Thursday, May 14, 2026
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एक घर, दो राय: बृजभूषण शरण सिंह के बेटे आमने-सामने

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) देशभर में यूजीसी के नए नियमों को लेकर जबरदस्त बवाल मचा हुआ है। खासकर सवर्ण समाज का विरोध अब सड़क से लेकर सियासी गलियारों तक पहुंच चुका है। छात्र संगठनों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों ने भी यूजीसी के नए नियमों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। इस बीच सत्तारूढ़ दल भाजपा के भीतर भी इस मुद्दे पर असहजता साफ दिखाई देने लगी है।
सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब भाजपा के कद्दावर और बाहुबली नेता रहे पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के दोनों बेटे इस मुद्दे पर आमने-सामने खड़े नजर आए। एक ओर विधायक बेटे ने यूजीसी के नए नियमों का खुला विरोध किया, तो दूसरी ओर सांसद बेटे ने इन्हीं नियमों का समर्थन कर दिया।
🔹 विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने क्यों जताया विरोध
भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने सवर्ण समाज की नाराजगी को जायज ठहराते हुए कहा कि यूजीसी के नए नियम पारंपरिक सामाजिक संतुलन और अवसरों को प्रभावित कर सकते हैं। उनका मानना है कि इन नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों में असंतोष बढ़ा है और सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
प्रतीक भूषण सिंह ने साफ संकेत दिए कि वे अपने क्षेत्र की सामाजिक भावना के साथ खड़े हैं और सवर्ण समाज विरोध की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
🔹 सांसद करण भूषण सिंह नियमों के पक्ष में
वहीं दूसरी ओर, भाजपा सांसद करण भूषण सिंह का रुख बिल्कुल उलट है। वे उस संसदीय कमेटी के सदस्य रहे हैं, जिसने यूजीसी के नए नियमों के मसौदे को तैयार किया। करण भूषण सिंह का कहना है कि ये नियम उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, पारदर्शिता लाने और लंबे समय में छात्रों के हित में हैं।
उनके अनुसार, विरोध से ज्यादा जरूरी है नियमों की सही जानकारी और उनके दूरगामी लाभों को समझना।
🔹 भाजपा के लिए बढ़ी असहजता
एक ही परिवार के भीतर दो विपरीत राय ने भाजपा को भी असहज कर दिया है। जहां एक ओर पार्टी सरकार में रहते हुए यूजीसी के नए नियमों का बचाव कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर भाजपा नेताओं को सवर्ण समाज विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यह विवाद आने वाले समय में पार्टी की रणनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
🔹 सियासत से आगे सामाजिक संदेश
बृजभूषण शरण सिंह के बेटों का यह मतभेद सिर्फ पारिवारिक नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि यूजीसी के नए नियम किस कदर समाज और राजनीति को दो हिस्सों में बांट रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस विरोध को कैसे संभालती है और क्या नियमों में कोई संशोधन होता है।

महराजगंज पुलिस का हाईटेक कंट्रोल रूम बना अपराध नियंत्रण की मजबूत कड़ी

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महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)।जिले में अपराध नियंत्रण और कानून- व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में महराजगंज पुलिस लगातार तकनीक का प्रभावी उपयोग कर रही है। इसी क्रम में बुधवार को पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीणा ने पुलिस कार्यालय स्थित जनपदीय सीसीटीवी कंट्रोल रूम का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कंट्रोल रूम में स्थापित सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम की कार्यप्रणाली, कवरेज,कैमरों की स्पष्टता और तकनीकी स्थिति की गहन समीक्षा की।
पुलिस अधीक्षक ने कंट्रोल रूम में उपलब्ध संसाधनों, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सतर्कता और कार्यशैली का बारीकी से जायजा लिया। साथ ही विभिन्न रजिस्टरों एवं सूचना पंजिकाओं का अवलोकन कर निर्देश दिया कि जिले भर से प्राप्त होने वाली हर छोटी-बड़ी सूचना को बिना देरी के दर्ज किया जाए और तत्काल संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाए।

सेवा समिति के शैक्षिक संस्थानों में 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास और देशभक्ति के साथ मनाया गया
एसपी ने शहर के प्रमुख चौराहों, संवेदनशील स्थलों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में लगे कैमरों की लाइव फीड देखी। उन्होंने तकनीकी ऑपरेटरों को सख्त निर्देश दिए कि सभी सीसीटीवी कैमरे 24 घंटे सक्रिय और कार्यशील रहें। यदि किसी कैमरे में तकनीकी खराबी आती है तो उसकी सूचना तत्काल संबंधित विभाग को भेजकर उसे शीघ्र ठीक कराया जाए।
निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने कहा कि संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखना और किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में निकटतम पीआरवी को तुरंत मौके पर भेजना प्राथमिकता होनी चाहिए। सूचना के आदान-प्रदान में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, क्योंकि पुलिस की सक्रियता ही अपराध नियंत्रण की पहली सीढ़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाईटेक सीसीटीवी कंट्रोल रूम का मुख्य उद्देश्य जिले में कहीं भी घटना होने पर त्वरित पुलिस रिस्पॉन्स सुनिश्चित करना है, ताकि आमजन को सुरक्षा और सहायता का भरोसा मिल सके। उन्होंने कहा कि तकनीक के बेहतर और प्रभावी इस्तेमाल से अपराध पर नियंत्रण के साथ-साथ जिले की कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाएगा।

बहेरवां टोला–परसिया मार्ग की बदहाली बनी ग्रामीणों की बड़ी पीड़ा, गड्ढों में तब्दील सड़क पर रोज हो रहे हादसे

