Friday, June 12, 2026
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बीएचयू में भौतिक चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ शशिकांत तिवारी सम्मानित पैतृक नगर पहुंचने पर नगरवासियों ने किया स्वागत

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सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। विगत दिनों बीएचयू वाराणसी के स्वतंत्रता भवन में आयोजित भव्य समारोह में बीएचयू में तैनात भौतिक चिकित्सक डॉ शशिकांत तिवारी को इस क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान व सतत सेवा देने के लिए प्रेक्टिस आफ इनफार्मेशन अवार्ड से सम्मानित किया गया। रविवार को उनके पैतृक गांव सलेमपुर क्षेत्र के सहला जाते समय उनका नगर के व्यापारियों व समाजसेवियों द्वारा जोरदार स्वागत किया। इस दौरान डॉ शशिकांत तिवारी ने बताया कि इस आयोजन के मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक जी रहे,कार्यक्रम में फिजियोथेरेपी के नवाचार अनुसंधान और जनस्वास्थ्य में इसकी भूमिका पर विचार विमर्श हुआ।कार्यक्रम का वातावरण ज्ञानवर्धक रहा। उद्योग व्यापार मंडल सलेमपुर के तहसील अध्यक्ष पूर्व चेयरमैन सुधाकर गुप्त ने कहा कि यह पुरस्कार इस क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण रहा।इससे पूरे इलाके का मान सम्मान बढ़ा है।सेंट जेवियर्स स्कूल के प्रधानाचार्य वीके शुक्ल ने कहा कि बचपन से ही होनहार डॉ शशिकांत तिवारी ने यह साबित कर दिया कि परिश्रम करने वाले को कोई पीछे नहीं कर सकता है। कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष नेता डॉ धर्मेन्द्र पांडेय ने कहा कि नौजवानों और विद्यार्थियों को इनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है। स्वागत करने वालों में मधुसूदन पांडेय, डॉ निशा तिवारी, मनोज पांडेय, मंजू पांडेय, मोहन प्रसाद,राजकुमार पटवा, नरसिंह तिवारी,डॉ चतुरानन ओझा,रमेश मद्देशिया, पदमनाथ मद्देशिया आदि प्रमुख रूप से शामिल हुए।

UGC 2026 विनियमन पर एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह का तीखा विरोध

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026’ को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में विवाद गहराता जा रहा है। यह विनियमन 15 जनवरी 2026 से देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू कर दिया गया है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव को रोकना बताया गया है, लेकिन इसे लेकर अब तीखा विरोध सामने आया है।

उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) देवेंद्र प्रताप सिंह ने UGC अध्यक्ष/सचिव को पत्र लिखकर इस विनियमन को सामाजिक समरसता के लिए घातक बताया है और इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

सामाजिक संतुलन बिगाड़ने का आरोप

अपने पत्र में एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा है कि यूजीसी 2026 का यह निर्णय विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में सामाजिक संतुलन को बिगाड़ सकता है। उनका मानना है कि इस तरह के नियमों से समाज में जाति आधारित टकराव बढ़ने की आशंका है, जिसका सीधा असर शैक्षणिक माहौल और पढ़ाई की गुणवत्ता पर पड़ेगा।

उन्होंने आशंका जताई कि यह विनियमन भविष्य में दुरुपयोग का माध्यम बन सकता है और इससे सामान्य वर्ग के छात्रों के उत्पीड़न की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

भेदभाव के खिलाफ हैं, लेकिन संतुलन जरूरी

एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी छात्र के साथ भेदभाव के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय रोकना बेहद जरूरी है, लेकिन नियम बनाते समय सभी वर्गों के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।

उनका कहना है कि यूजीसी द्वारा तैयार किया गया यह विनियमन सामान्य वर्ग के छात्रों में असुरक्षा की भावना पैदा कर सकता है, जो समता और समानता के मूल उद्देश्य के विपरीत है।

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पहले से मौजूद हैं कानूनी प्रावधान

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारतीय न्याय संहिता में पहले से ही भेदभाव, उत्पीड़न और उत्पीड़क व्यवहार जैसे मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। ऐसे में उच्च शिक्षण संस्थानों में अलग से समता समिति गठित करने की आवश्यकता पर सवाल उठाया गया है।

एमएलसी सिंह ने कहा कि यदि समिति का गठन किया भी जाता है, तो उसका उद्देश्य भर्तियों और पदोन्नति में आरक्षित वर्ग के चयन को सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि ऐसा ढांचा बनाना जिससे नए विवाद पैदा हों।

उच्च शिक्षा को शोध का केंद्र बनाने की मांग

यूजीसी 2026 विनियमन के विरोध के साथ-साथ देवेंद्र प्रताप सिंह ने उच्च शिक्षा को मजबूत और विश्वस्तरीय बनाने के लिए कई अहम सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को केवल डिग्री देने का माध्यम न बनाकर शोध और नवाचार का केंद्र बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने अनुसंधान में निवेश बढ़ाने, विश्वस्तरीय रिसर्च इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और साझा प्रयोगशालाओं व शोध परिसरों की स्थापना पर जोर दिया।

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रिसर्च इकोसिस्टम मजबूत करने पर जोर

एमएलसी सिंह ने सुझाव दिया कि सरकार और निजी क्षेत्र के सहयोग से उत्कृष्ट केंद्र, साझा प्रयोगशालाएं और बड़े शोध परिसर विकसित किए जाएं। इसके साथ ही शोध संस्थानों में प्रतिस्पर्धी वेतन, अकादमिक स्वायत्तता और वैश्विक प्रतिभाओं को भारत वापस लाने की नीति पर काम किया जाना चाहिए।

उन्होंने बड़े विश्वविद्यालयों, बड़े शोध समूहों और टीम आधारित शोध संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। साथ ही राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़े अनुसंधान, पेटेंट, स्टार्टअप और सामाजिक प्रभाव वाले शोध कार्यों के लिए अधिक कोष आवंटन की मांग की।

आत्मनिर्भर राष्ट्र के लिए मजबूत शिक्षा तंत्र

एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का अंतिम लक्ष्य ऐसे उत्कृष्ट केंद्र विकसित करना होना चाहिए, जो ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और शोध के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर मजबूत बना सकें।

उनका कहना है कि उच्च शिक्षा नीति का उद्देश्य विवाद पैदा करना नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना होना चाहिए, जहां सभी वर्गों के छात्र बिना भय और भेदभाव के शिक्षा ग्रहण कर सकें।

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राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर पुलिसकर्मियों ने लिया लोकतंत्र को मजबूत करने का संकल्प

