Sunday, June 21, 2026
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सांसद ने 9 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का किया उद्घाटन

सिकंदरपुर/बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

सलेमपुर सांसद रमाशंकर विद्यार्थी ने सोमवार को सिकंदरपुर के डाक बंगले से कुल 9 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने तीनों विधानसभा क्षेत्रों—सियर, सिकंदरपुर और बांसडीह—में सड़कों के जाल बिछाने को अपनी प्राथमिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा से भी कई गांवों को आच्छादित करने का कार्य किया गया है तथा चिकित्सा, शिक्षा और बिजली से संबंधित समस्याओं के समाधान पर लगातार कार्य हो रहा है। सांसद ने कहा कि वह विपक्ष के सांसद हैं, लेकिन जनता के हित में निरंतर प्रयासरत हैं। सिकंदरपुर में रोडवेज डिपो की मांग पर उन्होंने सपा कार्यकर्ता जितेश वर्मा के आवेदन को स्वीकार करते हुए कहा कि परिवहन मंत्री से बातचीत हो चुकी है और आश्वासन मिला है कि भूमि उपलब्ध होते ही सिकंदरपुर में बस डिपो स्थापित कर दिया जाएगा। उन्होंने जितेश वर्मा से जमीन से संबंधित कागजात जल्द उपलब्ध कराने का आग्रह भी किया। बिजली बिलों पर बढ़ते बोझ को लेकर सांसद ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गलत तरीके से लग रहे मीटर भविष्य में भारी परेशानी का कारण बनेंगे। गरीब जनता पर अत्यधिक बिल का दबाव पड़ रहा है, जिससे लोग कनेक्शन कटवाने पर मजबूर हैं। सरकार द्वारा निशुल्क कनेक्शन देने के नाम पर जनता को छलने का आरोप भी उन्होंने लगाया। कार्यक्रम में सियाराम शर्मा, गुरुज लाल राजभर, शाहिद सहित सपा के दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस पर तहसील मुख्यालय पर धरना और प्रदर्शन

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा ) शुक्रवार को संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर प्रधानमंत्री को सलेमपुर नायब तहसीलदार के द्वारा ज्ञापन दिया गया ।
इस सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मज़दूर, खेतिहर एवं ग्रामीण मज़दूर—भारत के समस्त मेहनतकश लोग—भारत सरकार द्वारा थोपी जा रही कॉरपोरेट-समर्थक, किसान-विरोधी और मज़दूर-विरोधी नवउदारवादी नीतियों का कड़ा विरोध करते हैं। हम 2020–21 में तीन काले कृषि क़ानूनों को थोपने के प्रयास का सफलतापूर्वक प्रतिरोध करने के बाद किसानों से किए गए सभी वादों पर संघीय सरकार द्वारा किए जा रहे विश्वासघात के साक्षी हैं।

9 दिसंबर 2021 को, भारतीय किसानों के एक वर्ष से अधिक चले ऐतिहासिक संघर्ष—जिसे मजदूर वर्ग का सक्रिय समर्थन मिला था और जिसमें 736 अमूल्य जानें कुर्बान हुई थी—के बाद हुए समझौते में, भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और किसानों की बढ़ती ऋणग्रस्तता के मुद्दों के समाधान हेतु एक समिति गठित करने की प्रतिबद्धता जताई थी।

