Thursday, May 14, 2026
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बलिया दवा मंडी समस्याएं: धर्मेन्द्र सिंह ने दिया समाधान का भरोसा

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। बलिया की दवा मंडी में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को लेकर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों और व्यापारियों की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के अनुज धर्मेन्द्र सिंह ने शिरकत की और व्यापारियों को समस्याओं के शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया।

बैठक के दौरान दवा व्यापारियों ने बदहाल सड़कों, जलभराव, सार्वजनिक शौचालय की कमी, साफ-सफाई, नाली व्यवस्था और यातायात अव्यवस्था जैसी प्रमुख समस्याएं रखीं। व्यापारियों ने बताया कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उन्हें रोजमर्रा के कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे ग्राहक भी परेशान होते हैं।

धर्मेन्द्र सिंह ने व्यापारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि बलिया के समग्र विकास के लिए परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दवा मंडी की जर्जर सड़क और सार्वजनिक शौचालय निर्माण जैसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संबंधित विभागों से समन्वय कर जल्द शुरू कराया जाएगा।

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उन्होंने कहा कि व्यापारी समाज जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और उनकी समस्याओं की अनदेखी नहीं की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाकर दवा मंडी को बेहतर सुविधाओं से लैस किया जाएगा।

बैठक के दौरान धर्मेन्द्र सिंह ने आगामी “बाबू मैनेजर सिंह मैराथन दौड़” कार्यक्रम का भी उल्लेख करते हुए सभी से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ जिले की सकारात्मक पहचान भी बनाते हैं।

बैठक में बड़ी संख्या में दवा व्यापारी मौजूद रहे। अध्यक्षता आनंद सिंह ने की जबकि संचालन बब्बन यादव द्वारा किया गया। व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि जल्द ही प्रशासनिक कार्रवाई से दवा मंडी की समस्याओं का समाधान होगा।

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बलिया आयुर्वेदिक अस्पताल में 6 माह से दवाएं नहीं, मरीज परेशान

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। बलिया जनपद के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में पिछले करीब छह महीनों से आवश्यक आयुर्वेदिक दवाओं का गंभीर अभाव बना हुआ है। इस वजह से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीज आयुर्वेदिक इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन दवा न मिलने के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है।

बुजुर्ग और गरीब मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित

मरीजों के अनुसार वे जोड़ों के दर्द, पेट की बीमारियों, त्वचा रोग और पुरानी समस्याओं के इलाज के लिए नियमित रूप से चिकित्सालय आते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा पर भरोसा रखने वाले बुजुर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं। दवाएं उपलब्ध न होने के कारण कई मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से महंगी आयुर्वेदिक दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

शिकायतों के बावजूद नहीं हुआ समाधान

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दवाओं की कमी को लेकर कई बार संबंधित विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हो सका। चिकित्सालय में तैनात डॉक्टर मरीजों को परामर्श तो दे रहे हैं, लेकिन दवाओं के अभाव में इलाज अधूरा रह जा रहा है।

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इस माह दवा आपूर्ति की उम्मीद

इस संबंध में राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्साधिकारी डॉ. विजय यादव ने बताया कि दवाओं की आपूर्ति उच्च स्तर पर लंबित होने के कारण यह स्थिति बनी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस माह दवाओं की खेप आने की पूरी संभावना है। विभागीय स्तर पर खरीद प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और जल्द ही आवश्यक औषधियां उपलब्ध करा दी जाएंगी।

मरीजों ने की नियमित आपूर्ति की मांग

डॉ. विजय यादव के बयान से मरीजों में उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन उनका कहना है कि जब तक दवाएं वास्तव में चिकित्सालय में उपलब्ध नहीं हो जातीं, तब तक राहत नहीं मिलेगी। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में दवाओं की नियमित और समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क और प्रभावी आयुर्वेदिक उपचार मिल सके।

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CIC का बड़ा फैसला: पत्नी को पति की आय की जानकारी मिलेगी

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने भरण-पोषण और वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में एक अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पत्नी को पति की आय से जुड़ी सामान्य जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता, और इसके लिए गोपनीयता का हवाला नहीं दिया जा सकता।

भरण-पोषण से जुड़ा है महिला का अधिकार

CIC ने कहा कि जब कोई कानूनी पत्नी भरण-पोषण के लिए अपने पति की आय संबंधी जानकारी मांगती है, तो यह केवल निजी जानकारी नहीं रह जाती। यह मामला सीधे तौर पर महिला के जीवन-यापन, न्यायिक अधिकार और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा होता है।
यह आदेश उस मामले में दिया गया, जिसमें एक महिला ने RTI के तहत अपने पति की पिछले पांच वर्षों की आय से जुड़ी जानकारी मांगी थी। महिला का आरोप था कि उसका पति अपनी वास्तविक कमाई छिपाकर भरण-पोषण से बचने की कोशिश कर रहा है।

ITR और निजी दस्तावेज नहीं दिए जाएंगे

हालांकि, आयोग ने यह भी साफ किया कि आयकर रिटर्न (ITR) की कॉपी या अन्य संवेदनशील निजी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे। आयोग के अनुसार, पत्नी को केवल आय से संबंधित सामान्य जानकारी दी जा सकती है, जिससे वह अपने कानूनी अधिकारों की रक्षा कर सके।

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आयकर विभाग की दलील खारिज

इससे पहले आयकर विभाग ने महिला की RTI अर्जी को RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j) के तहत खारिज कर दिया था। विभाग का तर्क था कि यह तीसरे पक्ष की निजी जानकारी है और इसे साझा नहीं किया जा सकता।
लेकिन CIC ने इस दलील को खारिज करते हुए अपील स्वीकार कर ली। आयोग ने कहा कि भरण-पोषण से जुड़े मामलों में पति की आय की जानकारी सार्वजनिक हित से जुड़ी होती है और इसे पूरी तरह गोपनीय नहीं माना जा सकता।

महिलाओं के अधिकारों को मिलेगी मजबूती

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यह फैसला भरण-पोषण मामलों में महिलाओं की स्थिति को मजबूत करेगा। अब पति द्वारा आय छिपाने के मामलों में पत्नी को न्याय पाने में आसानी होगी और अदालतों को भी वास्तविक आर्थिक स्थिति का बेहतर आकलन करने में मदद मिलेगी।

