Friday, March 13, 2026
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शिकारपुर चौकी प्रभारी अवधेश सिंह को भावभीनी विदाई, फूल-माला और अंगवस्त्र से हुआ सम्मान

करीब दो वर्षों तक संभाली चौकी की जिम्मेदारी, स्थानांतरण पर पत्रकारों व क्षेत्रीय लोगों ने दी विदाई

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भिटौली थाना क्षेत्र अंतर्गत शिकारपुर चौराहे की चौकी पर लगभग दो वर्षों तक सेवा देने के बाद चौकी प्रभारी अवधेश सिंह के स्थानांतरण पर स्थानीय पत्रकारों और क्षेत्र के संभ्रांत लोगों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी। इस दौरान लोगों ने फूल-मालाओं और अंगवस्त्र से सम्मानित कर उन्हें नए कार्यस्थल चौकी फरेंदा के लिए रवाना किया।
बताया जाता है कि 5 मार्च 2024 को शिकारपुर चौकी का कार्यभार संभालने वाले चौकी प्रभारी अवधेश सिंह ने अपने कार्यकाल में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के साथ ही सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से क्षेत्र में पंचमुखी हनुमान मंदिर का निर्माण कराया गया, जिससे स्थानीय लोगों में धार्मिक आस्था और विश्वास को नई ऊर्जा मिली।
विदाई समारोह में मौजूद लोगों ने कहा कि अवधेश सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान निष्पक्षता, स्पष्टता और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया। उनकी कार्यशैली और व्यवहार के कारण क्षेत्र के लोगों में उनके प्रति विशेष सम्मान और लगाव बना रहा।
इस अवसर पर पत्रकार मार्कण्डेय दूबे, श्यामसुंदर गौण, कैलाश सिंह, विपिन सिंह और सोनू मोदनवाल सहित क्षेत्र के संभ्रांत नागरिक रघुवंश सिंह, सन्नी,
रामनिवास वर्मा, रवि गुप्ता, राजकुमार, सोनू वर्मा, राहुल वर्मा, विनोद, रंजय आदि ने उन्हें फूल-मालाओं से सम्मानित कर शुभकामनाएं दीं।
विदाई के समय माहौल भावुक हो गया और कई लोगों की आंखें नम हो गईं। लोगों ने उनके उज्ज्वल भविष्य और नए कार्यस्थल पर सफलता की कामना की।
इस मौके पर अभिजीत सिंह, विक्रम, बिकाऊ, योगेंद्र, अरविंद, विनोद, अनूप, सुनील सहित क्षेत्र के अनेक लोग मौजूद रहे और विदाई समारोह में भाग लेकर उन्हें शुभकामनाएं दीं।

चनकौली में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ उग्र हुआ आंदोलन, पांचवें दिन भी जारी रहा क्रमिक अनशन

जांच की तिथि घोषित होने के बावजूद रिपोर्ट सार्वजनिक होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं ग्रामीण,सिर्फ जांच की घोषणा नहीं, दोषियों पर कार्रवाई चाहिए—-
अनशनकारी

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सिसवां ब्लाक अंतर्गत ग्राम सभा चनकौली में कथित भ्रष्टाचार और विकास कार्यों में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर जिला मुख्यालय पर चल रहा ग्रामीणों का क्रमिक अनशन लगातार तेज होता जा रहा है। मंगलवार को आंदोलन का पांचवां दिन रहा, लेकिन अनशनकारियों का रुख पहले से अधिक सख्त नजर आया। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाती और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
अनशन पर बैठे रामसनेही निषाद, श्रीराम सैनी और अवधेश कुमार ने कहा कि ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायतें लंबे समय से उठती रही हैं। इसके बावजूद अब तक जिम्मेदार लोगों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। उनका कहना है कि जब तक मामले की पारदर्शी जांच कर दोषियों की जिम्मेदारी तय नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
ग्रामीणों ने बताया कि आंदोलन को प्रभावी बनाए रखने के लिए रणनीति भी तय की गई है। इसके तहत दो सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ग्राम पंचायत चनकौली में मौजूद रहकर जांच प्रक्रिया पर नजर रखेगा, जबकि अन्य ग्रामीण जिला मुख्यालय स्थित अनशन स्थल पर डटे रहेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे किसी भी स्थिति में आंदोलन से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
अनशनकारियों के अनुसार मंगलवार सुबह डीपीआरओ कार्यालय से फोन कर जानकारी दी गई कि ग्राम पंचायत चनकौली की जांच के लिए 12 मार्च की तिथि निर्धारित कर दी गई है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि केवल जांच की तिथि घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक जांच पूरी कर रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका क्रमिक अनशन जारी रहेगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग और फर्जी भुगतान की शिकायत पहले ही जिलाधिकारी से की जा चुकी है। जिलाधिकारी द्वारा जांच के आदेश भी दिए गए थे, लेकिन अब तक जांच पूरी कर रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति असंतोष और नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
अनशन पर बैठे ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए तथा रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
इस दौरान समाजसेवी रामसनेही निषाद सहित अवधेश कुमार, श्रीराम सैनी, दीपक, मनोज, रवि धारिया, वल्लू शर्मा, हरिपाल निषाद, निरंजन, सुकई भारती, महेंद्र भारती और सुभाष समेत कई ग्रामीण अनशन में शामिल रहे और प्रशासन से न्याय की मांग करते रह है।

