Friday, June 26, 2026
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बलिया में APAAR पंजीकरण फेल, 6.63 लाख छात्रों में 3.01 लाख अब भी बाहर, पेंडिंग 43.64%

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। बलिया जिले में एपीएएआर (APAAR – Automated Permanent Academic Account Registry) पंजीकरण की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। 16 दिसंबर 2025 तक की डीटीएफ प्रगति रिपोर्ट और 20 दिसंबर 2025 को जारी ब्लॉकवार आंकड़ों के अनुसार जिले के कुल 6,63,578 छात्रों के सापेक्ष अब तक केवल 3,46,287 छात्रों का ही APAAR जनरेट हो पाया है, जबकि 3,01,608 छात्र अब भी पंजीकरण से बाहर हैं। जिले में कुल 43.64 प्रतिशत पंजीकरण पेंडिंग दर्ज किया गया है।

नगरा और पंदह ब्लॉक सबसे पीछे

नगरा ब्लॉक में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। यहां कुल 58,478 छात्रों में से केवल 22,271 छात्रों का APAAR बन सका है, जबकि 34,437 छात्र लंबित हैं। नगरा ब्लॉक में 58 प्रतिशत से अधिक पेंडिंग दर्ज की गई है।वहीं पंदह ब्लॉक में 36,985 छात्रों में से केवल 16,425 का ही पंजीकरण हुआ है और लगभग 54 प्रतिशत छात्र अब भी बाहर हैं।

नगर पालिका व अन्य ब्लॉकों में भी हालात खराब

बलिया नगर पालिका क्षेत्र में कुल 20,033 छात्रों में से मात्र 9,426 छात्रों का APAAR जनरेट हो सका है, जबकि 6,288 छात्र पंजीकरण से वंचित हैं।
रसड़ा, हनुमानगंज, सीयर, सोहांव और गड़वार ब्लॉकों में भी 45 से 55 प्रतिशत तक पेंडिंग दर्ज की गई है।

नवानगर सहित कई ब्लॉकों में 40–50% पेंडिंग

नवानगर ब्लॉक में कुल 45,561 छात्रों के सापेक्ष 26,155 छात्रों का APAAR बना है, जबकि 18,684 छात्र अब भी लंबित हैं।
बेरुआरबारी, बांसडीह, चिलकहर, दुबहड़ और बैरिया ब्लॉकों में भी 40 से 50 प्रतिशत पेंडिंग की स्थिति बनी हुई है।

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माध्यमिक शिक्षा में हालात और भी खराब

माध्यमिक शिक्षा स्तर पर स्थिति और गंभीर नजर आ रही है। कुल 2,58,799 छात्रों में से केवल 1,18,171 छात्रों का ही APAAR जनरेट हो पाया है, जबकि 1,31,401 छात्र अब भी पंजीकरण से बाहर हैं। माध्यमिक स्तर पर कुल 54.34 प्रतिशत पेंडिंग दर्ज की गई है।

शिक्षा विभाग ने बताई ये वजहें

शिक्षा विभाग के अनुसार तकनीकी अड़चन, अभिभावकों की उदासीनता और आवश्यक दस्तावेजों की कमी के कारण APAAR पंजीकरण प्रभावित हो रहा है। विभाग की ओर से सभी विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि विशेष अभियान चलाकर शेष छात्रों का पंजीकरण जल्द से जल्द पूरा कराया जाए।

बड़ा सवाल: तय समय में कैसे पूरा होगा पंजीकरण?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 3 लाख से अधिक छात्रों का APAAR पंजीकरण तय समयसीमा में कैसे पूरा होगा, और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय की जाएगी।

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भागलपुर में नशे के नेटवर्क पर पुलिस का बड़ा प्रहार, एक दिन में दो कार्रवाई, छह गिरफ्तार

भागलपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जिले के सबौर थाना क्षेत्र में अवैध शराब और मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस ने एक ही दिन में दो बड़ी और अहम कार्रवाईयों को अंजाम देकर नशे के नेटवर्क को जोरदार झटका दिया है। इन कार्रवाईयों में पुलिस ने कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए 40 लीटर विदेशी शराब, 6 ग्राम ब्राउन शुगर, एक मोटरसाइकिल और एक ऑटो जब्त किया है। सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

पुलिस को पहली सफलता गुप्त सूचना के आधार पर मिली, जब अवैध मादक पदार्थों के कारोबार से जुड़े संदिग्धों के ठिकानों पर छापेमारी की गई। इस दौरान बड़ी हाट निवासी अशोक साव के पुत्र गौरव कुमार, कृष्ण कुमार पासवान के पुत्र कुणाल कुमार, शीतल स्थान निवासी स्वर्गीय आनंदी सिंह के पुत्र कृष्ण कुमार सिंह और बांका जिले के ललसैय निवासी शंकर रजक के पुत्र अमित कुमार को गिरफ्तार किया गया। छापेमारी के दौरान 6 ग्राम ब्राउन शुगर और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई, जिससे क्षेत्र में सक्रिय ड्रग्स सप्लाई चेन की पुष्टि होती है।

दूसरी कार्रवाई में पुलिस को सूचना मिली कि ऑटो के माध्यम से अवैध शराब की खेप भागलपुर की ओर भेजी जा रही है। इसके बाद सबौर थाना पुलिस ने एनएच-80 के समीप सघन वाहन जांच अभियान चलाया। जांच के दौरान एक संदिग्ध ऑटो को रोका गया। पुलिस को देखकर ऑटो सवार भागने लगे, लेकिन त्वरित घेराबंदी कर दोनों को पकड़ लिया गया। ऑटो की तलाशी लेने पर उसमें छिपाकर रखी गई 40 लीटर विदेशी शराब बरामद हुई।

