Saturday, June 27, 2026
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‘लोकतंत्र को तमाशा बना दिया’, संसद में अमित शाह के बयान पर भड़के प्रियांक खरगे

भाषा और चेयर की चुप्पी पर उठाए सवाल, भाजपा-आरएसएस पर साधा निशाना

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच हुई तीखी बहस के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खरगे ने अमित शाह के संसद में कथित अपशब्दों के इस्तेमाल को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए सरकार पर जवाबदेही की कमी का आरोप लगाया।

प्रियांक खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि कहा जाता है, “भाषा व्यक्ति के नजरिए को दर्शाती है।” उन्होंने कहा कि संसद में इस्तेमाल की गई भाषा न सिर्फ सोच को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि मौजूदा सरकार में जिम्मेदारी और जवाबदेही कितनी कमजोर हो चुकी है।

चेयर की चुप्पी पर सवाल

प्रियांक खरगे ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चिंताजनक चेयर की प्रतिक्रिया रही—“न कोई फटकार, न कोई जवाबदेही। सिर्फ मुस्कान और चुप्पी।” उन्होंने आरोप लगाया कि न संसद का सम्मान रखा गया और न ही संविधान की गरिमा।

भाजपा-आरएसएस पर सीधा हमला

कांग्रेस नेता ने भाजपा-आरएसएस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने लोकतंत्र को गंभीर व्यवस्था से एक तमाशे में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि संसद जैसे सर्वोच्च मंच पर इस तरह की भाषा लोकतंत्र के लिए खतरे का संकेत है।

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संसद में शाह-राहुल की बहस का पूरा मामला

यह विवाद 10 दिसंबर को तब भड़का, जब संसद में अमित शाह और राहुल गांधी के बीच ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर बहस तेज हो गई। राहुल गांधी ने गृह मंत्री को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए आरोपों पर खुली बहस की चुनौती दी। जवाब में अमित शाह ने कहा कि संसद विपक्ष की मर्जी से नहीं चलेगी और वे सभी सवालों का जवाब तय क्रम में देंगे।

वोटर लिस्ट और चुनाव आयोग पर आरोप-प्रत्यारोप

अमित शाह ने विपक्ष पर वोटर लिस्ट सुधार (SIR) प्रक्रिया का विरोध करने का आरोप लगाया और कहा कि यही प्रक्रिया मतदाता सूची को सही करती है। उन्होंने विपक्ष की हार तय बताते हुए चुनाव आयोग पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप खारिज किया।

वहीं राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग को पूरी सुरक्षा देने और 19 लाख फर्जी वोटर्स के मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने गृह मंत्री से अपनी तीन प्रेस वार्ताओं में उठाए गए मुद्दों पर संसद में सीधी बहस करने की मांग दोहराई।

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पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार में पुलिस प्रशासन ने जनता से सीधा संवाद स्थापित करने की दिशा में एक अहम और सराहनीय कदम उठाया है। पुलिस और आम नागरिकों के बीच दूरी कम करने के उद्देश्य से अब राज्य में एसएसपी और एसपी स्तर के अधिकारी थानों में नियमित रूप से जनता दरबार लगाएंगे। सेंट्रल रेंज के आईजी जितेंद्र राणा की ओर से इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी कर दिए गए हैं। आदेश के तहत सभी एसएसपी और एसपी को सप्ताह में कम से कम दो दिन थानों में जनता दरबार आयोजित करना अनिवार्य होगा।

इसके साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को थानों का निरीक्षण करने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि जमीनी हकीकत की समीक्षा हो सके। आदेश मिलते ही पटना के पूर्वी और ग्रामीण एसपी ने अपने-अपने जनता दरबार का शेड्यूल जारी कर दिया है। पूर्वी एसपी परिचय कुमार 18 दिसंबर को भगवानगंज थाना, 20 दिसंबर को सुल्तानगंज, 23 दिसंबर को चित्रगुप्त नगर, 27 दिसंबर को पिपरा और 30 दिसंबर को परसा बाजार थाना में जनता की समस्याएं सुनेंगे। उन्होंने संबंधित थाना क्षेत्रों के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है।

वहीं ग्रामीण एसपी अपराजित लोहान 15 दिसंबर को बाढ़ और 18 दिसंबर को फतुहा थाना में जनता दरबार लगाएंगे। जानकारी के अनुसार, जनता दरबार और निरीक्षण के बाद एसपी अपनी विस्तृत रिपोर्ट आईजी कार्यालय को सौंपेंगे। किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस प्रशासन के इस कदम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल आम लोगों का पुलिस पर विश्वास बढ़ेगा, बल्कि उन्हें अपनी शिकायतों के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर भी नहीं काटने पड़ेंगे। अधिकारियों के सीधे थानों में पहुंचने से लंबित मामलों में तेजी आएगी और अपराध नियंत्रण को लेकर जनता से मिलने वाला फीडबैक भी बेहद उपयोगी साबित होगा।

हजार करोड़ की साइबर ठगी का ‘चीन कनेक्शन’, 111 फर्जी कंपनियों का खुलासा

सीबीआई चार्जशीट में अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का बड़ा पर्दाफाश

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें चार चीनी नागरिक भी शामिल हैं। इसके साथ ही 58 कंपनियों को भी आरोपी बनाया गया है, जो कथित तौर पर शेल (मुखौटा) कंपनियों के जरिए एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की ऑनलाइन ठगी में शामिल थीं।

सीबीआई के अनुसार, यह संगठित साइबर ठगी नेटवर्क 2020 में कोरोना महामारी के दौरान सक्रिय हुआ। आरोप है कि इस गिरोह ने 111 फर्जी कंपनियां बनाकर म्यूल खातों के जरिये करीब 1,000 करोड़ रुपये का लेन-देन किया। जांच में सामने आया कि एक ही बैंक खाते में कम समय में 152 करोड़ रुपये तक की रकम जमा हुई।

