Monday, June 29, 2026
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सिस्टम की बेरुखी के बीच किसान ने बनाई मिसाल: सरकारी उदासीनता से परेशान होकर अपने खर्च पर बनवा रहे पुलिया

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सदर ब्लॉक के ग्राम पंचायत बागापार, टोला बलरामपुर में सरकारी तंत्र की लापरवाही के बीच एक किसान ने अदम्य जज्बे और आत्मनिर्भरता की अनोखी मिसाल पेश की है। 65 वर्षीय किसान औरंगजेब ने वर्षों से लंबित पुलिया निर्माण की मांग पूरी न होने पर अपने ही खर्च पर डेढ़ लाख रुपये की लागत से पुलिया बनवाना शुरू कर दिया है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सिंचाई नहर पर पुलिया की मांग लंबे समय से की जा रही थी। कई बार ग्राम पंचायत व ब्लॉक स्तर पर प्रस्ताव भेजने की बातें हुईं, लेकिन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता और विभागीय तालमेल के अभाव में योजना फाइलों तक ही सीमित रह गई।

औरंगजेब ने अपने खेत के पास आवास बनाया था ताकि खेती देखभाल करना आसान हो सके, लेकिन बरसात में नहर पार करने में कीचड़, फिसलन और उफनाते पानी ने परिवार के लिए पहुंचना बेहद कठिन कर दिया। राशन, उपकरण और दैनिक जरूरी सामान ले जाना भी जोखिम भरा होता था।

जब लंबे समय तक किसी अधिकारी ने स्थल निरीक्षण तक नहीं किया, तब किसान ने सरकारी भरोसे बैठने के बजाय खुद समाधान की राह चुनी। उन्होंने जेसीबी, ईंट, सीमेंट, सरिया, गिट्टी और मजदूरों की पूरी लागत खुद वहन करते हुए पुलिया निर्माण की शुरुआत करा दी।

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ग्रामीण अब श्रमदान कर इस कार्य में सहयोग दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि पुलिया बनने के बाद न केवल औरंगजेब बल्कि विजयपुर रोड से जुड़े आसपास के दर्जनों किसानों को भी आवागमन, ढुलाई और सिंचाई में भारी राहत मिलेगी।

औरंगजेब ने भावुक होते हुए कहा—
“मैंने बार-बार कहा कि हमें सिर्फ एक छोटी सी पुलिया चाहिए, पर किसी ने नहीं सुना। इसलिए मैंने तय किया कि अब किसी के भरोसे नहीं बैठूंगा। अपने रास्ते का पुल खुद बनाऊंगा।”

यह घटना सदर ब्लॉक की विकास व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है—
क्या ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जनता को अपनी जेब से खर्च करना पड़ेगा?
क्या योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी?

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भावनाओं का प्रकाश स्तंभ: चंद्रमा का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक रहस्य

चंद्रमा — एक ग्रह नहीं, भावनाओं का शाश्वत साथी

चंद्रमा केवल आकाश में टंगा हुआ प्रकाशपुंज नहीं है, बल्कि वह हमारे अस्तित्व की गहराइयों से जुड़ा एक मौन साक्षी है। युगों-युगों से चंद्रमा ने मानव जीवन, संस्कृति, साहित्य, धर्म, कृषि, समुद्र और मनोविज्ञान को प्रभावित किया है। वह प्रेम का प्रतीक है, विरह का साथी है, साधना का आधार है और वैज्ञानिक शोध का विषय भी। इस चौथे एपिसोड में हम चंद्रमा को केवल एक खगोलीय पिंड के रूप में नहीं, बल्कि भावनाओं के शाश्वत साथी और शास्त्रोक्त महत्व के रूप में जानने का प्रयास करेंगे।

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शास्त्रों में चंद्रमा का दिव्य स्वरूप

हिंदू शास्त्रों में चंद्रमा को सोम कहा गया है। ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद में उसे देवता का दर्जा प्राप्त है। चंद्रमा को मन का कारक ग्रह माना गया है—मनः चंद्रः। वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा मन, भावनाओं, स्मृति, करुणा और रचनात्मकता का प्रतिनिधित्व करता है।

पुराणों के अनुसार चंद्रमा दक्ष प्रजापति का जामाता था और रोहिणी उसकी प्रिय पत्नी थी। यही कारण है कि रोहिणी नक्षत्र को विशेष शुभ माना गया। भगवान शिव के मस्तक पर विराजित अर्धचंद्र यह दर्शाता है कि शिव की चेतना पूर्ण रूप से नियंत्रित, शांत और कालातीत है। चंद्रमा यहां नियंत्रण और संतुलन का प्रतीक बन जाता है।

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चंद्रमा और प्रकृति का अद्भुत संबंध

चंद्रमा समुद्री ज्वार-भाटे का नियंता है। उसके गुरुत्वाकर्षण के कारण ही जल में हलचल होती है, जो पृथ्वी के संतुलन के लिए आवश्यक है। यह केवल वैज्ञानिक तथ्य नहीं, बल्कि प्रकृति की एक दिव्य व्यवस्था भी है। बिना चंद्रमा के पृथ्वी का जल-चक्र और ऋतु-चक्र अस्त-व्यस्त हो सकता था।

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चंद्रमा का प्रभाव पौधों पर भी पड़ता है। कृषि विज्ञान में भी आज यह माना जाने लगा है कि पूर्णिमा और अमावस्या का फसलों के विकास पर प्रभाव पड़ता है। हमारे पूर्वज इन महत्त्वों को पहले से जानते थे। इसलिए व्रत, पूजा और खेती के कार्य चंद्र तिथियों के अनुसार किए जाते थे।

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मानव मन और चंद्रमा की गहरी कड़ी

चंद्रमा को मन का शासक कहा जाता है। यह केवल आस्था नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक सत्य के करीब है। पूर्णिमा के समय लोग भावनात्मक रूप से ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं, वहीं अमावस्या उदासी और अंतर्मुखी प्रवृत्ति को बढ़ा सकती है।

यही कारण है कि कवि, लेखक, साधक और प्रेमी सदैव चंद्रमा की ओर आकर्षित हुए हैं। मीराबाई, जयदेव, कालिदास और गुलज़ार जैसे कवियों ने चंद्रमा को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया। वह प्रेम की तुलना का सर्वोच्च मानक बना।

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चंद्रमा एक ग्रह नहीं भावनाओं का शाश्वत साथी है — यह वाक्य मानवीय अनुभूतियों का प्रतिनिधित्व करता है। जब मन दुखी होता है, तो चांद भी उदास लगता है और जब हृदय प्रेम में डूबा होता है, तो वही चांद मुस्कुराता प्रतीत होता है।

अध्यात्म और साधना में चंद्रमा का स्थान

ध्यान और साधना में चंद्रमा की ऊर्जा को शीतल, शांत और सकारात्मक माना गया है। योगशास्त्र में इड़ा नाड़ी चंद्रमा से जुड़ी है, जो शरीर में शीतलता और मानसिक संतुलन प्रदान करती है। साधु-संत और तांत्रिक साधक विशेष चंद्र तिथियों पर विशेष साधनाएं करते हैं।

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पूर्णिमा, अमावस्या, करवा चौथ, शरद पूर्णिमा और सोमवती अमावस्या — यह सभी केवल धार्मिक तिथियां नहीं हैं, बल्कि चंद्रमा-उपासना के प्रतीक हैं। इन दिनों किया गया जाप, तप और ध्यान विशेष फलों को देता है, ऐसा शास्त्र कहते हैं।

