Thursday, June 11, 2026
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डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’ को ‘विद्या सागर’ की मानद उपाधि

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राजधानी लखनऊ निवासी साहित्यकार, कवि, लेखक, समाजसेवी एवं सेना से सेवानिवृत्त विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’ को काशी हिन्दी विद्यापीठ, वाराणसी द्वारा ‘विद्या सागर’ की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान अकादमिक परिषद की अनुशंसा पर गत दिवस आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। स्वास्थ्य कारणों से वे समारोह में उपस्थित नहीं हो सके।
यह उपाधि उन्हें शिक्षा, शोध, साहित्य सृजन और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय योगदान के लिए प्रदान की गई। डॉ कर्नल मिश्र को अब तक डॉक्टरेट की तीन मानद उपाधियाँ सहित साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में 620 से अधिक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद वे निरंतर समाज सेवा से जुड़े रहे हैं। उनके नौ काव्य संग्रह और दो लेख संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं, जबकि पचास से अधिक साझा काव्य संग्रहों में उनकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। उनकी कविताएँ और लेख विभिन्न समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं।
उनके पाँच अन्य काव्य और लेख संग्रह शीघ्र प्रकाशनाधीन हैं।

उत्तर प्रदेश में फरवरी से राशन वितरण में बड़ा बदलाव….

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खाद्य एवं रसद विभाग के आदेशानुसार लोगों की खाद्य आदतों को ध्यान में रखते हुए लागू की जा रही नई व्यवस्था..

मऊ ( राष्ट्र की परम्परा )उत्तर प्रदेश में फरवरी से राशन वितरण कार्यक्रम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने फरवरी 2026 से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में राशन वितरण के अनुपात में संशोधन किया है। यह बदलाव खाद्य एवं रसद विभाग के आदेशानुसार लोगों की खाद्य आदतों को ध्यान में रखते हुए लागू हो रहा है, जिसमें गेहूं प्रधान और धान प्रधान मंडलों के आधार पर गेहूं-चावल की मात्रा बदली गई है। कुल राशन की मात्रा वही रहेगी।

नए वितरण नियम…..धान प्रधान मंडल जैसे आजमगढ़, गोरखपुर, वाराणसी, मिर्जापुर…….

पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को प्रति यूनिट 1 किलो गेहूं और 4 किलो चावल मिलेगा। अंत्योदय कार्डधारकों को 10 किलो गेहूं और 25 किलो चावल।

गेहूं प्रधान मंडल ….जैसे आगरा, अलीगढ़, मेरठ, बरेली…..

प्रति यूनिट 3 किलो गेहूं और 2 किलो चावल मिलेगा। पहले यह उल्टा था। यह व्यवस्था 14 जनवरी 2026 के अपर आयुक्त आदेश से प्रभावी हो रही है। जिला पूर्ति अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

विश्वविद्यालय में नवाचार और बौद्धिक संपदा गतिविधियों से शोध गुणवत्ता को मिला नया आयाम

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मिलेट्स से डायबिटीज़ मैनेजमेंट तक: गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोध नवाचारों की नई पहल

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य संवर्धन, पोषण सुधार, पर्यावरण संरक्षण और नवाचार आधारित अनुसंधान को निरंतर सशक्त किया जा रहा है। विश्वविद्यालय की शोध गतिविधियाँ समाज की समसामयिक चुनौतियों के समाधान की दिशा में नए आयाम स्थापित कर रही हैं।
मिलेट्स से डायबिटीज़ मैनेजमेंट तक
विश्वविद्यालय की शोध टीमों द्वारा विकसित समाजोपयोगी उत्पाद मधुमेह प्रबंधन, कुपोषण की रोकथाम और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं।
प्रो. दिव्या रानी सिंह एवं शिवांगी मिश्रा द्वारा मिलेट्स और मोटे अनाज आधारित विशेष खाद्य उत्पाद विकसित किए गए हैं। ये उत्पाद पोषण-युक्त, फाइबर-समृद्ध तथा कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले हैं, जो डायबिटीज़ रोगियों में रक्त शर्करा नियंत्रण में सहायक हो सकते हैं।
डॉ. अनुपमा कौशिक एवं समीरा हसन ने मोरिंगा पत्ती पाउडर से पोषण-समृद्ध खाद्य उत्पाद तैयार किए हैं। ये उत्पाद विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर हैं, जो स्वास्थ्य संवर्धन के साथ-साथ कुपोषण की रोकथाम में उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।
वहीं, डॉ. नीता सिंह एवं तरनुम खातून द्वारा प्राकृतिक अपशिष्ट पदार्थों से पर्यावरण-अनुकूल, जैव-अपघटनीय और कम लागत वाले उत्पाद विकसित किए गए हैं। यह पहल सतत विकास और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इन सभी नवाचारों को पेटेंट से प्रोडक्ट तक लाने की दिशा में प्रो. दिव्या रानी सिंह और उनकी टीम के प्रयासों की विश्वविद्यालय स्तर पर सराहना की गई है।
IPR गतिविधियों में उल्लेखनीय प्रगति
विश्वविद्यालय में नवाचार को संरक्षित करने के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) गतिविधियों को भी सुदृढ़ किया गया है। सुव्यवस्थित IPR प्रणाली के माध्यम से शोध नवाचारों की पहचान, मूल्यांकन और संरक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है।
वर्तमान में बायोटेक्नोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में 8 प्रमुख तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है, जबकि अन्य संभावित नवाचारों को पेटेंट प्रक्रिया में सम्मिलित किया गया है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि सशक्त बौद्धिक संपदा पारितंत्र शोध की गुणवत्ता, मौलिकता और सामाजिक प्रभाव को दर्शाता है। विश्वविद्यालय में पेटेंट और अन्य IPR गतिविधियों में निरंतर वृद्धि से नवाचार को बढ़ावा मिला है और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में प्रदर्शन को मजबूती मिली है।
गत दो वर्षों में विश्वविद्यालय द्वारा 79 पेटेंट आवेदन दायर किए गए हैं, जिनमें से 60 प्रकाशित हो चुके हैं और 2 प्रकाशन की प्रक्रिया में हैं। इसके अतिरिक्त 65 कॉपीराइट आवेदन दायर किए गए हैं, जिनमें 22 पंजीकृत हो चुके हैं, साथ ही एक ट्रेडमार्क आवेदन भी किया गया है।
IPR जागरूकता कार्यक्रम
IPR गतिविधियों को और मजबूत करने के उद्देश्य से 31 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UPCST) के सहयोग से एक IPR जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम संस्थागत स्तर पर IPR साक्षरता को सुदृढ़ करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
कुलपति ने विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय के ये नवाचार और अनुसंधान प्रयास आत्मनिर्भर भारत और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

मृत्यु के 12 साल बाद तक उठती रही पेंशन, महिला समेत कई पर मुकदमा दर्ज

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बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

रसड़ा पुलिस ने एक चौंकाने वाले पेंशन घोटाले का खुलासा करते हुए एक महिला सहित कई लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि मृत महिला के नाम पर वर्षों तक अवैध रूप से पेंशन निकाली जाती रही। मामले में रसड़ा क्षेत्र के भेलाई निवासी धर्मेंद्र यादव ने बुधवार को पुलिस को तहरीर देकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनके पिता मालधनी यादव, जो रेलवे से सेवानिवृत्त थे, का निधन 28 अगस्त 2007 को हो गया था। इसके बाद उनकी पत्नी प्रभावती देवी को पारिवारिक पेंशन मिलने लगी।
शिकायत के अनुसार प्रभावती देवी का भी निधन 21 मार्च 2014 को हो गया था। आरोप है कि इसके बावजूद परिजनों ने साजिश के तहत पार्वती नाम की एक अन्य महिला को प्रभावती देवी बताकर बैंक से पेंशन निकलवाना जारी रखा।

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धर्मेंद्र यादव का कहना है कि प्रभावती देवी की मृत्यु का रिकॉर्ड तहसील अभिलेखों में दर्ज है, लेकिन इसके बावजूद ब्लॉक कार्यालय के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से उन्हें जीवित दिखाया जाता रहा, जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।ब्लॉक कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध शिकायत में कुछ ब्लॉक कर्मियों की संलिप्तता की भी आशंका जताई गई है, जिन पर अभिलेखों में हेरफेर कर पेंशन जारी रखने में सहयोग करने का आरोप है।पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा पुलिस के अनुसार तहरीर के आधार पर पार्वती, मालधनी यादव के कुछ परिजनों तथा अज्ञात ब्लॉक कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और सरकारी धन के दुरुपयोग की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और अभिलेखों की पड़ताल की जा रही है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह का रिजर्व पुलिस लाइन बलिया में औचक निरीक्षण

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बलिया (राष्ट्र की परम्परा)