कैसे होती थी ठगी

जांच एजेंसी ने बताया कि यह नेटवर्क ऑनलाइन निवेश योजनाओं, फर्जी लोन ऑफर, पोंजी स्कीम, मल्टी-लेवल मार्केटिंग, नकली पार्ट-टाइम जॉब और ऑनलाइन गेमिंग के जरिए लोगों को ठगता था। इसके लिए गूगल विज्ञापन, बल्क एसएमएस, सिम-बॉक्स, क्लाउड सिस्टम, फिनटेक प्लेटफॉर्म और यूपीआई/पेमेंट गेटवे का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया।

111 शेल कंपनियों का जाल

सीबीआई के मुताबिक, शेल कंपनियां फर्जी निदेशकों, झूठे पते, नकली दस्तावेज और गलत कारोबारी उद्देश्यों के आधार पर बनाई गई थीं। इन कंपनियों के नाम पर बैंक खाते और पेमेंट गेटवे अकाउंट खोलकर अपराध से अर्जित धन को अलग-अलग खातों में घुमाया गया, ताकि असली स्रोत छिपाया जा सके।

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चीनी हैंडलर्स का रोल

चार चीनी नागरिक—जोउ यी, हुआन लिउ, वेइजियान लिउ और गुआनहुआ—इस नेटवर्क को निर्देशित कर रहे थे। उनके भारतीय सहयोगियों ने अवैध रूप से लोगों के पहचान दस्तावेज जुटाकर शेल कंपनियों और म्यूल खातों का नेटवर्क तैयार किया। जांच में यह भी सामने आया कि विदेशी नागरिक अब भी इस रैकेट को नियंत्रित कर रहे हैं। दो भारतीय आरोपियों की यूपीआई आईडी अगस्त 2025 तक विदेशी लोकेशन से सक्रिय पाई गईं।

आई4सी की सूचना से खुला मामला

यह जांच भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से मिली सूचनाओं के आधार पर शुरू हुई थी। शुरुआत में अलग-अलग शिकायतें लग रही थीं, लेकिन फंड-फ्लो पैटर्न, पेमेंट गेटवे और डिजिटल फुटप्रिंट के विश्लेषण से एक संगठित साजिश का खुलासा हुआ।

अक्तूबर में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, झारखंड और हरियाणा में 27 स्थानों पर छापेमारी कर डिजिटल और वित्तीय सबूत जब्त किए, जिनकी फोरेंसिक जांच की गई। सीबीआई ने कहा कि जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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तीन दिवसीय कथा का शुभारंभ कल से, सनातन मूल्यों से जोड़ना कथा का उद्देश्य


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जय जागृति फाउंडेशन के तत्वधान में शहर के साकेत नगर स्थित शुभम वाटिका में श्री राधा माधव रसामृत कथा एवं भक्ति संध्या का आयोजन 15 से 17 दिसंबर तक होगा। कथा का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करते हुए विशेषकर युवा पीढ़ी के आध्यात्मिक शक्ति, सांस्कृतिक चेतना एवं सनातन मूल्यों से जोड़ना है।
यह बातें कार्यक्रम के संयोजक व अधिवक्ता भारत सरकार सुप्रीम कोर्ट संतोष कुमार तिवारी, चंद्रशेखर दीक्षित, नित्यानंद उपाध्याय व आनंद द्विवेदी ने शहर के राघव नगर स्थित होटल में पत्रकार वार्ता के दौरान कहा। उन्होंने कहा कि वृंदावन की कथा व्यास पूजा साधना श्रीजी (देवी माहेश्वरी) के श्री मुख से दिन में 1 से 5 बजे तक प्रवचन किया जाएगा। समिति के सदस्य गोरखपुर एयरपोर्ट से उन्हें लेकर देवरिया पहुंचेंगे। शहर के पुरवा चौराहे पर श्री जी का भव्य स्वागत करने के पश्चात कथा स्थल पर पहुंचेंगी। इस दौरान श्री जी के द्वारा राधा माधव की मधुर लीलाओं की कथा का रसपान कराया जाएगा।उन्होंने आयोजन को सफल बनाने के लिए अधिकाधिक संख्या में श्रोताओं को पहुंचने की अपील करते हुए कहा कि आज के बदलते सामाजिक परिवेश में आध्यात्मिक ही वह शक्ति है जो हिंदू समाज को संस्कार, संयम, सद्भाव और राष्ट्र भावना से जोड़कर सुदृढ़ बनती है। हिंदू समाज का युवा आध्यात्म से जुड़ता है तब केवल व्यक्ति नहीं बल्कि पूरा समाज सशक्त और संगठित होता है इसी भावना के साथ यह कथा महोत्सव आयोजित किया जा रहा है।

मूर्खता के मंत्र से धूर्तता की साधना

आलेख-बादल सरोज

इस सप्ताह शुरुआत राजनाथ सिंह ने की। उन्हें कुछ लोग उनकी पार्टी के रेवड़ में अलग तरह की – कम मरखनी, कम कटखनी प्रजाति — का मानते हैं। शायद इसलिए कि राजनीति में अनेक पदों पर रहने के अनुभवों के अलावा वे पढ़े-लिखे भी माने जाते हैं, उनकी डिग्रियां असली हैं, कम-से-कम अभी तक उनको लेकर कोई शकोशुबहा नहीं है। भौतिकशास्त्र के व्याख्याता भी रहे हैं और अक्सर अटल बिहारी वाजपेई के अंदाज में बोलने की भी सायास, किन्तु असफल कोशिश करते रहते हैं। जो भले और भोले लोग अटल जी को अलग निराकार, निर्गुण कोटि का भाजपाई मानते थे, वे ही इनमें भी भिन्नता देखते हैं। तो इस बार शुरुआत इन्हीं ने की, यूं भी कह सकते हैं कि इन्हीं से करवाई गयी।

गुजरात के वडोदरा में एक सभा में उन्होंने रहस्योदघाटन-सा करते हुए दावा किया कि : “देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पब्लिक फंड का इस्तेमाल करके बाबरी मस्जिद को फिर से बनवाना चाहते थे, लेकिन सरदार पटेल ने नेहरू के प्लान को कामयाब नहीं होने दिया।” विडम्बना यह थी कि इस तरह की साफ़-साफ़ विभाजनकारी बातें वे उस सभा में बोले, जिसे ‘एकता रैली’ बताया गया था। इस बयान के बाद, इसके खंडन में आये अनेक दस्तावेजी सबूतों, जिनकी कोई सफाई इनकी तरफ से नहीं आई, को छोड़ भी दें, तो अत्यत सरल-सी बात यह थी कि जिस कालखंड का वे जिक्र कर रहे थे, तब तक बाबरी मस्जिद सलामत थी, लिहाजा उसके बनाने या बनवाने का सवाल ही नहीं उठता था।

