Tuesday, June 30, 2026
Home Blog Page 446

जालंधर की युवती ने मनियर के युवक पर शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का आरोप, थाने में केस दर्ज

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)l पंजाब के जालंधर से पहुंची युवती ने मनियर कस्बे के एक युवक पर शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाते हुए मनियर थाना में मुकदमा दर्ज कराया है। युवती की शिकायत के बाद पुलिस मामले की गहन छानबीन में जुट गई है। पीड़िता के अनुसार उसकी पहचान मनियर निवासी युवक से कुछ समय पहले हुई थी। दोनों के बीच बातचीत धीरे-धीरे नजदीकियों में बदल गई। युवती का आरोप है कि युवक ने उससे शादी करने का वादा किया और इसी भरोसे पर उसने उसके साथ संबंध बनाए। बाद में युवक ने शादी से इनकार कर दिया, जिससे आहत होकर वह न्याय की तलाश में जालंधर से मनियर थाने पहुंची और तहरीर दी।बताया जा रहा है कि आरोपी युवक रेलवे विभाग में तैनात है। वहीं, युवती जालंधर में एएनएम के पद पर कार्यरत है। अहम बात यह है कि युवक की शादी 4 दिसंबर को कहीं और तय थी, जिसकी जानकारी युवती को बाद में हुई। इसी से नाराज होकर युवती ने कानूनी कार्रवाई का फैसला किया। पीड़िता का कहना है कि उसने कई बार युवक से संपर्क कर सच्चाई जानने की कोशिश की, लेकिन हर बार उसे टालने की कोशिश की गई। अंततः उसने अपने परिजनों को पूरी जानकारी दी और फिर थाने में शिकायत दर्ज कराई। मनियर थाना प्रभारी ने बताया कि युवती की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले से जुड़े सभी तथ्यों की गंभीरता से जांच की जा रही है। कॉल डिटेल, मैसेज और अन्य साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

रूद्रपुर में SIR कार्य के दबाव से शिक्षामित्र BLO रंजू दुबे की मौत, 28 नवम्बर को प्रियजनों से मिलेंगे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा )जनपद के रूद्रपुर क्षेत्र में SIR कार्य में तैनात महिला BLO और शिक्षामित्र रंजू दुबे की कार्यगत दबाव और मानसिक तनाव के चलते हुई मृत्यु ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। परिजनों के अनुसार, SIR कार्य के दौरान अनावश्यक दबाव और निरंतर तनाव के कारण उनकी तबियत अचानक बिगड़ गई। इलाज के लिए केजीएमयू लखनऊ ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

इस दुखद घटना के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए पीड़ित परिवार के समर्थन में खड़े होने का निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय 28 नवम्बर को अपराह्न 1 बजे रूद्रपुर ब्लॉक स्थित ग्राम मनियापुरा (माझा नारायण) पहुंचकर परिजनों से मिलेंगे और संवेदना व्यक्त करेंगे। उनके साथ प्रदेश स्तर के वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रताप सिंह भी मौजूद रहेंगे।

इस दौरे का संचालन पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राज बहादुर कर रहे हैं। दौरे की आधिकारिक सूचना प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी पत्र में दी गई है। कांग्रेस ने कहा है कि शिक्षामित्रों और BLO कर्मियों पर बढ़ते कार्यभार, मानसिक दबाव और असुरक्षा की स्थिति पर सरकार को तुरंत ध्यान देना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं का यह दौरा न सिर्फ शोक-संवेदना देने के लिए है, बल्कि कार्यगत तनाव के कारण सरकारी कर्मचारियों की स्थिति पर गंभीर संवाद शुरू करने की पहल भी है। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है और लोग दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

जीडीए की 129वीं बोर्ड बैठक सम्पन्न

विकास कार्यों की प्रगति पर हुई समीक्षा

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की 129वीं बोर्ड बैठक आज जीडीए सभागार में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जीडीए अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने की। बैठक में जिले के डीएम एवं जीडीए उपाध्यक्ष दीपक मीणा, जीडीए सचिव पुष्पराज सिंह, बोर्ड सदस्य तथा प्राधिकरण के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने जीडीए क्षेत्र में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों, निर्माण परियोजनाओं तथा योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाए। मंडलायुक्त ने विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी पर कड़ी नजर रखने और समय-समय पर निरीक्षण कर प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने पर बल दिया।
डीएम दीपक मीणा ने बैठक में सुझाव देते हुए कहा कि शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और शहरी जनसंख्या को देखते हुए जीडीए को भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर योजनाओं का निर्माण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना ही प्राथमिकता होनी चाहिए।
जीडीए सचिव पुष्पराज सिंह ने बोर्ड के समक्ष विभिन्न विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति, बजट प्रावधानों और आगामी योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में बोर्ड सदस्यों ने भी अपने-अपने सुझाव दिए और बेहतर शहरी विकास के लिए आवश्यक बिंदुओं पर चर्चा की।
जीडीए की 129वीं बोर्ड बैठक में जीडीए आवासीय योजनाओं, प्लाट आवंटन, सड़क निर्माण, सीवर लाइन, पार्कों के सौंदर्यीकरण तथा अन्य आधारभूत संरचनाओं से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। मंडलायुक्त ने अधिकारियों को पारदर्शिता, जवाबदेही व जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई और कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनका उद्देश्य शहर को योजनाबद्ध व आधुनिक स्वरूप प्रदान करना है।