अभद्र टिप्पणी करने वाले पर 2.51 लाख रुपये इनाम की घोषणा

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अभद्र टिप्पणी किए जाने के मामले में हिंदू युवा वाहिनी से जुड़े नेता अभिनंदन तिवारी ने विवादित बयान देते हुए टिप्पणी करने वाले व्यक्ति का सिर काटकर लाने वाले को 2 लाख 51 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।
श्री तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति इस तरह की टिप्पणी करने वाले का सिर काटकर लाएगा, उसे 2 लाख 51 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा।
इस बयान के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

बीएचयू में ‘वैश्विक बुद्ध एवं जातक कथायें’ पुस्तक का विमोचन कोई

बौद्ध धर्म पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

गोरखपुर/वाराणसी(राष्ट्र की परम्परा)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के केएन उदुप्पा सभागार में मंगलवार को उप निदेशक राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर यशवन्त सिंह राठौर एवं प्रो सुजाता द्वारा संपादित पुस्तक ‘वैश्विक बुद्ध एवं जातक कथायें’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी रहे।
इस अवसर पर ‘दक्षिण एशिया में बौद्ध धर्म: विस्तार, पुरातत्व, कला एवं वास्तुकला तथा सांस्कृतिक प्रभाव’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर द्वारा कला प्रदर्शनी ‘धम्मा लैंड ऑफ तथागत बुद्धा’ का भी आयोजन किया गया, जिसमें बुद्ध से जुड़ी कला और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया।
पुस्तक विमोचन समारोह में जेएनयू, नई दिल्ली के प्रो. यशदत्त अलोनी भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर जापान फाउंडेशन, नई दिल्ली के महानिदेशक कोजी सातो तथा धम्मा लर्निंग सेंटर, सारनाथ के संस्थापक एवं अध्यक्ष वेन. भिक्षु चंदिमा महाथेरो विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसके अतिरिक्त अमेरिका, जर्मनी, म्यांमार, वियतनाम, श्रीलंका, नेपाल और थाईलैंड सहित कई देशों के विद्वान अतिथियों की भी उपस्थिति रही।

ज्ञान

चरित्र की महिमा शांत स्थिर होती है
आचरण जैसे भी हों अनुसरण होते हैं
ज्ञान व पैसा बहती धारा के किनारे हैं
एक दूसरे से बिलकुल अलग होते हैं।

ज्ञान देना यहाँ सब कोई चाहता है,
पर ज्ञान लेना कोई नही चाहता है,
वैसे ही पैसा देना कोई नहीं चाहता है,
पर जैसे भी हो लेना हर कोई चाहता है।

विश्वास दीपक की तरह अँधेरे में
रोशनी की किरण जैसा होता है,
यकायक कुछ भले न दिखा सके
पर धीरे धीरे आस्था में बदलता है।

शब्दों का महत्व उनके कहे जाने
के भाव से ही पता चल जाता है,
स्वागत तो पायदान में भी लिखा
होता है, जो बिछा पैरों तले होता है ।

स्वयं के कर्मों की महत्ता उनकी
अच्छाई बुराई पर ही निर्भर होती है,
पर कर्मों का भय ज़रूर होता है,
इसीलिये गंगा स्नान में भीड़ होती है।

क़र्म ही धर्म है यह समझना
हमें जीवन में ज़रूरी होता है,
क्योंकि पाप इस शरीर से कम
विचारों से अधिक से होता है ।

गंगा स्नान से शरीर धोया जाता है
क़र्म और विचार तो मन से धुलते हैं,
आदित्य मृत शरीर भी धोया जाता है,
क़र्म, धर्म, विचार सब यहीं रह जाते हैं।

डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’

यूजीसी कानून के विरोध में ब्राह्मण महापंचायत आयोजित

गोला बाजार/गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)l यूजीसी कानून के विरोध में रविवार की शाम लगभग चार बजे गोला बाजार में बीएसएस परशुराम सेना के तत्वावधान में ब्राह्मण महापंचायत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएसएस परशुराम सेना के प्रदेश अध्यक्ष पंडित अजीत कुमार पांडे ने की, जबकि संचालन मंडल अध्यक्ष रमेश धर दुबे ने किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंडित अजीत कुमार पांडे ने कहा कि सरकार द्वारा यूजीसी से संबंधित कानून लाकर ब्राह्मण समाज के युवाओं और स्वर्ण समाज के बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस कानून के लागू होने से युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस कानून को तत्काल वापस लिया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस कानून को वापस नहीं लेती है तो आने वाले समय में इसका व्यापक विरोध किया जाएगा और समाज को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
जिला अध्यक्ष आनंद कुमार मिश्रा ने कहा कि ब्राह्मण समाज हमेशा से शिक्षा और समाज के उत्थान के लिए कार्य करता रहा है, लेकिन सरकार की नीतियों के कारण युवाओं का भविष्य संकट में पड़ता नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस कानून को वापस नहीं लिया तो समाज के लोग लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
कार्यक्रम में आनंद कुमार मिश्रा, रमेश धर दुबे सहित बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर रामबदन दुबे, सुनील शुक्ला, हेमंत मिश्रा, मनीष पांडे, रत्नेश धर दुबे, प्रयाग दत्त मिश्रा सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

