Sunday, June 28, 2026
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कर्मा देवी समूह के मुख्य समारोह में बॉलीवुड अभिनेता गुलशन ग्रोवर होंगे मुख्य अतिथि

संसारपुर/बस्ती (राष्ट्र की परम्परा)।कर्मा देवी समूह स्थापना दिवस 2025 का दो दिवसीय भव्य शुभारम्भ बुधवार को हुआ, जिसकी शुरुआत प्रेरक कथा के साथ हुई। आचार्य शांतनु महाराज के ओजस्वी उद्बोधन ने कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अतिथियों को जीवन मूल्यों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा—“जीवन लंबा नहीं, बल्कि सार्थक होना चाहिए।” उनकी कथा ने गुरु-शिष्य परंपरा, संत-संग और त्याग के महत्व को गहराई से उजागर किया।

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समूह की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंशु सिंह गौतम ने बताया कि महाराज का मार्गदर्शन छात्रों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला है। वहीं समूह के मुख्य सूचना अधिकारी यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि आज के परिवेश में शिक्षा, तकनीक और अध्यात्म का समन्वय अत्यंत आवश्यक हो गया है।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में समूह के चेयरमैन व सेवानिवृत्त आईएएस ओ० एन० सिंह ने आचार्य शांतनु महाराज को शॉल व स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनका सम्मान किया। संपूर्ण संचालन रेडियो ओमनी द्वारा किया गया।

कर्मा देवी समूह अपने 16 वर्ष की सफल यात्रा पूर्ण होने पर 11 दिसंबर 2025 को भव्य स्थापना दिवस समारोह आयोजित करेगा। इस विशेष अवसर पर बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता गुलशन ग्रोवर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। उनकी उपस्थिति कार्यक्रम को और भी खास तथा प्रेरणादायक बनाएगी।

चेयरमैन ओ० एन० सिंह ने कहा कि समूह ने वर्षों में शिक्षा, सामाजिक उत्तरदायित्व और व्यक्तित्व निर्माण में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। सतत प्रयासों से कर्मा देवी समूह ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और छात्रों के सर्वांगीण विकास में अलग पहचान बनाई है।

कर्मा देवी समूह स्थापना दिवस 2025 समारोह जिले में ज्ञान, संस्कृति और प्रेरणा का अनूठा संगम बनने जा रहा है।

एसआईआर मुद्दे पर संसद के भीतर जोरदार बहस छिड़ी और आरोप- प्रत्यारोपों का आदान- प्रदान देशभर की सुर्खियाँ बना

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर पूरी दुनियाँ देख रही है कि भारतीय लोकसभा के शीतकालीन सत्र में एसआईआर के मुद्दे पर उत्पन्न भारी राजनीतिक घमासान भारतीय संसदीय इतिहास के उन क्षणों में से है,जब सत्ता और विपक्ष के बीच के मतभेद सिर्फ नीति या प्रावधानों पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक पारदर्शिता और संस्थागत उत्तरदायित्व के बुनियादी मानकों पर केंद्रित दिखाई देते हैं। इस बहस ने न केवल संसद के भीतर की कार्यवाही को प्रभावित किया,बल्कि पूरे देश में शासन,जवाबदेही और राजनीतिक नैरेटिव के स्वरूप को लेकर गहरी चर्चाओं को जन्म दिया।लोकसभा में उठे सवाल सिर्फ आरोप,प्रत्यारोप का हिस्सा नहीं थे, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए बढ़ती जन-अपेक्षाओं की प्रतिध्वनि भी थे। सरकार ने जहां इसे एक सुनियोजित राजनीतिक हमले के रूप में देखा,वहीं विपक्ष ने इसे जनता के अधिकार और संस्थागत जवाबदेही की सर्वोच्च परीक्षा बताया।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि एसआईआर से संबंधित विवाद की पृष्ठभूमि यह दर्शाती है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और जांच एजेंसियों कीभूमिका अब पहले से अधिक निगरानी और सार्वजनिक जांच के दायरे में है।विरोधी दलों ने प्रश्न उठाया कि एसआईआर की प्रकृति,उसकी प्रक्रिया,और उसके नतीजों को लेकर सरकार क्या छिपा रही है।उनकाआरोप था कि कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को सार्वजनिक डोमेन में नहीं लाया गया,जबकि सरकार का दावा था कि एसआईआर पूरी तरह वैधानिक,तथ्यात्मक और निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप तैयार की गई है। इसी मुद्दे पर संसद के भीतर जोरदार बहस छिड़ी और आरोप- प्रत्यारोपों का आदान-प्रदान देशभर की सुर्खियाँ बना।