एफआरसीटी से बेटी विवाह हेतु रामध्यान कुशवाहा को मिला दो लाख का सहयोग

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l नगर पंचायत भलुअनी के वार्ड नंबर 10 रामनगर इसरौली के रामध्यान कुशवाहा की बेटी के विवाह के लिए एफआरसीटी के सदस्यों द्वारा 214567 रुपए की धनराशि सहयोग के रूप में दी गई है। यह सहयोग 10 नवंबर से 25 नवंबर तक एफआरसीटी के सदस्यों द्वारा सीधे बेटी के पिता के खाते में 40 रुपए की दर से दिया गया है,साथ ही देवरिया जनपद के पथरदेवा निवासी राजेश मद्धेशिया को भी 215822 रुपए की धनराशि प्राप्त हुई है।
प्रदेश मीडिया प्रभारी ओमप्रकाश कुशवाहा व जनपद देवरिया के जिलाध्यक्ष शुभम शर्मा ने बताया कि नवंबर माह में संस्था द्वारा बेटी विवाह में प्रदेश में कुल छह परिवारों को 12 लाख 87 हजार 878 रुपए की धनराज प्रदान की गई।मार्च 2025 से शुरू हुए इस योजना में संस्था के सदस्यों द्वारा अब तक 48 बेटियों के विवाह के लिए, 48 लाख से ऊपर की धनराशि दी गई है।इस संस्था द्वारा आकस्मिक निधन और बेटी विवाह के लिए सदस्यों द्वारा अधिकतम 50 रुपए के हिसाब से सीधे नामिनी के खाते में सहयोग के रूप में दिया जाता है।इस संस्था में उत्तर प्रदेश में अब तक कुल 57 हजार सदस्य रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं। संस्था उत्तर प्रदेश में 31 अक्टूबर 2024 से संचालित है। इसके साथ उत्तराखंड, नई दिल्ली,मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ व झारखंड में भी 31 अक्टूबर 2025 से कार्य कर रही है।

डोर-टू-डोर अभियान से बढ़ी मतदाता जागरूकता

एईआरओ अरविंद नाथ पांडेय कर रहे एलान

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l 323 ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में मतदाता जागरूकता को लेकर एसआईआर गणना प्रपत्र भरवाने का अभियान तेजी पकड़ चुका है। एईआरओ/नायब तहसीलदार अरविंद नाथ पांडेय अपने सहयोगियों विद्या पांडेय सहित पूरी टीम के साथ लगातार क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों में पहुंचकर घर-घर एलान कर रहे हैं। टीम लोगों से अपील कर रही है कि वे एसआईआर गणना प्रपत्र भरकर समय से जमा करें, जिससे मतदाता सूची को और अधिक सटीक व अद्यतन बनाया जा सके।
अधिकारियों ने गुरुवार को सूरजकुंड, जाफराबाजार, रसूलपुर, माधोपुर, तकिया, कवलदह, दरिया चक, सूर्य बिहार कॉलोनी, हुमायूपुर, तिवारीपुर, घोषीपुर और अलीनगर सहित कई इलाकों में व्यापक भ्रमण किया। इस दौरान टीम ने मोहल्लों में माइक के माध्यम से एलाउस कर बताया कि चुनाव आयोग के निर्देशानुसार प्रत्येक पात्र मतदाता को अपना एसआईआर गणना प्रपत्र बीएलओ से प्राप्त कर अवश्य भरना चाहिए। ऐसा करने से मतदाता सूची में सही जानकारी अपडेट होती है और प्रत्येक योग्य नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होता।
अभियान के दौरान एईआरओ अरविंद नाथ पांडेय ने लोगों को समझाते हुए कहा कि एसआईआर प्रपत्र भरना एक अत्यंत सरल प्रक्रिया है, जिसे पूरा करने में केवल कुछ मिनट लगते हैं, लेकिन इसका प्रभाव पूरे निर्वाचन तंत्र पर पड़ता है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन लोगों को प्रपत्र भरने में दिक्कत होती है, उनके लिए बीएलओ और टीम के सदस्य हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं। टीम घर-घर जाकर यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी पात्र मतदाता पीछे न रह जाए।
मोहल्लों में एलान करते हुए अधिकारियों ने कहा कि “जागरूक मतदाता ही मजबूत लोकतंत्र की नींव होते हैं। इसलिए सभी लोग अपने घरों से निकलें, एसआईआर गणना प्रपत्र प्राप्त करें, उसे सही-सही भरें और समय से जमा जरूर करें।” टीम लोगों को यह भी बता रही है कि गलत या अधूरी जानकारी से मतदाता सूची प्रभावित होती है, इसलिए हर विवरण ध्यानपूर्वक लिखा जाए।
अभियान को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। कई क्षेत्रों में स्थानीय निवासियों ने स्वयं आगे बढ़कर एसआईआर फॉर्म प्राप्त किए और भरकर तुरंत बीएलओ को जमा भी किया। घर-घर चल रहे इस जन-जागरूकता अभियान के चलते उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार क्षेत्र में अधिकतम मतदाता एसआईआर गणना प्रपत्र भरेंगे, जिससे मतदाता सूची पूरी तरह सटीक और व्यापक तैयार हो सकेगी।

गोरखपुर–अयोध्या शिक्षक निर्वाचन हेतु भाजपा की जनपदीय बैठक सम्पन्न

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। गोरखपुर–अयोध्या शिक्षक निर्वाचन की तैयारी के लिए भाजपा की जनपद स्तरीय बैठक संत कबीर नगर में आयोजित की गई। बैठक में जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षक प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने व्यापक रूप से भाग लिया।
बैठक के मुख्य अतिथि रमेश सिंह, भाजपा के क्षेत्रीय संयोजक, शिक्षक प्रकोष्ठ गोरखपुर क्षेत्र एवं क्षेत्रीय सह संयोजक—गोरखपुर–अयोध्या शिक्षक निर्वाचन, गोरखपुर क्षेत्र ने आगामी शिक्षक निर्वाचन की रणनीति, मतदाता जागरूकता और संगठन की जिम्मेदारियों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक निर्वाचन लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का महत्वपूर्ण आधार है, जिसमें शिक्षक मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
जिला संयोजक ज्ञानेंद्र मिश्रा ने जनपद में भाजपा द्वारा चलाए जा रहे तैयारी अभियानों, मतदाता संपर्क कार्यक्रमों तथा बूथवार संगठन मजबूती की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि जिले के सभी ब्लॉकों में शिक्षक मतदाताओं तक पहुँचने के लिए विशेष अभियान संचालित किए जा रहे हैं।
ब्लॉक संयोजक गौरव निषाद ने ब्लॉक स्तर पर की जा रही व्यवस्थाओं और शिक्षक मतदाता संपर्क अभियान की रूपरेखा साझा करते हुए कहा कि प्रत्येक शिक्षक तक पहुंचकर उन्हें निर्वाचन प्रक्रिया से अवगत कराया जा रहा है। उन्होंने उपस्थित पदाधिकारियों से बूथवार टीमों को और सक्रिय करने का आग्रह किया।
बैठक में उपस्थित शिक्षकों और कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन संबंधी रणनीतियों पर चर्चा की और एकमत होकर अधिकाधिक शिक्षक मतदाताओं तक पहुंच सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर विधानसभा संयोजक हैप्पी राय, नरेंद्र पांडेय, ठाकुर प्रसाद पांडेय सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