जनपद बलिया में पुलिस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ व अनुशासित बनाने की दिशा में पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने बुधवार के देर रात्रि रिजर्व पुलिस लाइन का औचक निरीक्षण किया। उनके इस अचानक निरीक्षण से विभागीय कर्मचारियों में हलचल देखी गई, वहीं अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी बारीकी से नजर डाली गई।निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने गणना कार्यालय, जी.डी. कार्यालय, क्वार्टर गार्द, कैश कार्यालय, आदेश कक्ष, आरटीसी परिसर, स्टोर रूम सहित विभिन्न शाखाओं का क्रमवार निरीक्षण किया। इस दौरान अभिलेखों, रजिस्टरों तथा कार्यालयों में रख-रखाव की स्थिति का गहन परीक्षण किया गया। उन्होंने संबंधित कर्मचारियों से कार्यप्रणाली की जानकारी ली और अभिलेखों के अद्यतन रखरखाव पर विशेष जोर दिया। सिंह ने कार्यालयों में साफ-सफाई, दस्तावेजों के सुव्यवस्थित संधारण तथा समयबद्ध कार्य निष्पादन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुलिस विभाग में पारदर्शिता और अनुशासन सर्वोपरि हैं तथा इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने रिजर्व पुलिस लाइन परिसर में चल रहे नव-निर्माण कार्यों का भी निरीक्षण किया। निर्माण की गुणवत्ता, सामग्री के उपयोग तथा कार्य की प्रगति को परखा गया। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप तथा तय समय सीमा के भीतर पूर्ण कराए जाएं। गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।निरीक्षण के दौरान उन्होंने पुलिस कर्मियों के आवासीय सुविधाओं और प्रशिक्षण व्यवस्था का भी जायजा लिया। आरटीसी परिसर में चल रही गतिविधियों की जानकारी प्राप्त कर प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर प्रशिक्षण से ही पुलिस बल की कार्यकुशलता बढ़ती है, जिससे कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने में सहायता मिलती है।इस अवसर पर क्षेत्राधिकारी सदर राकेश कुमार सिंह, प्रतिसार निरीक्षक राम बेलास, आरटीसी प्रभारी अमरजीत यादव सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी को अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और तत्परता से करने के निर्देश दिए गए।
पुलिस अधीक्षक का यह औचक निरीक्षण विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे स्पष्ट संदेश गया है कि पुलिस प्रशासन व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

मैं इस गणतंत्र का एक बंदी हूँ

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रूपेश कुमार सिंह

26 जनवरी 2026 को हमारा गणतंत्र अपना 76 वर्ष पूरा हुआ ।गणतंत्र या लोकतंत्र की प्रसिद्ध परिभाषा, जिसे हम बचपन से पढ़ते व सुनते आ रहे हैं, वो है — जनता का, जनता के लिए व जनता के द्वारा संचालित शासन। क्या वर्तमान समय में उक्त परिभाषा हमारे देश के गणतंत्र पर सटीक बैठती है? क्या हम या हमारे शासक वर्ग भी ईमानदारी से यह कह सकते हैं कि हमारे देश में सच्चे अर्थों में लोकतंत्र है? कतई नहीं।

आज हमारे देश में पूंजीपतियों का, पूंजीपतियों के लिए व पूंजीपतियों के द्वारा संचालित शासन है। आज हमारे देश में गणतंत्र की जगह पर पूंजीतंत्र, लूटतंत्र व गनतंत्र है।

वर्तमान में हमारे देश की सत्ता पर काबिज ब्राह्मणीय हिंदुत्व फासीवादी नरेंद्र मोदी की सरकार ने लोकतंत्र के सभी अंगों को पंगु बना दिया है। पूरे देश में एकछत्र राज का सपना पूरा करने के लिए आरएसएस व भाजपा जी-जान से जुटी है। इन्होंने स्पष्ट तौर पर घोषित कर रखा है कि जो उनके साथ नहीं है, वे इस देश के दुश्मन है।

कल तक जहां देश का अर्थ विभिन्नता में एकता था, आज देश का अर्थ सत्ताधारी सरकार बन चुका है। अब सत्ताधारी सरकार के खिलाफ बोलना मतलब देश के खिलाफ बोलना है।

इन्होंने चुनाव जीतने के लिए साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपना रखी है। उसके बाद भी अगर ये चुनाव नहीं जीत पाते हैं, तो फिर विपक्षी पार्टियों के विधायकों को तोड़ने के लिए पैसा, सेंट्रल एजेंसियों की कारवाईयां, डराने-धमकाने आदि रास्तों का सहारा लेते है और राज्यों में अंततः अपनी सरकार बना लेते हैं। कल तक विपक्ष के भ्रष्ट नेता (इनके ही द्वारा घोषित) इनकी पार्टी में शामिल होते ही ईमानदार बन जाते है और इन पर दर्ज दर्जनों मुकदमों को वापस ले लिया जाता है।

अपने मित्र उद्योगपतियों को बहुमूल्य खनिज संपदा को सौंपने के लिए ये आदिवासियों का जनसंहार करते है। सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध करने वालों को ‘देशद्रोही’, ‘अर्बन नक्सल’ घोषित करती है। अपने हक-हुकूक का आवाज बुलंद करने पर मुस्लिमों को आतंकवादी घोषित किया जाता है, तो सिखों को खालिस्तानी। इस सरकार ने शिक्षा का भगवाकरण कर छात्रों को झूठा इतिहास पढ़ने को बाध्य किया है, तो युवाओं को बेरोजगारी के अंतहीन दलदल में धकेल दिया है।

महिलाओं को चारदीवारी के अंदर पूरी तरह से कैद करने की पूरी कोशिश भी हमारे ‘गणतंत्र’ के संचालक कर रहे है। हमारे गणतंत्र में ‘गणतंत्र’ के नाम पर क्या चल रहा है, यह अगर हम अपनी आंखों से संप्रदायवाद, जातिवाद, अंधभक्ति आदि का पर्दा हटाकर देखें, तो स्पष्ट दिख ही रहा है कि हमारा ‘गणतंत्र’ बिल्कुल ‘गनतंत्र’ में तब्दील हो चुका है।

आप जानते है कि हमारे गणतंत्र में बड़ी संख्या में कैदखाने (जेलें) भी है, जिनमें लाखों बंदी कैद हैं। क्या आप कैदखाने में बंद इस गणतंत्र के बंदियों के बारे में जानते हैं?

मैं इस गणतंत्र का एक बंदी हूं और पिछले 42 महीने से कैदखाने में कैद हूं। 42 महीने पहले मैं स्वतंत्र पत्रकारिता करता था और सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सिर्फ लिखता ही नहीं था, बल्कि बोलता भी था। फलतः सरकार ने 17 जुलाई 2022 को मुझ पर काला कानून यूएपीए की कई धाराएं लगाकर मुझे गिरफ्तार कर लिया और 18 जुलाई 2022 को जेल भेज दिया।

तब से मैं झारखंड के सरायकेला डिस्ट्रिक्ट जेल और बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल, होटवार (रांची) एंव बिहार के शहीद जुब्बा सहनी सेंट्रल जेल, भागलपुर में कैद रहा और फ़िलहाल आदर्श सेंट्रल जेल, बेऊर (पटना) में कैद हूं।

जेलों का हाल और कैदियों के अधिकार

बिहार-झारखंड के 90 प्रतिशत जेलों में क्षमता से अधिक (डेढ़ गुणा व कहीं-कहीं दुगुना) बंदी हैं। किसी भी जेल में जेल मैनुअल के अनुसार नाश्ता, भोजन, तेल-साबुन आदि नहीं मिलता है। हां! अगर आप दबंग है, तो फिर आप जेल अधिकारियों को पैसे देकर जेल में हीटर पर भी स्वादिष्ट खाना बनवा सकते है या घर व होटल से भी मंगवा सकते है।

बाकी बंदियों को तो सड़ा हुआ चावल, पानी की तरह पतली दाल, सब्जी के नाम पर आलू का दो-चार टुकड़ा व कीड़ा लगा हुआ हरी सब्जी का दो-चार कच्चा टुकड़ा व पानी, जली व कच्ची रोटियां ही नसीब में होती है। दबंग व पैसे वाले बंदियों का बिस्तर 6 फिट लंबा व 3 फीट चौड़ा होता है. तो उतनी ही जगह में 3-4 आम बंदियों को रहना पड़ता है।

भारत के सुप्रीम कोर्ट (महाराष्ट्र राज्य बनाम प्रभाकर पांडुरंग 1966) के अनुसार, ‘किसी भी बंदी या कैदी को संविधान द्वारा प्रदत्त अन्य मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अनुच्छेद 21, जीवन का अधिकार’ भी प्राप्त है।’

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ‘एक कैदी, चाहे वह विचाराधीन हो या दोषी और यहां तक कि अदालत में उसके विरुद्ध आरोपित या सिद्ध अपराध चाहे जो भी हो, देश के अन्य नागरिकों की तरह स्वतंत्रता के अलावा सभी अधिकारों का आनंद ले सकता है।’