चंद्रमा: विज्ञान की दृष्टि में भी एक रहस्य

आज वैज्ञानिक युग में भी चंद्रमा मानव जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है। अपोलो मिशन से लेकर चंद्रयान-3 तक, चंद्रमा पर अनुसंधान निरंतर जारी है। जल की उपस्थिति, सतह की संरचना और भविष्य में मानव आवास की संभावना विज्ञान के लिए नए द्वार खोल रही है।

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परंतु विज्ञान चाहे जितना आगे बढ़ जाए, चंद्रमा की रहस्यमयी शांति और उसका भावनात्मक आकर्षण कम नहीं हो सकता। वह अब भी कवियों की कविता में और प्रेमियों की कल्पना में जीवित है।

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चंद्रमा एक ग्रह नहीं भावनाओं का शाश्वत साथी है। वह हमारा मार्गदर्शक है, रक्षक है और साक्षी है। हमारी संस्कृति, धर्म, विज्ञान और मनोविज्ञान — सभी में उसकी गूंज सुनाई देती है। वह मौन रहकर भी बहुत कुछ कह जाता है। उसकी शीतल रोशनी हमें याद दिलाती है कि अंधकार के बाद भी प्रकाश अवश्य आता है।

शिक्षा से रोजगार तक—युवा उम्मीदों का भविष्य कौन सँवारेगा?

✍️ डॉ. सतीश पाण्डेय

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। देश का भविष्य उसके युवाओं पर टिका है, और युवाओं का भविष्य शिक्षा और रोजगार की मजबूती पर, लेकिन आज सवाल यह है कि शिक्षा से लेकर रोजगार तक की लंबी यात्रा में युवाओं का भविष्य आखिर कौन सँवारेगा?
युवा उम्मीदें आसमान छू रही हैं, मगर जमीनी हकीकत में चुनौतियां भी उतनी ही बड़ी दिखाई दे रही हैं।

देश में हर साल लाखों युवा कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों से डिग्री लेकर निकलते हैं, लेकिन उनमें से बड़ी संख्या को मनपसंद रोजगार नहीं मिल पाता। शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई लगातार बढ़ रही है। कागजों पर सुधारों के अनगिनत दावे, लेकिन वास्तविकता यह है कि अधिकांश संस्थानों में न तो आधुनिक शिक्षा पद्धति है,न ही उद्योग आधारित प्रशिक्षण। युवाओं की बढ़ती संख्या डेमोग्राफिक डिविडेंड कही जाती है, लेकिन यदि उन्हें सही अवसर न मिले तो यही शक्ति देश की चुनौती बन सकती है।

तकनीक से संचालित दुनिया में कौशल की मांग लगातार बदल रही है, लेकिन कई युवा पुरानी शिक्षा प्रणाली के कारण आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार नहीं हो पा रहे। रोजगार के अवसर भी नए–नए क्षेत्रों में खुल रहे हैं—स्टार्टअप, डिजिटल मार्केट, एआई, एड-टेक, ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टर तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन इन क्षेत्रों में काम करने के लिए विशेषज्ञता की जरूरत है, जो हर युवा को उपलब्ध नहीं है।इसके अलावा सरकारी नौकरियों में सीमित पद, प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ती भीड़, और निजी क्षेत्र में अस्थिरता युवाओं की चिंता बढ़ा रही है।देश में कौशल विकास, स्टार्टअप इंडिया, प्रधानमंत्री रोजगार योजनाएं और कई स्किल मिशन चल रहे हैं।

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लेकिन सवाल यह भी है कि इन योजनाओं का लाभ कितने युवाओं तक पहुंच रहा है? क्या ये योजनाएं युवाओं की उम्मीदों और जरूरतों के अनुरूप हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि देश को शिक्षा प्रणाली में बड़े सुधार,रोजगार आधारित प्रशिक्षण और उद्योग– शिक्षा साझेदारी की सख्त जरूरत है।अगर यह नहीं हुआ तो डिग्रियों की भीड़ बढ़ती रहेगी, लेकिन अवसरों की कमी युवाओं की उड़ान को रोक देगी युवा देश की रीढ़ हैं—उनकी प्रतिभा, उनकी ऊर्जा और उनके सपने ही भारत को नई ऊंचाई देंगे।

लेकिन यह तभी संभव है जब शिक्षा से लेकर रोजगार तक की हर कड़ी मजबूत हो और इसी के साथ सबसे अहम सवाल युवा उम्मीदों का भविष्य कौन संवारेगा? नीतियां, नेतृत्व या व्यवस्था—जिम्मेदारी किसकी है। देश के करोड़ों युवाओं की निगाहें जवाब का इंतज़ार कर रही हैं।

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तकनीक, तरक्की और परिवर्तन—किस ओर बढ़ रहा है देश?

✍️ कैलाश सिंह

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। तेजी से बदलते दौर में भारत अब तकनीक, तरक्की और बड़े सामाजिक– आर्थिक परिवर्तन के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। डिजिटल क्रांति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नई औद्योगिक सोच और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने देश की विकास यात्रा को नई रफ्तार दी है। लेकिन इसी रफ्तार के साथ एक बड़ा सवाल भी उभर रहा है—देश किस दिशा में आगे बढ़ रहा है?

तकनीक ने आम जीवन से लेकर उद्योग जगत तक हर क्षेत्र को बदल दिया है। डिजिटल भुगतान से लेकर सरकारी सेवाओं तक सब कुछ मोबाइल की स्क्रीन पर सिमट चुका है। शिक्षा ऑनलाइन हो रही है, खेती में ड्रोन और सेंसर उपयोग हो रहे हैं, और कारोबार में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।यह बदलाव देश को आधुनिक बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है, लेकिन इसके साथ कई नए सवाल भी सामने हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि तरक्की तभी सार्थक होती है, जब उसका लाभ हर वर्ग तक पहुंचे। तकनीक के बढ़ते प्रभाव से जहां शहरों का विकास तेज हुआ है, वहीं ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के बीच डिजिटल अंतर अब भी चिंता का विषय है। यह इंटरनेट की पहुंच, डिजिटल साक्षरता और तकनीकी संसाधनों की कमी कई जगहों पर विकास की रफ्तार को धीमा कर रही है। देश आर्थिक सुधारों और बड़े प्रोजेक्ट्स के साथ आगे बढ़ रहा है, लेकिन बेरोजगारी, महंगाई और कौशल- विकास की चुनौतियां अब भी बड़ी बाधा बनी हुई हैं। तकनीक के बढ़ते उपयोग से पारंपरिक नौकरियों पर खतरा भी बढ़ रहा है, जिससे युवाओं के सामने नए कौशल सीखने का दबाव बढ़ गया है।

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पर्यावरणीय संकट, ऊर्जा जरूरतें, शहरीकरण और सामाजिक संतुलन जैसे मुद्दे भी यह तय करेंगे कि देश का भविष्य किस दिशा में जाएगा।
सरकार नई योजनाएं और डिजिटल प्रोग्राम लॉन्च कर रही है, पर सवाल यह है कि क्या ये बदलाव सही दिशा में और सही गति से आगे बढ़ रहे हैं? आज की तरक्की भारत को नई ऊँचाइयो तक पहुंचाने की क्षमता रखती है, लेकिन भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि देश तकनीक, विकास और सामाजिक संतुलन के बीच कैसा तालमेल बनाता है।

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और इसी से बड़ा प्रश्न खड़ा होता है-—क्या तकनीक और तरक्की का यह दौर देश को उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जा रहा है या नई चुनौतियों की ओर? किस दिशा में आगे बढ़ रहा है भारत—उम्मीदों की या जोखिमों की?