बाढ़, सूखा, और किसान—एक ऐसी लड़ाई जो हर साल दोहराई जाती है

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)
भारत में हर साल बाढ़ और सूखा किसानों की ज़िंदगी को तहस-नहस कर देता है। जानिए कैसे प्राकृतिक आपदाएँ खेती, परिवार और देश की खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करती हैं और किसानों को किस तरह की जमीनी चुनौतियों से जूझना पड़ता है।

किसान बनाम प्रकृति: हर मौसम एक नई परीक्षा

भारत में खेती सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है। पर यह जीवनरेखा हर साल बाढ़ और सूखे जैसे प्राकृतिक संकटों में फँस जाती है। कभी आसमान से बरसात नहीं थमती, तो कभी महीनों तक एक बूंद पानी नहीं गिरता। मौसम के इस अस्थिर खेल में सबसे बड़ा नुकसान उसी किसान का होता है जिसकी मेहनत पर देश की थाली भरती है।
बाढ़—जब पानी जीवन नहीं, विनाश बनकर आता है

बाढ़ के समय खेत ऐसे डूब जाते हैं जैसे सालों की मेहनत को किसी ने पल भर में मिटा दिया हो।

धान, गन्ना, सब्ज़ियों जैसी प्रमुख फ़सलें नष्ट हो जाती हैं

पशुधन और गोदामों तक पानी पहुँच जाता है

खेतों की उपजाऊ मिट्टी बह जाती है, जो आने वाले सीजन की उम्मीदें भी छीन लेती है

जो किसान फसल पर निर्भर रहते हैं, उनके लिए बाढ़ सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि भावनात्मक नुकसान भी लेकर आती है—कर्ज़ बढ़ता है, परिवार की चिंता बढ़ती है, और भविष्य अनिश्चित हो जाता है।
सूखा—जब आसमान की खामोशी किसान के दिल की धड़कनें रोक देती है

जहाँ कुछ इलाके बाढ़ में डूबते हैं, वहीं देश के कई हिस्सों में सूखे की मार किसान की कमर तोड़ देती है।

समय पर बारिश न होने से बोआई रुक जाती है

ट्यूबवेल और तालाब सूख जाते हैं

बिजली और डीज़ल पर सिंचाई का खर्च कई गुना बढ़ जाता है

सूखे के दौरान किसान दोहरी मार झेलता है—पानी नहीं, सिंचाई महंगी, फसल कमजोर और बाज़ार में दाम कम।

ये सिर्फ मौसम की समस्या नहीं—ये व्यवस्था की भी कमी है

बाढ़ और सूखे का कारण सिर्फ प्रकृति नहीं, बल्कि कई नीतिगत कमियाँ भी हैं-

खेतों के लिए पर्याप्त जल प्रबंधन का अभाव

नदियों के किनारे निर्माण और अतिक्रमण

बारिश का जल संग्रह नहीं होना

किसानों तक समय पर बीमा और राहत न पहुँच पाना

जब तक ये समस्याएँ दूर नहीं होंगी, तब तक किसान हर साल वही लड़ाई लड़ने को मजबूर रहेगा।

किसानों को क्या चाहिए—सिर्फ मुआवज़ा नहीं, स्थायी समाधान

किसानों का संघर्ष कम होगा जब-

वाटर मैनेजमेंट मजबूत हो

ड्रेनेज सिस्टम सुधरे

फसल बीमा समय पर मिले

किसानों को आधुनिक तकनीक और मौसम की सटीक जानकारी उपलब्ध हो

सूखा-रोधी और बाढ़-रोधी फसलें बड़े स्तर पर बढ़ाई जाएँ

यह सिर्फ किसान का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा का सवाल भी है।

किसान का दर्द समझना ही समाधान की पहली सीढ़ी है

बाढ़ और सूखा किसान के लिए सिर्फ प्राकृतिक विपदाएँ नहीं, बल्कि हर साल दोहराई जाने वाली क्रूर परीक्षा हैं।
उनकी लड़ाई को समझना, उन्हें तकनीक, सुरक्षा और स्थायी समाधान देना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। क्योंकि जब किसान सुरक्षित होगा, तभी देश सुरक्षित होगा—और तभी हमारी थाली में अन्न भरेगा।

पुरानी पेंशन व्यवस्था के फायदे फिर चर्चा में: परिवार को सुरक्षा, सेवानिवृत्ति पर तात्कालिक सहारा

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। पुरानी पेंशन व्यवस्था एक समय सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के जीवन का मजबूत सहारा मानी जाती थी। इस व्यवस्था में पेंशनधारक की मृत्यु के बाद भी उनके परिवार को पारिवारिक पेंशन का अधिकार मिलता था, जिससे परिवार आर्थिक संकट से सुरक्षित रहता था। साथ ही, सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी और भविष्य निधि की संयुक्त राशि कर्मचारियों की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती थी।
सरकारी सेवा से निवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा का प्रश्न हमेशा से कर्मचारियों के जीवन में एक बड़ी चिंता बना रहा है। पुरानी व्यवस्था में पेंशन एक निश्चित और स्थिर आय का स्रोत हुआ करती थी, जो बढ़ती उम्र में जीवनयापन का भरोसा देती थी। यही कारण है कि ओपीएस के फायदे आज भी चर्चा में बने हुए हैं और कर्मचारी इसे अधिक सुरक्षित और मानवीय व्यवस्था के रूप में देख रहे हैं।
नई व्यवस्था के तहत बाजार आधारित पेंशन प्रणाली ने जहां अनिश्चितता बढ़ाई है, वहीं पुरानी पेंशन व्यवस्था की स्थिरता, पारिवारिक सुरक्षा और तत्काल वित्तीय सहायता इसे कर्मचारियों के लिए अधिक भरोसेमंद बनाती है। बढ़ती महंगाई और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच पुरानी पेंशन व्यवस्था का महत्व एक बार फिर उजागर हो रहा है, जिसे लेकर कर्मचारी लगातार इसकी पुनर्बहाली की मांग कर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पेंशन सिर्फ वेतन का हिस्सा नहीं, बल्कि वृद्धावस्था की आर्थिक गारंटी है, जिसे सरकार को सुरक्षित रखना चाहिए। ओपीएस की बहाली को लेकर आंदोलन और चर्चाएं तेज हैं और यह मुद्दा आने वाले समय में नीति-निर्माण के केंद्र में रहने की पूरी संभावना है।

