Monday, June 29, 2026
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वीडियो वायरल होने पर पुलिस चालक निलंबित, एसपी ने की सख्त कार्रवाई

चतरा/रांची (राष्ट्र की परम्परा)। चतरा जिले में एक पुलिस चालक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एसपी ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित कर दिया है। निलंबित चालक की पहचान तालीम के रूप में हुई है।

यह कथित वीडियो देर रात का बताया जा रहा है, जिसमें तालीम एक महिला के घर पर मौजूद दिखाई देता है। जैसे ही महिला के परिजनों और स्थानीय लोगों को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने चालक को मौके पर पकड़ लिया। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग चालक से कड़े सवाल पूछ रहे हैं और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

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एसपी ने इसे पुलिस विभाग की छवि और अनुशासन से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए तुरंत विभागीय कार्रवाई की। आदेश जारी करते हुए चालक तालीम को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है।

पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का अनुशासनहीन व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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शीतकालीन सत्र में सभापति पैनल की घोषणा, हेमंत सोरेन बने कार्यमंत्रणा समिति के सदस्य

रांची (राष्ट्र की परम्परा)। झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने सदन में सभापति पैनल (Panel of Chairpersons) की औपचारिक घोषणा की। इसके साथ ही सत्र के दौरान विधायी कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए कार्य मंत्रणा समिति (Business Advisory Committee) का गठन भी कर दिया गया है।

सभापति पैनल में शामिल सदस्य

स्टीफन मरांडी, सी.पी. सिंह, निरल पूर्ति, रामचंद्र सिंह, डॉ. नीरा यादवये सदस्य शीतकालीन सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कार्य मंत्रणा समिति का गठन

विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।
सदस्य के रूप में शामिल हैं —

हेमंत सोरेन, राधाकृष्ण किशोर, बाबूलाल मरांडी, प्रदीप यादव, निरल पूर्ति, अरूप चटर्जी,

आमंत्रित सदस्य

समिति में आमंत्रित सदस्यों के रूप में शामिल किए गए हैं —
दीपक बिरूआ, मथुरा महतो, सी.पी. सिंह, स्टीफन मरांडी, सरयू राय, सुरेश पासवान, नवीन जायसवाल, जर्नादन पासवान, बसंत सोरेन, नीरा यादव, कल्पना सोरेन, निर्मल महतो और जयराम महतो।

विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत मुद्दों पर चर्चा की संभावना है, इसलिए इन समितियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

गैंगस्टर अमन साहू गिरोह के मंसूबों का रांची पुलिस ने किया खुलासा, पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए आया हथियारों का जखीरा

रांची (राष्ट्र की परम्परा)। झारखंड पुलिस ने गैंगस्टर अमन साहू गिरोह की बड़ी साजिश का पर्दाफाश करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह ने पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियारों की एक बड़ी खेप मंगवाई थी, जिसमें कुल 13 ग्लॉक पिस्टल शामिल थीं।

अब तक पुलिस 6 ग्लॉक पिस्टल बरामद कर चुकी है, जबकि 7 पिस्टल अभी भी गिरोह के सदस्यों के पास होने की आशंका है। पुलिस इन बचे हुए हथियारों को लेकर सतर्क है और संबंधित अपराधियों की तलाश में सर्च अभियान तेज कर दिया गया है।

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अधिकारियों के अनुसार, बरामद हथियारों में 2 पिस्टल रांची से, 1 लातेहार से, 1 पलामू से, और बाकी 2 पिस्टल विभिन्न स्थानों से मिली हैं।पुलिस का कहना है कि यह बरामदगी यह साबित करती है कि गिरोह राज्य में बड़े अपराधों की साजिश रच रहा था। अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय नेटवर्क की जांच तेज कर दी गई है। पुलिस इस ऑपरेशन को हाल के वर्षों की सबसे बड़ी कार्रवाई मान रही है।

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श्रीशनि की शास्त्रोक्त कथा – जब न्याय के आगे झुके देवता भी

साढ़ेसाती के अंतिम चरण में व्यक्ति जिस आत्मिक जागृति का अनुभव करता है, वह केवल कष्टों का अंत नहीं, बल्कि एक दिव्य परिवर्तन की शुरुआत होती है। शनि को सामान्यतः क्रूर, दंड देने वाला, विलंबकारी ग्रह माना जाता है, किंतु शास्त्रों में उन्हें न्याय, वैराग्य, कर्म और समता का भगवान कहा गया है। यह वही रहस्य है, जिसे जान लेने के बाद शनि से भय नहीं, श्रद्धा उत्पन्न होती है।

पुत्र नहीं, कर्मों के न्यायाधीश हैं शनि

शास्त्रों के अनुसार, शनि सूर्यदेव के पुत्र हैं और माता छाया के गर्भ से उत्पन्न हुए। जन्म से ही उनका रंग सांवला, दृष्टि तीव्र और ऊर्जा असामान्य थी। उनके इसी स्वरूप से भयभीत होकर सूर्यदेव ने उन्हें अपने समीप अधिक समय तक नहीं रखा। परंतु यही उपेक्षा शनिदेव के जीवन का पहला संस्कार बनी — निष्पक्षता और एकाकी तपस्या।

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बाल्यावस्था में ही उन्होंने ब्रह्मा की घोर तपस्या की और उनसे वरदान प्राप्त किया कि “मैं केवल मनुष्य के कर्मों के अनुसार फल दूंगा, बिना भेदभाव के।” उसी दिन से शनि देव “कर्मफलदाता” कहलाए।

वह घटना जब देवताओं को भी प्रतीक्षा करनी पड़ी

शास्त्रों में एक अद्भुत प्रसंग आता है, जब देवराज इंद्र भी शनि की न्यायप्रियता से विचलित हो गए। एक बार इंद्र ने अहंकारवश एक ऋषि का अपमान कर दिया। ऋषि ने शनि देव से न्याय की प्रार्थना की। इंद्र को लगा कि वे स्वर्ग के राजा हैं, उनसे बड़ा कौन होगा?

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परंतु शनि ने स्पष्ट कहा –
“जो दूसरों के सम्मान का अपमान करेगा, उसे समय चक्र में उसका मूल्य चुकाना ही होगा, चाहे वह देव हो या दानव।”

और परिणामस्वरूप इंद्र को कुछ काल के लिए स्वर्गलोक से वंचित होना पड़ा। यह प्रसंग शनि की समानता और निष्पक्षता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

राजा हरिश्चंद्र और शनि: क्रूरता या परीक्षा?

राजा हरिश्चंद्र का इतिहास हर भारतीय जानता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनकी परीक्षा के पीछे शनिदेव ही थे। हरिश्चंद्र की सत्यनिष्ठा और धर्मपरायणता को जगजाहिर करने के लिए शनि ने उन्हें राजपाट से वंचित कर दिया, उनका पुत्र मर गया, पत्नी दासी बनी और स्वयं वह श्मशान में काम करने लगे।

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बहुतों को यह शनि की क्रूरता लगी, पर अंततः वही हरिश्चंद्र मर्यादा पुरुषोत्तम के समान सत्य का प्रतीक बन गया। शनि का उद्देश्य व्यक्ति को तोड़ना नहीं, तराशना होता है।

शनि का प्रत्येक दंड वास्तव में एक दीक्षा होती है।

जब रावण भी शनि से हार गया

लंका का राजा रावण, जिसने संपूर्ण ब्रह्मांड को चुनौती दे दी थी, उसने भी शनि को बंदी बना लिया था, ताकि लंका पर शनि की कुदृष्टि न पड़े। परंतु आप किसी ग्रह को कैसे बाँध सकते हैं? शनि ने संयम से समय की प्रतीक्षा की और जैसे ही हनुमानजी वहाँ पहुँचे, उन्होंने शनिदेव को मुक्त कराया।