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साथियों बात कर हम लोकसभा बहस में विपक्ष ने सरकार से कई सीधे, कठोर और प्रमाण- आधारित सवाल किए इसको समझने की करेंतो,उन्होंने एसआईआर तैयार किए जाने की प्रक्रिया, इसके उद्देश्य,इससे प्रभावित संस्थाओं और व्यक्तियों की भूमिका, तथा रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में देरी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा। विपक्ष का तर्क था कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि एसआईआर में किन पहलुओं की जांच की गईकिन निष्कर्षों पर पहुंचा गया और इससे आगे क्या कार्रवाई प्रस्तावित है।लोकतंत्र में शासन का नैतिक दायित्व है कि सभी महत्वपूर्ण निर्णय और रिपोर्टें सार्वजनिक जांच के दायरे में हों,क्योंकि शासन की वैधानिकता जनता के भरोसे पर आधारित होती है।सरकार ने विपक्ष के इन सवालों को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाते हुए कहा कि एसआईआर को लेकर सभी प्रक्रियाएंपारदर्शी और संवैधानिक ढांचे के अनुरूप हैं, तथा विपक्ष सिर्फ भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।इस विवाद का गहरापन दर्शाता है कि संसद में उठने वाले मुद्दे केवल सत्ता,विपक्ष के संघर्ष तक सीमित नहीं रहते,बल्कि वे व्यापक सामाजिक,राजनीतिक प्रभाव पैदा करते हैं।एसआईआर पर बहस के दौरान विपक्ष ने यह भी कहा कि यदि रिपोर्ट में कोई गंभीर तथ्य हैं,तो उन्हेंसार्वजनिक करना आवश्यक है,क्योंकि इससे लोकतंत्र की विश्वसनीयता बढ़ती है। सरकार ने इसके जवाब में कहा कि एसआईआर एक संवेदनशील दस्तावेज है, जिसमें कई राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलू शामिल हैं, जिन्हें सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा। यह तर्क सरकार द्वारा अक्सर उपयोग किया जाता है जब संवेदनशील दस्तावेजों की बात आती है, परन्तु विपक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को असुविधाजनक सवालों से बचने का औजार नहीं बनाया जाना चाहिए।