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पकड़े गए आरोपियों की पहचान पक्की सराय निवासी रोहित कुमार और सेवक कुमार के रूप में की गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सभी आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि शराब और ब्राउन शुगर कहां से लाई गई थी और किन इलाकों में इसकी आपूर्ति होनी थी।

पुलिस को आशंका है कि न्यू ईयर को लेकर नशे की खेप खपाने की तैयारी की जा रही थी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध शराब और नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी सख्ती से जारी रहेगा।

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26 दिसंबर 2025 से लागू होगा रेलवे का नया किराया सिस्टम, लंबी दूरी के यात्रियों पर हल्का असर

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारतीय रेलवे ने यात्रियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले की घोषणा करते हुए बताया है कि 26 दिसंबर 2025 से रेलवे नया किराया सिस्टम 2025 लागू किया जाएगा। इस नए ढांचे का उद्देश्य रेलवे की आय बढ़ाने के साथ-साथ आम और नियमित यात्रियों को राहत देना है। रेलवे के अनुसार, इस बदलाव से उसे करीब 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है, जबकि कम दूरी और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों पर इसका असर न्यूनतम रहेगा।

रेलवे ने स्पष्ट किया है कि साधारण श्रेणी में 215 किलोमीटर तक की यात्रा पर किराया पूरी तरह से यथावत रहेगा। यानी कम दूरी के यात्रियों को किसी तरह की अतिरिक्त जेब ढीली नहीं करनी होगी। हालांकि, 215 किलोमीटर से अधिक दूरी की साधारण श्रेणी यात्रा पर प्रति किलोमीटर 1 पैसा किराया बढ़ाया जाएगा। यह बढ़ोतरी इतनी मामूली है कि लंबी दूरी के यात्रियों पर भी इसका ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा।

वहीं मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की नॉन-एसी श्रेणी में प्रति किलोमीटर 2 पैसे की वृद्धि की गई है। इसी तरह, एसी श्रेणियों के किराए में भी प्रति किलोमीटर 2 पैसे बढ़ाने का फैसला लिया गया है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई यात्री 500 किलोमीटर की नॉन-एसी यात्रा करता है, तो उसे केवल 10 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे, जिसे रेलवे ने संतुलित और व्यावहारिक बढ़ोतरी बताया है।

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रेलवे ने यह भी साफ किया है कि उपनगरीय ट्रेनों और मासिक सीजन टिकट (एमएसटी) के किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे रोजाना लोकल ट्रेन से सफर करने वाले लाखों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। रेलवे का कहना है कि इन श्रेणियों को सुरक्षित रखना इसलिए जरूरी था, ताकि नियमित और कम आय वाले यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़े।

कुल मिलाकर, रेलवे का नया किराया सिस्टम लंबी दूरी की यात्राओं में मामूली बढ़ोतरी के साथ राजस्व बढ़ाने की दिशा में एक संतुलित कदम माना जा रहा है।

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बांग्लादेश में हिंसा का तांडव: छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद आगजनी, एक बच्ची की दर्दनाक मौत

लक्ष्मीपुर में नेता के घर में आग, देशभर में तोड़फोड़; सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम

ढाका (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बांग्लादेश में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मृत्यु के बाद भड़की व्यापक हिंसा के बीच एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लक्ष्मीपुर सदर उपजिला में शनिवार को एक राजनीतिक नेता के घर में आग लगने से एक मासूम बच्ची की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जा रहा है कि घर को बाहर से बंद कर आग लगाई गई थी।

यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब पूरे बांग्लादेश में हादी की मौत को लेकर तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं कई इलाकों में सामने आई हैं, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

12 दिसंबर को हुआ था हमला

गौरतलब है कि 12 दिसंबर को ढाका के बिजोयनगर इलाके में एक चुनावी अभियान के दौरान नकाबपोश बंदूकधारियों ने 32 वर्षीय छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी को गोली मार दी थी। गंभीर रूप से घायल हादी को इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां गुरुवार को उनकी मृत्यु हो गई।

शनिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हादी को ढाका विश्वविद्यालय मस्जिद के पास राष्ट्रीय कवि काजी नजरुल इस्लाम की समाधि के बगल में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

देशभर में हिंसा और तोड़फोड़

हादी की मौत के बाद बांग्लादेश के कई हिस्सों में हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। गुरुवार को चटोग्राम में सहायक भारतीय उच्चायुक्त के आवास पर पत्थरबाजी की घटना भी हुई, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए।

सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम

हादी के अंतिम संस्कार के तुरंत बाद उनकी पार्टी इंकलाब मंच ने अंतरिम सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम जारी किया है। पार्टी ने हादी की हत्या में शामिल दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।

शनिवार दोपहर ढाका के शाहबाग चौराहे पर हजारों लोगों के एकत्र होने के बाद यह अल्टीमेटम दिया गया। पार्टी के प्रवक्ता और जन आंदोलन से जुड़े नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

फिलहाल हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं। सरकार की ओर से स्थिति पर नजर रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