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2026-27 की कार्ययोजना में पक्की सड़क निर्माण का मिला आश्वासन

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सदर विकास खंड एवं तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत बागापार अंतर्गत बहेरवा टोला से परसिया तक जाने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग वर्षों से बदहाली का दंश झेल रहा है। गड्ढों, ऊबड़-खाबड़ सतह और टूटे हिस्सों से जूझती यह सड़क अब ग्रामीणों के लिए सुविधा नहीं बल्कि दुर्घटनाओं का रास्ता बन चुकी है। हालत यह है कि इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीर आए दिन गिरकर चोटिल हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक स्थायी समाधान नहीं कर सका।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग क्षेत्र की अत्यंत महत्वपूर्ण संपर्क सड़क है, जिससे प्रतिदिन हजारों लोग जिला मुख्यालय महराजगंज सहित आस-पास के क्षेत्रों में आवागमन करते हैं। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को झेलनी पड़ रही है। बारिश के मौसम में सड़क की स्थिति और भयावह हो जाती है—कीचड़, जलजमाव और फिसलन से निकलना दूभर हो जाता है। कई बार एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहन भी रास्ते में फंस जाते हैं, जिससे जान-माल का खतरा बना रहता है।
इस गंभीर जनहित के मुद्दे को लेकर ग्राम पंचायत बागापार निवासी समाजसेवी उमेश चन्द्र मिश्र ने संबंधित विभाग को प्रार्थना पत्र देकर बहेरवा टोला से परसिया तक पक्की सड़क निर्माण की मांग उठाई थी। प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया गया कि सड़क की जर्जर स्थिति न केवल आमजन के लिए परेशानी का कारण है, बल्कि इससे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
इस मामले में सहायक अभियंता रामनरेश मौर्य ने बताया कि उक्त मार्ग के नव निर्माण को वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना में शामिल कर लिया गया है। प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद सड़क निर्माण कार्य कराया जाएगा। विभागीय स्तर पर दिए गए इस आश्वासन से ग्रामीणों में कुछ उम्मीद जगी है, हालांकि अब भी लोगों के मन में संशय बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में भी कई बार केवल कागजी आश्वासन देकर मामले को टाल दिया गया, लेकिन धरातल पर कोई कार्य नहीं हुआ। लोगों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रस्तावित सड़क निर्माण कार्य को प्राथमिकता पर लेते हुए तय समय सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा कराया जाए, ताकि वर्षों से झेल रहे कष्ट से उन्हें निजात मिल सके और क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके।

कौन थी पवार के प्लेन में जौनपुर की बेटी की जिसकी आसमान में टूटी उड़ान

बारामती हेलीकॉप्टर क्रैश: उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन, यूपी की पिंकी माली समेत 5 लोगों की मौत

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) आज का दिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक ऐसा काला दिन बन गया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। महाराष्ट्र के कद्दावर नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन हो गया। यह दर्दनाक हादसा उसी बारामती क्षेत्र में हुआ, जिसे पवार परिवार की राजनीतिक कर्मभूमि माना जाता है।
इस बारामती हेलीकॉप्टर क्रैश में उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत कुल 5 लोगों की मौत हो गई। हेलीकॉप्टर में सवार सभी लोग इस हादसे में जान नहीं बचा सके। हादसे के बाद हेलीकॉप्टर पूरी तरह जलकर खाक हो गया, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में भी भारी मुश्किलें आईं।

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हादसे में यूपी की पिंकी माली की भी मौत
इस हादसे में जिस नाम ने लोगों का ध्यान खींचा, वह है पिंकी माली। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिंकी माली उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की रहने वाली थीं और हेलीकॉप्टर में एयरक्राफ्ट स्टाफ के रूप में तैनात थीं।
बताया जा रहा है कि पिंकी माली जौनपुर की केराकत तहसील से ताल्लुक रखती थीं। यह उनका चौथा मौका था जब वह अजित पवार के साथ यात्रा कर रही थीं। इससे पहले भी वह कई वीआईपी उड़ानों का हिस्सा रह चुकी थीं।
पिंकी माली के पिता ने सुनाई आखिरी बातचीत की कहानी,टीवी मीडिया से बातचीत में पिंकी माली के पिता ने बताया कि उनकी बेटी से आखिरी बातचीत एक दिन पहले हुई थी। पिंकी ने फोन पर बताया था कि वह अजित पवार के साथ बारामती जा रही है और वहां से उन्हें छोड़कर नांदेड़ के लिए रवाना होगी।
पिता ने कहा,“मैंने कहा था कि सुबह बात करेंगे, लेकिन फिर कभी बात नहीं हो पाई। सुबह परिजनों ने हादसे की खबर दी और टीवी पर सब साफ हो गया।”

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पिंकी माली का प्रोफेशनल करियर
पिंकी माली पिछले 5 वर्षों से प्राइवेट चार्टर्ड फ्लाइट्स में काम कर रही थीं। वह इससे पहले एयर इंडिया में भी अपनी सेवाएं दे चुकी थीं। पिंकी राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ नेताओं के साथ उड़ान भर चुकी थीं, जिससे उनके अनुभव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
राजनीति और प्रशासन में शोक की लहर
अजित पवार हेलीकॉप्टर हादसा की खबर सामने आते ही महाराष्ट्र समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सरकार ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं।

संसद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन: सामाजिक न्याय पर केंद्रित Budget Session 2026