सत्ता में मौजूद यह कॉरपोरेट–सांप्रदायिक गठजोड़ इस प्रतिबद्धता को निभाने में पूरी तरह विफल रहा है। तब से आज तक उत्पादन लागत के अनुरूप एमएसपी में कोई वृद्धि नहीं हुई है; फसल मूल्यों का स्तर एम.एस. स्वामीनाथन फ़ॉर्मूले से 20 से 30 प्रतिशत कम बना हुआ है। सभी कृषि लागतों, विशेषकर उर्वरकों की कीमतें, सब्सिडी की कटौती और काला बाज़ारी—दोनों के कारण—तेज़ी से बढ़ी हैं। सुनिश्चित ख़रीद की विफलता के चलते बाज़ार में अधिकांश फसलें घोषित एमएसपी से भी 20 से 40 प्रतिशत कम दामों पर बिक रही हैं।
दिसंबर 2021 के समझौते में भारत सरकार ने किसानों से परामर्श किए बिना बिजली संशोधन विधेयक लागू न करने का वादा किया था। इसके बावजूद मोदी सरकार नया बिजली विधेयक 2025 ले आई है, जो सभी के लिए महगी और एक सामान बिजली दर अनिवार्य करता है, कृषि सहित सभी कमज़ोर वर्गों के लिए दी जाने वाली क्रॉस-सब्सिडी को समाप्त करता है और प्री-पेड स्मार्ट मीटर थोपता है। हम स्पष्ट करते हैं कि कॉरपोरेट के लिए जनता की इस लूट को हम किसी भी क़ीमत पर होने नहीं देंगे। इस सभा को संबोधित करते हुए किसान सभा के जिला मंत्री कांग्रेस प्रेमचंद यादव ने कहा कि हम गहरे आघात और पीड़ा के साथ नोट करते हैं कि सरकार ने बीज विधेयक 2025 के माध्यम से बीज आपूर्ति पर कॉरपोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का पूर्ण बाज़ार नियंत्रण थोप दिया है। इससे फसल पैटर्न में भारी बदलाव आएगा, जो जीविकोपार्जन आधारित खेती के लिए घातक होगा तथा देश की बीज संप्रभुता और खाद्य सुरक्षा को गंभीर ख़तरे में डालेगा। इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। खेत व ग्रामीण मजदूर यूनियन यूनियन के जिला मंत्री राम निवास यादव ने कहा कि
हम मनरेगा को समाप्त कर उसकी जगह वीबी ग्राम जी अधिनियम 2025 लागू किए जाने का भी कड़ा विरोध करते हैं। यह क़ानून काम के अधिकार और कम से कम 100 दिनों की रोज़गार गारंटी को छीनता है, ‘माँग आधारित काम’ के अधिकार को समाप्त करता है और 125 दिनों के काम के झूठे दावे के विपरीत, बजटीय आवंटन में भारी कटौती करता है। साथ ही यह राज्यों पर 40 प्रतिशत अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालता है।

हम इस सरकार द्वारा चार श्रम संहिताओं के ज़रिये देश के मजदूर वर्ग पर किए गए हमले की निंदा करते हैं—ये संहिताएँ मजदूर वर्ग द्वारा दशकों के संघर्ष से हासिल यूनियन बनाने का अधिकार, न्यूनतम जीविका योग्य मज़दूरी, सुरक्षित रोज़गार, 8 घंटे का कार्यदिवस, सामाजिक सुरक्षा जैसे अधिकारों को छीनती हैं। कार्यस्थल पर सुरक्षा। इससे मजदूर वर्ग को कॉरपोरेट पूंजी का गुलाम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। खेत व ग्रामीण मजदूर यूनियन के राज्य कमेटी सदस्य बलविंदर मौर्य ने कहा कि
हम जनवादी अधिकारों पर हो रहे हमलों से बेहद उद्वेलित हैं—दमनकारी क़ानूनों, अवैध प्रशासनिक दमन और बुलडोज़र राज के ज़रिये असहमति की हर आवाज़ को कुचला जा रहा है। सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, पत्रकार आदि वर्षों से बिना मुक़दमे के जेलों में बंद हैं। भाजपा शासित क्षेत्रों में हर विरोध को बेरहमी से कुचल दिया जाता है।

हम आरएसएस–भाजपा गठजोड़ और उनकी सरकारों द्वारा देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने और जनता की एकता को नष्ट करने के प्रयासों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं। अल्पसंख्यकों और दलितों पर हमले, योजनाबद्ध मॉब लिंचिंग, नफ़रत भरे भाषणों की श्रृंखला, यहाँ तक कि न्यायिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप—ये सब आज की सच्चाई बन चुके हैं। हम देश की एकता और उसके धर्मनिरपेक्ष जनतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करने का संकल्प लेते हैं।
इस सभा को संबोधित करते हुए राज्य कमेटी सदस्य कामरेड गंगा देवी और कामरेड पूनम देवी ने कहां की
हम जानते हैं कि मेहनतकश जनता के जीवन और आजीविका पर ये सभी गंभीर हमले, कॉरपोरेट–सांप्रदायिक सरकार द्वारा नवउदारवादी पूंजीवाद के गहरे संकट से उबरने और बहुराष्ट्रीय व भारतीय कॉरपोरेट घरानों तथा देश के धन्नासेठों के हितों की सेवा करने का प्रयास हैं।
हम यह भी गंभीरता से कहना चाहते हैं कि यह सरकार भारतीय कृषि और उद्योग के हितों से गद्दारी करते हुए अमेरिकी साम्राज्यवाद के सामने शर्मनाक आत्मसमर्पण कर रही है। मुक्त व्यापार समझौते भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुराष्ट्रीय कंपनियों की लूट के लिए खोलने का माध्यम हैं।
हम किसान, मज़दूर, खेतिहर एवं ग्रामीण मज़दूर तथा आम जनता के विशाल हिस्से के साथ, 16 जनवरी 2026 को यहाँ इक्कठा होकर, दशकों लंबे संघर्षों से अर्जित अनुभव के आधार पर यह दृढ़ संकल्प लेते हैं कि भाजपा-नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के सभी किसान-विरोधी, मज़दूर-विरोधी और जन-विरोधी क़ानूनों व नीतियों के विरुद्ध एकजुट होकर संघर्ष करेंगे, जब तक कि इन सभी को वापस नहीं लिया जाता। हम जनता की एकता के लिए कार्य करने तथा ऐसे जन-पक्षधर क़ानून और नीतियाँ सुनिश्चित करने का संकल्प लेते हैं, जो लोगों को बुनियादी अधिकार एवं सम्मानजनक जीवन प्रदान करें।