राम से मिलने अयोध्या पहुंचे भगवान शिव: मधुसूदन आचार्य

संगीतमय श्रीराम कथा के पंचम दिवस पर उमड़ा श्रद्धा-भक्ति का सैलाब

भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के भागलपुर स्थित जयसवाल धर्मशाला में आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा के पंचम दिवस पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर राष्ट्रीय कथावाचक मधुसूदन आचार्य के श्रीमुख से कथा श्रवण हेतु सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कथा के दौरान आचार्य मधुसूदन ने भगवान श्रीराम जन्मोत्सव का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीराम तथा उनके चारों भाइयों का नामकरण स्वयं भगवान शिव द्वारा किया गया था। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के जन्म के समय उनकी दिव्य ध्वनि देवताओं से लेकर संपूर्ण सृष्टि तक गूंज उठी थी।

रावण के अहंकार और नियति का वर्णन

श्रीराम कथा के दौरान मधुसूदन आचार्य ने रावण प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि अपने अहंकार के कारण रावण स्वयं को अजेय समझ बैठा था, जबकि विधाता द्वारा पहले ही यह निर्धारित कर दिया गया था कि उसका अंत नर और वानर के हाथों होगा।
रावण द्वारा भगवान शिव की आराधना और अपने सिरों के बलिदान की कथा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

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राम-लक्ष्मण लीला और तुलसी का महत्व

कथा में मेघनाथ, शक्ति बाण, भगवान राम और लक्ष्मण की लीलाओं के साथ-साथ तुलसी के आध्यात्मिक महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। आचार्य जी ने कहा कि भगवान को अर्पित किए गए पुष्प और तुलसी को श्रद्धा, नियम और शुद्ध भाव के साथ ही ग्रहण करना चाहिए।

श्रद्धालुओं की रही विशेष उपस्थिति

इस दिव्य अवसर पर मनोज जायसवाल, शिवशंकर जायसवाल, सतीश जायसवाल, गुलाबचंद यादव, मणि यादव, वासुदेव तिवारी, प्रदीप पांडे, राजू जायसवाल, विपिन जायसवाल, नलनीश तिवारी, कपूर वर्मा, अंकुर जायसवाल, पिंटू वर्मा, दीपक साहनी, अवध नारायण मिश्र, राजेश्वर मिश्र, कृष्णा पांडे, ओमप्रकाश पांडे, विनय जायसवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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आगे भी जारी रहेगी श्रीराम कथा

कथा के समापन पर आयोजकों ने बताया कि श्रीराम कथा का आयोजन आगे भी जारी रहेगा, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में धर्म, संस्कार और भक्ति भाव को सुदृढ़ करना है।

एक साथ पांच बदमाशों का हाफ एनकाउंटर, चर्चा में बलिया पुलिस

आयुष यादव हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई, पांच घायल बदमाश गिरफ्तार

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। बलिया जिले में उभांव थाना पुलिस ने बहुचर्चित आयुष यादव हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक साथ पांच वांछित बदमाशों का हाफ एनकाउंटर कर उन्हें गिरफ्तार किया है। इस साहसिक कार्रवाई के बाद एक बार फिर बलिया पुलिस का “ऑपरेशन लंगड़ा” सुर्खियों में आ गया है। मुठभेड़ में घायल सभी बदमाशों का इलाज जिला अस्पताल बलिया में चल रहा है।

पुलिस मुठभेड़ का पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 21 दिसंबर की रात करीब 2:45 बजे उभांव थाना पुलिस टीम वांछित अपराधियों की तलाश में गश्त कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि चैनपुर के पास बंधे पर कुछ बदमाश कई वाहनों के साथ एकत्र हैं और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं।

सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और चेकिंग शुरू की। खुद को पुलिस से घिरता देख बदमाशों ने जान से मारने की नीयत से पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई करते हुए बदमाशों के पैरों में गोली मारी, जिससे पांचों बदमाश घायल हो गए।

घायल बदमाशों की पहचान

पूछताछ में बदमाशों ने अपने नाम बताए—

• नितिश यादव उर्फ अभयरंजन पुत्र राजमंगल यादव

• आशीष यादव उर्फ सतीश यादव पुत्र जयप्रकाश यादव

• दिलीप यादव उर्फ राका पुत्र राजेंद्र यादव

• राहुल वर्मा पुत्र विंध्याचल प्रसाद

बदमाशों ने बताया कि उनका एक अन्य साथी आनंद कुमार वर्मा पुत्र राजकुमार वर्मा मौके से फरार हो गया था, जिसे बाद में पुलिस ने घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, सभी बदमाशों के दाहिने पैर में गोली लगी है।

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आयुष यादव हत्या की कबूलनामा

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि 13 दिसंबर 2025 को बेल्थरा रोड कस्बे में उन्होंने आयुष यादव की गोली मारकर हत्या की थी।

हथियार और वाहन बरामद

पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से— दो चार पहिया वाहन, घटना में प्रयुक्त दो पहिया वाहन, अवैध पिस्टल, तमंचा, कारतूस, बरामद किए हैं।

पुलिस का बयान

इस संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) दिनेश कुमार शुक्ला ने बताया कि पुलिस कार्रवाई पूरी तरह से आत्मरक्षा में की गई है। आरोपियों के आपराधिक इतिहास की जांच की जा रही है और उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है।

एक आरोपी ने किया आत्मसमर्पण

उधर, आयुष यादव हत्याकांड में नामजद एक अन्य आरोपी रॉबिन सिंह ने 20 दिसंबर की शाम मऊ थाने में आत्मसमर्पण कर दिया है। आत्मसमर्पण के दौरान उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह खुद को निर्दोष बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग करता नजर आ रहा है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच जारी है।

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पुलिस की सख्ती से बढ़ा भरोसा