कटरा होली मिलन समारोह में उमड़ा उत्साह, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों ने साझा किया प्रेम व भाईचारे का संदेश

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)।मीरानपुर कटरा क्षेत्र में समाजवादी शिक्षक सभा की ओर से आयोजित कटरा होली मिलन समारोह रविवार को बड़े उत्साह और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। एसके मैरिज लॉन में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के शिक्षकों, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य होली पर्व के माध्यम से आपसी भाईचारे, सौहार्द और सामाजिक एकता को मजबूत करना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शिक्षक एवं समाजसेवी रामसागर यादव ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक राजेश यादव मौजूद रहे। वहीं तिलहर के पूर्व विधायक रोशनलाल वर्मा ने विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में भाग लेकर आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
मां सरस्वती की पूजा और दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
समाजवादी शिक्षक सभा के इस कटरा होली मिलन समारोह की शुरुआत पारंपरिक तरीके से की गई। मुख्य अतिथि राजेश यादव ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद मंच पर उपस्थित अतिथियों का स्वागत फूलमालाओं और अंगवस्त्र देकर किया गया।
पूरे समारोह में रंगों की खुशबू और उत्सव का माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान शिक्षकों और समाजसेवियों ने मिलकर एक दूसरे के प्रति सम्मान और सौहार्द का भाव व्यक्त किया।
होली प्रेम, सद्भाव और एकता का पर्व – वक्ता
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि कटरा होली मिलन समारोह जैसे कार्यक्रम समाज में आपसी मेल-मिलाप और सौहार्द को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्य अतिथि पूर्व विधायक राजेश यादव ने कहा कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं बल्कि दिलों को जोड़ने वाला त्योहार है। यह पर्व हमें सामाजिक भेदभाव को भुलाकर एक साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी शिक्षक सभा शिक्षा और समाज के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है और ऐसे कार्यक्रमों से शिक्षकों के बीच एकता और सहयोग की भावना मजबूत होती है।
शायराना अंदाज़ में रोशनलाल वर्मा ने बांधा समां
तिलहर के पूर्व विधायक रोशनलाल वर्मा ने अपने विशेष शायराना अंदाज में कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने होली से जुड़े शेर और गीत सुनाकर समारोह में मौजूद लोगों का उत्साह और बढ़ा दिया।
उनकी प्रस्तुति पर उपस्थित लोगों ने खूब तालियां बजाईं और कार्यक्रम का माहौल और भी रंगीन हो गया। कई लोगों ने कहा कि यह कटरा होली मिलन समारोह केवल औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक मेल-मिलाप का अनूठा उदाहरण बन गया।
शिक्षकों और समाजसेवियों की बड़ी भागीदारी
समारोह में क्षेत्र के शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। कार्यक्रम में शिक्षा और समाज के विकास को लेकर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षकों की भूमिका समाज निर्माण में बेहद महत्वपूर्ण है और ऐसे अवसर उन्हें एक मंच पर जोड़ने का काम करते हैं।कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे के साथ संवाद किया और होली के पर्व को मिलजुलकर मनाने का संकल्प लिया। इस दौरान कई शिक्षकों और समाजसेवियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम में ये प्रमुख लोग रहे मौजूद
इस कटरा होली मिलन समारोह में कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे—पूर्व एमएलसी अमित यादव,राजेन्द्र सिंह गुर्जर (पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कटरा),
सत्यपाल सिंह,सुरेन्द्रपाल सिंह यादव,ओमवीर सिंह यादव,हरिशरण सिंह,,रणजीत सिंह यादव
रामकुमार गोणवाल,दामोदर दास गंगवार,समाजवादी शिक्षक सभा के जिलाध्यक्ष विनोद यादव,शिक्षक सभा के विधानसभा अध्यक्ष मनोज यादव,रामप्रकाश शर्मा ,इसके अलावा बड़ी संख्या में शिक्षक, समाजसेवी और क्षेत्र के गणमान्य लोग समारोह में मौजूद रहे।
सामाजिक सौहार्द का बना संदेश
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों ने एक-दूसरे को रंग लगाकर होली की बधाई दी। पूरे समारोह में भाईचारे और एकता का संदेश स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
आयोजकों ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहेगा, जिससे समाज में सकारात्मक माहौल और सहयोग की भावना बनी रहे।
कटरा होली मिलन समारोह ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि त्योहार केवल उत्सव नहीं बल्कि लोगों को जोड़ने का माध्यम भी होते हैं। इस आयोजन ने क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द और पारस्परिक सम्मान को और मजबूत किया।

पुलिया निर्माण बना राहगीरों की परेशानी का कारण

दस दिनों से बंद है महराजगंज–चिउरहा– बागापार मार्ग, वैकल्पिक रास्ता न होने से ग्रामीणों में नाराजगी