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की रौशनी में अगर हम बिहार-झारखंड के जेलों में बंद बंदियों की स्थिति को देखते हैं, तो यह एक स्वप्न-सा लगता है, क्योंकि बिहार झारखंड की जेलों में बंदियों को न तो मानव सम्मान के साथ जीने का अधिकार, शीघ्र सुनवाई का अधिकार, स्वास्थ्य व चिकित्सा उपचार का अधिकार, हथकड़ी के खिलाफ सुरक्षा का अधिकार, जेल में दुर्व्यवहार व यातना के खिलाफ सुरक्षा का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, काम के लिए उचित मजदूरी का अधिकार एवं उचित आवास का अधिकार हासिल है और न ही जेल मैन्युअल के अनुसार नाश्ता, भोजन व अन्य सुविधाएं ही मिलती है।

यहां तक कि बंदियों को अपने परिजनों व वकीलों को पत्र तक लिखने का अधिकार जेल प्रशासन नहीं देता है, फिर कविता, कहानी व लेख लिखने के बारे में तो ज्यादातर बंदी सोच भी नहीं पाते हैं। यह सब बहुत मुश्किल है। आप काॅल के दौरान, मुलाकाती में अपनी बातें, कविताएं, अनुभव, अपनी परेशानियां साझा कर सकते हैं, वह भी कई बार समयाभाव के कारण टुकड़ों-टुकड़ों में।

बिहार-झारखंड के जेलों में रहते हुए मैंने यही जाना कि जेल एक यातनागृह है, जिसे सुधारगृह तो बिल्कुल भी नहीं कहा जा सकता है। जेल भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा केंद्र है, यहां भ्रष्टाचार खुलेआम होता है। अगर आपके पास पैसा है, तो आपके लिए जेल भी स्वर्ग है और अगर आपके पास पैसा नहीं है, तो जेल आपके लिए नर्क से भी बदतर है।

जेल में इलाज के नाम पर सिर्फ धोखा होता है। अगर आप किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो जाएं, तो आपकी मौत जेल में ही निश्चित है, लेकिन आपकी मौत बाहर के अस्पताल में इलाज के दौरान ही दिखाई जाएगी।

मैं जब गिरफ्तार होकर सरायकेला डिस्ट्रिक्ट जेल में गया, तो वहां मुझे सेल के ऐसे कमरे में रखा गया, जिसके बगल के कमरों में कुष्ठ, टीबी व एड्स से पीड़ित बंदी थे और हम सभी का स्नानघर व शौचालय काॅमन था।

मेरे विरोध करने पर मुझे पुराने महिला वॉर्ड (भूत बंगला के नाम से प्रसिद्ध) में अकेले बंद कर दिया गया, जिसकी छत से बारिश में पानी टपकता था और पूरे कमरे में पानी ही पानी हो जाता था। नतीजा, मुझे एक कोने में बैठकर दिन-रात बितानी पड़ती थी। मेरे परिजनों द्वारा भेजे गए किताब, काॅपी व कलम को जेल प्रशासन ने मुझे देने से इंकार कर दिया। खाना बिल्कुल भी खाने लायक नहीं था। जब मैंने 15 अगस्त को भूख हड़ताल किया, तब जाकर मुझे काॅपी, किताब, कलम मिला, लेकिन मेरे जन्मदिन पर मेरे दोस्तों द्वारा मुझे भेजा गया पोस्टकार्ड भी नहीं दिया गया।

बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार (रांची) में तो मेरी लिखित किताब ‘कैदखाने’ का आइना’ भी परिजनों को मुझे नहीं देने दिया गया, कहा गया कि इसमें जेल व्यवस्था के खिलाफ बातें लिखी गई है, जबकि वह किताब अमेजन व फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है। वहां के अधीक्षक हामिद अख्तर एक मुस्लिम थे, लेकिन उन्होंने जेल पुस्तकालय में मौजूद तस्लीमा नसरीन की सभी पुस्तकों पर प्रतिबंध लगा दिया था और उसे बंदियों को पढ़ने देने से मना कर दिया था।

बाद में, शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा,भागलपुर में भी मैंने देखा कि तस्लीमा नसरीन की कुछ पुस्तकों को जेल पुस्तकालय की पुस्तक की सूची में ही प्रतिबंधित कर दिया था, ताकि कोई बंदी इसकी मांग ना करे। बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में मैंने जेल प्रशासन से इतिहास में एमए करने की इच्छा जाहिर की, तो मुझे बताया गया कि यहां मात्र एनआईओएस से 10वीं व 12वीं की पढ़ाई की सुविधा है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बिहार-झारखंड के किसी भी जेल में स्नातकोत्तर (एमए) की पढ़ाई की सुविधा इग्नू से भी नहीं है। इसलिए मुझे इग्नू के रामगढ़ (झारखंड) स्टडी सेंटर पर एमए में अपने निजी खर्च पर नामांकन लेना पड़ा।

तोड़ देती है सेल की ज़िंदगी

जेलों में सामान्य वॉर्ड के अलावा सेल (अंडा सेल, हाई सेक्युरिटी सेल आदि) भी होता है। मैं अपने 42 महीने के जेल में 33 महीने सेल में ही रहा हूं व वर्तमान में भी सेल में ही बंद हूं। सामान्य वॉर्ड के बंदियों को तो कुछ अधिकार भी हासिल है या कह सकते हैं कि कुछ सुविधाएं भी हासिल है, लेकिन सेल के बंदी अधिकांश सुविधाओं से महरूम है।

यहां मैं उन सुविधाओं की बात कर रहा हूं, जो शरीर और मस्तिष्क के स्वस्थ रहने के लिए हर इंसान के लिए जरूरी है, एक बंदी के रूप में दास जीवन बिताने वाले बंदियों के लिए भी।

सामान्य वॉर्ड के बंदी जेल में आयोजित शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले सकते हैं, लेकिन सेल के बंदी नहीं ले सकते है। सामान्य वॉर्ड में टीवी व जेल रेडियो (बिहार के जेलों में) का स्पीकर लगा हुआ है, जिससे बंदियों का कुछ मनोरंजन हो जाता है, मानसिक तनाव में राहत मिलती है लेकिन सेल में ऐसी कोई सुविधा नहीं है। सामान्य वॉर्ड के बंदी जेल पुस्तकालय में बैठकर पढ़ सकते हैं, लेकिन सेल के बंदी वहां नहीं बैठ सकते है। सामान्य वॉर्ड के बंदी जेल के मैदान में खेल-कूद सकते हैं, पूरे जेल में घूम फिर सकते है, लेकिन सेल के बंदी सेल से बाहर नहीं निकल सकते हैं। कह सकते हैं कि सेल, जेल के भीतर एक जेल है।

सेल में आमतौर पर जेल प्रशासन ऐसे बंदियों को रखते हैं, जो सामान्य वॉर्ड में अवैध मोबाइल का इस्तेमाल करने, नशा करने व मारपीट करने के दोषी पाए जाते है। लेकिन अब सेल में ऐसे बंदियों को भी रखा जाने लगा है, जो अपने और बंदियों के अधिकारों के हनन पर उनके लिए आवाज उठाते है। उन्हें सेल में बंद कर उनसे सारा अधिकार छिन लिया जाता है।

वैसे बंदी, जो बंदी अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहते हैं, उन्हें प्रशासनिक लगाकर दूसरे जेलों में भी भेज दिया जाता है, जिन पर वहां पहुंचने के साथ ही जेल गेट से लेकर केंद्र स्थल (गुमटी) तक अनगिनत लाठी बरसती है।

जेलों में भ्रष्टाचार, पर सुनवाई नहीं

बिहार-झारखंड की जेलों में स्थानीय न्यायालय, उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। जब कोई बंदी वरीय अधिकारियों को जेल की भ्रष्ट व्यवस्था की शिकायत करते हैं, तो जेल प्रशासन अपने दलाल बंदियों के बयानों को कलमबद्ध कर रिपोर्ट बनाकर भेज देते हैं कि जेल में सब कुछ सही है। अगर कभी जांच के लिए अधिकारी आ जाए, तो जेल अधिकारी उन्हें अपने दलाल बंदियों से ही सिर्फ मिलाते हैं, बाकि बंदियों को अपने-अपने वॉर्ड में बंद कर देते है।

अभी 18 जनवरी 2026 को पटना हाईकोर्ट के माननीय मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू, जेल आईजी प्रणव कुमार समेत कई अधिकारी आदर्श सेंट्रल जेल में आए और जेल का निरीक्षण किया, जिस दौरान सभी बंदियों को अपने-अपने वॉर्ड में बंद कर दिया गया और उन्हीं लोगों से मुखातिब करवाया गया, जो जेल प्रशासन की दलाली करते है। बाकी हमारे जैसे सामान्य बंदी तो कभी उनके सामने नहीं लाए जाते हैं।

मैंने इस जेल में व्याप्त भ्रष्टाचार व बंदियों के शोषण और दमन पर एक आवेदन पटना डीएम को 15 दिसंबर 2025 को भेजा है, जिसकी प्रतिलिपि बिहार के उप-मुख्यमंत्री सह गृहमंत्री सम्राट चौधरी व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को भी भेजा है, जिस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