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महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय, महराजगंज में लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक गरिमामय एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान अपर पुलिस अधीक्षक महराजगंज ने कार्यालय में कार्यरत सभी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राष्ट्रीय मतदाता दिवस की शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण के दौरान उपस्थित पुलिसकर्मियों ने देश के संविधान और लोकतांत्रिक परंपराओं के प्रति निष्ठा व्यक्त करते हुए स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं निर्भीक होकर मतदान करने तथा आम जनमानस को भी मतदान के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में अपर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि मताधिकार लोकतंत्र की आत्मा और उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी सशक्त होता है जब प्रत्येक नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग पूरी ईमानदारी और निर्भीकता के साथ करता है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपेक्षा जताई कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ समाज में मतदाता जागरूकता का संदेश भी पहुंचाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस बल समाज का महत्वपूर्ण स्तंभ है और चुनावी प्रक्रिया के दौरान उसकी भूमिका निष्पक्ष, पारदर्शी एवं जिम्मेदार होती है। ऐसे में प्रत्येक पुलिसकर्मी का यह कर्तव्य है कि वह स्वयं भी आदर्श मतदाता बने और दूसरों को भी लोकतंत्र में सहभागिता के लिए प्रेरित करे।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक कार्यालय के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प दोहराया।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से पुलिस प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जागरूक मतदाता और निष्पक्ष मतदान अनिवार्य है।

चीन से व्यापार समझौता किया तो कनाडा पर 100% टैरिफ लगाएंगे ट्रंप, दी खुली चेतावनी

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने तीखे और आक्रामक बयान से वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बार उनके निशाने पर अमेरिका का करीबी सहयोगी कनाडा है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर कनाडा ने चीन के साथ कोई भी व्यापार समझौता किया, तो अमेरिका कनाडा से आने वाले सभी उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा।

ट्रंप का आरोप है कि कनाडा खुद को चीन के लिए एक ऐसे रास्ते के रूप में इस्तेमाल होने दे रहा है, जिसके जरिए चीनी सामान अमेरिकी बाजारों तक पहुंच सकता है। उन्होंने इसे अमेरिका की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है।

‘ड्रॉप ऑफ पोर्ट’ बनने पर भारी कीमत चुकाएगा कनाडा

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यदि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अपने देश को चीन का “ड्रॉप ऑफ पोर्ट” बनने दिया, तो यह कनाडा की बहुत बड़ी रणनीतिक गलती होगी। ट्रंप ने साफ कहा कि ऐसे किसी भी समझौते की स्थिति में अमेरिका में आने वाले सभी कनाडाई उत्पादों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा।

ट्रंप का कहना है कि अमेरिका अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति से कोई समझौता नहीं करेगा और जो भी देश चीन के जरिए अमेरिकी बाजारों का फायदा उठाने की कोशिश करेगा, उसे आर्थिक कीमत चुकानी पड़ेगी।

अमेरिका-कनाडा रिश्तों में बढ़ता तनाव

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और कनाडा के बीच रिश्तों में पहले से ही खटास बनी हुई है। सुरक्षा, व्यापार और वैश्विक राजनीति को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं।

ट्रंप प्रशासन पहले ही कनाडा पर कई उत्पादों को लेकर भारी टैरिफ लगा चुका है। इसमें धातुओं पर 50 फीसदी और गैर-अमेरिकी कारों पर 25 फीसदी शुल्क शामिल है। अब 100 फीसदी टैरिफ की धमकी ने कनाडा की चिंता और बढ़ा दी है।

गोल्डन डोम प्रोजेक्ट पर भी टकराव

ट्रंप ने कनाडा को ग्रीनलैंड में प्रस्तावित ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट का विरोध करने पर भी घेरा है। उनका कहना है कि यह प्रोजेक्ट न सिर्फ अमेरिका बल्कि कनाडा की सुरक्षा के लिए भी अहम है।

ट्रंप के मुताबिक, कनाडा अमेरिकी सुरक्षा योजनाओं का विरोध कर रहा है और दूसरी ओर चीन के साथ अपने संबंध मजबूत करने में जुटा है। उन्होंने इसे सुरक्षा के लिहाज से गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताया।

दावोस में मार्क कार्नी के बयान से भड़के ट्रंप

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने हाल ही में दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान वैश्विक राजनीति पर टिप्पणी करते हुए अमेरिका के दबदबे वाली व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।

कार्नी ने कहा था कि दुनिया अब उस दौर में पहुंच चुकी है, जहां दशकों पुरानी नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था कमजोर पड़ रही है। उन्होंने इशारों में अमेरिका की दबाव की राजनीति और टैरिफ नीति की आलोचना भी की थी।
ट्रंप ने इसे कनाडा की कृतघ्नता बताते हुए कहा कि अमेरिका कनाडा को सुरक्षा जैसी कई सुविधाएं मुफ्त में देता है और उसे इसका एहसानमंद होना चाहिए।

चीन-कनाडा व्यापार समझौते से अमेरिका नाराज

हाल के दिनों में कनाडा और चीन के बीच व्यापारिक नजदीकियां तेजी से बढ़ी हैं। कनाडा सरकार ने चीन के साथ एक नए व्यापार समझौते की घोषणा की है, जिसके तहत उसे अरबों डॉलर के नए निर्यात बाजार मिलने की उम्मीद है।

इस समझौते के तहत कनाडा ने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर लगाए गए 100 फीसदी टैरिफ में कटौती पर सहमति जताई है। बदले में चीन ने कनाडा के कृषि उत्पादों, खासकर कैनोला बीज पर टैरिफ में बड़ी राहत देने का भरोसा दिया है।

अमेरिका को आशंका है कि इस तरह के समझौतों से चीन अपने उत्पादों को कनाडा के जरिए अमेरिकी बाजारों में भेज सकता है।

कनाडा की अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा

डोनाल्ड ट्रंप की इस धमकी को कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है। अमेरिका कनाडा का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। अगर 100 फीसदी टैरिफ लागू होता है, तो कनाडा का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कनाडा की ऑटोमोबाइल, कृषि, धातु और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। इसके साथ ही हजारों नौकरियों पर भी संकट आ सकता है।

‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति पर अडिग ट्रंप

ट्रंप ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता अमेरिका के हित हैं। उन्होंने कहा कि वे किसी भी कीमत पर अमेरिकी बाजारों को चीन के प्रभाव से बचाएंगे।

ट्रंप का यह सख्त रुख न सिर्फ कनाडा बल्कि अन्य देशों के लिए भी एक संदेश माना जा रहा है कि चीन के साथ व्यापारिक नजदीकियां अमेरिका को नाराज कर सकती हैं।

आगे क्या?