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। तहसील सदर क्षेत्र में महराजगंज से चिउरहा, रामपुर बुजुर्ग होते हुए बागापार तक जाने वाली निर्माणाधीन पक्की सड़क पर पुलिया निर्माण कार्य के कारण पिछले लगभग दस दिनों से आवागमन पूरी तरह बाधित है। सड़क बंद होने से आसपास के कई गांवों के लोगों को रोजमर्रा के आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कार्यदाई संस्था द्वारा पुलिया निर्माण के दौरान छोटी गाड़ियों और मोटरसाइकिलों के लिए भी कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं बनाया गया है, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार बागापार खास के दक्षिण दिशा में सड़क पर एक पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य शुरू होते ही संबंधित मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया गया, जिसके चलते महराजगंज से चिउरहा, रामपुर बुजुर्ग और बागापार की ओर जाने वाले लोगों को लंबा चक्कर लगाकर दूसरे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे जहां लोगों का समय अधिक लग रहा है, वहीं अतिरिक्त ईंधन खर्च होने से आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग क्षेत्र के कई गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिससे प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग मोटरसाइकिल और चार पहिया वाहनों से आवागमन करते हैं। कई छात्र-छात्राएं इसी रास्ते से स्कूल और कालेज पहुंचते हैं, जबकि किसान भी खेतों तक आने-जाने के लिए इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। सड़क बंद होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और किसानों को भी खेतों तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले कार्यदाई संस्था द्वारा वैकल्पिक मार्ग या अस्थायी डायवर्जन की व्यवस्था नहीं की गई। यदि पुलिया निर्माण के दौरान अस्थायी रास्ता बना दिया जाता तो मोटरसाइकिल और छोटी चार पहिया गाड़ियों का आवागमन आसानी से जारी रह सकता था। लेकिन ऐसी कोई व्यवस्था न होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि पुलिया निर्माण कार्य पूरा होने तक कम से कम दोपहिया और छोटी चार पहिया गाड़ियों के लिए अस्थायी मार्ग की व्यवस्था कराई जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके। साथ ही निर्माण कार्य को तेजी से पूरा कराने की भी मांग की गई है, जिससे आमजन को हो रही परेशानी जल्द समाप्त हो सके।
ग्रामीणों का कहना है कि आवागमन जनहित से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में संबंधित विभाग को इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए। यदि शीघ्र ही कोई व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में ग्रामीणों को और अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

महिला दिवस पर जिले की बेटी ने बढ़ाया मान

विकसित भारत’ विषय पर प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने वाली प्रियंका विश्वकर्मा को 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि से किया गया सम्मानित

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में जिले की मेधावी छात्राओं और महिलाओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर हाजी अजहर खान इंटर कॉलेज, उसका पनियरा की प्रतिभाशाली छात्रा प्रियंका विश्वकर्मा को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। विकसित भारत विषय पर पूर्व में आयोजित प्रतियोगिता में जिले में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर प्रियंका को 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।
कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष रविकांत पटेल, फरेंदा विधायक बीरेंद्र चौधरी तथा जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने संयुक्त रूप से प्रियंका को सम्मानित करते हुए प्रोत्साहन राशि का चेक प्रदान किया। अतिथियों ने उसकी प्रतिभा, मेहनत और लगन की सराहना करते हुए कहा कि जिले की बेटियां आज हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर समाज और देश का नाम रोशन कर रही हैं। उन्होंने छात्रा को भविष्य में भी इसी तरह आगे बढ़ने और उच्च उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रेरित किया।
इस दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को सामने लाने का अवसर प्रदान करती हैं और उन्हें समाज तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का एहसास भी कराती हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने भी प्रियंका विश्वकर्मा की इस उपलब्धि को जिले के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे मेधावी विद्यार्थी समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं और अन्य बच्चों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
बताया जाता है कि हाजी अजहर खान इंटर कॉलेज, उसका पनियरा में शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए भी लगातार प्रेरित किया जाता है। विद्यालय का अनुशासित वातावरण, शिक्षकों का मार्गदर्शन और विद्यार्थियों की मेहनत का ही परिणाम है कि यहां के छात्र-छात्राएं विभिन्न स्तरों पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं।
प्रियंका विश्वकर्मा की इस उपलब्धि से विद्यालय परिवार में खुशी और उत्साह का माहौल है। विद्यालय प्रबंधन, प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने प्रियंका को बधाई देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रियंका आगे भी इसी प्रकार मेहनत और लगन से पढ़ाई कर जिले और प्रदेश का नाम रोशन करती रहेगी।