जब तक संघीय सरकार निम्नलिखित को रद्द नहीं करती—
• बीज विधेयक 2025
• बिजली विधेयक 2025
• वीबी–ग्राम जी अधिनियम 2025
• चार श्रम संहिताएँ

और जब तक हम संघीय सरकार को निम्नलिखित क़ानून बनाने के लिए बाध्य नहीं कर देते—
• सभी फसलों के लिए सी2 लागत + 50% के अनुसार एमएसपी तथा सुनिश्चित सरकारी ख़रीद
• सम्पूर्ण क़र्ज़ माफी

o किसान और दिहाड़ी मज़दूरों की आत्महत्याओं को समाप्त करने के लिए
o तथा ग्रामीण क़र्ज़ग्रस्तता के ख़ात्मे के लिए
• भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 (एल.ए.आर.आर. एक्ट 2013) का पूर्ण क्रियान्वयन
• राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा
• राज्यों की टेक्स शक्ति की बहाली
• विभाज्य कर पूल का 60% हिस्सा राज्यों को आवंटित किया जाए
हम भारत के मेहनतकश लोग
नववर्ष 2026 में यह संकल्प लेते हैं—

“विजय तक निरंतर, एकजुट और अखिल भारतीय संघर्ष का निर्माण करेंगे।” इस सभा में कामरेड नियाज अहमद कामरेड राजकुमारी देवी, शिव कुमारी देवी , बाबूलाल ,कामरेड संजय , कामरेड प्रदीप कुमार कामरेड भारती, सुशील यादव, रामचंद्र खरवार आदि सैकड़ो लोग शामिल रहे

छत से गिरने से 17 वर्षीय युवक की दर्दनाक मौत, काजीपुर गांव में पसरा मातम

सिकंदरपुर/बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

काजीपुर ग्राम सभा में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया। घर की छत से गिरने के कारण 17 वर्षीय समीर अंसारी पुत्र मुहाद्दीन अंसारी की मौत हो गई। अचानक हुई इस घटना से परिवार ही नहीं, पूरा गांव स्तब्ध है। समीर किसी कार्य से अपने घर की छत पर गया था, तभी अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह अनियंत्रित होकर नीचे जमीन पर गिर पड़ा। गिरने की तेज आवाज सुनते ही परिजन और आसपास के लोग मौके पर दौड़े। गंभीर रूप से घायल अवस्था में ग्रामीणों ने आनन-फानन उसे आनंद–खनन मार्ग होते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सिकंदरपुर पहुंचाया।लेकिन अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने समीर को मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है और घर में चीख-पुकार मची है। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीणों की भीड़ अस्पताल और मृतक के घर पर उमड़ पड़ी, जहां लोग शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाने में लगे रहे। समीर की कम उम्र में हुए निधन ने गांव में गहरा दुख पैदा कर दिया है। हर आंख नम है और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है। अचानक हुई इस दुर्घटना ने परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। वह मा पिता का इकलौता चिराग था

देवरिया में गैंगेस्टर एक्ट के तहत बड़ी कार्रवाई, तीन शातिर बदमाश गिरफ्तार

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)जनपद देवरिया में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत थाना गौरीबाजार पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने गैंगेस्टर एक्ट में वांछित तीन शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार कर संगठित अपराध के नेटवर्क पर करारा प्रहार किया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी आनन्द कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन एवं क्षेत्राधिकारी रुद्रपुर श्री हरीराम यादव के पर्यवेक्षण में की गई।
थाना गौरीबाजार पर पंजीकृत मुकदमा संख्या 18/2026, धारा 3(1), 2(बी)(1) उत्तर प्रदेश गिरोहबंद अधिनियम के तहत नामजद अभियुक्त मधुबन यादव, प्रदीप यादव एवं संदीप यादव उर्फ कृष्णमोहन यादव उर्फ साका को मुखबिर की सूचना पर रेलवे स्टेशन गौरीबाजार के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार यह गिरोह राज्यमार्ग पर राहगीरों को निशाना बनाकर अवैध असलहों के बल पर मारपीट, धमकी और लूट जैसी गंभीर घटनाओं को अंजाम देता था।
दिनांक 14 जनवरी 2026 को गिरोह के खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई थी। गिरफ्तारी के बाद अभियुक्तों के विरुद्ध नियमानुसार अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है। पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में अपराधियों में भय और आम जनता में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा है।