मगर उन्हें इस सबसे क्या : उन्हें इस अज्ञानता के सार्वजनिक इजहार के साथ जो करना था, वह उन्होंने कर लिया : बाबरी मस्जिद के गिराने की याद दिलाते हुए ध्रुवीकरण की मथनी में एक झोंटा लगा दिया। मूर्खता को साधन की तरह इस्तेमाल करके असाध्य को साधने की कला, जिस कुनबे के राजनाथ सिंह हैं, उसने अच्छी तरह साधी हुई है। गुजरात में बोलते हुए भी वे इसी का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे थे।

इसी का एक और नमूना डॉलर के मुकाबले रूपये की कीमत में लगातार, अनवरत जारी गिरावट को लेकर दिए गए कुतर्कों में दिखा। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने अनूठा तर्क दिया कि “हमारे देश के लोग अपनी ज़ेब मे रुपया लेकर घूमते हैं, रूपये से खरीदारी करते हैं। हमें डॉलर से कोई लेना-देना नहीं है, डॉलर महंगा हो या सस्ता, हमारे देश के लोगों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।” अपने स्तरहीन अभिनय की तरह, उसी तरह की बेतुकी और सतही टिप्पणियों के लिए कुख्यात तिवारी जी को उनके ज्ञान की सीमा को देखते हुए कुछ छूट देने की सोची भी जा सकती है – मगर तब तक अच्छे-खासे शिक्षा संस्थान से अर्थशास्त्र की पढाई करने वाली और रुपये को अधोगति की तरफ ले जाने वाले विभाग की मुखियाइन, वित्त मंत्राणी निर्मला सीतारमण की उक्ति आ गयी, जिसमे उन्होंने इसे कोई ज्यादा चिंता करने की बात ही नहीं माना।

वे बोलीं कि “रुपया अपना लेवल खुद ही बना लेगा।” रूपये-डॉलर की कीमतों को लेकर विपक्ष में रहते हुए मोदी, भाजपा और स्वयं इनके द्वारा की गयी रसीली टिप्पणियों पर भी झाडू फेरते हुए निर्मला जी ने कहा कि तब आर्थिक हालात बिल्कुल अलग थे। भले ही रुपया कमजोर हुआ हो, लेकिन भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।“

हालांकि यह दावा वे तब कर रही थीं, जब आईएमएफ ने उनकी अगुआई वाले वित्त मंत्रालय के जीडीपी इत्यादि के आंकड़ों को गलत और अविश्वसनीय करार देते हुए उन्हें ‘सी’ ग्रेड की श्रेणी में डाल दिया था। उनके बोलते ही उनके बाकी अनुचर भी ज्ञान देने उतर पड़े। रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रुपये की गिरावट को अनुल्लेखनीय घटना बताते हुए इसे आपदा में अवसर के मोदी सिद्धांत के तहत घरेलू मुद्रा को अपना स्तर खोजने की अनुमति देने वाला अवसर बताया, तो नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार जैसे कुछ विद्वान अर्थशास्त्रियों ने तो अर्थशास्त्र की अब तक की सारी समझदारियों को ही ताक पर रख दिया और कहा कि ‘कमजोर रुपया वास्तव में अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक होता है, क्योंकि यह निर्यात को बढ़ावा देता है और अधिक रोजगार पैदा करता है’, का सिद्धांत भी ठेल दिया।

मगर इस प्रतियोगिता में बाजी केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मारी। मिथकों के अर्जुन की तरह उन्होंने सीधे निशाने पर वार करने की बजाय निशाना ही बदल दिया और एलान कर दिया कि डॉलर के मुकाबले उतार-चढ़ाव फालतू की बात है, असल में तो भारतीय रुपये की ताकत बढ़ रही है। वे यहीं तक नहीं रुके, उन्होंने रुपये की इस ‘मजबूती’ का श्रेय भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के आकार और अन्य देशों के साथ बढ़ते व्यापार को दिया है। यह भी बताया कि 35 से अधिक देशों ने व्यापार के लिए भारतीय रुपये के उपयोग की अनुमति दी है, जिससे विदेश यात्रा करने वाले भारतीयों के लिए स्थानीय मुद्रा या अमेरिकी डॉलर में मुद्रा बदलने की आवश्यकता कम हो गई है।

अब इतने आला दर्जे की ‘बुद्धिमत्ताओं’ को ऐसे ही तो नहीं छोड़ा जा सकता : इनका स्मारक बनाकर मूर्त रूप देना भी बहुत जरूरी था, सो खुद सरकार ने हाथ बढाया और प्रधानमंत्री का हाल मुकाम बदल कर उसे सेवा तीर्थ नम्बर वन का नाम दे दिया। नौ साल में यह तीसरा नामकरण था ; पहले रेसकोर्स रोड से लोककल्याण मार्ग हुआ और अब तो तीरथ ही बन गया। आखिर नेहरू से मुकाबला भी तो करना है।

आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री के नाते उन्होंने बड़े-बड़े सार्वजनिक उद्योगों, निर्माणों और बांधों और चंडीगढ़, दुर्गापुर, भिलाई जैसे शहरों को भारत का आधुनिक तीर्थ बताया था – अब उनमे से ज्यादातर का मोदी जी अपने मित्र कारपोरेटों द्वारा भोग लगवा ही चुके हैं। मगर सेवा अभी अधूरी है, सो उसे पूरी करने के लिए मोदी ने खुद का पता ही सेवा तीर्थ वह भी नम्बर वन कर दिया। इसी की तुक में राजभवनों को भी लोकभवन बनाने की घोषणा भी कर दी गयी। ताज्जुब नहीं कि बात और आगे तक जाए और सांसदों, विधायकों, पार्षदों, पंचों, सरपंचों के घरों-मकानों को भी छोटे-मोटे देवताओं या उनके गणों के नाम का तीर्थस्थल बता दिया जाए।