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संसद के संयुक्त सत्र को संबोधन के साथ हुई। अपने प्रभावशाली भाषण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और विकसित भारत के लक्ष्य को केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। यह संबोधन 18वीं लोकसभा के सातवें सत्र और राज्यसभा के 270वें सत्र के उद्घाटन अवसर पर हुआ।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि उन्हें संसद को संबोधित करते हुए गर्व और प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने पिछले वर्ष को भारत की तीव्र प्रगति और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐतिहासिक बताया। राष्ट्रपति ने वंदे मातरम के 150 वर्ष, गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस, बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और सरदार पटेल की 150वीं जयंती जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन स्मरणोत्सवों ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और मजबूत किया है।

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सामाजिक न्याय पर जोर देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा प्रतिपादित समानता और न्याय के मूल्य ही भारतीय संविधान की आत्मा हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रत्येक नागरिक को बिना भेदभाव के समान अधिकार मिलना चाहिए और उनकी सरकार सच्चे सामाजिक न्याय के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राष्ट्रपति ने बताया कि पिछले एक दशक में लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, जो सरकार की नीतियों की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
Budget Session 2026 के अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पहुंच में हुए बड़े विस्तार को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ केवल 25 करोड़ लोगों तक सीमित था, जबकि आज लगभग 95 करोड़ नागरिक इन योजनाओं से जुड़े हैं। यह बदलाव दलितों, पिछड़ों, आदिवासी समुदायों और समाज के सभी वर्गों को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मनरेगा के स्थान पर लाए गए नए कानून ‘विकसित भारत-जी-आरएएम जी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार और विकास को नई दिशा देगा। इस कानून के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। हालांकि इस मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी प्रतिक्रिया भी देखने को मिली।
अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2026 के साथ भारत 21वीं सदी के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। पिछले 25 वर्षों की उपलब्धियों ने देश को मजबूत आधार प्रदान किया है और आने वाला समय विकसित भारत के सपने को साकार करने का है। Budget Session 2026 का यह संबोधन सरकार की सामाजिक प्रतिबद्धता और भविष्य की स्पष्ट रूपरेखा को दर्शाता है।

छह बार उपमुख्यमंत्री रहे Ajit Pawar का निधन, महाराष्ट्र की राजनीति में खालीपन

महाराष्ट्र की राजनीति के मजबूत स्तंभ अजित पवार का विमान हादसे में निधन


मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)महाराष्ट्र की राजनीति को 28 जनवरी 2026 को गहरा झटका लगा, जब अजित पवार का बारामती में विमान लैंडिंग के दौरान हुए हादसे में निधन हो गया। 66 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले अजित पवार न सिर्फ एक अनुभवी नेता थे, बल्कि वे उन गिने-चुने राजनेताओं में शामिल थे जिन्होंने विरासत के बावजूद अपनी अलग पहचान खुद बनाई। Ajit Pawar Death News ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
अजित पवार, भारतीय राजनीति के दिग्गज शरद पवार के भतीजे थे, लेकिन उन्होंने कभी अपने चाचा की राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए नहीं किया। उनका जीवन संघर्ष, मेहनत और जमीन से जुड़ी राजनीति की मिसाल रहा। कॉलेज के दिनों में ही उनके पिता का निधन हो गया था, जिसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। पढ़ाई छोड़कर उन्होंने जीवन की चुनौतियों का सामना किया और राजनीति को अपना माध्यम बनाया।
बारामती क्षेत्र से उनका जुड़ाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी था। उस दौर में जब बारामती के किसान गंभीर संकट से जूझ रहे थे, अजित पवार ने किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। उन्होंने किसानों की समस्याओं को अपनी समस्याएं माना और इसी वजह से वे एक सच्चे जननेता के रूप में उभरे। यही कारण है कि Ajit Pawar Death News बारामती ही नहीं, पूरे महाराष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति मानी जा रही है।

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अजित पवार ने वर्ष 1982 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और बारामती विधानसभा क्षेत्र से रिकॉर्ड 7 बार चुनाव जीतकर अपनी मजबूत पकड़ साबित की। 1991 में उन्होंने बारामती लोकसभा सीट से जीत दर्ज की, लेकिन यह सीट उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के लिए छोड़ दी। यह फैसला उनके राजनीतिक चरित्र और पारिवारिक मूल्यों को दर्शाता है।
उनका मंत्री और उपमुख्यमंत्री के तौर पर कार्यकाल बेहद प्रभावशाली रहा। 1991-92 में सुधाकर राव नाइक सरकार में वे कृषि और बिजली राज्य मंत्री रहे। 1992 में शरद पवार के मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें मृदा संरक्षण, बिजली और योजना विभाग की जिम्मेदारी मिली। 1999 में वे सिंचाई मंत्री बने और 2003 में ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में कार्य किया। जल संसाधन मंत्री रहते हुए उन्होंने कई बड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया।
अजित पवार महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक उपमुख्यमंत्री रहने वाले नेता थे। वे कुल छह बार उपमुख्यमंत्री बने और पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे जैसे मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया। उनका मंत्र था—“कम बोलो, ज्यादा काम करो।” यही सोच उन्हें जनता के बीच खास बनाती थी।
आज Ajit Pawar Death News के साथ महाराष्ट्र ने एक कर्मठ, जमीनी और परिणाम देने वाले नेता को खो दिया है। उनकी राजनीति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।

कोर्ट को उड़ाने की धमकी से भागलपुर अलर्ट, एंटी बम स्क्वॉड तैनात

भागलपुर सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, आधिकारिक ई-मेल से भेजा गया संदेश, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट


भागलपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पूरे प्रशासनिक और न्यायिक महकमे में हड़कंप मच गया है। यह धमकी सीधे जजशिप की आधिकारिक ई-मेल आईडी पर भेजी गई, जिसे बेहद गंभीर माना जा रहा है। मामले की सूचना मिलते ही कोर्ट प्रशासन ने पुलिस और जिला प्रशासन को तत्काल अवगत कराते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने की मांग की है।
ई-मेल के जरिए दी गई धमकी, कोर्ट प्रशासन सतर्क
बुधवार (28 जनवरी) को सिविल कोर्ट भागलपुर के प्रशासनिक प्रभारी ने जिलाधिकारी (DM), वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) भागलपुर और एसपी नवगछिया को लिखित रूप से जानकारी दी। पत्र में स्पष्ट किया गया कि भागलपुर सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी ई-मेल के माध्यम से दी गई है और इसे अत्यंत संवेदनशील मामला मानते हुए तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।
एंटी बम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड की मांग
कोर्ट प्रशासन ने पत्र में मांग की है कि—एंटी बम स्क्वॉड से पूरे न्यायालय परिसर की गहन जांच कराई जाए।एंटी-सैबोटेज टीम को तैनात किया जाए।स्निफिंग डॉग टीम के जरिए चप्पे-चप्पे की तलाशी ली जाए।कोर्ट परिसर के भीतर और बाहर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती हो।ताकि किसी भी संभावित अनहोनी को समय रहते रोका जा सके।न्यायिक अधिकारियों और बार एसोसिएशन को भी सूचना। इस गंभीर धमकी की जानकारी जज-इन-चार्ज नवगछिया और कहलगांव, जिला बार एसोसिएशन के सचिव सहित अन्य संबंधित न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों को भी दी गई है। अधिवक्ताओं और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

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पुलिस और जांच एजेंसियां अलर्ट मोड में
भागलपुर सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी सामने आते ही पुलिस, खुफिया और जांच एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गई हैं। कोर्ट परिसर के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
साइबर सेल कर रही है ई-मेल की जांच
साइबर सेल की विशेष टीम धमकी भरे ई-मेल की तकनीकी जांच में जुट गई है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि—
ई-मेल किस लोकेशन से भेजा गया।किस सर्वर और आईपी एड्रेस का इस्तेमाल हुआ।मेल भेजने वाले की पहचान क्या है। प्राथमिक जांच में यह भी देखा जा रहा है कि यह किसी शरारती तत्व की हरकत है या इसके पीछे कोई संगठित साजिश।
कोर्ट परिसर में बढ़ाई गई सुरक्षा
एहतियातन कोर्ट परिसर में प्रवेश करने वालों की सघन जांच शुरू कर दी गई है। वाहनों की चेकिंग, आईडी वेरिफिकेशन और सुरक्षा गेट्स पर अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
प्रशासन ने साफ किया है कि न्यायिक संस्थानों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। धमकी देने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान कर उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक अनदेखी से बेलभरियां में जल निकासी ठप, बढ़ा बीमारियों का खतरा

🔴 बेलभरियां में प्रशासनिक लापरवाही से बिगड़े हालात, हाईकोर्ट जाने की तैयारी में ग्रामीण


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।सदर तहसील क्षेत्र के मिठौरा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलभरियां में प्रशासनिक उदासीनता के चलते हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। गांव की सार्वजनिक नालियों को पाट दिए जाने और ग्राम सभा की कीमती भूमि पर अवैध कब्जों के कारण जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। नतीजतन घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे गांव में गंदगी, दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बेलभरियां नाली समस्या अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि गंभीर जनस्वास्थ्य संकट बन चुकी है। कई बार तहसील, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इससे अवैध कब्जाधारियों के हौसले और बुलंद हो गए हैं।

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ग्राम सभा भूमि पर अवैध कब्जा बना बड़ी समस्या
शिकायतकर्ता अयोध्या प्रसाद पुत्र स्वर्गीय शुभग ने बताया कि गांव की कई सार्वजनिक नालियां पूरी तरह पाट दी गई हैं। इसके साथ ही खलिहान, बंजर भूमि, खाद गड्ढा, छवर और पोखरी जैसी ग्राम सभा की जमीन पर अवैध कब्जा वर्षों से बना हुआ है। इससे न केवल जल निकासी बाधित हुई है, बल्कि गांव की मूल संरचना भी प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों ने सफाई कर्मियों, ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और एडीओ पंचायत की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के कारण ही अवैध कब्जों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। बेलभरियां प्रशासनिक लापरवाही का यह मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है।

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बरसात में हालात और भयावह
जल जमाव के कारण गांव की सड़कों पर कीचड़, गंदगी और फिसलन बनी रहती है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई ग्रामीणों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।

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हाईकोर्ट जाने का फैसला
लगातार अनदेखी से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब हाईकोर्ट इलाहाबाद में याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। अयोध्या प्रसाद के साथ ममता, गीता, सुनीता, महेश, पिंकी, प्रेम, मुन्नी, जीउत और लल्लन सहित कई ग्रामीण एकजुट होकर इस कानूनी लड़ाई में शामिल हैं। याचिका में जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि जल्द ही नालियों को खुलवाकर ग्राम सभा की भूमि से अवैध कब्जे नहीं हटाए गए, तो यह मामला कानून के रास्ते और भी गंभीर रूप लेगा। बेलभरियां नाली समस्या अब प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल बन चुकी है।

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता: अमेरिका में बढ़ी बेचैनी

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने वाला कदम माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक करार को “मदर ऑफ ऑल डील” नाम दिया गया है। दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था में लगभग 25 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच हुआ यह समझौता भारत के लिए आर्थिक के साथ-साथ भू-राजनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिका के दबाव के बीच बड़ा कदम

