Saturday, March 14, 2026
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एकादशी व्रत विधि: शास्त्रोक्त पूजा, नियम और पारण की सम्पूर्ण जानकारी

एकादशी व्रत क्यों है इतना फलदायी? जानें शास्त्रों का रहस्य


सनातन धर्म में एकादशी व्रत विधि अत्यंत पवित्र और फलदायी मानी जाती है। प्रत्येक मास के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की उपासना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार एकादशी व्रत करने से पापों का नाश, मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है, जिन्हें सृष्टि का पालनहार कहा गया है।
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित एकादशी व्रत विधि केवल उपवास भर नहीं, बल्कि संयम, साधना और भक्ति का पर्व है। इस लेख में हम शास्त्रोक्त नियमों के अनुसार एकादशी व्रत, पूजा विधि, कथा, मंत्र, और पारण की सम्पूर्ण जानकारी विस्तार से प्रस्तुत कर रहे हैं।
एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व
एकादशी का अर्थ है चंद्र मास की ग्यारहवीं तिथि। पद्म पुराण और विष्णु पुराण में एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन उपवास रखने से मन और इंद्रियों पर नियंत्रण प्राप्त होता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार—
एकादशी व्रत करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
घर में सुख-समृद्धि आती है।
पूर्व जन्म के पापों से मुक्ति मिलती है।
वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
पूर्व तैयारी: दशमी तिथि का नियम
एकादशी व्रत विधि के अनुसार व्रत की शुरुआत दशमी तिथि से ही मानी जाती है।
दशमी के दिन निम्न नियम अपनाएं—
शाम को सात्विक भोजन करें।
प्याज, लहसुन और मांसाहार का त्याग करें।
संयमित और हल्का भोजन करें।
मन में व्रत का संकल्प लें।
शास्त्रों में कहा गया है कि दशमी के दिन संयम रखने से एकादशी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
एकादशी सुबह संकल्प विधि
व्रती को ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए। स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
भगवान विष्णु के समक्ष बैठकर दाहिने हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर संकल्प मंत्र बोलें—
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
यह मंत्र 108 बार जपने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
एकादशी पूजा विधि (शास्त्रोक्त प्रक्रिया)
एकादशी व्रत विधि के अंतर्गत पूजा की विस्तृत प्रक्रिया इस प्रकार है—

प्रतिमा स्थापना
पूजा चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं। भगवान विष्णु या शालिग्राम शिला स्थापित करें।

अभिषेक
गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) और शुद्ध जल से स्नान कराएं।

वस्त्र और चंदन
पीले वस्त्र अर्पित करें। पीला चंदन लगाएं।

पुष्प और तुलसी
पीले पुष्प, फल, धूप, दीप अर्पित करें।
तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं— बिना तुलसी के पूजा अधूरी मानी जाती है।

कथा और आरती
एकादशी व्रत कथा पढ़ें।
विष्णु चालीसा का पाठ करें।
भगवान विष्णु की आरती करें।
व्रत के नियम
एकादशी व्रत विधि में नियमों का पालन अनिवार्य है—
ब्रह्मचर्य का पालन करें।
क्रोध और असत्य से बचें।
दिनभर जप-भजन करें।
आवश्यकता अनुसार फलाहार या निर्जला उपवास रखें।
जो लोग पूर्ण उपवास नहीं रख सकते, वे दूध, फल, मखाना, साबूदाना आदि का सेवन कर सकते हैं।
प्रमुख एकादशी व्रत
वर्ष में 24 एकादशी आती हैं। प्रमुख एकादशी इस प्रकार हैं—
निर्जला एकादशी
देवउठनी एकादशी
मोक्षदा एकादशी
कामिका एकादशी
पापमोचनी एकादशी
हर एकादशी की कथा और महत्व अलग-अलग है, किंतु सभी में भगवान विष्णु की आराधना का विधान समान है।
पारण विधि (व्रत खोलना)
द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है।
पारण के नियम—
पहले ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं।
दान दें (अन्न, वस्त्र, दक्षिणा)।
तत्पश्चात स्वयं सात्विक भोजन ग्रहण करें।
ध्यान रखें कि पारण सही समय पर करना आवश्यक है, अन्यथा व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
एकादशी व्रत के लाभ
मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि
रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार
आध्यात्मिक उन्नति
पारिवारिक सुख-समृद्धि
वैज्ञानिक दृष्टि से भी उपवास शरीर को डिटॉक्स करने में सहायक माना जाता है।
एकादशी व्रत विधि केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का माध्यम है। शास्त्रों के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया एकादशी व्रत जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है।
यदि आप विधिपूर्वक एकादशी व्रत विधि का पालन करते हैं, तो निश्चित ही आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों लाभ प्राप्त होंगे।

अफसरशाही’ के गाल पर विधायक का तमाचा: BSA शालिनी को बचाने की लखनऊ वाली लॉबी हुई बेनकाब, अब शलभ मणि ने मंत्री को लिखा विस्फोटक’ पत्र!

बड़ा सवाल: जब योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ पर अपनी ही पार्टी के विधायक को भरोसा नहीं, तो जनता कहाँ जाए? सबूत मिटा देगी साहिबा, फौरन करो सस्पेंड!

गौरव कुशवाहा/विशेष संवाददाता

​लखनऊ: देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या कांड ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और अफसरशाही के बीच की काली साठगांठ को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। जब जिलाधिकारी की रिपोर्ट को सचिवालय की फाइलों में ‘दफन’ करने की कोशिश हुई, तो देवरिया सदर के विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी को अपनी ही सरकार के तंत्र के खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ा। विधायक ने बेसिक शिक्षा मंत्री को लिखे अपने कड़े पत्र (पत्रांक: MLA/VIP/544558/26) में वह कह दिया है, जिसे कहने से जिले के आला अफसर कतरा रहे थे आरोपी BSA साक्ष्यों को नष्ट कर सकती हैं, उन्हें तत्काल हटाओ!

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क्या अपनी ही सरकार के अफसरों पर विधायक को भरोसा नहीं?

​विधायक का यह पत्र महज एक सिफारिश नहीं, बल्कि ‘अविश्वास प्रस्ताव’ है उस सिस्टम के खिलाफ जो एक भगोड़ी अधिकारी को संरक्षण दे रहा है। पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि सुसाइड नोट और वीडियो संदेश जैसे पुख्ता साक्ष्यों के बाद भी कार्रवाई न होना जनमानस में ‘संशय’ पैदा कर रहा है। यह सवाल उठता है कि क्या मुख्यमंत्री के ‘बुलडोजर’ की चाबी उन अफसरों के पास है जो ‘वसूली सिंडिकेट’ के साझेदार हैं? विधायक की यह आशंका कि अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट किया जा सकता है, प्रशासन की कार्यशैली पर सबसे बड़ा सवालिया निशान है।

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​’भगोड़ी’ साहिबा और DVR का ‘मौन’ खेल

​एक तरफ विधायक पत्र लिख रहे हैं, दूसरी तरफ विभाग के ‘दीमक’ सबूत चाट रहे हैं। जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने 9 घंटे के ऑडिट में जिस फुटेज की पुष्टि की थी, वह पुलिस के हाथ लगते ही ‘कोरा’ निकलता है। सोमवार से लापता शालिनी श्रीवास्तव ने न चार्ज दिया, न छुट्टी ली, फिर भी शासन की ‘खामोशी’ उनके लिए कवच बनी हुई है। क्या यह मान लिया जाए कि एक क्लास-1 अफसर का रसूख, एक शिक्षक की चिता से उठी न्याय की लौ से भी बड़ा है?