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साथियों बात अगर हमलोकसभा में एसआईआर पर बहस को समझने की करें तो स्पष्ट रूप से सामने आया कि एसआईआर विवाद केवल प्रशासनिक पारदर्शिता का मामला नहीं है,बल्कि यह राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत संवेदनशील मुद्दा है। विपक्ष का दावा था कि एसआईआर में जिन पहलुओं को सरकारी एजेंसियों द्वारा जांचा गया, वे सीधे तौर पर सत्ता प्रतिष्ठान और उससे जुड़ेव्यक्तियों से संबंधित हैं। इसलिए सरकार को इस रिपोर्ट के कुछ हिस्सों को दबाने में स्वार्थ हो सकता है।दूसरी ओरसरकार ने इसे बिल्कुल अस्वीकार करते हुए कहा कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए असत्यापित आरोप लगा रहा है और संस्थाओं की विश्वसनीयता को चोट पहुंचा रहा है। दोनों पक्षों की दलीलों ने बहस को और अधिक जटिल और तीक्ष्ण बना दिया।विपक्ष की रणनीति में यह भी शामिल था कि एसआईआर को एक व्यापक लोकतांत्रिक बहस से जोड़कर देखें और जनता के बीच यह संदेश दें कि सरकार संवेदनशील मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। उन्होंने यह तर्क दिया कि लोकसभा में प्रश्न पूछना उनका संवैधानिक अधिकार है और सरकार को उत्तर देने से मना नहीं किया जा सकता। एसआईआर के विशिष्ट बिंदुओं पर विपक्ष ने कई बार सदन में नियम 193 और 267 जैसे प्रावधानों का हवाला देते हुए विस्तृत चर्चा की मांग की।इसके विपरीत, सरकार ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य चर्चा नहीं, बल्कि व्यवधान पैदा करना है। यह टकराव लोकतांत्रिक संसदीय प्रक्रिया के उस पहलू को उजागर करता है, जिसमें राजनीतिक ध्रुवीकरण अक्सर बहस की गुणवत्ता को सटीक रूप से प्रभावित कर देता है।
साथियों बात अगर हमलोकसभा में यह विवाद अपने चरम पर पहुंचने की करें तो,सभापति को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा। सदन में शोर-शराबा, नारेबाजी और वॉकआउट जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हुईं।यह दृश्य भारतीय लोकतंत्र की उस जटिलता को दिखाता है जिसमें विविधताओं और मतभेदों के बावजूद एक साझा राजनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास निरंतर होता रहता है। एक ओर विपक्ष ने कहा कि सरकार जवाब से बच रही है,वहीं सरकार ने इसे राजनीतिक नौटंकी बताते हुए कहा कि वे हर प्रश्न का तथ्यात्मक उत्तर देने के लिए तैयार हैं, बशर्ते विपक्ष सदन की कार्यवाही मेंसहयोग करे। यह गतिरोध उस दुविधा को प्रकट करता है जिसमें लोकतांत्रिक संस्थाओं को पारदर्शिता और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना होता है।एसआईआर विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इससे संस्थागत स्वतंत्रता और जवाबदेही पर नई बहस को बल मिला। विपक्ष ने एजेंसियों की स्वतंत्रता पर प्रश्न उठाए और कहा कि यदि जांच एजेंसियां निष्पक्ष होंगी, तभी उनकी रिपोर्टों पर जनता भरोसा करेगी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के किसी हिस्से को गोपनीय बताकर रोकना लोकतंत्र में सूचना के अधिकार को कमजोर करता है। दूसरी तरफ, सरकार ने कहा कि एजेंसियां पूरी तरह स्वतंत्र हैं और किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप का सवाल ही नहीं उठता। सरकार ने यह भी कहा कि रिपोर्ट को सार्वजनिक न करने का कारण कानूनी प्रावधानों और राष्ट्रीय हितों से जुड़ा है,न कि राजनीतिक किन्ही वजहों से।
साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियाँ भी इस बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं इसको समझने की करें तो विश्व के कई विकसित लोकतंत्रों में विशेष जांच रिपोर्टों को लेकर संसद और सरकार के बीच टकराव सामान्य बात है।अमेरिकी कांग्रेस में म्यूएलर रिपोर्ट, ब्रिटेन में इंटरफेरेंस रिपोर्ट, और यूरोप में कई सुरक्षा एवं पारदर्शिता रिपोर्टों को लेकर हुए विवाद इसकी मिसाल हैं। इन उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि लोकतांत्रिक देशों में पारदर्शिता बनाम सुरक्षा का संतुलन एक जटिल चुनौती है। भारत में एसआईआर से जुड़ा विवाद भी इसी वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा है, जिसमें विपक्ष पारदर्शिता की मांग करता है और सरकार सुरक्षा एवंसंवेदनशीलता का मुद्दा उठाती है।लोकसभा में हुए हंगामे ने स्पष्ट कर दिया कि एसआईआर के मुद्दे पर राजनीतिक दल अपनी-अपनी विचारधारा, रणनीति और हितों के आधार पर पूरी तरहविभाजित हैं। यह विभाजन लोकतांत्रिक राजनीति की एक स्वाभाविक विशेषता है, लेकिन जब यह विभाजन संस्थागत कार्यप्रणाली को प्रभावित करने लगता है, तब यह चिंता का विषय बन जाता है।सदन में प्रश्न पूछना विपक्ष का अधिकार है, परन्तु सरकार का यह दावा भी निरर्थक नहीं कि चर्चा बाधित होने से जनता के मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। इसलिए संतुलित और रचनात्मक बहस लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।एसआईआर विवाद का एक सकारात्मक पक्ष यह है कि इससे जनता में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर जागरूकता बढ़ी है। सोशल मीडिया,टीवी डिबेट और नागरिक प्लेटफॉर्मों पर इस विषय पर व्यापक चर्चा हुई। लोग समझना चाहते हैं कि एसआईआर में आखिर ऐसा क्या हैजो इतना महत्वपूर्ण है। यह जनजिज्ञासा लोकतांत्रिक जागरूकता का संकेत है और राजनीति में पारदर्शिता की मांग को और मजबूती देती है। जनता अब चाहती है कि शासन के हर महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी समय रहते मिले और सत्ता गलियारों में होने वाली हर गतिविधि जनता की नजरों में रहे।
साथियों बातें अगर हम इसको राजनीतिक दृष्टि से देखें तो विपक्ष ने इस मुद्दे को आने वाले चुनावों के संदर्भ में भी इस्तेमाल करने की तैयारी दिखाई है। उनका संदेश है कि सरकार पारदर्शी नहीं है और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को छिपाती है। सरकार ने इस राजनीतिक आक्रमण का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष जनता को भ्रमित कर रहा है और असत्य फैलाने की कोशिश कर रहा है। यह राजनीतिक संघर्ष अगले महीनों में और तीखा हो सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष इस मुद्दे पर नैरेटिव तैयार कर रहे हैं संवैधानिक दृष्टि से यह प्रश्न सबसे महत्वपूर्ण है कि क्या एसआईआर जैसी रिपोर्टें सार्वजनिक होनी चाहिए या नहीं। सूचना का अधिकार अधिनियम, संसदीय परंपराएँ, और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रावधान,ये सभी अलग-अलग निष्कर्षों की ओर संकेत करते हैं। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि पारदर्शिता सर्वोच्च मूल्य है और सरकार को रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। अन्य विशेषज्ञ कहते हैं कि संवेदनशील सूचनाओं को सार्वजनिक करने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसलिए इस मुद्दे पर एक संतुलित और विवेकपूर्ण दृष्टिकोण आवश्यक है, जो लोकतांत्रिक जवाबदेही और सुरक्षा दोनों का ध्यान रखे संसदीय लोकतंत्र में ऐसे विवाद अक्सर सुधार के अवसर भी प्रदान करते हैं।एसआईआर विवाद ने यहआवश्यकता उजागर की है कि भविष्य में विशेष जांच रिपोर्टों की तैयारी, समीक्षा और प्रकाशन की प्रक्रिया पारदर्शी और स्पष्ट होनी चाहिए। इसके लिए अलग से वैधानिक ढांचा बनाया जा सकता है, जिसमें यह तय हो कि कौन-सी रिपोर्टें सार्वजनिक होंगी, किन हिस्सों को गोपनीय रखा जा सकता है, और किस प्रक्रिया के तहत इन रिपोर्टों की संसदीय समीक्षा होगी। इससे विवाद कम होंगे और जनता का भरोसा बढ़ेगा।
अतःअगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि लोकसभा में एसआईआर पर हुई रार सत्ता और विपक्ष के बीच एक साधारण राजनीतिक संघर्ष से कहीं अधिक गहराई रखती है। यह घटना भारतीय लोकतंत्र में जवाबदेही, पारदर्शिता, संस्थागत स्वतंत्रता और शासन की विश्वसनीयता के व्यापक प्रश्नों को उजागर करती है। विपक्ष के सवाल चाहे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हों या वास्तविक चिंता का परिणाम, लेकिन इसने जनता को यह सोचने पर विवश किया है कि लोकतंत्र में सूचना और पारदर्शिता का महत्व कितना बड़ा है।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

उत्कृष्ट कार्य करने वाले 210 बीएलओ व सुपरवाइजरों को डीएम ने सम्मानित किया, बांसडीह प्रथम व सिकंदरपुर द्वितीय स्थान पर रहा

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 (SIR-2026) के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) और सुपरवाइजरों को जिला प्रशासन ने सम्मानित किया। जिले में मतदाता पुनरीक्षण कार्य को समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराने में अहम भूमिका निभाने वाले कुल 210 अधिकारियों को बुधवार को गंगा बहुद्देशीय सभागार में आयोजित समारोह में सम्मानित किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने की। उन्होंने सातों विधानसभा क्षेत्रों—357 बेल्थरारोड, 358 रसड़ा, 359 सिकंदरपुर, 360 फेफना, 361 बलिया नगर, 362 बांसडीह और 363 बैरिया—से चुने गए 175 बीएलओ और 35 सुपरवाइजरों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