जेल में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है, इसे चालू रखने के लिए आवाज उठाने वाले बंदियों के अधिकारों को छिना जाता है और चूंकि इन पर कभी अंकुश नहीं लगता, इसलिए आश्वस्त होकर ये भ्रष्टाचार में लिप्त है। वैसे भी, जेल में यह बात प्रचलित है कि जेल प्रशासन अपने भ्रष्टाचार की कमाई का एक बड़ा हिस्सा मंत्रियों व वरीय अधिकारियों को भी देता है, इसलिए वे कोई कार्यवाही नहीं करते। फिर भी अगर कोई जांच टीम आ भी जाए, तो एक मोटी रकम देकर जेल प्रशासन सब मैनेज कर लेती है।

मैं कुछ महीने से उच्च (बैड) काॅलेस्ट्रॉल, उच्च ट्राईग्लिसराइड्स, एलर्जी, एल 5 डिस्क स्लिप व याद्दाश्त कम होने की समस्याओं से पीड़ित हूं। पटना के स्पेशल एनआईए कोर्ट द्वारा आदर्श सेंट्रल जेल, बेऊर (पटना) के अधीक्षक को मेरे इलाज के लिए 11 दिसंबर 2025 को लिखित आदेश दिया गया है, लेकिन जेल प्रशासन द्वारा अब तक कोई उपचार नहीं कराया गया है। इससे पहले 01 नवंबर 2025 को भी इलाज के लिए आदेश जेल प्रशासन को कोर्ट द्वारा दिया गया था।

इससे पहले भी स्वास्थ्य समस्या को लेकर कोर्ट में अर्जियां लगाई गई थीं, तब मैं भागलपुर शहीद जुब्बा सहनी सेंट्रल जेल में था। वहां कोर्ट आदेश होने के बाद व स्वास्थ्य समस्या को लंबे समय झेलने के बाद अस्पताल में दिखाया गया था। पर बेऊर जेल प्रशासन उससे भी आगे निकल चुका है, लंबे वक्त व दो- दो बार कोर्ट आदेश के बाद भी इनके कानों में जूं तक नहीं रेंगा।

यह कोई नया नहीं है। मेरे इतने सालों का अनुभव यही कहता है कि किसी मामले में कोर्ट में आदेश होने के बाद भी जेल प्रशासन अक्सर उसका पालन नहीं करती है और बार-बार आर्डर देकर कोर्ट भी थक जाता है। इस तरह बंदियों के बहुतेरे मामले पेंडिंग ही रह जाते है या फिर एक थका देने वाले समय के बाद अमल में आते है। पूरे देश के न्यायालय के लिए ऐसा कोई क्षेत्राधिकार नहीं है, जो कि जेल के मनमाने पर न्यायालय की प्रबलता स्थापित कर सके और जेलों के बंदियों के अधिकारों को बचा सके।

आदर्श सेंट्रल जेल, बेऊर (पटना) के अधीक्षक की तानाशाही तो इस कदर है कि वे बंदियों के द्वारा न्यायालय के नाम भेजे गए आवेदन को भी न्यायालय को नहीं भेजते हैं। बंदियों को ‘बंदी आवेदन पत्र’ देने से साफ इंकार कर देते है।

74 वर्षीय माओवादी नेता प्रमोद मिश्रा सेल में मेरे कमरे के बगल वाले कमरे में ही है, उन्होंने दिसंबर 2025 में ‘बंदी आवेदन पत्र’ पर स्पेशल एनआईए कोर्ट, पटना, स्पेशल एनआईए कोर्ट, रांची व प्रधानमंत्री के नाम से आवेदन जेल कार्यालय को सुपुर्द किया, लेकिन जेल प्रशासन ने इन तीनों में से एक भी आवेदन को आगे नहीं भेजा। फलतः उन्होंने 26 जनवरी 2026 से अनिश्चितकालीन भूख-हड़ताल की घोषणा कर दी है, लेकिन अब उन्हें बंदी आवेदन पत्र भी नहीं दिया जा रहा है।

‘मधुकर भगवान संभाले बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य’ (1987) में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ‘‘हम यह समझने में असफल रहे हैं कि कैदी को जेल प्रशासन के खिलाफ अपनी शिकायतों को अपने पत्र के माध्यम से बाहरी दुनिया के सामने क्यों नहीं रखना चाहिए …. . दोषसिद्धि और जेल में बंद होने के कारण, कैदी राजनीतिक अधिकारों को नहीं खोता है।’

क्या इस ‘गणतंत्र’ के बंदियों को सुप्रीम कोर्ट के कथनानुसार व संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार कभी हासिल होगा? ‘जेल अपवाद है व जमानत नियम,’ यह धरातल पर फलीभूत कभी होगा या जेलों के यातनागृह में बंदियों को पीसकर भ्रष्ट अधिकारियों के पौ-बारह होते रहेंगे?
क्या सच्चे गणतंत्र को स्थापित करने के लिए भारतीय जनता सड़कों पर उतरेगी? इसका जवाब ही ‘गणतंत्र’ के बंदियों का भविष्य तय करेगा।

बेसहारा ज़िंदगी का वालिद कौन? समाज, परिवार और व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आज समाज के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा है, जो जितना संवेदनशील है उतना ही शर्मनाक भी—बेसहारा ज़िंदगी का वालिद कौन? सड़कों पर भटकते बच्चे, वृद्धाश्रमों में आंसुओं के साथ जीवन काटते बुजुर्ग, अनाथालयों में पलती मासूम आंखें और न्याय के लिए संघर्ष करती महिलाएं—ये सभी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक विफलता की तस्वीर पेश करते हैं।

आज यह सच्चाई किसी से छिपी नहीं है कि बेसहारा होने के पीछे केवल किस्मत नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से भागता इंसान और संवेदनहीन व्यवस्था है। सवाल यह नहीं कि बेसहारा कौन है, बल्कि यह है कि उसे बेसहारा बनाने वाला कौन है?

हर बच्चा माता-पिता की छांव में सुरक्षित भविष्य के सपने के साथ जन्म लेता है। लेकिन गरीबी, नशा, घरेलू हिंसा और सामाजिक दबावों के कारण जब माता-पिता अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेते हैं, तब एक मासूम ज़िंदगी बेसहारा हो जाती है। कई मामलों में पिता का नाम केवल कागज़ों तक सीमित रह जाता है, वास्तविक जीवन में उसकी भूमिका शून्य हो जाती है।

वहीं दूसरी ओर, जिन वृद्ध माता-पिता ने पूरी उम्र अपनी संतान के लिए त्याग किया, वही संतान उन्हें बोझ समझने लगती है। ऐसे में यह सवाल उठता है—क्या केवल जन्म देना ही वालिद होने की पहचान है, या जीवन भर साथ निभाना भी उसकी जिम्मेदारी है?

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व्यवस्था की उदासीनता भी जिम्मेदार

परिवार के बाद समाज और शासन की जिम्मेदारी बनती है, लेकिन हकीकत यह है कि सरकारी योजनाएं और कानून अक्सर कागज़ों में ही सिमट कर रह जाते हैं। बेसहारा बच्चों के संरक्षण और बुजुर्गों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान अमल के अभाव में दम तोड़ देते हैं। जब सिस्टम सोया रहता है, तब शोषण फलता-फूलता है।

सड़कों पर भीख मांगते बच्चे, मजदूरी करते नाबालिग और अकेलेपन में दम तोड़ते बुजुर्ग—ये किसी एक घर की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की हार का प्रमाण हैं।

समाज का नैतिक पतन

आज रिश्ते संवेदना पर नहीं, सुविधा पर टिके हैं। जब तक कोई उपयोगी है, तब तक उसका महत्व है; उपयोग खत्म, तो रिश्ता भी खत्म। यही सोच बेसहारा ज़िंदगी की सबसे बड़ी वजह बन रही है। हम दूसरों के दुख से आंखें फेर लेते हैं, यह सोचकर कि यह हमारी जिम्मेदारी नहीं।
लेकिन सच्चाई यह है कि जब समाज सवाल पूछना छोड़ देता है, तभी अन्याय जन्म लेता है।

बेसहारा ज़िंदगी किसी एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि लापरवाह परिवार, असंवेदनशील समाज और उदासीन व्यवस्था—तीनों की संयुक्त जिम्मेदारी है।
यह लेख केवल सवाल उठाने के लिए नहीं, बल्कि आत्ममंथन के लिए है। क्योंकि अगर आज हमने जवाब नहीं ढूंढा, तो कल कोई हमसे पूछेगा—जब ज़रूरत थी, तब आप कहां थे?