लघु कथा शोरगुल से दूर कहीं

0

सुनीता कुमारी
बिहार

आन्या अपनी खिड़की के बाहर झांक रही थी। नीचे सड़क पर ट्रैफिक का शोर, हॉर्न, लोगों की भीड़, विज्ञापनों की चमक और ऊँची-ऊँची इमारतों के बीच वह कई सालों से रह तो रही थी, लेकिन जी नहीं पा रही थी।
कॉरपोरेट जॉब में लगातार काम, मोबाइल की लगातार रिंगटोन, मीटिंग्स, और भागदौड़—उसका मन धीरे-धीरे किसी शांत जगह को तलाशने लगा था।
एक शाम अचानक ही उसे लगा कि “बस… और नहीं।”
उसने छुट्टी ली, बैग पैक किया और बिना किसी प्लान के निकल पड़ी—शोरगुल से दूर कहीं।
बस धीरे-धीरे शहर से दूर निकल रही थी। ऊँची इमारतें छोटे-छोटे घरों में बदलने लगीं और फिर खेतों में।
कुछ घंटे बाद पहाड़ नज़र आए—हरे, शांत और स्वागत करते हुए।
हवा में ठंडक थी और एक तरह की सुकून देने वाली खुशबू, जैसे पेड़-पौधे फुसफुसा रहे हों कि “आ गई तुम?”
आन्या ने एक छोटे-से गाँव में उतरने का फैसला किया—नाम था खैरापानी।
गाँव में मोबाइल की नेटवर्क भी मुश्किल से आता था। और यही उसे चाहिए था—डिस्कनेक्ट होकर खुद से कनेक्ट होना।
गाँव छोटा था—बस कुछ मिट्टी के घर, कच्ची सड़क, और एक पुराना सा पुल।
आन्या को रहने के लिए एक होमस्टे मिला जिसने उसे अपनेपन से भरा।
घर का आँगन लकड़ी की महक से भरा, चूल्हे का धुआँ हवा में घुलता, और घर के बाहर खड़े देवदार के पेड़ पहरा देते से लगते थे।
यहाँ का समय धीमा था…
इतना धीमा कि उसकी सांसें भी लंबी और गहरी साँस ली
होमस्टे का मालिक राजन था—कम बोलने वाला, शांत स्वभाव का, पहाड़ जैसा स्थिर।
वह सुबह-सुबह उठकर मेहमानों के लिए चाय बनाता, फूल तोड़कर कमरे में रखता और शाम को गाँव के बच्चों को पढ़ाता।
एक शाम आग के पास बैठकर राजन ने पूछा,
“क्यों आई हो यहाँ?”
आन्या ने कुछ देर चुप रहने के बाद कहा,
“शोर से भागकर… पर अब लग रहा है कि शायद खुद से मिलने आई हूँ।”
राजन मुस्कुराया,
“पहाड़ हर किसी को पहले खुद से मिलवाते हैं, फिर दुनिया से।”
यह बात आन्या के मन में उतर गई।
अगली सुबह राजन उसे एक पगडंडी पर ले गया—घने जंगलों से होकर गुजरती, एकदम शांत।
बस पत्तों की सरसराहट, पंखों की फड़फड़ाहट और दूर कहीं बहती छोटी-सी धारा की आवाज।
चलते-चलते आन्या बोली,
“यकीन नहीं होता इतना सन्नाटा भी खूबसूरत हो सकता है।”
राजन ने कहा,
“सन्नाटा खाली नहीं होता, इसमें प्रकृति की सबसे धीमी आवाजें छिपी होती हैं।”
वह जगह आन्या के अंदर तक उतर रही थी।
शहर में उसने जितना खुद को खोया था, यहाँ उतना ही खुद को पाती जा रही थी।
पगडंडी के अंत में एक छोड़ा हुआ बगीचा था—जहाँ कभी किसी बूढ़े दंपत्ति ने सैकड़ों सेब के पेड़ लगाए थे।
अब वहाँ केवल दो-तीन पेड़ बचे थे, पर उनमें भी जादू था।
आन्या और राजन घंटों वहाँ बैठते—कभी बात करते, कभी चुप रहते।
कभी-कभी चुप्पी भी एक भाषा बन जाती है, अगर सामने वाला उसे समझ सके।
राजन ने एक दिन कहा,
“तुम्हें देखता हूँ तो लगता है कि तुम थकी नहीं, बस रुकी हुई हो।”
आन्या ने पहली बार महसूस किया कि किसी ने उसे सचमुच समझा है।
दिन गुजरते गए।
आन्या ने डायरी लिखना शुरू किया—अपने डर, टूटन, सपने, और वे बातें जिन्हें वह कभी किसी से कह नहीं पाई थी।
पहाड़ों पर बैठकर उसने महसूस किया कि हर इंसान को एक जगह चाहिए जहाँ वह बिना शोर के अपने मन की आवाज़ सुन सके।
राजन उसे समझाता,
“भागना समाधान नहीं, लेकिन ठहरना जरूर एक शुरुआत होती है।”
धीरे-धीरे आन्या बदलने लगी—सिर्फ बाहर से नहीं, अंदर से।
एक शाम सूरज पहाड़ों के पीछे डूब रहा था।
आन्या ने कहा,
“मैं वापस जाऊँगी… पर इस बार उसी शहर में अलग मन लेकर।”
राजन ने उसे चाय दी और कहा,
“पहाड़ तुम्हें कभी रोकेगा नहीं। तुम जब चाहो लौट सकती हो।”
उसके शब्दों में बिछड़ने का दर्द नहीं था, बस एक भरोसा था।
शहर वही था—वैसा ही शोर, वही भीड़, वही रफ्तार।
लेकिन वह बदल चुकी थी।
उसने अपने लिए सीमाएँ तय कीं।
काम और जीवन में संतुलन बनाया।
शोर में भी अपनी शांति बचाना सीखा।
और सबसे खास—वो अब हर सुबह कुछ मिनट बगीचे में बैठती, आँखें बंद करती और खैरापानी की पगडंडी याद करती जहाँ उसने खुद को पाया था।
कुछ महीनों बाद राजन की चिट्ठी आई:
“आन्या, यहाँ की पगडंडी तुम्हें याद करती है।
जब मन भारी होने लगे, लौट आना।
पहाड़ और मैं—दोनों यहीं हैं।”
चिट्ठी पढ़कर आन्या मुस्कुराई।
पहाड़ दूर थे, पर शांति अब उसके भीतर बस चुकी थी।