UP: बस्ती मेडिकल कॉलेज के PICU में इंजेक्शन के बाद 3 माह की बच्ची की मौत, दो की हालत गंभीर

बस्ती (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले स्थित महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज के PICU वार्ड में एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। वार्ड में भर्ती बच्चों को इंजेक्शन लगाए जाने के बाद तीन माह की दुधमुंही बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि दो अन्य बच्चों की हालत नाजुक बताई जा रही है। घटना के बाद मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया और परिजनों ने स्टाफ नर्स पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

इंजेक्शन लगते ही बिगड़ी हालत

मृत बच्ची वैष्णवी के पिता दुखराम ने बताया कि बच्ची को रोने और दूध न पीने की शिकायत के बाद मंगलवार तड़के PICU में भर्ती कराया गया था। दोपहर में डॉक्टरों के राउंड के दौरान दवा देने के निर्देश दिए गए, जिसके बाद स्टाफ नर्स ने वैष्णवी समेत 11 माह के अर्थ और 9 माह के ऋषभ को इंजेक्शन लगाया।

इंजेक्शन लगते ही तीनों बच्चों के मुंह से झाग निकलने लगा और उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी। परिजनों का आरोप है कि स्थिति बिगड़ने के बाद नर्स वार्ड से चली गई। करीब 15 मिनट के भीतर वैष्णवी की मौत हो गई।

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परिजनों का हंगामा, पुलिस जांच शुरू

बच्ची की मौत की खबर मिलते ही परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और CMS को लिखित शिकायत सौंपी। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और तहरीर के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। इलाज के बाद अन्य दो बच्चों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

मेडिकल कॉलेज प्रशासन का बयान

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि बच्चों को सांस की समस्या थी और जिस दवा को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, वही दवा अन्य मरीजों को भी दी गई है। परिजनों की शिकायत के आधार पर जांच टीम गठित कर दी गई है। यदि मेडिकल स्टाफ दोषी पाया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था में गंभीर लापरवाही के सवाल खड़े करती है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा।

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सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, DDA की ‘कर्मयोगी आवास योजना’ में 25% तक छूट

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। दिल्ली में किफायती आवास की तलाश कर रहे सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने पहली बार विशेष रूप से सरकारी सेवा में कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए ‘कर्मयोगी आवास योजना’ शुरू की है। नए साल के मौके पर डीडीए ने इस योजना के तहत फ्लैट्स की कीमत पर 25 प्रतिशत तक की विशेष छूट देने की घोषणा की है।

किन सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा लाभ?

यह योजना केवल सरकारी सेवा से जुड़े लोगों के लिए है। इसके अंतर्गत

• केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी
• सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी
• पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU)
• सरकारी बैंक
• स्थानीय निकाय
• ऑटोनॉमस संस्थान, विश्वविद्यालय और अन्य सरकारी संगठन
में कार्यरत या रिटायर्ड लोग आवेदन कर सकते हैं। पात्र आवेदकों को फ्लैट की बिक्री कीमत पर सीधे 25% डिस्काउंट मिलेगा, जिससे घर खरीदना काफी सस्ता हो जाएगा।

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1, 2 और 3 बीएचके के 1168 फ्लैट्स

कर्मयोगी आवास योजना के तहत कुल 1168 रेडी-टू-मूव फ्लैट्स उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें

• 1 बीएचके
• 2 बीएचके
• 3 बीएचके

तीनों कैटेगरी के आवास शामिल हैं, ताकि अलग-अलग आय वर्ग और जरूरतों वाले कर्मचारी इसका लाभ उठा सकें।

नरेला में स्थित हैं सभी फ्लैट्स

इस योजना के तहत सभी फ्लैट्स दिल्ली के नरेला क्षेत्र में बनाए गए हैं। ये आवास पॉकेट-9, सेक्टर A1 से A4 में स्थित हैं, जहां सड़क, बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं। सभी फ्लैट्स ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर उपलब्ध हैं।

इच्छुक सरकारी कर्मचारी DDA की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन और योजना से जुड़ी पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले जारी, सिलहट में हिंदू शिक्षक का घर जलाया गया

ढाका (राष्ट्र की परम्परा)। बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला सिलहट जिले के गोवाइंगहाट उपजिला से सामने आया है, जहां एक हिंदू शिक्षक के घर को आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना के बाद इलाके में रहने वाले हिंदू समुदाय के बीच भय और असुरक्षा का माहौल गहराता जा रहा है।