फ्लोरिडा में US-Ukraine मीटिंग, ट्रंप टीम जल्द मॉस्को में पुतिन से करेगी अहम वार्ता — शांति योजना पर तेज हुई हलचल

हॉलेंडेल बीच (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशें एक बार फिर तेज हो गई हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष अधिकारी रविवार को फ्लोरिडा में यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल से मिले, जहां प्रस्तावित शांति फ्रेमवर्क पर विस्तृत चर्चा हुई। इसी बीच ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे अपने दूतों को इस सप्ताह मॉस्को भेज रहे हैं, जहां रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से महत्वपूर्ण बैठक तय है।

फ्लोरिडा में 4 घंटे की हाई-लेवल मीटिंग

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर ने यूक्रेनी शांति दल के साथ लगभग चार घंटे लंबी बैठक की। इस दौरान युद्ध समाप्ति के संभावित रास्तों, सुरक्षा ढांचे और यूक्रेन के भविष्य को लेकर गहन चर्चा हुई।

रूबियो ने बैठक के बाद कहा,
“बातचीत उपयोगी रही, लेकिन शांति समझौता अभी दूर है। लक्ष्य केवल युद्ध रोकना नहीं, बल्कि यूक्रेन की संप्रभुता और भविष्य को सुरक्षित करना है।”

यूक्रेन की ओर से सुरक्षा परिषद प्रमुख रुस्तेम उमेरोव ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका उनकी चिंताओं को सुन रहा है और समाधान के लिए सक्रिय सहयोग कर रहा है।

भ्रष्टाचार विवाद के बीच यूक्रेन ने बदला वार्ताकार

हालिया भ्रष्टाचार जांच के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अपने चीफ ऑफ स्टाफ आंद्रिय येर्माक का इस्तीफा स्वीकार कर लिया था। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब शांति योजना का संशोधित ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है।

ट्रंप-पुतिन वार्ता से पहले अंतरराष्ट्रीय हलचल

क्रेमलिन ने पुष्टि की है कि पुतिन गुरुवार से पहले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेंगे। ट्रंप की प्रारंभिक शांति योजना में कई विवादित प्रस्ताव थे—जैसे नाटो सदस्यता पर रोक, यूक्रेनी सेना का आकार सीमित करने का सुझाव और 100 दिनों के भीतर चुनाव कराने की शर्त। रिपोर्टों के अनुसार, डोनबास क्षेत्र से जुड़े प्रस्ताव को संशोधित कर दिया गया है।
ट्रंप इसे अब सिर्फ “कॉन्सेप्ट” या “ब्लूप्रिंट” बता रहे हैं, जिससे स्पष्ट है कि अंतिम रूप अभी तय नहीं है।

जमीन पर युद्ध जारी, रूस के हमले तेज

शांति वार्ताओं के बीच रूस ने कीव और आसपास के क्षेत्रों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की तीव्रता बढ़ा दी है।

• शनिवार को 3 लोगों की मौत

• वियशहोरोड में आवासीय इमारत पर ड्रोन हमले में 1 मौत, 19 घायल

• सिर्फ एक हफ्ते में रूस ने 1,400 ड्रोन और 66 मिसाइलें दागीं

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा,
“हमें मजबूत वायु रक्षा और ऐसे वास्तविक समाधान चाहिए जो युद्ध खत्म करने में मदद करें।”

वो नाम, जो समय भी मिटा नहीं पाया

इतिहास की स्मृतियों में अमर: 1 दिसंबर को दुनिया को अलविदा कहने वाली महान विभूतियाँ

1 दिसंबर को दुनिया और भारत ने कई महान हस्तियों को खोया। इन व्यक्तित्वों ने अपने-अपने क्षेत्र में ऐसा योगदान दिया, जो आज भी समाज और राष्ट्र के मानस-पटल पर गहरी छाप छोड़ता है। आइए जानते हैं उनके जीवन और योगदान के बारे में संक्षेप में:
आदर्श सेन आनंद (2017) – भारत के 29वें मुख्य न्यायाधीश
आदर्श सेन आनंद भारतीय न्यायपालिका के एक प्रखर स्तंभ रहे। उनका जन्म-स्थान और प्रारंभिक शिक्षा का विवरण सार्वजनिक स्तर पर सीमित है, परंतु उन्होंने न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन को प्राथमिकता दी। कानून के क्षेत्र में उनका योगदान न्यायिक इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है।
जिम लोसकटऑफ (2015) – अमेरिकी बास्केटबॉल खिलाड़ी
जिम लोसकटऑफ एक प्रसिद्ध अमेरिकी बास्केटबॉल खिलाड़ी थे, जिन्होंने खेल जगत में नई ऊर्जा और प्रतिस्पर्धा का संचार किया। उनके जीवन के प्रारंभिक वर्ष, गांव या शहर की जानकारी सीमित है, परंतु उन्होंने युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

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एस. के. सिंह (2009) – अरुणाचल प्रदेश व राजस्थान के राज्यपाल
एस. के. सिंह भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रहे। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और राजस्थान जैसे दो बड़े राज्यों के राज्यपाल पद पर रहकर संविधानिक मर्यादाओं की रक्षा की। उनके नेतृत्व में प्रशासनिक संतुलन और विकास को नया आयाम मिला।
शान्तिदेव घोष (1999) – बहुआयामी कलाकार व रवीन्द्र संगीत के उस्ताद
शान्तिदेव घोष साहित्य, संगीत, नृत्य और अभिनय के क्षेत्र में सक्रिय बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे रवीन्द्र संगीत के विद्वान माने जाते थे। उनका जीवन कला और साधना का उदाहरण रहा, जिसने बंगाल सहित पूरे भारत में सांस्कृतिक चेतना को मजबूत किया।
विजयलक्ष्मी पण्डित (1990) – स्वतंत्रता सेनानी व कूटनीतिज्ञ
विजयलक्ष्मी पण्डित, पंडित जवाहरलाल नेहरू की बहन थीं और भारत की पहली महिला विदेश मंत्री एवं संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनीं। उन्होंने शिक्षा, स्वतंत्रता और महिला सशक्तिकरण के लिए जीवन समर्पित किया। वे विश्व मंच पर भारत की सशक्त आवाज थीं।
दादा धर्माधिकारी (1985) – गांधीवादी चिंतक व लेखक
दादा धर्माधिकारी एक सच्चे गांधीवादी और राष्ट्रसेवक थे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और बाद में लेखन व विचारधारा के माध्यम से सामाजिक सुधारों की दिशा दिखाई। गांव-देहात में रहने वाले लोगों के लिए उनका जीवन प्रेरणा का स्रोत बना।
के. हनुमंथैय्या (1980) – वरिष्ठ कांग्रेसी नेता
के. हनुमंथैय्या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिष्ठित नेता रहे। वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रहे और राज्य के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षा, प्रशासन और जनसेवा के क्षेत्र में उनका नाम आज भी सम्मान से लिया जाता है।
सुचेता कृपलानी (1974) – भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री
सुचेता कृपलानी एक साहसी स्वतंत्रता सेनानी और स्वतंत्र भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं (उत्तर प्रदेश)। शिक्षा और राष्ट्र सेवा उनका प्रमुख क्षेत्र रहा। उन्होंने राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को नई दिशा दी और आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता खोला।