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मनी ट्रेल: कब टूटेगा सिंडिकेट?

​गुलरिहा पुलिस अब बैंक स्टेटमेंट और कॉल डिटेल के जरिए उस 48 लाख रुपये की कड़ी जोड़ रही है, जिसने कृष्ण मोहन सिंह की जमीन बिकवा दी। मोबाइल और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच तो शुरू हो गई है, लेकिन असली सवाल ‘गिरफ्तारी’ का है। विधायक के पत्र ने अब गेंद शासन के पाले में डाल दी है या तो शालिनी श्रीवास्तव सस्पेंड होकर जेल जाएंगी, या फिर योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर ‘रसूख का ग्रहण’ लग जाएगा।

सेहत और स्वाद का संगम: होली पर घर में बनाएं मूंग दाल बाफरी

होली स्पेशल रेसिपी: घर पर बनाएं स्वादिष्ट मूंग दाल बाफरी, पारंपरिक स्वाद के साथ सेहत का भी ख्याल



होली का त्योहार सिर्फ रंगों का ही नहीं, बल्कि स्वाद और परंपरा का भी पर्व है। इस खास मौके पर जब घर-घर में गुझिया, मालपुआ और दही बड़े बनते हैं, तो कुछ लोग पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजन भी तलाशते हैं। ऐसे में मूंग दाल बाफरी एक बेहतरीन विकल्प है। मध्य भारत, खासकर मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में यह व्यंजन बेहद लोकप्रिय है। दाल-बाटी की तरह दिखने वाली मूंग दाल बाफरी स्वाद में हल्की, पौष्टिक और आसानी से पचने वाली होती है।
यह लेख आपको मूंग दाल बाफरी की संपूर्ण रेसिपी, बनाने की विधि, परोसने का तरीका और जरूरी टिप्स फोटो सहित विस्तार से बताएगा।
मूंग दाल बाफरी क्या है?
मूंग दाल बाफरी पारंपरिक भारतीय व्यंजन है जो उबली हुई और फिर घी में डूबी हुई आटे की गोलियों से बनती है। इसे आमतौर पर पंचमेल दाल, हरी चटनी और लहसुन की चटनी के साथ परोसा जाता है।
दाल-बाटी से अलग, बाफरी को पहले पानी में उबाला जाता है और फिर हल्का सा बेक या तंदूर में सेंका जाता है। यही प्रक्रिया इसे अंदर से मुलायम और बाहर से हल्का कुरकुरा बनाती है।
होली पर मूंग दाल बाफरी क्यों बनाएं?

  • यह व्यंजन त्योहार में कुछ अलग परोसने का अवसर देता है।
  • घी और दाल के कारण ऊर्जा से भरपूर होता है।
  • परिवार और मेहमानों के लिए सामूहिक रूप से बनाया जा सकता है।
  • स्वाद और सेहत का संतुलन बनाए रखता है।
    होली जैसे उत्सव में जब तला-भुना अधिक खाया जाता है, तब मूंग दाल बाफरी हल्का और संतुलित विकल्प बनती है।
    आवश्यक सामग्री
    बाफरी के लिए:
    गेहूं का आटा – 2 कप
    सूजी – ½ कप
    भिगोई हुई पीली मूंग दाल (दरदरी पिसी) – 1 कप
    अजवाइन – ½ चम्मच
    हल्दी – ¼ चम्मच
    नमक – स्वादानुसार
    घी – 4 बड़े चम्मच
    बेकिंग सोडा – चुटकी भर
    पानी – आवश्यकतानुसार
    दाल के लिए:
    तुअर दाल – ½ कप
    चना दाल – ¼ कप
    मूंग दाल – ¼ कप
    टमाटर – 1 बारीक कटा
    अदरक-लहसुन पेस्ट – 1 चम्मच
    जीरा, राई – ½ चम्मच
    लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर – 1-1 चम्मच
    घी – 2 चम्मच
    मूंग दाल बाफरी बनाने की विधि (स्टेप बाय स्टेप)
  1. आटा तैयार करें
    सबसे पहले एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा, सूजी और दरदरी पिसी मूंग दाल मिलाएं। अब इसमें नमक, हल्दी, अजवाइन और घी डालें। चुटकी भर बेकिंग सोडा मिलाएं।
    धीरे-धीरे पानी डालते हुए सख्त आटा गूंध लें। ध्यान रखें कि आटा ज्यादा नरम न हो।
  2. बाफरी की गोलियां बनाएं
    आटे की मध्यम आकार की गोलियां बना लें। चाहें तो हल्का सा चपटा कर लें ताकि अंदर तक अच्छी तरह पक जाएं।
  3. उबालने की प्रक्रिया
    एक बड़े भगोने में पानी उबालें। जब पानी उबलने लगे, तब उसमें बाफरी की गोलियां डालें।
    लगभग 10–15 मिनट तक उबालें। जब गोलियां ऊपर तैरने लगें, तो समझ लें कि वे पक चुकी हैं।
    उन्हें निकालकर कुछ देर ठंडा होने दें।
  4. बेक या सेंकें
    उबली हुई बाफरी को 180°C पर पहले से गरम ओवन में 15–20 मिनट तक बेक करें। यदि ओवन न हो तो तंदूर या गैस तवे पर भी सेंक सकते हैं।
    बाहर से सुनहरी होने पर निकाल लें।
  5. घी में डुबोएं
    गरम-गरम बाफरी को शुद्ध घी में डुबो दें। यही स्टेप मूंग दाल बाफरी को असली स्वाद देता है।
    दाल तैयार करने की विधि
    सभी दालों को धोकर कुकर में नमक और हल्दी के साथ उबाल लें।
    एक कड़ाही में घी गरम करें। उसमें जीरा और राई डालें। फिर अदरक-लहसुन पेस्ट, टमाटर और मसाले डालकर भूनें।
    उबली हुई दाल इसमें मिलाकर 5–7 मिनट पकाएं।
    परोसने का तरीका
    गरमागरम मूंग दाल बाफरी को प्लेट में रखें। ऊपर से थोड़ा घी डालें। साथ में पंचमेल दाल, लहसुन की चटनी और हरी चटनी परोसें।
    त्योहार के अवसर पर इसे गुड़ और छाछ के साथ भी परोसा जा सकता है।
    जरूरी टिप्स