मुक्त होते ही शनि ने रावण की लंका की ओर दृष्टि की और कुछ ही समय में उसका साम्राज्य नष्ट हो गया। यह घटना साबित करती है कि अधर्म चाहे जितना बड़ा हो, कर्म का न्याय उससे भी बड़ा होता है।

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साढ़ेसाती: शाप नहीं, संस्कार है

साढ़ेसाती को आज भी लोग भय के रूप में देखते हैं। परंतु शास्त्र कहते हैं —
साढ़ेसाती वह समय है जब शनि व्यक्ति को उसके जीवन की सच्चाई से परिचित कराते हैं।

इस दौरान:
गलत रिश्ते टूटते हैं।
अहंकार टूटता है।
झूठे सपने बिखरते हैं।
आत्मबोध मजबूत होता है।
जीवन का वास्तविक उद्देश्य स्पष्ट होता है।
यह वही समय है जब मनुष्य साधारण से असाधारण बनता है।
शनिभक्ति: भय नहीं, मार्गदर्शन
शास्त्रों में कहा गया है —
“शनैश्वराय नमः” का स्मरण
तिल के दीपक का दान
काले वस्त्र व उड़द का दान
वृद्ध, गरीब और असहाय की सेवा
— ये सभी कार्य शनिकृपा को जाग्रत करते हैं।
जब व्यक्ति शनिदेव को शत्रु नहीं, गुरु मान लेता है तो वही शनि राजयोग भी प्रदान करते हैं।

शनिदेव क्रूर नहीं हैं, समाज के सबसे बड़े न्यायाधीश हैं। वे झूठी चमक नहीं, सच्ची रौशनी देते हैं। उनका दंड नहीं, दिशा होती है। वे इंसान को गिराते नहीं, उठाने के लिए पहले तोड़ते हैं। यही साढ़ेसाती का रहस्य है।

“जो शनि से डर गया, वह टूट गया,
जो शनि को समझ गया, वही इतिहास बन गया।”

सनातन परंपरा में संस्कारों का वैज्ञानिक और नैतिक महत्व

जनेऊ पहनने का महत्व: शास्त्रों, संस्कृति और परंपरा में यज्ञोपवीत संस्कार की वैज्ञानिक व आध्यात्मिक व्याख्या

धीरेंद्र तिवारी द्वारा राष्ट्र की परम्परा के लिए प्रस्तुति


हिन्दू सनातन परंपरा में जनेऊ, जिसे “यज्ञोपवीत” भी कहा जाता है, केवल एक सूत का धागा नहीं बल्कि जीवन के अनुशासन, कर्तव्यबोध और आत्मिक उत्कर्ष का प्रतीक माना गया है। यह संस्कार हिन्दू धर्म के प्रमुख 16 या 24 संस्कारों में से एक है, जिसे उपनयन संस्कार कहा जाता है। उपनयन का अर्थ है – गुरु के समीप ले जाना और ज्ञानमार्ग पर अग्रसर करना।

प्राचीन भारत में जब बालक की शिक्षा की औपचारिक शुरुआत होती थी, उसी समय उसे यज्ञोपवीत धारण कराया जाता था। यह संकेत होता था कि अब वह ब्रह्मचर्य आश्रम में प्रवेश कर चुका है और उसके लिए यम-नियम, गुरुसेवा, सत्य, ब्रह्मचर्य, संयम और अध्ययन अनिवार्य हो जाते हैं।

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आज भले ही समय और परिस्थितियाँ बदल चुकी हों, लेकिन जनेऊ पहनने का महत्व आज भी भारतीय संस्कृति में एक गहरी पहचान रखता है।

जनेऊ क्या है और इसे कैसे धारण किया जाता है?

जनेऊ एक पवित्र धागा होता है जो सूत से बनाया जाता है। इसे बाएं कंधे से दाईं भुजा के नीचे इस प्रकार पहना जाता है कि यह हृदय के पास से गुजरता है। इसे पहनने की विधि और उसका रख-रखाव भी एक नियमबद्ध प्रक्रिया के अंतर्गत किया जाता है।

शास्त्रों के अनुसार जनेऊ की सामान्य लंबाई 96 अंगुल मानी गई है, जिसका प्रतीकात्मक अर्थ यह है कि व्यक्ति को जीवन में 64 कलाओं और 32 विद्याओं को सीखने का प्रयास करना चाहिए।

यज्ञोपवीत में मुख्य रूप से:
तीन प्रमुख सूत्र (धागे) होते हैं
हर सूत्र के अंदर तीन उप-सूत्र होते हैं
इस प्रकार कुल नौ धागे माने जाते हैं
ये तीन सूत्र कई अर्थों के प्रतीक हैं —

  • त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश)
  • तीन ऋण (देवऋण, पितृऋण, ऋषिऋण)
  • तीन गुण (सत्व, रज, तम)
  • गायत्री मंत्र के तीन चरण
    यज्ञोपवीत में पांच गांठ (ग्रंथियां) होती हैं जो धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष और ब्रह्म का प्रतीक मानी जाती हैं।
    जनेऊ पहनने का धार्मिक महत्व
    धार्मिक दृष्टि से जनेऊ व्यक्ति को संयमित और पवित्र जीवन जीने की प्रेरणा देता है। यज्ञोपवीत धारण करने के बाद बालक को गायत्री मंत्र का अधिकार प्राप्त होता है और उसे वेद-पाठ, साधना और तपस्या के योग्य माना जाता है।
    शास्त्रों में यह भी उल्लेख मिलता है कि —
    दाएं कान को अत्यंत पवित्र माना गया है
    वहां देवताओं का वास माना जाता है
    इसी कारण मल-मूत्र त्याग से पहले जनेऊ को कान पर लपेटने का नियम है।
    यह प्रक्रिया बाहरी और आंतरिक शुद्धता का प्रतीक है। इसे आज के संदर्भ में “हाइजीन की धार्मिक व्याख्या” भी कहा जा सकता है।
    क्या महिलाएं जनेऊ धारण कर सकती हैं?
    शास्त्रों में ऐसी स्त्रियों के लिए भी जनेऊ का विधान बताया गया है, जो आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करती हैं और आध्यात्मिक मार्ग अपनाती हैं। वेदकाल में कई शिक्षित महिलाएं विद्या और साधना के क्षेत्र में अग्रणी थीं और उन्हें यज्ञोपवीत का अधिकार था।
    हालांकि वर्तमान समय में यह परंपरा दुर्लभ है, लेकिन शास्त्रों में इसका स्पष्ट उल्लेख मौजूद है।
    जनेऊ से जुड़ी परंपराएं और प्रतीकात्मक लाभ
    ‘जनेऊ पहनने का महत्व’ केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक भी है। इसके माध्यम से व्यक्ति को यह स्मरण रहता है कि—
    उसे संयमित जीवन जीना है।
    सात्त्विक आचरण अपनाना है।
    बुरे कर्मों से दूर रहना है।
    गुरु, माता-पिता और समाज का सम्मान करना है
    कंधे पर पड़ा यह धागा व्यक्ति को हर समय उसके कर्तव्यों का स्मरण करवाता है।
    हालांकि कई लोग इसके साथ शारीरिक व स्वास्थ्य लाभ भी जोड़ते हैं, लेकिन यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि ये अधिकतर परंपरागत मान्यताओं पर आधारित हैं, न कि प्रमाणित चिकित्सकीय शोधों पर।
    इसलिए इन्हें सांस्कृतिक और आस्था आधारित विचार के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
    जनेऊ संस्कार कब किया जाता है?
    पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार:
    बालक के 8वें वर्ष में उपनयन संस्कार कराया जाता है।
    लेकिन वर्तमान समय में अधिकतर लोग इसे विवाह से पहले कराते हैं।
    संस्कार के लिए विशेष तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त देखे जाते हैं।
    उपनयन के दौरान बालक का मुंडन कराया जाता है, स्नान करवाया जाता है, पीत वस्त्र पहनाए जाते हैं और गायत्री मंत्र का उपदेश दिया जाता है।
    इस मंत्र के माध्यम से वैचारिक और आत्मिक शुद्धता का संकल्प दिलाया जाता है।
    आज के समय में जनेऊ की प्रासंगिकता
    आधुनिक दौर में जहां जीवनशैली बदल रही है, वहीं कई लोग इस परंपरा से दूरी बना रहे हैं। लेकिन फिर भी यह कहना गलत नहीं होगा कि जनेऊ पहनने का महत्व आज भी एक नैतिक अनुशासन, संस्कृति और पहचान का सूचक है।
    यह धर्म के साथ-साथ भारतीय सभ्यता की हजारों वर्षों पुरानी परंपरा का प्रतीक है। इसका मूल उद्देश्य व्यक्ति को जिम्मेदार, कर्तव्यनिष्ठ और मर्यादित बनाना है।