जिस घर को निशाना बनाया गया, वह बीरेंद्र कुमार डे का बताया जा रहा है, जो स्थानीय स्तर पर शिक्षक हैं और ‘झुनू सर’ के नाम से जाने जाते हैं। जानकारी के अनुसार, अज्ञात लोगों ने रात के अंधेरे में उनके घर में आग लगा दी। आग इतनी तेजी से फैली कि परिवार के सदस्यों को जान बचाकर बाहर भागना पड़ा। गनीमत रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन घर और उसमें रखा सारा सामान जलकर खाक हो गया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें जलता हुआ मकान और घर से निकलते परिवार के सदस्य दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ी नाराजगी जताई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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हिंदू परिवार लगातार बन रहे निशाना

पिछले कुछ हफ्तों में बांग्लादेश के कई इलाकों से हिंदू परिवारों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। दिसंबर के अंत में पिरोजपुर जिले में एक हिंदू परिवार का घर जलाया गया था, जबकि चटगांव के राउज़ान इलाके में भी प्रवासी हिंदू परिवारों के घरों को आग के हवाले किया गया था। इन घटनाओं से अल्पसंख्यक समुदाय में भय व्याप्त है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता

लगातार हो रही हिंसक घटनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। फिलहाल सभी की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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पारिवारिक विवाद बना मौत की वजह, किराए के कमरे में युवक ने लगाई फांसी

मुजफ्फरपुर (राष्ट्र की परम्परा)। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र से एक दुखद घटना सामने आई है। पारिवारिक विवाद से परेशान होकर 45 वर्षीय अजय कुमार ने अपने किराए के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक मनियारी थाना क्षेत्र के सिलौट गांव का निवासी था और ब्रह्मपुरा इलाके में रहकर छोटी फोटो फ्रेमिंग की दुकान चलाता था।

घटना की सूचना मिलते ही ब्रह्मपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। खबर फैलते ही मृतक के परिजन और आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। परिवार में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

देर तक दरवाजा नहीं खुला, फिर सामने आया सच

मृतक की पत्नी पूनम देवी ने बताया कि पति अजय कुमार के साथ अक्सर घरेलू विवाद होता रहता था। मंगलवार रात भी दोनों के बीच कहासुनी हुई थी। इसके बाद सभी परिवार के सदस्य सो गए। बुधवार सुबह जब घर के लोग काम पर निकल गए, तो अजय का कमरा अंदर से बंद मिला। काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया, तो अजय कुमार को कमरे के अंदर फंदे से लटका हुआ पाया गया। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।

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पुलिस जांच में जुटी, पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव

ब्रहमपुरा थाना प्रभारी विजय लक्ष्मी ने बताया कि मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए मुजफ्फरपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा जा रहा है। प्रारंभिक जांच में मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है।

पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही आत्महत्या के सही कारणों की पुष्टि हो सकेगी। घटना ने एक बार फिर घरेलू तनाव और मानसिक दबाव के गंभीर परिणामों की ओर ध्यान खींचा है।

कोलकाता में BLO की रहस्यमयी मौत, SIR कार्य के दबाव का आरोप, जांच में जुटी पुलिस

कोलकाता (राष्ट्र की परम्परा)। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के अहल्यानगर इलाके से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। 109 नंबर वार्ड के 110 नंबर पार्ट के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) अशोक दास की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई। उनका शव घर के बाथरूम में फंदे से लटका मिला। परिजन उन्हें तुरंत आर.एन. टैगोर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

फिलहाल यह आत्महत्या है या किसी अन्य कारण से मौत, इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

परिवार का आरोप: SIR काम का था अत्यधिक दबाव

मृतक की पत्नी ने आरोप लगाया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कार्य को लेकर चुनाव आयोग की ओर से उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। उनका कहना है कि काम का बोझ इतना ज्यादा था कि अशोक दास मानसिक तनाव में रहने लगे थे। पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि पड़ोस से भी उन पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा था।

तबीयत खराब और दिल की बीमारी से थे परेशान

अशोक दास की बहन के मुताबिक, कुछ दिन पहले भाई ने अपनी तबीयत खराब होने की बात कही थी। उन्होंने बताया था कि काम का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बहन ने यह भी दावा किया कि अशोक दास को दिल की समस्या थी। इस बीच घर पर कथित रूप से तृणमूल समर्थकों के आने की बातें भी सामने आई हैं, जिससे परिवार और अधिक तनाव में था।

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BLO कर्मचारियों में बढ़ता रोष

पश्चिम बंगाल में SIR का काम शुरू होने के बाद से कई BLO कर्मचारियों में तनाव बढ़ने की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ बीमार पड़े हैं, तो कुछ ने आत्मघाती कदम उठाए हैं। हाल ही में कई जगह BLO कर्मचारियों ने सीईओ कार्यालय के सामने प्रदर्शन भी किया था।
पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। परिजनों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