अब सबकी नजर कनाडा सरकार के अगले कदम पर टिकी है। यह देखना अहम होगा कि क्या कनाडा चीन के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाता है या अमेरिकी दबाव के चलते अपने फैसलों पर पुनर्विचार करता है।

फिलहाल इतना तय है कि डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान ने अमेरिका-कनाडा-चीन त्रिकोणीय संबंधों में नई अनिश्चितता और तनाव पैदा कर दिया है।

साध्वी ममता कुलकर्णी के बयान से मचा सियासी-धार्मिक बवाल

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मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)। पूर्व अभिनेत्री और अब साध्वी जीवन अपना चुकीं ममता कुलकर्णी एक बार फिर अपने बेबाक और विवादित बयानों को लेकर चर्चा में हैं। मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने धर्म, राजनीति, संत समाज और देश की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों पर खुलकर अपनी राय रखी। उनके बयान अविमुक्तेश्वरानंद, महामंडलेश्वर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव तक फैले रहे, जिसने सियासी और धार्मिक हलकों में हलचल मचा दी।

अविमुक्तेश्वरानंद पर उठाए सवाल

साध्वी ममता कुलकर्णी ने सबसे पहले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि उन्हें शंकराचार्य किसने नियुक्त किया। ममता ने कहा कि करोड़ों की भीड़ के बीच रथ लेकर निकलने की क्या आवश्यकता थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वजह से उनके शिष्यों को पिटाई झेलनी पड़ी।

ममता कुलकर्णी ने कहा कि राजा हो या रंक, कानून सबके लिए समान है और किसी को भी अहंकार नहीं करना चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि धर्म के नाम पर शक्ति प्रदर्शन ठीक नहीं है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है।

महामंडलेश्वरों पर तीखा हमला

ममता कुलकर्णी ने महामंडलेश्वरों और तथाकथित शंकराचार्यों पर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि दस में से नौ महामंडलेश्वर झूठे हैं और उन्हें शून्य ज्ञान है। ममता का दावा है कि आज धर्म के नाम पर राजनीति और दिखावा ज्यादा हो गया है, जबकि असली साधना कहीं पीछे छूट गई है।

उन्होंने अपने गुरुवर का जिक्र करते हुए कहा कि वे नाथ संप्रदाय से थे और सच्चे तपस्वी संत थे। ममता कुलकर्णी ने यह भी कहा कि सच्चा संत वही है जो ज्ञान, संयम और साधना से जुड़ा हो, न कि पद और प्रतिष्ठा से।

वेद ज्ञान और धर्म पर विचार

मीडिया से बातचीत के दौरान ममता कुलकर्णी ने अपने वेद ज्ञान का भी उल्लेख किया। उन्होंने ऋग्वेद में ऋषि कुणाल और श्वेतकेतु के संवाद का हवाला देते हुए कहा कि धर्म को राजनीति से दूर रखना चाहिए। उनके अनुसार, धर्म का उद्देश्य आत्मिक उन्नति और समाज को सही दिशा देना है, न कि सत्ता की राजनीति करना।

उन्होंने कहा कि अगर धर्म राजनीति में घुसता है, तो उसका स्वरूप बिगड़ जाता है और समाज में टकराव की स्थिति पैदा होती है।

मोदी के अलावा कोई विकल्प नहीं

राजनीति पर बोलते हुए साध्वी ममता कुलकर्णी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा फिलहाल देश में कोई ठोस विकल्प नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में मोदी ही आगे भी देश का नेतृत्व करेंगे।
ममता ने यह भी कहा कि देश की जनता स्थिर नेतृत्व चाहती है और यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बार-बार समर्थन मिल रहा है।

प्रियंका गांधी राहुल से ज्यादा काबिल

कांग्रेस को लेकर भी ममता कुलकर्णी ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी, राहुल गांधी से ज्यादा काबिल हैं। ममता के अनुसार, प्रियंका गांधी में नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक समझ ज्यादा दिखाई देती है।

उनका कहना था कि कांग्रेस अगर मजबूत होना चाहती है, तो उसे जमीनी राजनीति और सही नेतृत्व पर ध्यान देना होगा।

ममता बनर्जी की जीत को बताया शक्ति का परिणाम

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर साध्वी ममता कुलकर्णी ने कहा कि पिछले साल बीजेपी ने बंगाल में पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन इसके बावजूद ममता बनर्जी की जीत हुई। उन्होंने इसे महाकाली की शक्ति से जोड़ते हुए कहा कि ममता बनर्जी को दैवीय शक्ति का आशीर्वाद मिला।

हालांकि, उन्होंने ममता बनर्जी को सलाह भी दी कि किसी भी मुद्दे पर अत्यधिक या एक्सट्रीम रुख अपनाने से बचें, क्योंकि इससे राजनीतिक नुकसान हो सकता है।

अखिलेश यादव से गोहत्या पर सवाल

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर ममता कुलकर्णी ने सवाल उठाया कि क्या वे गोहत्या रोकने का वचन दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि गोहत्या को लेकर सिर्फ बयान देना काफी नहीं है, बल्कि ठोस आश्वासन और नीति की जरूरत है।

ममता ने कहा कि जनता अब नेताओं से सिर्फ वादे नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहती है।

बॉलीवुड और महामंडलेश्वर पद से दूरी

अपने निजी जीवन को लेकर ममता कुलकर्णी ने साफ किया कि वह इस जन्म में बॉलीवुड में वापस नहीं जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वे महामंडलेश्वर पद से भी मुक्त होना चाहती हैं।

उनका कहना है कि अब उनका जीवन पूरी तरह आध्यात्मिक साधना के लिए समर्पित है और वे किसी भी प्रकार के पद या विवाद से दूर रहना चाहती हैं।

बयानों से बढ़ी सियासी-धार्मिक चर्चा

साध्वी ममता कुलकर्णी के इन बयानों के बाद एक बार फिर सियासी और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। उनके बयान जहां कुछ लोगों को बेबाक और स्पष्ट लग रहे हैं, वहीं कई लोग इन्हें विवादित और उकसाने वाला बता रहे हैं।

ऑपरेशन को लेकर बढ़ा टकराव, आदिवासी इलाकों में दहशत

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सारंडा जंगल मुठभेड़ पर माओवादी संगठन का बड़ा आरोप, 17 मौतों को बताया फर्जी ऑपरेशन