जनेऊ केवल एक रस्म नहीं, बल्कि संस्कार है। यह व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, शुद्धता और आत्मिक उन्नति की भावना जागृत करता है।

आज आवश्यकता है कि हम इन परंपराओं को अंधविश्वास के रूप में नहीं, बल्कि उनके सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के रूप में समझें और आगे बढ़ाएं।
जनेऊ पहनने का महत्व केवल शरीर को नहीं, बल्कि मन और जीवन को भी दिशा देने का कार्य करता है।

आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा? पढ़ें मूलांक भविष्यफल

अंक ज्योतिष राशिफल 6 दिसंबर 2025: जानिए मूलांक 1 से 9 तक का आज का भविष्य

पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा प्रस्तुत विशेष अंक राशिफल

अंक ज्योतिष के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति के जीवन पर उसके मूलांक का गहरा प्रभाव पड़ता है। यह मूलांक आपकी जन्म तिथि के आधार पर तय होता है और आपकी सोच, कार्यशैली, रिश्ते, करियर और आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है। 6 दिसंबर 2025 का दिन मूलांक 1 से 9 तक के जातकों के लिए क्या संदेश लेकर आया है, आइए विस्तार से जानते हैं।

🔮 मूलांक 1 (1, 10, 19, 28 को जन्मे)

आज का दिन आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करेगा।
कार्य क्षेत्र/व्यवसाय: ऑफिस या बिजनेस में आपके फैसले सराहे जाएंगे। नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।
शिक्षा: छात्रों का मन पढ़ाई में लगेगा। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो अच्छा फोकस रहेगा।
कला-संगीत: कुछ नया सीखने का मौका मिलेगा।
राजनीतिक व प्रशासनिक क्षेत्र: प्रभाव बढ़ेगा, मान-सम्मान मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: आय में स्थिरता रहेगी, लेकिन फिजूलखर्च से बचें।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 1
पूजा करें: सूर्य देव की — जल अर्पित करना लाभदायक रहेगा।

🌙 मूलांक 2 (2, 11, 20, 29 को जन्मे)

भावनाओं पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा।
कार्य क्षेत्र/व्यवसाय: सहकर्मियों का पूरा सहयोग मिलेगा। रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं।
शिक्षा: लेखन और रिसर्च से जुड़े छात्रों के लिए समय अच्छा है।
कला-संगीत: रचनात्मकता बढ़ेगी।
राजनीतिक क्षेत्र: छवि को लेकर सतर्क रहें।
आर्थिक स्थिति: धीरे-धीरे सुधार होगा। बचत पर ध्यान दें।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूजा करें: मां दुर्गा की

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🌟 मूलांक 3 (3, 12, 21, 30 को जन्मे)

बुद्धि और समझ से लिया गया निर्णय लाभ देगा।
कार्य क्षेत्र/व्यवसाय: प्रमोशन या नई जिम्मेदारी के योग हैं।
शिक्षा: गुरु का मार्गदर्शन लाभकारी रहेगा।
कला-संगीत: मंच पर प्रदर्शन का अवसर मिल सकता है।
राजनीतिक/प्रशासनिक क्षेत्र: मान-सम्मान बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: अतिरिक्त आय के स्रोत बनेंगे।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूजा करें: भगवान विष्णु की

🌿 मूलांक 4 (4, 13, 22, 31 को जन्मे)

दिन थोड़ा संघर्षपूर्ण हो सकता है, लेकिन धैर्य से सफलता मिलेगी।
कार्य क्षेत्र: बदलाव के संकेत हैं, नए अवसर मिल सकते हैं।
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है, लेकिन अनुशासन बनाए रखें।
कला-संगीत: मन कम लगेगा पर अभ्यास जारी रखें।
प्रशासनिक क्षेत्र: निर्णय सोच-समझकर लें।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ सकता है, नियंत्रण जरूरी है।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूजा करें: भगवान गणेश की

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🌞 मूलांक 5 (5, 14, 23 को जन्मे)

आज दिन ऊर्जा से भरपूर रहेगा।
कार्य/व्यवसाय: नई डील या कॉन्ट्रैक्ट मिलने के योग हैं।
शिक्षा: तकनीकी और मीडिया से जुड़े छात्रों के लिए शुभ समय है।
कला-संगीत: रचनात्मक विचार आएंगे।
राजनीतिक क्षेत्र: नेटवर्क मजबूत होगा।
आर्थिक स्थिति: छोटे लाभ के योग हैं।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूजा करें: भगवान विष्णु की

💐 मूलांक 6 (6, 15, 24 को जन्मे)

प्रेम, सौंदर्य और सुख-सुविधा का योग है।
कार्य/व्यवसाय: फैशन, आर्ट, डिजाइन से जुड़े लोगों को लाभ होगा।
शिक्षा: क्रिएटिव स्टूडेंट्स के लिए अच्छा समय है।
कला-संगीत: प्रसिद्धि मिलने के योग हैं।
राजनीतिक क्षेत्र: जन समर्थन मिलेगा।
आर्थिक स्थिति: खर्च ज्यादा होगा लेकिन संतुष्टि रहेगी।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूजा करें: मां लक्ष्मी की

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🌌 मूलांक 7 (7, 16, 25 को जन्मे)

आत्मचिंतन और आध्यात्मिक सोच बढ़ेगी।
कार्य क्षेत्र: अकेले काम करना बेहतर रहेगा।
शिक्षा: रिसर्च, साइंस और आध्यात्मिक विषयों में प्रगति होगी।
कला-संगीत: मन शांत रहेगा, ध्यान में रुचि बढ़ेगी।
राजनीतिक क्षेत्र: आज दूरी बनाना बेहतर है।
आर्थिक स्थिति: सामान्य रहेगी।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूजा करें: शिव जी की

💪 मूलांक 8 (8, 17, 26 को जन्मे)

कड़ी मेहनत का फल मिलने का दिन है।
कार्य/व्यवसाय: पुराना निवेश लाभ देगा।
शिक्षा: अनुशासन से सफलता मिलेगी।
प्रशासनिक क्षेत्र: उच्च अधिकारियों से लाभ होगा।
राजनीतिक क्षेत्र: प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: स्थिरता आएगी।
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
पूजा करें: शनिदेव की

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🔥 मूलांक 9 (9, 18, 27 को जन्मे)