लगातार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से बलिया पुलिस की सक्रियता एक बार फिर साबित हुई है। इससे जहां अपराधियों में दहशत का माहौल है, वहीं आम जनता में सुरक्षा को लेकर भरोसा मजबूत हुआ है।

उर्मिला का वनवास: त्याग, मौन और आंतरिक तपस्या का अदृश्य महाकाव्य

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सुनीता कुमारी | बिहार

रामायण में वनवास का नाम आते ही राम, सीता और लक्ष्मण का चित्र हमारे मन में उभर आता है। चौदह वर्षों का कठोर वनजीवन, राक्षसों से संघर्ष और अंततः धर्म की स्थापना—यही रामायण का प्रचलित स्वरूप है।
परंतु इसी महाकाव्य में एक ऐसा वनवास भी है, जो जंगलों में नहीं, महलों के भीतर घटित होता है; जो दिखाई नहीं देता, पर भीतर ही भीतर मनुष्य को तपाकर निर्मल कर देता है। यह है—उर्मिला का वनवास।

उर्मिला: मौन में जिया गया वनवास

उर्मिला मिथिला की राजकुमारी थीं—सीता की छोटी बहन और लक्ष्मण की पत्नी। विवाह के कुछ ही समय बाद लक्ष्मण राम के साथ वनवास पर चले गए। यह निर्णय धर्म और कर्तव्य की दृष्टि से महान था, लेकिन उसी क्षण उर्मिला के जीवन में एक लंबा, निःशब्द अंधकार उतर आया।
उन्हें न साथ जाने का विकल्प मिला, न अपने त्याग की घोषणा करने का अवसर। वे अयोध्या के राजमहल में रहीं, लेकिन उनका मन, उनका अस्तित्व—सब वन में चला गया।

बाह्य नहीं, आंतरिक वनवास

सीता ने वन की कठोरता झेली, लक्ष्मण ने सेवा और सुरक्षा का दायित्व निभाया, पर उर्मिला ने वियोग और प्रतीक्षा का तप सहा।
उनका वनवास शरीर का नहीं, आत्मा का था।
चार दीवारों के भीतर रहते हुए भी उनका जीवन विरक्ति, संयम और मौन साधना बन गया।
जैसे दीपक घर में रखा हो, पर उसकी लौ बाहर फैले अंधकार से लड़ रही हो—उर्मिला वैसी ही दीपशिखा थीं।

निद्रा का त्याग और अदृश्य बलिदान

रामायण में लक्ष्मण के चौदह वर्षों तक निद्रा त्याग का उल्लेख प्रसिद्ध है। किंतु कई विद्वानों के अनुसार यह शक्ति उर्मिला के त्याग से संभव हुई—मानो लक्ष्मण की नींद उर्मिला ने अपने हिस्से में ले ली हो।
यह तथ्य चाहे प्रतीकात्मक हो, पर यह उर्मिला के बलिदान को अदृश्य और विराट बना देता है।
उन्होंने स्वयं को मिटाकर, अपने पति के धर्म को संभव बनाया।

वह त्याग, जिसे इतिहास ने नहीं सराहा

राम के वनवास पर अयोध्या रोई, सीता के दुख पर इतिहास ने आँसू बहाए, लक्ष्मण की सेवा की प्रशंसा हुई—पर उर्मिला के मौन का कोई उत्सव नहीं मनाया गया।
उनका त्याग न देखा गया, न पूछा गया।
यह समाज की उस प्रवृत्ति को उजागर करता है, जो दिखने वाले बलिदान को महिमामंडित करता है, पर मौन सहनशीलता को सहज मानकर अनदेखा कर देता है।

नारी का धैर्य या सामाजिक अपेक्षा?

यह प्रश्न स्वाभाविक है—क्या उर्मिला का मौन स्वैच्छिक धैर्य था या समाज की अपेक्षा?
संभवतः दोनों।
रामायणकालीन समाज में नारी से त्याग की अपेक्षा थी, पर उर्मिला केवल अपेक्षा पूरी नहीं करतीं—वे त्याग को अर्थ देती हैं।
वे दुख को शिकायत नहीं, साधना बना लेती हैं।
उनका मौन कमजोरी नहीं, बल्कि शक्ति है।

उर्मिला और लक्ष्मण: दो प्रकार का वनवास

• लक्ष्मण का वनवास सक्रिय है—जागरण, रक्षा, संघर्ष

• उर्मिला का वनवास निष्क्रिय दिखता है, पर भीतर से कहीं अधिक कठिन—प्रतीक्षा, स्मृति और विरह

यदि लक्ष्मण सीमा पर खड़ा सैनिक हैं, तो उर्मिला वह माँ हैं, जिसकी हर साँस अपनों की सलामती पर टिकी है।

आधुनिक संदर्भ में उर्मिला

आज उर्मिला उन असंख्य स्त्रियों और व्यक्तियों का प्रतीक हैं—

• जो परिवार के लिए अपने सपनों को स्थगित करते हैं

• जो दूसरों की सफलता के पीछे अदृश्य श्रम देते हैं

• जो साथ होते हुए भी अकेलापन जीते हैं

उर्मिला केवल पौराणिक पात्र नहीं, बल्कि संवेदनशील मानव चेतना का प्रतीक हैं।

उर्मिला का वनवास रामायण का उपेक्षित अध्याय नहीं, बल्कि उसकी आत्मा है।
यह हमें सिखाता है कि—