जब संवेदनाएं जागती हैं, तभी सभ्यता आगे बढ़ती है

भौतिक प्रगति के बीच मानवीय करुणा को बचाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। मानव जीवन की सबसे बड़ी पहचान उसकी बुद्धि या शक्ति नहीं, बल्कि उसकी संवेदना है। यही संवेदना मनुष्य को अन्य जीवों से अलग बनाती है और उसे मानवता का वास्तविक अर्थ समझाती है। जब कोई व्यक्ति दूसरे के दुख-दर्द को महसूस करता है, उसकी पीड़ा को समझता है और सहायता के लिए आगे बढ़ता है, तभी वह सच्चे अर्थों में इंसान कहलाता है। जिस समाज में मानवीय संवेदनाएं जीवित रहती हैं, वहां केवल भौतिक विकास ही नहीं होता, बल्कि नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रगति भी समान रूप से होती है। इसीलिए कहा जाता है कि किसी भी सभ्य समाज की असली पहचान उसकी मानवीय संवेदनाएं होती हैं।
वर्तमान समय तकनीकी प्रगति, आधुनिकता और तेज रफ्तार जीवनशैली का समय है। विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सुविधाजनक बना दिया है। मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने दुनिया को एक-दूसरे के बेहद करीब ला दिया है। लेकिन विडंबना यह है कि इन सुविधाओं के बावजूद लोगों के बीच भावनात्मक दूरी बढ़ती दिखाई दे रही है। आज कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि सड़क दुर्घटनाओं या संकट की घड़ी में घायल व्यक्ति की मदद करने के बजाय लोग अपने मोबाइल से वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालने में अधिक रुचि दिखाते हैं। ऐसी घटनाएं समाज के लिए चिंताजनक संकेत हैं और यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम अपनी मानवीय संवेदनाओं को खोते जा रहे हैं।
मानवीय संवेदना का अर्थ केवल किसी पर दया करना या सहानुभूति जताना भर नहीं है। यह एक ऐसी गहरी भावना है, जो व्यक्ति को समाज के प्रति जिम्मेदार बनाती है। जब कोई व्यक्ति किसी भूखे को भोजन देता है, किसी जरूरतमंद की सहायता करता है, पीड़ितों के लिए आवाज उठाता है या किसी संकटग्रस्त परिवार का सहारा बनता है, तब वह मानवीय संवेदना का ही परिचय देता है। समाज में सहयोग, करुणा और सहानुभूति की भावना जितनी मजबूत होगी, समाज उतना ही अधिक संगठित और समृद्ध बनेगा।
इतिहास इस बात का साक्षी है कि जिन समाजों में मानवीय मूल्यों को महत्व दिया गया, वहां शांति, सौहार्द और स्थायी विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ। महापुरुषों और संतों ने भी हमेशा करुणा, सेवा और परोपकार को जीवन का सर्वोच्च आदर्श बताया है। उन्होंने यह संदेश दिया कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल अपने लिए जीना नहीं, बल्कि दूसरों के सुख-दुख में सहभागी बनना भी है।
मानवीय संवेदनाओं के विकास में परिवार, विद्यालय और समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने आस-पास देखते हैं। यदि परिवार में बच्चों को दूसरों के प्रति सम्मान, सहयोग और सहानुभूति की शिक्षा दी जाए, तो वे बड़े होकर संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनते हैं। विद्यालय भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय व्यवहार को भी शामिल किया जाना चाहिए। जब शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना न होकर एक अच्छा इंसान बनना होगा, तभी समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव होगा।
आज के दौर में यह आवश्यक हो गया है कि हम अपने भीतर झांक कर यह विचार करें कि क्या हम वास्तव में दूसरों के दर्द को महसूस कर पा रहे हैं। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बड़े-बड़े कदमों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि छोटी-छोटी मानवीय पहलें भी बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं। किसी जरूरतमंद की मदद करना, पीड़ित व्यक्ति के साथ खड़ा होना, बुजुर्गों का सम्मान करना और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना—ये सभी कार्य समाज को अधिक मानवीय और संवेदनशील बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
इसके साथ ही समाज और शासन व्यवस्था को भी ऐसी नीतियों और प्रयासों को बढ़ावा देना चाहिए, जो मानवीय मूल्यों को मजबूत करें। सामाजिक संस्थाएं, स्वयंसेवी संगठन और जागरूक नागरिक यदि मिलकर काम करें, तो समाज में करुणा और सहयोग की भावना को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।यह समझना आवश्यक है कि किसी समाज की महानता केवल उसकी आर्थिक संपन्नता, ऊंची इमारतों या तकनीकी उपलब्धियों से नहीं मापी जा सकती। समाज की असली ताकत उसके लोगों की संवेदनशीलता, आपसी सहयोग और मानवीय मूल्यों में निहित होती है। यदि हम सचमुच एक सभ्य और विकसित समाज का निर्माण करना चाहते हैं, तो हमें अपनी मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखना होगा। क्योंकि जब तक मनुष्य के भीतर करुणा और संवेदना की लौ जलती रहेगी, तब तक मानवता सुरक्षित और समाज मजबूत बना रहेगा।

फगुआ पर जुटान में गूंजे भोजपुरी के स्व

मातृशक्ति ‘अम्मा’ पुष्पलता सिंह व मनोरमा देवी का हुआ भावपूर्ण सम्मान

गोरखपुर(राष्ट्र क़ी परम्परा)
भोजपुरी भाषा, लोकसंस्कृति और पूर्वांचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित “फगुआ पर जुटान” कार्यक्रम रविवार क़ी देर शाम गंगोत्री देवी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय परिसर में अत्यंत उल्लास, आत्मीयता और सांस्कृतिक गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। “गोरखपुरिया भोजपुरिया” परिवार के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य आयोजन में शहर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, पत्रकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों तथा भोजपुरी संस्कृति के प्रेमियों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही।
फागुन की मादक बयार, लोकगीतों की मधुर धुन, फूलों की होली की रंगीन छटा और सांस्कृतिक आत्मीयता के इस अद्भुत संगम ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। कार्यक्रम भोजपुरी अस्मिता, लोकजीवन और सामाजिक एकता का जीवंत उत्सव बन गया, जिसमें उपस्थित लोगों ने अपनी संस्कृति के प्रति गर्व और अपनत्व का अनुभव किया।
कार्यक्रम की गरिमा महाविद्यालय की संरक्षिका एवं वरिष्ठ शिक्षाविद् रीना त्रिपाठी की गरिमामयी उपस्थिति से और अधिक बढ़ गई। आयोजन “गोरखपुरिया भोजपुरिया” संस्था के संस्थापक विकास श्रीवास्तव तथा सह-संस्थापक नरेंद्र मिश्र के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। यह आयोजन भोजपुरी भाषा और संस्कृति के संरक्षण का एक सशक्त मंच बनकर उभरा।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ मंच पर उपस्थित महिलाओं द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप की ज्योति ने नारी शक्ति के सम्मान और समाज निर्माण में महिलाओं की भूमिका को प्रतीकात्मक रूप से उजागर किया। इसके बाद उपस्थित महिलाओं को पुष्प अर्पित कर सम्मानित किया गया।