जिस दिल्ली में तीर्थ बनाया जा रहा था, उसकी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी ताल से ताल मिलाई और दिल्ली की गलघोंटू हवा और प्रदूषण से मुकाबले के लिए नयी शोध लेकर आ गयीं। उनका दावा रोचक था कि जहां सबसे ज्यादा प्रदूष्ण हो, वहां – हॉटस्पॉट पर – पानी छिड़ककर उसे कम किया जा सकता है। इस ज्यादा ही हास्यास्पद शेखचिल्लीपन का बचाव करते हुए कुनबे की मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि आखिर एक्यूआई – वायु गुणवत्ता सूचकांक – भी तो “एक तापमान की तरह है”, इसलिए पानी का छिड़काव इसे कम करने का एक प्रभावी तरीका है। वायु गुणवत्ता सूचकांक को किसी भी थर्मामीटर से मापे जाने योग्य “एक तरह का तापमान” बताना बादलों की आड़ लेकर रडार को धोखा देने और नाली की गैस से चाय पकोड़ा बनाने जैसी ‘वैज्ञानिक खोजों’ की कड़ी में आगे की खोज है।

मूर्खत्व के यज्ञ में सप्ताह की आख़िरी आहुति वंदे मातरम पर दिन भर की बहस थी। इसके जरिये स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश को जोड़ने वाले इस लोकप्रिय गान को जनता की एकता को तोड़ने के नफरती अभियान में बदलने के लिए पूरी ताकत लगा दी गयी। खुलकर हिन्दू-मुसलमान किया गया। जिन्होंने जब वन्देमातरम देश को एकजुट कर प्रेरित और उत्साहित कर रहा था, तब उसका ‘व’ तक नहीं बोला, जिस आर एस एस ने अपने पूरे 100 साल में एक बार भी वन्दे मातरम नहीं गाया, उनका अचानक इस गान के प्रति अनुराग जिस कुत्सित इरादे से था, उसे उन्होंने छुपाया भी नहीं।

बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण को और तीखा करने के लिए इसका इस्तेमाल हो रहा है, यह खुद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में बार-बार बंगाल का जिक्र करके एक तरह से खुद ही कबूल कर लिया। उन्होंने देश भर के इस गान को बंगाल तक ही सीमित कर दिया। जिस उपन्यास का यह हिस्सा है, उस आनंदमठ के लेखक बंकिम बाबू की बंगाली पृष्ठभूमि के बखान से लेकर ‘पश्चिम बंगाल की मेधा पूरे देश को रास्ता दिखाया करती थी’, जैसे कई बोल-वचन से इस बहस के नफरती मंतव्य को साफ़ कर दिया। ध्यान रहे, यह बहस भी उस पटकथा का हिस्सा थी, जिसे एक दिन पहले लाखों लोगों को इकट्ठा कर कोलकता के मैदान में मंचित किया गया था। इनसे, जिसकी अगले दिन संसद में दुहाई दी जा रही थी, वह वन्देमातरम नहीं गवाया गया, जिसकी कोई धार्मिक परम्परा नहीं है, जिसका किसी धार्मिक कर्मकांड में कोई प्रावधान तो दूर, उल्लेख तक नहीं है। वहां भगवद्गीता का सामूहिक पाठ कराया गया था।

यह वही धूर्ततापूर्ण पटकथा थी, जिसमें इधर बंगाली अस्मिता पर जोर देकर स्वतंत्रता आंदोलन में राज्य के भद्र लोक के अहम योगदान की याद दिलाई जा रही थी, उधर मुस्लिम तुष्टीकरण और विभाजन की बात कर परोक्ष रूप से राज्य के हिंदू वोटरों को संदेश देने की कोशिश की जा रही थी। इसी का परोक्ष हिस्सा था भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ चुके, बाद में ममता की पार्टी में गए, अब निलम्बित, हुमायूं कबीर से बाबरी मस्जिद फिर से बनवाने का अहद उठवाकर आग में तेल डलवाया जाना।

कुल मिलाकर यह कि पूरी निर्लज्जता और दीदादिलेरी के साथ विवेक हरने और अविवेक का वर्चस्व बनाने की साजिश तूफानी तेजी के साथ अमल में लायी जा रही है। ध्यान बंटाने के मनोविज्ञान में मूर्खता को एक उपयोगी संसाधन के रूप में कर दिया गया है। मौजूदा हुक्मरान अच्छी तरह जानते हैं कि किन-किन तरीकों से किसी व्यक्ति या व्यक्ति समूह का ध्यान असली हालात या विचार से कैसे हटाया जा सकता है। उन्हें पता है कि मनुष्य के मस्तिष्क में जानकारी संग्रह करने, उसका विश्लेषण करके दूध और पानी को अलग करने और केवल प्रासंगिक चीज़ों पर ध्यान केंद्रित करने और उनका सार ग्रहण करने की क्षमता सीमित होती है। जब ध्यान भटकता है, तो यह प्रक्रिया और भी बाधित होती है। नतीजे में अनावश्यक, यहाँ तक कि स्वयं उसके लिए भी घातक समझ दिमाग में घर बना लेती है। दारुण दुःख देने के पहले मति हर लेना इसी को कहते हैं।

सत्ता में बैठा कार्पोरेटी हिंदुत्व का गठजोड़ इसकी कारगरता को जानता है और उसके लिए खुद को मूर्ख दिखाने में भी संकोच या शर्म लिहाज नहीं करता। लोकप्रिय मुहावरे में इसे ‘ऐड़ा बनके पेड़ा खाना’ कहते हैं। पिछले सप्ताह में मूर्खताओं की इस बहार में छुपा कर पतझरों को लहलहाने का काम किया जाना इसकी मिसाल है। इधर वन्दे मातरम पर नफरती कोरस गाया जा रहा था, उधर भारत की खेती-किसानी की रीढ़ तोड़कर उसे हमेशा के लिए अंतर्राष्ट्रीय बीज-राक्षसों के मुनाफे की तिजोरियों में दफ़न कर देने वाला सीड बिल, 2025 लाया जा रहा था। बिना संसदीय प्रक्रिया का पालन किये, बिना बहस कराये, बिना किसी संसदीय समिति को भेजे, बिजली बिल, 2025 सहित एक के बाद एक जनविरोधी विधेयक धड़ाधड़ पारित किये जा रहे थे।