आटा सख्त गूंधें, तभी बाफरी सही बनेगी। उबालते समय पानी पर्याप्त होना चाहिए। घी शुद्ध और गरम होना चाहिए।दाल गाढ़ी रखें, ज्यादा पतली न हो।
मूंग दाल बाफरी के स्वास्थ्य लाभ
मूंग दाल प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है।
घी ऊर्जा प्रदान करता है।
गेहूं का आटा जटिल कार्बोहाइड्रेट देता है।
इस तरह मूंग दाल बाफरी स्वाद के साथ पोषण भी देती है।
होली पर मेहमानों को चौंकाएं
अगर आप इस बार कुछ अलग परोसना चाहते हैं तो मूंग दाल बाफरी जरूर बनाएं। यह व्यंजन पारंपरिक भी है और सेहतमंद भी।
होली के रंगों के साथ जब गरमा-गरम मूंग दाल बाफरी परोसी जाती है, तो त्योहार का आनंद दोगुना हो जाता है।

24 साल की उम्र में अमर हो गए आज़ाद: जानें पूरी गाथा

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, चंद्रशेखर आज़ाद का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के अल्फ्रेड पार्क में उन्होंने अपने संकल्प को निभाते हुए अंतिम गोली स्वयं को मार ली, ताकि वे अंग्रेजों के हाथों जीवित न पकड़े जाएं। यह घटना केवल एक शहादत नहीं थी, बल्कि उस अदम्य साहस की मिसाल थी जिसने युवाओं की पीढ़ियों को प्रेरित किया।
आज चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत को याद करना, उनके विचारों और त्याग को समझना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के भाबरा गांव (वर्तमान अलीराजपुर जिला) में हुआ था। उनके पिता पंडित सीताराम तिवारी और माता जगरानी देवी थे। बचपन से ही उनमें साहस और देशभक्ति की भावना प्रबल थी।
महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन (1921) में भाग लेने के दौरान उन्हें पहली बार गिरफ्तार किया गया। जब अदालत में उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने कहा – “नाम: आज़ाद, पिता का नाम: स्वतंत्रता, पता: जेल।” तभी से वे चंद्रशेखर आज़ाद के नाम से प्रसिद्ध हो गए।

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क्रांतिकारी संगठन और नेतृत्व
हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA)
रामप्रसाद बिस्मिल और अन्य क्रांतिकारियों द्वारा स्थापित संगठन HRA का उद्देश्य सशस्त्र क्रांति के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्त करना था। बाद में चंद्रशेखर आज़ाद ने इस संगठन को पुनर्गठित किया।
हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA)
1928 में संगठन का नाम बदलकर HSRA कर दिया गया। इस संगठन में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे युवा क्रांतिकारी शामिल थे।
चंद्रशेखर आज़ाद इसके प्रमुख नेता बने और उन्होंने क्रांतिकारी गतिविधियों का नेतृत्व किया।
काकोरी कांड और सांडर्स हत्याकांड
काकोरी ट्रेन डकैती (1925)
9 अगस्त 1925 को लखनऊ के पास काकोरी स्टेशन पर ट्रेन से सरकारी खजाना लूटने की घटना ने अंग्रेजी हुकूमत को हिला दिया। इस योजना में चंद्रशेखर आज़ाद की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
सांडर्स हत्याकांड (1928)
लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए लाहौर में ब्रिटिश अधिकारी सांडर्स की हत्या की गई। इस कार्रवाई में भगत सिंह और राजगुरु के साथ चंद्रशेखर आज़ाद ने रणनीतिक भूमिका निभाई।

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27 फरवरी 1931: शहादत का दिन
27 फरवरी 1931 को अल्फ्रेड पार्क, इलाहाबाद में पुलिस ने उन्हें घेर लिया। कहा जाता है कि किसी मुखबिर ने सूचना दी थी। कई घंटों तक मुठभेड़ चली।
जब उनके पास केवल एक गोली बची, तो उन्होंने अपने संकल्प को निभाते हुए स्वयं को गोली मार ली।
आज वही स्थान अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क के नाम से जाना जाता है।
प्रतिज्ञा और व्यक्तित्व
चंद्रशेखर आज़ाद ने प्रण लिया था कि वे कभी अंग्रेजों के हाथों जीवित नहीं पकड़े जाएंगे। उनका यह संकल्प उनके व्यक्तित्व की दृढ़ता को दर्शाता है।
वे अनुशासनप्रिय, साहसी और संगठन क्षमता से परिपूर्ण थे।

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विचारधारा और प्रेरणा
उनकी विचारधारा केवल सशस्त्र क्रांति तक सीमित नहीं थी। वे समाजवादी सोच रखते थे और एक समानता आधारित भारत का सपना देखते थे।
HSRA के घोषणापत्र में स्पष्ट था कि उनका लक्ष्य केवल अंग्रेजों को हटाना नहीं, बल्कि एक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना करना था।
युवाओं के लिए प्रेरणा
आज भी चंद्रशेखर आज़ाद युवाओं के लिए साहस और देशभक्ति की मिसाल हैं।
उनका जीवन सिखाता है:
अन्याय के खिलाफ खड़े होना
अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहना
राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना

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ऐतिहासिक महत्व
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में चंद्रशेखर आज़ाद की भूमिका निर्णायक रही।
उनकी शहादत के बाद क्रांतिकारी आंदोलन और तेज हुआ।
भगत सिंह और उनके साथियों के मुकदमे ने पूरे देश में क्रांति की लहर पैदा कर दी।
चंद्रशेखर आज़ाद का बलिदान भारतीय इतिहास की अमर गाथा है। 27 फरवरी 1931 का दिन हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता कितने संघर्ष और बलिदानों से मिली है।
आज जरूरत है कि हम उनके आदर्शों को आत्मसात करें और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

बिजोलिया आंदोलन के नायक और स्वतंत्रता संघर्ष के अग्रदूत

विजय सिंह पथिक, बिजोलिया आंदोलन, स्वतंत्रता संग्राम, राजस्थान किसान आंदोलन


भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल बड़े राष्ट्रीय नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि अनेक ऐसे क्षेत्रीय योद्धाओं से भी समृद्ध है, जिन्होंने अपने साहस, लेखनी और संगठन क्षमता से जनजागरण की मशाल जलाई। विजय सिंह पथिक ऐसे ही क्रांतिकारी, साहित्यकार और जननेता थे, जिन्होंने सामंती और औपनिवेशिक शक्तियों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए किसानों और आम जनता को संगठित किया।
विजय सिंह पथिक का नाम विशेष रूप से बिजोलिया आंदोलन से जुड़ा है, जिसने राजस्थान में किसान चेतना की नींव रखी। स्वतंत्रता संग्राम के इस अध्याय में उनका योगदान अत्यंत प्रेरणादायक है।
प्रारंभिक जीवन और वैचारिक पृष्ठभूमि
विजय सिंह पथिक का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ। प्रारंभ से ही उनमें अन्याय के प्रति असहिष्णुता और देशभक्ति की भावना प्रबल थी। उन्होंने औपनिवेशिक शासन और सामंती अत्याचारों को निकट से देखा, जिसने उनके भीतर विद्रोह की चेतना जगाई।
उनकी वैचारिक प्रेरणा भारतीय गणराज्यों की परंपरा से जुड़ी थी। उन्होंने प्राचीन भारत के गणराज्यों पर विस्तृत निबंध लिखे, जिनमें लोकतांत्रिक मूल्यों और जनभागीदारी की परिकल्पना को रेखांकित किया। यह विचारधारा आगे चलकर उनके आंदोलनों की आधारशिला बनी।