समाजसेवा और मातृत्व की प्रेरक प्रतिमाओं का सम्मान

कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया जब समाजसेवा और मानवीय करुणा की मिसाल बनी पुष्पलता सिंह ‘अम्मा’ तथा संघर्षशील मातृत्व की प्रतीक मनोरमा देवी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
पुष्पलता सिंह ‘अम्मा’, मातृ आंचल सेवा संस्थान, गोरखनाथ की संस्थापिका हैं और वर्षों से समाज के सबसे कमजोर, उपेक्षित और बेसहारा लोगों की सेवा में निरंतर जुटी हुई हैं। उन्होंने व्यक्तिगत जीवन के सुखों का त्याग करते हुए अविवाहित रहकर स्वयं को पूरी तरह मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया है।
अम्मा सड़क किनारे पड़े लावारिस और बीमार लोगों को उठाकर उनका उपचार कराती हैं, उन्हें भोजन और आश्रय उपलब्ध कराती हैं तथा जरूरतमंदों की हर संभव सहायता करती हैं। उनका सबसे उल्लेखनीय कार्य लावारिस शवों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार कराना है। अनेक अवसरों पर उन्होंने स्वयं मुखाग्नि देकर असंख्य लावारिस मृतकों को अंतिम सम्मान प्रदान किया है।
इसके अलावा वे रक्तदान शिविरों का आयोजन, गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, “अम्मा थाली” के माध्यम से भोजन वितरण, जरूरतमंदों को वस्त्र और चिकित्सा सहायता प्रदान करने तथा घायल पशुओं के उपचार जैसे सेवा कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुड़ी रहती हैं। उनके उत्कृष्ट सेवा कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है। अम्मा स्वयं देहदान, अंगदान और रक्तदान के संकल्प से भी जुड़ी हुई हैं।
इसी क्रम में मनोरमा देवी को भी उनके संघर्षपूर्ण जीवन और प्रेरणादायी मातृत्व के लिए सम्मानित किया गया। पति के निधन के बाद उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी साहस और धैर्य का परिचय देते हुए अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं। सिलाई-कढ़ाई के कार्य से उन्होंने अपने परिवार का पालन-पोषण किया और अपने बच्चों की शिक्षा को निरंतर जारी रखा।

फाग गीतों से गूंज उठा परिसर

कार्यक्रम का सांस्कृतिक सत्र पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। भोजपुरी लोकधुनों की मिठास और पारंपरिक फाग गीतों की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को उल्लास और उमंग से भर दिया।
प्रसिद्ध लोकगायक मनोज मिश्र ‘मिहिर’ ने पारंपरिक फाग और होली गीतों की ऐसी मनमोहक प्रस्तुति दी कि पूरा परिसर फागुन की मस्ती में झूम उठा। ढोलक की थाप और लोकधुनों की मधुरता ने श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। स्वर सागर संस्थान की निदेशिका सुनीषा श्रीवास्तव ने भी अपने मधुर स्वर में फाग गीत प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने तालियों की गूंज के साथ सराहा।
सांस्कृतिक संध्या में सुनीता तिवारी, सीता तिवारी, अतुल तिवारी तथा वरिष्ठ लेखक व उद्घोषक डॉ. संजय पति त्रिपाठी, डॉ टी विक्रम मणि त्रिपाठी, अनुपम मिश्र ने भी पारंपरिक फाग गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को उल्लासमय बना दिया।
वहीं डॉ. संजयन त्रिपाठी ने भी फाग गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं का मन मोह लिया और कार्यक्रम में फागुन की उमंग को और अधिक प्रखर बना दिया।

हास्य-व्यंग्य ने भी खूब बटोरी तालियां

कार्यक्रम में शैलेश त्रिपाठी ‘मोबाइल बाबा’ की हास्य-व्यंग्य प्रस्तुति भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने अपनी चुटीली शैली और समकालीन सामाजिक विषयों पर आधारित व्यंग्य के माध्यम से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मनोरंजन और विचार दोनों का सुंदर संतुलन प्रस्तुत किया।

फूलों की होली ने बढ़ाया आत्मीयता का रंग

कार्यक्रम के दौरान मंच और दर्शकों के बीच फूलों की होली खेली गई। गुलाब और गेंदे की पंखुड़ियों से सजी इस होली ने पूरे आयोजन को प्रेम और सौहार्द के रंगों से भर दिया। उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को फूलों से रंगते हुए होली की शुभकामनाएं दीं।
भोजपुरी संस्कृति के संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नरेंद्र मिश्र ने कहा कि भोजपुरी भाषा पूर्वांचल की आत्मा है। इसे संरक्षित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
वहीं विकास श्रीवास्तव ने कहा कि भोजपुरी संस्कृति सामाजिक संबंधों, परंपराओं और जीवन मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति है। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
महाविद्यालय के प्रबंध निदेशक आशुतोष मिश्र ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।