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ई-रिक्शा चालक पर हथौड़े से हमला दबंगों ने लूटी दिनभर की कमाई

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​बरियारपुर /देवरिया। (राष्ट्र की परंपरा)
जनपद के बरियारपुर थाना क्षेत्र में एक ई-रिक्शा चालक के साथ मारपीट और लूटपाट का मामला सामने आया है। घटना के संबंध में पीड़ित की पत्नी ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए न्याय की गुहार लगाई है।
​​प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित मन्नू गोंड, जो पेशे से ई-रिक्शा चालक हैं और वर्तमान में देवरिया के तारा भवन के पास किराए पर रहते हैं, बीते दिन अपना काम कर रहे थे। आरोप है कि जब वह रिक्शा लेकर जा रहे थे, तभी ब्रिम गुप्ता नामक व्यक्ति ने उन्हें रास्ते में रोक लिया।
​शिकायतकर्ता पिंकी गोंड (मन्नू की पत्नी) ने बताया कि आरोपी ने उनके पति पर जानलेवा हमला किया और लोहे की हथौड़ी से उनके हाथ पर वार कर उन्हें घायल कर दिया। इतना ही नहीं, आरोपी ने ई-रिक्शा को अपने कब्जे में ले लिया।
​जब पिंकी गोंड अपने साथ दो अन्य लोगों को लेकर ई-रिक्शा वापस लेने पहुंचीं, तो आरोपी ने उनके साथ भी बदसलूकी की। आरोप है कि ब्रिम गुप्ता ने उन्हें धमकी देते हुए कहा, अभी तो इसे मारा है, तुम लोग यहाँ से चले जाओ वरना तुम सबको भी बहुत मारूँगा।
​पैसे छीनने का भी आरोप
​पीड़िता का आरोप है कि मारपीट के दौरान ई-रिक्शा के गल्ले में रखे 1600 रुपये भी आरोपी ने छीन लिए। यह राशि चालक की पूरे दिन की मेहनत की कमाई थी। घटना दोपहर करीब शाम की बताई जा रही है।
​​पीड़िता ने बरियारपुर थाना प्रभारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और अपना ई-रिक्शा वापस दिलाने की मांग की है। पुलिस फिलहाल मामले की जांच में जुट गई है।

15 स्थानों पर सघन जांच से बढ़ा सुरक्षा का भरोसा

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)देवरिया में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और आमजन में सुरक्षा की भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से देवरिया पुलिस मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान चलाया गया। यह अभियान पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में जनपद स्तर पर प्रभावी ढंग से संचालित किया गया।
अभियान के तहत जनपद के समस्त थाना प्रभारी एवं थानाध्यक्षों द्वारा प्रातः 05 बजे से 08 बजे तक विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण किया गया। इस दौरान मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याएं सुनी गईं और उन्हें पुलिस की ओर से सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया।

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देवरिया पुलिस मार्निंग वॉकर चेकिंग का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना, मित्र पुलिसिंग की अवधारणा को सशक्त करना और स्थानीय स्तर पर छोटे विवादों का समाधान करना रहा। पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों को बताया कि ऐसे अभियानों से अपराध पर नियंत्रण के साथ-साथ पुलिस और जनता के बीच विश्वास भी मजबूत होता है।
अभियान के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की सघन जांच की गई। पुलिस टीमों ने चोरी की गाड़ियों की तलाश, तीन सवारी चलने वालों पर कार्रवाई, मोडिफाइड साइलेंसर लगे दोपहिया वाहनों का चालान, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर विधिक कार्रवाई तथा अवैध असलहा एवं मादक पदार्थों की जांच की।
जनपदीय पुलिस के अनुसार देवरिया पुलिस मार्निंग वॉकर चेकिंग के अंतर्गत कुल 15 स्थानों पर चेकिंग की गई, जिसमें 281 व्यक्तियों और 165 वाहनों की जांच की गई। इस दौरान किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

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पुलिस द्वारा आमजन को अभियान के उद्देश्य, सुरक्षा उपायों और यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया गया। मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस की मौजूदगी से उन्हें सुरक्षा और भरोसे का अनुभव हुआ।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि देवरिया पुलिस मार्निंग वॉकर चेकिंग जैसे जनहितकारी अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेंगे, ताकि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके और नागरिकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित हो।

बरहज में लगेगा मत्स्य पालकों का वृहद पंजीकरण शिविर

प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना के तहत एनएफडीपी पोर्टल पर निःशुल्क ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन

बरहज /देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना (पीएमएमकेएसएसवाई) के अंतर्गत जनपद के मछुआरों, नाविकों एवं मत्स्य पालन व्यवसाय से जुड़े सभी लाभार्थियों के ऑनलाइन पंजीकरण हेतु विकास खंड बरहज में वृहद पंजीकरण शिविर का आयोजन किया जा रहा है।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य पालक विकास अभिकरण ने बताया कि निदेशक मत्स्य, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के निर्देशानुसार एनएफडीपी पोर्टल पर अधिक से अधिक मत्स्य पालकों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह विशेष शिविर 31 जनवरी 2026 को विकासखंड बरहज सभागार में प्रातः 11:00 बजे से अपराह्न 4:00 बजे तक आयोजित किया जाएगा।

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उन्होंने बताया कि शिविर में मछुआरे, नाविक, मछली पालन करने वाले, मछली विक्रेता, मत्स्य जीवी सहकारी समितियों के सदस्य तथा मत्स्य विभाग की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित सभी लाभार्थियों का निःशुल्क ऑनलाइन पंजीकरण किया जाएगा।

इच्छुक लाभार्थियों से अपील की गई है कि वे अपने साथ आधार कार्ड, बैंक पासबुक तथा आधार से लिंक मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से लेकर शिविर स्थल पर उपस्थित हों, जिससे पंजीकरण प्रक्रिया सरल एवं सुगम रूप से पूर्ण की जा सके।अधिक जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 9026704674, 9839367476 पर संपर्क किया जा सकता है।

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30 लाख खर्च, फिर भी बंद आरआरसी सेंटर, गांव में फैली गंदगी

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। फरेंदा विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मथुरा नगर में कचरा प्रबंधन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत करीब एक वर्ष पूर्व 30 लाख रुपये से अधिक की लागत से बनाए गए कूड़ा डंपिंग यार्ड व रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) पर प्रशासनिक उदासीनता के चलते आज तक ताला लटका हुआ है। लाखों रुपये की लागत से बना यह सेंटर उपयोग के अभाव में बेमतलब साबित हो रहा है।

आरआरसी सेंटर का उद्देश्य गांव के कचरे को एकत्र कर उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना था, लेकिन सेंटर बंद होने के कारण कचरा यार्ड में डालने के बजाय सड़कों के किनारे फेंका जा रहा है। इससे पूरे गांव में गंदगी फैल गई है और दुर्गंध के कारण लोगों का जीना मुहाल हो गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सेंटर का निर्माण होने के बाद आज तक उसमें एक बार भी कूड़ा नहीं डाला गया। मुख्य गेट पर हमेशा ताला बंद रहता है, जिससे ग्रामीण कचरा जमा नहीं कर पाते। मजबूरी में लोग खुले स्थानों और सड़कों के किनारे कचरा फेंक रहे हैं।ग्रामीण राजेश, मुकेश, सर्वजीत, बुधिराम, चंद्रभान, अरविंद, रामनेवास और हरवंश ने आरोप लगाया कि यार्ड के संचालन के लिए जिम्मेदार अधिकारी मूक दर्शक बने हुए हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

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आरआरसी सेंटर के बंद रहने से न केवल स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हुई है, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। जबकि केंद्र व राज्य सरकार की स्वच्छता अभियान को बड़े पैमाने पर चलतीं हैं, और उसी योजनाओं को ठेंगा दिखाकर जिम्मेदार मलाई काट रहे हैं। निर्माण होने के बाद जिम्मेदार कमीशन लेकर डकार गए और (आरआरसी) सेंटर बेमतलब साबित हो रहा हैं।

इस संबंध में फरेंदा खंड विकास अधिकारी अतुल कुमार ने बताया कि आरआरसी सेंटर के बंद होने की जानकारी मिली है। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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आज का राशिफल 30 जनवरी 2026: नौकरी-पैसा-प्रेम में किसे मिलेगा बड़ा लाभ?