यह समझौता ऐसे समय पर हुआ है जब ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाकर दबाव बनाने की कोशिश की थी। ऐसे माहौल में यूरोपीय संघ के साथ भारत का यह करार दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर अपने रणनीतिक विकल्प खुद तय कर रहा है। इस डील के बाद अमेरिका में बेचैनी साफ तौर पर देखी जा रही है।

क्यों ऐतिहासिक है भारत–EU FTA

भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस समझौते पर कई वर्षों से बातचीत चल रही थी। इस डील से—

• भारत को यूरोपीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी

• निर्यात और विदेशी निवेश में बढ़ोतरी होगी

• रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे

• व्यापारिक शुल्क कम होंगे और सप्लाई चेन मजबूत होगी

• टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी में सहयोग बढ़ेगा

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत चीन पर निर्भरता कम कर पाएगा और खुद को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करेगा।

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अमेरिका की नाराजगी, टैरिफ में राहत से इनकार

भारत-EU समझौते के बाद अमेरिका की प्रतिक्रिया सख्त रही है। ट्रंप प्रशासन के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने साफ कहा है कि भारत को अमेरिका की ओर से टैरिफ में फिलहाल कोई राहत नहीं मिलेगी।
फॉक्स बिजनेस को दिए इंटरव्यू में ग्रीर ने कहा कि रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका की चिंताएं अब भी बनी हुई हैं। उन्होंने माना कि भारत ने रूसी तेल की खरीद कुछ हद तक कम की है, लेकिन पूरी तरह इससे अलग होना फिलहाल संभव नहीं है।

रूसी तेल पर बदला अमेरिका का रुख

ग्रीर का यह बयान अमेरिका के पहले के दावों से अलग है। इससे पहले ट्रंप प्रशासन और खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह कह चुके थे कि भारत ने रूस से तेल खरीद लगभग बंद कर दी है।
हाल ही में दावोस इकोनॉमिक फोरम में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया था कि भविष्य में भारत को टैरिफ में राहत मिल सकती है, लेकिन ताजा बयान से साफ है कि अमेरिका फिलहाल दबाव की रणनीति जारी रखना चाहता है।

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पटना में अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती, 81 लोगों को नोटिस

पटना में 5 एकड़ सरकारी जमीन से हटेगा अतिक्रमण, DM के आदेश के बाद बुलडोजर की तैयारी

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)पटना में 5 एकड़ सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की तैयारी पूरी हो चुकी है। जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम के आदेश के बाद सदर अंचल प्रशासन ने इस जमीन पर रह रहे लोगों को नोटिस जारी कर दिया है। प्रशासन के अनुसार, इस जमीन पर 81 लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। सभी कब्जाधारकों को अपने-अपने दस्तावेजों के साथ 5 फरवरी को सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
यह पूरा मामला पटना के बेहद महत्वपूर्ण इलाके से जुड़ा है, जहां सरकारी जमीन पर वर्षों से अतिक्रमण बना हुआ था। अब प्रशासन इसे हटाकर सरकारी योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी में है।

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5 फरवरी को होगी सुनवाई, दस्तावेजों की होगी जांच
सदर अंचलाधिकारी रजनीकांत की ओर से जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि सभी कब्जाधारकों को अपने स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। दस्तावेजों की गहन जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
यदि दस्तावेज संतोषजनक नहीं पाए गए, तो सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया कानूनी दायरे में और पारदर्शिता के साथ की जा रही है।

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गैरमजरुआ आम जमीन को लेकर प्रशासन का स्पष्ट रुख
जिला प्रशासन के मुताबिक, बुद्धा कॉलोनी मोड़ से काली मंदिर तक फैली यह जमीन गैरमजरुआ आम श्रेणी में आती है। इसका अर्थ है कि इस जमीन पर सरकार का पूर्ण अधिकार है और इसका उपयोग सार्वजनिक हित में किया जा सकता है।
प्रशासन का दावा है कि कुछ लोगों ने न केवल अवैध कब्जा किया, बल्कि पक्के मकान तक बना लिए। जमीन की सीमाएं इस प्रकार हैं—
दक्षिण में मंदिरी और बुद्धा कॉलोनी क्षेत्र, उत्तर में अशोक राजपथ, पश्चिम में बुद्धा कॉलोनी रोड, और पूरब में काली मंदिर।

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5 एकड़ सरकारी जमीन पर क्या है सरकार की योजना
सूत्रों के अनुसार, 5 एकड़ सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद यहां वेंडिंग जोन, पार्क या फिर सरकारी भवन के निर्माण की योजना है। सरकार इस जमीन का उपयोग शहरी सुविधा विस्तार और आम जनता की जरूरतों को ध्यान में रखकर करेगी।
प्रशासन ने साफ किया है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई भविष्य में अतिक्रमण रोकने के लिए एक सख्त संदेश भी मानी जा रही है।

जैक इंटर और ICSE परीक्षा पर भारी पड़ा चुनावी शेड्यूल

झारखंड नगर निकाय चुनाव 2026 बनाम बोर्ड परीक्षा: 23 फरवरी को मतदान और जैक इंटर–ICSE परीक्षा से बढ़ी छात्रों की चिंता

✍️ रिपोर्ट: विशेष संवाददाता (राष्ट्र की परम्परा)