कुख्यात चार लेबर कोड्स को लागू किये जाने के साथ शुरू हुआ हमला जनता के बाकी हिस्सों को भी अपनी चपेट में ले रहा था। बिहार में मिली जीत के बाद वहां भी बुलडोजर दनदनाने लगे थे। इस कुहासे के बीच देश के सभी नागरिकों के मोबाइल फोन में जासूसी का एप्प बिठाने की कोशिश की जा रही थी, जिसे समय रहते कम-से-कम फिलहाल के लिए तो रोक दिया गया है। किन्तु आशंकाएं और गहरी हो गयी हैं।

दिखावे के लिए मूर्खता की आराधना करने वाले धूर्तता के साधकों की कार्यशैली को समझकर ही इन आशंकाओं से बचा जा सकता है। इसके लिए जानकारी ही बचाव है, आवाज उठाना ही उपचार है।

उत्तर भारत में ठंड का कहर: दिल्ली-NCR में घना कोहरा, कई राज्यों में शीतलहर का अलर्ट

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)रविवार सुबह दिल्ली और आसपास के इलाकों में घना कोहरा छाया रहा, जिससे विजिबिलिटी बेहद कम हो गई। हाल ही में ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे के बाद प्रशासन ने एहतियातन स्पीड लिमिट घटा दी है। ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों से कोहरे के दौरान फॉग लाइट का इस्तेमाल करने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले कुछ दिनों तक दिल्ली-NCR और उत्तर भारत के कई हिस्सों में घने कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है।

पंजाब और हरियाणा में ठंड लगातार बढ़ रही है। चंडीगढ़ में न्यूनतम तापमान 6.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से कम है। वहीं अमृतसर (5.9°C), लुधियाना (6.4°C), पटियाला (6.9°C), पठानकोट (6.6°C), बठिंडा (6°C), फरीदकोट (5.2°C) और गुरदासपुर (7.2°C) में भी ठिठुरन जारी है। शीतलहर के कारण सुबह-शाम कंपकंपी बढ़ गई है।

मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़, ओडिशा, कर्नाटक और तेलंगाना के लिए कोल्ड वेव अलर्ट जारी किया है। 14 और 15 दिसंबर को तेलंगाना और अंदरूनी कर्नाटक के कुछ हिस्सों में शीतलहर की आशंका है, जबकि 14 दिसंबर को छत्तीसगढ़ और ओडिशा में भी ठंड का असर बढ़ सकता है। उत्तरी अंदरूनी कर्नाटक में बेहद ठंडे हालात रहने की चेतावनी दी गई है।

हिमाचल प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से चंबा, कुल्लू और लाहौल-स्पीति के ऊंचे इलाकों में सप्ताहांत पर हल्की बर्फबारी संभव है। इसके अलावा 17, 18 और 19 दिसंबर को भी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बहुत हल्की बर्फबारी के आसार हैं। अन्य जिलों में मौसम सामान्य रहने की संभावना है।

मौसम विभाग ने लोगों को गर्म कपड़े पहनने, घरों को गर्म रखने, गर्म पानी पीने और किसानों को फसलों व पशुओं को पाले से बचाने की सलाह दी है।

मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान: देवरिया पुलिस ने आमजन से किया सीधा संवाद, 474 व्यक्तियों व 259 वाहनों की जांच

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)जनपद में शांति, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा आमजन में सुरक्षा का भरोसा कायम करने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में रविवार को “मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान” चलाया गया।यह अभियान प्रातः 5 बजे से 8 बजे तक जनपद के सभी थाना क्षेत्रों में संचालित किया गया। अभियान के तहत सभी थाना प्रभारी/थानाध्यक्षों ने मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित किया और उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया। साथ ही सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देते हुए छोटे-मोटे विवादों को मौके पर ही सुलझाया गया तथा मित्र पुलिसिंग की भावना को मजबूत किया गया।चेकिंग के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की गहन जांच की गई। इस दौरान चोरी की गाड़ियों की जांच, तीन सवारी चलने वालों के विरुद्ध कार्रवाई, मॉडिफाइड साइलेंसर लगे दुपहिया वाहनों के चालान, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने तथा दोपहिया पर तीन सवारी के मामलों में कार्रवाई की गई। इसके साथ ही अवैध असलहा व मादक पदार्थों पर भी विशेष निगरानी रखी गई।
पुलिस द्वारा संवाद के दौरान नागरिकों को मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान के उद्देश्यों से अवगत कराया गया। जनसामान्य ने पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए मॉर्निंग वॉक के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया।पुलिस विभाग के अनुसार, अभियान के दौरान जनपद के कुल 19 स्थानों पर चेकिंग की गई, जिसमें 474 व्यक्तियों एवं 259 वाहनों की जांच की गई। जनपदीय पुलिस ने स्पष्ट किया कि आमजन की सुरक्षा, शांति एवं विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस प्रकार के अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेंगे।

एडीजी जोन ने किया थाना गोला का वार्षिक निरीक्षण

अभिलेखों की जांच, मालखाने के निरीक्षण व फरियादियों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के निर्देश