Nipah Virus Alert: पश्चिम बंगाल में 21 दिन का होम क्वारंटाइन अनिवार्य, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की गाइडलाइन

पश्चिम बंगाल (राष्ट्र की परम्परा)। क़निपाह वायरस (Nipah Virus) संक्रमण को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्वास्थ्य विभाग ने निपा संक्रमित मरीजों, संदिग्ध मरीजों, उनके संपर्क में आए लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। यह गाइडलाइन पांच सदस्यीय डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम द्वारा तैयार की गई है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, निपाह वायरस से संक्रमित मरीज या निपा जैसे लक्षण वाले व्यक्ति के रक्त, लार, शरीर के तरल पदार्थ, छींक या खांसी की बूंदों के संपर्क में आने वाले सभी लोगों को कम से कम 21 दिनों तक होम क्वारंटाइन में रहना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ बंद या सीमित स्थान में समय बिताना भी “उच्च जोखिम” की श्रेणी में रखा गया है।

होम क्वारंटाइन के दौरान सख्त निगरानी

21 दिनों के होम क्वारंटाइन में रहने वाले लोगों को दिन में दो बार स्वास्थ्य जांच करानी होगी। इस दौरान यदि बुखार, सिरदर्द, उलझन, खांसी या सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। अस्पताल पहुंचते ही मरीज को आइसोलेशन वार्ड में रखा जाएगा।

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कपड़ों और वस्तुओं से भी फैल सकता है संक्रमण

दिशानिर्देशों में कहा गया है कि संक्रमित मरीज के कपड़ों या इस्तेमाल की वस्तुओं के संपर्क में आने वाले लोगों को भी 21 दिनों तक निगरानी में रखा जाएगा। निपा संक्रमित या संदिग्ध मरीजों की देखभाल करने वाले लोगों को मास्क और PPE किट पहनना अनिवार्य होगा।

जांच और इलाज की व्यवस्था

निपाह वायरस की पुष्टि के लिए RT-PCR जांच अनिवार्य की गई है। रिपोर्ट दिन में कम से कम दो बार नेगेटिव आने पर ही दवा बंद की जाएगी। फिलहाल निपा के लिए कोई पुख्ता दवा नहीं है, इसलिए मरीजों को डॉक्टरों द्वारा तय की गई प्रयोगात्मक एंटीवायरल दवाएं दी जाएंगी। स्वास्थ्यकर्मियों को भी एहतियात के तौर पर दो सप्ताह तक एंटीवायरल दवा लेने के निर्देश दिए गए हैं।

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बांग्लादेश चुनाव से पहले जमात-NCP गठबंधन, भारत विरोधी एजेंडे से बढ़ी चिंता

हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में अगले महीने फरवरी में होने वाले आम चुनावों से पहले सियासी समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान की स्वदेश वापसी के बीच अब कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी और छात्र आंदोलन से निकली नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने गठबंधन कर लिया है।

जमात और एनसीपी के साथ आने से बांग्लादेश की चुनावी लड़ाई और अधिक दिलचस्प हो गई है। बताया जा रहा है कि दोनों दलों के बीच सीटों का बंटवारा भी तय हो चुका है। ये दोनों ही पार्टियां अपने भारत विरोधी रुख के लिए जानी जाती हैं, जिससे क्षेत्रीय राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। अब आगामी चुनाव में सीधी टक्कर BNP बनाम जमात गठबंधन के बीच होने की संभावना है।

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जमात गठबंधन में शामिल पार्टियां और सीट बंटवारा

जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनावों से पहले 253 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है। गठबंधन के अनुसार:

• जमात-ए-इस्लामी: 179 सीटें
• नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP): 30 सीटें
• बांग्लादेश खेलाफत मजलिस (ममुनुल हक गुट): 20 सीटें
• खेलाफत मजलिस: 10 सीटें
• लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी: 7 सीटें
• एबी पार्टी: 3 सीटें
• निज़ाम-ए-इस्लामी पार्टी व बांग्लादेश डेवलपमेंट पार्टी: 2-2 सीटें

इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश ने बनाई दूरी

जमात के नायब-ए-अमीर सैयद अब्दुल्ला मोहम्मद ताहेर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह जानकारी दी। हालांकि गठबंधन की अहम सहयोगी इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश (IAB) ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार किया। इसके बावजूद IAB के लिए 47 सीटें आरक्षित रखी गई हैं। सूत्रों के अनुसार भविष्य में अन्य दलों को शामिल करने पर इन सीटों में बदलाव हो सकता है।

बांग्लादेश के आगामी चुनाव न केवल देश की राजनीति बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिहाज से भी बेहद अहम माने जा रहे हैं।

