैशी भारतीय राजनीति के प्रमुख चेहरे थे। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से शिक्षा ली। बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रहते हुए प्रशासनिक सुधार, सौहार्द और विकास को नई दिशा दी।
हीरा लाल शास्त्री (जन्म 1899)
जयपुर, राजस्थान में जन्मे हीरा लाल शास्त्री राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बने। सामाजिक upliftment, शिक्षा विस्तार और प्रशासनिक सुधारों के लिए समर्पित रहे। सरल जीवन, उच्च विचार उनके व्यक्तित्व की पहचान थे।
छोटूराम (जन्म 1881)
हरियाणा के गढ़ी साम्पला गाँव में जन्मे सर छोटूराम किसान आंदोलन और ग्रामीण विकास के महान नेता थे। प्रारंभिक शिक्षा रोहतक में हुई। किसानों के हक़ और आर्थिक सुधारों हेतु बनाए गए कानूनों ने उन्हें “किसान-मसीहा” की उपाधि दिलाई।
कवासाजी जमाशेदजी पेटिगरा (जन्म 1877)
महाराष्ट्र मूल के पेटिगरा ब्रिटिश काल में डिप्टी कमिश्नर बनने वाले पहले हिंदुस्तानी थे। शिक्षा बॉम्बे प्रेसिडेंसी में प्राप्त की। प्रशासनिक ईमानदारी और कठोर अनुशासन के लिए जाने जाते हैं तथा भारतीय नौकरशाही में प्रेरक व्यक्तित्व माने जाते हैं।
नरसिम्हा रेड्डी (जन्म 1806)
आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र में जन्मे नरसिम्हा रेड्डी 1846 के विद्रोह में अग्रणी रहे और उन्हें भारत के प्रारंभिक स्वतंत्रता सेनानियों में गिना जाता है। शौर्य, नेतृत्व और देशभक्ति का उनका बलिदान स्वतंत्रता संघर्ष की नींव बना।