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जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी से जनजीवन अस्त-व्यस्त, डोडा में 60 लोग सुरक्षित निकाले गए, 58 उड़ानें रद्द

जम्मू (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी ने एक बार फिर जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार हो रही बर्फबारी और फिसलन भरी परिस्थितियों के कारण कई अहम सड़कें बंद कर दी गई हैं, वहीं हवाई यातायात भी ठप हो गया है। सबसे बड़ी राहत की खबर डोडा जिले से सामने आई है, जहां सीमा सड़क संगठन (BRO) ने बर्फ में फंसे राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट के 40 जवानों समेत कुल 60 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।
डोडा जिले के भद्रवाह-चतरगला मार्ग पर स्थित चतरगला दर्रा, जो करीब 10,500 फीट की ऊंचाई पर है, भारी बर्फबारी के चलते पूरी तरह बंद हो गया था। यहां पांच से छह फीट तक बर्फ जम गई थी। इस दौरान 20 नागरिक और राष्ट्रीय राइफल्स के 40 जवान हथियारों और जरूरी सामान के साथ फंस गए थे। हालात की गंभीरता को देखते हुए 35 सीमा सड़क कार्य बल (BRTF) की 118 सड़क निर्माण कंपनी (RCC) ने 24 जनवरी को युद्ध स्तर पर बचाव और सड़क बहाली अभियान शुरू किया।

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लगभग 38 किलोमीटर लंबी सड़क को लगातार 40 घंटे चली बर्फबारी के बाद साफ किया गया। कड़ी मेहनत और चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद BRO ने 25 जनवरी की शाम तक मार्ग को आंशिक रूप से खोल दिया, जबकि 26 जनवरी की सुबह तक पूरा बचाव अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस पूरे अभियान में कोई हताहत नहीं हुआ।
🔹 कश्मीर घाटी में भारी बर्फबारी का असर मुगल रोड पर भी देखने को मिल रहा है। BRO पुंछ की 79 RCC द्वारा लगातार बर्फ हटाने का काम किया जा रहा है। फिलहाल पीर की गली के रास्ते पुंछ से कश्मीर और हीरपुर मार्ग से कश्मीर से पुंछ की ओर जाने वाला ट्रैफिक पूरी तरह रोक दिया गया है। फिसलन और खराब मौसम के चलते यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है।

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🔹भारी बर्फबारी के कारण मंगलवार को श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से आने-जाने वाली सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं। अधिकारियों के अनुसार, रनवे को सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही उड़ान संचालन दोबारा शुरू होगा। कुल 58 उड़ानें रद्द की गई हैं, जिनमें 29 आगमन और 29 प्रस्थान उड़ानें शामिल हैं। इससे सैकड़ों पर्यटक प्रभावित हुए हैं, जो सप्ताहांत और गणतंत्र दिवस की छुट्टियां बिताकर वापस लौटने वाले थे।
🔹प्रशासन ने मौसम को देखते हुए लोगों से अनावश्यक यात्रा न करने और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। सड़क बहाली और राहत कार्य लगातार जारी हैं ताकि हालात सामान्य किए जा सकें।

Budget Session 2026: राष्ट्रपति के संबोधन से शुरुआत, रविवार को बजट

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। संसद के Budget Session 2026 की शुरुआत आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधन के साथ हो रही है। यह सत्र कई ऐतिहासिक कारणों से खास माना जा रहा है। देश के संसदीय इतिहास में पहली बार केंद्रीय बजट रविवार के दिन पेश किया जाएगा।

1 फरवरी को बनेगा संसदीय इतिहास

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी (रविवार) को लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी। अब तक परंपरा रही है कि बजट कार्यदिवस में ही प्रस्तुत किया जाता था, लेकिन इस बार रविवार को बजट पेश कर सरकार नया इतिहास रचने जा रही है। सरकार ने 1 फरवरी को औपचारिक रूप से ‘बजट डे’ घोषित किया है।

हलवा सेरेमनी से शुरू हुई बजट प्रक्रिया

बजट से पहले पारंपरिक हलवा सेरेमनी का आयोजन नॉर्थ ब्लॉक में किया गया। इस कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। हलवा सेरेमनी को बजट तैयार करने की गोपनीय प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत माना जाता है। इसके बाद बजट से जुड़े अधिकारी ‘लॉक-इन’ प्रक्रिया में चले जाते हैं।

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दो चरणों में होगा बजट सत्र

बजट सत्र को दो हिस्सों में आयोजित किया जाएगा।

पहला चरण: आज से 13 फरवरी 2026 तक

दूसरा चरण: 9 मार्च से 2 अप्रैल 2026 तक (संभावित)

पहले चरण के बाद सत्र को अस्थायी रूप से स्थगित किया जाएगा, जिसके दौरान संसदीय समितियां बजट प्रस्तावों की विस्तार से समीक्षा करेंगी।

लंबित विधेयकों पर भी रहेगी नजर

लोकसभा में फिलहाल नौ अहम विधेयक लंबित हैं। इनमें विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025, सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड 2025 और संविधान संशोधन विधेयक 2024 जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं। बजट सत्र के दौरान इन विधेयकों पर भी चर्चा और निर्णय की संभावना है।

वैश्विक दबाव के बीच पेश होगा बजट

यह बजट ऐसे समय में आ रहा है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। अमेरिका की टैरिफ नीतियों, भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की अनिश्चितता का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऐसे में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार का आर्थिक रोडमैप बेहद अहम माना जा रहा है।

महंगाई नियंत्रण, रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे में निवेश और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से निपटने को लेकर इस बजट से बड़े फैसलों की उम्मीद की जा रही है। राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से यह बजट सरकार के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

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मदर ऑफ ऑल डील: भारत की आर्थिक कूटनीति का ऐतिहासिक मोड़

भारत और यूरोपीय संघ के बीच संपन्न ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ महाडील केवल एक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) नहीं है, बल्कि यह 21वीं सदी की बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की रणनीतिक सोच, आर्थिक आत्मविश्वास और परिपक्व कूटनीति का स्पष्ट प्रमाण है। प्रधानमंत्री द्वारा इसे “मदर ऑफ ऑल डील” कहा जाना इसके दूरगामी प्रभाव और वैश्विक महत्व को रेखांकित करता है।
27 जनवरी को आयोजित 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में मुक्त व्यापार समझौते की औपचारिक घोषणा के साथ-साथ सुरक्षा और रक्षा सहयोग से जुड़े अहम समझौतों पर सहमति बनी। इससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत और यूरोपीय संघ अब केवल व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोगी के रूप में आगे बढ़ रहे हैं।