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बिजोलिया आंदोलन: किसान चेतना का शंखनाद
राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में स्थित बिजोलिया में किसानों पर अत्यधिक कर और बेगार प्रथा का बोझ था। इसी अन्याय के विरुद्ध विजय सिंह पथिक ने किसानों को संगठित कर बिजोलिया आंदोलन की शुरुआत की।
यह आंदोलन मुख्यतः सामंती अत्याचारों और ब्रिटिश नीतियों के खिलाफ था। किसानों ने संगठित होकर करों का बहिष्कार किया और अपने अधिकारों की मांग उठाई।
बिजोलिया आंदोलन की विशेषताएँ:
अन्यायपूर्ण करों का विरोध
बेगार प्रथा समाप्त करने की मांग
संगठित और शांतिपूर्ण प्रतिरोध
किसान जागरूकता अभियान
हालांकि यह आंदोलन लंबे समय तक नहीं चल पाया, लेकिन इसने राजस्थान में किसान आंदोलनों की मजबूत नींव रखी। स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में बिजोलिया आंदोलन को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है।

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साहित्यिक योगदान: कविता, गीत और नाटक
विजय सिंह पथिक केवल आंदोलनकारी ही नहीं, बल्कि एक सशक्त साहित्यकार भी थे। उन्होंने अनेक कविताएँ और गीत लिखे, जो स्वतंत्रता सेनानियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हुए।
उनकी रचनाओं में प्रमुख विषय थे:
देशभक्ति
सामाजिक न्याय
शोषण के विरुद्ध संघर्ष
स्वराज की आकांक्षा
उनके नाटक और प्रेरणादायक कहानियाँ ग्रामीण अंचलों में जनजागरण का माध्यम बनीं। साहित्य के माध्यम से उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को जनांदोलन का रूप दिया।

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उत्तर प्रदेश में सक्रियता: अंतिम वर्षों का योगदान
हालाँकि उनका सबसे प्रेरणादायक कार्य राजस्थान में रहा, लेकिन जीवन के अंतिम वर्षों में वे कानपुर और मथुरा में रहे। उत्तर प्रदेश में भी वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे।
यह उल्लेखनीय है कि जहाँ उनका जन्म हुआ, वहीं के प्रदेश में उन्होंने अंतिम समय तक स्वतंत्रता, न्याय और समानता के लिए आवाज उठाई। 1954 में उनका निधन हुआ, लेकिन उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
सम्मान और स्मृति
स्वतंत्रता संग्राम में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए उनके नाम पर डाक टिकट जारी किया गया। कई स्थानों और संस्थानों का नाम उनके सम्मान में रखा गया है।
फिर भी, यह आवश्यक है कि नई पीढ़ी को विजय सिंह पथिक और बिजोलिया आंदोलन के महत्व से परिचित कराया जाए, ताकि स्वतंत्रता संग्राम के इस महत्वपूर्ण अध्याय को उचित स्थान मिल सके।
विचारधारा: स्वतंत्रता, न्याय और शोषण-मुक्त समाज
विजय सिंह पथिक का सपना केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था। वे सामाजिक और आर्थिक न्याय के भी पक्षधर थे।
उनकी विचारधारा के मुख्य तत्व:
किसान और मजदूर अधिकार
समानता और लोकतंत्र
शोषण-मुक्त समाज

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शिक्षा और जागरूकता का प्रसार
आज जब सामाजिक असमानताएँ और आर्थिक चुनौतियाँ सामने हैं, तब विजय सिंह पथिक के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।
इतिहास में स्थान और प्रासंगिकता
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के व्यापक परिप्रेक्ष्य में विजय सिंह पथिक का योगदान क्षेत्रीय होते हुए भी राष्ट्रीय महत्व का है।
बिजोलिया आंदोलन ने यह सिद्ध किया कि संगठित जनशक्ति से सामंती और औपनिवेशिक शक्तियों को चुनौती दी जा सकती है।

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इतिहासकारों और लेखकों ने भी उनके योगदान को रेखांकित किया है। स्वतंत्रता आंदोलन पर लेखन के लिए प्रसिद्ध लेखक भरत डोगरा ने अपनी पुस्तकों ‘व्हेन द टू स्ट्रीम्स मेट’ और ‘आज़ादी के दीवानों की दास्तान’ में ऐसे अनेक अनसुने नायकों की कहानियों को सामने लाया है।
विजय सिंह पथिक केवल एक नाम नहीं, बल्कि संघर्ष, साहित्य और सामाजिक चेतना का प्रतीक हैं।
बिजोलिया आंदोलन के माध्यम से उन्होंने किसान शक्ति को संगठित किया, साहित्य के माध्यम से जनजागरण किया और अपने विचारों से स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।
आज आवश्यकता है कि उनके जीवन और कार्यों पर व्यापक शोध हो, शैक्षिक पाठ्यक्रमों में उन्हें स्थान मिले और समाज में उनके योगदान को उचित सम्मान दिया जाए।

इतिहास का भावुक दिन: 27 फ़रवरी को हुए निधन की गाथा

भारत और विश्व इतिहास में 27 फ़रवरी को हुए निधन कई ऐसी महान विभूतियों से जुड़े हैं, जिन्होंने राजनीति, स्वतंत्रता संग्राम, साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। यह दिन उन महापुरुषों को स्मरण करने का अवसर है, जिनकी विचारधारा और कर्म आज भी प्रेरणा देते हैं। आइए जानते हैं 27 फ़रवरी को हुए निधन से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों के बारे में विस्तृत जानकारी।

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🇮🇳 1. नानाजी देशमुख (निधन: 2010)
नानाजी देशमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। वे एक प्रख्यात समाजसेवक और विचारक थे जिन्होंने ग्रामीण विकास के लिए जीवन समर्पित किया।
उन्होंने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और स्वावलंबन के मॉडल विकसित किए।
उनकी सेवाओं के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया।
27 फ़रवरी को हुए निधन में नानाजी देशमुख का नाम समाजसेवा की अमिट विरासत के रूप में दर्ज है।
🇮🇳 2. इन्दीवर (निधन: 1997)
हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय गीतकार इन्दीवर ने सैकड़ों सुपरहिट गीत लिखे।
उनके गीतों में भावनाओं की गहराई और सरल शब्दों की शक्ति दिखाई देती थी।
“चिंगारी कोई भड़के” और “कसमे वादे प्यार वफ़ा” जैसे गीत आज भी श्रोताओं के दिलों में बसे हैं।
27 फ़रवरी को हुए निधन के अवसर पर हिंदी सिनेमा उन्हें कृतज्ञता से याद करता है।