रांची (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। झारखंड के सारंडा जंगल मुठभेड़ में सुरक्षा बलों द्वारा 17 माओवादियों के मारे जाने के बाद भाकपा (माओवादी) की बिहार-झारखंड कमेटी ने एक ऑडियो संदेश जारी कर इस कार्रवाई को फर्जी मुठभेड़ करार दिया है। संगठन के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि बिना किसी पूर्व चेतावनी के असंवैधानिक तरीके से हवाई फायरिंग और अंधाधुंध गोलीबारी की गई, जिससे जंगल और आसपास के गांवों में दहशत फैल गई।
प्रवक्ता के अनुसार, सारंडा जंगल मुठभेड़ के दौरान वनग्रामों के आदिवासी भयभीत हैं और कई परिवार अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। आरोप है कि डीजी द्वारा अभियान की घोषणा के बाद 22 जनवरी 2026 को कोबरा बटालियन, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस ने बहुदा व कुमडीह गांव के जंगलों में सुनियोजित तरीके से हमला किया।
माओवादी संगठन का दावा है कि इस कार्रवाई से पहले उनके साथियों की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए जीपीएस ट्रैकर भेजे गए या खाद्य सामग्री में जहर मिलाया गया। प्रवक्ता ने सारंडा जंगल मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए कहा कि इसमें केंद्रीय कमेटी सदस्य पतिराम मांझी उर्फ अनल और ओडिशा राज्य कमेटी के लालचंद हेंब्रम समेत 17 लोगों की हत्या की गई।
आरोपों में यह भी कहा गया कि जिस तरह 17 साथियों को मारा गया, उसी तरह शेष लोगों को भी एक-एक कर निशाना बनाया जा रहा है। संगठन ने इस कार्रवाई को कायरतापूर्ण बताते हुए निंदा की और मारे गए सदस्यों को ‘लाल सलाम’ कहा। साथ ही दावा किया गया कि पूर्व में भी कोबरा बटालियन और पुलिस द्वारा ऐसे ऑपरेशन किए गए हैं, जिनमें संगठन को नुकसान पहुंचा या कई प्रयास विफल रहे।
प्रवक्ता ने यह भी कहा कि फिलहाल तीन साथी पुलिस हिरासत में हैं और मजदूरों, छात्रों, किसानों व बुद्धिजीवियों से सारंडा जंगल मुठभेड़ के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की गई है। दूसरी ओर, सुरक्षा एजेंसियों की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

पश्चिम बंगाल में वोटर सत्यापन को लेकर बढ़ा राजनीतिक ताप

संदिग्ध वोटरों की लिस्ट लीक पर बवाल, चुनाव आयोग ने मांगी रिपोर्ट, रविवार से शुरू होगी छंटनी प्रक्रिया

कोलकाता (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पश्चिम बंगाल में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के दौरान वोटरों की पहचान को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। शनिवार रात दिल्ली से संदिग्ध वोटरों की लिस्ट राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय पहुंची, लेकिन उससे पहले ही यह सूची सार्वजनिक होकर लीक हो गई। इसके साथ ही नो-मैपिंग मतदाता सूची भी कोलकाता भेजी गई है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
शनिवार को दिनभर राज्य के विभिन्न जिलों में संदिग्ध वोटरों की लिस्ट प्रकाशित होने की खबरें सामने आईं। सवाल उठ रहा है कि जब सूची आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं हुई थी, तो यह किन माध्यमों से बाहर आई। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है और पूछा है कि सूची का प्रकाशन किसके आदेश पर और कैसे हुआ।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार छंटनी की प्रक्रिया रविवार से शुरू होगी। कोर्ट के आदेश के तहत ही संदिग्ध वोटरों की लिस्ट प्रकाशित की जानी थी। इसी क्रम में चुनाव आयोग ने पिछले बुधवार को घोषणा की थी कि शनिवार को दोनों सूचियां—संदिग्ध वोटरों की लिस्ट और नो-मैपिंग मतदाता सूची—एक साथ जारी की जाएंगी।
सूत्रों के अनुसार, लगभग 1 करोड़ 20 लाख नागरिकों से जुड़ी यह सूची शनिवार रात दिल्ली से सीईओ कार्यालय पहुंची और फिर ईआरओ को भेज दी गई। हालांकि, इसे तत्काल सार्वजनिक नहीं किया गया। अब यह सूची रविवार सुबह से विशिष्ट स्थानों पर प्रदर्शित की जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह सूची पंचायत और ब्लॉक कार्यालयों, जबकि शहरी क्षेत्रों में नगरपालिका और वार्ड कार्यालयों में चस्पा की जाएगी, ताकि मतदाता अपनी स्थिति की जांच कर सकें।
चुनाव आयोग ने सभी संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) और जिला मजिस्ट्रेटों से रिपोर्ट मांगी है, जहां-जहां सूची पहले प्रकाशित होने की बात सामने आई है। यह पूरा मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ गया है।

अमेरिका: एलेक्स प्रीटी गोलीकांड के बाद भड़का विरोध

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वाशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में इमीग्रेशन एजेंटों द्वारा 37 वर्षीय एलेक्स जेफरी प्रीटी को गोली मारे जाने की घटना के बाद एक बार फिर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब इससे पहले 7 जनवरी को अमेरिकी नागरिक रेनी गुड की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसके खिलाफ भी लोग सड़कों पर उतरे थे। लगातार हो रही इन घटनाओं ने अमेरिका में पुलिस और इमीग्रेशन एजेंसियों की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने इस मामले में बयान जारी करते हुए कहा कि एलेक्स प्रीटी कथित तौर पर पिस्तौल लेकर इमीग्रेशन एजेंटों के पास जाने की कोशिश कर रहे थे। विभाग का दावा है कि जब एजेंटों ने उन्हें निहत्था करने की कोशिश की, तो उन्होंने हिंसक विरोध किया, जिसके बाद आत्मरक्षा में गोली चलाई गई। DHS के अनुसार, यह पूरी घटना सीमा गश्ती दल के एक अधिकारी द्वारा आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई थी।

हालांकि, इस घटना से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जो सरकारी दावों से अलग तस्वीर पेश करते नजर आ रहे हैं। वायरल फुटेज में एलेक्स प्रीटी बर्फ से ढके फुटपाथ पर एक महिला प्रदर्शनकारी को केमिकल छिड़काव से बचाने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं. इसी दौरान एक एजेंट उन्हें बर्फीली सड़क पर घसीटते हुए नजर आता है। इन वीडियो ने घटना को लेकर विवाद को और गहरा कर दिया है।

कौन थे एलेक्स जेफरी प्रीटी

37 वर्षीय एलेक्स जेफरी प्रीटी अमेरिकी वयोवृद्ध मामलों के विभाग (Department of Veterans Affairs) में कार्यरत थे। वह अमेरिकी नागरिक थे और उनका जन्म इलिनोइस में हुआ था। एलेक्स प्रीटी 7 जनवरी को रेनी गुड की हत्या के बाद आयोजित विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल हो रहे थे। यह विरोध प्रदर्शन इमीग्रेशन अधिकारियों की कार्रवाई के खिलाफ किए जा रहे थे।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, एलेक्स प्रीटी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। उनके परिवार ने बताया कि पुलिस के साथ उनका संपर्क केवल कुछ यातायात चालानों तक ही सीमित रहा था। परिवार का कहना है कि वह शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और सामाजिक मुद्दों को लेकर संवेदनशील थे, इसी कारण वह विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे थे।

परिवार ने क्या कहा

एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना से कुछ समय पहले एलेक्स प्रीटी के माता-पिता, जो कोलोराडो में रहते हैं, ने फोन पर उनसे बात की थी। उन्होंने अपने बेटे को विरोध प्रदर्शनों में भाग लेते समय सुरक्षित रहने की सलाह दी थी। परिवार का कहना है कि उन्हें इस बात की उम्मीद नहीं थी कि हालात इतने बिगड़ जाएंगे कि उनकी जान चली जाएगी।