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बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत-ईयू महाडील का महत्व
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की अस्थिरता, आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन और बढ़ते संरक्षणवाद से प्रभावित है। ऐसे समय में भारत-यूरोपीय संघ महाडील एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में उभरती है, जो बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण के लिए भी नई संभावनाएँ खोलती है।
प्रधानमंत्री द्वारा यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की उपस्थिति में इस डील की घोषणा भारत की आर्थिक कूटनीति में आए आत्मविश्वासपूर्ण परिवर्तन को दर्शाती है। अधिकारियों के अनुसार कानूनी प्रक्रियाओं के बाद लगभग छह महीनों में एफटीए पर हस्ताक्षर होंगे और अगले वर्ष इसके लागू होने की संभावना है।
दशकों की वार्ता के बाद साकार हुआ ऐतिहासिक समझौता
भारत-ईयू एफटीए वर्षों की जटिल बातचीत का परिणाम है। टैरिफ, पर्यावरणीय मानक, श्रम कानून और नियमों को लेकर लंबे समय तक मतभेद बने रहे। लेकिन भारत की बढ़ती आर्थिक क्षमता और वैश्विक भूमिका ने यूरोप को यह स्वीकार करने पर मजबूर किया कि भारत केवल एक उभरता बाजार नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार है।
भारत के लिए यह समझौता इसलिए अहम है क्योंकि इससे उसे उच्च-मूल्य वाले यूरोपीय बाजारों तक बेहतर पहुँच मिलेगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में उसकी भूमिका और मजबूत होगी।
सुरक्षा और रक्षा सहयोग: रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय
भारत-यूरोपीय संघ महाडील का दूसरा अहम पक्ष सुरक्षा और रक्षा सहयोग है। दोनों पक्ष रक्षा ढांचा समझौते, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी प्रयासों और रक्षा प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने के लिए सहमत हुए हैं।

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यूरोप, जो अमेरिका और चीन पर निर्भरता कम करना चाहता है, उसके लिए भारत एक विश्वसनीय लोकतांत्रिक भागीदार के रूप में उभरा है। वहीं भारत को इस साझेदारी से उन्नत तकनीक, निवेश और वैश्विक मंच पर प्रभावशाली भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।
प्रधानमंत्री की छह प्रमुख बातें: महाडील की आत्मा
प्रधानमंत्री द्वारा कही गई छह प्रमुख बातें इस समझौते की गहराई को स्पष्ट करती हैं—
साझा समृद्धि का ब्लूप्रिंट – यह केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि दीर्घकालिक विकास का आधार है।
भारत का सबसे बड़ा FTA – यूरोपीय संघ के साथ समझौता भारत को वैश्विक व्यापार मानचित्र में नई ऊँचाई पर ले जाता है।
किसानों और MSME को लाभ – भारतीय कृषि और लघु उद्योगों को यूरोपीय बाजारों तक सीधी पहुँच मिलेगी।
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को बढ़ावा – ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलेगा।
तीसरे देशों में संयुक्त परियोजनाएँ – इंडो-पैसिफिक से कैरेबियन तक त्रिपक्षीय सहयोग का विस्तार।
बहुपक्षवाद और वैश्विक संस्थानों में सुधार – संयुक्त राष्ट्र और WTO जैसे मंचों में सुधार की साझा प्रतिबद्धता।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की नई भूमिका
यह महाडील टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम कर भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगी। तकनीक, पूंजी और बाजार की जरूरत वाले क्षेत्रों में यह समझौता मील का पत्थर साबित हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत-यूरोपीय संघ महाडील भारत को अमेरिका-चीन के बीच एक संतुलनकारी और नियम-आधारित शक्ति के रूप में स्थापित करती है।

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निष्कर्ष
समग्र रूप से देखें तो भारत-यूरोपीय संघ महाडील 21वीं सदी की बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की रणनीतिक छलांग है। यह समझौता भारत को केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक वैश्विक नीति-निर्माता के रूप में स्थापित करता है। आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव व्यापार, कूटनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन—तीनों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। यही कारण है कि इसे “मदर ऑफ ऑल डील” कहना पूरी तरह सार्थक है।

संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

लूट का खुलासा, भदसामानोपुर रेलवे क्रासिंग से बदमाश दबोचे गए

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद मऊ में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना कोपागंज क्षेत्र के भदसामानोपुर रेलवे क्रासिंग के पास पुलिस ने दो शातिर व इनामी बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जो 13 जनवरी 2026 को सर्राफा व्यापारी से हुई लूट की घटना में वांछित चल रहे थे। दोनों अभियुक्तों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
पुलिस अधीक्षक मऊ के निर्देश पर, अपर पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी घोसी के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक रविन्द्रनाथ राय अपनी टीम के साथ काछीकला अंडरपास के पास संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि सर्राफा लूटकांड में वांछित बदमाश भदसामानोपुर रेलवे क्रासिंग के पास मोटरसाइकिल के साथ खड़े होकर किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में हैं।

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सूचना की पुष्टि होते ही पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रेलवे क्रासिंग से पहले ही घेराबंदी कर दोनों बदमाशों को मौके से दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विशाल कुमार पुत्र राजू राम, निवासी सुरहूरपुर (भुजही मोड़), थाना मोहम्मदाबाद गोहना तथा शिवम सोनकर पुत्र महेन्द्र सोनकर, निवासी हलीमाबाद, थाना मोहम्मदाबाद गोहना, जनपद मऊ के रूप में हुई है।
तलाशी के दौरान विशाल कुमार के कब्जे से एक तमंचा 315 बोर, एक जिंदा कारतूस, 700 रुपये नकद, दो सफेद धातु की पायल और रियलमी कंपनी का मोबाइल फोन बरामद किया गया। वहीं, शिवम सोनकर के पास से दो सफेद धातु की पायल, 500 रुपये नकद और सैमसंग कंपनी का मोबाइल फोन बरामद हुआ।