आज जोश और निर्णय क्षमता दमदार रहेगी।
कार्य क्षेत्र: बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत संभव है।
शिक्षा: स्पोर्ट्स और डिफेंस क्षेत्र से जुड़े छात्रों को लाभ।
कला-संगीत: मंच और प्रस्तुति के अवसर मिलेंगे।
राजनीतिक क्षेत्र: शत्रुओं पर विजय मिलेगी।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ के योग हैं।
शुभ रंग: नारंगी
शुभ अंक: 9
पूजा करें: हनुमान जी की

महत्वपूर्ण सूचना

यह अंक ज्योतिष भविष्यवाणी केवल सामान्य जनहित के लिए है। “राष्ट्र की परम्परा” इस अंक ज्योतिष की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता। पाठकों को सलाह दी जाती है कि अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण किसी विशेषज्ञ से अवश्य करवाएं।

एक मजबूत भविष्य की नींव: बच्चों की शिक्षा में माता-पिता की भूमिका

बच्चों की शिक्षा के लिए अभिभावकों की भूमिका: मोटिवेशन और सकारात्मक वातावरण से संवरता भविष्य
शिक्षा डेस्क- दिलीप कुमार पाण्डेय द्वारा राष्ट्र की परम्परा के लिए

आज के बदलते युग में बच्चों की शिक्षा केवल स्कूल और किताबों तक सीमित नहीं रह गई है। अब यह घर, समाज, तकनीक और सबसे बढ़कर अभिभावकों की सोच और सहयोग से जुड़ी हुई है। यदि वास्तव में हम अपने बच्चों का उज्ज्वल भविष्य चाहते हैं, तो हमें सबसे पहले उन्हें बच्चों की शिक्षा के लिए प्रेरित करना सीखना होगा। यह काम डांट-फटकार से नहीं, बल्कि प्यार, समझ और सही दिशा से संभव है।

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सकारात्मक सीखने का माहौल: सफलता की पहली सीढ़ी

बच्चों को पढ़ाई के लिए मोटिवेट करने का सबसे प्रभावी तरीका है एक सकारात्मक और प्रेरणादायक माहौल बनाना। घर का वातावरण यदि शांत, सहयोगपूर्ण और उत्साहवर्धक होगा, तो बच्चा खुद-ब-खुद सीखने की ओर आकर्षित होगा।

अभिभावकों को चाहिए कि
बच्चों की छोटी-छोटी सफलताओं की प्रशंसा करें।
गलती होने पर उन्हें हतोत्साहित न करें।
तुलना करने से बचें।
पढ़ाई को बोझ नहीं, एक अवसर के रूप में प्रस्तुत करें।
यही सकारात्मक दृष्टिकोण बच्चों की सीखने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है और बच्चों की शिक्षा के लिए प्रेरित करना आसान हो जाता है।

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यथार्थवादी लक्ष्य: दबाव नहीं, दिशा जरूरी

अक्सर माता-पिता बच्चों से ऐसे लक्ष्य रखने की अपेक्षा करते हैं, जो उनकी उम्र, क्षमता और रुचि के अनुरूप नहीं होते। इससे बच्चे तनाव में आ जाते हैं और उनका पढ़ाई से मन हटने लगता है।
इसके बजाय यदि अभिभावक।
बच्चे की योग्यता को समझें।
छोटे और हासिल करने योग्य लक्ष्य तय करें।
उस लक्ष्य को पाने पर सराहना करें।
तो बच्चा अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है। इस तरह बच्चों की शिक्षा के लिए प्रेरित करना एक स्वाभाविक प्रक्रिया बन जाती है, न कि मजबूरी।

पढ़ाई को रोचक बनाइए – खेल और कहानियों के जरिए
सीखना तभी प्रभावी होता है, जब वह दिलचस्प हो। केवल किताबें और रट्टा लगाना ही पढ़ाई नहीं है।
बच्चों को मोटिवेट करने के लिए अभिभावक इन तरीकों को अपना सकते हैं।
गणित को खेलों के रूप में समझाना।
इतिहास और नैतिक शिक्षा को कहानियों के जरिए बताना।
विज्ञान को छोटे प्रयोगों से सिखाना।
सामान्य ज्ञान को क्विज़ के जरिए बढ़ाना।
जब पढ़ाई खेल-खेल में होती है, तो बच्चा उसे बोझ नहीं, आनंद समझता है। इसी से बच्चों की शिक्षा के लिए प्रेरित करना और प्रभावशाली बनता है।
रुचियों को पहचानें – हर बच्चा खास होता है।

हर बच्चा अलग होता है। किसी को पेंटिंग पसंद है, किसी को क्रिकेट, किसी को किताबें और किसी को तकनीक। एक समझदार अभिभावक वही होता है, जो अपने बच्चे की रुचियों को पहचानकर उन्हें प्रोत्साहित करता है।
यदि आपका बच्चा कला में रुचि रखता है, तो
उसे रंग, कॉपी और मंच प्रदान करें।
प्रतियोगिताओं में भेजें।
उसकी क्रिएटिव सोच को सराहें।
रुचि के अनुसार सीखने से बच्चा खुद ही आगे बढ़ने लगता है और बच्चों की शिक्षा के लिए प्रेरित करना एक सुखद अनुभव बन जाता है।
दिनचर्या का महत्व: अनुशासन ही सफलता की कुंजी।
बिना दिनचर्या के पढ़ाई कभी भी प्रभावी नहीं हो सकती। बच्चों की एक तय दिनचर्या होना बेहद जरूरी है, जैसे:
पढ़ाई का तय समय।
खेलने का समय।
मोबाइल और टीवी की सीमित अवधि।
सोने और जागने का समय।
यह अनुशासन बच्चे के अंदर आत्मनिर्भरता और जिम्मेदारी की भावना पैदा करता है। समय प्रबंधन सिखाकर हम बच्चों की शिक्षा के लिए प्रेरित करने की एक मजबूत नींव रख देते हैं।
ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूरी जरूरी।
आज टीवी, मोबाइल, वीडियो गेम और सोशल मीडिया बच्चों के लिए सबसे बड़ा डिस्ट्रैक्शन बन चुके हैं। यदि अभिभावक इन पर नियंत्रण नहीं रखेंगे, तो बच्चा पढ़ाई से भटक जाएगा।
मोबाइल का समय सीमित करें।
पढ़ाई के समय टीवी बंद रखें।
खुद भी अच्छा उदाहरण पेश करें।
याद रखिए, बच्चे शब्दों से नहीं, आचरण से सीखते हैं। आपका व्यवहार ही बच्चों की शिक्षा के लिए प्रेरित करने का सबसे मजबूत साधन है।
जिज्ञासा को बढ़ावा दें – सवाल पूछने से मत रोकें
बच्चों के मन में कई सवाल होते हैं। यदि वे प्रश्न पूछते हैं, तो इसका मतलब है कि उनका दिमाग सक्रिय है। उन्हें चुप कराने की बजाय, उनके सवालों को सुने और सरल भाषा में जवाब दें।
यही जिज्ञासा भविष्य में उन्हें वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर, लेखक या नेता बनने की दिशा में ले जा सकती है। यह भी बच्चों की शिक्षा के लिए प्रेरित करना का अहम हिस्सा है।

बच्चों को पढ़ाई के लिए मजबूर करना नहीं, बल्कि उन्हें समझाकर, प्यार देकर और उनका मार्गदर्शन करके आगे बढ़ाना ही सच्ची प्रेरणा है। जब एक अभिभावक खुद एक अच्छा शिक्षक, दोस्त और मार्गदर्शक बन जाता है, तो बच्चा किसी भी लक्ष्य को पाने में सक्षम हो जाता है।

बच्चों की शिक्षा के लिए प्रेरित करना केवल उनका ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और देश के भविष्य को उज्ज्वल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इतिहास की अविस्मरणीय क्षण