गोरखपुर(राष्ट्र क़ी परम्परा)
आज अपर पुलिस महानिदेशक जोन गोरखपुर मुथा अशोक जैन द्वारा थाना गोला का वार्षिक निरीक्षण किया गया। इस दौरान थाना स्तर पर संचालित प्रशासनिक, विधिक एवं जनसुनवाई से जुड़ी व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। निरीक्षण का उद्देश्य थाना कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं जनहितैषी बनाना रहा।
निरीक्षण के दौरान अपर पुलिस महानिदेशक ने थाने पर संधारित जनसुनवाई रजिस्टर, महिला अपराध रजिस्टर, अपराध रजिस्टर संख्या-04, मालखाना रजिस्टर सहित अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों को गहनता से चेक किया। उन्होंने रजिस्टरों में प्रविष्टियों की अद्यतन स्थिति, क्रमबद्धता तथा विधिक मानकों के अनुरूप संधारण पर विशेष ध्यान दिया और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी अभिलेख समय से अपडेट हों तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
इसके पश्चात एडीजी जोन द्वारा थाना मालखाना का निरीक्षण किया गया। मालखाने में मौजूद शस्त्र, कारतूस, मुकदमाती माल, जब्त वाहन एवं अन्य सामग्री का भौतिक सत्यापन किया गया। उन्होंने मालखाने में रखे सामान की सुरक्षा, रख-रखाव एवं रिकॉर्ड मिलान की स्थिति का जायजा लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि मुकदमाती माल का संरक्षण पूरी सतर्कता के साथ किया जाए और निर्धारित नियमों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित हो।
निरीक्षण के क्रम में अपर पुलिस महानिदेशक ने संपूर्ण थाना परिसर का भ्रमण किया। उन्होंने थाना परिसर की साफ-सफाई, कार्यालय कक्षों की व्यवस्था, आगंतुकों के बैठने की सुविधा तथा थाने में खड़े वाहनों की स्थिति का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने परिसर को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और अनुशासित बनाए रखने, वाहनों के बेहतर रख-रखाव तथा अनावश्यक रूप से खड़े वाहनों को नियमानुसार निस्तारित कराने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान अपर पुलिस महानिदेशक जोन गोरखपुर एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर राज करन नय्यर द्वारा थाने पर आए फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना गया। अधिकारियों ने फरियादियों की शिकायतों के त्वरित, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और जनसुनवाई को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी दिनेश कुमार पुरी, क्षेत्राधिकारी गोला दरवेश कुमार सहित थाना प्रभारी एवं अन्य पुलिस अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। निरीक्षण के अंत में एडीजी जोन ने स्पष्ट किया कि थाना स्तर पर अनुशासन, पारदर्शिता एवं जनसेवा की भावना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, ताकि आम जनता का पुलिस पर विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।

ऐरोली मे दस दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव का भव्य शुभारम्भ

नवी मुंबई(राष्ट्र की परम्परा) ऐरोली सेक्टर 5 स्तिथ सरस्वती विद्यालय के प्रांगण मे श्रीमदभागवत ज्ञान यज्ञ संस्था (रजि.)के तत्वावधान मे दस दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव का भव्य शुभारंभ कलश यात्रा के साथ किया गया। इस पावन अवसर पर कथा व्यास 108 स्वामी प्रेमदास रामायण महाराज के मुखारविंद से संगीतमय श्री राम कथा का गुणगान किया जा रहा है श्री राम कथा के श्रवण का सौभाग्य नगरवासियों को प्राप्त हो रहा है. जिसमे रबाले एवं ऐरोली क्षेत्र को भक्ति मय वातावरण व्याप्त हो गया है।कार्यक्रम की शुरुआत 12 दिसंबर कलश यात्रा से हुई। इसके पश्चात 13 दिसंबर से 18 दिसंबर तक प्रतिदिन सुबह 9 बजे से पीठ पूजन एवं पाठ शाम 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक श्रीराम कथा का प्रवचन का आयोजन किया जा रहा हैँ।वही 19 दिसंबर को सुबह 11 बजे दोपहर 3 बजे तक हवन शाम 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक महाप्रसाद का आयोजन होगा। श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ संस्था के अध्यक्ष शैलेंद्र शुक्ला ने बताया कि संस्था विगत 15 वर्षों से निरंतर सफलतापूर्वक कथा का आयोजन करती आ रही है जो एक अनुकरणीय उदाहरण हैँ। उन्होंने कहा की इस सफलता के पीछे पूरी टीम का समर्पण व एकजुट प्रयास हैँ। शैलेन्द्र शुक्ला ने समस्त नगरवासियों से आग्रह किया है कि अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्री राम कथा का श्रवण करें आध्यात्मिक आनंद प्राप्त करें तथा अपने जीवन को सुगम और मंगलमय बनाएं|

बक्सर में विशाल निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर, आधुनिक तकनीक से होगा बिना टांके मोतियाबिंद ऑपरेशन

बक्सर/बिहार (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार के बक्सर जिले में जरूरतमंदों के लिए एक ऐतिहासिक और मानवीय पहल केंवद्रित करते हुए एक विशाल निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर 15 दिसंबर से 31 मार्च तक आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को आयोजित प्रेसवार्ता में ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी प्रवीणभाई वसाणी ने बताया कि यह शिविर परम पूज्य श्री रणछोड़दासजी बापु श्री के दिव्य विचार — “मरीज मेरे भगवान हैं” और “मुझे भूल जाना, पर नेत्रयज्ञ को नहीं भूलना” — से प्रेरित होकर आयोजित किया जा रहा है।इस निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर के माध्यम से बक्सर ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के दृष्टिबाधित और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। शिविर में अत्याधुनिक फेको मशीन तकनीक से बिना टांके मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जाएगा, जिसमें मरीजों को उच्च गुणवत्ता का सॉफ्ट फोल्डेबल लेंस पूरी तरह मुफ्त लगाया जाएगा, जिससे दृष्टि जल्दी और सुरक्षित रूप से लौट सके।शिविर में आने वाले मरीजों के लिए पंजीकरण, जांच, ऑपरेशन, दवा, नाश्ता, भोजन और ठहराव की संपूर्ण व्यवस्था निःशुल्क की गई है। मरीज के साथ एक परिजन के रहने और भोजन की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इलाज के बाद मरीजों को अन्न और वस्त्र प्रदान कर सम्मानपूर्वक विदाई दी जाएगी, वहीं भावनात्मक जुड़ाव के प्रतीक स्वरूप प्रत्येक मरीज की आरती उतारकर सम्मान किया जाएगा।रजिस्ट्रेशन और प्राथमिक जांच कृतपुरा चिराग संस्था के समीप लगाए गए विशाल टेंट में की जाएगी, जबकि ऑपरेशन कृतपुरा मंदिर परिसर में 10 अनुभवी नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा किया जाएगा। प्रत्येक मरीज को लगभग तीन दिन तक शिविर में रहना अनिवार्य होगा।यह शिविर स्वास्थ्य सेवा के साथ-साथ मानवीय संवेदना और सेवा भाव का अनुपम उदाहरण बन रहा है।

राम मंदिर आंदोलन के शहीदों की स्मृति में बनेगा स्मारक, ट्रस्ट बैठक में अहम निर्णय