रांची झारखंड में नगर निकाय चुनाव 2026 और बोर्ड परीक्षाओं की तारीख एक साथ घोषित होने से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विभाग की चिंता अचानक बढ़ गई है। राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने घोषणा की है कि 23 फरवरी 2026 को राज्य के 48 नगर निकायों में एक ही चरण में मतदान होगा। संयोग नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक टकराव यह है कि इसी दिन जैक इंटर परीक्षा और ICSE 12वीं बोर्ड परीक्षा भी निर्धारित हैं।
यह स्थिति केवल तारीखों का टकराव नहीं, बल्कि ट्रैफिक, सुरक्षा, शिक्षक ड्यूटी और परीक्षा केंद्र प्रबंधन जैसी जमीनी चुनौतियों का बड़ा संकट बनकर उभर रही है।
48 नगर निकायों में एक साथ मतदान, बैलेट पेपर से चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, झारखंड के 09 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायतों में एक साथ मतदान कराया जाएगा।

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मतदान बैलेट पेपर से होगा– NOTA का विकल्प नहीं रहेगा,2 फरवरी 2026 को अधिसूचना जारी होगी,उसी दिन से आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी,चुनाव को शांतिपूर्ण बनाने के लिए राज्यभर में संवेदनशील और अति-संवेदनशील बूथ चिह्नित किए जा रहे हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और सख्त होगी।
23 फरवरी को कौन-कौन सी परीक्षाएं होंगी?
23 फरवरी 2026 झारखंड के शिक्षा कैलेंडर का सबसे व्यस्त दिन बनने जा रहा है।
जैक इंटर (आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स):हिंदी बी (Compulsory Core Language),मातृभाषा की परीक्षा,ICSE 12वीं बोर्ड:केमिस्ट्री परीक्षा (दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक),ICSE 10वीं बोर्ड: रोबोटिक एंड AI बेसिक डेटा इंटरप्रेटर इसका सीधा असर लाखों छात्रों की आवागमन व्यवस्था पर पड़ेगा।

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जहां परीक्षा, वहीं पोलिंग बूथ: दोहरी व्यवस्था का दबाव,जैक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:मैट्रिक परीक्षा: 4,23,861 छात्र
1232 परीक्षा केंद्र
इंटर परीक्षा: 2,12,547 छात्र,757 परीक्षा केंद्र
इनमें से अधिकांश स्कूल और कॉलेज वही हैं जिन्हें चुनाव के दौरान मतदान केंद्र भी बनाया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है—
👉 पहले परीक्षा होगी या मतदान?
👉 एक ही परिसर में दोनों गतिविधियां कैसे संचालित होंगी?
ट्रैफिक और सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती,चुनाव के दिन आमतौर पर:बैरिकेडिंग,वाहन जांच,रूट डायवर्जन,पुलिस गश्त जैसी व्यवस्थाएं लागू रहती हैं। ऐसे हालात में ग्रामीण इलाकों से शहरों में परीक्षा देने आने वाले छात्रों के लिए समय पर केंद्र पहुंचना बड़ी चुनौती बन सकता है। गार्जियन मानते हैं कि मतदान सुबह शुरू होने से दोपहर की परीक्षाओं पर भी असर पड़ सकता है।
शिक्षक ड्यूटी से परीक्षा व्यवस्था पर संकट
चुनावों में परंपरागत रूप से शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी लगाई जाती है।
लेकिन परीक्षा केंद्रों पर भी वही शिक्षक—केंद्र अधीक्षक,वीक्षक,रूम कंट्रोलर,की भूमिका निभाते हैं। ऐसे में एक ही दिन दोनों जिम्मेदारियां निभाना व्यवहारिक रूप से कठिन माना जा रहा है।
अन्य कक्षाओं की परीक्षाएं भी चुनावी माहौल में
चुनावी अवधि में केवल इंटर या ICSE ही नहीं, बल्कि:8वीं की परीक्षा: 24 फरवरी
11वीं की परीक्षा: 25, 26, 27 फरवरी
9वीं की परीक्षा: 28 फरवरी से
पूरे परीक्षा कैलेंडर पर चुनावी असर साफ दिखेगा।
गार्जियन की मांग: छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था
अभिभावकों की प्रमुख मांगें हैं:
परीक्षार्थियों के लिए अलग ट्रैफिक कॉरिडोर
परीक्षा केंद्रों तक विशेष पास/अनुमति
संवेदनशील इलाकों में विशेष वाहन सुविधा
गार्जियन का कहना है कि “चुनाव लोकतंत्र का पर्व है, लेकिन बच्चों का भविष्य उससे भी ज्यादा अहम है।”
🔎 निष्कर्ष
झारखंड नगर निकाय चुनाव 2026 और जैक इंटर–ICSE परीक्षा का एक ही दिन होना प्रशासन के लिए कसौटी है। यदि समय रहते समन्वय नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर लाखों छात्रों पर पड़ सकता है। अब निगाहें राज्य सरकार, निर्वाचन आयोग और शिक्षा विभाग के समन्वित फैसले पर टिकी हैं।

स्कूलों में डिजिटल क्रांति: बिहार शिक्षा बजट का बड़ा ऐलान संभव

बिहार बजट 2026: शिक्षा पर सरकार का बड़ा दांव, बजट में 5% तक बढ़ोतरी तय, उच्च शिक्षा को मिलेगा खास फोकस

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार सरकार इस बार बिहार बजट 2026 में शिक्षा क्षेत्र को सबसे अधिक प्राथमिकता देने जा रही है। आगामी 3 फरवरी को बिहार विधानमंडल में पेश होने वाले बजट में शिक्षा विभाग के लिए 3 से 5 प्रतिशत तक बजट बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार ने शिक्षा पर 72,652.44 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जो पहले तय बजट से कहीं अधिक है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए शिक्षा के लिए 60,964 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, लेकिन बढ़ती जरूरतों को देखते हुए सरकार को अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ी। यह संकेत है कि आने वाले बजट में शिक्षा पर रिकॉर्ड निवेश देखने को मिल सकता है।