DHS का पक्ष

गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने इस घटना को इमीग्रेशन एजेंटों पर हमला करार दिया है. विभाग का कहना है कि एक व्यक्ति बंदूक लेकर अधिकारियों के पास आया था और जब अधिकारियों ने उसकी बंदूक छीनने की कोशिश की, तो उसने विरोध किया। DHS के अनुसार, इसी दौरान सीमा गश्ती दल के एक अधिकारी ने आत्मरक्षा में गोली चलाई।

DHS ने यह भी कहा कि उनके एजेंटों और अधिकारियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधि का सख्ती से जवाब दिया जाएगा। विभाग का दावा है कि घटना की आंतरिक जांच की जा रही है और सभी तथ्यों की समीक्षा की जा रही है।

वीडियो फुटेज ने बढ़ाया विवाद

हालांकि, घटना के चश्मदीदों और सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो फुटेज DHS के दावों से मेल नहीं खाते। आसपास मौजूद लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो में एलेक्स प्रीटी को बंदूक के बजाय मोबाइल फोन पकड़े हुए देखा गया है। फुटेज में वह अन्य प्रदर्शनकारियों की मदद करते दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें एजेंटों ने जमीन पर गिरा दिया था।
इन वीडियो में यह भी देखा जा सकता है कि एलेक्स प्रीटी किसी पर हमला नहीं कर रहे थे, बल्कि महिला प्रदर्शनकारियों को केमिकल स्प्रे से बचाने की कोशिश कर रहे थे। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इन वीडियो फुटेज की पुष्टि की है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

विरोध प्रदर्शन फिर तेज

एलेक्स प्रीटी को गोली मारे जाने के बाद मिनियापोलिस में एक बार फिर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इमीग्रेशन एजेंटों द्वारा की गई यह कार्रवाई गैरजरूरी और अत्यधिक बल प्रयोग का उदाहरण है। लोग रेनी गुड और एलेक्स प्रीटी दोनों को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, इमीग्रेशन एजेंसियों की कार्यप्रणाली और बल प्रयोग के नियमों की भी समीक्षा करने की मांग उठ रही है।

जांच और आगे की कार्रवाई

फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ संघीय एजेंसियां भी घटनाक्रम की समीक्षा कर रही हैं. वीडियो फुटेज, चश्मदीदों के बयान और आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. इस घटना ने एक बार फिर अमेरिका में कानून प्रवर्तन एजेंसियों और नागरिकों के बीच बढ़ते तनाव को उजागर कर दिया है।

नीट छात्रा मौत मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट से हड़कंप l

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Budget 2026: शिक्षा सेक्टर को मिल सकता है बड़ा फंड, AI पर फोकस

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। Budget 2026 को लेकर अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। 1 फरवरी को रविवार होने के बावजूद वित्त वर्ष 2026 का यूनियन बजट संसद में पेश किया जाएगा। इस बार बजट से शिक्षा क्षेत्र को लेकर बड़ी उम्मीदें जताई जा रही हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा की गुणवत्ता, बुनियादी ढांचे और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बड़े फैसले लिए जाने की संभावना है।

माना जा रहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बजट में शिक्षा सेक्टर के लिए अतिरिक्त फंड का ऐलान कर सकती हैं, जिससे देश के टैलेंट बेस को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा में सुधार के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी विकास में लगातार निवेश जरूरी है।

विशेषज्ञों की राय

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, जयपुरिया ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन शिशिर जयपुरिया ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पर्याप्त बजट आवंटन बेहद जरूरी है। उन्होंने शिक्षकों के प्रोफेशनल डेवलपमेंट को शिक्षा सुधार की सबसे अहम कड़ी बताया।

स्किल और AI पर फोकस की उम्मीद

शिशिर जयपुरिया को उम्मीद है कि बजट 2026 में वोकेशनल और स्किल-बेस्ड एजुकेशन के लिए नेशनल प्रोग्राम को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की पढ़ाई और निवेश बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है, जिससे ग्रामीण और छोटे शहरों के छात्र पीछे न रहें।

नीट छात्रा मौत मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट से हड़कंप

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पटना नीट छात्रा मौत मामला: बड़ी कार्रवाई, थानेदार और दारोगा सस्पेंड, जांच में लापरवाही उजागर

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)नीट छात्रा मौत मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में पटना पुलिस ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। लापरवाही बरतने के आरोप में चित्रगुप्त नगर थाने की थानेदार रौशनी कुमारी और कदमकुआं थाने के दारोगा हेमंत झा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
पटना SSP कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, घटना की सूचना मिलने के बावजूद दोनों पुलिसकर्मियों ने समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। आरोप है कि इस गंभीर मामले को शुरुआती स्तर पर नजरअंदाज किया गया, जिससे जांच प्रभावित हुई। जिस दिन छात्रा की मौत हुई, उसके बाद तीन दिनों तक न तो हॉस्टल सील किया गया, न ही कमरा, बिस्तर और कपड़े सुरक्षित किए गए। इससे महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।


अधिकारियों का मानना है कि शुरुआती जांच में लापरवाही और वरीय अधिकारियों को गुमराह करने की वजह से केस की दिशा भटक गई। सही और स्पष्ट जानकारी समय पर नहीं मिलने के कारण एसआईटी की जांच में भी काफी परेशानी आई।
शनिवार को पटना नीट छात्रा मौत मामले में दो बड़े खुलासे सामने आए। पहला, फॉरेंसिक टीम ने एसआईटी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिलने की पुष्टि हुई है। इस रिपोर्ट के आधार पर पहले से गिरफ्तार आरोपियों के साथ-साथ एसआईटी द्वारा चिह्नित अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के डीएनए सैंपल से मिलान किया जाएगा।
दूसरा अहम खुलासा पटना एम्स के फॉरेंसिक साइंस विभाग के HOD डॉ. विनय कुमार ने किया। उन्होंने बताया कि इस केस की जांच के लिए एक विशेष मेडिकल टीम बनाई गई थी, लेकिन एसआईटी की ओर से अधूरे दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, जिससे जांच प्रक्रिया में देरी हो रही है।
फिलहाल पटना नीट छात्रा मौत मामला लगातार जांच के दायरे में है। पुलिस और एसआईटी की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं कि आखिर दोषियों तक कब और कैसे पहुंचा जाएगा।

स्वच्छ भारत की मिसाल बना देवरिया पुलिस का स्वच्छता अभियान

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद देवरिया में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देने की दिशा में देवरिया पुलिस ने एक सराहनीय पहल करते हुए वृहद स्वच्छ भारत अभियान चलाया। इस अभियान के तहत पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने श्रमदान कर पुलिस कार्यालयों, थानों, चौकियों और पुलिस लाइन परिसरों की साफ-सफाई की और समाज को स्वच्छता का सशक्त संदेश दिया।