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कड़ाई से पूछताछ में विशाल कुमार ने स्वीकार किया कि 13 जनवरी 2026 को उसने अपने साथी शिवम सोनकर और अन्य बदमाशों के साथ मिलकर टड़ियांव क्षेत्र में खाद गोदाम के पास हाईवे पर एक सर्राफा व्यापारी को तमंचा दिखाकर जेवरात और नकदी लूटी थी। पुलिस के अनुसार बरामद जेवरात और नकदी उसी लूट की घटना से संबंधित हैं।

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गिरफ्तारी और बरामदगी के आधार पर थाना कोपागंज में मु0अ0सं0-37/2026, धारा 3/25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अभियुक्त विशाल कुमार के खिलाफ पहले से भी गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। दोनों आरोपियों को बरामद माल सहित माननीय न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया गया है।
पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में अपराधियों में हड़कंप मच गया है और आम जनता ने पुलिस की तत्परता की सराहना की है।

शंकराचार्य प्रकरण पर सरकार से सार्वजनिक माफी की उठी मांग

शंकराचार्य अपमान व बटुकों पर पुलिस अत्याचार के विरोध में मऊ में हुआ बुद्धि-शुद्धि यज्ञ, सरकार से माफी की मांग

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य जी के कथित अपमान और बटुकों पर पुलिस द्वारा किए गए अत्याचार के विरोध में मंगलवार को जनपद मऊ के कोपागंज स्थित ऐतिहासिक गौरीशंकर मंदिर परिसर में बुद्धि-शुद्धि यज्ञ का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला कांग्रेस कमेटी मऊ के पूर्व महासचिव गौरव कुमार राय के आह्वान पर आयोजित हुआ, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार की सद्बुद्धि की कामना की गई।

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कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ संपन्न कराया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, धार्मिक आस्थावान और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि शंकराचार्य जैसे सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु के साथ हुआ व्यवहार निंदनीय है और इससे पूरे हिंदू समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
सत्ता के अहंकार में धर्मगुरुओं का अपमान: गौरव कुमार राय
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गौरव कुमार राय ने कहा कि योगी सरकार सत्ता के अहंकार में सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु का अपमान कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि माघ मेल में बटुकों के साथ जिस प्रकार का दुर्व्यवहार किया गया, वह सरकार की धर्म-विरोधी मानसिकता को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि इस घटना से देशभर के सनातन धर्मावलंबियों में गहरा आक्रोश है।

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भाजपा केवल वोट की राजनीति करती है: उमाशंकर सिंह
वरिष्ठ कांग्रेस नेता उमाशंकर सिंह ने कहा कि भाजपा हमेशा धर्म की आड़ में राजनीति करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुओं की भावनाओं को भड़काकर सत्ता हासिल करना भाजपा की पुरानी रणनीति रही है, जबकि जमीनी स्तर पर धर्मगुरुओं और धार्मिक परंपराओं का सम्मान नहीं किया जा रहा।
धर्म और ब्राह्मण विरोधी है सरकार: रत्नेश राय
जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष रत्नेश राय ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार का रवैया धर्म और ब्राह्मण समाज के प्रति विरोधपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य जी का अपमान और बटुकों पर पुलिसिया अत्याचार इसका स्पष्ट प्रमाण है।

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सार्वजनिक माफी की मांग
वरिष्ठ कांग्रेस नेता धर्मेंद्र सिंह ने सरकार से शंकराचार्य जी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार सच में सनातन संस्कृति का सम्मान करती है, तो उसे अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए।
कार्यक्रम में युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अबसार अहमद, वीरेंद्र कुशवाहा, छोटेलाल, प्रकाश मौर्य, रोशन विश्वकर्मा, जितेंद्र चौहान, अमित चौहान सहित अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता व स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।

तालिबान का नया कानून: अफगानिस्तान में गुलामी को मिली कानूनी मान्यता

अफगानिस्तान में तालिबान प्रशासन ने अपने नए कानून के जरिए एक बार फिर गुलामी जैसी अमानवीय प्रथा को कानूनी मान्यता दे दी है। तालिबान सरकार द्वारा लागू किए गए नए क्रिमिनल प्रोसीजर कोड फॉर कोर्ट ने देश में न्याय व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस कानून के तहत न सिर्फ मौलवियों को कानूनी कार्रवाई से बाहर रखा गया है, बल्कि समाज को चार अलग-अलग वर्गों में बांट दिया गया है।
तालिबान के सर्वोच्च नेता मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने 58 पन्नों वाले इस नए कानून को मंजूरी दी है। दस्तावेज़ में कई स्थानों पर “गुलाम (Slave)” और “मालिक (Master)” जैसे शब्दों का खुलकर इस्तेमाल किया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें मौलवियों को समाज के शीर्ष पर रखा गया है।

मौलवियों पर नहीं चलेगा केस

नए कानून के अनुसार यदि कोई मौलवी अपराध करता है, तो उसके खिलाफ कोई एफआईआर या मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। मानवाधिकार संगठन रवादारी के मुताबिक, ऐसे मामलों में मौलवियों को केवल ‘सलाह’ दी जाएगी, जबकि आम नागरिकों को कठोर सजा का सामना करना पड़ेगा।

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निचले वर्ग के लिए कठोर दंड

तालिबान प्रशासन ने समाज को चार श्रेणियों — उलेमा, अशराफ, मध्यम वर्ग और निचला वर्ग — में विभाजित किया है। निचले वर्ग और गुलामों के लिए जेल, शारीरिक दंड और सख्त सजाओं का प्रावधान रखा गया है। यह व्यवस्था साफ तौर पर सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा देती है।

हिंसा की नई परिभाषा

लंदन स्थित अफगान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, नए कानून में शारीरिक हिंसा को भी बेहद सीमित रूप में परिभाषित किया गया है। कानून कहता है कि जब तक हड्डी न टूटे या त्वचा न फटे, तब तक उसे हिंसा नहीं माना जाएगा। यहां तक कि पिता को अपने 10 वर्षीय बच्चे को नमाज न पढ़ने पर शारीरिक दंड देने की भी छूट दी गई है।