• धर्म केवल रणभूमि में नहीं, प्रतीक्षा कक्षों में भी निभाया जाता है

• त्याग केवल वनों में नहीं, महलों के सन्नाटे में भी होता है

यदि रामायण को केवल वीरता का ग्रंथ माना जाए, तो वह अधूरी है।
उसे पूर्ण बनाता है उर्मिला का मौन, उनका धैर्य और उनका अदृश्य वनवास। क्योंकि इतिहास उन्हें याद रखता है जो बोलते हैं,
लेकिन संस्कृति उन्हीं से बनती है—जो चुपचाप सहते हैं।

लार नगर पंचायत के रैन बसेरा में अव्यवस्था चरम पर, बदहाली पर उठे सवाल


लार/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)।
लार नगर पंचायत द्वारा संचालित महिला रैन बसेरा की स्थिति अत्यंत दयनीय सामने आई है। निरीक्षण के दौरान रैन बसेरा में बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मौके पर पाया गया कि महिला रैन बसेरा में न तो कंबल की समुचित व्यवस्था है और न ही बिस्तर उपलब्ध हैं। ठहरने वाले जरूरतमंदों के लिए बनाए गए कमरों की हालत खराब है, वहीं बाथरूम और शौचालयों में गंदगी पसरी हुई है। साफ-सफाई के नाम पर केवल औपचारिकता नजर आई।
निरीक्षण के दौरान एक और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई, जब रैन बसेरा के अंदर सम्मानित व्यक्तियों की तस्वीरें जमीन पर पड़ी मिलीं। यह स्थिति न केवल लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि संवेदनहीनता का भी प्रमाण है।
व्यवस्था और निगरानी पर सवाल
महिलाओं के लिए बनाए गए रैन बसेरा में सुविधाओं की कमी और रख-रखाव की बदहाली यह सोचने पर मजबूर करती है कि नगर पंचायत द्वारा इसकी नियमित निगरानी आखिर क्यों नहीं की जा रही है। ठंड के मौसम में रैन बसेरा जरूरतमंदों के लिए राहत का केंद्र होना चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं।
अब देखना होगा कि नगर पंचायत और जिला प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है।

क्या रैन बसेरा की व्यवस्थाएं जल्द सुधरेंगी?।

क्या जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय होगी?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्यशैली को स्पष्ट करेंगे।

एसडीएम सदर के आश्वासन पर अनिश्चितकालीन धरना खत्म

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जिला पंचायत सदस्य सुरेश चंद साहनी एवं सामाजिक कार्यकर्ता रवींद्र जैन के नेतृत्व में सदर तहसील के केवला पुर खुर्द में राजगढ़ समय माता मंदिर पर दो सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहा जन आंदोलन उपजिलाधिकारी सदर जितेंद्र कुमार एवं सिंचाई खंड द्वितीय के सहायक अभियंता जितेंद्र पटेल के आश्वासन पर देर रात खत्म हो गया।
धरना स्थल पर पहुंचे उपजिलाधिकारी जितेंद्र कुमार और धरने का नेतृत्वकर्ता जिला पंचायत सदस्य सुरेश चंद साहनी, रवींद्र जैन एवं ग्रामीणों से करीब एक घंटे तक वार्ता चली। धरने पर बैठे लोग अपनी मांग पर अड़े थे। उनका कहना था कि जब तक जिला प्रशासन द्वारा स्थाई समाधान नहीं किया गया, तब तक आंदोलन ख़त्म नहीं होगा। एसडीएम ने आश्वासन दिया कि शीघ्र ही कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही किसानों की भूमि का मुआवजा देते हुए बंधे का निर्माण करवाया जाएगा। नदी में कटान वाले स्थानों पर पक्के ठोकर का निर्माण कराया जाएगा। एसडीएम ने कहा कि शीघ्र ही इस पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इसी बात पर अधिकारियों और आंदोलनकारियों में सहमति बनी। अधिकारियों के आश्वासन पर अनिश्चिकालीन धरना समाप्त हो गया।
इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता रवींद्र जैन, अंगद चौहान, विद्यासागर यादव, हरीश आर्य, धर्मेंद्र सिंह, सुनील सिंह, गणेश चौहान, शैलेश यादव, राजकुमार राय, दुर्गेश यादव, राकेश यादव, पन्नेलाल, ईश्वर चंद, धर्मेंद्र यादव, जितेंद्र सिंह आदि मौजूद रहें।

राजकीय बीज घोटाले से हड़कंप, हजारों किसानों की रबी फसल पर संकट

अमानक गेहूं बीज डीबी डब्ल्यू–187 की सप्लाई से बुआई फेल, कृषि विभाग की भूमिका कटघरे में