अमर विरासत के प्रहरी — 6 दिसंबर को दिवंगत हुए इतिहास के महान स्तंभ

6 दिसंबर भारतीय इतिहास के पन्नों में एक भावनात्मक और गंभीर दिन के रूप में दर्ज है। इस तारीख को देश ने अनेक ऐसे महान व्यक्तित्वों को खोया, जिन्होंने अपने कर्म, विचार और संघर्ष से समाज की दिशा बदल दी। ये केवल नाम नहीं, बल्कि विचारधारा, त्याग और प्रेरणा के प्रतीक हैं।

डॉ. भीमराव आम्बेडकर (1956)
जन्म: 14 अप्रैल 1891, महू, इंदौर (वर्तमान मध्य प्रदेश)
जनपद: धार | प्रदेश: मध्य प्रदेश
भारत के संविधान निर्माता, समाज सुधारक और बौद्ध पुनरुत्थानवादी डॉ. आम्बेडकर ने दलितों, शोषितों और वंचितों को अधिकारों की नई पहचान दिलाई। उन्होंने समानता, स्वतंत्रता और न्याय को सामाजिक आधार प्रदान किया। उनका निधन 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में हुआ। यह दिन “महापरिनिर्वाण दिवस” के रूप में मनाया जाता है।

मेजर होशियार सिंह (1998)
जन्म: हरियाणा के रोहतक जनपद के सिसाना गांव
प्रदेश: हरियाणा
1971 के भारत-पाक युद्ध में अद्भुत वीरता के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। मातृभूमि के लिए उनका समर्पण भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है।

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बीना राय (2009)
जन्म: 13 जुलाई 1931, लाहौर (अब पाकिस्तान)
प्रदेश: मुंबई, महाराष्ट्र
हिन्दी सिनेमा की प्रतिष्ठित अभिनेत्री बीना राय ने “अनारकली” और “ताजमहल” जैसी ऐतिहासिक फिल्मों में अपनी अभिनय प्रतिभा से दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी। उनका निधन मुंबई में हुआ।

राम मोहन (2015)
जन्म: दिल्ली | प्रदेश: दिल्ली
प्रसिद्ध भारतीय चरित्र अभिनेता राम मोहन 200 से अधिक फिल्मों में नज़र आए। उन्होंने खलनायक व सशक्त सहायक भूमिकाओं से सिनेमा जगत में अलग पहचान बनाई।

डॉ. ब्रह्मदेव शर्मा (2015)
जन्म: राजस्थान | प्रदेश: राजस्थान
एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के रूप में इन्होंने प्रशासनिक क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान दिया। नीति निर्माण और सामाजिक सुधारों में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही।

भगवान सहाय (1986)
जन्म: लाहौर (अब पाकिस्तान)
प्रदेश: जम्मू-कश्मीर
जम्मू और कश्मीर के दूसरे राज्यपाल रहे भगवान सहाय राजनैतिक दूरदर्शिता और प्रशासनिक क्षमता के लिए पहचाने जाते थे। उनके कार्यकाल ने राज्य के राजनीतिक ढांचे को स्थायित्व प्रदान किया।

6 दिसंबर ना केवल एक तारीख है, बल्कि उन महान आत्माओं की स्मृति है, जिन्होंने अपने जीवन से इतिहास रचा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का दीप जलाया।

“6 दिसंबर — वे दिन, जब इतिहास ने साँस ली और व्यक्तित्व अमर हो गए”

6 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि इतिहास के पन्नों पर अंकित उन महान व्यक्तित्वों का स्मरण है, जिनके विचार, कर्म और योगदान ने समाज को नई दिशा दी। राजनीति, कला, शिक्षा और प्रशासन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में इन महापुरुषों ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित किया।

कपिल देव द्विवेदी (जन्म – 6 दिसंबर 1998)

कपिल देव द्विवेदी वेद, वेदांग, संस्कृत व्याकरण और भाषा विज्ञान के क्षेत्र में अद्वितीय विद्वान माने जाते हैं। उनका जन्म भारत के एक विद्या-परंपरा से जुड़े परिवार में हुआ, जहां बाल्यकाल से ही उन्हें वैदिक ग्रंथों के अध्ययन का वातावरण मिला। उत्तर प्रदेश के एक जनपद में जन्मे कपिल देव ने संस्कृत साहित्य और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शोध से जोड़ने का कार्य किया। उन्होंने कई दुर्लभ ग्रंथों का पुनर्संपादन किया और नई पीढ़ी तक वेदों के गूढ़ रहस्य सरल भाषा में पहुँचाए। उनका योगदान भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय अध्ययन के क्षेत्र में एक अमूल्य धरोहर के रूप में देखा जाता है।

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प्रवीण कुमार सोबती (जन्म – 6 दिसंबर 1947)

प्रवीण कुमार सोबती भारतीय सिनेमा और टेलीविजन जगत का एक जाना-पहचाना नाम रहे हैं। उनका जन्म पंजाब प्रदेश के अमृतसर जनपद में हुआ था। अभिनय के प्रति उनका रुझान बचपन से था और यही रुचि उन्हें फिल्मों तक ले आई। उन्होंने “BR Chopra के महाभारत” में ‘भीम’ की भूमिका निभा कर अपार लोकप्रियता हासिल की। उनका व्यक्तित्व, कद-काठी और प्रभावशाली अभिनय आज भी दर्शकों को याद है। फिल्मों के साथ-साथ सामाजिक विषयों पर आधारित कई धारावाहिकों में उनके अभिनय ने समाज को नई सोच दी। वे कलाकार नहीं, बल्कि एक जीवंत प्रेरणा थे।

बृजलाल वियाणी (जन्म – 6 दिसंबर 1896)

बृजलाल वियाणी मध्यप्रदेश के एक प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता थे। उनका जन्म मध्य प्रदेश के एक सामान्य परिवार में हुआ था, लेकिन उनकी सोच असाधारण थी। उन्होंने समाज से कुरीतियों, अंधविश्वास और अन्याय को मिटाने के लिए आजीवन संघर्ष किया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में उन्होंने कई जन आंदोलनों का नेतृत्व किया और ग्रामीण भारत में शिक्षा एवं समानता का संदेश फैलाया। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित किया और सामाजिक एकता की मिसाल पेश की। उनका जीवन सेवा, संघर्ष और समर्पण का प्रत्यक्ष उदाहरण है।

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वॉरेन हेस्टिंग्स (जन्म – 6 दिसंबर 1732)

वॉरेन हेस्टिंग्स ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के पहले गवर्नर जनरल थे। उनका जन्म इंग्लैंड के चर्चिल, ऑक्सफोर्डशायर में हुआ था। भारत में ब्रिटिश शासन की नींव को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों, न्याय व्यवस्था और कर प्रणाली को संगठित करने का काम किया, हालांकि उनके कई निर्णय विवादों में भी रहे। उनके शासनकाल ने भारत के राजनीतिक इतिहास की दिशा को बदल दिया। वे भारत में ब्रिटिश शासन के विस्तार के प्रमुख स्तंभों में से एक थे।

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6 दिसंबर को जन्मे ये सभी व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में एक अमिट छाप छोड़ गए। इनके जीवन की कहानी हमें यह सिखाती है कि एक साधारण जन्म भी असाधारण परिवर्तन ला सकता है, यदि उसमें सेवा, ज्ञान और संकल्प की सच्ची भावना हो।

जाने कार्य, धन और शिक्षा का हाल

राशिफल 6 दिसंबर 2025 — 12 राशियों का विस्तृत भविष्यफल

पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय के साथ जानिए आज का दिन कैसा रहेग

  1. मेष (Aries) – ♈
    अक्षर: चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ

आज का प्रभाव: ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता प्रबल रहेगी।
कार्य/व्यवसाय: नए प्रोजेक्ट की शुरुआत उत्तम रहेगी, निर्णय लेने में देर न करें।
शिक्षा: प्रतियोगी छात्रों के लिए अच्छा दिन, ध्यान बनाए रखें।
कला/संगीत: रचनात्मक विचारों को मंच मिलेगा।
राजनीति/प्रशासन: जनसमर्थन का योग, जिम्मेदारी बढ़ेगी।
आर्थिक स्थिति: लाभ के संकेत, पर अनावश्यक खर्च से बचें।
शुभ रंग: लाल | शुभ अंक: 9
पूजा: हनुमान जी की उपासना श्रेष्ठ रहेगी।

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  1. वृषभ (Taurus) – ♉
    अक्षर: ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो

आज का प्रभाव: स्थिरता और धैर्य का दिन।
कार्य/व्यवसाय: अटके काम पूर्ण हो सकते हैं, साझेदारी लाभ देगी।
शिक्षा: एकाग्रता बढ़ेगी, अच्छे परिणाम मिलेंगे।
कला/संगीत: गायन व चित्रकला में सराहना मिलेगी।
राजनीति/प्रशासन: मध्यम फल, संयम बरतें।
आर्थिक स्थिति: रुका धन मिलने की संभावना।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 6
पूजा: मां लक्ष्मी की आराधना करें।

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  1. मिथुन (Gemini) – ♊
    अक्षर: का, की, कू, घ, ङ

आज का प्रभाव: संवाद आपकी ताकत बनेगा।
कार्य/व्यवसाय: मीटिंग व डील में सफलता।
शिक्षा: लेखन-भाषा के विद्यार्थियों के लिए शुभ।
कला/संगीत: मंचीय कला में अवसर।
राजनीति/प्रशासन: नेटवर्किंग से लाभ।
आर्थिक स्थिति: नए अवसर बनेंगे।
शुभ रंग: पीला | शुभ अंक: 5
पूजा: गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें।

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  1. कर्क (Cancer) – ♋
    अक्षर: ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

आज का प्रभाव: भावनात्मक संतुलन जरूरी।
कार्य/व्यवसाय: धैर्य से लाभ, निर्णय में जल्दबाज़ी न करें।
शिक्षा: घर के वातावरण से लाभ।
कला/संगीत: कवितालेखन व लोक-संगीत में रुचि।
राजनीति/प्रशासन: बैकग्राउंड सपोर्ट मजबूत।
आर्थिक स्थिति: सामान्य लेकिन सुरक्षित।
शुभ रंग: सफेद | शुभ अंक: 2
पूजा: शिव-पूजन लाभकारी।

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  1. सिंह (Leo) – ♌
    अक्षर: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

आज का प्रभाव: आत्मविश्वास चरम पर।
कार्य/व्यवसाय: पदोन्नति या मान-सम्मान का योग।
शिक्षा: नेतृत्व कार्यों में आगे।
कला/संगीत: मंच कला में प्रशंसा।
राजनीति/प्रशासन: प्रभाव बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: आय के नए स्रोत।
शुभ रंग: सुनहरा | शुभ अंक: 1
पूजा: सूर्यदेव को अर्घ्य दें।

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  1. कन्या (Virgo) – ♍
    अक्षर: टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

आज का प्रभाव: अनुशासन और बुद्धि से सफलता।
कार्य/व्यवसाय: मैनेजमेंट व योजना सफल।
शिक्षा: रिसर्च व गणित के लिए श्रेष्ठ।
कला/संगीत: वाद्य-संगीत में रुचि।
राजनीति/प्रशासन: योजनाकार की भूमिका मजबूत।
आर्थिक स्थिति: संतुलित आय-व्यय।
शुभ रंग: नीला | शुभ अंक: 6
पूजा: मां दुर्गा का स्मरण करें।

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  1. तुला (Libra) – ♎
    अक्षर: रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते

आज का प्रभाव: रिश्तों में मधुरता।
कार्य/व्यवसाय: साझेदारी में लाभ।
शिक्षा: सामाजिक विषयों में रुचि।
कला/संगीत: नृत्य-कला में अवसर।
राजनीति/प्रशासन: संतुलित निर्णय लोकप्रियता बढ़ाएंगे।
आर्थिक स्थिति: सुधार की संभावना।
शुभ रंग: गुलाबी | शुभ अंक: 7
पूजा: मां सरस्वती की पूजा करें।

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  1. वृश्चिक (Scorpio) – ♏
    अक्षर: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

आज का प्रभाव: आत्मविश्लेषण का समय।
कार्य/व्यवसाय: पुराने विवाद सुलझेंगे।
शिक्षा: मनोविज्ञान/गूढ़ ज्ञान में लाभ।
कला/संगीत: लेखन में गहराई।
राजनीति/प्रशासन: रणनीति सफल।
आर्थिक स्थिति: निवेश में लाभ।
शुभ रंग: मरून | शुभ अंक: 8
पूजा: भैरव पूजा फलदायी।

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  1. धनु (Sagittarius) – ♐
    अक्षर: ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

आज का प्रभाव: यात्रा व ज्ञान प्राप्ति का योग।
कार्य/व्यवसाय: विदेशी संपर्क लाभकारी।
शिक्षा: उच्च शिक्षा के लिए उत्तम।
कला/संगीत: प्रेरणादायी लेखन व गायन।
राजनीति/प्रशासन: शुभ समाचार मिल सकता है।
आर्थिक स्थिति: अचानक लाभ।
शुभ रंग: नारंगी | शुभ अंक: 3
पूजा: विष्णु भगवान का पूजन करें।

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  1. मकर (Capricorn) – ♑
    अक्षर: भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

आज का प्रभाव: कर्म और अनुशासन का फल।
कार्य/व्यवसाय: स्थायी प्रगति।
शिक्षा: तकनीकी छात्रों के लिए अच्छा।
कला/संगीत: शास्त्रीय कला में रुचि।
राजनीति/प्रशासन: अधिकार बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति: लंबी अवधि के लाभ।
शुभ रंग: स्लेटी | शुभ अंक: 4
पूजा: शनिदेव का पूजन करें।

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  1. कुंभ (Aquarius) – ♒
    अक्षर: गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

आज का प्रभाव: नए विचारों का प्रवाह।
कार्य/व्यवसाय: इनोवेशन में सफलता।
शिक्षा: विज्ञान-तकनीक में प्रगति।
कला/संगीत: फ्यूजन म्यूजिक में रुचि।
राजनीति/प्रशासन: युवाओं में लोकप्रियता।
आर्थिक स्थिति: प्रगति के मार्ग खुलेंगे।
शुभ रंग: बैंगनी | शुभ अंक: 11
पूजा: शिव जी का अभिषेक करें।

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  1. मीन (Pisces) – ♓
    अक्षर: दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

आज का प्रभाव: भावनात्मक संतुलन और रचनात्मकता।
कार्य/व्यवसाय: कला व सेवा क्षेत्र में उन्नति।
शिक्षा: ध्यान योग से लाभ।
कला/संगीत: सृजनशीलता बढ़ेगी।
राजनीति/प्रशासन: मध्यम लेकिन सकारात्मक योग।
आर्थिक स्थिति: धीरे-धीरे सुधार।
शुभ रंग: आसमानी | शुभ अंक: 12
पूजा: कृष्ण-पूजन शुभ रहेगा।

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नोट: यह राशिफल सामान्य ग्रह-स्थिति पर आधारित है। “राष्ट्र की परम्परा” इस ज्योतिष की पुष्टि नहीं करता। अपनी जन्मकुंडली किसी विशेषज्ञ से अवश्य दिखाएं।

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जब समय थम सा गया – 6 दिसंबर की बड़ी घटनाएं