मानवाधिकार संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया

नेशनल रजिस्टेंस फ्रंट के मीडिया सेल ने कहा है कि तालिबान ने गुलामी को वैध बनाकर अफगान समाज को मध्ययुगीन दौर में धकेल दिया है। अब अदालतें आरोपियों की सामाजिक हैसियत के आधार पर फैसले सुनाएंगी, जो न्याय की मूल भावना के खिलाफ है।

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तेज रफ्तार बनी काल: बैरिया में NH-31 पर फिर मासूम की गई जान

🔴 बैरिया में NH-31 पर दर्दनाक हादसा: पिकअप की टक्कर से 12 वर्षीय बालक की मौत, जाम के बाद हालात सामान्य

बलिया (राष्ट्र की परम्परा) बलिया जनपद के बैरिया थाना क्षेत्र में मंगलवार को NH-31 पर दर्दनाक हादसा हो गया। तेज रफ्तार पिकअप वाहन की टक्कर से 12 वर्षीय बालक की मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना से पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। हादसे के बाद कुछ समय के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर जाम की स्थिति बन गई, जिसे बाद में प्रशासन ने सामान्य कराया।
मृतक की पहचान अंशु राम (12 वर्ष) पुत्र विजय शंकर राम, निवासी बैरिया के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि अंशु खेत में काम करने के बाद शाम के समय घर लौट रहा था। इसी दौरान मठ योगेन्द्र गिरी के पास तेज रफ्तार पिकअप ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बालक सड़क पर दूर जा गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया।

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🚨 अस्पताल ले जाते समय तोड़ा दम
घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने घायल बालक को उठाया और अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। सूचना मिलते ही बैरिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।
पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त पिकअप वाहन को जब्त कर लिया है और चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।

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🚧 NH-31 पर लगा जाम, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
घटना की खबर फैलते ही मृतक के परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए। NH-31 पर जाम लगाकर लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नाराज़गी जताई। ग्रामीणों का कहना था कि इस मार्ग पर तेज रफ्तार वाहन रोज़ हादसों का कारण बन रहे हैं, लेकिन सड़क सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
करीब एक घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना पर पहुंचे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों को समझाया और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद जाम हटाया गया और यातायात सामान्य हो सका।

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😔 गांव में पसरा मातम
NH-31 पर दर्दनाक हादसा के बाद पूरे गांव में मातम छाया हुआ है। मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मार्ग पर स्पीड ब्रेकर, संकेतक और सख्त निगरानी की व्यवस्था की जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।

India-EU FTA: ट्रंप पड़े अलग-थलग, भारत बना नया ग्लोबल ट्रेड हब

EU के बाद ब्राजील और कनाडा भी करेंगे भारत से बड़ी डील

India-EU FTA: दुनिया की आर्थिक और व्यापारिक राजनीति इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों, ऊंचे टैरिफ और अनिश्चित व्यापार रुख ने कई देशों को वैकल्पिक आर्थिक साझेदारों की तलाश के लिए मजबूर कर दिया है। इसी वैश्विक बदलाव के केंद्र में अब भारत एक मजबूत, भरोसेमंद और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदार के रूप में उभर कर सामने आया है।
यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका के कई देश अब पारंपरिक वेस्ट-सेंट्रिक मॉडल से हटकर पश्चिम-पूर्व आर्थिक धुरी की ओर बढ़ रहे हैं, जहां भारत को रणनीतिक संतुलन और स्थिर विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

ब्रिटेन का रुख बदला, चीन और भारत पर नजर

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर का प्रस्तावित चीन दौरा इसी बदलते वैश्विक समीकरण का संकेत है। पिछले आठ वर्षों में यह किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री की पहली चीन यात्रा होगी। इस दौरान स्टारमर राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से मुलाकात करेंगे।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन अब अमेरिका को एक अनिश्चित व्यापारिक साझेदार मान रहा है और अपनी आर्थिक निर्भरता कम करना चाहता है। वर्तमान में चीन ब्रिटेन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और 2025 के मध्य तक दोनों देशों के बीच व्यापार 100 अरब पाउंड के आंकड़े को पार कर चुका है।

कनाडा की रणनीति बदली, भारत बना प्राथमिक साझेदार

अमेरिका का करीबी सहयोगी रहा कनाडा भी अब अपनी विदेश और व्यापार नीति में बड़ा बदलाव कर रहा है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च के पहले सप्ताह में भारत दौरे पर आ सकते हैं।
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी और उसे 51वां अमेरिकी राज्य कहकर विवाद खड़ा किया था। कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद ने साफ कहा है कि कनाडा अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा और अगले 10 वर्षों में अमेरिका के बाहर अपने निर्यात को दोगुना करेगा। इसी रणनीति के तहत भारत को प्रमुख साझेदार बनाया गया है।

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ब्राज़ील और ग्लोबल साउथ में भारत की बढ़ती भूमिका

ग्लोबल साउथ के देशों में भी भारत की अहमियत तेजी से बढ़ रही है। ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा फरवरी में भारत दौरे पर आ रहे हैं। वे एक बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ भारतीय उद्योगपतियों से बातचीत करेंगे। यह साफ संकेत है कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं भारत को केवल बाजार नहीं, बल्कि रणनीतिक आर्थिक साझेदार मान रही हैं।

India-EU FTA बना गेमचेंजर

26 जनवरी 2026 को हुए भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) ने वैश्विक व्यापार की दिशा ही बदल दी है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” बताया है।

यह समझौता दुनिया की लगभग 25% ग्लोबल GDP और करीब दो अरब लोगों को जोड़ता है। इसके तहत EU भारत को भेजे जाने वाले 97% उत्पादों पर टैरिफ घटाएगा, जबकि भारत भी चरणबद्ध तरीके से 93% यूरोपीय उत्पादों पर टैरिफ हटाएगा। इससे भारतीय टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग और IT सेक्टर को बड़ा फायदा होगा।

अमेरिका की चिंता और भारत की स्पष्ट नीति

इन नए वैश्विक गठबंधनों से अमेरिका असहज नजर आ रहा है, लेकिन भारत ने अपनी नीति स्पष्ट कर दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के शब्दों में, “कोई भी देश यह उम्मीद नहीं कर सकता कि वह भारत के वैश्विक रिश्तों पर वीटो लगाए।” यही स्पष्ट और आत्मनिर्भर नीति आज भारत को वैश्विक आर्थिक बदलाव का केंद्र बना रही है।