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में रबी 2025–26 अभियान के दौरान किसानों को वितरित किए गए राजकीय गेहूं बीज की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कृषि विभाग के माध्यम से उपलब्ध कराए गए गेहूं बीज डीबी डब्ल्यू–187 के अमानक और खराब होने के आरोपों से पूरे जिले में हड़कंप मचा हुआ है। खेतों में बुआई के बाद अंकुरण न होने से हजारों किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है और उन्हें लाखों रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार हरदोई जनपद के संडीला में तैयार गेहूं बीज की आपूर्ति महराजगंज जिले के मिठौरा, परतावल समेत कई ब्लाकों में की गई। मिठौरा ब्लाक में ही लगभग 600 बोरी बीज एक ट्रक के माध्यम से उतारी गई। किसानों का कहना है कि निर्धारित मानकों के अनुरूप बीज की जांच किए बिना ही कागजी औपचारिकताएं पूरी कर बीज वितरित कर दिए गए। परिणाम स्वरूप कई खेतों में बीज सड़ गए, जबकि कई स्थानों पर अंकुरण बिल्कुल नहीं हुआ।
मिठौरा क्षेत्र के किसान राजेश कुमार पटेल, त्रिलोकी, ठगइ, सुदामा गुप्ता, कृष्ण बिहारी पांडेय, भूखल यादव, शिवेश पांडेय, रघुनाथ यादव, दयानंद पांडेय, गणेश कुमार पांडेय, ओमप्रकाश राम, हरिराम, बांके बिहारी, अनवर अली सहित करीब 70 किसानों ने जिला कृषि अधिकारी को लिखित प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है।
वहीं परतावल क्षेत्र के उमेश, राजेंद्र प्रसाद, मोहम्मद रफी समेत अन्य किसानों ने भी संयुक्त प्रार्थना पत्र देकर मुआवजा और आपूर्तिकर्ता संस्था की जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई है। मामले ने उस समय नया मोड़ लिया जब उप कृषि निदेशक, महराजगंज द्वारा केंद्रीय बीज भंडार प्रभारी को प्रशासनिक रूप से हटाने का आदेश जारी किया गया। हालांकि आदेश में न तो किसी जांच का उल्लेख था और न ही दोष सिद्ध होने के स्पष्ट साक्ष्य। इसके साथ ही कृषि निदेशक, उत्तर प्रदेश के पत्र संख्या 1389 जी 06 सितंबर 2017 के तहत अमानक बीज की स्थिति में आपूर्तिकर्ता संस्था की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई। इस पर गोरखपुर मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक अरविंद कुमार सिंह ने रबी अभियान के शीर्ष समय में कार्य बाधित होने की आशंका को देखते हुए 15 दिसंबर 2025 को उक्त आदेश को स्थगित कर दिया। साथ ही बीजों की गुणवत्ता, जमाव और अंकुरण की स्थिति का आकलन करने के लिए पृथक जांच समिति के गठन का निर्णय लिया गया है। समिति द्वारा नमूना संग्रह कर मौके पर जांच की जाएगी और यदि किसी प्रकार की राजकीय या किसानों की क्षति पाई जाती है तो उसका विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया जाएगा।उधर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र मुआवजा, दोषियों पर कार्रवाई और आपूर्तिकर्ता की जवाबदेही तय नहीं की गई तो वे भाकियू भानु के प्रदेश सचिव नीरज कुमार मिश्र के नेतृत्व में किसान यूनियन के साथ मिलकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगे। किसानों का कहना है कि यह मामला सीधे उनकी आजीविका से जुड़ा है और किसी भी स्तर की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ग्रामीण अंचलों में इस प्रकरण को लेकर जबरदस्त आक्रोश है और पूरे जिले की निगाहें अब गठित जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिससे किसानों को न्याय और राहत मिलने की उम्मीद जुड़ी है।

नए साल पर दहलाने की साजिश: पठानकोट के रास्ते पाक आतंकी घुसपैठ की फिराक में

सैन्य ठिकानों पर हमले का षड्यंत्र, सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर

पठानकोट (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। नए साल से पहले पंजाब में दहशत फैलाने की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। खुफिया एजेंसियों के इनपुट के अनुसार पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन एक बार फिर पठानकोट के रास्ते घुसपैठ कर बड़े आतंकी हमले की योजना बना रहे हैं। इस साजिश के तहत सीमा क्षेत्र में सक्रिय स्लीपर सेल को भी अलर्ट कर दिया गया है।

खुफिया जानकारी के आधार पर पंजाब पुलिस ने गंदला लाहड़ी क्षेत्र से आतंकियों के संदिग्ध मददगार बिल्लू गुज्जर को हिरासत में लिया है, जबकि उसका साथी नजाकत हुसैन फिलहाल फरार बताया जा रहा है। उसकी तलाश में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सघन अभियान चलाया जा रहा है।

पुलिस का बयान

पठानकोट के एसएसपी दलजिंदर सिंह ने बताया कि बिल्लू गुज्जर को संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में हिरासत में लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। अन्य आरोपों और नेटवर्क से जुड़े तथ्यों की गहन जांच की जा रही है।
एसएसपी के अनुसार, खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन पठानकोट एयरबेस, रेलवे स्टेशन और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं।

साजिश का मास्टरमाइंड

जांच एजेंसियों के मुताबिक इस आतंकी साजिश का मास्टरमाइंड पाकिस्तानी नागरिक मुजफ्फर अहमद बताया जा रहा है, जो सीमा पार से आतंकी नेटवर्क संचालित कर रहा है। इन आतंकियों द्वारा संचार के लिए वर्चुअल नंबरों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है, जिससे उनकी पहचान करना चुनौतीपूर्ण बन गया है।

25 से 31 दिसंबर के बीच हमले की आशंका

खुफिया इनपुट में यह भी बताया गया है कि आतंकी हमला नए साल की पूर्व संध्या यानी 25 से 31 दिसंबर के बीच किया जा सकता है। एक सूचना के अनुसार, कुछ आतंकी स्थानीय मददगारों की सहायता से जम्मू-कश्मीर और पठानकोट क्षेत्र में घुसपैठ की फिराक में हैं।

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सुरक्षा व्यवस्था सख्त

संभावित खतरे को देखते हुए पठानकोट जिले के संवेदनशील इलाकों डमटाल, ढांगू, भदरोया और मीलवां में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस, सेना और विशेष कमांडो यूनिट्स की तैनाती बढ़ा दी गई है।
रात के समय गश्त और विशेष चेकिंग अभियान तेज कर दिए गए हैं। अंतरराज्यीय नाकों पर सख्त जांच की जा रही है, ताकि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की आवाजाही को रोका जा सके।