आज राहु किसे देगा लाभ, किसे करेगा सावधान

अंक ज्योतिष दिसंबर 2025: राहु के प्रभाव में आज के मूलांक कैसे खोलेंगे आपके भाग्य के द्वार? – पंडित सुधीर तिवारी

आज 1 दिसंबर 2025 है और दिन सोमवार। तारीख के सभी अंकों (01/12/2025) को जोड़ने पर योग आता है 13, और 1+3 करने पर मूल संख्या बनती है 4। अंक 4 का स्वामी राहु माना जाता है, जो रहस्यमयी घटनाओं, अचानक बदलाव, बुद्धि, तकनीक और रणनीति का प्रतीक है।
इसी के प्रभाव के आधार पर आज का December Ank Rashifal 2025 तैयार किया गया है, जिसे आप अपने मूलांक (1 से 9) के अनुसार देखें।

मूलांक आपकी जन्म तिथि से निकलता है और यह आपके स्वभाव, सोच, निर्णय लेने की क्षमता और जीवन की दिशा के बारे में संकेत देता है।

मूलांक 1 (1, 10, 19, 28 जन्मतिथि वाले)

आज आत्मविश्वास और नेतृत्व की भावना प्रबल रहेगी। आप अपनी बातों से लोगों को प्रभावित करेंगे। नई योजना बनाने और किसी काम की शुरुआत करने का दिन उत्तम है। नौकरी में वरिष्ठ आपके निर्णय से प्रभावित हो सकते हैं। व्यवसाय में धीमी गति के बाद लाभ के संकेत मिलेंगे।
रिश्तों में यदि मनमुटाव है तो बातचीत से सुलझ सकता है।

शुभ रंग: लाल, सुनहरा
लकी नंबर: 1, 9

मूलांक 2 (2, 11, 20, 29)

आज भावना और कल्पनाशीलता आपके साथ रहेगी। आपका अंतर्मन सही दिशा दिखाएगा। कार्यक्षेत्र में टीम का सहयोग मिलेगा। पारिवारिक रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी। प्रेम जीवन में नई शुरुआत संभव है।
धन खर्च करते समय थोड़ी सावधानी बरतें।

शुभ रंग: सफेद, गुलाबी
लकी नंबर: 2, 7

मूलांक 3 (3, 12, 21, 30)

यह दिन आपके लिए ज्ञान, विकास और सम्मान लेकर आ सकता है। पढ़ाई, लेखन, शिक्षण या मैनेजमेंट से जुड़े लोगों को सफलता मिलेगी। घर में कोई शुभ समाचार मिल सकता है। बुजुर्गों का आशीर्वाद लाभकारी रहेगा।

शुभ रंग: पीला, नारंगी
लकी नंबर: 3, 6

मूलांक 4 (4, 13, 22, 31)

राहु के प्रभाव के कारण दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन आप अपनी बुद्धि और धैर्य से परिस्थितियों को संभाल लेंगे। कार्यों में विलंब हो सकता है, पर अंत में सफलता मिलेगी। पैसों के मामले में सतर्क रहें।
स्वास्थ्य में थोड़ा सिरदर्द या थकान रह सकती है।

शुभ रंग: नीला, स्लेटी
लकी नंबर: 4, 8

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मूलांक 5 (5, 14, 23)

आज का दिन तेज, सक्रिय और लाभकारी है। यात्रा, मीटिंग या नई डील से फायदा हो सकता है। कम्युनिकेशन आपकी सबसे बड़ी ताकत बनेगी। व्यापार में नए ग्राहक या अवसर मिल सकते हैं।
प्रेम जीवन में उत्साह और ताजगी रहेगी।

शुभ रंग: हरा, फिरोज़ी
लकी नंबर: 5, 1

मूलांक 6 (6, 15, 24)

आज संबंधों में मधुरता और सौभाग्य का योग है। जीवन साथी से सहयोग मिलेगा। कला, फैशन, संगीत, डिजाइन और मीडिया से जुड़े लोग खास लाभ कमा सकते हैं। धन की स्थिति मजबूत होगी।
परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा।

शुभ रंग: क्रीम, गुलाबी
लकी नंबर: 6, 3

मूलांक 7 (7, 16, 25)

आज आपका ध्यान आत्मचिंतन और भीतर की शांति पर रहेगा। कामों में गति थोड़ी धीमी रहेगी, पर मन स्थिर रहेगा। किसी पुराने मित्र से बातचीत हो सकती है। आध्यात्मिक गतिविधियां सकारात्मक रहेंगी।

शुभ रंग: जामुनी, गहरा नीला
लकी नंबर: 7, 2

मूलांक 8 (8, 17, 26)

धैर्य और अनुशासन आज आपकी पहचान बनेंगे। कुछ रुकावटें आएंगी, लेकिन हार न मानें। ऑफिस में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। पैसों के मामले में सोच-समझकर कदम बढ़ाएं।
स्वास्थ्य में हड्डियों या जोड़ों में दर्द संभव है।

शुभ रंग: काला, गहरा नीला
लकी नंबर: 8, 4

मूलांक 9 (9, 18, 27)

आज ऊर्जा और उत्साह से भरा दिन है। आप किसी महत्वपूर्ण फैसले को लेकर आगे बढ़ सकते हैं। सामाजिक क्षेत्र में आपकी पहचान बढ़ेगी। छात्रों के लिए बहुत अच्छा समय है।
क्रोध और जल्दबाजी से बचें।

शुभ रंग: लाल, मरून
लकी नंबर: 9, 5

महत्वपूर्ण सूचना (Disclaimer)

यह अंक ज्योतिष भारतीय परंपरा या संविधान द्वारा प्रमाणित नहीं है। यह केवल सामान्य जानकारी और जनमान्यता पर आधारित है। अपने जीवन से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले अपनी जन्मकुंडली किसी अनुभवी ज्योतिष विशेषज्ञ को अवश्य दिखाएं।

12 राशियों का भाग्यफल, करियर, धन और प्रेम का रहस्य

आज का दिन किस राशि के लिए क्या संदेश लेकर आया है? करियर, व्यापार, शिक्षा, कला-संगीत, राजनीति, प्रशासन और आर्थिक स्थिति के साथ शुभ अंक, शुभ रंग और आराध्य देवता की संपूर्ण जानकारी इस विशेष राशिफल में पढ़ें।

मेष राशि (Aries – ♈) | नाम के प्रथम अक्षर: च, ची, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ

आज आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, लेकिन दिखावे की प्रवृत्ति खर्च बढ़ा सकती है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियों का बोझ रहेगा, जिससे चिड़चिड़ापन आएगा।

कार्य/व्यापार: नए ऑर्डर मिल सकते हैं, पर व्यर्थ खर्च से बचें

शिक्षा: एकाग्रता बढ़ेगी, प्रतियोगी छात्रों के लिए अच्छा दिन

कला-संगीत: रचनात्मक विचार उभरेंगे

राजनीति/प्रशासन: उच्च अधिकारी सहयोग करेंगे

आर्थिक स्थिति: सामान्य से बेहतर, लेकिन बचत कम

शुभ रंग: लाल

शुभ अंक: 9

पूजनीय देवता: हनुमान जी

वृष राशि (Taurus – ♉) | अक्षर: ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो

आज छोटी नादानी बड़ा असर डाल सकती है। सोच-समझकर कदम उठाएं। देवदर्शन के योग हैं।

कार्य/व्यापार: साझेदारी लाभ देगी

शिक्षा: पढ़ाई में मन लगेगा

कला-संगीत: गायन-संगीत में रुचि बढ़ेगी

राजनीति: जनसमर्थन मिलेगा

आर्थिक स्थिति: स्थिर

शुभ रंग: सफेद

शुभ अंक: 6

पूजनीय देवता: लक्ष्मी जी

मिथुन राशि (Gemini – ♊) | अक्षर: का, की, कु, घ, ङ, छ, के, को, हा

आज मानसिक शांति और आनंद की अनुभूति होगी। मनोकामना पूर्ण होने के योग हैं।

कार्य/व्यापार: धीमी पर स्थिर प्रगति

शिक्षा: विद्यार्थियों के लिए बढ़िया दिन

कला-संगीत: लेखन व डिजाइन में सफलता

राजनीति: नई जिम्मेदारी मिल सकती है

आर्थिक स्थिति: खर्च अधिक

शुभ रंग: हरा

शुभ अंक: 5

पूजनीय देवता: श्री गणेश

कर्क राशि (Cancer – ♋) | अक्षर: ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

शरीर में थकान व हल्की बीमारी संभव है। घर-परिवार के साथ समय लाभदायक रहेगा।

कार्य/व्यापार: जल्दबाजी से बचें

शिक्षा: स्वास्थ्य कारण पढ़ाई प्रभावित

कला-संगीत: भावनात्मक रचनाएं बनेंगी

राजनीति/प्रशासन: धैर्य रखें

आर्थिक स्थिति: औसत

शुभ रंग: सफेद

शुभ अंक: 2

पूजनीय देवता: शिव जी

सिंह राशि (Leo – ♌) | अक्षर: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

लाभदायक दिन है। पारिवारिक सहयोग मिलेगा और अधूरे कार्य पूर्ण होंगे।

कार्य/व्यापार: बड़ी डील मिल सकती है

शिक्षा: सफलता के योग

कला-संगीत: मंच पर पहचान

राजनीति: पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि

आर्थिक स्थिति: मजबूत

शुभ रंग: सुनहरा

शुभ अंक: 1

पूजनीय देवता: सूर्यदेव

कन्या राशि (Virgo – ♍) | अक्षर: टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

बुजुर्गों का मार्गदर्शन जीवन में नई दिशा देगा। आय में सुधार होगा।

कार्य/व्यापार: लाभ के संकेत

शिक्षा: नए अवसर

कला-संगीत: हस्तकला में उपलब्धि

राजनीति: वरिष्ठों से सहयोग

आर्थिक स्थिति: अच्छी

शुभ रंग: हरा

शुभ अंक: 5

देवता: मां दुर्गा

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तुला राशि (Libra – ♎) | अक्षर: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू

पड़ोसियों से संबंध मजबूत होंगे। बाहर यात्रा के योग हैं।

कार्य/व्यापार: अच्छी गति

शिक्षा: सकारात्मक परिणाम

कला-संगीत: सौंदर्य कला में सफलता

राजनीति: समर्थकों में वृद्धि

आर्थिक स्थिति: संतुलित

शुभ रंग: नीला

शुभ अंक: 6

देवता: मां सरस्वती

वृश्चिक राशि (Scorpio – ♏) | अक्षर: ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

आलोचना सुनने को मिल सकती है। सौम्य व्यवहार रखें।

कार्य/व्यापार: सतर्क रहें

शिक्षा: ध्यान की जरूरत

कला-संगीत: मन थोड़ा विचलित

राजनीति: विरोधी सक्रिय

आर्थिक: सामान्य

शुभ रंग: केसरिया

शुभ अंक: 8

देवता: भैरव जी

धनु राशि (Sagittarius – ♐) | अक्षर: भो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा

स्वभाव में कठोरता कार्य बिगाड़ सकती है। संयम जरूरी।

कार्य/व्यापार: लाभ में कमी

शिक्षा: भरपूर मेहनत चाहिए

कला-संगीत: साधना जरूरी

राजनीति: विवाद से बचें

आर्थिक: धन लेन-देन टालें

शुभ रंग: पीला

शुभ अंक: 3

देवता: विष्णु जी

मकर राशि (Capricorn – ♑) | अक्षर: भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो

आज संतोष और धैर्य लाभ देगा। प्रतिस्पर्धा अधिक रहेगी।

कार्य/व्यापार: मेहनत से लाभ

शिक्षा: स्थिर परिणाम

कला-संगीत: रुचि कम

राजनीति/प्रशासन: सख्ती जरूरी

आर्थिक: संभलकर खर्च करें

शुभ रंग: ग्रे

शुभ अंक: 4

देवता: शनिदेव

कुंभ राशि (Aquarius – ♒) | अक्षर: गा, गी, गु, गे, गो, सा, सी

कल्पनाओं में खोए रहेंगे। वास्तविकता पर ध्यान देना जरूरी।

कार्य/व्यापार: देरी संभव

शिक्षा: मन चंचल

कला-संगीत: नए विचार

राजनीति: योजनाएं सफल होंगी

आर्थिक: लाभ के योग

शुभ रंग: नीला

शुभ अंक: 7

देवता: इंद्र देव

मीन राशि (Pisces – ♓) | अक्षर: दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, च

मिश्रित परिणाम मिलेंगे। पुराने कार्यों से लाभ होगा।

कार्य/व्यापार: पुराने संपर्क काम आएंगे

शिक्षा: धैर्य बनाए रखें

कला-संगीत: प्रेरणा मिलेगी

राजनीति: नई पहचान

आर्थिक: सीमित लेकिन संतोषजनक

शुभ रंग: गुलाबी

शुभ अंक: 12

देवता: श्रीकृष्ण
नोट: यह ज्योतिषीय गणना सामान्य फलादेश पर आधारित है। यह राष्ट्र की किसी आधिकारिक परम्परा का प्रमाण नहीं करता। अपनी जन्मकुंडली की सटीक जानकारी के लिए किसी विशेषज्ञ ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

— पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत

जब जन्मदिन बन गया इतिहास निर्माण की शुरुआत

1 दिसंबर: वे जन्म जो इतिहास नहीं, राष्ट्र की आत्मा बदल जाते हैं

1 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष, संस्कृति और देशभक्ति की जीवित पहचान है। इस दिन जन्म लेने वाले अनेक व्यक्तित्वों ने भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। इन लोगों का जीवन हमें प्रेरणा, समर्पण और राष्ट्रप्रेम का अर्थ सिखाता है।