25 जनवरी 2026 को आयोजित इस विशेष अभियान का उद्देश्य केवल पुलिस परिसरों को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाना नहीं था, बल्कि यह संदेश देना भी था कि “स्वच्छता ही जीवन का आधार है” और इसे अपनाकर ही स्वस्थ, स्वच्छ और श्रेष्ठ भारत का निर्माण संभव है।

कार्यालयों से पुलिस लाइन तक चला अभियान

देवरिया पुलिस द्वारा चलाए गए इस स्वच्छता अभियान के अंतर्गत—

• पुलिस कार्यालय
• सभी थाना एवं चौकी परिसर
• पुलिस लाइन
• आवासीय परिसर

में व्यापक स्तर पर सफाई अभियान चलाया गया। पुलिसकर्मियों ने स्वयं हाथों में झाड़ू और सफाई उपकरण लेकर श्रमदान किया। इस पहल से आमजन को यह स्पष्ट संदेश मिला कि स्वच्छता केवल किसी एक वर्ग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी की साझा जिम्मेदारी है।

व्यवस्थित प्रबंधन पर भी दिया गया जोर

स्वच्छता अभियान के दौरान केवल सफाई तक सीमित न रहते हुए सुव्यवस्थित प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया गया। पुलिस वाहनों को क्रमबद्ध ढंग से खड़ा किया गया, जिससे परिसर में अनुशासन और व्यवस्था दिखाई दी।

इसके साथ ही—

• महत्वपूर्ण अभिलेखों को सुरक्षित और व्यवस्थित किया गया
• कार्यालयों में रखे संसाधनों की साफ-सफाई की गई
• फर्नीचर और अन्य उपकरणों का रख-रखाव किया गया
• अनावश्यक सामग्री हटाकर स्थान को खुला और उपयोगी बनाया गया

इससे न केवल स्वच्छता बढ़ी, बल्कि कार्यक्षमता में भी सुधार देखने को मिला।

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पेड़-पौधों की देखभाल से संवरा परिसर

पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए अभियान के दौरान हरित क्षेत्रों पर भी विशेष फोकस किया गया। पुलिसकर्मियों ने—

• सूखे पत्तों की सफाई
• पेड़-पौधों की छंटाई
• खर-पतवार की निराई
• पौधों के आसपास की मिट्टी की सफाई

की। इससे पुलिस परिसर अधिक सुसज्जित और आकर्षक नजर आया। हरियाली बढ़ने से वातावरण भी स्वच्छ और सकारात्मक बना।

“स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत” का संदेश

इस अवसर पर पुलिसकर्मियों ने श्रमदान के माध्यम से स्वच्छता का संकल्प लिया और यह संदेश दिया कि स्वच्छ वातावरण ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है। अभियान के दौरान यह बात दोहराई गई कि स्वच्छता कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि निरंतर अपनाई जाने वाली आदत है।

पुलिसकर्मियों ने “स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत, श्रेष्ठ भारत” के नारे को आत्मसात करते हुए पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता बनाए रखने की शपथ ली।

पुलिस की पहल बनी समाज के लिए प्रेरणा

देवरिया पुलिस का यह स्वच्छता अभियान केवल विभागीय गतिविधि नहीं रहा, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरा। पुलिसकर्मियों द्वारा स्वयं श्रमदान करने से यह संदेश गया कि स्वच्छता में हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।

आम नागरिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जब पुलिस जैसे जिम्मेदार संस्थान आगे आकर स्वच्छता का उदाहरण पेश करते हैं, तो समाज में भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

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आगे भी जारी रहेंगे ऐसे अभियान

देवरिया पुलिस ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को लेकर ऐसे अभियान भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे। पुलिस प्रशासन का उद्देश्य है कि सरकारी परिसरों के साथ-साथ आमजन में भी स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाई जाए और स्वच्छ भारत अभियान को जन-आंदोलन बनाया जाए।

अन्य वीडियो:

देवरिया में मॉर्निंग वॉकर चेकिंग, पुलिस की सख्ती से बढ़ी सुरक्षा

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद देवरिया में आमजन की सुरक्षा, शांति और कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से रविवार सुबह देवरिया पुलिस ने व्यापक मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान चलाया। यह अभियान पुलिस अधीक्षक देवरिया श्री संजीव सुमन के निर्देशन में जनपद के सभी थाना क्षेत्रों में एक साथ संचालित किया गया। इस दौरान पुलिस और आम नागरिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ, जिससे मित्र पुलिसिंग की भावना और मजबूत हुई।

सुबह 05:00 बजे से 08:00 बजे तक चले इस विशेष अभियान के दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों से बातचीत की, उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया और उनकी समस्याएं सुनीं। कई स्थानों पर छोटे-मोटे विवादों का मौके पर ही समाधान किया गया, जिससे आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास और बढ़ा।

सुरक्षा, संवाद और विश्वास का प्रयास

देवरिया पुलिस का यह अभियान केवल वाहनों और संदिग्ध व्यक्तियों की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना था। पुलिस अधिकारियों ने लोगों को बताया कि सुबह के समय नियमित गश्त और चेकिंग से अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकता है। नागरिकों ने भी पुलिस के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे सुरक्षा की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।

मार्निंग वॉक पर निकले वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और युवाओं ने पुलिस से खुलकर संवाद किया। उन्होंने कहा कि सुबह के समय पुलिस की सक्रिय मौजूदगी से उन्हें सुरक्षित महसूस होता है और अपराधियों में भय बना रहता है।

संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों पर कड़ी नजर

मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान के दौरान देवरिया पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी। अभियान के तहत—

• संदिग्ध व्यक्तियों से गहन पूछताछ

• चोरी की गाड़ियों की पहचान व चेकिंग

• दोपहिया वाहनों पर तीन सवारी के खिलाफ कार्रवाई

• मॉडिफाइड साइलेंसर लगे वाहनों का चालान

• नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर सख्त कार्रवाई

• अवैध असलहा और मादक पदार्थों की तलाश

जैसी गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया गया। पुलिस की इस सख्ती से नियमों का उल्लंघन करने वालों में हड़कंप मचा रहा।

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19 स्थानों पर चला अभियान, सैकड़ों की जांच

देवरिया पुलिस द्वारा चलाए गए इस विशेष अभियान के दौरान पूरे जनपद में—

• 19 प्रमुख स्थानों पर चेकिंग
• 333 व्यक्तियों की जांच
• 167 वाहनों की सघन चेकिंग
की गई। पुलिस की सतर्कता के चलते कई नियम उल्लंघनकर्ताओं पर कार्रवाई की गई, जिससे यातायात नियमों के पालन को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी।

मित्र पुलिसिंग की दिशा में बड़ा कदम

इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत रही मित्र पुलिसिंग की भावना। पुलिस अधिकारियों ने आमजन को यह भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याएं प्राथमिकता के आधार पर सुनी जाएंगी और कानून व्यवस्था बनाए रखने में जनसहयोग बेहद जरूरी है।