अयोध्या (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शनिवार (13 दिसंबर) को आयोजित बैठक में राम मंदिर से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने की। इस दौरान प्रतिष्ठा द्वादशी सहित आगामी धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर विस्तृत चर्चा हुई।

राम मंदिर आंदोलन के शहीदों के लिए बनेगा स्मारक

ट्रस्ट ने निर्णय लिया कि जिस स्थान पर प्राण प्रतिष्ठा से पहले रामलला अपने भाइयों के साथ विराजमान थे, वहां एक नया मंदिर बनाया जाएगा। इसी मंदिर के निकट श्री राम मंदिर आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों की स्मृति में एक भव्य स्मारक का निर्माण किया जाएगा। यह स्मारक आंदोलन के बलिदानियों को श्रद्धांजलि के रूप में स्थापित होगा।

31 दिसंबर को मनाई जाएगी ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’

श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ 31 दिसंबर को ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ के रूप में मनाई जाएगी। इस अवसर पर मंदिर परिसर में स्थित सात उप-मंदिरों के शिखरों पर ध्वज फहराए जाएंगे।

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27 से 31 दिसंबर तक मंडल पूजा और सांस्कृतिक आयोजन

बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रतिष्ठा द्वादशी से जुड़े सभी कार्यक्रम अंगद टीला पर आयोजित होंगे।

• 27 से 31 दिसंबर तक श्री राम जन्मभूमि मंदिर में मंडल पूजा

• श्री रामचरितमानस का संगीतमय अखंड पाठ

• प्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलोटा, सुरेश वाडकर और तृप्ति शाक्य की भजन संध्या

• कथक नृत्य नाटक और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

• कवि सम्मेलन का आयोजन

मंदिर निर्माण से जुड़े श्रमिकों का होगा सम्मान

ट्रस्ट ने यह भी फैसला किया कि मंदिर निर्माण में कार्यरत लगभग 400 श्रमिकों को हिंदू नव वर्ष (19 मार्च) के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा।

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25 नवंबर को हुआ था भव्य ध्वजारोहण

गौरतलब है कि 25 नवंबर को श्री राम मंदिर पर भव्य ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में देशभर से साधु-संतों और बड़ी संख्या में पूर्वांचल (उत्तर प्रदेश) के श्रद्धालुओं ने भाग लिया था।

पिता के बाद बेटा मालिक, मां के बाद जीवन अनाथ: रिश्तों की सबसे कड़वी सच्चाई

कैलाश सिंह

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। समाज की सच्चाई कई बार बेहद निर्मम होती है। पिता के निधन के बाद बेटा घर, जमीन और जिम्मेदारियों का मालिक बन जाता है। विरासत उसके नाम हो जाती है और फैसलों की कमान उसके हाथ में आ जाती है। लेकिन मां के निधन के बाद वही बेटा—चाहे वह उम्र, पद या संपत्ति में कितना ही बड़ा क्यों न हो—अंदर से पूरी तरह अनाथ हो जाता है।

पिता परिवार की व्यवस्था, अनुशासन और संरचना का प्रतीक होता है, जबकि मां परिवार की आत्मा होती है। पिता के जाने से घर की कमान बदलती है, लेकिन मां के जाने से घर की रौनक, अपनापन और संवेदना हमेशा के लिए खो जाती है। मां के हाथ का स्वाद, उसकी डांट में छिपा स्नेह और उसकी खामोशी में बसी दुआएं—सब एक साथ जीवन से विदा हो जाती हैं।

आज का दौर अधिकारों और संपत्ति की भाषा तो खूब समझता है, लेकिन भावनात्मक उत्तराधिकार को लगातार भूलता जा रहा है। मां वह रिश्ता है, जो बिना शर्त साथ निभाता है, जो हर गलती पर भी ढाल बनकर खड़ा रहता है। उसके जाने के बाद त्योहार औपचारिक बन जाते हैं, घर सिर्फ एक मकान रह जाता है और रिश्ते संवेदनाओं की जगह शब्दों में सिमट जाते हैं।

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यह लेख समाज से एक सीधा सवाल करता है—क्या हम मां के रहते उनके महत्व को समझते हैं? क्या आधुनिकता और व्यस्त जीवन की दौड़ में हमने उस ममता की कद्र खो दी है, जो हमें इंसान बनाती है?

सच यही है कि पिता के बाद बेटा मालिक बन सकता है, लेकिन मां के बाद हर बेटा जीवन भर के लिए अनाथ हो जाता है। यही समाज की सच्चाई है और यही हमारे समय का सबसे सच्चा आईना।

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पशु तस्करों पर शिकंजा कसने के लिए स्वॉट और एसओजी तैनात, सलेमपुर हादसे के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई की तैयारी

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सलेमपुर कोतवाली क्षेत्र के मझौलीराज पुलिस चौकी के पास बाइक सवार युवकों को टक्कर मारकर फरार हुए पशु तस्करों की तलाश तेज कर दी गई है। अब इस मामले में स्थानीय पुलिस के साथ-साथ स्वॉट (SWAT) और एसओजी (SOG) टीमों को भी लगाया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एक से दो दिनों में इस केस में बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

पुलिस की दो विशेष टीमें बिहार के सीवान जिले के अलावा कुशीनगर में भी दबिश दे रही हैं। बताया जा रहा है कि तस्करों का नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर फैला हुआ है।

हादसे में एक युवक की मौत, दूसरा गंभीर

दो दिन पहले बोलेरो सवार पशु तस्करों ने मझौलीराज कस्बे में पुलिस चौकी के पास एक बाइक को टक्कर मार दी थी। इस दर्दनाक हादसे में एक युवक की मौके पर मौत हो गई, जबकि दूसरा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना को गंभीरता से लेते हुए एसपी संजीव सुमन ने पहले मझौलीराज चौकी प्रभारी को लाइन हाजिर किया और बाद में निलंबित कर दिया।