पठानकोट एयरबेस पर पहले भी हो चुका है हमला

गौरतलब है कि 1 जनवरी 2016 को पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला हो चुका है, जिसमें आतंकियों ने सेना की वर्दी पहनकर सुरक्षा में सेंध लगाई थी। इसी इतिहास को देखते हुए इस बार सुरक्षा एजेंसियां कोई भी चूक नहीं करना चाहतीं और पूरे इलाके में 24 घंटे निगरानी और अलर्ट मोड में काम कर रही हैं।

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दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में भीषण गोलीबारी, शराबखाने में अंधाधुंध फायरिंग; 9 लोगों की मौत

अवैध बार में घुसे हमलावर, कई घायल; मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका

जोहानिसबर्ग (राष्ट्र की परम्परा)। दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में रविवार को दिल दहला देने वाली गोलीबारी की घटना सामने आई है। जोहानिसबर्ग के पश्चिमी हिस्से में स्थित बेकर्सडाल टाउनशिप में एक अवैध शराबखाने में अज्ञात हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिसमें कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बंदूकधारियों ने बिना किसी चेतावनी के शराबखाने में मौजूद लोगों पर गोलियां बरसाईं। पहले इस हमले में 10 लोगों की मौत की सूचना सामने आई थी, लेकिन बाद में पुलिस ने मृतकों की संख्या नौ होने की पुष्टि की है।

पुलिस का बयान

दक्षिण अफ्रीका के सार्वजनिक प्रसारक SABC News के अनुसार, पुलिस ने बताया कि हमलावर दो गाड़ियों में सवार होकर मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने शराबखाने के अंदर मौजूद लोगों पर गोलियां चलाईं और भागते समय भी फायरिंग करते रहे।
प्रांतीय पुलिस आयुक्त मेजर जनरल फ्रेड केकाना ने बताया कि मृतकों में एक ड्राइवर भी शामिल है, जो बार के बाहर मौजूद था।

बढ़ सकता है मृतकों का आंकड़ा

हमलावर पुलिस के पहुंचने से पहले ही मौके से फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही आपातकालीन सेवाएं मौके पर पहुंचीं और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। पुलिस के अनुसार, कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल हमले के पीछे के मकसद और संदिग्धों की पहचान नहीं हो सकी है। जांच जारी है।

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दिसंबर में दूसरी बड़ी गोलीबारी

गौरतलब है कि दिसंबर महीने में दक्षिण अफ्रीका में यह दूसरी बड़ी सामूहिक गोलीबारी की घटना है। इससे पहले राजधानी प्रिटोरिया के पास एक हॉस्टल में हुए हमले में तीन साल के बच्चे समेत 12 लोगों की मौत हो गई थी। बेकर्सडाल टाउनशिप में अवैध रूप से शराब परोसे जाने की बात भी सामने आ रही है, जिस पर पुलिस जांच कर रही है।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने दक्षिण अफ्रीका में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमराई, सरकार सिर्फ बयानबाज़ी में व्यस्त: रणजीत विश्वकर्मा

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
उत्तर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए जनता समता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणजीत विश्वकर्मा ने कहा है कि पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग को सरकार ने पूरी तरह कमजोर कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि आम जनता इलाज के लिए दर-दर भटक रही है, लेकिन सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है।
रणजीत विश्वकर्मा ने कहा कि कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, महराजगंज सहित प्रदेश के लगभग सभी जिलों की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हो चुकी हैं। सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों, नर्सों, स्टाफ नर्स, जूनियर डॉक्टर, फार्मासिस्ट, दवा वितरक, एक्स-रे टेक्नीशियन, सीटी स्कैन और एमआरआई ऑपरेटर जैसे जरूरी पदों की भारी कमी है, जिससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल अखबारों और टीवी चैनलों पर बयानबाज़ी तक सीमित है और “अपनी डफली, अपना राग” की नीति पर चल रही है। जनता की आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। अगर सरकार स्थायी नियुक्ति करने में सक्षम नहीं है, तो कम से कम दैनिक वेतन या संविदा पर ही इन पदों को भरकर स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त किया जाना चाहिए।
रणजीत विश्वकर्मा ने मांग की कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और मानक के अनुसार स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि जनता को सही मायने में स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अब भी नहीं चेती, तो विपक्ष को इस मुद्दे पर सदन की कार्यवाही ठप करानी पड़ेगी, तभी सरकार की नींद खुलेगी।
उन्होंने अंत में कहा कि प्रदेश की जनता आज स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली के कारण तबाह हो चुकी है और इसके लिए पूरी तरह मौजूदा सरकार जिम्मेदार है।

चतुर्थ सांसद खेल महोत्सव 2025 का भव्य शुभारंभ, किरावली में खेल और संस्कृति का अद्भुत संगम

नमो दौड़ से हुई शुरुआत, ग्रामीण खिलाड़ियों में दिखा जबरदस्त उत्साह

किरावली/आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से संसदीय क्षेत्र फतेहपुर सीकरी में आयोजित चतुर्थ सांसद खेल महोत्सव 2025 का भव्य शुभारंभ मोनी बाबा आश्रम मिनी स्टेडियम, किरावली में हुआ। किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद राजकुमार चाहर ने नमो दौड़ का उद्घाटन, दीप प्रज्वलन और हरी झंडी दिखाकर खेल महोत्सव की औपचारिक शुरुआत की।