कोल्लम में दो नाबालिग एथलीट मृत मिलीं, आत्महत्या या हत्या पर सस्पेंस

कोल्लम/केरल (राष्ट्र की परम्परा)। केरल के कोल्लम जिले में गुरुवार सुबह खेल जगत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के हॉस्टल में रह रही दो नाबालिग महिला एथलीटों के शव फंदे से लटके मिले, जिससे पूरे राज्य में हड़कंप मच गया। दोनों खिलाड़ी यहां नियमित प्रशिक्षण ले रही थीं।

घटना गुरुवार सुबह की है। करीब सुबह 5 बजे प्रैक्टिस का समय तय था, लेकिन रोजाना की तरह मैदान में पहुंची अन्य खिलाड़ियों के बीच 17 वर्षीय सैंड्रा और 15 वर्षीय वैष्णवी नजर नहीं आईं। जब दोनों काफी देर तक नहीं दिखीं, तो हॉस्टल अधिकारियों को शक हुआ। उन्होंने कमरों में जाकर आवाज दी, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

काफी देर बाद दरवाजा तोड़ा गया, जहां अंदर का दृश्य देखकर हर कोई सन्न रह गया। दोनों किशोरियों के शव फंदे से लटके हुए थे।

कौन थीं सैंड्रा और वैष्णवी

पुलिस के अनुसार, सैंड्रा कोझिकोड और वैष्णवी तिरुवनंतपुरम की रहने वाली थीं। एक खिलाड़ी कबड्डी का प्रशिक्षण ले रही थी, जबकि दूसरी एथलेटिक्स से जुड़ी थी। दोनों SAI हॉस्टल में रहकर पढ़ाई के साथ खेल प्रशिक्षण कर रही थीं। एक 12वीं और दूसरी 10वीं कक्षा की छात्रा थी।
हालांकि, दोनों के लिए अलग-अलग कमरे निर्धारित थे, लेकिन बुधवार रात उन्हें एक साथ देखा गया था। अन्य खिलाड़ियों के अनुसार, सुबह तक सबकुछ सामान्य लग रहा था।

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हत्या या आत्महत्या?

पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मामला आत्महत्या का है या किसी अन्य कारण से मौत हुई है।

पुलिस ने दोनों खिलाड़ियों के परिवारों को सूचना दे दी है और हॉस्टल प्रशासन से पूछताछ की जा रही है। गौरतलब है कि 10 साल पहले अलाप्पुझा स्थित SAI हॉस्टल में भी एक छात्रा की आत्महत्या का मामला सामने आया था, जिस पर खेल मंत्रालय ने जांच कराई थी।

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CM योगी ने गोरखपुर में अंतर विश्वविद्यालय महिला बास्केटबॉल का किया उद्घाटन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित पूर्वी क्षेत्र अंतर विश्वविद्यालय महिला बास्केटबॉल प्रतियोगिता का शुक्रवार को भव्य और ऐतिहासिक शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस प्रतिष्ठित खेल आयोजन में 14 राज्यों के 31 विश्वविद्यालयों की महिला टीमें हिस्सा ले रही हैं, जिससे गोरखपुर एक बार फिर राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर उभरा है।

उद्घाटन मुकाबला शहीद नंदकुमार पटेल रायगढ़ विश्वविद्यालय और मेज़बान दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के बीच खेला गया। रोमांचक मुकाबले में मेज़बान टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की और प्रतियोगिता की यादगार शुरुआत की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खिलाड़ियों और निर्णायक मंडल से परिचय प्राप्त किया। इसके बाद बैलून उड़ाकर और स्वयं बास्केट में गेंद डालकर प्रतियोगिता का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर स्पोर्ट्स विवडीका (स्पोर्ट्स बुलेटिन) का भी विमोचन किया गया।

यह प्रतियोगिता 15 जनवरी से 19 जनवरी तक आयोजित की जाएगी, जिसे निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न कराने की जिम्मेदारी 12 सदस्यीय निर्णायक मंडल को सौंपी गई है। उद्घाटन समारोह में कुलपति प्रो. पूनम टंडन, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, कई विधायक, एमएलसी, भाजपा पदाधिकारी, क्रीड़ा परिषद के अधिकारी और बड़ी संख्या में खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

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अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि खेल शारीरिक स्वास्थ्य के साथ अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास करते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार अब तक 500 अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दे चुकी है और 96 हजार युवक मंगल दलों को खेल किट उपलब्ध कराई गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “जो खेलेगा वही खिलेगा” के मंत्र के साथ उत्तर प्रदेश खेलों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। मेरठ में स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय की स्थापना इसका प्रमाण है। अंत में उन्होंने सभी टीमों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं।