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तय बजट से ज्यादा खर्च, बढ़ी जरूरतें बनी वजह
सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा विभाग की बढ़ी हुई आवश्यकताओं के कारण सरकार को करीब 11,688 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े। इसमें शिक्षकों के वेतन, अधोसंरचना सुधार, डिजिटल शिक्षा और नई नियुक्तियों का बड़ा हिस्सा रहा। यही वजह है कि बिहार शिक्षा बजट 2026 में उल्लेखनीय बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है।
उच्च शिक्षा बजट में ऐतिहासिक उछाल की तैयारी
इस बार बिहार सरकार शिक्षा के लिए दो अलग-अलग बजट ढांचे पर काम कर रही है—एक स्कूली शिक्षा और दूसरा उच्च शिक्षा के लिए। जानकारों की मानें तो उच्च शिक्षा बजट में दो गुना तक बढ़ोतरी संभव है।
फिलहाल शिक्षा बजट में उच्च शिक्षा की हिस्सेदारी लगभग 5,000 करोड़ रुपये है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा विश्वविद्यालय कर्मियों के वेतन पर खर्च होता है। आगामी वर्ष में नई भर्तियों, विश्वविद्यालयों के आधुनिकीकरण और शोध सुविधाओं के विस्तार के चलते उच्च शिक्षा का बजट तेजी से बढ़ सकता है।

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स्कूली शिक्षा में तकनीक और डिजिटल सुविधाओं पर जोर
जहां तक स्कूली शिक्षा बजट की बात है, सरकार बच्चों को आधुनिक और तकनीकी सुविधाएं देने की योजना पर काम कर रही है। स्मार्ट क्लास, डिजिटल कंटेंट, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसी कारण स्कूली शिक्षा के बजट में कम से कम 5% की बढ़ोतरी प्रस्तावित है।
साल 2025 में शिक्षा पर कुल 72,652.44 करोड़ रुपये के खर्च में से लगभग 5,000 करोड़ रुपये उच्च शिक्षा पर और शेष राशि स्कूली शिक्षा पर खर्च की गई थी।

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शिक्षा बजट से बदलेगी बिहार की तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार शिक्षा बजट 2026 राज्य की शैक्षणिक गुणवत्ता, रोजगारपरक शिक्षा और डिजिटल लर्निंग को नई दिशा देगा। इससे न केवल छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे, बल्कि बिहार का शैक्षणिक ढांचा भी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगा।

बारामती में विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत 5 लोगों की मौत

बारामती में निजी विमान हादसा: इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान क्रैश, जांच के आदेश

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार सुबह एक निजी विमान हादसा सामने आया, जब मुंबई से आ रहा एक लाइट जेट विमान इमरजेंसी लैंडिंग के प्रयास के दौरान रनवे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के बाद विमान में आग लग गई, जिससे वह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान में सवार सभी लोगों को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
प्राप्त विवरण के मुताबिक, दुर्घटनाग्रस्त विमान Learjet 45 श्रेणी का था, जो मुंबई से उड़ान भरकर बारामती एयरपोर्ट की ओर बढ़ रहा था। लैंडिंग के समय विमान का संतुलन बिगड़ गया और वह रनवे से फिसलकर क्रैश-लैंड हो गया। हादसे के तुरंत बाद फायर ब्रिगेड और आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाया।

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हादसे के संभावित कारण
उड्डयन विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीकी खराबी, रनवे की स्थिति, या मौसम संबंधी कारक इस निजी विमान हादसे के संभावित कारण हो सकते हैं। हालांकि, वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
जांच के आदेश
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने मामले की औपचारिक जांच के संकेत दिए हैं। जांच में विमान की मेंटेनेंस हिस्ट्री, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, पायलट इनपुट्स और एयरपोर्ट ऑपरेशंस की समीक्षा की जाएगी। स्थानीय प्रशासन ने भी सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच शुरू कर दी है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
घटना के बाद क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है। नागरिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने विमानन सुरक्षा मानकों को और सख्त करने की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी निजी विमान हादसा को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिल रही है।

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आगे की कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक आधिकारिक बयान का इंतजार किया जाए। एयरपोर्ट पर सुरक्षा उपायों को अस्थायी रूप से बढ़ाया गया है और उड़ान संचालन की समीक्षा की जा रही है।

मोबाइल, व्हाट्सएप और CCTV से खुलेगा NEET छात्रा मौत का राज

जहानाबाद की NEET छात्रा की संदिग्ध मौत: SIT जांच तेज, मोबाइल-CCTV से खुलेगा पूरा सच

जहानाबाद (राष्ट्र की परम्परा )जहानाबाद की रहने वाली और पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत ने बिहार के प्रशासनिक और पुलिस सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। नये तथ्यों के सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने इस मामले को हाई प्रोफाइल जांच घोषित कर दिया है। डीजीपी के स्पष्ट निर्देश हैं कि विधानसभा सत्र से पहले पूरे केस की परतें खोली जाएं और किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई हो।
पुलिस मुख्यालय के दबाव के बीच अब यह मामला केवल एक संदिग्ध मौत नहीं, बल्कि संभावित आपराधिक साजिश की जांच बन चुका है। इसी क्रम में मुख्यालय ने SIT से करीब 40 अहम सवालों के जवाब मांगे हैं, जो हॉस्टल, हॉस्पिटल, परिवार और स्थानीय पुलिस की भूमिका पर केंद्रित हैं।