कवि शिवमंगल सिंह ‘सुमन’: राष्ट्र चेतना के अमर गायक

*पुनीत मिश्र*

हिंदी कविता के विस्तृत आकाश में शिवमंगलसिंह ‘सुमन’ का नाम उस ध्रुवतारे की तरह चमकता है, जो दिशा भी दिखाता है और उजाला भी फैलाता है। संवेदनशील कवि, दूरदर्शी शिक्षाविद्, सुसंस्कृत चिंतक और राष्ट्रभावना के समर्थ गीतकार ‘सुमन’ इन चारों रूपों में अपनी पूर्णता के साथ प्रतिष्ठित हैं। पद्मश्री, पद्मभूषण और साहित्य अकादमी पुरस्कार जैसे सम्मान उनके साहित्य-कर्म की सार्वजनिक मान्यता हैं, पर उनका वास्तविक सम्मान उनकी संवेदना, ओज और सकारात्मक जीवनदृष्टि में निहित है। 1915 में उज्जैन में जन्मे ‘सुमन’ बचपन से ही विद्यानुराग, सत्यनिष्ठा और सहज मानवीयता के संस्कारों में पले-बढ़े। अध्ययन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें उच्च शिक्षा की राह दिखाई, और बाद में वे विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति बने। उनके लिए शिक्षा कभी संस्थागत व्यवस्था भर नहीं थी; वह चरित्र-निर्माण, राष्ट्रीय चेतना और संस्कृति-सम्मिलन की साधना थी। कवि ‘सुमन’ का व्यक्तित्व ओज, करुणा और सौंदर्य का अद्भुत समन्वय है। उनकी कविताएँ जीवन के संघर्षों को उजाले में बदल देने वाली प्रेरक ऊर्जा से भरी हैं। उनके प्रसिद्ध गीतों की लय में आत्मविश्वास, कर्मशीलता और राष्ट्र के प्रति समर्पण स्वरूप गूँजते हैं। “मैं समय का शिल्पकार हूँ” जैसे गीत आज भी मनुष्य के भीतर छिपे जुझारू स्वभाव को जगाने वाले मंत्र की तरह हैं। भारतभूमि के प्रति प्रेम और स्वतंत्रता की भावना उनके काव्य में सतत प्रवाहित होती है। वे उन कवियों में हैं जिनके लिए साहित्य का अर्थ केवल सौंदर्यबोध नहीं, बल्कि नागरिक जागरूकता और राष्ट्र-संवेदना को जीवित रखना भी था। दिनकर, पंत और निराला की पंक्ति में ‘सुमन’ इसलिए अलग पहचान रखते हैं क्योंकि उनकी कविता में राष्ट्रीयता किसी नारों से नहीं, बल्कि जीवन की सहज अनुभूति से जन्म लेती है। साहित्यकार के रूप में उन्होंने जिस गहनता से मनुष्य और समाज को देखा, उसी गहराई से वे प्रकृति और संस्कृति को भी समझते थे। उनकी रचनाओं में भारतीय लोकजीवन की खुशबू है, खेतों की हरियाली, नदी की शीतलता, गाँवों की सादगी और श्रमजीवी मनुष्य की धड़कन। यह लोक-निकटता ही उन्हें पाठकों के दिल तक पहुँचाती है। 27 नवंबर 2002 को उनके जीवन की लौ शांत हुई, पर उनका साहित्य आज भी वैसा ही प्राणवान है जैसा रचना के समय था। उनकी पंक्तियाँ, उनके विचार और उनकी सांस्कृतिक दृष्टि आज भी नई पीढ़ी के लिए उतनी ही प्रेरक हैं। वे हमें बताते हैं कि कविता केवल भावों की नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों की भी भाषा होती है। शिवमंगलसिंह ‘सुमन’ हिंदी साहित्य की उस विरासत का नाम हैं, जो मनुष्य को उसकी जड़ों से जोड़ती है, उसे कर्मपथ पर अग्रसर करती है और राष्ट्र-गौरव को आत्मगौरव में रूपांतरित करती है। वे साहित्य के प्रहरी भी थे और जीवन के शिक्षक भी। उनका संवेदनशील और तेजस्वी रचनाकर्म यह संदेश देता है कि सृजन का सर्वोच्च लक्ष्य मानवता की सेवा, संस्कृति का संरक्षण और राष्ट्र का उत्थान है। अपने व्यक्तित्व, कृतित्व और काव्य-तेज के कारण ‘सुमन’ आज भी हिंदी साहित्य में सुमन की तरह ही सुगंधित, प्रेरक और सदैव जीवित हैं।