एक तारीख ने बदल दी दुनिया की दिशा: 6 दिसंबर की अमिट और भावनात्मक गूंज

6 दिसंबर का नाम इतिहास में केवल एक तारीख नहीं, बल्कि विश्व राजनीति, सामाजिक बदलाव, साहित्य, खेल, स्वतंत्रता संग्राम और मानवाधिकार आंदोलनों से जुड़ी कई ऐसी घटनाओं का साक्षी है, जिन्होंने समय की धारा को मोड़ा है। यह दिन कभी संघर्ष और पीड़ा की याद दिलाता है तो कभी स्वतंत्रता, साहस और बदलाव की प्रेरणा देता है। नीचे 6 दिसंबर की कुछ प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं का विस्तृत और विश्लेषणात्मक ब्योरा प्रस्तुत है—

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2012 – मिस्र में हिंसक प्रदर्शन
6 दिसंबर 2012 को मिस्र में राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन अचानक हिंसक हो उठे। राजधानी काहिरा सहित कई शहरों में झड़पें शुरू हो गईं, जिनमें कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और 770 से अधिक लोग घायल हो गए। यह घटना अरब स्प्रिंग के बाद पैदा हुए राजनीतिक अस्थिरता का गंभीर उदाहरण बनी और दुनिया को यह सोचने पर मजबूर किया कि लोकतंत्र की राह कितनी कठिन और बलिदानपूर्ण हो सकती है।

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2008 – भारत की आर्थिक नीति में बड़ा बदलाव और सैन्य सहयोग
इस दिन भारतीय केन्द्रीय बैंक ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में एक-एक प्रतिशत की कटौती कर अर्थव्यवस्था को राहत देने का प्रयास किया। वैश्विक मंदी के दौर में यह निर्णय बेहद अहम माना गया। इसी दिन भारत और चीन की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘हैंड इन हैंड 2008’ का आरंभ कर्नाटक के बेलगांव में हुआ, जो दोनों देशों के बीच सामरिक विश्वास बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।

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2007 – धार्मिक स्वतंत्रता की मिसाल बना ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया के स्कूलों में सिख छात्रों को कृपाण साथ रखने और मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनकर कक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दी गई। यह निर्णय धार्मिक स्वतंत्रता और बहुसांस्कृतिक समाज की स्वीकार्यता का प्रतीक बना। विश्व भर में इसे एक सकारात्मक सामाजिक बदलाव के रूप में देखा गया और अल्पसंख्यक अधिकारों की दिशा में मजबूत उदाहरण माना गया।

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2002 – कार्लोस मोया को मिला एटीपी ख़िताब
स्पेन के मशहूर टेनिस खिलाड़ी कार्लोस मोया को ‘एटीपी यूरोपियन प्लेयर ऑफ द ईयर’ घोषित किया गया। यह सम्मान उनके शानदार प्रदर्शन, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण का प्रमाण था। इस उपलब्धि ने स्पेन में टेनिस को और भी लोकप्रिय बनाया और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बना।

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2001 – तालिबान का हथियार डालने का फैसला
अफगानिस्तान में अमेरिकी आक्रमण और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच तालिबान ने हथियार डालने पर सहमति जताई। यह क्षण अफगान राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत थी, हालांकि आने वाले वर्षों में शांति की राह आसान नहीं रही। यह निर्णय विश्व के लिए आतंकवाद और युद्ध के खिलाफ एक उम्मीद की किरण भी लेकर आया।

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1999 – इंडोनेशिया की जेल से बड़े पैमाने पर कैदी फरार
इंडोनेशिया की एक जेल से 283 कैदियों का फरार हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा सवाल बन गया। इस घटना ने प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया और सुधारात्मक कदम उठाने पर मजबूर किया।

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1998 – एशियाई खेल और वेनेजुएला में नई सत्ता
बैंकॉक में 13वें एशियाई खेलों की शुरुआत हुई, जो एशिया की खेल भावना और आपसी प्रतिस्पर्धा का महाकुंभ बना। इसी दिन स्वीडन ने इटली को हराकर दूसरी बार डेविस कप जीता। साथ ही, ह्यूगो शावेज वेनेजुएला के राष्ट्रपति चुने गए, जिसने देश की राजनीति की दिशा बदल दी।

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1997 – क्योटो जलवायु सम्मेलन का आगाज
जापान के क्योटो शहर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय जलवायु सम्मेलन ने वैश्विक पर्यावरण संरक्षण की नींव मजबूत की। यहीं से ‘क्योटो प्रोटोकॉल’ की भावना ने जन्म लिया, जिसने कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाया।

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1992 – अयोध्या विवाद और राष्ट्रीय पीड़ा
6 दिसंबर 1992 का दिन भारत के इतिहास का सबसे संवेदनशील और दर्दनाक दिन माना जाता है, जब अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद ढांचा गिरा दिया गया। इसके बाद देशभर में भड़की हिंसा में लगभग 400 लोगों की जान चली गई। यह घटना आज भी सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का एक गंभीर विषय बनी हुई है।

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1990 – सद्दाम हुसैन का ऐलान
इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने युद्ध टालने के प्रयासों के तहत कुवैत और इराक में बंधक बनाए गए सभी विदेशी नागरिकों को रिहा करने का आदेश दिया। यह फैसला उस समय अंतरराष्ट्रीय राजनीति में शांति की आशा लेकर आया।

1983 – यरुशलम में आतंकी हमला
इजरायल की राजधानी यरुशलम में एक बस धमाके में छह निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई। यह घटना मध्य पूर्व में फैले तनाव और हिंसा का एक और दर्दनाक उदाहरण बनी।

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1978 – स्पेन का नया संविधान
यूरोपीय देश स्पेन ने 6 दिसंबर 1978 को अपने नए संविधान को अंगीकार किया। यह निर्णय लोकतांत्रिक शासन, मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ।

1946 – होमगार्ड की स्थापना
भारत में होमगार्ड संगठन की स्थापना नागरिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और सामाजिक सेवा के उद्देश्य से की गई। यह संगठन आज भी देश के संकट के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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1926 – फि‍राक गोरखपुरी की गिरफ्तारी
महान उर्दू कवि फ़िराक़ गोरखपुरी को ब्रिटिश सरकार ने उनके राजनीतिक जुड़ाव के कारण बंदी बनाया। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और साहित्यिक चेतना के गहरे संबंध को दर्शाती है।

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1917 – फिनलैंड की स्वतंत्रता की घोषणा
फिनलैंड ने रूस से स्वतंत्रता की घोषणा करते हुए अपने एक नए राष्ट्र की पहचान स्थापित की। यह दिन आज भी फिनलैंड में राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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1907 – स्वतंत्रता आंदोलन की साहसिक घटना
भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी पहली क्रांतिकारी डकैती की घटना चिंगरीपोटा रेलवे स्टेशन पर हुई। यह अंग्रेजी शासन के खिलाफ उभरते प्रतिरोध की एक झलक थी।

आज का दिन बदल सकता है आपका भाग्य, बस सही समय को पहचानने की जरूरत है

श्री पंचांग – 06 दिसंबर 2025 | शनिवार | पौष कृष्ण द्वितीया दिन की हर घड़ी आपके जीवन को दिशा दे — सही समय, सही निर्णय

मुख्य पंचांग विवरण – विक्रम संवत – 2082 (कालयुक्त) शक संवत – 1947 (विश्वावसु)
चन्द्र मास – पूर्णिमांत: पौष | अमांत: मार्गशीर्ष
ऋतु – हेमंत
अयन – दक्षिणायन
वार – शनिवार

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तिथि
कृष्ण पक्ष द्वितीया – 12:55 AM से 09:25 PM तक
कृष्ण पक्ष तृतीया – 09:25 PM के बाद