🔱 30 जनवरी 2026 का राशिफल: शुक्रवार को किस राशि की चमकेगी किस्मत? जानें मेष से मीन तक का पूरा भविष्यफल

ग्रह-नक्षत्रों की चाल से आज के राशिफल का आकलन किया गया है।

30 जनवरी 2026, शुक्रवार को गुरु और चंद्रमा मिथुन राशि में संयोग बना रहे हैं।
सूर्य, बुध, शुक्र और मंगल मकर राशि में स्थित हैं।
राहु कुंभ, केतु सिंह और शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं।
इन ग्रह योगों का प्रभाव रुपया-पैसा, नौकरी, व्यापार, शिक्षा, करियर, राजनीति, प्रेम संबंध और स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देगा।
आइए जानते हैं 30 जनवरी 2026 का राशिफल, मेष से मीन राशि तक 👇

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मेष राशि (Aries)
आज आपका पराक्रम और आत्मविश्वास रंग लाएगा। जिन योजनाओं को आपने लंबे समय से डिज़ाइन किया है, उन्हें आज अमल में लाने का सही समय है।
नौकरी और करियर में नई जिम्मेदारी या अवसर मिल सकता है।
व्यवसाय में निवेश से लाभ के संकेत हैं।
प्रेम जीवन में स्थिरता रहेगी और संतान से शुभ समाचार मिल सकता है।
स्वास्थ्य पहले से बेहतर रहेगा।
👉 उपाय: हरी वस्तु का दान करें।

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वृषभ राशि (Taurus)
आज का दिन धन लाभ और पारिवारिक सुख देने वाला है।
वाणी से जुड़े कार्यों—लेखन, पत्रकारिता, शिक्षण, राजनीति—में सफलता मिलेगी।
नौकरी में आय बढ़ने के संकेत हैं।
व्यापार में ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी।
प्रेम और वैवाहिक जीवन संतुलित रहेगा।
👉 उपाय: पीली वस्तु का दान शुभ रहेगा।
मिथुन राशि (Gemini)
आज आप सौम्यता और आकर्षण का केंद्र बनेंगे।
समाज और कार्यक्षेत्र में आपकी सराहना होगी।
जरूरत के संसाधन समय पर उपलब्ध होंगे।
प्रेम संबंधों और संतान को लेकर थोड़ा धैर्य रखें।
व्यापार और करियर स्थिर रहेंगे।
👉 उपाय: मां काली को प्रणाम करें।

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कर्क राशि (Cancer)
आज स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी सतर्कता जरूरी है।
सिर दर्द, आंखों में जलन या मानसिक चिंता हो सकती है।
हालांकि प्रेम और संतान का भरपूर सहयोग मिलेगा।
व्यापार सामान्य से अच्छा रहेगा।
शुभ कार्यों में खर्च बढ़ सकता है।
👉 उपाय: पीली वस्तु पास रखें।
सिंह राशि (Leo)
आज आय के नए स्रोत बनेंगे।
पुराने निवेश से भी लाभ मिलेगा।
यात्रा के योग बन रहे हैं और शुभ समाचार मिल सकता है।
प्रेम जीवन और संतान से खुशी मिलेगी।
व्यापार और राजनीति के लिए दिन शुभ है।
👉 उपाय: लाल वस्तु पास रखें।

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कन्या राशि (Virgo)
आज का दिन कानूनी मामलों और प्रशासनिक कार्यों में सफलता दिलाएगा।
राजनीति या सरकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा।
पिता और वरिष्ठ अधिकारियों का आशीर्वाद मिलेगा।
स्वास्थ्य, प्रेम और व्यापार तीनों ही मजबूत स्थिति में हैं।
👉 उपाय: भगवान विष्णु को प्रणाम करें।
तुला राशि (Libra)
आज भाग्य आपका पूरा साथ देगा।
धर्म-कर्म, यात्रा और उच्च शिक्षा से जुड़े मामलों में प्रगति होगी।
नौकरी और करियर में सकारात्मक बदलाव संभव है।
सम्मान का ध्यान रखें, वाणी पर संयम रखें।
प्रेम, व्यापार और स्वास्थ्य अनुकूल रहेंगे।
👉 उपाय: हरी वस्तु पास रखें।

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वृश्चिक राशि (Scorpio)
आज का दिन थोड़ा सतर्क रहने का है।
चोट-चपेट या अचानक परेशानी हो सकती है।
कोई भी बड़ा जोखिम लेने से बचें।
प्रेम और संतान सामान्य रहेंगे।
व्यापार स्थिर रहेगा।
👉 उपाय: हरी वस्तु गणेश जी को अर्पित करें।
धनु राशि (Sagittarius)
आज जीवनसाथी और साझेदारी से पूरा सहयोग मिलेगा।
नौकरी और करियर में स्थिति मजबूत होगी।
प्रेम संबंधों में मुलाकात और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा।
व्यवसाय, स्वास्थ्य और धन—तीनों पक्षों में शुभता है।
👉 उपाय: हरी वस्तु का दान करें।

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मकर राशि (Capricorn)
आज शत्रुओं पर विजय मिलेगी।
विरोधी भी मित्रवत व्यवहार कर सकते हैं।
ज्ञान और अनुभव में वृद्धि होगी।
बुजुर्गों और गुरुओं का आशीर्वाद मिलेगा।
स्वास्थ्य पर थोड़ा ध्यान दें।
प्रेम, संतान और व्यापार उत्कृष्ट रहेंगे।
👉 उपाय: हरी वस्तु पास रखें।
कुंभ राशि (Aquarius)
आज संयम और सौम्यता सबसे जरूरी है।
विद्यार्थियों के लिए दिन अच्छा है।
प्रेम संबंधों में बहस से बचें।
भावुक निर्णय न लें।
स्वास्थ्य, व्यापार और प्रेम मध्यम रहेंगे।
👉 उपाय: हरी वस्तु पास रखें।

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मीन राशि (Pisces)
आज भूमि, भवन और वाहन खरीदने का प्रबल योग है।
घर-परिवार में उत्सव का माहौल बन सकता है।
आय के नए स्रोत खुलेंगे।
नौकरी और व्यवसाय में शानदार प्रगति होगी।
स्वास्थ्य में सुधार और प्रेम जीवन में मधुरता रहेगी।
👉 उपाय: हरी वस्तु का दान करें।

शिव पुराण कथा: नटराज से नीलकंठ तक की दिव्य यात्रा

🔱 शिव भगवान की शास्त्रोक्त कथा
भूमिका
शिव भगवान की शास्त्रोक्त कथा के एपिसोड 11 में भगवान शिव को संतुलन के प्रतीक के रूप में समझा गया था। सृष्टि, संहार और संरक्षण के बीच जो सूक्ष्म सामंजस्य है, वह शिव तत्व का मूल आधार है।
अब एपिसोड 12 में यह कथा आगे बढ़ते हुए परिवर्तन, वैराग्य और चेतना के विस्तार की गहराई को प्रकट करती है।
शिव केवल देवता नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन हैं। वह हमें सिखाते हैं कि परिवर्तन से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि परिवर्तन ही सृष्टि का नियम है।

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🌙 शिव तत्व और परिवर्तन का शास्त्रोक्त अर्थ
शिव पुराण, लिंग पुराण और स्कंद पुराण में वर्णित है कि
“शिवो भूत्वा शिवं यान्ति”
अर्थात जो शिव तत्व को समझ लेता है, वही शिवत्व को प्राप्त करता है। शिव को परिवर्तन का प्रतीक माना गया है। उनका तांडव केवल विनाश नहीं, बल्कि नई सृष्टि का द्वार है। जब पुराना टूटता है, तभी नया जन्म लेता है।

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🔥 नटराज रूप: परिवर्तन की चरम अवस्था
भगवान शिव का नटराज रूप इस कथा का प्रमुख केंद्र है।
नटराज का तांडव पाँच तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है: आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी।
शास्त्र कहते हैं कि जब संसार जड़ हो जाता है, तब शिव तांडव करते हैं।
यह तांडव अहंकार, अज्ञान और असंतुलन का अंत करता है।
शिव भगवान की शास्त्रोक्त कथा में यह बताया गया है कि
जो व्यक्ति जीवन में परिवर्तन को स्वीकार करता है, वही आगे बढ़ता है।

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🐍 वैराग्य और गृहस्थ का संतुलन
भगवान शिव वैराग्य के प्रतीक होते हुए भी गृहस्थ हैं।
माता पार्वती के साथ उनका जीवन यह सिखाता है कि त्याग और प्रेम विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।
शिव के गले में सर्प, भस्म और जटाएं यह दर्शाती हैं कि
भौतिक आकर्षण से ऊपर उठकर भी संसार को अपनाया जा सकता है।
शिव जी की कथा का यह अध्याय बताता है कि
जीवन में संतुलन वही साध पाता है जो भीतर से स्थिर होता है।

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🌊 नीलकंठ: विष से अमृत तक की यात्रा
समुद्र मंथन में जब विष निकला, तब कोई भी उसे धारण करने को तैयार नहीं था।
भगवान शिव ने वह विष पी लिया और नीलकंठ कहलाए।
यह प्रसंग शिव कथा का आत्मा है।
शिव हमें सिखाते हैं कि समाज और संसार की पीड़ा को स्वयं पर लेना ही सच्ची करुणा है।
जो व्यक्ति दूसरों के दुःख को सह लेता है, वही सच्चा शिव भक्त है।
🕉️ ध्यान और मौन की शक्ति
कैलाश पर ध्यानस्थ शिव यह संदेश देते हैं कि
मौन में ही सबसे बड़ा परिवर्तन जन्म लेता है।
आज का मानव शोर में उलझा है, जबकि शिव शांति में स्थित हैं।
भगवान शिव की कथा का यह हिस्सा आत्मचिंतन की प्रेरणा देता है।
ध्यान का अर्थ पलायन नहीं, बल्कि स्वयं से मिलन है।
🌺 भक्त और शिव: कथा का मानवीय पक्ष
शिव अपने भक्तों में भेद नहीं करते।
भस्मासुर हो या मार्कंडेय, केदार हो या गजासुर –
शिव सबको कर्म के अनुसार फल देते हैं।यह स्पष्ट करता है कि शिव का न्याय करुणा से भरा होता है।
📜 शास्त्रोक्त संदेश
शिव पुराण के अनुसार: जो परिवर्तन से डरता है, वह स्थिर नहीं रह पाता।
जो वैराग्य को समझ लेता है, वही सच्चा गृहस्थ बनता है।
शिव भगवान की शास्त्रोक्त कथा का यह अध्याय जीवन के हर मोड़ पर मार्गदर्शन करता है।
🔔 निष्कर्ष
शिव भगवान की शास्त्रोक्त कथा एपिसोड 12 हमें यह सिखाती है कि
परिवर्तन, त्याग और संतुलन ही जीवन का सत्य है।
शिव को समझना स्वयं को समझना है।
जो शिव तत्व को आत्मसात करता है, वह भय से मुक्त हो जाता है।