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जिलाधिकारी ने कहा कि सभी बीएलओ और सुपरवाइजरों ने समर्पण और जिम्मेदारी के साथ SIR-2026 के लक्ष्यों को पूरा किया, जिसके परिणामस्वरूप जिले ने 100 प्रतिशत सफलता दर हासिल की। उन्होंने विशेष रूप से उन विधानसभा क्षेत्रों का उल्लेख किया जिन्होंने पुनरीक्षण कार्य में उत्कृष्टता दिखाई।

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बांसडीह विधानसभा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया सिकंदरपुर विधानसभा द्वितीय स्थान पर रही

डीएम सिंह ने कहा कि इन क्षेत्रों के अधिकारियों द्वारा किया गया कार्य अन्य विधानसभा क्षेत्रों के लिए प्रेरणादायी है और जिले की चुनावी तैयारियों को नई मजबूती देता है।समारोह में एडीएम अनिल कुमार, एसडीएम सदर, नायब तहसीलदार अख्तर, शशिकांत सहित विभिन्न प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने संयुक्त रूप से बीएलओ-सुपरवाइजरों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि चुनाव जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण कार्य में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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कार्यक्रम का समापन जिलाधिकारी द्वारा सभी सम्मानित कर्मचारियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ हुआ।

फर्जी आइएस बनकर ठगी करने वाला गिरोह गिरफ्तार

यूपी बिहार समेत चार राज्यों में जाल फैलाने वाले नेटवर्क का भंडाफोड़

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
पुलिस लाइन वाइट हाउस सभागार में पुलिस अधीक्षक नगर अभिनव त्यागी ने प्रेस वार्ता कर बताया कि फर्जी IAS अधिकारी बनकर करोड़ों की ठगी करने वाले तीन आरोपियों को थाना गुलरिहा पुलिस ने क्राइम ब्रांच, SOG, सर्विलांस व साइबर टीम की मदद से गिरफ्तार किया है।
इससे पहले GRP गोरखपुर ने चुनाव के दौरान 99.9 लाख रुपए बरामद किए थे, जो इसी नेटवर्क से जुड़ा मामला था।

फर्जी IAS का नेटवर्क – UP, बिहार, झारखंड और MP तक फैला

गोरखपुर में पकड़ा गया मुख्य आरोपी ललित किशोर, जो खुद को “IAS गौरव कुमार” बताता था, ने सरकारी कॉन्ट्रैक्ट, नौकरी, और शादी तय कराने के नाम पर लोगों से भारी ठगी की। पुलिस के अनुसार, अब तक 40 से ज्यादा लोग शिकार हुए, जिनमें सबसे अधिक मामले बिहार से सामने आए हैं।

पुलिस को शक तब हुआ जब एक ठेकेदार को दिया गया सरकारी टेंडर का AI से बनाया गया फर्जी कॉन्ट्रैक्ट पेपर मिला। जांच में पता चला कि दस्तावेज में दर्ज कोई भी अधिकारी वास्तविक नहीं था।

चुनाव के दौरान GRP ने पकड़ा था 99.9 लाख रुपया

7 नवंबर को वैशाली एक्सप्रेस की चेकिंग के दौरान एक युवक मुकुंद माधव के बैग से 500-500 के नोटों की गड्डियां मिलीं। रकम 99.9 लाख रुपए पाई गई। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि यह पैसा एक फर्जी IAS अधिकारी को नौकरी के बदले रिश्वत के रूप में दिया गया था। बाद में जांच में यह रकम ललित किशोर उर्फ IAS गौरव से जुड़ी पाई गई।

गोरखपुर पुलिस ने बेनकाब किया पूरा गिरोह

थाना गुलरिहा पर वादी द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार, अभियुक्तों ने कूटरचित कागजात बनाकर लगभग दो करोड़ रुपए ठगे थे और पैसा मांगने पर धमकी भी दी। मुकदमा पंजीकृत होते ही पुलिस ने टीम बनाकर कार्रवाई शुरू की।
ललित किशोर निवासी सीतामढ़ी, बिहार — मुख्य आरोपी, फर्जी IAS के रूप में सक्रिय।
अभिषेक कुमार निवासी रामनगरा, सीतामढ़ी — फर्जी दस्तावेज बनाने में सहायक।
परमानन्द गुप्ता निवासी लच्छीपुर, गोरखपुर — AI पेपर व कूटरचित दस्तावेज तैयार करने में शामिल।

आरोपियों की चालबाजी – गनर, सफेद कार पर झंडा, फर्जी ID कार्ड

ललित किशोर ने रौब जमाने के लिए 8 निजी गनर, सफेद कार पर भारत का झंडा, और फर्जी IAS ID कार्ड व नेम प्लेट रखी थीं।
अभिषेक कुमार और परमानन्द गुप्ता AI और अन्य माध्यमों से फर्जी टेंडर पेपर, ID कार्ड, दस्तावेज बनाकर ललित को देते थे, जिन्हें वह पीड़ितों को भेजता था।
इन दस्तावेजों के आधार पर लोगों से नकद, ज्वैलरी और ऑनलाइन भुगतान की ठगी की जाती थी।
गिरफ्तार आरोपियों से 4,15,500 नकद ज्वैलरी (झुमके, अंगूठियां, चैन, मंगलसूत्र, पायल आदि)
लैपटॉप, पासपोर्ट, ATM कार्ड
फर्जी नेम प्लेट, ID कार्ड, पट्टे, फाइलें चेक बुक व पासबुक