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🇮🇳 3. के. सी. रेड्डी (निधन: 1976)
के. सी. रेड्डी कर्नाटक के प्रथम मुख्यमंत्री थे।
उन्होंने प्रशासनिक सुधारों और विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बाद में वे मध्य प्रदेश के राज्यपाल भी रहे।
27 फ़रवरी को हुए निधन भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन था।
🇮🇳 4. गणेश वासुदेव मावलंकर (निधन: 1956)
गणेश वासुदेव मावलंकर स्वतंत्र भारत की पहली लोकसभा के अध्यक्ष थे।
उन्होंने संसदीय परंपराओं को मजबूत आधार प्रदान किया।
उनकी निष्पक्षता और अनुशासनप्रियता आज भी संसद के लिए आदर्श मानी जाती है।
27 फ़रवरी को हुए निधन भारतीय संसदीय इतिहास के लिए एक बड़ी क्षति थी।

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🇮🇳 5. चंद्रशेखर आज़ाद (निधन: 1931)
चंद्रशेखर आज़ाद भारत के महान क्रांतिकारी थे।
इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के अल्फ्रेड पार्क में 27 फ़रवरी 1931 को उन्होंने अंग्रेजों से घिर जाने पर स्वयं को गोली मार ली, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं किया।
उनकी वीरता और त्याग आज भी युवाओं को प्रेरित करता है।
27 फ़रवरी को हुए निधन में चंद्रशेखर आज़ाद का बलिदान स्वतंत्रता संग्राम का स्वर्णिम अध्याय है।
27 फ़रवरी को हुए निधन: इतिहास से सीख
27 फ़रवरी को हुए निधन केवल तिथियाँ नहीं हैं, बल्कि यह प्रेरणा, त्याग और राष्ट्र निर्माण की कहानियाँ हैं।
राजनीति से लेकर साहित्य और स्वतंत्रता संग्राम तक, इस दिन हमने कई महान हस्तियों को खोया, लेकिन उनके विचार आज भी जीवित हैं।
इतिहास के पन्नों में दर्ज 27 फ़रवरी को हुए निधन हमें यह याद दिलाते हैं कि व्यक्तित्व समाप्त हो सकते हैं, पर उनके आदर्श अमर रहते हैं।

सत्ता के ‘कवच’ में कातिल मुस्कान: 72 घंटे बाद भी BSA पर शासन मेहरबान?

क्या कद्दावर मंत्री के रसूख तले दब गई शिक्षक की ‘आखरी चीख’?

Bsa शालिनी श्रीवास्तव

जीरो टॉलरेंस का निकला दम, DM की निलंबन रिपोर्ट पर कुंडली मारकर बैठा शासन; बिना ‘चार्ज’ और बिना ‘लीव’ फरार हुईं मैडम, क्या साक्ष्य मिटाने का दिया जा रहा है ‘सेफ पैसेज’?


गौरव कुशवाहा ,विशेष संवाददाता

लखनऊ / देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का बुलडोजर क्या केवल गरीबों और लाचारों के लिए है? यह सवाल आज हर शिक्षक और नागरिक पूछ रहा है। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण ने सूबे की जीरो टॉलरेंस नीति की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। सोमवार रात को ही जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने BSA शालिनी श्रीवास्तव की आपराधिक लापरवाही पर निलंबन की संस्तुति शासन को भेज दी थी, लेकिन 72 घंटे बीत जाने के बाद भी शासन स्तर पर फाइल का एक पन्ना तक नहीं सरका है। आखिर वो कौन सा अदृश्य हाथ है जो एक दागी अधिकारी को बचाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देशों को भी ठेंगा दिखा रहा है?

कैबिनेट मंत्री का ‘वरदहस्त’ या सिस्टम की लाचारी?

​लखनऊ के गलियारों से छनकर आ रही खबरें बेहद चौंकाने वाली हैं। सूत्रों का दावा है कि यूपी कैबिनेट के एक बेहद कद्दावर मंत्री ने आरोपी बीएसए के बचाव में मोर्चा खोल दिया है। चर्चा है कि इसी सियासी दबाव के कारण सचिवालय के आला अफसर कार्रवाई करने से थर्रा रहे हैं। क्या लोकतंत्र में एक मंत्री की जिद, एक निर्दोष शिक्षक की जान और उसकी विधवा के आंसुओं से भी बड़ी हो गई है? आखिर शासन उस वसूली सिंडिकेट को ऑक्सीजन क्यों दे रहा है जिसने विभाग को लूट का अड्डा बना दिया था?
​भगोड़ी अधिकारी का

‘प्रशासकीय तांडव’: न चार्ज, न छुट्टी, फिर भी मौन है सरकार!

​आरोपी बीएसए शालिनी श्रीवास्तव की धृष्टता देखिए वे सोमवार के बाद से जिला मुख्यालय से लापता हैं। सरकारी सेवा नियमावली को ठेंगा दिखाते हुए उन्होंने न तो किसी को विभागीय प्रभार सौंपा और न ही कोई वैधानिक अवकाश लिया। एक राजपत्रित अधिकारी का इस तरह भगोड़ा हो जाना उसकी अपराधिक मानसिकता को प्रमाणित करता है। दफ्तर में फाइलें लावारिस हैं, डिजिटल साक्ष्य खतरे में हैं, और शासन तमाशबीन बना हुआ है। क्या प्रशासन उन्हें इतना समय देना चाहता है कि वे हाईकोर्ट से स्टे ले आएं या फिर भ्रष्टाचार के सारे सबूत मिटा दें?

डाइंग डिक्लेरेशन के बाद भी सुस्त क्यों है पुलिस?

​मृतक शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने मरने से पहले अपना आखिरी वीडियो रिकॉर्ड किया और 4 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा। कानून की भाषा में यह डाइंग डिक्लेरेशन है, जो किसी भी आरोपी को जेल भेजने के लिए सबसे बड़ा साक्ष्य होता है। वीडियो में शिक्षक ने साफ कहा मैडम और बाबू ने मुझे मार डाला। इसके बावजूद पुलिस अब तक केवल ‘बैंक स्टेटमेंट’ और ‘कॉल डिटेल’ के नाम पर वक्त काट रही है। क्या यह गिरफ्तारी टालने की कोई सोची-समझी रणनीति है?