  1. भावना कांत (1992) – आकाश को छूने वाली बेटी
    भावना कांत का जन्म बिहार के दरभंगा जिले में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा वहीं से प्राप्त की। आगे चलकर भारतीय वायु सेना में फाइटर पायलट बनीं। वे भारत की पहली महिला फाइटर पायलटों में शामिल हैं जिन्होंने मिग-21 उड़ाने का गौरव हासिल किया। उनका योगदान महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है।
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  3. शिवमणि (1959) – ताल के जादूगर
    तमिलनाडु में जन्मे शिवमणि बचपन से ही संगीत की ओर आकर्षित हुए। उन्होंने तालवाद्य में महारत हासिल की। विश्वभर के दिग्गज कलाकारों के साथ परफॉर्म किया। उनकी शिक्षा और अभ्यास ने उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का तालवादक बनाया। उनका योगदान भारतीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाना है।
  4. मेधा पाटकर (1954) – संघर्ष की आवाज
    महाराष्ट्र के मुंबई में जन्मी मेधा पाटकर ने समाजशास्त्र में शिक्षा प्राप्त की। वे ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की प्रमुख चेहरा बनीं। आदिवासी, किसान और विस्थापितों के अधिकारों के लिए उन्होंने आजीवन संघर्ष किया। उनके योगदान ने भारत में सामाजिक आंदोलनों को नई दिशा दी।
  5. राकेश बेदी – मंच और पर्दे के सितारे
    दिल्ली में जन्मे राकेश बेदी ने थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की। पढ़ाई के साथ अभिनय का जुनून उन्हें टेलीविजन और फिल्मों तक ले गया। वे “श्रीमान श्रीमती”, “चंद्रकांता” जैसे प्रसिद्ध धारावाहिकों से घर-घर पहचाने गए। उनका योगदान भारतीय कॉमेडी जगत को समर्पित रहा।
  6. मेजर शैतान सिंह (1924) – वीरता की मिसाल
    राजस्थान के झुंझुनू जिले में जन्मे मेजर शैतान सिंह ने सैन्य शिक्षा प्राप्त कर भारतीय सेना में प्रवेश किया। 1962 के भारत-चीन युद्ध में उन्होंने अद्वितीय साहस दिखाया। देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए और उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
  7. अनंता सिंह (1903) – क्रांति की चिंगारी
    बंगाल में जन्मे अनंता सिंह बचपन से ही क्रांतिकारी विचारों से प्रभावित रहे। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। अनेक बार जेल गए लेकिन कभी झुके नहीं। उनका योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में युवाओं को जागृति देने का कार्य था।
  8. जॉर्जी ज़ुकोव (1896) – युद्धनीति के महानायक
    रूस में जन्मे जॉर्जी ज़ुकोव सोवियत संघ के प्रमुख सैन्य रणनीतिकार बने। द्वितीय विश्व युद्ध में हिटलर की सेना को पराजित करने में उनकी अहम भूमिका रही। वे रक्षामंत्री भी बने। उनका योगदान वैश्विक सैन्य इतिहास को दिशा देने वाला रहा।
  9. राजा महेन्द्र प्रताप (1886) – क्रांति और कलम का योद्धा
    उत्तर प्रदेश के हाथरस में जन्मे राजा महेन्द्र प्रताप शिक्षित, क्रांतिकारी और समाज सुधारक थे। जर्मनी में भारत की निर्वासित सरकार बनाने वाले पहले व्यक्ति बने। पत्रकारिता और स्वतंत्रता आंदोलन दोनों क्षेत्रों में उनका अपार योगदान रहा है।
  10. काका कालेलकर (1885) – विचारों के सच्चे गांधीवादी
    गुजरात में जन्मे काका कालेलकर एक महान शिक्षाविद, लेखक और स्वतंत्रता सेनानी थे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर वे सामाजिक समानता और शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करते रहे। उन्होंने पिछड़ा वर्ग आयोग की भी अध्यक्षता की।
  11. रफ़ीउद्दाराजात (1699) – मुग़ल तख़्त का नाम
    1 दिसंबर 1699 को जन्मे रफ़ीउद्दाराजात कुछ समय के लिए मुग़ल साम्राज्य के दसवें बादशाह बने। राजनीतिक अस्थिरता का वह समय था, फिर भी उनका नाम इतिहास में दर्ज हो गया। उनका योगदान मुग़ल काल के अंतिम दौर को समझने में सहायक है।

1 दिसंबर को जन्मे ये महान व्यक्ति केवल इतिहास के पन्ने नहीं हैं, बल्कि वे प्रेरणा के जीवंत स्तंभ हैं। किसी ने सरहद बचाई, किसी ने समाज बदला, किसी ने संगीत को नई ऊँचाइयाँ दीं, तो किसी ने कलम और विचारधारा से आंदोलन खड़ा किया। यह तारीख साहस, ज्ञान और समर्पण की पहचान बन चुकी है।

मोक्षदा एकादशी पर खुलेंगे मोक्ष के द्वार

पंचांग 01 दिसंबर 2025 | आज का पंचांग | 1 December 2025 Ka Panchang | मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

दिन व संवत
पंचांग 01 दिसंबर 2025 के अनुसार वार सोमवार है।विक्रम संवत 2082 (कालयुक्त), शक संवत 1947 (विश्वावसु), अमांत व पूर्णिमांत दोनों मार्गशीर्ष मास है।द्रिक व वैदिक ऋतु – हेमंत।अयन – दक्षिणायन।

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तिथि
पंचांग 01 दिसंबर 2025 के अनुसार शुक्ल पक्ष एकादशी 07:01 PM तक रहेगी, उसके बाद द्वादशी प्रारंभ होगी।

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नक्षत्र
पंचांग 01 दिसंबर 2025 के अनुसार रेवती नक्षत्र 11:18 PM तक, फिर अश्विनी नक्षत्र लगेगा।

योग
पंचांग 01 दिसंबर 2025 में व्यातीपात योग 12:58 AM तक, उसके बाद वरीयान योग रहेगा।

करण
वणिज – 08:20 AM तक
विष्टि – 07:01 PM तक
बव – 05:33 AM (02 दिसंबर) तक
बालव – इसके बाद

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चंद्र राशि परिवर्तन
पंचांग 01 दिसंबर 2025 में चंद्रमा 11:18 PM तक मीन राशि में रहेगा, उसके बाद मेष राशि में प्रवेश करेगा।
सूर्य वृश्चिक राशि में स्थित रहेगा।

सूर्य और चंद्रमा का समय
सूर्योदय – 06:55 AM
सूर्यास्त – 05:36 PM
चन्द्रोदय – 02:33 PM
चन्द्रास्त – 03:40 AM (02 दिसंबर)

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अशुभ काल – पंचांग 01 दिसंबर 2025

राहु काल – 08:15 AM से 09:35 AM
यमगण्ड – 10:55 AM से 12:15 PM
कुलिक – 01:35 PM से 02:56 PM
दुर्मुहूर्त – 12:37 PM से 01:19 PM और 02:45 PM से 03:28 PM
वर्ज्य – 12:14 PM से 01:42 PM

शुभ काल – पंचांग 01 दिसंबर 2025

ब्रह्म मुहूर्त – 05:20 AM से 06:08 AM
अभिजीत मुहूर्त – 11:54 AM से 12:37 PM
अमृत काल – 09:03 PM से 10:32 PM

त्योहार व व्रत – पंचांग 01 दिसंबर 2025

गीता जयंती
मोक्षदा एकादशी व्रत

मोक्ष, भक्ति और पुण्य प्राप्ति के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना गया है।