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कला, साहित्य और संगीत की अमर स्मृतियां

28 जनवरी का इतिहास: साहित्य, सिनेमा और संगीत जगत की महान विभूतियों का निधन


महत्वपूर्ण इतिहास निधन | 28 जनवरी
इतिहास केवल तिथियों का क्रम नहीं, बल्कि उन महान व्यक्तित्वों की स्मृति है जिन्होंने अपने कर्म, कृतित्व और विचारों से समाज को दिशा दी। 28 जनवरी का इतिहास कई ऐसी विभूतियों के निधन से जुड़ा है, जिनका योगदान साहित्य, सिनेमा, संगीत, राजनीति और पुरातत्त्व के क्षेत्र में अमिट है।
यह लेख 28 जनवरी को हुए महत्वपूर्ण निधन को श्रद्धांजलि स्वरूप प्रस्तुत करता है, ताकि नई पीढ़ी इन महान व्यक्तित्वों के योगदान से परिचित हो सके।

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भारती मुखर्जी (निधन: 28 जनवरी 2017)
भारती मुखर्जी भारतीय मूल की विश्वप्रसिद्ध लेखिका थीं, जिन्होंने अमेरिकी साहित्य में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनका लेखन प्रवासी भारतीयों की पहचान, संघर्ष और आत्मबोध को दर्शाता है।
उनके प्रसिद्ध उपन्यास Jasmine, Wife और Desirable Daughters अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहे गए। 28 जनवरी का इतिहास साहित्य जगत में उनके अविस्मरणीय योगदान के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है।
सोहराब मोदी (निधन: 28 जनवरी 1984)
सोहराब मोदी भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम युग के स्तंभ थे। वे अभिनेता, निर्माता और निर्देशक—तीनों रूपों में चर्चित रहे।
उन्होंने ऐतिहासिक और सामाजिक विषयों पर आधारित सशक्त फिल्में बनाईं, जिनमें पुकार, सिकंदर और झांसी की रानी प्रमुख हैं। 28 जनवरी को हुए निधन में सोहराब मोदी का नाम भारतीय फिल्म इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।

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विलियम बटलर यीट्स (निधन: 28 जनवरी 1939)
विलियम बटलर यीट्स आयरलैंड के महान कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता थे। उनकी कविताओं में आध्यात्मिकता, राष्ट्रवाद और मानवीय भावनाओं की गहरी अभिव्यक्ति मिलती है।
उनकी रचनाएं आज भी विश्व साहित्य का अभिन्न हिस्सा हैं। 28 जनवरी का इतिहास अंतरराष्ट्रीय साहित्य में उनके योगदान को स्मरण करता है।
ओ. पी. नैय्यर (निधन: 28 जनवरी 2007)
ओ. पी. नैय्यर हिंदी फिल्म संगीत के ऐसे जादूगर थे, जिन्होंने पारंपरिक धुनों को आधुनिक रंग दिया।
आर-पार, काग़ज़ के फूल और सीआईडी जैसी फिल्मों के गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं। 28 जनवरी को हुए निधन में उनका जाना भारतीय संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जाता है।

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देवकान्त बरुआ (निधन: 28 जनवरी 1996)
देवकान्त बरुआ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और इंदिरा गांधी के निकट सहयोगियों में गिने जाते थे।
राजनीतिक जीवन में उनका योगदान संगठनात्मक मजबूती और अनुशासन के लिए जाना जाता है। 28 जनवरी का इतिहास भारतीय राजनीति में उनके प्रभाव को रेखांकित करता है।
हंसमुख धीरजलाल सांकलिया (निधन: 28 जनवरी 1989)
प्रो. हंसमुख धीरजलाल सांकलिया भारत के अग्रणी पुरातत्त्वविदों में शामिल थे।
भारतीय प्रागैतिहासिक अध्ययन में उनका शोध आज भी संदर्भ ग्रंथ माना जाता है। 28 जनवरी को हुए निधन में उनका स्थान विज्ञान और इतिहास के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
28 जनवरी का ऐतिहासिक महत्व
28 जनवरी का इतिहास यह दर्शाता है कि इस दिन केवल महान व्यक्तियों का निधन ही नहीं हुआ, बल्कि उनके विचार, रचनाएं और योगदान आज भी जीवित हैं।
ऐसे ऐतिहासिक निधन हमें स्मरण कराते हैं कि समाज का विकास इन्हीं महापुरुषों की नींव पर खड़ा है।
निष्कर्ष
28 जनवरी को हुए महत्वपूर्ण निधन भारतीय और वैश्विक इतिहास के ऐसे अध्याय हैं, जो हमें प्रेरणा देते हैं। साहित्य, सिनेमा, संगीत और राजनीति—हर क्षेत्र में इन विभूतियों ने अमिट छाप छोड़ी है।
इनका स्मरण करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।