बजट 2026-27 बनाम आर्थिक सर्वेक्षण- भारत की आर्थिक दिशा, टैक्स सुधार,गिग़ वर्कर्स और मिडिल क्लास की उम्मीदों का निर्णायक पड़ाव

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर सबसे बड़े भारतीय लोकतंत्र में संसद के बजट सत्र में गुरुवार 29 जनवरी 2026 को केंद्रीय वित्तमंत्री द्वारा आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया ज़ो एक सरकारी दस्‍तावेज होता है,जिसे बजट से पहले पेश किया जाता है, इकोनॉमिक सर्वे में देश की आर्थिक स्थिति, चुनौतियों और आगे की दिशा के बारे में विस्‍तार से मूल्‍यांकन किया गया होता है,इसमें देश के विकासमहंगाई के अनुमान और बेरोजगारी, व्‍यापार और फाइनेंशियल हेल्‍थ के बारे में भी जानकारी दी गई होती है,इस रिपोर्ट को केंद्रीय वित्त मंत्रालय की टीम तैयार करती है अब 1 फरवरी 2026 को बजट पेश किया जाएगा जो वैश्विक स्तरपर एक वित्तीय दस्तावेज़ नहीं होता,बल्कि यह देश की आर्थिक सोच सामाजिक प्राथमिकताओं और वैश्विक भूमिका को परिभाषित करने वाला नीति-घोषणापत्र होता है। वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट इस दृष्टि से ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यह न केवल एक नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत करेगा, बल्कि भारत के आयकर ढांचे में होने वाले सबसे बड़े कानूनी परिवर्तन से पहले का अंतिम पूर्ण बजट भी होगा। यही कारण है कि संसद से लेकर शेयर बाजार तक, टैक्सपेयर्स से लेकर उद्योग जगत तक और भारत से लेकर वैश्विक निवेशकों तक,सभी की निगाहें इस बजट पर टिकी हुई हैं।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र बता दूं क़ि वर्ष 2026-27 के बजट का औपचारिक आगाज़ संसद के बजट सत्र के साथ होगा,ज़ो 28 जनवरी से 13 फ़रवरी 2026 तक शुरू हो चुका है,यह सत्र दो चरणों में विभाजित होगा,दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक चलेगा।इस विस्तारित सत्र का उद्देश्य केवल बजट पारितकरना नहीं,बल्कि उससे जुड़ी नीतियों, संशोधनों और विधायी पहलुओं पर व्यापक विमर्श सुनिश्चित करना है। लोकतंत्र में बजट सत्र सरकार और संसद दोनों के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता की कसौटी होता है।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेंगी। यह क्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनका एक और बजट होगा, जिसमें उनसे न केवल राजकोषीय अनुशासन बल्कि मिडिल क्लास, नौकरीपेशा वर्ग, किसानों, स्टार्टअप्स और उद्योग जगत के बीच संतुलन साधने की अपेक्षा की जा रही है। भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था में बजट के हर प्रावधान का सीधा असर घरेलू मांग, निवेश वातावरण और वैश्विक भरोसे पर पड़ता है। 

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साथियों बात अगर हम टैक्स पेयर्स की उम्मीदें:बजट का सबसे संवेदनशील पक्ष इसको समझने की करें तो,हर बजट में अगर किसी एक वर्ग की निगाहें सबसे अधिक वित्तमंत्री के भाषण पर टिकी होती हैं,तो वह है टैक्सपेयर्स विशेषकर मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोग। महंगाई,शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रिटायरमेंट की बढ़ती लागत के बीच यह वर्ग वर्षों से यह महसूस करता आया है कि आर्थिक विकास का सबसे बड़ा बोझ उसी के कंधों पर है। इसलिए बजट 2026-27 में इनकम टैक्स से जुड़ी घोषणाएं केवल वित्तीय नहीं,बल्कि सामाजिकराजनीतिक संदेश भी होंगी। 

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साथियों बात अगर हमस्टॉक मार्केट की तैयारी:बजट और निवेशकों का संबंध इसको समझने की करें तो बजट 2026-27 का असर केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव शेयर बाजार और पूंजी बाजार पर भी पड़ेगा। स्टॉक एक्सचेंजों ने संकेत दे दिए हैं कि यदि 1 फरवरी को बजट रविवार के दिन पेश किया जाता है,तो उस दिन स्पेशल ट्रेडिंग सेशन आयोजित किया जाएगा। यह व्यवस्था दर्शाती है कि बजट घोषणाओं को बाजार कितनी गंभीरता से लेता है। टैक्स सुधार, पूंजीगत लाभ कर, टीडीएस नियम और निवेश प्रोत्साहन जैसे प्रावधान बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 

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साथियों बात अगर हम  नया इन्कम टैक्स एक्ट 2025 एक युग का अंत, दूसरे की शुरुआत को समझने की करें तो, यूनियन बजट 2026-27को ऐतिहासिक बनाने वाला सबसे बड़ा कारण यह है कि यह 60 साल पुराने आयकर कानून के अंत से पहले का अंतिम पूर्ण बजट होगा। सरकार 1 अप्रैल 2026 से नया इन्कम टैक्स एक्ट 2025 लागू करने जा रही है,जो मौजूदा जटिल विवादग्रस्त और बार-बार संशोधित कानून की जगह लेगा। ऐसे में बजट 2026-27 केवल मौजूदा वित्तीय जरूरतों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि आने वाले टैक्स सिस्टम की बुनियाद भी रखेगा। 

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साथियों बात अगर हम टैक्सपेयर्स की 5 बड़ी उम्मीदें: क्या मिडिल क्लास की खुलेगी किस्मत? इसको समझने की करें तो(1) धारा 80सी और 80 डी की सीमा में वृद्धि : बचत और सुरक्षा का सवाल-धारा 80सी के तहत ₹1.5 लाख की कर छूट सीमा वर्षों से अपरिवर्तित है,जबकि इस अवधि में महंगाई, आय स्तर और जीवन-शैली खर्चों में भारी वृद्धि हुई है। इसी प्रकार 80डी के तहत स्वास्थ्य बीमा पर मिलने वाली छूट भी आज की चिकित्सा लागत के मुकाबले अपर्याप्त प्रतीत होती है। टैक्सपेयर्स की प्रमुख मांग है कि इन सीमाओं को यथार्थवादी स्तर तक बढ़ाया जाए, ताकि लंबी अवधि की बचत, बीमा कवरेज और सामाजिक सुरक्षा को प्रोत्साहन मिल सके।(2) लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में राहत : निवेश संस्कृति को बढ़ावा-भारत सरकार निवेश आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना चाहती है, लेकिन लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स की मौजूदा संरचना कई निवेशकों को हतोत्साहित करती है।

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टैक्सपेयर्स की अपेक्षा है कि या तो इसकी आय सीमा बढ़ाई जाए, या फिर छोटे और मध्यम निवेशकों को अतिरिक्त राहत दी जाए।इससे घरेलू निवेश, रिटेल पार्टिसिपेशन और पूंजी बाजार की गहराई बढ़ सकती है, जो वैश्विक निवेशकों के लिए भी सकारात्मक संकेत होगा।(3) टीडीएस सीमा में वृद्धि:नकदी प्रवाह और अनुपालन की सरलता-टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) व्यवस्था का उद्देश्य टैक्स संग्रह को आसान बनाना है, लेकिन अत्यधिक कम सीमाएं कई बार अनावश्यक अनुपालन बोझ पैदा करती हैं।वरिष्ठ नागरिकों, फ्रीलांसर्स और छोटे करदाताओं की मांग है कि विभिन्न श्रेणियों में टीडीएस की सीमा बढ़ाई जाए, जिससे नकदी प्रवाह सुधरे और रिफंड-आधारित टैक्स सिस्टम पर निर्भरता कम हो।

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(4) नए इनकम टैक्स कानून में सरल संरचना : जटिलता से मुक्ति- इन्कम टैक्स एक्ट 2025 से सबसेबड़ी उम्मीद यह है कि यह सरल, स्पष्ट और विवाद-मुक्त होगा। बजट 2026-27 में सरकार से अपेक्षा है कि वह इस नए कानून की संरचना को स्पष्ट संकेतों के माध्यम से पेश करे जैसे कम धाराएं,सरल भाषा, डिजिटल-फ्रेंडली अनुपालन और न्यूनतम व्याख्यात्मक विवाद। यह सुधार भारत की ईजी ऑफ़ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग और वैश्विक टैक्स छवि को भी मजबूत करेगा।(5)विवाद समाधान और टैक्स आतंक से मुक्ति-पिछले वर्षों में सरकार ने ‘टैक्स टेररिज़्म’ की धारणा को समाप्त करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब भी लंबे विवाद, अपीलें और मुकदमेबाज़ी टैक्सपेयर्स के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। बजट 2026-27 से अपेक्षा है कि इसमें तेज़, पारदर्शी और तकनीक-आधारित विवाद समाधान तंत्र को और मजबूत किया जाएगा। 