नागरिकों ने कहा कि ऐसे अभियानों से असामाजिक तत्वों में भय बना रहता है और अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण होता है। आमजन ने पुलिस प्रशासन से इस तरह के अभियान नियमित रूप से चलाने की मांग भी की।

आगे भी जारी रहेंगे ऐसे अभियान

देवरिया पुलिस ने स्पष्ट किया कि जनपद में शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी क्रम में मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान जैसे प्रयास भविष्य में भी लगातार जारी रहेंगे।

पुलिस प्रशासन का मानना है कि पुलिस और जनता के बीच मजबूत विश्वास ही एक सुरक्षित समाज की नींव है। ऐसे अभियानों से न केवल अपराधों पर नियंत्रण होता है, बल्कि आमजन का पुलिस पर भरोसा भी और मजबूत होता है।

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UPI Payment: बिना बैलेंस भी ऐसे करें UPI पेमेंट

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UPI Payment: आज के समय में डिजिटल लेनदेन का सबसे आसान और तेज माध्यम बन चुका है। बैंक अकाउंट में पैसे हों और मोबाइल में अच्छा इंटरनेट कनेक्शन हो, तो कहीं भी और कभी भी UPI के जरिए पेमेंट करना बेहद सरल हो जाता है. छोटे दुकानदार से लेकर बड़े मॉल, ऑनलाइन शॉपिंग से लेकर बिल भुगतान तक, हर जगह UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

यही वजह है कि ज्यादातर लोग कैश रखने की जरूरत ही नहीं समझते।
आमतौर पर लोगों को यही लगता है कि UPI से पेमेंट करने के लिए बैंक अकाउंट में बैलेंस होना जरूरी है। लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। अब बिना बैंक अकाउंट बैलेंस के भी UPI से पेमेंट किया जा सकता है। दरअसल, UPI ऐप्स में मौजूद एक खास सुविधा के जरिए यह संभव हो पाया है, जिसे क्रेडिट लाइन ऑन UPI कहा जाता है।

क्या है क्रेडिट लाइन ऑन UPI

क्रेडिट लाइन ऑन UPI एक ऐसी सुविधा है, जिसके जरिए यूजर अपने बैंक अकाउंट में पैसे न होने के बावजूद UPI से पेमेंट कर सकता है. यह सुविधा काफी हद तक क्रेडिट कार्ड की तरह काम करती है. इसमें बैंक आपको एक तय लिमिट तक क्रेडिट देता है, जिससे आप QR कोड स्कैन कर या UPI पिन डालकर पेमेंट कर सकते हैं।

इस सुविधा के तहत किया गया पेमेंट असल में बैंक से लिया गया लोन होता है. यानी जितनी रकम आप खर्च करते हैं, उसे बाद में बैंक को चुकाना होता है. यही कारण है कि बैंक इस रकम पर ब्याज भी वसूल करते हैं. कुछ बैंक तुरंत ब्याज लगाना शुरू कर देते हैं, जबकि कुछ बैंक महीने के अंत से इंटरेस्ट चार्ज करते हैं।

कौन-कौन से बैंक दे रहे हैं यह सुविधा

फिलहाल कई बड़े प्राइवेट और सरकारी बैंक क्रेडिट लाइन ऑन UPI की सुविधा दे रहे हैं. इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

• एक्सिस बैंक
• HDFC बैंक
• ICICI बैंक
• इंडियन बैंक
• पंजाब नेशनल बैंक (PNB)

इन बैंकों के ग्राहक अपने UPI ऐप के जरिए क्रेडिट लाइन को एक्टिवेट कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर बिना बैलेंस के भी UPI पेमेंट कर सकते हैं।

क्रेडिट लाइन की लिमिट कितनी होती है

क्रेडिट लाइन से UPI पेमेंट करने की लिमिट बैंक और यूजर की प्रोफाइल पर निर्भर करती है. आमतौर पर यह लिमिट 2,000 रुपये से लेकर 60,000 रुपये तक हो सकती है. बैंक आपकी आय, क्रेडिट स्कोर और बैंकिंग हिस्ट्री के आधार पर यह लिमिट तय करते हैं।

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क्रेडिट लाइन ऑन UPI कैसे करें एक्टिवेट

अगर आप भी बिना बैंक बैलेंस के UPI पेमेंट करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं—

  1. सबसे पहले अपने मोबाइल में मौजूद किसी भी UPI ऐप को खोलें.
  2. अब ऐप के सर्च बार में जाकर ‘क्रेडिट लाइन’ सर्च करें.
  3. इसके बाद आपको ‘Add Credit Line’ या ‘क्रेडिट लाइन जोड़ें’ का ऑप्शन दिखाई देगा.
  4. इस पर क्लिक करने के बाद उस बैंक का चयन करें, जिसमें आपका अकाउंट है.
  5. बैंक सिलेक्ट करने के बाद आपको UPI पिन सेट करने का विकल्प मिलेगा.
  6. इसके लिए आधार के जरिए वेरिफिकेशन करना जरूरी होता है.
  7. वेरिफिकेशन के दौरान अपना आधार नंबर डालें और आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए OTP को दर्ज करें.
  8. वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद आप अपना UPI पिन सेट कर सकते हैं.

एक बार पिन सेट हो जाने के बाद आपकी क्रेडिट लाइन एक्टिवेट हो जाती है.

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    क्रेडिट लाइन से UPI पेमेंट कैसे करें

    1. क्रेडिट लाइन एक्टिवेट होने के बाद पेमेंट करना बेहद आसान है—

    2. • किसी भी दुकान या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर QR कोड स्कैन करें या UPI ID डालें.

    • पेमेंट के समय सेविंग अकाउंट की जगह ‘क्रेडिट लाइन’ का ऑप्शन चुनें.

    • अब अपना UPI पिन डालें और पेमेंट कन्फर्म करें.

    इतना करते ही आपका पेमेंट पूरा हो जाएगा, भले ही आपके बैंक अकाउंट में बैलेंस न हो.

    किन बातों का रखें ध्यान

    हालांकि यह सुविधा काफी उपयोगी है, लेकिन इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करना जरूरी है—

    • यह एक तरह का लोन है, इसलिए इस पर ब्याज देना होता है.

    • समय पर भुगतान न करने पर अतिरिक्त चार्ज लग सकता है.

    •ज्यादा इस्तेमाल करने से आपकी वित्तीय स्थिति पर असर पड़ सकता है.

    • क्रेडिट लिमिट से ज्यादा खर्च नहीं किया जा सकता.

    इसलिए जरूरी है कि क्रेडिट लाइन का इस्तेमाल केवल जरूरत पड़ने पर ही करें.