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BMC Election Results: धारावी से कांग्रेस की जीत, AIMIM का खाता खुला, सपा अब भी शून्य पर

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनावों के शुरुआती नतीजे सामने आते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। पहला परिणाम कांग्रेस के लिए खुशखबरी लेकर आया है। धारावी से कांग्रेस प्रत्याशी आशा काले ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 183 मतों से हराकर जीत दर्ज की है। इसके साथ ही बीएमसी के कई वार्डों के रुझान भी स्पष्ट होने लगे हैं।

हालांकि, शुरुआती रुझानों में समाजवादी पार्टी (सपा) का अब तक खाता नहीं खुल सका है। वहीं, अबू आज़मी के गढ़ गोवंडी-मानखुर्द इलाके में AIMIM ने एक सीट पर बढ़त बनाकर अपना खाता खोल लिया है, जो सपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

इसी बीच बीएमसी वार्ड नंबर 164 से शिंदे गुट की शिवसेना उम्मीदवार शैला लांडे ने जीत हासिल कर ली है। इससे महायुति गठबंधन को शुरुआती बढ़त मिली है।

29 नगर निकायों में मतगणना जारी

महाराष्ट्र में 29 नगर निकायों के लिए हुए चुनावों की मतगणना शुक्रवार सुबह शुरू हुई। इनमें बीएमसी के नतीजों पर सबसे ज्यादा निगाहें टिकी हुई हैं। यह चुनाव भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन और दोबारा साथ आए ठाकरे बंधुओं के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। बीएमसी देश का सबसे अमीर नगर निकाय माना जाता है।

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इन नगर निकायों में कुल 893 वार्डों की 2,869 सीटों के लिए मतदान हुआ, जिनमें अकेले मुंबई की 227 सीटें शामिल हैं। चुनावी मैदान में 15,931 उम्मीदवार थे, जबकि 3.48 करोड़ मतदाता मतदान के लिए पात्र थे।

मतदान प्रतिशत में गिरावट

राज्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश वाघमारे के अनुसार, 29 नगर निकायों में औसतन करीब 50 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
वहीं, बीएमसी चुनाव में 52.94 प्रतिशत मतदान हुआ, जो वर्ष 2017 के चुनावों (55.53%) से कम है। मतदान प्रतिशत में आई इस गिरावट को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर मंथन कर रहे हैं।

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Taiwan-China Tension: ताइवान के आसपास चीन की अब तक की सबसे बड़ी सैन्य गतिविधि, 34 विमान और 11 युद्धपोत तैनात

ताइपे (राष्ट्र की परम्परा)। ताइवान और चीन के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने खुलासा किया है कि बीते कुछ घंटों में उसके आसपास के समुद्री और हवाई क्षेत्र में चीन की असामान्य सैन्य गतिविधि दर्ज की गई है। मंत्रालय के अनुसार, यह बीते कई महीनों में चीन की सबसे बड़ी सैन्य मौजूदगी मानी जा रही है।

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के 34 सैन्य विमान और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी के 11 युद्धपोत ताइवान के आसपास सक्रिय पाए गए। इसके अलावा एक आधिकारिक चीनी जहाज भी इलाके में देखा गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ताइवान जलडमरूमध्य पहले से ही क्षेत्रीय तनाव का केंद्र बना हुआ है।

मीडियन लाइन पार कर ADIZ में घुसे चीनी विमान

ताइवान की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, चीनी विमानों की बड़ी संख्या ने ताइवान और चीन के बीच मानी जाने वाली मीडियन लाइन को पार किया। इन विमानों ने ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन ज़ोन (ADIZ) में प्रवेश किया, जिसे ताइपे प्रशासन ने सीधा उकसावे वाला कदम बताया है।

चीनी सैन्य विमान ताइवान के उत्तरी, मध्य, दक्षिण-पश्चिमी और पूर्वी ADIZ क्षेत्रों में देखे गए। मीडियन लाइन को लंबे समय से दोनों पक्षों के बीच एक अनौपचारिक सीमा माना जाता रहा है, हालांकि चीन इसे मान्यता नहीं देता और बार-बार इसे पार करता रहा है।

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ताइवान की सेना अलर्ट मोड में

इन गतिविधियों के बाद ताइवान की सेना पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वायुसेना और नौसेना ने तुरंत निगरानी और जवाबी कार्रवाई शुरू की। रडार, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और रेडियो सिस्टम के जरिए चीनी विमानों और जहाजों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

रक्षा मंत्रालय का स्पष्ट संदेश

ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बयान में कहा कि स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण रखा गया है और राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को एक अलग और लोकतांत्रिक देश बताता है। इसी बुनियादी मतभेद के चलते दोनों के बीच दशकों से तनाव बना हुआ है।

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