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साथियों बात अगर हम इस बजट को दो एंगल मिडिल क्लास व शेयर बाजार केंद्रित से समझने की करें तो (1) मिडिल क्लास केंद्रित आय, बचत और जीवन-स्तर की कसौटी-बजट 2026-27 मिडिल क्लास के लिए इसलिए निर्णायक है क्योंकि यह नए इनकम टैक्स कानून से पहले का अंतिम पूर्ण बजट है। नौकरीपेशा और मध्यम आय वर्ग की प्रमुख अपेक्षा यह है कि बढ़ती महंगाई, शिक्षा-स्वास्थ्य खर्च और रिटायरमेंट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इनकम टैक्स ढांचे में वास्तविक राहत दी जाए। विशेष रूप से धारा 80सी और 80डी की सीमाओं में वृद्धि मिडिल क्लास के लिए केवल टैक्स लाभ नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा का साधन मानी जा रही है।यदि बजट में कर-छूट या टैक्स स्लैब में संतुलित सुधार होता है, तो इसका सीधा असर घरेलू खपत पर पड़ेगा। ऑटो, आवास, उपभोक्ता वस्तुएँ और सेवाएँ—ये सभी सेक्टर मिडिल क्लास की डिस्पोज़ेबल इनकम से चलते हैं। इसलिए बजट 2026 -27 मिडिल क्लास के लिए इस प्रश्न का उत्तर देगा कि क्या सरकार उसे केवल “टैक्स बेस” के रूप में देखती है या आर्थिक विकास का इंजन मानती है। (2) शेयर बाजार केंद्रित-भरोसा,स्थिरता और दीर्घकालिकसंकेत-शेयर बाजार के लिए बजट 2026-27 अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से अधिक नीतिगत दिशा और टैक्स स्थिरता का दस्तावेज़ है।निवेशकों की प्राथमिक अपेक्षा यह है कि कैपिटल गेन टैक्स, टीडीएस और कॉरपोरेट टैक्स से जुड़े संकेत स्पष्ट और पूर्वानुमेय हों। टैक्स अनिश्चितता बाजार को कमजोर करती है, जबकि स्थिरता दीर्घकालिक निवेश को आकर्षित करती है।यदि बजट में राजकोषीय अनुशासन के साथ कैपेक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च को प्राथमिकता दी जाती है, तो यह कैपिटल गुड्स, बैंकिंग और इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए सकारात्मक ट्रिगर होगा। साथ ही, नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 को लेकर स्पष्ट रोडमैप शेयर बाजार को यह संकेत देगा कि भारत का पूंजी बाजार नियम-आधारित और निवेश- अनुकूल दिशा में आगे बढ़ रहा है। 

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साथियों बात अगर हम वैश्विक स्तर पर देखें तो भारत आज विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुखअर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे में बजट 2026-27 न केवल घरेलूनीति का दस्तावेज़ होगा,बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय निवेशकों रेटिंग एजेंसियों और बहुपक्षीय संस्थाओं के लिए भी एक संकेतक बनेगा। टैक्स सुधार, कानून की स्थिरता और नीतिगत स्पष्टता भारत को चीन के बाद एक विश्वसनीय निवेश गंतव्य के रूप में और मजबूत कर सकती है। 

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अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विशेषण करें तो हम पाएंगे कि  एक बजट, कई उम्मीदें,एक ऐतिहासिक मोड़ है बजट 2026-27 एक साधारण वार्षिक बजट नहीं है। यह पुराने टैक्स युग से नए टैक्स युग की दहलीज पर खड़ा बजट है। यह मिडिल क्लास की वर्षों पुरानी अपेक्षाओं,निवेशकों की आकांक्षाओं और सरकार की सुधारवादी छवि,तीनों की परीक्षा लेगा।यदि यह बजट संतुलित,दूरदर्शी और संवेदनशील रहा, तो यह भारत की आर्थिक यात्रा में एक निर्णायक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

नाखून बताते हैं आपकी सेहत का राज, रंग और बनावट से पहचानें गंभीर बीमारियां

हम में से ज्यादातर लोग अपने नाखूनों को सिर्फ सुंदरता से जोड़कर देखते हैं। कोई उन्हें रंगता है, कोई काटता है, तो कोई उन पर डिजाइन बनवाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नाखून केवल सजावट नहीं, बल्कि आपकी सेहत का आईना भी होते हैं।
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नाखूनों का रंग, बनावट और आकार शरीर के अंदर चल रही कई बीमारियों के संकेत दे सकता है। कई बार दिल, फेफड़े, जिगर, थायरॉइड या यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के शुरुआती लक्षण भी नाखूनों में बदलाव के रूप में दिखने लगते हैं।

कैसे नाखूनों से पहचानें सेहत का हाल?

अगर नाखूनों का रंग अचानक बदल जाए, उन पर अजीब धब्बे दिखने लगें या वे मोटे, टूटने वाले या सूजे हुए लगें, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। आइए जानते हैं नाखूनों में दिखने वाले बदलाव किन बीमारियों की ओर इशारा करते हैं।

पीले नाखून क्या संकेत देते हैं?

अगर आपके नाखून पीले पड़ने लगे हैं, तो इसका सबसे आम कारण फंगल इंफेक्शन हो सकता है। इस स्थिति में नाखून धीरे-धीरे मोटे, कमजोर और टूटने वाले हो जाते हैं।
हालांकि, कुछ मामलों में पीले नाखून थायरॉइड की बीमारी, फेफड़ों की समस्या, सोरायसिस या डायबिटीज का संकेत भी हो सकते हैं। अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

सफेद नाखून या सफेद धब्बे

नाखूनों पर सफेद धब्बे दिखना आम बात है, जिसे मेडिकल भाषा में ल्यूकोनिशिया कहा जाता है। अक्सर यह हल्की चोट, एलर्जी या संक्रमण की वजह से होता है।
इसके अलावा, यह दवाइयों के साइड इफेक्ट या शरीर में पोषक तत्वों की कमी का संकेत भी हो सकता है। अगर पूरे नाखून सफेद पड़ने लगें या धब्बे बार-बार दिखें, तो जांच जरूरी है।

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नीले या बैंगनी नाखून क्यों होते हैं?

अगर नाखून नीले या बैंगनी रंग के नजर आने लगें, तो यह शरीर में ऑक्सीजन की कमी का संकेत हो सकता है। यह स्थिति दिल या फेफड़ों से जुड़ी बीमारी की ओर इशारा करती है।
वहीं, विटामिन B12 की कमी, विल्सन रोग या चांदी की विषाक्तता के कारण भी नाखून नीले हो सकते हैं। यह एक गंभीर संकेत है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

नाखूनों पर गहरे लाल आधे चांद का मतलब

आमतौर पर नाखूनों के नीचे हल्का सफेद आधा चांद दिखता है। लेकिन अगर यह गहरे लाल रंग का हो जाए, तो सतर्क हो जाएं।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (AAD) के अनुसार, यह ल्यूपस, हृदय रोग और गठिया (आर्थराइटिस) जैसी बीमारियों का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

नाखूनों के आसपास सूजन क्यों होती है?

अगर नाखूनों के चारों ओर की त्वचा लाल, सूजी हुई और दर्दनाक हो जाए, तो इसे क्रोनिक पैरॉनिचिया कहा जाता है। यह समस्या एलर्जी, ज्यादा नमी में रहने या फंगल इंफेक्शन की वजह से हो सकती है।
समय पर इलाज न होने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। आमतौर पर इसका इलाज दवाइयों और क्रीम से किया जाता है।

नाखूनों पर गहरी धारियां खतरे का संकेत

अगर नाखून के नीचे कोई नई या बदलती हुई गहरी धारियां दिखाई दें और वह किसी चोट की वजह से न हों, तो यह गंभीर चेतावनी हो सकती है।
AAD के अनुसार, कुछ मामलों में यह त्वचा कैंसर (मेलानोमा) का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत जांच करवाना बेहद जरूरी है।

नाखूनों का क्लबिंग क्या बताता है?

जब नाखून चौड़े, गोल और स्पंज जैसे मुलायम हो जाते हैं, तो इसे नाखूनों का क्लबिंग कहा जाता है। यह आमतौर पर लंबे समय से चल रही बीमारियों का संकेत होता है।
क्लबिंग फेफड़ों के कैंसर, हृदय रोग या गंभीर फेफड़ों की समस्याओं से जुड़ी हो सकती है।

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी समस्या या लक्षण के दिखने पर डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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