नक्षत्र
मृगशीर्षा – 08:48 AM तक
आद्रा – 08:48 AM से अगले दिन 06:13 AM तक

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करण
तैतिल – 11:08 AM तक
गर – 11:08 AM से 09:26 PM तक
वणिज – 09:26 PM के बाद

योग
शुभ – 11:45 PM तक
शुक्ल – उसके बाद

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सूर्य व चंद्रमा का समय

सूर्योदय – 06:59 AM
सूर्यास्त – 05:36 PM
चंद्रोदय – 07:06 PM
चंद्रास्त – 09:23 AM (अगले दिन)

सूर्य राशि – वृश्चिक
चन्द्र राशि – मिथुन (पूरा दिन-रात)

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शुभ योग

द्विपुष्कर योग – 06:59 AM से 08:48 AM तक
यह योग धन, कार्य-सिद्धि और लाभ के लिए उत्तम माना जाता है।

अभिजीत मुहूर्त – 11:56 AM से 12:39 PM
अमृत काल – 09:17 PM से 10:43 PM
ब्रह्म मुहूर्त – 05:23 AM से 06:11 AM

इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग नहीं बन रहा, परंतु द्विपुष्कर योग अत्यंत शुभ है।

अशुभ काल (इन समयों में शुभ कार्य न करें)

राहुकाल – 09:38 AM से 10:58 AM
यमगण्ड – 01:37 PM से 02:57 PM
कुलिक काल – 06:59 AM से 08:18 AM
दुर्मुहूर्त – 08:24 AM से 09:06 AM
वर्ज्यम – 04:17 PM से 05:43 PM

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यात्रा निर्देश (शनिवार विशेष)

शनिवार को पश्चिम दिशा की यात्रा वर्जित मानी जाती है।
यदि आवश्यक हो तो गुड़ या अदरक खाकर यात्रा करें।

लाभकारी दिशा – उत्तर-पूर्व और पूर्व दिशा में यात्रा करने से सफलता और शुभ फल की प्राप्ति होती है।

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चंद्रबल (राशियों के अनुसार)

06 दिसंबर की सुबह 06:59 AM तक जिन राशियों को चंद्र बल प्राप्त है: मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु और मकर

लाभार्थियों से धनराशि की मांग करने पर ग्राम पंचायत अधिकारी निलंबित

शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा)l जैतीपुर विकास योजनाओं में लापरवाही और वित्तीय अनियमितता पर जिला पंचायत राज अधिकारी ऋषि पाल सिंह ने, ग्राम पंचायत अधिकारी संगीता यादव को निलंबित कर दिया है। उन पर ब्लॉक की अमरेड़ी ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में रुचि न लेने, मनरेगा के कार्यों में धनराशि की मांग किए जाने एवं शौचालय एवं आवास योजना के लाभार्थियों से स्वयं व अपने पति के द्वारा धन राशि मांगने सहित पात्र लाभार्थियों को अपात्र करने के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों से रुपयों की मांग करने की ऑडियो रिकॉर्डिंग प्राप्त होने पर अनियमितता की प्रथम दृष्टया पुष्टि होने पर कार्रवाई हुई है। निलंबित होने पर उन्हें खंड विकास अधिकारी तिलहर के कार्यालय से संबद्ध किया गया है।वहीं उन पर लगे आरोपों की जांच के लिए अलग से अधिकारी नामित किए जाएंगे।

एनसीसी बालिकाओं को मिशन शक्ति 5.0 के तहत किया गया जागरूक

भागलपुर/देवरिया।(राष्ट्र की परम्परा) मईल थाना क्षेत्र के भागलपुर बीजीएम इंटर कॉलेज भागलपुर में एनसीसी की बालिकाओं को मिशन शक्ति फेज 5.0 के अंतर्गत विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं महिला सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी गईं। इस दौरान छात्राओं को जागरूक करते हुए पंपलेट भी वितरित किए गए।
बालिकाओं को महिला सुरक्षा हेतु आवश्यक हेल्पलाइन नंबर 112, 181, 1076, 1090, 1930 आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही महिला सम्मान, महिला सुरक्षा और महिला स्वावलंबन से संबंधित शासन की कल्याणकारी योजनाओं जैसे मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और सामूहिक विवाह योजना के बारे में भी अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के दौरान साइबर अपराध से बचाव के लिए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 तथा Cybercrime.gov.nic.in वेबसाइट के बारे में विशेष रूप से बताया गया। छात्राओं को समझाया गया कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, संदिग्ध कॉल से सतर्क रहें, और किसी समस्या की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर या संबंधित वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करें।

विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी द्वारा समग्र शिक्षा कार्यक्रम के तहत 225 दिव्यांग बच्चों को 278 उपकरण वितरित

संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। समग्र शिक्षा समेकित शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत एंलिमको कानपुर के सहयोग से जनपद के परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत 225 दिव्यांग बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप 278 सहायक उपकरणों का वितरण किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विधायक मेहदावल अनिल कुमार त्रिपाठी ने दिव्यांग बच्चों को ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, ब्रेल किट, रॉलेटर और शिक्षण सहायक सामग्री जैसे उपकरण वितरित किए और उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि शासन की मंशा के अनुसार बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा दिव्यांग बच्चों को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अभिभावकों से अपील की गई कि वे इन सुविधाओं का पूर्ण लाभ उठाएं ताकि बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी दिव्यांग बच्चे को चिकित्सा या शिक्षण सहायता से संबंधित कोई समस्या हो और उसका समाधान जनपद में संभव न हो, तो गोरखपुर स्थित सीआरसी में बेहतर सेवाएं उपलब्ध हैं, जहां अभिभावक बच्चों को लेकर जा सकते हैं।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह द्वारा मुख्य अतिथि का स्वागत बैज एवं माला पहनाकर किया गया। इस अवसर पर राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बघौली की प्रधानाचार्या निशा यादव भी उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए जिला समन्वयक डॉ. रजनीश बैद्यनाथ ने बताया कि जनपद में पहले व्यापक आकलन कर बच्चों को चिन्हित किया गया। चिन्हित बच्चों को उनकी दिव्यांगता और आयु के अनुसार उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं। इसमें 40% धनराशि समग्र शिक्षा अभियान तथा 60% धनराशि मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा एंलिमको के माध्यम से वहन की जा रही है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि जनपद में वर्तमान में 26 स्पेशल एजुकेटर और एक फिजियोथेरेपिस्ट कार्यरत हैं, जो बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक सामग्री, विषयवार लर्निंग मटेरियल, दृष्टिबाधित बच्चों को ब्रेल पुस्तकें तथा गंभीर दिव्यांग बच्चों को होम-बेस्ड शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। सप्ताह में एक दिन स्पेशल एजुकेटर ऐसे बच्चों के घर जाकर शैक्षिक सहायता प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम में स्पेशल एजुकेटर अर्चना त्रिपाठी, विश्वनाथ विश्वकर्मा, दुर्गेश यादव, जनक धारी, प्रमोद उपाध्याय, वीरेंद्र चौधरी, शंभू, धर्मराज, मोना गौतम, दिलीप यादव, बृजेंद्र प्रताप सिंह, धर्मेंद्र चौधरी, अमित कुमार, प्रेम शंकर चौधरी, पवन चौधरी, आशीष कुमार दुबे, अमरनाथ रंजन, अर्जुन प्रसाद ने अपने-अपने विकास क्षेत्रों से बच्चों को लाकर कार्यक्रम में प्रतिभाग कराया।
इस अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी बधौली निधि श्रीवास्तव, अभिभावकगण, दिव्यांग बच्चे एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।