आजसू छात्र संघ द्वारा गुरुवार को भिक्षा जनाक्रोश मार्च

छात्रवृत्ति रोके जाने के विरोध में
सौंपेगा राज्यपाल को ज्ञापन

रांची ( राष्ट्र की परम्परा)
आजसू छात्र संघ द्वारा गुरुवार को बापू वाटिका, मोराबादी से राजभवन तक ’शिक्षा के लिए भिक्षा जनाक्रोश मार्च’ निकाला जाएगा और लाखों छात्रों की छात्रवृत्ति रोके जाने के खिलाफ प्रदर्शन होगा ।
आजसू छात्र संघ राज्यपाल को ज्ञापन सौंप राज्यपाल से मांग करेगा कि लंबित 2024–25 की छात्रवृत्ति वितरण में तुरंत हस्तक्षेप करें, साथ ही राज्य सरकार को निर्देश जारी करें कि e-Kalyan पोर्टल पर सभी लंबित आवेदनों की स्थिति सार्वजनिक रूप से लागू की जाए, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
आजसू केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में आजसू छात्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो, वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव एवं युवा आजसू के रांची नगर अध्यक्ष अमित यादव ने बताया कि झारखंड राज्य के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के लाखों विद्यार्थी सत्र 2024–25 की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के भुगतान के लिए कई महीनों से प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह देरी केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सरकार की गंभीर लापरवाही और उदासीनता को दर्शाती है, जिसके कारण उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों का भविष्य संकट में है।
उन्होंने आगे यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार के अनुसार 11.34 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलनी थी, लेकिन अब तक केवल 7.45 लाख छात्रों को आंशिक भुगतान किया गया है। 3.5 लाख से अधिक OBC विद्यार्थी आज भी पहली किस्त की प्रतीक्षा में हैं।
रांची, लोहरदगा, गुमला, हज़ारीबाग, रामगढ़, गिरिडीह, धनबाद और बोकारो सहित विभिन्न जिलों में विद्यार्थी पिछले एक महीने से लगातार धरना–प्रदर्शन कर रहे हैं, परंतु सरकार मौन है।
आजसू छात्र संघ ने राज्य सरकार की असंवेदनशीलता के खिलाफ कल 27 नवम्बर 2025 को एक शांतिपूर्ण जन-जागरण एवं जन-आक्रोश मार्च आयोजित करने की घोषणा किया जिसके तहत
छात्रवृत्ति भुगतान में हो रही देरी पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना और लंबित समस्याओं के समाधान हेतु जन-जागृति लाना।
छात्र संघ ने स्पष्ट किया कि यह मार्च पूर्णतः शांतिपूर्ण एवं विधिसम्मत होगा और सभी प्रतिभागियों को प्रशासनिक नियमों के पालन हेतु निर्देशित किया गया है।

राज्यपाल से प्रमुख मांगें

छात्र संघ के कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो ने स्पष्ट कहा कि जब तक राज्य की वर्तमान सरकार हर अंतिम छात्र को उसकी पूर्ण छात्रवृत्ति उपलब्ध नहीं कराती, तब तक यह आंदोलन एक क्षण के लिए भी थमेगा नहीं। न एक छात्र छूटेगा और न एक भी माँग अधूरी रहने दी जाएगी। आज की सत्ता यदि विद्यार्थियों के अधिकारों पर चुप्पी साधे रहती है, तो यह संघर्ष और तेज होगा क्योंकि यह लड़ाई केवल छात्रवृत्ति की नहीं, बल्कि न्याय, अधिकार और जवाबदेही की है।
प्रदेश उपाध्यक्ष ऋतुराज शहदेव ने सरकार पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा छात्रवृत्ति कोई दया नहीं, यह हमारा अधिकार है। लेकिन सरकार की चुप्पी ने लाखों विद्यार्थियों का अकादमिक वर्ष जोखिम में डाल दिया है। यदि सरकार तुरंत समाधान नहीं देती, तो छात्र अपनी आवाज़ और बुलंद करेंगे। यह लड़ाई शिक्षा बचाने की है, और इसे पूरे दमखम के साथ लड़ा जाएगा।
अंत में ओम वर्मा ने कहा, यह आंदोलन किसी पार्टी या व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन लाखों विद्यार्थियों का है जो बेहतर शिक्षा, समान अवसर और सम्मानजनक भविष्य की उम्मीद रखते हैं। झारखंड सरकार को समझना होगा कि शिक्षा के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ अमित साहू ,रवि रोशन आदि भी उपस्थित थे । इस दौरान मुख्य रूप से प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो, वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव, युवा आजसू के महानगर अध्यक्ष अमित यादव, डॉ अमित साहू,रवि रोशन, सक्षम झा, अमन साहू उपस्थित थे।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने सरकार कि नीतिओं के विरुद्ध किया प्रदर्शन