अमृतसिद्धि योग व सर्वार्थसिद्धि योग

02 दिसंबर 06:56 AM से 08:51 PM तक (अश्विनी नक्षत्र व मंगलवार)
हालांकि पंचांग 01 दिसंबर 2025 में इन योगों का प्रभाव रात्रि पश्चात माना जाएगा।

दिन का चौघड़िया – पंचांग 01 दिसंबर 2025

अमृत – 06:55 AM से 08:15 AM
काल – 08:15 AM से 09:35 AM
शुभ – 09:35 AM से 10:55 AM
रोग – 10:55 AM से 12:15 PM
उद्बेग – 12:15 PM से 01:35 PM
चर – 01:35 PM से 02:56 PM
लाभ – 02:56 PM से 04:16 PM
अमृत – 04:16 PM से 05:36 PM

रात का चौघड़िया – पंचांग 01 दिसंबर 2025

शुभ – 05:36 PM से 07:16 PM
अमृत – 07:16 PM से 08:56 PM
चर – 08:56 PM से 10:35 PM
रोग – 10:35 PM से 12:16 AM
काल – 12:16 AM से 01:56 AM
लाभ – 01:56 AM से 03:35 AM
उद्बेग – 03:35 AM से 05:15 AM
शुभ – 05:15 AM से 06:56 AM

चंद्र बल – पंचांग 01 दिसंबर 2025

11:18 PM तक लाभकारी राशियाँ – वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन
11:18 PM के बाद लाभकारी राशियाँ – मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुंभ

शुभ यात्रा दिशा – पंचांग 01 दिसंबर 2025

शुभ दिशा – उत्तर या पूर्व की यात्रा लाभदायक रहेगी।
न करें – दक्षिण दिशा की यात्रा से बचें, यह बाधा उत्पन्न कर सकती है।

यात्रा से पहले क्या खाएं?

गुड़ या दही खाकर निकलें, इससे यात्रा मंगलकारी होती है।

यात्रा मंत्र

“ॐ श्री गणेशाय नमः” – 11 बार जप कर घर से निकलें, बिगड़े कार्य भी बनते हैं।

पंचांग 01 दिसंबर 2025

पंचांग 01 दिसंबर 2025 आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र है।मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती के कारण यह दिन व्रत, ध्यान, पूजा व शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ है।शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य सफलता प्रदान करते हैं जबकि राहु काल में नए काम करने से बचना चाहिए।

समय की रेखा पर अमिट छाप छोड़ने वाला दिन

1 दिसंबर की ऐतिहासिक घटनाएं

विश्व इतिहास में कुछ तिथियां ऐसी होती हैं, जो सिर्फ कैलेंडर का हिस्सा नहीं, बल्कि बदलाव की कहानी बन जाती हैं। 1 दिसंबर की ऐतिहासिक घटनाएं भी इसी कड़ी में आती हैं, जिन्होंने राजनीति, विज्ञान, सामाजिक जीवन, स्वास्थ्य, तकनीक और वैश्विक सोच को नई दिशा दी। यह दिन कई देशों, संस्थानों और विचारों के जन्म का साक्षी रहा है।

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1640 – पुर्तगाल को मिली स्पेन से आज़ादी
लगभग 60 वर्षों तक स्पेन के नियंत्रण में रहने के बाद पुर्तगाल ने 1 दिसंबर 1640 को अपनी स्वतंत्रता पुनः प्राप्त की। यह तिथि पुर्तगाली जनता के राष्ट्रीय स्वाभिमान, संस्कृति और पहचान की पुनर्स्थापना का प्रतीक बनी। इस क्रांति ने यूरोप की राजनीतिक संरचना की दिशा को भी प्रभावित किया और स्वतंत्रता आंदोलनों को प्रेरणा दी।

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1887 – शरलॉक होम्स का जन्म साहित्य की दुनिया में
ब्रिटिश लेखक आर्थर कॉनन डॉयल की रचना “ए स्टडी इन स्कारलेट” में जासूस शरलॉक होम्स पहली बार सामने आया। यह कल्पित पात्र आगे चलकर जासूसी साहित्य का आधार स्तंभ बना। होम्स ने तर्क, अवलोकन और विश्लेषणात्मक सोच को लोकप्रिय बनाया, जिसका प्रभाव शिक्षा और अपराध जांच प्रणाली पर भी पड़ा।

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1913 – हेनरी फोर्ड की चलती असेंबली लाइन
अमेरिका के उद्योगपति हेनरी फोर्ड ने 1 दिसंबर 1913 को चलती असेंबली लाइन की शुरुआत की, जिसने औद्योगिक दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया। इससे उत्पादन तेज़, सस्ता और अधिक सटीक हो गया। इस तकनीक ने न सिर्फ ऑटोमोबाइल उद्योग, बल्कि पूरी निर्माण प्रणाली की कार्यशैली बदल दी।

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1933 – कोलकाता–ढाका के बीच प्रथम विमान सेवा
भारत (तत्कालीन ब्रिटिश भारत) में कोलकाता और ढाका के बीच पहली विमान सेवा शुरू हुई। यह घटना भारत के पूर्वी क्षेत्र में हवाई यातायात विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम थी। इससे व्यापार, शिक्षा, संस्कृति और प्रशासनिक संपर्कों में तेजी आई और नागरिक उड्डयन को नई पहचान मिली।

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1959 – अंटार्कटिक संधि पर हस्ताक्षर
12 देशों ने मिलकर अंटार्कटिका को युद्ध मुक्त, शांतिपूर्ण और वैज्ञानिक अनुसंधान का क्षेत्र घोषित किया। यह संधि मानवता की सामूहिक सोच का प्रतीक बनी, जिसमें विज्ञान को राजनीति से ऊपर रखा गया। पर्यावरणीय संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में यह एक ऐतिहासिक मिसाल थी।

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1963 – नागालैंड बना भारत का 16वाँ राज्य
पूर्वोत्तर भारत के नागालैंड को 1 दिसंबर 1963 को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। इससे क्षेत्रीय विकास, शिक्षा, प्रशासन और स्थानीय संस्कृति को संरचनात्मक पहचान मिली। नागा जनजातियों की परंपरा, लोकनृत्य, भाषा और सामाजिक व्यवस्था को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त हुआ।

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1965 – सीमा सुरक्षा बल (BSF) की स्थापना
भारत की सीमा सुरक्षा के लिए बीएसएफ की स्थापना की गई। यह बल देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बीएसएफ ने न सिर्फ सैन्य दृष्टि से बल्कि आपदा राहत, आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्र निर्माण में भी योगदान दिया है।

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1988 – विश्व एड्स दिवस की शुरुआत
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रूप में घोषित किया। इसका उद्देश्य एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता फैलाना, भेदभाव समाप्त करना और पीड़ितों को सम्मान देना है। स्वास्थ्य शिक्षा, सामाजिक स्वीकार्यता और चिकित्सा अनुसंधान को इस दिन ने नई दिशा दी।

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2002 – ऑस्ट्रेलिया की एशेज श्रृंखला विजय
खेल इतिहास में 1 दिसंबर का दिन ऑस्ट्रेलिया के लिए यादगार रहा जब उसने इंग्लैंड के खिलाफ लगातार आठवीं बार एशेज श्रृंखला जीती। यह जीत ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट का स्वर्णिम दौर दर्शाती है, जिसने युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा दी और खेल जगत में नया इतिहास रचा।

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एसआईआर: जिलाधिकारी ने कई मतदान केन्द्रों का किया निरीक्षण

आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने आज नगर आयुक्त के साथ शहर के विभिन्न मतदान केन्द्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने व्यास इंटर कॉलेज, सेवला जाट; टैगोर पब्लिक स्कूल, सेवला सराय; तथा कांसीराम इंटर कॉलेज, कोटली बगीची पहुंचकर गणना पत्र वितरण, संकलन और डिजिटाइजेशन की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की।

सेवला जाट स्थित व्यास इंटर कॉलेज में बूथ संख्या 435 से 442 तक निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने बीएलओ, सुपरवाइजर और नोडल अधिकारियों से गणना पत्रों के संकलन की स्थिति जानी। इस दौरान वे सघन आबादी वाले इलाकों में स्वयं डोर-टू-डोर पहुंचे और मतदाताओं से संवाद कर गणना पत्र तत्काल भरकर बीएलओ को जमा करने की अपील की। स्थानीय मतदाताओं ने भी सक्रिय सहयोग का आश्वासन दिया।

इसके बाद वे टैगोर पब्लिक स्कूल पहुंचे, जहां बूथ संख्या 443 से 452 पर बड़ी संख्या में मतदाता गणना पत्र जमा कराने आए थे। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्रत्येक मतदान क्षेत्र में घर-घर संपर्क सुनिश्चित करें, वितरित सभी गणना पत्रों का संकलन समय पर कराएं तथा उन्हें डिजिटाइजेशन सेंटर पर तुरंत डिजिटाइज कराएं।

जिलाधिकारी ने कांसीराम इंटर कॉलेज, कोटली बगीची, देवरी रोड सहित अन्य शहरी क्षेत्रों के बूथों का भी निरीक्षण किया और जनता से अपील की कि वे अपना गणना पत्र शीघ्रता से जमा करें, ताकि आगामी मतदाता सूची ड्राफ्ट में उनका नाम सम्मिलित हो सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करता है और इसमें आम जनता की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

भतीजी की विवाह में गए परिवार के घर से 47 लाख की नकदी व जेवरात चोरी

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। भतीजी की शादी में शामिल होने गए तिवारीपुर निवासी व्यवसायी उमा मद्धेशिया के घर को चोरों ने निशाना बना लिया। परिवार के लौटने पर रविवार सुबह घर का मुख्य दरवाज़ा टूटा मिला। कमरे में रह रहे छोटे बेटे और बहू ने इसकी सूचना उमा मद्धेशिया को दी।

घटना के बारे में बताया गया कि उमा मद्धेशिया शनिवार की शाम सपरिवार देवरिया स्थित एक मैरेज हॉल में शादी समारोह में गए थे। उनकी छोटी बहू और छोटा बेटा घर की दूसरी मंज़िल पर स्थित कमरे में रुके थे। सुबह जब छोटे बेटे ने नीचे का दरवाज़ा खुला देखा तो वह स्तब्ध रह गया। घर का सामान बिखरा पड़ा था।

सूचना पाकर उमा मद्धेशिया घर पहुंचे तो पाया कि घर में रखे नकद पैसे और जेवरात गायब हैं। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है।

उमा मद्धेशिया ने थाने में तहरीर देकर बताया कि वे एक व्यवसायी हैं और उनके घर से करीब 47 लाख रुपये नकद व जेवरात चोरी हो गए हैं। उन्होंने प्रशासन से चोरों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।

वक पर जानलेवा हमला, चाकू के ताबड़-तोड़ वार से हालत गंभीर

मुख्य आरोपी गिरफ्तार, अज्ञात साथी की तलाश तेज

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। निचलौल नगर पंचायत क्षेत्र के कृष्णानगर वार्ड नंबर 12 में शनिवार देर रात हुए जानलेवा हमले से पूरा इलाका दहशत में आ गया। रात लगभग 11 बजे 23 वर्षीय आदित्य श्रीवास्तव पर धारदार चाकू से पीछे से ताबड़तोड़ वार किए गए, जिससे उसकी बाईं आंख, सिर और गर्दन गंभीर रूप से घायल हो गई। स्थानीय लोगों की समय रहते हस्तक्षेप से उसकी जान बच सकी, लेकिन हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।
पीड़ित के पिता आलोक श्रीवास्तव द्वारा थाने में दी गई तहरीर में पूर्व परिचित अबरार और उसके एक अज्ञात साथी पर जान से मारने की कोशिश का आरोप लगाया है। आरोप है कि दोनों ने आदित्य को फोन कर मोहल्ले की नाई की दुकान पर बुलाया था। मौके पर न पहुंचने पर आरोपियों ने घर तक आकर गोली मारने की धमकी दी और जब आदित्य दुकान के पास पहुंचा तो कहासुनी के बाद पीछे से चाकू से हमला कर दिया।
स्थानीय लोगों की मदद से आदित्य को जिला चिकित्सालय महराजगंज भेजा गया, जहां से हालत गंभीर होने पर उसे मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया गया। बाद में बेहतर इलाज के लिए राजधानी लखनऊ भेजा गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसकी हालत पर निगरानी रख रही है।
थानाध्यक्ष अखिलेश वर्मा के अनुसार पिता की तहरीर पर हत्या के प्रयास सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी अबरार को भोर में ही गिरफ्तार कर लिया, जबकि उसके अज्ञात साथी की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
घटना के बाद कृष्णानगर में तनाव का माहौल है। फिलहाल शांति व्यवस्था कायम है। स्थानीय लोग इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निर्देश पर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। फिलहाल लोग घायल युवक की सलामती की दुआ कर रहे हैं, जबकि पुलिस इस मामले को पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक मुकाम तक पहुंचाने में जुटी है।

निःशुल्क नेत्र जांच शिविर लगा

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। ग्रामीणों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राज आई केयर, पिपरा बाबू, महराजगंज द्वारा ग्राम पंचायत पकड़ी बिशुनपुर के पंचायत भवन में निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर में सुबह से ही ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी और लोगों ने उत्साहपूर्वक अपनी आंखों की जांच कराई।
शिविर में कुल 30 ग्रामीणों का नेत्र परीक्षण किया गया। जांच के बाद जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क दवाएं वितरित की गईं, जिससे लोगों में खुशी देखने को मिली। ग्रामीणों ने कहा कि गांव में इस तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं मिलना बड़ी राहत की बात है, खासकर उन परिवारों के लिए जो आर्थिक तंगी के कारण शहरों में इलाज नहीं करवा पाते।
शिविर का सफल संचालन संयोजक अभिमन्यु चौधरी, डॉ. आलोक उपाध्याय और डॉ. प्रीति विश्वकर्मा द्वारा किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने ग्रामीणों को आंखों की नियमित देखभाल, धूल–धूप से बचाव और समय पर जांच की महत्ता भी बताई।
ग्राम प्रधान मु.हुसैन ने शिविर के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आंखें हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं। ऐसे शिविर न सिर्फ लोगों को जागरूक करते हैं बल्कि गरीब और जरूरतमंदों के लिए बड़ी मदद साबित होते हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में भी इस तरह के स्वास्थ्य शिविर गांव में आयोजित कराए जाएंगे।
ग्रामीणों ने राज आई केयर की टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल से गांव के अनेक लोग लाभान्वित हुए और वे आगे भी ऐसे शिविर की अपेक्षा करते हैं।