कटहल नाला का आधुनिक स्वरूप: 18.07 करोड़ की परियोजना का भूमि पूजन

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)l शहर के बीचों-बीच बहने वाला ऐतिहासिक कटहल नाला अब आधुनिक स्वरूप में विकसित होगा। मंगलवार को परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने 18.07 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित कटहल नाला विकास एवं सौंदर्यीकरण परियोजना का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया।
परियोजना के तहत नाले को “जूही चौपाटी” के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे शहर की सुंदरता और पर्यावरणीय संतुलन दोनों को मजबूती मिलेगी। मंत्री ने बताया कि कटहल नाला केवल जल निकासी का माध्यम नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक धरोहर भी है। यह नाला एशिया के प्रसिद्ध सुरहा ताल से जुड़ा है और बाढ़ के समय अतिरिक्त पानी निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
लगभग 5 किलोमीटर लंबा यह नाला शहर के घनी आबादी वाले हिस्सों से होकर गुजरता है। वर्षों से गंदगी और अतिक्रमण के कारण इसकी स्थिति खराब हो गई थी। मंत्री ने कहा कि विकास की शुरुआत वहीं से होगी, जहां सबसे अधिक गंदगी है।
परियोजना के अंतर्गत प्रबंधापुर पुल से रामपुर महावल बैराज तक लगभग 2 किलोमीटर क्षेत्र में कार्य होंगे। नाले के दोनों किनारों पर बोल्डर पिचिंग और जियो-सेल मेम्ब्रेन सिस्टम लगाया जाएगा। इसके अलावा सरफेस पार्किंग, लैंडस्केपिंग, हॉर्टिकल्चर, आकर्षक फसाद निर्माण, सुरक्षा बैरियर, सोलर लाइटिंग और मायावकी फॉरेस्ट विकसित किया जाएगा। यह क्षेत्र पर्यावरण संरक्षण और आमजन के घूमने-फिरने का नया केंद्र बनेगा।
कार्य को यूपी जल निगम (नगरीय) की इकाई कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएनडीएस), आजमगढ़ द्वारा कराया जाएगा। परियोजना के पूरा होने से शहर में जलभराव की समस्या में राहत मिलेगी और बरसात के दौरान जल निकासी बेहतर होगी।
मंत्री ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि नाले के सौंदर्यीकरण के लिए लगभग 19 करोड़ रुपये और सफाई कार्य हेतु सिंचाई विभाग द्वारा 2 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। भूमि पूजन कार्यक्रम में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह, जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा, पूर्व मंत्री नारद राय सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। यह परियोजना बलिया शहर को स्वच्छ, सुंदर और आधुनिक पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

28 जनवरी से जुड़ा स्वर्णिम इतिहास

🔶 महत्वपूर्ण इतिहास जन्म
28 जनवरी को जन्मे व्यक्ति भारतीय और विश्व इतिहास में विशेष स्थान रखते हैं। यह तिथि स्वतंत्रता संग्राम, राजनीति, साहित्य, विज्ञान, संगीत, खेल और रक्षा क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ने वाले महान व्यक्तित्वों की जन्मतिथि रही है। 28 जनवरी का इतिहास हमें यह बताता है कि एक ही दिन में जन्मे लोग कैसे अलग-अलग क्षेत्रों में असाधारण योगदान देकर समाज और राष्ट्र को दिशा दे सकते हैं।

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🔹 लाला लाजपत राय (1865)
28 जनवरी को जन्मे महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय को “पंजाब केसरी” कहा जाता है। वे भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के अग्रणी नेता थे। स्वदेशी आंदोलन, साइमन कमीशन विरोध और राष्ट्रवादी चेतना को जन-जन तक पहुंचाने में उनका योगदान अविस्मरणीय है। 28 जनवरी को जन्मे व्यक्ति जब देशभक्ति की बात करते हैं, तो लाला लाजपत राय का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाता है।
🔹 के.एम. करियप्पा (1899)
फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा भारत के प्रथम भारतीय कमांडर-इन-चीफ थे। 28 जनवरी को जन्मे इस महान सैन्य अधिकारी ने भारतीय सेना को एक नई पहचान दी। वे अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा के प्रतीक माने जाते हैं। उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है।

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🔹 के.एस. करियप्पा (1909)
भारतीय सेना के प्रथम भारतीय सेनाध्यक्ष के.एस. करियप्पा का जन्म भी 28 जनवरी को हुआ। उन्होंने आज़ादी के बाद भारतीय सेना के पुनर्गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 28 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तियों में उनका योगदान रक्षा इतिहास में मील का पत्थर है।
🔹 राजा रमन्ना (1925)
भारत के परमाणु कार्यक्रम को गति देने वाले राजा रमन्ना 28 जनवरी को जन्मे थे। पोखरण परमाणु परीक्षण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। विज्ञान और राष्ट्र सुरक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान भारत को वैश्विक शक्ति बनाने की दिशा में निर्णायक रहा।

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🔹 विद्यानिवास मिश्र (1926)
विद्यानिवास मिश्र हिन्दी साहित्य के प्रमुख स्तंभ थे। वे संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान, आलोचक और भाषाविद थे। 28 जनवरी को जन्मे इस साहित्यकार ने भारतीय भाषाओं को बौद्धिक ऊंचाई दी।
🔹 पंडित जसराज (1930)
भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने वाले पंडित जसराज 28 जनवरी को जन्मे। मेवाती घराने के इस महान गायक ने संगीत को साधना का रूप दिया। 28 जनवरी को जन्मे व्यक्ति जब कला की बात करते हैं, तो पंडित जसराज का नाम श्रद्धा से लिया जाता है।
🔹 सुमन कल्याणपुर (1937)
सुमधुर आवाज़ की धनी सुमन कल्याणपुर हिन्दी सिनेमा की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका थीं। 28 जनवरी को जन्मी इस गायिका ने हजारों गीतों के माध्यम से भारतीय संगीत को समृद्ध किया।

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🔹 प्रतापसिंह राणे (1939)
गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री प्रतापसिंह राणे 28 जनवरी को जन्मे। उन्होंने गोवा की राजनीति में स्थिरता और विकास को प्राथमिकता दी। वे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल हैं।
🔹 भगवत दयाल शर्मा (1918)
हरियाणा के प्रथम मुख्यमंत्री भगवत दयाल शर्मा भी 28 जनवरी को जन्मे। उन्होंने प्रशासनिक और सामाजिक सुधारों में अहम भूमिका निभाई तथा उड़ीसा और मध्य प्रदेश के राज्यपाल भी रहे।
🔹 राजेन्द्र शाह (1913)
प्रसिद्ध गुजराती साहित्यकार राजेन्द्र शाह को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 28 जनवरी को जन्मे इस लेखक ने गुजराती साहित्य को नई ऊंचाइयां दीं।

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🔹 बसवराज बोम्मई (1960)
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई 28 जनवरी को जन्मे। वे प्रशासनिक दक्षता और विकास योजनाओं के लिए जाने जाते हैं। आधुनिक राजनीति में उनका योगदान उल्लेखनीय है।
🔹 शेफाली वर्मा (2004)
भारतीय महिला क्रिकेट की चमकती सितारा शेफाली वर्मा 28 जनवरी को जन्मी हैं। कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रिकॉर्ड बनाने वाली शेफाली नई पीढ़ी की प्रेरणा हैं।
🔹 निकोलस सरकोज़ी (1955)
फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोज़ी भी 28 जनवरी को जन्मे। उन्होंने यूरोपीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रभाव छोड़ा।