प्र0नि0 विजय प्रताप सिंह, थाना गुलरिहा उ0नि0 राजमंगल सिंह, SOG प्रभारी उ0नि0 छोटेलाल राय, सर्विलांस उ0नि0 उपेन्द्र सिंह, साइबर सेल व अन्य पुलिस कर्मचारी
पुलिस इस नेटवर्क के अन्य तारों को जोड़ने के लिए बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश पुलिस के साथ समन्वय कर रही है। आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं। प्रेस वार्ता के दौरान सीओ गोरखनाथ रवि सिंह भी रहे मौजूद।

राष्ट्रीय लोक अदालत बलिया 2024: कम खर्च में त्वरित न्याय के लिए जिला न्यायालय की बड़ी पहल

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।
उ.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलिया द्वारा आगामी 13 दिसंबर, शनिवार को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए जागरूकता अभियान की शुरुआत कर दी गई है। बुधवार को जिला न्यायालय परिसर से राष्ट्रीय लोक अदालत प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

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माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री अनिल कुमार झा ने प्रचार वाहन को रवाना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय व्यवस्था का वह सशक्त मंच है, जहां त्वरित, सुलभ और कम खर्च में न्याय सुनिश्चित किया जाता है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में निस्तारित मामलों पर कोई अपील नहीं होती, जिससे समय और धन दोनों की बचत होती है तथा इसका प्रभाव नियमित न्यायालय के निर्णय के समान माना जाता है।

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प्रचार वाहन का संचालन अपर जनपद न्यायाधीश/सचिव हरीश कुमार ने किया, जो दीवानी न्यायालय परिसर से रवाना होकर जिले की सभी तहसीलों में भ्रमण करेगा। इस दौरान वाहन के माध्यम से लोगों को बताया जाएगा कि वे जुर्माने से दंडनीय मामलें, पारिवारिक विवाद, भूमि संबंधी मामले, बिजली–टेलीफोन बिल विवाद, टैक्स विवाद, चेक बाउंस और सुलह योग्य फौजदारी मामलों का निस्तारण राष्ट्रीय लोक अदालत में सरलता से कर सकते हैं।

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कार्यक्रम में सभी अपर जिला जज, न्यायिक मजिस्ट्रेट, अधिवक्ता, न्यायालय कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी, पैरालीगल वॉलंटियर और बड़ी संख्या में वादकारी उपस्थित रहे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने जनपदवासियों से अपील की है कि वे अपने लंबित मामलों के त्वरित समाधान और न्याय तक आसान पहुंच के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर बोले—“मेरी हत्या कराई जा सकती है”

लखनऊ/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर गिरफ्तारी केस एक बार फिर सुर्खियों में है। मंगलवार को देवरिया पुलिस ने पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को हिरासत में लेकर कोर्ट में पेश किया। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। ठाकुर ने कहा, “मेरी हत्या कराई जा सकती है, और इसके पीछे योगी आदित्यनाथ हैं। मेरे खिलाफ की जा रही हर कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है।”1999 की जमीन खरीद से शुरू हुआ विवादजानकारी के अनुसार, वर्ष 1999 में अमिताभ ठाकुर देवरिया में SP थे, तब उनकी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम इंडस्ट्रियल एरिया में B2 प्लॉट खरीदा गया था। लीज संबंधी तकनीकी त्रुटियों और संचालन में कठिनाई के कारण यह प्लॉट बाद में सरेंडर कर दिया गया। नूतन ठाकुर ने फोन पर बताया कि इंडस्ट्रियल क्षेत्र में प्लॉट संचालन योग्य नहीं था, इसलिए इसे छोड़ा गया।3 महीने पहले हुआ मुकदमा—अब देवरिया में ट्रांसफरकरीब तीन महीने पहले संजय शर्मा नामक व्यक्ति ने लखनऊ के तालकटोरा थाने में मुकदमा दर्ज कराया, जिसे बाद में देवरिया ट्रांसफर कर दिया गया। नूतन ठाकुर का कहना है कि, “जब सरकार ताकतवर होती है तो वह लोगों को ऐसे ही परेशान करती है। यह पूरा मामला उत्पीड़न का है।”कोर्ट में पेशी के दौरान बड़ा आरोपकोर्ट में पेश किए जाने से पहले अमिताभ ठाकुर ने मीडिया के सामने फिर कहा—“मेरी जान को खतरा है। सब कुछ योगी आदित्यनाथ द्वारा कराया जा रहा है। मेरे खिलाफ साजिश रची जा रही है।”इस मामले ने प्रदेश की राजनीति व पुलिस प्रशासन दोनों में हलचल बढ़ा दी है। पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर गिरफ्तारी केस तेजी से राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन चुका है।

लार भाटपार-रानी मार्ग पर लूट की कोशिश,फायरिंग में बची जान

देवरिया/लार(राष्ट्र की परम्परा) लार भाटपार रानी रामनगर के समीप बुधवार के करीब दिन में दो बजे एक बड़ी वारदात टल गई।राउतपार रघेन गाँव के रहने वाले धीरेंद्र यादव (पुत्र – बाबू नंदन यादव)अपने साथी प्रकाश यादव के साथ बाइक से घर लौट रहे थे। दोनों लार के एटीएम से पैसा निकालकर वापस अपने गाँव जा रहे थे।इसी दौरान बाइक से आए तीन अज्ञात बदमाशों ने इनका पीछा किया।घायलों ने बताया कि बदमाशों ने पहले बिहार जाने का रास्ता पूछा और उसके बाद अचानक बाइक रोककर लूटपाट की कोशिश शुरू कर दी।पीड़ितों के अनुसार,बदमाशों ने पहले पिस्टल सटाकर पैसे और चैन की मांग की।विरोध करने पर बदमाशों ने फायरिंग करने की कोशिश की,लेकिन किस्मत से पिस्टल में गोली फंस गई, जिससे बड़ी घटना टल गई।