0

रामगढ़/रांची ( राष्ट्र की परम्परा )
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओ ने रामगढ़ जिला समाहरणालय में प्रदेश सरकार कि गलत नीतिओं के खिलाफ प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्त्ताओ द्वारा कार्यालय मंजूर भवन झंडा चौक रामगढ़ से गगन भेदी नारों के साथ विशाल जुलूस निकाला गया, जो रामगढ़ उपायुक्त कार्यालय पर पहुँच कर सभा में तब्दील हो गई। सभा की अध्यक्षता जिला सचिव कयूम मलिक ने किया, वही चंद्रभानु प्रताप ने सभा में उपस्थित लोगों को संबोधित किया।इस दौरान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि केंद्र एवं राज्य की सरकार झारखंड को दोनों हाथों से लूटने में लगी है, अब झारखंड 25 वर्ष में लूट काण्ड में सबसे आगे हो चुका है, राज्य की खनिज संपदा माफियाओं के हवाले कर दिया गया, रात दिन कोयला, बालू, पत्थर की लूट हो रही है, रामगढ़ जिला में भ्रष्टाचार चरम पर है, बगैर पैसे का कोई काम नहीं होता। जिले में डीएमएफटी फंड के नाम पर लूट मची हुई है। केंद्र की मोदी सरकार ने चार लेबर कोड लाकर मजदूरों के सारे अधिकार को छीन लिया है, बेरोजगारी चरम सीमा पर है महंगाई लगातार बढ़ रही है। राज्य में कोयला, बालू,पत्थर, आयरन की जबरदस्त लूट मची हुई है सीधे साधे ईमानदार नेता, पत्रकार एवं जनता अपने को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही है। अपराध सर चढ़कर बोल रहा है। गुज्जू दक्षिणी पंचायत में मल्हार टोला जहां पर 50 वर्षों से ढाई से 300 लोग जंगल में रहते हैं लेकिन आज तक उन्हें बना अधिकार कानून 2006 के तहत जमीन का पटा नहीं दिया गया, जिला उपायुक्त एवं झारखंड सरकार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के मांगों पर अभिलंब विचार करें अन्यथा आंदोलन तेज किया जाएगा।
रामगढ़ प्रभारी हजारीबाग जिला सचिव अनिरुद्ध कुमार ने संबोधित करते हुए कहा की हजारीबाग रामगढ़ की खनिज संपदाओं पर बड़े-बड़े पूंजी पतियों की नजर है, किसानो की जमीन दोनों हाथों से लूटी जा रही है, और इस लूट के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी लगातार राज्य में आंदोलन कर रही है। उन्होंने कहा कि भूमि बैंक को रद्द कर गैर मजरुआ जमीन की रसीद को अभिलंब चालू करें झारखंड सरकार।
सरकार से मांग करते हुए कहा कि सभी कोलियारियों के रोड सेल में सीबीआई जांच हो और संबंधित लोगों के के विरुद्ध कार्रवाई हो, पेलोडर लोडिंग बंद कर पूर्व के भांति हैंड लोडिंग चालू करो।
गाड़ी लोडिंग करने वाले मजदूरों को पहचान पत्र के आधार पर काउंटर पेमेंट लागू करो।खदानों से कोयला निकालने के बाद बंद पड़े खदानों को लेबलिंग कर किसानों को वापस करो।
सभी पंचायत में कैंप लगाकर जमीन का ऑनलाइन दस्तावेज, दाखिल खारिज कर रशीद निर्गत करो।
भूमि बैंक रद्द कर गैर मजरुआ जमीन की रसीद अबिलंब चालू करो।
भूमिहीन लोगों को खेती के लिए ढाई एकड़ एवं घर बनाने के लिए 10 डिसमिल जमीन देने की गारंटी करे सरकार ।
60 वर्ष उम्र के सभी महिला पुरुष किसानों को ₹10000 प्रतिमाह किसान पेंशन लागु करे । सभी बेरोजगार नौजवानों को ₹10000 प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता लागू करे ।
महिला समूह एवं किसानों को ₹1 से लेकर 1 करोड रुपए तक के कर्ज को माफ किया जाय ।
माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के मनमानी पर रोक लगाई जाय ।
झारखंड आंदोलनकारीओ के घर में एक नौकरी 10% आरक्षण एवं जेल जाने की बाध्यता को समाप्त कर ₹50000 प्रतिमा सम्मान राशि की गारंटी करे सरकार ।
वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन एवं विकलांग पेंशन मे बढ़ोतरी कर ₹5000 प्रतिमाह के 10 तारीख तक देने की गारंटी करे ।
मैया योजना से वंचित लोगों के नाम सूची में जोड़कर प्रतिमाह सम्मान राशि देने की गारंटी करे ।
जन वितरण प्रणाली के दुकानदारों के द्वारा प्रति व्यक्ति 5 किलो अनाज की कटौती पर रोक लगई जाय ।
साजिश के तहत राशन कार्ड रद किया जा रहा है उस पर रोक लगाई जाय ।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में चुने गए प्रतिनिधियों को विकास के कार्यों के लिए राशि मुहैया कराया जाए साथ ही खान खनिज बालू पत्थर कोयला के उत्पादन एवं संप्रेषण के लिए पंचायत का अधिकार दिया जाए।
मांडू प्रखंड के अंदर 3 साल से डीएमएफटी फंड से हुए कार्यों की जांच कराई जाए।
अनुबंध पर रखे गए कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
पारा शिक्षक आंगनवाड़ी सेविका एवं सहायिका को परमानेंट किया जाए एवं समान काम के समान वेतन लागू किया जाए।
एस आई आर के नाम पर गरीबों एवं वंचित लोगों के नाम हटाने पर रोक लगाई जाए। धरना प्रदर्शन के माध्यम से उपयुक्त रामगढ़ को मुख्यमंत्री के नाम स्मारक पत्र समर्पित किया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक गया सभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक, हजारीबाग जिला सचिव अनिरुद्ध कुमार रामगढ़ जिला सचिव कयूम मलिक, राज्य परिषद के सदस्य नेमन यादव, डॉ बी एन ओहदार, घनेनाथ चौधरी, चितरंजन महतो, नारायण प्रजापति, कमालुद्दीन अंसारी, पहुंचाई प्रसाद, तेज नारायण, करमाली संजीत भुईया, मनोज महतो, चंद्रभानु प्रताप, पोखन महतो, छोटू इस्लाम, संतोष महतो, गोपाल ओहदार, बाबूलाल महतो, नंदन मोहाली, कौशल महतो, बाबूलाल महतो, बचन महतो, इजराफिल अंसारी, दुखन महतो कर्म मांझी, कालीचरण मांझी, राजकिशोर बेड़िया, अविनाश बिटिया,सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

श्रम विभाग के लिस्ट में भट्ठा मजदूर और राजमिस्त्री अति कुशल श्रेणी में शामिल

वही नर्स, लैब टेक्नीशियन, पैरामेडिकल स्टाफ किसी भी श्रेणी मे नहीं

रांची(राष्ट्र की परम्परा)
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने राज्य सरकार पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि इस अजब सरकार की गजब कहानी की दास्तान समाप्त होने का नाम नहीं लेती है । प्रतुल ने कहा कि 11 मार्च 2024 को झारखंड के श्रम नियोजन प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग द्वारा प्रकाशित गजट के 11 नंबर पृष्ठ पर अति कुशल श्रेणी का जिक्र किया गया है, जिसमे राजमिस्त्री,ईंट बनाने वाले और बावर्ची तक सम्मिलित है। लेकिन दूसरी ओर इसी अति कुशल श्रेणी के लिस्ट मे वर्षो पढ़ाई करके आने वाले स्टाफ नर्स ,एक्स-रे टेक्नीशियन, लैब फार्मासिस्ट एवं अन्य पैरामेडिकल कोर्स किए लोगों का कोई जिक्र नहीं है। प्रतुल ने कहा यह युवाओं के साथ क्रूर मजाक है। 3 वर्ष की पढ़ाई करके लाखों रुपए खर्च करके जो लोग आते हैं उसे झारखंड सरकार ने अति कुशल या कुशल श्रेणी में न शामिल कर उनके साथ घोर मजाक किया है, जिससे यें लोग विभिन्न विभागों और अस्पतालों तथा आउटसोर्सिंग एजेंसी के रहमों करम पर निर्भर होने पर मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि कहीं इन्हें सामान्य वर्ग का पेमेंट मिलता है तो कहीं इन्हें कुशल श्रेणी का।अति कुशल श्रेणी में इन्हें कोई जगह नहीं दी जाती।

समानता सिक्योरिटी पर राज्य सरकार की इतनी मेहरबानी क्यों?