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🔶 निष्कर्ष
28 जनवरी को जन्मे महान व्यक्ति यह सिद्ध करते हैं कि प्रतिभा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं होती। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर संगीत, विज्ञान, राजनीति और खेल तक, इस दिन जन्मे लोगों ने इतिहास रचा है। 28 जनवरी का इतिहास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा, आत्मविश्वास और राष्ट्रनिर्माण का संदेश देता है।

28 जनवरी की महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएँ

इतिहास केवल बीते समय की घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य को दिशा देने वाला दर्पण होता है। 28 जनवरी का इतिहास विश्व और भारत दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इस दिन राजनीति, विज्ञान, साहित्य, सैन्य, खेल और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़ी अनेक ऐतिहासिक घटनाएँ घटित हुईं, जिन्होंने वैश्विक परिदृश्य को नई दिशा दी।

28 जनवरी का इतिहास: कालक्रम अनुसार

प्रमुख घटनाएँ
मुग़ल काल और औपनिवेशिक युग
1556 में मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक हुमायूँ की मृत्यु हुई। उनके निधन के बाद अकबर के शासन का मार्ग प्रशस्त हुआ, जिसने भारत के इतिहास को एक नई दिशा दी।
1813 में इंग्लैंड में प्रसिद्ध उपन्यास प्राइड एंड प्रेजुडिस का प्रथम प्रकाशन हुआ। यह कृति आज भी विश्व साहित्य की अमूल्य धरोहर मानी जाती है।

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1835 में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई, जो एशिया का पहला आधुनिक मेडिकल कॉलेज था। इससे भारत में आधुनिक चिकित्सा शिक्षा की नींव पड़ी।
वैश्विक राजनीति और साम्राज्यवादी निर्णय
1860 में ब्रिटेन ने निकारागुआ को मास्क्विटो तट औपचारिक रूप से वापस सौंपा। यह उपनिवेशवाद के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटना थी।
1878 में अमेरिका का पहला दैनिक समाचारपत्र येल डेली न्यूज़ प्रकाशित हुआ, जिसने पत्रकारिता के इतिहास में नई शुरुआत की।
इसी वर्ष न्यू हेवन (अमेरिका) में पहला टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित हुआ, जिसने संचार क्रांति की नींव रखी।

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वास्तुकला, स्वतंत्रता और राष्ट्र निर्माण
1887 में पेरिस में एफिल टॉवर के निर्माण की शुरुआत हुई। आज यह फ्रांस की पहचान और विश्व धरोहर है।
1909 में क्यूबा पर से अमेरिका का नियंत्रण समाप्त हुआ। इसी दिन भारत के पहले सेनाध्यक्ष फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा का जन्म हुआ, जिन्होंने भारतीय सेना को नई पहचान दी।
युद्ध, संघर्ष और राजनीतिक विचारधाराएँ
1932 में जापानी सेना ने शंघाई पर कब्ज़ा किया, जो द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि की अहम घटना थी।
1933 में चौधरी रहमत अली ने मुस्लिम बहुल राज्यों के संघ के लिए ‘पाकिस्तान’ नाम का सुझाव दिया, जिसने उपमहाद्वीप की राजनीति को निर्णायक रूप से प्रभावित किया।
1935 में आइसलैंड गर्भपात को कानूनी मान्यता देने वाला दुनिया का पहला देश बना।

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द्वितीय विश्व युद्ध और उसके प्रभाव
1942 में जर्मन सेना ने लीबिया के बेंगाजी पर कब्ज़ा किया।
1943 में एडोल्फ हिटलर ने जर्मनी के सभी युवकों को अनिवार्य सैन्य भर्ती का आदेश दिया।
1945 में बर्मा रोड से पहली बार अमेरिकी ट्रकों का काफिला गुज़रा, जो मित्र राष्ट्रों के लिए रणनीतिक रूप से अहम था।
स्वतंत्र भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियाँ
1950 में न्यायमूर्ति हीरालाल जे. कानिया ने भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाला।
1961 में बेंगलुरु में एचएमटी घड़ियों की पहली फैक्ट्री की आधारशिला रखी गई, जिसने भारत को घड़ी उद्योग में आत्मनिर्भर बनाया।
अंतरिक्ष, विज्ञान और तकनीक
1962 में अमेरिका का अंतरिक्ष यान चंद्रमा तक पहुँचने में असफल रहा।
1986 में अमेरिकी अंतरिक्ष शटल चैलेंजर उड़ान भरने के 73 सेकंड बाद विस्फोट का शिकार हो गया। इस हादसे में सातों अंतरिक्ष यात्रियों की मृत्यु हो गई, जिसने अंतरिक्ष कार्यक्रमों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े किए।
आधुनिक राजनीति और न्यायिक फैसले
1992 में अल्जीरिया में तीन दशक से सत्ता में रही नेशनल लिबरेशन फ्रंट ने इस्तीफा दिया।
1998 में राजीव गांधी हत्याकांड के 26 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया गया।
1999 में भारत में संरक्षित भ्रूण से मेमने का जन्म हुआ, जो जैव प्रौद्योगिकी में बड़ी उपलब्धि थी।
खेल, आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय घटनाएँ
2000 में भारत ने अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप के फाइनल में श्रीलंका को हराकर खिताब जीता।
2002 में झारखंड के गुमला जिले में नक्सली हमले में 11 लोगों की मौत हुई और पाकिस्तान में पत्रकार डेनियल पर्ल का अपहरण हुआ।
2005 में पुर्तगाल की सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम के प्रत्यर्पण को मंज़ूरी दी।

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हालिया वैश्विक घटनाएँ
2006 में एमेली माउरेस्मो ने ऑस्ट्रेलियन ओपन टेनिस का महिला एकल खिताब जीता।
2010 में बांग्लादेश में शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के दोषियों को फांसी दी गई।
2013 में जॉन केरी अमेरिका के विदेश मंत्री बने।
निष्कर्ष – 28 जनवरी का इतिहास हमें यह सिखाता है कि समय के साथ मानव सभ्यता ने संघर्ष, नवाचार और परिवर्तन के माध्यम से निरंतर प्रगति की है। यह दिन राजनीति, विज्ञान, साहित्य और खेल—हर क्षेत्र में यादगार उपलब्धियों का साक्षी रहा है।