इस दौरान धीरेंद्र और प्रकाश ने किसी तरह खुद को बचाया और शोर मचाया,जिसके बाद हमलावर फरार हो गए।इस दौरान बदमाशों ने धीरेंद्र के गले से चैन छीनने की कोशिश की और आधी चैन तोड़कर लेकर फरार हो गए।विरोध करने पर उन्हें चोट भी आई।घटना की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है।इलाके में दहशत का माहौल है और पुलिस बदमाशों की तलाश तेज कर दी

मज़दूर नहीं आए तो सड़क निर्माण में खुद जुटे प्रधान पति, ग्रामीणों ने की सराहना

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) । ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम हडुवा उर्फ़ औरंगाबाद में सड़क निर्माण कार्य इन दिनों तेजी से चल रहा है, लेकिन बुधवार को मजदूरों की कमी के कारण काम रुकने की नौबत आ गई। स्थिति को देखते हुए ग्राम प्रधान प्रियंका देवी के पति विनोद कुमार ने देरी न होने देने का फैसला लेते हुए खुद फावड़ा उठा लिया और राजमिस्त्री के साथ निर्माण कार्य में जुट गए।करीब दो सौ मीटर लंबे सड़क निर्माण कार्य में मजदूरों की अनुपस्थिति से काम बाधित हो रहा था। विनोद कुमार ने सड़क पर आवागमन लंबे समय तक प्रभावित न हो, इस सोच के साथ रेड़ी और बालू की सफाई से लेकर अन्य कार्यों में पूरी तरह मजदूर की तरह हाथ बंटाया। इस दौरान गांव के एक व्यक्ति ने उनका वीडियो मोबाइल में कैद कर लिया, जो अब ग्रामीणों में चर्चा का विषय बना हुआ है।हालांकि उनके इस प्रयास का कुछ परिवारजन ने विरोध भी जताया, लेकिन गांव के विकास और समय पर कार्य पूर्ण कराने के संकल्प के चलते विनोद कुमार काम में लगे रहे। ग्रामीणों ने उनकी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जिम्मेदारी का ऐसा उदाहरण कम ही देखने को मिलता है।

बड़ा खुलासा: पाँच लाख से अधिक राशन कार्डधारक अपात्र, आयकर डाटा मिलान में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश में राशन कार्डों की बड़े पैमाने पर पड़ताल के दौरान चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। आयकर विभाग के डाटा मिलान में पता चला है कि राज्य में निर्धारित आय सीमा से अधिक आय वाले 5 लाख से ज्यादा राशन कार्डधारक अपात्र हैं। खाद्य विभाग ने अब तक 16.92 लाख कार्डधारकों का विवरण आयकर डाटा के साथ मिलान कराया है।

55% कार्डधारक अपात्र पाए गए

पूर्ति निरीक्षकों द्वारा की गई जांच में 910378 कार्डधारकों की अब तक पुष्टि की गई है, जिनमें से 503088 लोग अपात्र पाए गए हैं। यानी जांचे गए कार्डों में 55% कार्डधारक नियमों के दायरे में नहीं आते।

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किसे मिल सकता है राशन कार्ड का लाभ?

• शहरी क्षेत्रों में वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम होनी चाहिए

• ग्रामीण क्षेत्रों में वार्षिक आय 2 लाख रुपये से कम होनी चाहिए

लेकिन जांच में यह सामने आया कि—

• ग्रामीण क्षेत्रों में 923013 कार्डधारकों की आय 2 लाख से अधिक थी

• शहरी क्षेत्रों में 769361 कार्डधारक 3 लाख से अधिक की आय वर्ग में पाए गए

नाम काटने की प्रक्रिया शुरू

सूत्रों के अनुसार, अपात्र पाए गए कार्डधारकों की सूची खाद्य विभाग को भेज दी गई है और नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
यदि बाकी बचे डाटा में भी इसी दर से अपात्र लोग मिलते हैं, तो कुल संख्या सवा नौ लाख से अधिक पहुंच सकती है।

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बीत गई प्रधानी, फिर भी साबरुन को नहीं मिला आवास: सरकारी दावों की सच्चाई दिखाती लक्ष्मीपुर खास की हकीकत

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। घुघली ब्लॉक के सिसवा मुंशी के पास स्थित पंचायत सभा लक्ष्मीपुर खास में सरकारी योजनाओं की असल तस्वीर एक गरीब परिवार की मजबूरी में साफ दिखाई देती है। यहां रहने वाली साबरुन पत्नी रईस वर्षों से सरकारी मदद की राह देख रही हैं, लेकिन आज तक साबरुन को नहीं मिला आवास। गरीबी और बेबसी के बीच जीवन काट रही यह महिला अपने छोटे बेटे के साथ फूस की मड़ई को ही घर मानने को विवश है।

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साबरुन का कहना है कि आवास के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना व अन्य सरकारी योजनाओं के अंतर्गत कई बार आवेदन किया, ग्राम प्रधान से लेकर ब्लॉक और जिला स्तर तक अधिकारियों के चक्कर लगाए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। पूरा प्रधानी कार्यकाल बीत गया, पर साबरुन को नहीं मिला आवास, न ही उनका नाम सूची में जोड़ा गया।

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फूस की कच्ची मड़ई में रहकर यह परिवार बारिश, ठंड और गर्मी जैसे हर मौसम से लड़ने को मजबूर है। खाने-पीने से लेकर पहनने-ओढ़ने तक की दैनिक जरूरतें पूरा करना भी इनके लिए एक बड़ी चुनौती है।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में कई ऐसी महिलाएं और गरीब परिवार हैं जिन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला, जबकि कई अपात्र लोग लाभान्वित हो चुके हैं। यह स्थिति सरकार के “हर गरीब को पक्का घर” जैसे दावों पर गंभीर सवाल खड़ा करती है।