CCTV निगरानी और नेटवर्क पर फोकस

घटना के बाद पूरे जिले में सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की रणनीति तैयार की गई है। पकड़े गए एक पशु तस्कर की निशानदेही पर पुलिस ने तीन अन्य लोगों को हिरासत में लिया था। पूछताछ के दौरान देवरिया, कुशीनगर और बिहार के सीवान में सक्रिय पशु तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इसके बाद पुलिस की टीमें बड़े तस्करों की गिरफ्तारी में जुट गई हैं।

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STF भी बॉर्डर इलाके में सक्रिय

इधर, पिछले सप्ताह मऊ जिले में दो बड़े बदमाशों को मुठभेड़ में गिरफ्तार करने के बाद एसटीएफ गोरखपुर यूनिट भी सीमा क्षेत्र में सक्रिय है। एसटीएफ के डीएसपी ने सलेमपुर कोतवाली में संकेत दिए थे कि इलाके के एक बड़े पशु तस्कर और उसके संरक्षकों पर STF की नजर है। इस तस्कर के आजमगढ़ और जौनपुर के पशु तस्करों से भी संबंध बताए जा रहे हैं।

फिलहाल एसटीएफ, स्वॉट और एसओजी की टीमें लगातार बॉर्डर इलाकों में छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही पशु तस्करी नेटवर्क के बड़े नाम सामने लाए जाएंगे।

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वादों की आंधी में ठहरी विकास की राह: नारों से आगे न बढ़ पाने की सच्चाई

कैलाश सिंह

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। लोकतंत्र में सत्ता तक पहुंचने का रास्ता अक्सर वादों से होकर गुजरता है। सरकारें विकास के सपने दिखाकर जनता से विश्वास मांगती हैं, लेकिन मौजूदा दौर की हकीकत यह है कि वादों की आंधी इतनी तेज हो गई है कि विकास की राह ठहर-सी गई है। घोषणाएं लगातार होती हैं, योजनाएं मंचों से उतरती हैं, मगर जमीनी स्तर पर उनका असर दिखाई देना मुश्किल होता जा रहा है।

हर चुनाव से पहले रोजगार, महंगाई नियंत्रण, बेहतर शिक्षा, मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और सुरक्षित भविष्य जैसे बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। लेकिन सत्ता संभालते ही प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। योजनाएं फाइलों में उलझ जाती हैं और जवाबदेही का बोझ एक-दूसरे पर टाल दिया जाता है। नतीजतन विकास की गाड़ी आगे बढ़ने के बजाय कागजों में ही दौड़ती नजर आती है।

ग्रामीण इलाकों की स्थिति आज भी चिंताजनक बनी हुई है। कई क्षेत्रों में सड़क, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सेवाएं अधूरी हैं। युवा रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। किसान बढ़ती लागत और घटती आय के बीच फंसा हुआ है, जबकि महंगाई ने आम आदमी की थाली से स्वाद और संतुलन दोनों छीन लिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर नीतियां इतनी प्रभावी हैं, तो आम जनजीवन में सुधार क्यों नहीं दिखता?

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सरकारों को यह समझना होगा कि जनता को अब नारों की नहीं, ठोस नतीजों की जरूरत है। विकास केवल भाषणों, पोस्टरों और विज्ञापनों से नहीं आता, बल्कि ईमानदार क्रियान्वयन, पारदर्शी प्रशासन और मजबूत इच्छाशक्ति से आता है। यदि वादों की आंधी में विकास की राह यूं ही ठहरी रही, तो लोकतंत्र पर जनता का भरोसा कमजोर होना तय है।

अब समय आ गया है कि सरकारें शब्दों से आगे बढ़ें, योजनाओं को धरातल पर उतारें और जनहित को राजनीति से ऊपर रखें। क्योंकि विकास की राह तभी आगे बढ़ेगी, जब वादों की आंधी थमेगी और काम की सच्ची हवा चलेगी।

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शब्दों की चकाचौंध बनाम जनहित का सच

डॉ. सतीश पाण्डेय

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आज का लोकतंत्र शब्दों की ऐसी चमक में उलझता जा रहा है, जहां सच्चाई की रोशनी धीरे-धीरे फीकी पड़ रही है। मंचों से बहते लंबे भाषण, नारों की गूंज और विज्ञापनों की चकाचौंध ने जनहित को इस कदर ढक दिया है कि आम आदमी की असल समस्याएं हाशिये पर सिमटती जा रही हैं। सवाल अब यह नहीं रह गया कि कितनी बातें कही गईं, बल्कि यह है कि उन बातों का जमीन पर कितना असर दिखा।
आज हर घोषणा को उपलब्धि के रूप में पेश किया जा रहा है। योजनाएं शुरू होने से पहले ही सफल घोषित कर दी जाती हैं।आंकड़ों की बाजीगरी से तस्वीरें तो सज जाती हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई जस की तस खड़ी रहती है। महंगाई की मार से जूझता परिवार, रोजगार की तलाश में भटकता युवा, बदहाल शिक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की जर्जर हालत—इन सवालों के जवाब भाषणों में कम और वादों में ज्यादा मिलते हैं। राजनीति का यह नया चलन लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है, जहां जवाबदेही की जगह बयानबाजी ने ले ली है। सत्ता का संवाद जनता से कम और प्रचार से अधिक होता जा रहा है। जिन मुद्दों पर गंभीर विमर्श और ठोस कार्रवाई होनी चाहिए, वे शोर-शराबे और सुर्खियों में दबा दिए जाते हैं। नीतियां जनजीवन को राहत देने के बजाय प्रचार का माध्यम बनती प्रतीत होती हैं।
लोकतंत्र की आत्मा शब्दों में नहीं, जनहित में बसती है। यदि सरकारें अपनी सफलता का पैमाना केवल भाषणों और नारों को बनाती रहीं, तो जनता का भरोसा टूटना तय है। विकास का अर्थ केवल सड़कें, भवन या योजनाएं नहीं, बल्कि पारदर्शिता, संवेदनशीलता और भरोसा भी है।यह लेख सत्ता को आईना दिखाता है—कि शब्दों की चमक क्षणिक होती है, लेकिन जनहित की उपेक्षा स्थायी नुकसान छोड़ जाती है। अब वक्त है कि शासन चकाचौंध से बाहर निकलकर जमीन पर उतरे, क्योंकि जब शब्द थक जाते हैं, तब सच बोलता है—और वही सच लोकतंत्र की असली कसौटी है।