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    क्यों है यह फीचर खास

    क्रेडिट लाइन ऑन UPI उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है, जिन्हें अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाती है. बैंक बैलेंस खत्म होने पर भी जरूरी पेमेंट रुकता नहीं है. यही वजह है कि यह फीचर डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

      बिकरू कांड: 5 साल बाद ऋचा दुबे ने खुशी दुबे पर लगाए आरोप

      उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुए चर्चित बिकरू कांड से जुड़े मामले में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। इस बार सुर्खियों में हैं कांड के मुख्य आरोपी रहे विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे, जो करीब पांच साल बाद अचानक मीडिया के सामने आईं। ऋचा दुबे ने सामने आकर खुशी दुबे पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि खुशी दुबे उनके पति विकास दुबे और पूरे परिवार को बदनाम कर रही है।

      ऋचा दुबे के अचानक सामने आने के बाद बिकरू कांड से जुड़ा यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। कानपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ऋचा दुबे ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कई आरोप लगाए और कहा कि अब वे और उनका परिवार लगातार प्रताड़ना झेल रहे हैं, इसलिए उन्हें मीडिया के सामने आना पड़ा।

      खुशी दुबे पर लगाए गंभीर आरोप

      ऋचा दुबे ने स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया कि खुशी दुबे गलत तरीके से विकास दुबे पर आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि खुशी यह दावा कर रही है कि विकास दुबे उसे जबरन उठाकर लाए थे, जबकि यह पूरी तरह गलत है। ऋचा दुबे के मुताबिक विकास दुबे ने खुशी को ठाकुर परिवार से बचाकर बाहर निकाला था और बाद में खुशी ने अपनी मर्जी से अमर तिवारी से शादी की थी।

      ऋचा दुबे ने कहा कि खुशी दुबे खुद को दुबे बताती है, जबकि वह या तो खुशी तिवारी है या खुशी ठाकुर। उन्होंने दावा किया कि खुशी की तीन शादियां हो चुकी हैं। ऋचा दुबे के अनुसार खुशी के पहले पति के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, दूसरा पति अतुल ठाकुर था और तीसरी शादी अमर तिवारी से हुई थी।

      परिवार को बदनाम करने का आरोप

      ऋचा दुबे ने कहा कि खुशी दुबे लगातार उनके मृतक पति विकास दुबे और पूरे परिवार को बदनाम कर रही है। इसी वजह से वह अब मीडिया के सामने आकर अपना पक्ष रख रही हैं। उन्होंने कहा कि इतने सालों तक चुप रहने के बाद अब मजबूरी में उन्हें सामने आना पड़ा है, क्योंकि लगातार उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है।

      उन्होंने यह भी कहा कि विकास दुबे अब इस दुनिया में नहीं हैं और ऐसे में उन पर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देने वाला कोई नहीं है। ऋचा दुबे के मुताबिक अगर विकास दुबे जिंदा होते तो कई सच्चाइयां सामने आ सकती थीं।

      बिकरू कांड पर क्या बोलीं ऋचा दुबे

      बिकरू कांड को लेकर ऋचा दुबे ने कहा कि उन्हें इस घटना की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने माना कि जो भी हुआ, वह गलत था। ऋचा दुबे ने कहा कि इस पूरे कांड में जो भी सच्चाई है, वह सामने आनी चाहिए, लेकिन झूठे आरोप लगाकर परिवार को बदनाम करना गलत है।

      उन्होंने दोहराया कि विकास दुबे की मौत के बाद भी उनका परिवार लगातार मानसिक प्रताड़ना झेल रहा है। उनका कहना है कि समाज और मीडिया के कुछ हिस्सों में अब भी उनके परिवार को अपराधी की नजर से देखा जाता है।

      ये भी पढ़ें – जानिए आज का दिन आपकी राशि के लिए क्या संकेत दे रहा है

      बिकरू कांड पर बन रही फिल्म का विरोध

      ऋचा दुबे ने बिकरू कांड पर बन रही फिल्म को लेकर भी कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने बताया कि इस फिल्म को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। ऋचा दुबे का आरोप है कि फिल्म की कहानी से छेड़छाड़ की गई है और इसमें विकास दुबे को लेकर कई झूठी बातें दिखाई जा रही हैं।

      उनका कहना है कि फिल्म के जरिए उनके पति और परिवार की छवि को और ज्यादा खराब करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मांग की है कि इस फिल्म पर रोक लगाई जाए या फिर सच्चाई के आधार पर ही इसे दिखाया जाए।

      हाईकोर्ट में याचिका दाखिल

      ऋचा दुबे ने बताया कि उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा इसलिए खटखटाया है ताकि उनके परिवार को न्याय मिल सके। याचिका में यह कहा गया है कि फिल्म में दिखाई जा रही कहानी वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाती और इससे उनके परिवार को नुकसान पहुंच रहा है।

      ऋचा दुबे का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही सच्चाई सामने आनी चाहिए, न कि फिल्मों और अफवाहों के जरिए।

      मामला फिर से चर्चा में

      ऋचा दुबे के इस बयान के बाद बिकरू कांड एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस बयान की चर्चा हो रही है। पांच साल बाद पहली बार विकास दुबे की पत्नी का सामने आना इस मामले को नया मोड़ देता नजर आ रहा है।

      अब देखने वाली बात यह होगी कि खुशी दुबे इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं और अदालत में दाखिल याचिका पर आगे क्या फैसला आता है।

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      केंद्र सरकार की मंजूरी: PSGIC, NABARD और RBI कर्मियों की सैलरी-पेंशन बढ़ी

      नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। केंद्र सरकार के अधीन कार्यरत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सरकार ने पब्लिक सेक्टर जनरल इंश्योरेंस कंपनियों (PSGICs), नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के कर्मचारियों व पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।

      वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाना और वित्तीय क्षेत्र में पेंशनभोगियों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना है। इस निर्णय से कुल 46,322 कर्मचारी, 23,570 पेंशनर्स और 23,260 फैमिली पेंशनर्स को सीधा लाभ मिलेगा।

      PSGIC कर्मचारियों को बड़ा फायदा

      PSGIC कर्मचारियों के लिए वेतन संशोधन 1 अगस्त 2022 से लागू होगा। इससे कुल वेतन बिल में 12.41 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जिसमें बेसिक पे और महंगाई भत्ते में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी शामिल है। इस फैसले से 43,247 PSGIC कर्मचारियों को लाभ होगा।

      इसके साथ ही 1 अप्रैल 2010 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए NPS योगदान को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया है। फैमिली पेंशन को भी 30 प्रतिशत की समान दर पर संशोधित किया गया है।

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      NABARD कर्मचारियों का वेतन संशोधन

      NABARD के ग्रुप A, B और C कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। यह संशोधन 1 नवंबर 2022 से लागू होगा। इससे करीब 3,800 कर्मचारियों और पेंशनर्स को फायदा मिलेगा।

      RBI पेंशनर्स को राहत

      RBI के रिटायर्ड कर्मचारियों और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। यह बढ़ोतरी 1 नवंबर 2022 से लागू होगी, जिससे कुल 30,769 लोगों को लाभ होगा।

      सरकार के इस फैसले से वित्तीय क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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