प्रतुल ने कहा कि रांची के सदर अस्पताल में वर्षों से आउटसोर्सिंग का काम सामानता सिक्योरिटी एजेंसी कर रही है। 600 से ज्यादा लोगो को इस आउटसोर्सिंग एजेंसी ने संविदा पर सदर अस्पताल रांची में रखा है।सरकारी फाइलों में पैरा मेडिकल स्टाफ का मानदेय 805 रुपए प्रतिदिन है।जबकि इनका 514 रुपया प्रतिदिन एजेंसी के द्वारा भुगतान किया जाता है, यहां इन पैरामेडिकल स्टाफ को कुशल श्रेणी के नाम पर भुगतान किया जाता है।जबकि तकनीकी रूप से इन्हें अति कुशल श्रेणी में आना चाहिए। सरकार के द्वारा एजेंसी को पूरे महीने का 18138 रुपए का भुगतान किया जाता है। जबकि एजेंसी इन संविदा कर्मियों को 26 दिन का वेतन 14704 रुपया मात्र ही देती है। सिविल सर्जन का ऑफिस पूरे महीने का पेमेंट करता है ।जबकि एजेंसी सिर्फ 26 दिन का पेमेंट संविदा कर्मियों को करती है ।प्रतुल ने कहा कि सरकार संविदा कर्मियों के लिए 18% अलग से जीएसटी की व्यवस्था करती है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से आउटसोर्सिंग एजेंसी संविदा कर्मियों की तनख़ाह से ही अतिरिक्त 18% जीएसटी काटती है ।वही ईपीएफ का नियम है कि 12% संविदा कर्मी ,12% एजेंसी से मिलकर लगभग 25% काटा जाता है।लेकिन यहां इन संविदा कर्मियों से पूरा 25% उनके तनख्वाह से काटा जाता है और एजेंसी का इसमें कोई योगदान नहीं रहता।
इस पूरे प्रकरण में करोड रुपए के महीने का घोटाला हो रहा है।भारतीय जनता पार्टी संविदा कर्मियों के मुद्दे पर बहुत संवेदनशील है और सरकार अगर हठधर्मिता पर लगी रही तो भाजपा इस मुद्दे को सड़क से लेकर विधानसभा तक ले जाने का कार्य करेगा ।

ठंड से ठिठुरते बच्चों के चेहरे पर लौटी मुस्कान माही ने भेंट किये गर्म स्वेटर

राँची (राष्ट्र की परम्परा ) सर्द हवाओं के बीच राँची के डोरंडा क्षेत्र में मौलाना आजाद ह्यूमेन इनिशिएटिव (माही) ने बेलदार मोहल्ला, डोरंडा स्थित मदरसा रज़ा-ए-मुस्तफा के 15 बच्चों को गर्म स्वेटर उपहार स्वरूप भेंट किए जिससे बच्चो को राहत मिलेगी।मिली जानकारी के अनुसार माही के वार्षिक अभियान का हिस्सा के तहत , हर साल की तरह इस वर्ष नहीं मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जयंती के अवसर पर ठंड से ठिठुरते बच्चो मे गर्म स्वेटर वितरित किया गया। इस अवसर पर माही ने कहा कि यूनिफॉर्म, स्वेटर या जूतों की कमी की वजह से कोई भी गरीब बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे।

इसी अभियान के तहत अब तक सैकड़ों बच्चों तक गर्म कपड़े पहुँचाए जा चुके हैं।कार्यक्रम में मुख्य रूप से मुफ़्ती मोहम्मद वसीम रज़ा रिज़वी, हाफिज मोहम्मद आलम अंसारी,मास्टर मोहम्मद आदिल रज़ा, अंजुमन इस्लामिया राँची के उपाध्यक्ष मोहम्मद नौशाद, अंजुमन के कार्यकारिणी मोहम्मद नजीब,मोहम्मद वसीम अकरम, नदीम अख़्तर, हाजी मोहम्मद इमरान रज़ा अंसारीआदि गणमान्य लोग मौजूद रहे।बच्चों की चमकती आँखें और उनके चेहरों पर आई रौनक ही इस अभियान की सबसे बड़ी कामयाबी है ।

दहेज, भेदभाव और बाल विवाह—सवाल आज भी वहीं खड़े हैं।

डाॅ. सतीश पाण्डेय

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। समाज बदल रहा है, तकनीक आगे बढ़ रही है, देश विकास की नई ऊंचाईयां छू रहा है—लेकिन दुखद हकीकत यह है कि दहेज, भेदभाव और बाल विवाह जैसे सवाल आज भी उसी जगह खड़े हैं, जहां दशकों पहले खड़े थे। कानून मजबूत हुए,जागरूकता अभियान चले, लेकिन जमीनी स्तर पर इन सामाजिक बुराइयों की जड़ें अभी भी बहुत गहरी हैं।
दहेज की मांग आज भी कई परिवारों को आर्थिक तंगी, कर्ज और अपमान की आग में झोंक देती है। बेटियों को बोझ समझने की सोच अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई। विवाह के नाम पर होने वाला यह लेन-देन न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि मानवता पर भी बड़ा प्रहार है।
इसी तरह भेदभाव—चाहे वह लड़का-लड़की के बीच हो, जाति के आधार पर हो या सामाजिक स्तर पर—समाज की सबसे पुरानी और सबसे हानिकारक समस्याओं में से एक है। यह भेदभाव न सिर्फ रिश्तों को कमजोर करता है बल्कि अवसरों के दरवाजे भी बंद कर देता है, जिससे प्रतिभा दबकर रह जाती है।
बाल विवाह जैसी कुरीति आज भी कई हिस्सों में मौजूद है। कम उम्र में विवाह बच्चों के भविष्य, स्वास्थ्य और शिक्षा पर गहरा असर डालता है। कानून सख्त हैं, परंतु सामाजिक दबाव, गरीबी और जागरूकता की कमी इस कुरीति को अब भी ज़िंदा रखे हुए हैं।
सवाल उठता है—इतने वर्षों बाद भी ये बुराइयां क्यों नहीं खत्म हो सकीं?
विशेषज्ञों का मानना है कि इन समस्याओं की जड़ें परंपरा के नाम पर बचाई जाने वाली रूढ़ियों, कमजोर सामाजिक जागरूकता और शिक्षा की कमी में छिपी हैं। समाधान वही है—जागरूकता, शिक्षा और सामाजिक साहस। लोगों को आगे बढ़कर कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठानी होगी। परिवार, समाज और प्रशासन जब एक साथ खड़े होंगे तभी इन बुराइयों की जंजीरें टूटेंगी। देश की प्रगति का असली पैमाना सड़कों और इमारतों से नहीं, बल्कि समाज की सोच से तय होगा। जब दहेज, भेदभाव और बाल विवाह जैसे प्रश्न समाप्त होंगे, तभी हम सही मायनों में विकसित समाज कहे जाएंगे।