ग्रामीणों व सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि साबरुन को तुरंत आवास योजना का लाभ दिलाया जाए, ताकि वह और उसका परिवार सम्मानजनक जीवन जी सके और योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके।

मालती देवी स्मृति दिवस पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सेवा विभाग देवरिया द्वारा निःशुल्क बीएमडी चिकित्सा शिविर, सैकड़ों लोगों ने लिया लाभ

सलेमपुर/देवरिया।(राष्ट्र की परम्परा) मालती देवी स्मृति दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सेवा विभाग देवरिया की ओर से निःशुल्क बीएमडी (Bone Mineral Density) चिकित्सकीय जांच कैंप का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्घाटन विद्या अकादमी स्कूल के प्रबंधक पदम गुप्ता ने किया। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े इस जनहितकारी प्रयास की सराहना की।

कैंप में सैकड़ों लोगों ने पहुंचकर अपनी बीएमडी जांच कराई और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श प्राप्त किया। समाजहित में आयोजित इस शिविर में स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

शिविर में डॉ. मदन मोहन तिवारी, डॉ. निधि तिवारी, डॉ. भरत तिवारी और डॉ. अभ्युदय तिवारी सहित कई विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मरीजों की जांच की। जांच पूर्ण होने के बाद चिकित्सकों द्वारा मरीजों को आवश्यक परामर्श के साथ निःशुल्क दवाएं भी उपलब्ध कराई गईं।

कैंप के दौरान लोगों को हड्डियों से जुड़े रोगों व बीएमडी जांच के महत्व से अवगत कराया गया।
वार्ता के दौरान डॉ. मदन मोहन तिवारी ने बताया कि बीएमडी जांच शरीर में कैल्शियम व अन्य खनिजों की मात्रा मापती है, जिससे हड्डियों की घनत्व, मोटाई और मजबूती का पता चलता है। यह जांच ऑस्टियोपोरोसिस तथा फ्रैक्चर के जोखिम का पता लगाने के लिए बेहद उपयोगी है। नियमित जांच से लोग हड्डियों की बीमारियों से समय रहते बचाव कर सकते हैं।

स्थानीय लोगों ने इस स्वास्थ्य शिविर के लिए सेवा विभाग देवरिया और आयोजकों का आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण व आमजन के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं।

TRE-3 पेपर लीक केस में बड़ी सफलता, संजय प्रभात की गिरफ्तारी से गिरोह पर कसा शिकंजा

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क )BPSC TRE-3 पेपर लीक मामला: इओयू की बड़ी कार्रवाई, कुख्यात संजीव मुखिया गिरोह का सदस्य संजय कुमार प्रभात गिरफ्तार बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं को प्रभावित करने वाले संगठित परीक्षा माफियाओं के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EoU) का अभियान लगातार सख्त होता जा रहा है। इसी क्रम में EoU ने कुख्यात संजीव मुखिया गिरोह के सक्रिय सदस्य संजय कुमार प्रभात को पटना के गोला रोड क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। यह BPSC TRE-3 पेपर लीक मामला (आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या—06/2024) में लंबे समय से फरार था और EoU की वांछित सूची में शामिल था।

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शेखपुरा जिले के शेखोपुर बाजार निवासी संजय कुमार प्रभात की गिरफ्तारी, सिपाही चालक भर्ती परीक्षा (10 दिसंबर) और प्रवर्तन अवर निरीक्षक—ESI परीक्षा (14 दिसंबर) से पहले चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत हुई। अधिकारियों के अनुसार संजय प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक कराने और अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूलने में शामिल था।

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पूछताछ में उसने कबूल किया कि BPSC TRE-3 पेपर लीक मामले में वह अभ्यर्थियों से 1 लाख रुपये प्रति कैंडिडेट तक वसूलता था। साथ ही आने वाली परीक्षाओं के लिए भी एडमिट कार्ड, पहचान पत्र और मोटी रकम इकट्ठा कर रहा था। उसका नेटवर्क बिहार के अलावा तेलंगाना EAMCET 2016 और AIPMT उत्तराखंड 2016 पेपर लीक मामलों से भी जुड़ा हुआ है, जिनकी जांच संबंधित राज्यों की एजेंसियों द्वारा की जा रही है।

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इस मामले में अब तक 289 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। EoU बाकी बचे सदस्यों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस संगठित गिरोह की कमर टूटने से आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।

मुलाक़ात पर रोक और पानी की बौछार: इमरान खान परिवार ने उठाए गंभीर सवाल

इस्लामाबाद (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ कार्रवाई लगातार विवादों को जन्म दे रही है। Imran Khan Adiala Jail Issue एक बार फिर सुर्खियों में है, क्योंकि अडियाला जेल प्रशासन ने उनकी बहनों और समर्थकों पर कथित तौर पर सर्द रात में बर्फीले पानी की बौछार कर दी। इमरान खान की बहन अलीमा खान का आरोप है कि उन्हें अपने भाई से मिलने नहीं दिया जा रहा और परिवार के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है।