वसूली का ‘ब्लूप्रिंट’: 48 लाख की फिरौती और गहने गिरवी रखने का दर्द
​जांच में साफ हुआ है कि यह केवल एक शिक्षक का मामला नहीं था। साथी शिक्षक अपर्णा और ओंकार से भी 16-16 लाख की डिमांड की गई थी। शिक्षक कृष्ण मोहन ने अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखे और जमीन बेची, लेकिन बीएसए की रकम की भूख खत्म नहीं हुई। जिस सिस्टम ने एक गुरु को ‘जमीन’ बेचने पर मजबूर कर दिया, उस सिस्टम के रखवाले आज ‘मंत्री जी’ की शरण में दुबक कर बैठे हैं।

27 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति: भारतीय राजनीति, साहित्य और सिनेमा की महान हस्तियां

27 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति भारतीय इतिहास, राजनीति, साहित्य और सिनेमा में अपना अमिट योगदान देने वाले रहे हैं। 27 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति न केवल अपने क्षेत्र में सफल रहे बल्कि उन्होंने समाज और राष्ट्र निर्माण में भी अहम भूमिका निभाई। आइए जानते हैं 27 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति के जीवन और उपलब्धियों के बारे में विस्तार से।
🎂 बी. एस. येदियुरप्पा (1943)
बी. एस. येदियुरप्पा का जन्म 27 फ़रवरी 1943 को हुआ था। वे कर्नाटक की राजनीति के प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं और कई बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए। भारतीय जनता पार्टी को दक्षिण भारत में मजबूत आधार दिलाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके नेतृत्व में राज्य में कई विकास योजनाओं की शुरुआत हुई।

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🎬 प्रकाश झा (1952)
प्रकाश झा का जन्म 27 फ़रवरी 1952 को बिहार में हुआ। वे हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक, निर्माता और पटकथा लेखक हैं। उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर आधारित फिल्में बनाकर एक अलग पहचान बनाई। ‘राजनीति’, ‘गंगाजल’ और ‘आरक्षण’ जैसी फिल्मों के माध्यम से उन्होंने भारतीय समाज की ज्वलंत समस्याओं को बड़े पर्दे पर उतारा।
🏛 वीरेन्द्र कुमार खटीक (1954)
वीरेन्द्र कुमार खटीक का जन्म 27 फ़रवरी 1954 को हुआ। वे मध्य प्रदेश से सांसद रहे हैं और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। 17वीं लोकसभा में उन्होंने क्षेत्रीय विकास और सामाजिक उत्थान के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

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🏢 श्यामा चरण शुक्ल (1925)
श्यामा चरण शुक्ल का जन्म 27 फ़रवरी 1925 को हुआ था। वे मध्य प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने राज्य में प्रशासनिक सुधार और ग्रामीण विकास को बढ़ावा दिया।
📚 मनोज दास (1934)
मनोज दास उड़िया और अंग्रेजी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक थे। उनका जन्म 27 फ़रवरी 1934 को हुआ। उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
✍ कुसुमाग्रज (1912)
विष्णु वामन शिरवाडकर, जिन्हें कुसुमाग्रज के नाम से जाना जाता है, का जन्म 27 फ़रवरी 1912 को हुआ था। वे मराठी साहित्य के महान कवि, नाटककार और उपन्यासकार थे। उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
🇮🇳 विजय सिंह पथिक (1882)
विजय सिंह पथिक का जन्म 27 फ़रवरी 1882 को हुआ। वे राजस्थान के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी थे और किसान आंदोलनों के प्रमुख नेता रहे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जनजागरण में अहम भूमिका निभाई।

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अन्य प्रमुख व्यक्तित्व
सत्य देव सिंह (1945) – भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे।
27 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति भारतीय समाज के विभिन्न क्षेत्रों में प्रेरणा स्रोत रहे हैं।
निष्कर्ष
27 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति भारत की राजनीतिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण स्तंभ रहे हैं। 27 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति अपने कार्यों और विचारों से आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं। इतिहास के पन्नों में 27 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

राशिफल: जानें मेष से मीन तक किसे होगा लाभ, किसे रहना होगा सावधान

27 फरवरी 2026 राशिफल के अनुसार ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति कुछ राशियों के लिए विशेष लाभकारी रहने वाली है, जबकि कुछ को सतर्कता बरतने की जरूरत है। हर राशि का स्वामी ग्रह उसके जीवन के विभिन्न पहलुओं—करियर, प्रेम, धन और स्वास्थ्य—पर प्रभाव डालता है। आइए विस्तार से पढ़ें 27 फरवरी 2026 राशिफल और जानें आपका दिन कैसा रहेगा।
मेष राशि
27 फरवरी 2026 राशिफल के अनुसार मेष राशि वालों को अपने रिश्तों में ईमानदारी बनाए रखनी चाहिए। प्रेम संबंधों में पारदर्शिता सकारात्मक परिणाम देगी।
कार्यक्षेत्र में चुनौतियाँ आएंगी, लेकिन आप अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से बेहतरीन प्रदर्शन कर पाएंगे।
लाभ: करियर में प्रगति
सावधानी: आवेश में निर्णय न लें

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वृषभ राशि
आज बदलावों से भरा दिन रहेगा। समय-समय पर ब्रेक लेना जरूरी है।
विदेश यात्रा के योग बन सकते हैं। व्यापार, प्रेम और वित्तीय मामलों में बड़े परिवर्तन संभव हैं।
लाभ: विदेश यात्रा, नए अवसर
सावधानी: सेहत का ध्यान रखें
मिथुन राशि
दिन व्यस्त रहेगा। कार्यालय में अतिरिक्त जिम्मेदारियाँ मिल सकती हैं।
वर्क-लाइफ बैलेंस बनाए रखना बेहद जरूरी है।
लाभ: नई जिम्मेदारी
सावधानी: मानसिक दबाव से बचें

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कर्क राशि
सकारात्मक सोच बनाए रखें। गॉसिप से दूरी बनाकर रखें।
परिवार या जीवनसाथी से सलाह लेना फायदेमंद रहेगा।
लाभ: पारिवारिक सहयोग
सावधानी: तनाव से बचें
सिंह राशि
सेहत के मामले में लापरवाही न करें।
दिन रोमांटिक रहेगा, लेकिन ऑफिस पॉलिटिक्स से सावधान रहें।
लाभ: प्रेम जीवन में मधुरता
सावधानी: कार्यस्थल विवाद

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कन्या राशि
सेल्फ लव और आत्मविश्वास पर ध्यान दें।
पुराने निवेश से अपेक्षित लाभ न मिलने की संभावना है।
लाभ: आत्मचिंतन
सावधानी: निवेश में सतर्कता
तुला राशि
करियर में महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी मिल सकती है।
आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी।
लाभ: आर्थिक उन्नति
सावधानी: समय प्रबंधन