गणमान्य व्यक्तियों ने की सराहना

कार्यक्रम के दौरान अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने आयोजन की सराहना की।
डॉ. ए.के. पांडेय व मांडवी तिवारी ने कहा कि भोजपुरी संस्कृति को जीवित रखने के लिए ऐसे आयोजनों का निरंतर होना आवश्यक है।
डॉ रामप्रताप विश्वकर्मा व डॉ पीएन भट्ट ने इसे समाज में सांस्कृतिक चेतना जगाने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
नवीन श्रीवास्तव व अंतरराष्ट्रीय हॉकी कोच श्रीमती रीता मिश्रा ने कहा कि “फगुआ पर जुटान” जैसे आयोजन समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते जा रहे हैं।
अभिषेक त्रिपाठी, बृजेंद्र सिंह व विनय तिवारी ने इसे भोजपुरी भाषा और परंपराओं के संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल बताया।
राजेश पांडेय, सागर श्रीवास्तव व रवि प्रकाश ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज में आपसी सौहार्द और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते हैं।
वी.के. सिंह ने कहा कि लोकसंस्कृति से जुड़े ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।
हरिहर पांडेय व रोहिताश श्रीवास्तव ने ने भोजपुरी भाषा को पूर्वांचल की पहचान बताते हुए इसके संरक्षण पर जोर दिया।
डॉ. गौरी पांडेय ने कहा कि महाविद्यालय परिसर में ऐसे आयोजन विद्यार्थियों और समाज में सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं।
नर्सिंग कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रकाश सिंह चौधरी ने कहा कि लोकगीत और परंपराएं समाज की आत्मा होती हैं और उन्हें जीवित रखना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ उद्घोषक सर्वेश दुबे ने अपनी प्रभावशाली और सधी हुई शैली में किया। उनके संयोजित और रोचक संचालन ने पूरे आयोजन को गरिमामय बनाए रखा।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों एवं उपस्थित जनों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई तथा “हमार भोजपुरी – हमार पहचान” के उद्घोष के साथ आयोजन का समापन हुआ। बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, पत्रकार, साहित्यकार और भोजपुरी संस्कृति के प्रेमी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
उपस्थित लोगों ने कहा कि “फगुआ पर जुटान” जैसे आयोजन भोजपुरी भाषा और लोकसंस्कृति को नई ऊर्जा देने के साथ समाज में प्रेम, सौहार्द और सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

नन्हीं आलिया हुमायूं ने दिया अमन-चैन और भाईचारे का संदेश

इफ्तार पार्टी में उमड़ी भारी भीड़

भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
पवित्र रमजान माह में जहां एक ओर लोग इबादत और रोजे के जरिए अल्लाह की रहमत पाने में लगे हैं, वहीं भागलपुर क्षेत्र की 6 वर्षीय नन्हीं बच्ची आलिया हुमायूं अपने मासूम संदेश से लोगों के बीच प्रेम और भाईचारे की मिसाल पेश कर रही है।आलिया हुमायूं, पिता बबलू अहमद (सिपाही) तथा दादा मुन्ना अहमद (ठेकेदार) की पोती है। आलिया ने रमजान के पूरे 30 रोजे रखने की इच्छा जताई है और इन दिनों वह रोजा रखकर बेहद खुश नजर आ रही है। नन्हीं आलिया का कहना है कि वह ऊपर वाले से दुआ करती है कि सभी लोग खुश रहें और चारों तरफ अमन-चैन बना रहे।
आलिया की इस प्रेरणा के पीछे उसकी दादी नसीबुन निशा और मां शबाना खातून, जो कि सहायक अध्यापिका हैं, का विशेष योगदान बताया जा रहा है। उनके मार्गदर्शन से ही आलिया में रोजा रखने और इबादत के प्रति रुचि जागी।
इसी क्रम में भागलपुर स्थित बड़ी मस्जिद में कारी साहब की मौजूदगी में इफ्तार के समय बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज अदा की। इस अवसर पर इम्तियाज अहमद के नेतृत्व में इफ्तार कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया, जिसमें क्षेत्र के सैकड़ों लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम में आलिया के दादा मुन्ना अहमद ने कहा कि रमजान का महीना आपसी प्रेम, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि समाज में किसी प्रकार की नफरत नहीं होनी चाहिए और हमारा देश सर्वोपरि है।इस इफ्तार पार्टी का आयोजन भागलपुर, देवरिया निवासी बबलू अहमद द्वारा किया गया, जिसमें पूरे गांव को आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम में उदय प्रताप सिंह, गुलाबचंद यादव, कमलेश यादव, अहमद अली, इमरान, पत्रु, मुस्ताक, सलमान, अमरेश यादव, अभिषेक सिंह, कौशिक, रोशन यादव, संदीप यादव, विपिन जायसवाल, संजय जायसवाल, प्रेम हजरत सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