मंगलवार देर रात अडियाला जेल के बाहर इमरान खान के परिवार और पीटीआई समर्थकों ने उनके हालात को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू किया। इमरान की बहन अलीमा ने बताया कि “हम पिछले 8 महीनों से हर मंगलवार यहां आते हैं, लेकिन हमें मुलाक़ात की अनुमति नहीं मिलती। खान को अवैध रूप से अलग-थलग रखा गया है और उनसे मिलने वालों को रोका जा रहा है।” उनके बयान से परिवार की बढ़ती बेचैनी और जेल प्रशासन की सख्ती पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों ने अचानक वाटर कैनन चलाते हुए महिलाओं सहित सभी प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की। सर्द मौसम में पानी की बौछार से कई लोग घायल भी हुए, जिससे पाकिस्तानी सरकार की कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आलोचना तेज हो गई है। पीटीआई का कहना है कि इमरान खान को राजनीतिक प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें मानवाधिकारों के विरुद्ध परिस्थितियों में रखा गया है।

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इमरान खान अगस्त 2023 से अडियाला जेल में बंद हैं और परिवार का दावा है कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। लगातार बढ़ते विरोध के बीच Imran Khan Adiala Jail Issue अब पाकिस्तान की राजनीति में एक बड़ा विवाद बन गया है।

चचेरे भाई ने तीन मासूमों पर किया हमला, दो की मौत – गांव में कोहराम

पुर्णिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क )बिहार के पूर्णिया जिले के रौटा थाना क्षेत्र के डिंगोज गांव से मंगलवार देर रात एक ऐसी वारदात सामने आई जिसने पूरे इलाके को दहलाकर रख दिया। नशे के आदी चचेरे भाई अरबाज ने अपने दोस्त मो. हसनैन के साथ घर में घुसकर सो रहे तीन मासूम बच्चों पर बेरहमी से हमला कर दिया। इस दर्दनाक हमले में 5 वर्षीय इनायत और 3 वर्षीय गुलनाज की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि डेढ़ साल की कुलसुम गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में जिंदगी से जूझ रही है।

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सूत्रों के अनुसार, आरोपी रात में चुपके से उस कमरे में घुसा जहाँ तीनों बच्चे सो रहे थे। आरोप है कि अरबाज ने पहले हैंडपंप के लोहे के पाइप से बच्चों के सिर पर कई वार किए, जिससे कमरा खून से सन गया। इसके बाद उसने चाकू से वार करते हुए बच्चों की जीभ तक काट दी, जो घटना को और भी भयावह बनाता है। तीसरी बच्ची का गला घोंटने की कोशिश के दौरान घर वालों के जाग जाने से दोनों आरोपी मौके से भाग खड़े हुए।

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परिजनों ने बताया कि अरबाज एक वर्ष पहले परिवार में हुए विवाद को लेकर नाराज चल रहा था और उसी रंजिश का बदला लेने के लिए उसने मासूमों को निशाना बनाया। बताया गया कि हमले से कुछ घंटे पहले आरोपी गांव में किसी से झगड़ा कर रहा था और रोकने पर बौखला गया था।

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घटना की सूचना मिलते ही रौटा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और सख्त कार्रवाई करते हुए अरबाज व उसके साथी हसनैन को गिरफ्तार कर लिया। दोनों से पूछताछ जारी है। पुलिस ने घटनास्थल से हथियार, खून से सने कपड़े सहित कई अहम सबूत बरामद किए हैं।
गांव में मातम पसरा है और परिवार आरोपी को फांसी देने की मांग कर रहा है।

जनपद देवरिया में मॉर्निंग वॉकर चेकिंग अभियान, पुलिस ने आमजन को दिया सुरक्षा का भरोस

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में जनपद पुलिस ने बुधवार की सुबह मॉर्निंग वॉकर चेकिंग अभियान चलाते हुए शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया। अभियान सुबह 5 बजे से 8 बजे तक सभी थानों के अंतर्गत एक साथ संचालित हुआ।अभियान के दौरान सभी थाना प्रभारी/थानाध्यक्षों ने मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों से सीधे संवाद कर उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया। लोगों ने भी पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि मॉर्निंग वॉक के समय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उनका विश्वास और मजबूत हुआ है।संदिग्धों व वाहनों की सघन चेकिंग पुलिस टीमों ने मुख्य मार्गों, पार्कों, घनी आबादी वाले इलाकों और संवेदनशील स्थानों पर संदिग्ध व्यक्तियों, वाहनों और गतिविधियों की सघन चेकिंग की। इस दौरान—

  • चोरी की गाड़ियों की तलाश
  • तीन सवारी के खिलाफ कार्रवाई
  • मोडिफाइड साइलेंसर वाले दुपहिया वाहनों का चलान
  • नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर रोक- अवैध असलहा व मादक पदार्थ की तलाशी जैसी कार्रवाइयों पर विशेष ध्यान दिया गया।सामुदायिक स्तर पर विवाद निपटाने का प्रयास पुलिस अधिकारियों ने छोटे-मोटे स्थानीय विवादों को सामुदायिक समाधान के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया। इस दौरान “मित्र पुलिसिंग” की भावना पर जोर देते हुए लोगों को बताया गया कि पुलिस उनकी सुरक्षा, विश्वास और सुविधा के लिए निरंतर प्रयत्नशील है।20 स्थानों पर चेकिंग, 310 व्यक्ति व 177 वाहन जांचे गए अभियान के दौरान जनपदभर में कुल 20 स्थानों पर चेकिंग की गई, जिसमें 310 व्यक्तियों तथा177 वाहनों की जांच की गई।

पुलिस अधिकारियों ने लोगों को मॉर्निंग वॉकर अभियान के महत्व और उद्देश्यों से अवगत कराया तथा जागरूकता बढ़ाई।
आगे भी जारी रहेंगे ऐसे अभियान
जनपदीय पुलिस ने स्पष्ट किया कि शांति, सुरक्षा व जनविश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसे अभियान आगे भी निरंतर चलते रहेंगे।