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वृश्चिक राशि
हालिया डील से बड़ा धन लाभ हो सकता है।
प्रेम जीवन की परेशानियाँ दूर होंगी। विदेश यात्रा के योग हैं।
लाभ: धन लाभ
सावधानी: जल्दबाजी से बचें
धनु राशि
लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशन में संवाद बढ़ाएँ।
निवेश से पहले ठोस रणनीति बनाएं।
लाभ: योजनाबद्ध निवेश
सावधानी: स्वास्थ्य पर ध्यान
मकर राशि
पार्टनर के साथ समय बिताएं।
अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखें।
लाभ: रिश्तों में मजबूती
सावधानी: फिजूलखर्ची

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कुंभ राशि
योग और फिटनेस पर ध्यान दें।
आलस्य से बचकर काम समय पर पूरा करें।
लाभ: स्वास्थ्य में सुधार
सावधानी: टालमटोल से बचें
मीन राशि
आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी, लेकिन लग्जरी खर्च से बचें।
मेडिटेशन से मानसिक शांति मिलेगी।
लाभ: वित्तीय संतुलन
सावधानी: अनावश्यक खर्च
निष्कर्ष
27 फरवरी 2026 राशिफल के अनुसार आज का दिन तुला, वृश्चिक और वृषभ राशि वालों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। वहीं कर्क, सिंह और कन्या राशि वालों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।
ग्रहों की चाल आपके जीवन को प्रभावित करती है, लेकिन सकारात्मक सोच और सही निर्णय हर परिस्थिति को बेहतर बना सकते हैं।

संकट में सहारा बना एसबीआई: दो दिवंगत ग्राहकों के परिजनों को मिली करोड़ों की बीमा सहायता

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। कठिन परिस्थितियों में संवेदनशील बैंकिंग सेवा का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए भारतीय स्टेट बैंक की विकास भवन शाखा ने दो दिवंगत ग्राहकों के परिजनों को बीमा दावों की बड़ी राशि प्रदान कर आर्थिक राहत दी। शाखा की त्वरित कार्रवाई और सहयोग से दोनों परिवारों को न केवल वित्तीय संबल मिला, बल्कि उनके ऊपर से ऋण का बोझ भी कम हो गया।
विकास भवन शाखा से गृह ऋण लेने वाले वेदप्रकाश ने बैंक के मार्गदर्शन में एसबीआई जीवन बीमा की ₹1.15 करोड़ की जीवन बीमा पॉलिसी ली थी। दुर्भाग्यवश केवल दो प्रीमियम जमा करने के बाद उनका आकस्मिक निधन हो गया। शाखा ने तत्परता दिखाते हुए सभी औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कराईं और बीमा दावा प्रक्रिया को तेजी से निष्पादित कराया। बीमा राशि उनकी पत्नी गिरिजा को प्रदान की जा रही है, जिससे गृह ऋण का पूर्ण समापन कर मकान के मूल दस्तावेज परिवार को सौंपे जाएंगे।
इसी क्रम में जिला कलेक्ट्रेट के कर्मचारी परसुराम की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। उनका वेतन खाता विकास भवन शाखा में संचालित था, जिसमें राज्य सरकार की वेतन पैकेज योजना के अंतर्गत व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा सुविधा शामिल थी। दावा प्रक्रिया पूरी होने पर ₹50 लाख की बीमा राशि उनकी पत्नी ब्रह्मावती को प्रदान की जा रही है। इस सहायता से उनका व्यक्तिगत ऋण भी समायोजित किया जाएगा, जिससे परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
विकास भवन शाखा परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उप महाप्रबंधक कुमार आनंद, क्षेत्रीय प्रबंधक अभय श्रीवास्तव तथा शाखा प्रबंधक मयंक कपूर ने दोनों लाभार्थियों को औपचारिक रूप से चेक सौंपे और परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि बैंक हर परिस्थिति में अपने ग्राहकों के साथ खड़ा रहेगा।
उप महाप्रबंधक कुमार आनंद ने कहा कि बैंक का उद्देश्य केवल बैंकिंग सेवा देना नहीं, बल्कि जरूरत के समय ग्राहकों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना भी है। वहीं क्षेत्रीय प्रबंधक अभय श्रीवास्तव ने बीमा सुविधाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने और दावा प्रक्रिया को सरल बनाने को बैंक की प्राथमिकता बताया।
यह पहल दर्शाती है कि सही समय पर लिया गया बीमा कवर और बैंक का सक्रिय सहयोग किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में परिवारों के लिए मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।

डीएम-एसपी का जिला कारागार पर औचक निरीक्षण, बंदियों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण व सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद की कारागार व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम तथा बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की हकीकत परखने के उद्देश्य से जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा एवं पुलिस अधीक्षक सोमेन्द्र मीना ने जिला कारागार का औचक निरीक्षण किया। अधिकारियों के अचानक पहुंचने से जेल प्रशासन में हलचल देखी गई और व्यवस्थाओं को लेकर गहन पड़ताल की गई।
निरीक्षण के दौरान डीएम-एसपी ने सामान्य बैरक, महिला बैरक, कारागार चिकित्सालय, पाकशाला तथा पूरे जेल परिसर का विस्तार से निरीक्षण कर साफ- सफाई, सुरक्षा व्यवस्था, भोजन की गुणवत्ता और बंदियों को मिल रही सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया। पाकशाला में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने बंदियों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली। कई बंदियों ने न्यायिक प्रक्रियाओं, पेशी तथा अन्य व्यवस्थागत समस्याओं की जानकारी दी, जिस पर डीएम ने जेल अधीक्षक को संबंधित विभागों से समन्वय कर शिकायतों के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बंदियों के अधिकारों और मानवीय सुविधाओं में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने जमानत, पेशी, गवाही और अन्य न्यायिक प्रक्रियाओं को सुचारु बनाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से समन्वय स्थापित कर बंदियों को आवश्यक विधिक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया। साथ ही जेल मैन्युअल के अनुसार सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने और बंदियों के स्वास्थ्य की नियमित अंतराल पर चिकित्सकीय जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने सीसीटीवी कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया और उसे पूरी तरह व्यवस्थित रखने तथा सभी संवेदनशील स्थानों की 24×7 निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। जेल परिसर में सुरक्षा से जुड़ी किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतने और नियमित निगरानी बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया।
निरीक्षण के दौरान हाई सिक्योरिटी बैरक के हैंडओवर की प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि संवेदनशील बंदियों की सुरक्षा और निगरानी और अधिक प्रभावी हो सके।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक बृज किशोर गौतम सहित अन्य कारागार अधिकारी मौजूद रहें।