उद्घाटन समारोह में हजारों युवा, खिलाड़ी और खेलप्रेमी मौजूद रहे। आयोजन स्थल पर खिलाड़ियों में गजब का उत्साह और ऊर्जा देखने को मिली। सांसद खेल महोत्सव के अंतर्गत दौड़, रस्साकशी, लंबी कूद सहित कई खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीण अंचलों के खिलाड़ियों ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया।

खेल प्रतियोगिताओं के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन को और भी खास बना दिया। देशभक्ति गीतों, लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को जोश, उल्लास और राष्ट्रीय भावना से भर दिया।

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इस अवसर पर सांसद राजकुमार चाहर ने कहा कि सांसद खेल महोत्सव का उद्देश्य युवाओं को खेलों से जोड़कर उन्हें स्वस्थ, अनुशासित और नशामुक्त जीवन की ओर प्रेरित करना है। साथ ही फिट इंडिया और खेलो इंडिया अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाना भी इस आयोजन का प्रमुख लक्ष्य है। उन्होंने घोषणा की कि फतेहपुर सीकरी की सभी पांच विधानसभाओं में कबड्डी और कुश्ती के लिए गद्दों की व्यवस्था सांसद निधि से की जाएगी। इसके अलावा अकोला और किरावली स्टेडियम में ट्रैक का सीसी निर्माण भी कराया जाएगा।

बालिका वर्ग की दौड़ प्रतियोगिता में विजेता खिलाड़ियों को ₹11,000, ₹7,100 और ₹5,100 की नकद पुरस्कार राशि देने की भी घोषणा की गई। सांसद खेल महोत्सव 2025 का समापन 25 दिसंबर को मिनी स्टेडियम, अकोला में होगा, जहां सभी विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा।

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डॉ. सतीश पाण्डेय

महराजगंज (राष्ट्र की परंपरा)।विकास किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल उद्देश्य माना जाता है। सड़कें, पुल, ऊंची इमारतें, स्मार्ट सिटी और बड़े-बड़े प्रोजेक्ट आज विकास के प्रतीक बन चुके हैं। हर मंच से इन्हीं उपलब्धियों का बखान किया जाता है, लेकिन सबसे अहम सवाल यह है कि क्या यह विकास वास्तव में आम जनता की जिंदगी को सरल, सुरक्षित और सम्मानजनक बना पा रहा है, या फिर यह केवल कागजी रिपोर्टों, विज्ञापनों और राजनीतिक शोर तक सीमित होकर रह गया है।आज आम नागरिक महंगाई की मार, बेरोजगारी की चिंता, शिक्षा और स्वास्थ्य की दुश्वारियों तथा बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। शहरों में जहां एक ओर चमचमाती इमारतें और आधुनिक सुविधाएं दिखाई देती हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हीं शहरों की झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले लोग साफ पानी, स्वच्छता और इलाज जैसी मूल जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गांवों की हालत भी इससे अलग नहीं है। आजादी के दशकों बाद भी कई ग्रामीण इलाकों में पक्की सड़क, नियमित बिजली, शुद्ध पेयजल और स्थायी रोजगार अब भी अधूरे सपने बने हुए हैं।बेरोजगारी ने सबसे अधिक युवा वर्ग को प्रभावित किया है। डिग्री और तकनीकी योग्यता होने के बावजूद युवाओं को अस्थायी काम करने या लंबे समय तक बेरोजगार रहने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है। किसान बढ़ती लागत और फसल के उचित मूल्य के बीच फंसा हुआ है। किसानों की आय बढ़ाने के सरकारी दावे कागजों में प्रभावी नजर आते हैं, लेकिन खेतों में मेहनत करने वाले किसान की स्थिति आज भी असुरक्षित बनी हुई है। मजदूर वर्ग को सम्मानजनक मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्यस्थल का अब भी इंतजार है।स्वास्थ्य सेवाएं लगातार महंगी होती जा रही हैं। निजी अस्पतालों में इलाज आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है, जबकि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों, दवाइयों और संसाधनों की कमी मरीजों की परेशानियां बढ़ा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन ग्रामीण और गरीब तबके के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आज भी नहीं पहुंच पा रही है। स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव भविष्य की नींव को कमजोर कर रहा है।लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता की आवाज होती है, लेकिन विडंबना यह है कि यही आवाज विकास के शोर में दबती जा रही है। योजनाएं अक्सर ऊपर से नीचे थोप दी जाती हैं, जबकि वास्तविक जरूरतें नीचे से ऊपर तय होनी चाहिए। आम आदमी की समस्याएं फाइलों और बैठकों तक सिमट जाती हैं और समाधान घोषणाओं तक ही सीमित रह जाते हैं।विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब उसका लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। केवल भौतिक ढांचे का विस्तार ही विकास नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय, रोजगार के अवसर, सुलभ शिक्षा और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं भी उतनी ही आवश्यक हैं। नीति-निर्माताओं को यह समझना होगा कि वास्तविक प्रगति वही है, जिसमें आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी में सकारात्मक और स्थायी बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे।यदि समय रहते विकास की दिशा को जनता की वास्तविक जरूरतों से नहीं जोड़ा गया, तो विकास का शोर और तेज होता जाएगा, लेकिन आम जनता की आवाज और कमजोर होती चली जाएगी। यही स्थिति किसी भी लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित हो सकती है।