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मुख्यालय की बैठक के बाद तेज हुई जांच
मंगलवार को एडीजी CID पारसनाथ और एडीजी मुख्यालय सुनील कुमार के बीच लंबी उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें तय किया गया कि सिटी एसपी के नेतृत्व में बनी SIT के सभी सदस्यों को अलग-अलग स्पेशल टास्क दिए जाएंगे। पुलिस मुख्यालय ने कुल 59 बिंदुओं पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें से 40 से अधिक सवालों के जवाब आईजी सेंट्रल और एसएसपी पटना से मांगे गए हैं।

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मोबाइल और डिजिटल ट्रांजेक्शन बने जांच की धुरी
अब NEET छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में सबसे अहम कड़ी पीड़िता का मोबाइल फोन बन गया है। पुलिस छात्रा के मोबाइल से जुड़े डिजिटल फुटप्रिंट, ऑनलाइन पेमेंट ऐप्स और बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच कर रही है। यह जानने की कोशिश हो रही है कि पैसे का लेन-देन कब, कहां और किन परिस्थितियों में हुआ। जांच एजेंसियों का मानना है कि यही ट्रांजेक्शन छात्रा के अंतिम दिनों की सच्चाई उजागर कर सकते हैं।
व्हाट्सएप मैसेज से बढ़ा रहस्य
हॉस्पिटल के एक डॉक्टर के बयान ने जांच को नया मोड़ दे दिया है। डॉक्टर के अनुसार छात्रा के मोबाइल से एक व्हाट्सएप मैसेज भेजा गया था, जिसमें कहा गया था कि परिवार केस दर्ज नहीं कराना चाहता। सवाल यह है कि यह मैसेज किसने और किन हालात में भेजा। क्या यह छात्रा ने स्वयं लिखा या किसी और ने? यह पहलू अब SIT की प्राथमिक जांच सूची में शामिल है।

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CCTV फुटेज की होगी FSL जांच
जिस CCTV फुटेज के आधार पर दावा किया गया था कि घटना के दिन छात्रा के कमरे में कोई नहीं गया, उसे अब FSL जांच के लिए भेजने की तैयारी है। पुलिस को आशंका है कि फुटेज से छेड़छाड़ या सबूतों के नष्ट होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। घटनास्थल पर फॉरेंसिक साक्ष्य सुरक्षित थे या नहीं, यह भी जांच का अहम हिस्सा है।
पुलिस की भूमिका भी कटघरे में
इस मामले में स्थानीय थाना से लेकर अनुमंडल स्तर तक की पुलिस की भूमिका की जांच होगी। शुरुआती जांच में लापरवाही, रिकॉर्ड में गड़बड़ी या साक्ष्य सुरक्षित न रखने जैसे बिंदुओं पर जवाबदेही तय की जाएगी।

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SIT अब तक पटना और जहानाबाद में चार लोगों से पूछताछ कर चुकी है। हालांकि उन्हें फिलहाल घर जाने दिया गया है, लेकिन उनके बयानों का मिलान डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों से किया जा रहा है।
स्पष्ट है कि जहानाबाद की NEET छात्रा की संदिग्ध मौत अब एक बड़े सच की ओर बढ़ रही है, जहां हर कड़ी जोड़कर न्याय तक पहुंचने की कोशिश जारी है।

महराजगंज: मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान महिला बीएलओ से मारपीट, सरकारी कागजात फाड़े

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। लोकतंत्र की आधारशिला माने जाने वाले मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य के दौरान महिला सरकारी कर्मचारी के साथ हुई हिंसा ने प्रशासन और समाज दोनों को झकझोर कर रख दिया है। थाना कोतवाली ठूठीबारी क्षेत्र के ग्राम ठूठीबारी टोला धर्मौली में महिला बीएलओ और आंगनवाड़ी कार्यकत्री के साथ सरेआम मारपीट, अभद्रता और सरकारी कार्य में बाधा डालने का गंभीर मामला सामने आया है।

पीड़िता मंजू यादव उर्फ मंजू देवी, पुत्री जगदीश, बीएलओ (भाग संख्या-8) के पद पर कार्यरत हैं। 27 जनवरी को वह अपने घर पर मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य कर रही थीं। इसी दौरान गांव निवासी कृष्णा पुत्र स्व. प्रेमलाल अपनी पत्नी लक्ष्मी का नाम मतदाता सूची में जुड़वाने से संबंधित जानकारी लेने पहुंचा।

नियमों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज—मायके की मतदाता सूची और परिवार रजिस्टर की प्रमाणित प्रति—मांगे जाने पर आरोपी ने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। इसके बाद पीड़िता द्वारा नियमानुसार नोटिस जारी किया गया, जिससे आरोपी आक्रोशित हो गया।

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आरोप है कि कृष्णा ने अपने भाई इंद्र कमल को बुलाकर पीड़िता से गाली-गलौज की, सरकारी कागजात छीनकर फाड़ दिए और बाल पकड़कर घर से बाहर खींचते हुए सड़क पर पटक दिया। इस दौरान लात-घूंसे मारे गए और कपड़े खींचकर अभद्रता की गई।

बीच-बचाव करने पहुंचे पीड़िता के वृद्ध पिता के साथ भी मारपीट की गई और उन्हें नाली में धक्का दे दिया गया। हमले में महिला बीएलओ को सिर, छाती, पीठ, कमर और जांघ समेत कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं।
घटना के बाद आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए। पीड़िता की तहरीर पर थाना ठूठीबारी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह घटना न केवल महिला सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बढ़ती हिंसा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।

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