लार में कार्यकर्ताओं का सम्मान समारोह, बृजेश धर दूबे ने सौंपा दायित्व

लार/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)लार क्षेत्र के पिंडी में भारतीय जनता पार्टी के निवर्तमान मण्डल अध्यक्ष बृजेश धर दूबे के सफल कार्यकाल पूर्ण होने पर भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद राज्यमंत्री विजयलक्ष्मी गौतम ने बृजेश धर दूबे के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उनका नेतृत्व संगठन के लिए अत्यंत प्रभावशाली रहा। उन्होंने अटूट निष्ठा, जमीनी मेहनत और कुशल प्रबंधन के माध्यम से पार्टी को नई मजबूती प्रदान की। मंत्री ने कहा कि उन्होंने भाजपा की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के विजन को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप पार्टी का जनाधार लगातार बढ़ा।
इस अवसर पर बृजेश धर दूबे ने मण्डल के सभी कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता ही संगठन की वास्तविक शक्ति हैं, जिनके अनुशासन, परिश्रम और वैचारिक प्रतिबद्धता से पार्टी विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक संगठन बनी है। उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद और सेवा की भावना को सर्वोपरि मानती है।
कार्यक्रम के दौरान बृजेश धर दूबे ने नवनियुक्त मण्डल अध्यक्ष राजीव वर्मा का अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया और उन्हें औपचारिक रूप से दायित्व सौंपा। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि जिस समर्पण और निष्ठा से उन्होंने अब तक संगठन को मजबूत किया है, उसी भावना के साथ नए मण्डल अध्यक्ष के नेतृत्व में भी कार्य करते रहें।
समारोह का समापन संगठन की एकजुटता और आगामी योजनाओं के संकल्प के साथ हुआ।

नगरपालिका द्वारा स्वछता कार्यक्रम जारी

बरहज /देवरिया(राष्ट्र क़ी परम्परा)
नगर पालिका परिषद गौरा बरहज देवरिया मे उ0 प्र0 सरकार के दिशानिर्देश के क्रम में नगरपालिका अध्यक्ष एवं अधिशासी अधिकारी के आदेशानुसार स्वच्छ भारत मिशन अभियान 2025-26 एवं स्वच्छ वार्ड प्रतियोगिता के तहत गुरुवार को पटेल नगर दक्षिणी, पश्चिमी वार्ड, पटेल नगर मध्य वार्ड, रगरगंज, केवटलिया, वार्ड मे स्वच्छता कार्यक्रम चलाया गया और साथ ही लोगों को जागृत करते हुए अपील किया गया कि आप सभी लोग अपने घरों से निकलने वाले कूड़े को अलग-अलग करके पालिका के सफाई कर्मचारी को दे दे, जिससे कि आपका गली मोहल्ला वार्ड व नगर स्वच्छ बना रहे। स्वच्छता अपनावे बिमारी भगावे।

Civil Defence Volunteer Recruitment 2026: 10 मार्च तक करें आवेदन, युवाओं के लिए सुनहरा अवसर

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) जनपद में नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से Deoria Civil Defence Volunteer Recruitment 2026 की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अपर जिलाधिकारी एवं प्रभारी अधिकारी, नागरिक सुरक्षा कोर ने जानकारी देते हुए बताया कि नगरीय क्षेत्रों में अवैतनिक स्वयंसेवकों की नियुक्ति की जाएगी। इच्छुक अभ्यर्थी 10 मार्च 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।यह भर्ती नागरिक सुरक्षा अधिनियम, 1968 के प्रावधानों के तहत की जा रही है। नागरिक सुरक्षा संगठन का मुख्य उद्देश्य आपातकाल, आपदा या संभावित संकट की स्थिति में जन-धन की रक्षा करना है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल, प्राथमिक उपचार, अग्निशमन सहायता, औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा योजना और आपदा के समय त्वरित राहत उपाय शामिल हैं।Deoria Civil Defence Volunteer Recruitment 2026 के लिए आवेदक की आयु 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए। महिला एवं पुरुष दोनों आवेदन कर सकते हैं। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता हाईस्कूल उत्तीर्ण निर्धारित की गई है। अभ्यर्थी का भारतीय नागरिक, अराजनैतिक एवं उत्तम चरित्र का होना अनिवार्य है। आपदा प्रबंधन, फर्स्ट एड या सुरक्षा सेवाओं का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।आवेदन पत्र नियंत्रक, जिलाधिकारी/नागरिक सुरक्षा कोर कार्यालय, देवरिया से कार्यदिवस में सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक प्राप्त किए जा सकते हैं। भरे हुए आवेदन पत्र 24 फरवरी से 10 मार्च 2026 तक सायं 4:30 बजे तक जमा किए जाएंगे।प्रशासन ने युवाओं से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाकर जनसेवा में भागीदारी सुनिश्चित करें।

महराजगंज: नहर सफाई के बाद सड़क बनी खतरे का रास्ता: सिल्ट से फिसलन, हादसे की आशंका

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। मिठौरा क्षेत्र में सिंदुरिया से मंगलपुर होते हुए भागाटार को जोड़ने वाली नहर पटरी की पिच सड़क इन दिनों खतरनाक बन गई है। नहर सफाई के बाद निकाली गई सिल्ट सड़क पर ही छोड़ दी गई। इसलिए मार्ग पर बलुई मिट्टी की मोटी परत जम गई है। अब आवागमन जोखिम भरा हो गया है।

सिल्ट से बढ़ी फिसलन, रोजाना हो रहे हादसे

स्थानीय लोगों के अनुसार, नहर की सफाई जल संरक्षण के लिए जरूरी थी। हालांकि, मलबा न हटाने से नई समस्या खड़ी हो गई। सड़क पर फैली सिल्ट के कारण दोपहिया वाहन फिसल रहे हैं। वहीं पैदल राहगीरों को भी चलने में दिक्कत हो रही है।

कई ग्रामीण गिरकर चोटिल हो चुके हैं। खासकर, स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को ज्यादा परेशानी हो रही है। हल्की बारिश के बाद फिसलन और बढ़ जाती है।

मुख्य संपर्क मार्ग होने से बढ़ी चिंता

ग्रामीण राम दयाल, निकेश, वशिष्ठ नारायण, चौथी निषाद, मिठाई लाल, महातम और कमलेश यादव ने बताया कि सफाई कार्य काफी पहले पूरा हो चुका है। लेकिन सिल्ट हटाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।

यह सड़क कई गांवों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग इसी रास्ते से आते-जाते हैं। इसलिए दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग पर निगरानी में लापरवाही का आरोप लगाया है।

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प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क पर जमा सिल्ट तुरंत हटाई जाए। साथ ही, नहर सफाई कार्यों की गुणवत्ता की जांच कर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए। उनका कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो बड़ा हादसा हो सकता है।

विभाग का पक्ष

इस संबंध में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विनोद कुमार वर्मा ने बताया कि निकाली गई सिल्ट हटाने के लिए नीलामी प्रक्रिया जारी है। नीलामी पूरी होते ही सड़क से सिल्ट हटाकर मार्ग सुरक्षित बनाया जाएगा।

अंततः, ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन शीघ्र हस्तक्षेप करे। यदि समय पर समाधान हुआ तो आवागमन सुचारु होगा और संभावित दुर्घटनाओं पर भी रोक लग सकेगी।

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