तेज रफ्तार कार पेड़ से टकराई, युवक की मौत, चार गंभीर घायल

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय राजमार्ग पर देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में एक युवक की मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना खलीलाबाद कोतवाली थाना क्षेत्र के बुधा कला चौराहे के पास रात करीब एक बजे हुई।
पुलिस के अनुसार एक सियाज कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे में 22 वर्षीय शमसुद्दीन उर्फ अमन बाबा पुत्र मोहम्मद इकबाल की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं खलीलाबाद के मोतीनगर निवासी फैजान पुत्र मोहम्मद असलम, पठान टोला निवासी साहिल, बजरिया निवासी शभ और स्टेशन परवा निवासी एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।

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घायल फैजान के अनुसार कार की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक थी, जिससे चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और कार सीधे पेड़ से जा टकराई।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल भिजवाया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

मारपीट व फायरिंग के मामले में दो आरोपी गिरफ्तार, तमंचा व कार बरामद

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन व क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद अमित कुमार के पर्यवेक्षण में कोतवाली खलीलाबाद पुलिस ने मारपीट और फायरिंग के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार थाना कोतवाली खलीलाबाद में पंजीकृत मुकदमा संख्या 144/2026 से संबंधित वांछित आरोपी कृष्णचन्द पाण्डेय पुत्र संजय पाण्डेय निवासी घटरम्हा थाना कोतवाली खलीलाबाद हाल मुकाम रौरापार तथा आलोक राय पुत्र दिनेश राय निवासी एकमा थाना कोतवाली खलीलाबाद जनपद संतकबीरनगर को मोहम्मदपुर कठार के पास से गिरफ्तार किया गया।

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पुलिस ने आरोपियों के पास से घटना में प्रयुक्त एक तमंचा .315 बोर, एक जिंदा कारतूस, तीन बांस के डंडे, एक लोहे की रॉड, एक क्रेटा कार (यूपी 58 एसी 9755) और दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
जानकारी के अनुसार वादी उमाशंकर यादव पुत्र हरिश्चंद्र यादव निवासी शिकटा बरगाह पोस्ट मुंडेरवा जनपद बस्ती हाल पता घटरम्हा थाना कोतवाली खलीलाबाद ने 6 मार्च 2026 को तहरीर देकर बताया था कि 2 मार्च 2026 को रौरापार चौराहे पर स्थित अपनी मेडिकल दुकान बंद कर घर लौटते समय आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की और जान से मारने की नीयत से गोली चलाई। इस मामले में कोतवाली खलीलाबाद में मुकदमा दर्ज किया गया था।
इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक राकेश कुमार सिंह, उपनिरीक्षक हरिकेश बहादुर सिंह, उपनिरीक्षक अशोक कुमार दूबे, उपनिरीक्षक विनोद कुमार यादव, उपनिरीक्षक धर्मनाथ यादव, कांस्टेबल अनिल कुमार, कांस्टेबल कृष्णनारायण गौड़ और कांस्टेबल प्रदीप पटेल शामिल रहे।

9 मार्च को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति: यूरी गागरिन, ज़ाकिर हुसैन, शशि थरूर सहित कई दिग्गजों का जन्मदिन

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इतिहास के पन्नों में 9 मार्च का दिन कई महान और प्रसिद्ध व्यक्तित्वों के जन्म के लिए जाना जाता है। इस दिन साहित्य, राजनीति, संगीत, कानून, खेल और कला जगत से जुड़े कई दिग्गजों का जन्म हुआ, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

9 मार्च को जन्मे प्रमुख व्यक्ति

1915 – डॉ. नगेन्द्र
प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार, आलोचक और शिक्षाविद्। हिंदी साहित्य में उनके आलोचनात्मक लेखन का महत्वपूर्ण स्थान है।

1930 – सोली जहांगीर सोराबजी
भारत के प्रसिद्ध विधिवेत्ता और देश के पूर्व महान्यायवादी (Attorney General of India) रहे। उन्होंने कानून के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।

1931 – कर्ण सिंह
प्रख्यात भारतीय राजनेता, लेखक और विद्वान। वे जम्मू-कश्मीर के पूर्व युवराज भी रहे और लंबे समय तक भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे।

1934 – यूरी गागरिन
सोवियत संघ के प्रसिद्ध पायलट और अंतरिक्ष यात्री। वे अंतरिक्ष में जाने वाले दुनिया के पहले मानव थे, जिन्होंने 1961 में इतिहास रचा।

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1938 – हरिकृष्ण देवसरे
हिंदी के प्रसिद्ध बाल साहित्यकार और संपादक, जिन्होंने बच्चों के साहित्य को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

1951 – उस्ताद ज़ाकिर हुसैन
विश्व प्रसिद्ध तबला वादक और संगीतकार। भारतीय शास्त्रीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में उनका बड़ा योगदान है।

1956 – शशि थरूर
प्रसिद्ध भारतीय लेखक, कूटनीतिज्ञ और राजनेता। वे संयुक्त राष्ट्र में भी महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं और कई चर्चित किताबों के लेखक हैं।

1985 – पार्थिव पटेल
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

1996 – दर्शील सफारी
भारतीय बाल कलाकार, जिन्होंने फिल्म ‘तारे ज़मीन पर’ में अपने अभिनय से खास पहचान बनाई।

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